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पेपर I · इकाई III · भाग ग

अनुपात विश्लेषण (Ratio Analysis): अर्थ, प्रकार, सूत्र और ABC लिमिटेड का हल

अनुपातों के चार वर्ग, सूत्र, सीमाएँ, ABC लिमिटेड (2024) का पूरा हल और 2018 का प्रश्न हल सहित।

  • चालू अनुपात
  • तरल अनुपात
  • आवर्त
  • ABC लिमिटेड 2024
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग ग: "Financial statement of a company; techniques of analysis of financial statements; cash flow statement; basic knowledge of responsibility and social accounting." उपलब्ध पेपरों में विश्लेषण-तकनीकों में से अनुपात विश्लेषण पर सबसे अधिक (दो) प्रश्न आए हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2018 में पेपर I में 2 अंक का प्रश्न आया था: अनुपात विश्लेषण क्या है। 2024 में 5 अंक का संख्यात्मक प्रश्न आया था: एबीसी लिमिटेड के आँकड़ों से चालू, तरल, प्राप्य आवर्त, स्टॉक आवर्त और सकल लाभ अनुपात निकालना।
  • दोनों प्रश्न अलग क़िस्म के हैं: एक परिभाषा का, एक गणना का। इसलिए सूत्र रटने के साथ यह भी पक्का करें कि हर में कौन-सी मद आती है और माँगे गए अंक में कौन-सी मान्यता लिखनी है।
  • 2016 से 2024 के उपलब्ध पेपरों में लेखांकन खंड के प्रश्न 15 शब्द (2 अंक) और 50 शब्द (5 अंक) में देखे गए हैं; 50 शब्द में पाँच अनुपात निकालने के लिए सूत्र, प्रतिस्थापन और उत्तर तीनों संक्षेप में लिखने का अभ्यास करें।

बात सीधी भाषा में: 450 में से 600 बनाम 75%

किसी परीक्षार्थी के 450 अंक आए, यह जानकारी अधूरी है। 600 में से 450 आए तो 75% बनता है, और तब ही पता चलता है कि अंक अच्छे हैं। वही संख्या दूसरे पेपर के 900 में से आई हो तो 50% रह जाती है। रुपये के आँकड़े अपने आप में कुछ नहीं बताते; दो आँकड़ों का आपसी संबंध ही अर्थ देता है। अनुपात विश्लेषण यही काम वित्तीय विवरणों के साथ करता है।

सटीक परिभाषा: अनुपात (Ratio) दो या अधिक संख्याओं के संबंध से निकली गणितीय संख्या है, जो भिन्न, अनुपात, प्रतिशत या कितनी बार (गुना) के रूप में व्यक्त की जा सकती है। जब ये दो संख्याएँ वित्तीय विवरणों से ली जाएँ, तो वह लेखांकन अनुपात (Accounting Ratio) कहलाता है, और ऐसे अनुपातों के उपयोग से तुलन-पत्र तथा लाभ-हानि विवरण की मदों के संबंध का अध्ययन अनुपात विश्लेषण (Ratio Analysis) है। NCERT का उदाहरण: सकल लाभ ₹10,000 और प्रचालन से राजस्व ₹1,00,000 हो तो सकल लाभ अनुपात 10% है; स्टॉक आवर्त 6 हो तो स्टॉक साल में छह बार बिक्री में बदलता है।

दो बातें हमेशा याद रखें। पहली, अनुपात व्युत्पन्न संख्याएँ हैं: मूल विवरण में गड़बड़ हो तो अनुपात भी ग़लत तस्वीर देगा। दूसरी, अनुपात उन्हीं संख्याओं का बने जिनका आपस में संबंध हो। NCERT का उदाहरण है: फ़र्नीचर ₹1,00,000 और क्रय ₹3,00,000 का अनुपात 3 निकल तो आता है, पर उसका कोई अर्थ नहीं है।

उद्देश्य और लाभ

NCERT के अनुसार अनुपात विश्लेषण पाँच काम करता है: कारोबार के जिन क्षेत्रों पर ध्यान चाहिए उन्हें बताना; सुधार की संभावना वाले क्षेत्र दिखाना; लाभप्रदता, तरलता, शोधन-क्षमता और कुशलता का गहरा विश्लेषण देना; उद्योग के सर्वश्रेष्ठ मानकों से तुलना की सामग्री देना; और भविष्य के अनुमान के लिए आधार देना। पुस्तक का एक अच्छा वाक्य परीक्षा में काम का है: अनुपात साधन हैं, साध्य नहीं; उनकी भूमिका सीटी बजाने वाले (Whistle Blower) की है, यानी वे संकेत देते हैं, समाधान नहीं।

लाभ के रूप में NCERT जटिल आँकड़ों को सरल करना, निर्णयों की कारगरता समझना, कई वर्षों की प्रवृत्ति देखना, समस्या-क्षेत्र पहचानना और SWOT विश्लेषण में मदद लेना गिनाती है। तुलना के तीन आधार हैं: अपनी पिछली अवधियों से (अंतः-फर्म), दूसरे उद्यमों से (अंतर-फर्म), और उस फर्म या उद्योग के मानक से।

वर्गीकरण: दो आधार

NCERT अनुपातों का दो तरह से वर्गीकरण बताती है। पहला परंपरागत वर्गीकरण है, जो इस पर टिका है कि अनुपात की दोनों संख्याएँ किस विवरण से ली गई हैं: लाभ-हानि विवरण के अनुपात (जैसे सकल लाभ अनुपात), तुलन-पत्र के अनुपात (जैसे चालू अनुपात) और मिश्रित अनुपात (एक संख्या लाभ-हानि से, दूसरी तुलन-पत्र से, जैसे प्राप्य आवर्त)। दूसरा प्रकार्यात्मक (Functional) वर्गीकरण है, जो अनुपात के उद्देश्य पर आधारित है और व्यवहार में सबसे ज़्यादा प्रयुक्त है।

अनुपातों का प्रकार्यात्मक वर्गीकरण

वर्गक्या मापता हैसमय-सीमामुख्य अनुपात
तरलता (Liquidity)अल्पकालीन देनदारी चुकाने की क्षमताअल्पकालीनचालू अनुपात, तरल अनुपात
शोधन-क्षमता (Solvency)बाहरी पक्षों के प्रति दीर्घकालीन दायित्व चुकाने की क्षमतादीर्घकालीनऋण-समता, ऋण और नियोजित पूँजी, स्वामित्व, कुल संपत्ति और ऋण, ब्याज आवरण
गतिविधि या आवर्त (Activity)संसाधनों के उपयोग की कुशलतासंचालन-अवधिस्टॉक, प्राप्य, देय, शुद्ध संपत्ति आवर्त
लाभप्रदता (Profitability)राजस्व या नियोजित निधि के संबंध में लाभसंचालन-अवधिसकल लाभ, प्रचालन, शुद्ध लाभ अनुपात, नियोजित पूँजी पर प्रत्याय

NCERT (कक्षा 12, अध्याय 5), खंड 5.5 से 5.9।

तरलता अनुपात: चालू और तरल अनुपात

सोचिए आपके पास महीने के अंत में चुकाने को ₹45,000 के बिल हैं। सवाल है कि जेब में नक़दी और जल्दी नक़दी बन सकने वाली चीज़ें कितनी हैं। यही तरलता है। चालू अनुपात (Current Ratio) = चालू संपत्ति ÷ चालू देयता। चालू संपत्ति में चालू निवेश, स्टॉक, व्यापारिक प्राप्य (देनदार और प्राप्य बिल), रोकड़ और रोकड़ तुल्य, अल्पकालीन ऋण और अग्रिम, और अन्य चालू संपत्ति (पूर्वदत्त व्यय, अग्रिम कर, उपार्जित आय) आती हैं। चालू देयता में अल्पकालीन उधार, व्यापारिक देय (लेनदार और देय बिल), अन्य चालू देयता और अल्पकालीन प्रावधान आते हैं।

तरल या शीघ्र अनुपात (Quick or Liquid Ratio) = तरल संपत्ति ÷ चालू देयता, जिसे अम्ल-परीक्षण अनुपात (Acid-Test Ratio) भी कहते हैं। तरल संपत्ति = चालू संपत्ति − (अंतिम स्टॉक + पूर्वदत्त व्यय और अग्रिम कर जैसी चालू संपत्तियाँ)। स्टॉक इसलिए हटाया जाता है कि उसे नक़दी में बदलने में समय और जोखिम है। NCERT और NIOS दोनों के अनुसार सामान्यतः चालू अनुपात 2:1 और तरल अनुपात 1:1 सुरक्षित माना जाता है।

पर यह कसौटी सार्वभौमिक नहीं है। NCERT स्पष्ट कहती है कि आदर्श अनुपात का कोई सर्वमान्य स्तर नहीं है। बहुत ऊँचा चालू अनुपात संसाधनों के कम या ग़लत उपयोग का संकेत हो सकता है, और बहुत नीचा अनुपात समय पर भुगतान के जोखिम का। तरल अनुपात बहुत ऊँचा हो तो रक़म कम लाभकारी अल्पकालीन निवेश में अटकी हो सकती है।

शोधन-क्षमता अनुपात

NCERT शोधन-क्षमता के पाँच अनुपात गिनाती है। ऋण-समता अनुपात = दीर्घकालीन ऋण ÷ अंशधारियों की निधि: कम ऋण और अधिक समता वाली संरचना ऋणदाताओं को सुरक्षित लगती है। ऋण और नियोजित पूँजी अनुपात = दीर्घकालीन ऋण ÷ नियोजित पूँजी। स्वामित्व अनुपात = अंशधारियों की निधि ÷ नियोजित पूँजी। कुल संपत्ति और ऋण अनुपात संपत्ति और ऋण का संबंध दिखाता है। ब्याज आवरण अनुपात = ब्याज और कर से पहले का लाभ ÷ दीर्घकालीन ऋण पर ब्याज; यह बताता है कि ब्याज कितनी बार लाभ से चुकाया जा सकता है। ऋण-समता के लिए पुस्तक 2:1 को सामान्यतः सुरक्षित बताती है, पर उद्योग के अनुसार यह बदलता है।

गतिविधि (आवर्त) अनुपात

आवर्त का अर्थ है घूमना। किराने की दुकान में स्टॉक जितनी बार बिककर दोबारा भरता है, वही स्टॉक आवर्त है। स्टॉक आवर्त अनुपात (Inventory Turnover) = प्रचालन से राजस्व की लागत ÷ औसत स्टॉक, जहाँ औसत स्टॉक = (प्रारंभिक + अंतिम) ÷ 2 और राजस्व की लागत = राजस्व − सकल लाभ। NIOS इसे बिके माल की लागत ÷ औसत स्टॉक कहती है; दोनों एक ही बात हैं। कम आवर्त ख़राब ख़रीद या अप्रचलित माल का ख़तरे का संकेत हो सकता है; बहुत ऊँचा आवर्त छोटे लॉट में ख़रीद या कम मार्जिन पर जल्दी बिक्री से भी हो सकता है।

व्यापारिक प्राप्य आवर्त (Trade Receivables Turnover) = शुद्ध उधार बिक्री ÷ औसत व्यापारिक प्राप्य। यहाँ दो बातों का ध्यान रखें: केवल उधार बिक्री ली जाती है, और देनदार संदिग्ध ऋणों के प्रावधान से पहले की रक़म पर लिए जाते हैं। 365 को आवर्त से भाग देने पर औसत वसूली अवधि (Average Collection Period) दिनों में मिलती है। व्यापारिक देय आवर्त = शुद्ध उधार क्रय ÷ औसत व्यापारिक देय, और उससे औसत भुगतान अवधि निकलती है। जब केवल वर्षांत के आँकड़े दिए हों तो NCERT के अनुसार वही आँकड़ा औसत मान लिया जाता है।

लाभप्रदता अनुपात

सकल लाभ अनुपात = सकल लाभ ÷ प्रचालन से शुद्ध राजस्व × 100; यह बिके माल पर कुल मार्जिन बताता है, जिससे संचालन और अन्य ख़र्च निकलने हैं। प्रचालन अनुपात = (राजस्व की लागत + संचालन व्यय) ÷ राजस्व × 100, और प्रचालन लाभ अनुपात = 100 − प्रचालन अनुपात। शुद्ध लाभ अनुपात = शुद्ध लाभ ÷ राजस्व × 100। नियोजित पूँजी पर प्रत्याय (ROI या ROCE) = ब्याज और कर से पहले का लाभ ÷ नियोजित पूँजी। इनके अलावा NCERT प्रति अंश आय, बही मूल्य प्रति अंश, लाभांश भुगतान अनुपात और मूल्य-आय अनुपात भी सूचीबद्ध करती है।

अनुपात विश्लेषण की सीमाएँ

NCERT की सीमाएँ दो हिस्सों में हैं। पहले हिस्से में वित्तीय विवरणों की सीमाएँ हैं: लेखांकन आँकड़े ऐसी सटीकता का आभास देते हैं जो होती नहीं, क्योंकि लाभ भी लेखांकन नीतियों पर टिकी एक राय है; मूल्य-स्तर के बदलाव अनदेखे रहते हैं; गुणात्मक या अमौद्रिक पक्ष छूट जाते हैं; स्टॉक के मूल्यांकन और मूल्यह्रास की अलग विधियों से अंतर-फर्म तुलना कमज़ोर पड़ती है; और केवल बीते आँकड़ों से भविष्य का पूर्वानुमान कठिन है।

दूसरे हिस्से में अनुपातों की अपनी सीमाएँ हैं: अनुपात साध्य नहीं, साधन हैं; वे समस्या बताते हैं, हल नहीं देते; तरल देयता जैसी अवधारणाओं की मानक परिभाषा नहीं है; आदर्श स्तर का कोई सर्वमान्य मापदंड नहीं है और भारत में उद्योग-औसत भी उपलब्ध नहीं माने गए हैं; और असंबद्ध आँकड़ों से बना अनुपात निरर्थक होता है।

मानचित्र: अनुपात विश्लेषण

तरलता

  • चालू अनुपात (2:1)
  • तरल अनुपात (1:1)

शोधन-क्षमता

  • ऋण-समता
  • स्वामित्व अनुपात
  • ब्याज आवरण

गतिविधि

  • स्टॉक आवर्त
  • प्राप्य आवर्त
  • देय आवर्त

लाभप्रदता

  • सकल लाभ
  • प्रचालन लाभ
  • शुद्ध लाभ
  • ROCE

मुख्य तथ्य

अनुपातों के वर्गीकरण
परंपरागत (लाभ-हानि, तुलन-पत्र, मिश्रित) और प्रकार्यात्मक (तरलता, शोधन-क्षमता, गतिविधि, लाभप्रदता)
चालू अनुपात
चालू संपत्ति ÷ चालू देयता; सामान्यतः सुरक्षित माना जाने वाला स्तर 2:1
तरल अनुपात
तरल संपत्ति ÷ चालू देयता; सामान्यतः 1:1; तरल संपत्ति में स्टॉक और पूर्वदत्त व्यय शामिल नहीं
स्टॉक आवर्त
बिके माल की लागत ÷ औसत स्टॉक
प्राप्य आवर्त
शुद्ध उधार बिक्री ÷ औसत व्यापारिक प्राप्य; औसत वसूली अवधि = 365 ÷ आवर्त
सकल लाभ अनुपात
सकल लाभ ÷ शुद्ध राजस्व × 100
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • तरल संपत्ति में स्टॉक को शामिल कर लेना: तरल अनुपात में स्टॉक और पूर्वदत्त व्यय हटाए जाते हैं।
  • प्राप्य आवर्त में कुल बिक्री लेना: सूत्र में केवल उधार बिक्री आती है; ABC के प्रश्न में सारी बिक्री उधार दी गई थी, इसलिए ₹4,50,000 सही था।
  • स्टॉक आवर्त में बिक्री से भाग देना: अंश में बिक्री की लागत आती है, बिक्री नहीं।
  • मान्यता लिखे बिना उत्तर देना: जब औसत शेष न दिए हों, तो एक पंक्ति में लिखें कि अंतिम शेष को ही औसत माना गया है।
  • अनुपात लिखकर रुक जाना: 50 शब्द में भी एक छोटी व्याख्या, जैसे तरलता ठीक है, जोड़ें।