निष्पादन अंकेक्षण: अर्थ, तीन E, आधारभूत तत्त्व और प्रक्रिया
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग C (Accounting and Auditing): "Meaning and objectives of auditing, audit programme, basic knowledge of social, performance and efficiency audit; elementary knowledge of government audit." इस पृष्ठ पर "performance audit" है। दक्षता अंकेक्षण, सामाजिक अंकेक्षण और सरकारी अंकेक्षण के अलग पृष्ठ हैं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2013-2024 के उपलब्ध छह पेपरों में निष्पादन अंकेक्षण पर सीधा प्रश्न 2024 में 2 अंक का आया: सार्वजनिक क्षेत्र के संदर्भ में निष्पादन अंकेक्षण के तीन आधारभूत तत्त्व। 2016 के प्रश्न में निपुणता (दक्षता) अंकेक्षण और निष्पादन अंकेक्षण का अंतर भी पूछा गया, जो इसी विषय से जुड़ता है।
- "तीन तत्त्व" शब्द के दो पढ़ने योग्य अर्थ हैं: CAG के दिशानिर्देशों में सार्वजनिक क्षेत्र के अंकेक्षण के तीन आधारभूत तत्त्व (तीन पक्ष, विषय-वस्तु, मानदंड) और निष्पादन अंकेक्षण के तीन सिद्धांत (मितव्ययिता, दक्षता, प्रभावशीलता)। यह पृष्ठ दोनों को अलग-अलग साफ़ रखता है।
- यह विषय CAG, सरकारी अंकेक्षण और सरकारी योजनाओं के मूल्यांकन, तीनों से जुड़ता है, इसलिए दस अंक के प्रश्न में यहाँ के बिंदु दूसरे उत्तरों में भी उदाहरण का काम करते हैं (विश्लेषण)।
पहले सरल भाषा में: भवन बना, पर काम भी आया?
मान लीजिए किसी ब्लॉक में लड़कियों का छात्रावास बनाने के लिए सरकार ने पैसा मंज़ूर किया। भवन समय पर बन गया, ख़र्च मंज़ूर राशि के भीतर रहा, सारे बिल नियम से पास हुए। नियमों की दृष्टि से अंकेक्षण में कोई आपत्ति नहीं बनती। पर एक साल बाद देखा जाए कि भवन में बिजली का कनेक्शन ही नहीं लगा, इसलिए उसमें कोई रहता नहीं, तो पूछना पड़ेगा कि योजना का असली मक़सद पूरा हुआ या नहीं। यही सवाल निष्पादन अंकेक्षण (performance audit) का है। वह देखता है कि काम सस्ते और ठीक दाम पर हुआ या नहीं, उतने ही संसाधन में कम या ज़्यादा काम हुआ या नहीं, और लोगों को सचमुच लाभ मिला या नहीं।
परीक्षा के लिए सटीक परिभाषा: CAG के दिशानिर्देशों के अनुसार निष्पादन अंकेक्षण यह देखने की स्वतंत्र, वस्तुनिष्ठ और विश्वसनीय जाँच है कि सरकारी उपक्रम, कार्यक्रम, व्यवस्थाएँ, गतिविधियाँ या संगठन मितव्ययिता (economy), दक्षता (efficiency) और प्रभावशीलता (effectiveness) के सिद्धांतों के अनुसार चल रहे हैं या नहीं, और सुधार की गुंजाइश है या नहीं। CAG के अंकेक्षण और लेखा पर विनियम, 2007 (Regulations on Audit and Accounts, 2007) का विनियम 68 भी इसे इसी रूप में बताता है: किसी संगठन, कार्यक्रम या योजना के आर्थिक, दक्ष और प्रभावी ढंग से चलने की सीमा का स्वतंत्र आकलन।
CAG के लेखा-परीक्षा मानक 2017 के अनुसार भारत की सर्वोच्च लेखा-परीक्षा संस्था तीन तरह के अंकेक्षण करती है: वित्तीय, अनुपालन और निष्पादन। वित्तीय अंकेक्षण पूछता है कि वित्तीय जानकारी ढाँचे के अनुसार सही प्रस्तुत है या नहीं; अनुपालन अंकेक्षण पूछता है कि गतिविधियाँ और लेन-देन लागू क़ानून, नियम, बजट-प्रावधान और अनुबंध के अनुरूप हैं या नहीं; और निष्पादन अंकेक्षण पूछता है कि हस्तक्षेप, कार्यक्रम और संस्थाएँ तीन E के अनुसार कैसा काम कर रही हैं।
तीन E: मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता
तीनों सिद्धांतों की परिभाषाएँ CAG के दिशानिर्देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्था INTOSAI के मानक ISSAI 300 में लगभग एक जैसी हैं। मितव्ययिता का संबंध इनपुट की लागत से है: संसाधन सही समय पर, उचित मात्रा और गुणवत्ता में और सबसे अच्छे दाम पर जुटाए गए या नहीं। दक्षता का संबंध इनपुट और आउटपुट के रिश्ते से है: उपलब्ध संसाधनों से अधिकतम परिणाम मिला या वही परिणाम कम संसाधन में मिल सकता था। प्रभावशीलता का संबंध लक्ष्य की प्राप्ति से है: तय उद्देश्य पूरे हुए और इच्छित परिणाम मिले या नहीं।
दिशानिर्देश दो बुनियादी प्रश्न सुझाते हैं: क्या काम सही ढंग से हो रहे हैं, और क्या सही काम हो रहे हैं? पहला प्रश्न मुख्यतः मितव्ययिता और दक्षता से जुड़ता है, जबकि दूसरा प्रश्न प्रभावशीलता तक विश्लेषण का दायरा बढ़ा देता है। एक सावधानी भी लिखी गई है: निष्पादन अंकेक्षण विधायिका की मंशा और निर्णयों पर प्रश्न नहीं उठाता; वह देखता है कि क़ानून या विनियमों को लागू करने में कोई कमी उद्देश्य की प्राप्ति में बाधा तो नहीं बनी। प्रभावशीलता जाँचते समय तत्काल उत्पाद (output) और अंतिम परिणाम (outcome) में फ़र्क़ करना ज़रूरी बताया गया है, क्योंकि परिणाम पर बाहरी कारणों का असर होता है और उसे मापना कठिन होता है।
तीन E एक नज़र में
| सिद्धांत | किससे संबंध | मूल प्रश्न | उदाहरण-जाँच |
|---|---|---|---|
| मितव्ययिता (Economy) | संसाधनों की लागत | क्या संसाधन उचित मात्रा-गुणवत्ता में, समय पर और सबसे अच्छे दाम पर जुटाए गए? | ख़रीद की दर बाज़ार या स्वीकृत सबसे कम दर से ऊपर तो नहीं |
| दक्षता (Efficiency) | इनपुट और आउटपुट का रिश्ता | क्या उपलब्ध संसाधनों से अधिकतम उत्पाद मिला, या वही उत्पाद कम संसाधन से मिल सकता था? | प्रति इकाई लागत, तुलना समान गतिविधियों, पिछली अवधि या मानक से |
| प्रभावशीलता (Effectiveness) | उद्देश्य और परिणाम | क्या तय उद्देश्य पूरे हुए और इच्छित परिणाम मिले? | लाभार्थियों तक सेवा पहुँची और काम कर रही है या नहीं |
तीन आधारभूत तत्त्व: PYQ 2024 का मूल
CAG के दिशानिर्देश (पैरा 1.16) कहते हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र के अंकेक्षण के कुछ आधारभूत तत्त्व होते हैं: पहला, अंकेक्षण में तीन पक्ष; दूसरा, विषय-वस्तु की जानकारी (subject matter); तीसरा, उसे परखने के मानदंड (criteria)। "Three basic elements of performance audit with respect to the public sector" वाला प्रश्न इसी सूत्र से मेल खाता है, इसलिए इसका सबसे सुरक्षित उत्तर यही तीन तत्त्व हैं। साथ में एक पंक्ति में तीन E का नाम लिख देने से उत्तर दोनों अर्थों में सुरक्षित रहता है।
तीन पक्ष ये हैं। अंकेक्षक (auditor): सार्वजनिक क्षेत्र में यह भूमिका भारतीय लेखा-परीक्षा और लेखा विभाग और उसके द्वारा सौंपे गए लोग निभाते हैं। उत्तरदायी पक्ष (responsible party): सामान्यतः अंकेक्षित संस्था और शासन का दायित्व निभाने वाले लोग; किसी विषय में कई संस्थाएँ अलग-अलग पहलू की ज़िम्मेदार हो सकती हैं। इच्छित उपयोगकर्ता (intended users): वे लोग जिनके लिए रिपोर्ट बनती है, जैसे विधायिका, सरकारी एजेंसियाँ और आम जनता। दिशानिर्देश के अनुसार उत्तरदायी पक्ष भी उपयोगकर्ता हो सकता है।
विषय-वस्तु केवल किसी योजना, संस्था या निधि तक सीमित नहीं होती; उसमें गतिविधियाँ (उनके उत्पाद, परिणाम और प्रभाव के साथ) या मौजूदा स्थितियाँ (कारण और परिणाम के साथ) भी आ सकती हैं। विषय-वस्तु उद्देश्य से तय होती है और अंकेक्षण-प्रश्नों में ढलती है। मानदंड वे अंकेक्षण-विशिष्ट, उचित मानक हैं जिनके सामने मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता को आँका जाता है। अंकेक्षक कभी-कभी मानदंड चुनने या बनाने में भी शामिल होता है। मानदंड गुणात्मक या मात्रात्मक, सामान्य या विशिष्ट हो सकते हैं और अंकेक्षित संस्था के साथ चर्चा के बाद तय होते हैं, पर उपयुक्त मानदंड चुनने की अंतिम ज़िम्मेदारी अंकेक्षण-दल की है (राजस्थान के महालेखाकार कार्यालय की नियम पुस्तिका में भी यही बात दोहराई गई है)।
तत्त्व बनाम सिद्धांत: दो अलग सूचियाँ
| सूची | इसमें क्या है | कहाँ से | कब लिखें |
|---|---|---|---|
| तीन आधारभूत तत्त्व | तीन पक्ष (अंकेक्षक, उत्तरदायी पक्ष, इच्छित उपयोगकर्ता); विषय-वस्तु; मानदंड | दिशानिर्देश 2014, पैरा 1.16 से 1.22; ISSAI 300, पैरा 15 से 18 | जब प्रश्न "elements" या "तत्त्व" पूछे |
| तीन सिद्धांत (तीन E) | मितव्ययिता, दक्षता, प्रभावशीलता | दिशानिर्देश 2014, पैरा 1.6 से 1.12; मानक 2017, पैरा 3.3.1 | जब प्रश्न "principles", "मापदंड" या परिभाषा पूछे |
दोनों सूचियों को एक-दूसरे की जगह न लिखें। ऊपर की पंक्ति तत्त्वों की है, नीचे की सिद्धांतों की।
अंकेक्षण के तीन तरीक़े और प्रक्रिया
दिशानिर्देशों के अनुसार अंकेक्षक तीन दृष्टिकोणों में से कोई एक या उनका मिश्रण चुनता है। प्रणाली-उन्मुख दृष्टिकोण (system-oriented) प्रबंधन-व्यवस्थाओं, जैसे वित्तीय प्रबंधन प्रणाली, के ठीक चलने की जाँच करता है। परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण (result-oriented) देखता है कि उत्पाद या परिणाम के उद्देश्य हासिल हुए या नहीं। समस्या-उन्मुख दृष्टिकोण (problem-oriented) किसी विशेष समस्या या मानदंड से विचलन के कारणों की पड़ताल करता है।
प्रक्रिया के चरण दिशानिर्देशों के आठ अध्यायों में मिलते हैं: परिचय, जनादेश और सामान्य सिद्धांत, रणनीतिक योजना और विषय-चयन, व्यक्तिगत अंकेक्षण की योजना, क्रियान्वयन, साक्ष्य और दस्तावेज़ीकरण, रिपोर्टिंग प्रक्रिया, और अनुवर्ती कार्रवाई। क्रियान्वयन की शुरुआत प्रवेश-बैठक (entry conference) से होती है। मसौदा रिपोर्ट अंकेक्षित संस्था को उसके उत्तर के लिए दी जाती है और अंकेक्षण का समापन संस्था के मुख्य कार्यकारी, यानी संबंधित विभाग के सचिव या प्रमुख सचिव, के साथ निर्गम-बैठक (exit conference) से होता है। संस्था का उत्तर रिपोर्ट में दर्ज किया जाता है। दिशानिर्देश कहते हैं कि निष्पादन अंकेक्षण आदर्श रूप से दस माह के भीतर पूरे हों, ताकि विषय अपना महत्त्व न खो दे।
रिपोर्ट का आगे का रास्ता CAG की सामान्य रिपोर्ट जैसा है: अनुच्छेद 151 के अनुसार संघ की रिपोर्ट राष्ट्रपति को और राज्य की रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी जाती है, जो उसे संसद या विधान-मंडल के सामने रखवाते हैं। फिर विधायिका की समिति, जैसे लोक लेखा समिति, उसकी जाँच करती है। अनुवर्ती कार्रवाई (follow-up) वह स्थिति है जिसमें अंकेक्षक देखता है कि अंकेक्षित संस्था ने पिछली रिपोर्ट के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए या नहीं। दिशानिर्देशों में इसका उद्देश्य विधायिका की समितियों की सहायता और सार्वजनिक कार्यक्रम के प्रदर्शन में सुधार, दोनों बताया गया है।
वित्तीय, अनुपालन और निष्पादन अंकेक्षण: तुलना
| कसौटी | वित्तीय अंकेक्षण | अनुपालन अंकेक्षण | निष्पादन अंकेक्षण |
|---|---|---|---|
| मूल प्रश्न | क्या वित्तीय जानकारी लागू ढाँचे के अनुसार सही है? | क्या गतिविधियाँ और लेन-देन लागू क़ानून, नियम और अनुबंध के अनुसार हुए? | क्या काम मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता से हुआ, और सुधार की गुंजाइश है? |
| कसौटी (criteria) | वित्तीय रिपोर्टिंग और विनियामक ढाँचा | संविधान, अधिनियम, नियम, बजट-प्रावधान, अनुबंध, स्वीकृतियाँ | अंकेक्षण-विशिष्ट उचित मानक, जैसे लागत-मानक, समय-सीमा, लक्ष्य |
| परिणाम | वित्तीय जानकारी पर राय | विचलन और उल्लंघनों की रिपोर्ट | मूल्यांकन और सुधार की सिफ़ारिशें |
| दायरा | संस्था के वित्तीय विवरण | लेन-देन और गतिविधियाँ | कार्यक्रम, संस्था, व्यवस्था या विषय (कभी-कभी कई विभाग मिलाकर) |
लाभ, सीमाएँ और विश्लेषण
निष्पादन अंकेक्षण की ताक़त यह है कि वह सिर्फ़ "नियम का पालन" नहीं, "जनता को मूल्य मिला या नहीं" पूछता है। ISSAI 300 के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य रचनात्मक ढंग से मितव्ययी, प्रभावी और दक्ष शासन को बढ़ावा देना है, साथ ही जवाबदेही और पारदर्शिता में योगदान देना। दिशानिर्देश के अनुसार यह नई जानकारी, विश्लेषण या अंतर्दृष्टि देता है और जहाँ उचित हो, सुधार की सिफ़ारिशें भी करता है।
सीमाएँ (विश्लेषण): परिणाम मापना कठिन होता है क्योंकि वह बाहरी कारणों पर निर्भर रहता है, मानदंड चुनने में विवाद की गुंजाइश रहती है, रिपोर्ट आने में लंबा समय लग सकता है (आदर्श अवधि दस माह रखी गई है, फिर भी जटिल विषयों में अधिक लगता है), और सिफ़ारिशें मानना या न मानना कार्यपालिका के हाथ में रहता है, जबकि अंकेक्षण की भूमिका सलाह तक है, निर्णय बदलने तक नहीं। दिशानिर्देश इसी कारण कहते हैं कि अंकेक्षक सिफ़ारिश तो दे सकता है, पर उत्तरदायी पक्ष की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर नहीं ले सकता।
आरेख: निष्पादन अंकेक्षण की प्रक्रिया
विषय का चयन
जन-हित, ख़र्च, प्रगति और अपेक्षित लाभ के आधार पर
योजना
उद्देश्य, मानदंड और अंकेक्षण-डिज़ाइन
प्रवेश-बैठक
अंकेक्षित संस्था के साथ अपेक्षाओं की चर्चा
साक्ष्य
पर्याप्त और उपयुक्त साक्ष्य, दस्तावेज़ीकरण
मसौदा रिपोर्ट
संस्था का उत्तर शामिल
निर्गम-बैठक
मुख्य कार्यकारी के साथ निष्कर्षों पर चर्चा
रिपोर्ट और अनुवर्ती
राष्ट्रपति या राज्यपाल, सदन, समिति, फिर अनुवर्ती जाँच
मानचित्र: निष्पादन अंकेक्षण एक नज़र में
निष्पादन अंकेक्षण
तीन E
मितव्ययिता, दक्षता, प्रभावशीलता
तीन तत्त्व
तीन पक्ष, विषय-वस्तु, मानदंड
तीन तरीक़े
प्रणाली-उन्मुख, परिणाम-उन्मुख, समस्या-उन्मुख
तीन अंकेक्षण
वित्तीय, अनुपालन, निष्पादन
दो प्रश्न
सही ढंग से हो रहा है? सही काम हो रहा है?
मुख्य तथ्य
- परिभाषा
- स्वतंत्र, वस्तुनिष्ठ, विश्वसनीय जाँच कि उपक्रम, कार्यक्रम, संस्थाएँ मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता से चल रहे हैं और सुधार की गुंजाइश है (दिशानिर्देश 2014, पैरा 1.4; मानक 2017, पैरा 3.3.1)
- विनियमों में आधार
- अंकेक्षण और लेखा पर विनियम 2007 का विनियम 68 (दिशानिर्देश में उद्धृत)
- दिशानिर्देश
- जून 2014 में जारी; पिछले 2004 के दिशानिर्देशों की जगह; ISSAI 100, 300 और 3000 पर आधारित
- तीन E
- मितव्ययिता: कम लागत, उचित मात्रा-गुणवत्ता, समय पर, सबसे अच्छे दाम; दक्षता: संसाधन और उत्पाद का रिश्ता; प्रभावशीलता: उद्देश्य की प्राप्ति (पैरा 1.7 से 1.11)
- आधारभूत तत्त्व
- तीन पक्ष, विषय-वस्तु, मानदंड (पैरा 1.16 से 1.22)
- तीन दृष्टिकोण
- प्रणाली, परिणाम, समस्या (पैरा 2.5)
- समय-सीमा
- आदर्श रूप से दस माह के भीतर, प्रवेश-बैठक से मुख्यालय द्वारा रिपोर्ट के अंतिम रूप तक (पैरा 7.21)
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026
राजस्थान का पहलू
cag.gov.in पर महालेखाकार (लेखा-परीक्षा-II), राजस्थान, जयपुर की रिपोर्ट-सूची (देखी गई 2 अक्टूबर 2026) में निष्पादन अंकेक्षण भी एक वर्ग है। सूची में 2026 की रिपोर्टों में "Implementation of Jal Jeevan Mission in Rajasthan" और "Road Safety System in Rajasthan" पर निष्पादन अंकेक्षण की रिपोर्टें दिखती हैं। महालेखाकार (लेखा-परीक्षा-I), राजस्थान का परिचय-पृष्ठ (देखा गया 2 अक्टूबर 2026) अपने कार्यों में अनुपालन अंकेक्षण, वित्तीय प्रमाणन और निष्पादन अंकेक्षण गिनाता है। राजस्थान के महालेखाकार (आर्थिक एवं राजस्व क्षेत्र लेखा-परीक्षा) कार्यालय की नियम पुस्तिका (संशोधित संस्करण 2019) के अनुसार विषय चुनते समय जन-हित, ख़र्च, प्रगति और अपेक्षित लाभ को आधार माना जाए, न कि केवल कुछ अनियमितताएँ उजागर करने की संभावना को।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- तीन E और तीन तत्त्व को एक सूची बना देना। तत्त्व: तीन पक्ष, विषय-वस्तु, मानदंड। सिद्धांत: मितव्ययिता, दक्षता, प्रभावशीलता।
- दक्षता और प्रभावशीलता को एक ही मान लेना। दक्षता इनपुट से आउटपुट का रिश्ता है; प्रभावशीलता यह है कि उद्देश्य और परिणाम मिले या नहीं।
- यह लिखना कि निष्पादन अंकेक्षण नीति या विधायिका के निर्णय पर प्रश्न उठाता है। ISSAI 300 और दिशानिर्देश के अनुसार वह विधायिका की मंशा पर नहीं, उसके क्रियान्वयन में कमियों पर ध्यान देता है।
- निष्पादन अंकेक्षण को केवल "गड़बड़ी खोजने" की जाँच समझना। यह मूल्य और सुधार की गुंजाइश जाँचता है, और जनता को मिली सेवा की गुणवत्ता भी।
- बिना मानदंड के निष्कर्ष लिख देना। उत्तर में हर E के साथ उसका मानदंड (स्वीकृत दर, लागत-मानक, लक्ष्य) बताएँ।
- दो अंक के उत्तर में पूरी प्रक्रिया लिख देना। 15 शब्द में केवल तीन तत्त्व और एक पंक्ति में तीन E का नाम लिखें।
केस: भवन बना, पर बेकार रहा
उदाहरण (काल्पनिक)काल्पनिक केस: छात्रावास का भवन
(यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; किसी वास्तविक परियोजना का वर्णन नहीं।) एक ज़िले में बालिका छात्रावास के लिए 2 करोड़ रुपये मंज़ूर हुए। भवन तय समय में और मंज़ूर राशि के भीतर पूरा हुआ। अनुपालन अंकेक्षण में बिल, निविदा और स्वीकृतियाँ नियम के अनुसार मिलीं।
- अनुपालन की जाँच
- निविदा प्रक्रिया, स्वीकृतियाँ और भुगतान नियमों के अनुसार पाए गए। कोई अनियमितता दर्ज नहीं हुई।
- मितव्ययिता
- निविदा की दरें इलाक़े के मानक से 10 प्रतिशत ऊपर थीं, जबकि कम दर पर आपूर्ति करने वाले आवेदक मौजूद थे।
- दक्षता
- बिजली और पानी के कनेक्शन की योजना भवन से अलग चली, इसलिए निर्माण पूरा होने के 14 माह बाद तक भवन ख़ाली रहा।
- प्रभावशीलता
- लक्ष्य था 80 बालिकाओं को आवास देना, पर पहले साल केवल 12 रहीं। उद्देश्य का बड़ा हिस्सा अधूरा रहा।
सीख
सीख: नियमों के अनुसार चलना (अनुपालन) और उद्देश्य पूरा होना (निष्पादन) अलग बातें हैं। निष्पादन अंकेक्षण वह जाँच है जो पहले वाले साफ़ परिणाम के बावजूद दूसरे वाले अंतर को पकड़ती है।
कार्य-उदाहरण: तीन E की गणना
हल सहित उदाहरणपेयजल योजना पर तीन E की जाँच (काल्पनिक संख्याएँ)
दिया है
- यह उदाहरण प्रक्रिया समझाने के लिए गढ़ा गया है। एक ब्लॉक में 10,000 घरों को नल का पानी देना है। मंज़ूर बजट ₹12 करोड़। विभाग का अपना मानक: प्रति घर ₹10,000।
- ख़रीद: पाइप ₹560 प्रति मीटर की दर से ख़रीदे गए, जबकि स्वीकृत सबसे कम दर ₹500 प्रति मीटर थी। बने कनेक्शन: 9,600। इनमें से जिन घरों में सप्ताह में कम से कम चार दिन पानी आता है: 6,720।
- 1चरण 1: मितव्ययिता ₹560 ÷ ₹500 = 1.12, यानी ख़रीद की दर 12 प्रतिशत ऊँची रही। मानदंड: स्वीकृत सबसे कम दर।
- 2चरण 2: दक्षता प्रति कनेक्शन लागत = ₹12,00,00,000 ÷ 9,600 = ₹12,500। मानक ₹10,000 से यह 25 प्रतिशत अधिक है। यह भी देखें कि लक्ष्य के 10,000 घरों में 9,600 ही पहुँचे।
- 3चरण 3: प्रभावशीलता कनेक्शन तो हुए, पर काम के कितने? 6,720 ÷ 9,600 = 0.70, यानी 70 प्रतिशत कनेक्शनों में ही पानी नियमित आया।
- 4चरण 4: निष्कर्ष लिखें मितव्ययिता और दक्षता कमज़ोर, प्रभावशीलता आंशिक। सिफ़ारिश: ख़रीद में खुली प्रतिस्पर्धा, कनेक्शन से पहले जलस्रोत की उपलब्धता की जाँच, और काम कर रहे कनेक्शनों के प्रतिशत को सफलता का पैमाना बनाना।
निष्कर्ष: निष्कर्ष: एक ही योजना में तीनों E अलग-अलग आँकड़े देते हैं। उत्तर में तीनों के मानदंड (criteria) साफ़ लिखें: स्वीकृत दर, लागत-मानक और नियमित जलापूर्ति।
पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) और मॉडल उत्तर
2024RAS मुख्य परीक्षापेपर I2 अंक
Three basic elements of performance audit with respect to the public sector.
आदर्श उत्तर
तीन तत्त्व: तीन पक्ष (अंकेक्षक, उत्तरदायी पक्ष, उपयोगकर्ता), विषय-वस्तु और मानदंड। आधार-सिद्धांत: मितव्ययिता, दक्षता, प्रभावशीलता।
अभ्यास प्रश्न (PYQ नहीं)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
निष्पादन अंकेक्षण को परिभाषित कीजिए।
आदर्श उत्तर
निष्पादन अंकेक्षण कार्यक्रम की मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता की स्वतंत्र जाँच है, सुधार-सुझाव सहित।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
मितव्ययिता और दक्षता में अंतर लिखिए।
आदर्श उत्तर
मितव्ययिता: संसाधन उचित मात्रा-गुणवत्ता में, सही दाम पर जुटाना। दक्षता: उपलब्ध संसाधन से अधिकतम उत्पाद पाना।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
निष्पादन अंकेक्षण में तीन E की व्याख्या कीजिए।
आदर्श उत्तर
मितव्ययिता का अर्थ है संसाधन उचित मात्रा, गुणवत्ता, समय और सबसे अच्छे दाम पर जुटाना। दक्षता का अर्थ है उपलब्ध संसाधन से अधिकतम उत्पाद, या वही उत्पाद कम संसाधन से। प्रभावशीलता का अर्थ है तय उद्देश्य पूरे होना और इच्छित परिणाम मिलना। तीनों के लिए मानदंड पहले तय किए जाते हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
निष्पादन अंकेक्षण और अनुपालन अंकेक्षण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
आदर्श उत्तर
अनुपालन अंकेक्षण पूछता है कि लेन-देन क़ानून, नियम और अनुबंध के अनुसार हुए या नहीं। निष्पादन अंकेक्षण पूछता है कि कार्यक्रम मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता से चला या नहीं। पहले का आधार नियम हैं, दूसरे का उचित मानक। पहले में विचलन की रिपोर्ट बनती है, दूसरे में मूल्यांकन और सुधार की सिफ़ारिशें।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
निष्पादन अंकेक्षण की प्रक्रिया और उसकी उपयोगिता पर टिप्पणी कीजिए।
आदर्श उत्तर
CAG के 2014 के दिशानिर्देशों में विषय-चयन जन-हित के आधार पर होता है। फिर उद्देश्य, मानदंड और अंकेक्षण-डिज़ाइन तय होते हैं। प्रवेश-बैठक के बाद साक्ष्य जुटाए जाते हैं। मसौदा रिपोर्ट संस्था को उत्तर के लिए दी जाती है और मुख्य कार्यकारी के साथ निर्गम-बैठक होती है। रिपोर्ट राष्ट्रपति या राज्यपाल के माध्यम से सदन में रखी जाती है, फिर समिति जाँच करती है और अनुवर्ती जाँच होती है। उपयोगिता: यह नियम-पालन से आगे जाकर जनता को मूल्य मिलने की जाँच करता है। सीमाएँ: परिणाम मापना कठिन है, मानदंड पर विवाद संभव है और सिफ़ारिशें मानना कार्यपालिका पर निर्भर है।
10 अंक (100 शब्द) का उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
निष्पादन अंकेक्षण को परिभाषित करें: मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता के आधार पर कार्यक्रमों की स्वतंत्र जाँच, सुधार की गुंजाइश सहित (लगभग 20 शब्द)।
मुख्य भाग
- तीन E की एक-एक पंक्ति की परिभाषा (लगभग 25 शब्द)
- तीन आधारभूत तत्त्व: तीन पक्ष, विषय-वस्तु, मानदंड (लगभग 15 शब्द)
- प्रक्रिया: विषय-चयन, योजना, साक्ष्य, मसौदा रिपोर्ट, निर्गम-बैठक, रिपोर्ट, अनुवर्ती (लगभग 20 शब्द)
- उपयोगिता और सीमा: अनुपालन से आगे, पर परिणाम मापना कठिन (लगभग 15 शब्द)
निष्कर्ष
अंत में एक पंक्ति: निष्पादन अंकेक्षण जनता के पैसे का मूल्य जाँचकर शासन को बेहतर बनाने का साधन है (लगभग 10 शब्द)।
अतिरिक्त मूल्य
- काल्पनिक पेयजल योजना के आँकड़ों का एक पंक्ति का उदाहरण
- राजस्थान की जल जीवन मिशन और सड़क सुरक्षा पर निष्पादन अंकेक्षण रिपोर्टों का नाम
एक पन्ने में दोहराव
- निष्पादन अंकेक्षण: स्वतंत्र, वस्तुनिष्ठ, विश्वसनीय जाँच कि कार्यक्रम मितव्ययिता, दक्षता, प्रभावशीलता से चल रहे हैं और सुधार की गुंजाइश है
- विनियम 68 (अंकेक्षण और लेखा पर विनियम 2007) और दिशानिर्देश 2014 इसके आधार हैं
- मितव्ययिता: संसाधन की लागत कम, सही मात्रा-गुणवत्ता, समय पर, सबसे अच्छे दाम
- दक्षता: संसाधन और उत्पाद का रिश्ता; कम लागत में अधिक उत्पाद
- प्रभावशीलता: तय उद्देश्य और इच्छित परिणाम; उत्पाद और परिणाम में फ़र्क़
- तीन आधारभूत तत्त्व (पैरा 1.16): तीन पक्ष, विषय-वस्तु, मानदंड
- तीन पक्ष: अंकेक्षक, उत्तरदायी पक्ष, इच्छित उपयोगकर्ता
- तीन दृष्टिकोण: प्रणाली-उन्मुख, परिणाम-उन्मुख, समस्या-उन्मुख
- प्रक्रिया: विषय-चयन, योजना, प्रवेश-बैठक, साक्ष्य, मसौदा, निर्गम-बैठक, रिपोर्ट, अनुवर्ती; आदर्श अवधि दस माह
- विधायिका की मंशा पर प्रश्न नहीं; क्रियान्वयन की कमियों पर ध्यान
- राजस्थान: महालेखाकार (लेखा-परीक्षा-II) की सूची में जल जीवन मिशन और सड़क सुरक्षा पर 2026 की निष्पादन रिपोर्टें
याद रखने योग्य शब्द
- निष्पादन अंकेक्षण
- तीन E
- तीन पक्ष
- मानदंड (criteria)
- प्रवेश-बैठक
- निर्गम-बैठक
- अनुवर्ती कार्रवाई