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पेपर I · इकाई III · भाग ग

GST कैसे काम करता है

GST की कार्य-प्रणाली: पंजीकरण और GSTIN, कर-बीजक, रिटर्न के प्रकार, कैश और क्रेडिट लेजर और इनपुट टैक्स क्रेडिट; बिना दरों के हल उदाहरणों सहित।

  • पंजीकरण
  • GSTIN
  • रिटर्न
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग ग (लेखांकन एवं अंकेक्षण): "Basic knowledge of Goods and Services Tax." यह पृष्ठ GST के कार्य-प्रवाह को समझाता है: पंजीकरण, कर-बीजक, रिटर्न के प्रकार, कैश और क्रेडिट लेजर और इनपुट टैक्स क्रेडिट की अवधारणा। GST की पृष्ठभूमि और संरचना पिछले पृष्ठ पर है। इस पृष्ठ पर कोई दर, सीमा या नियत तिथि नहीं दी गई है; वर्तमान प्रक्रिया, फ़ॉर्म और दरें GST के आधिकारिक पोर्टल gst.gov.in पर देखें।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • सिलेबस में 'Basic knowledge of GST' दर्ज है, पर 2013, 2016, 2018, 2021, 2023 और 2024 के पेपरों में GST पर सीधा प्रश्न नहीं पूछा गया। इसलिए इस पृष्ठ पर पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं हैं; अभ्यास प्रश्न नीचे हैं।
  • प्रश्न बने तो पंजीकरण की प्रक्रिया, रिटर्न के नाम, इनपुट टैक्स क्रेडिट की अवधारणा और कैश बनाम क्रेडिट लेजर का अंतर पूछा जा सकता है (अनुमान)। ये बिंदु नीचे अधिनियम और नियमों के आधार पर दिए हैं।
  • GST के नियम, फ़ॉर्म और समय-सारणी बार-बार बदलती हैं। परीक्षा में प्रवाह और सिद्धांत लिखें; नियत तिथियाँ और दरें याद के भरोसे न लिखें।

GST का कार्य-प्रवाह: एक नज़र में

GST में किसी कारोबारी का पूरा सफ़र एक क्रम में चलता है। सबसे पहले वह पंजीकरण कराता है और उसे एक विशिष्ट पहचान संख्या मिलती है। उसके बाद हर आपूर्ति पर कर-बीजक (टैक्स इनवॉइस) जारी होता है और खाते-बही रखे जाते हैं। हर कर-अवधि में बिक्री का ब्योरा रिटर्न के रूप में पोर्टल पर भरा जाता है। खरीद पर चुकाया गया कर इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में क्रेडिट लेजर में जुड़ता है, और बिक्री पर देय कर का भुगतान इस क्रेडिट तथा कैश लेजर से किया जाता है। वर्ष के अंत में वार्षिक रिटर्न भरा जाता है। पूरी प्रक्रिया गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स नेटवर्क (GSTN) के आईटी-मंच पर होती है।

केंद्रीय माल एवं सेवा कर (CGST) अधिनियम, 2017 और उसके नियम इस प्रवाह का कानूनी आधार हैं। पंजीकरण की प्रक्रिया धारा 25 में, कर-बीजक धारा 31 में, खाते और अभिलेख धारा 35 में, बाहरी आपूर्ति का ब्योरा धारा 37 में, रिटर्न धारा 39 में, वार्षिक रिटर्न धारा 44 में और कर के भुगतान तथा लेजर धारा 49 में हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट की पात्रता धारा 16 में है। नीचे का आरेख इस पूरे क्रम को एक नज़र में दिखाता है।

GST का कार्य-प्रवाह

  1. 1. पंजीकरण

    आवेदन, सत्यापन, प्रमाणपत्र और GSTIN

  2. 2. कर-बीजक और अभिलेख

    हर आपूर्ति पर बीजक; खाते-बही

  3. 3. बाहरी आपूर्ति का ब्योरा

    GSTR-1 (धारा 37)

  4. 4. क्रेडिट का मिलान

    खरीद पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (धारा 16)

  5. 5. रिटर्न और भुगतान

    GSTR-3B; कैश और क्रेडिट लेजर (धारा 49)

  6. 6. वार्षिक रिटर्न

    GSTR-9 (धारा 44)

पंजीकरण: कौन, कब और कैसे

पंजीकरण GST की पहली सीढ़ी है। धारा 25(1) के अनुसार जो व्यक्ति पंजीकरण के लिए बाध्य है, उसे हर उस राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में आवेदन करना होता है जहाँ वह बाध्य है; यह आवेदन अधिनियम में तय अवधि के भीतर करना होता है, जो उस तिथि से गिनी जाती है जिस दिन वह पंजीकरण के लिए बाध्य हुआ। कौन बाध्य है, इसका निर्णय धारा 22 और 24 की शर्तों से होता है और उसमें कारोबार के आकार की सीमा आती है। वह सीमा बदलती रहती है, इसलिए यहाँ नहीं दी गई; वर्तमान सीमा gst.gov.in पर देखें। इसी धारा में अस्थायी करदाता और अनिवासी करदाता के लिए कारोबार शुरू होने से पहले आवेदन की अलग व्यवस्था है।

CGST नियमों के नियम 8 में आवेदन की प्रक्रिया दो भागों में दी गई है। भाग क में आवेदक अपना स्थायी खाता संख्या (PAN), मोबाइल नंबर, ईमेल और राज्य बताता है। PAN का मिलान आयकर विभाग के डेटाबेस से होता है और मोबाइल तथा ईमेल अलग-अलग एकबारगी पासवर्ड (OTP) से सत्यापित होते हैं। सत्यापन होने पर एक अस्थायी संदर्भ संख्या मिलती है। उसके सहारे आवेदक फ़ॉर्म GST REG-01 का भाग ख और ज़रूरी दस्तावेज़ ऑनलाइन जमा करता है, और उसे फ़ॉर्म GST REG-02 में पावती मिलती है। यह नियमों के पाठ का वर्णन है; आधार-प्रमाणीकरण जैसे बाद के संशोधनों से कुछ चरण जुड़े हैं, इसलिए वर्तमान चरण gst.gov.in पर देखें।

नियम 9 में सत्यापन और अनुमोदन का तरीका है। आवेदन उचित अधिकारी के पास जाता है। कमी न मिलने पर निर्धारित छोटी अवधि में अनुमोदन का प्रावधान है। कमी होने पर अधिकारी फ़ॉर्म GST REG-03 में नोटिस देता है, आवेदक फ़ॉर्म GST REG-04 में उत्तर देता है, और संतुष्ट होने पर अधिकारी अनुमोदन करता है। संतुष्ट न हो तो लिखित कारण के साथ फ़ॉर्म GST REG-05 में आवेदन अस्वीकार होता है। यदि अधिकारी निर्धारित अवधि में कोई कार्रवाई न करे, तो आवेदन को स्वीकृत माना जाता है (नियम 9 का प्रावधान)।

नियम 10 के अनुसार अनुमोदन के बाद फ़ॉर्म GST REG-06 में पंजीकरण-प्रमाणपत्र पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाता है और GSTIN, यानी वस्तु एवं सेवा कर पहचान संख्या, दी जाती है। यदि आवेदन निर्धारित अवधि के भीतर किया गया हो तो पंजीकरण उस तिथि से प्रभावी माना जाता है जब व्यक्ति पंजीकरण के लिए बाध्य हुआ; देर से आवेदन पर प्रभावी तिथि अनुमोदन की तिथि होती है।

पंजीकरण के फ़ॉर्म (CGST नियम 8 से 10)

फ़ॉर्मकामनियम
GST REG-01आवेदन: भाग क (PAN, मोबाइल, ईमेल, राज्य) और भाग ख (विवरण, दस्तावेज़)नियम 8
GST REG-02आवेदन की पावतीनियम 8
GST REG-03कमी या स्पष्टीकरण के लिए अधिकारी का नोटिसनियम 9
GST REG-04नोटिस का उत्तरनियम 9
GST REG-05आवेदन की अस्वीकृति का आदेशनियम 9
GST REG-06पंजीकरण-प्रमाणपत्रनियम 10

GSTIN की बनावट (नियम 10)

अक्षरक्या दर्शाते हैं
2 अक्षरराज्य का कोड
10 अक्षरPAN (या TAN)
2 अक्षरइकाई-कोड
1 अक्षरचेकसम अक्षर
कुल 152 + 10 + 2 + 1 = 15 अक्षर की पहचान संख्या

राज्यवार कोड की सूची के लिए gst.gov.in देखें।

कर-बीजक और अभिलेख

पंजीकृत व्यक्ति कर-योग्य माल की आपूर्ति पर धारा 31 के अनुसार निर्धारित समय पर कर-बीजक जारी करता है। बीजक केवल बिल नहीं, क्रेडिट का आधार भी है: धारा 16(2)(क) के अनुसार खरीदार को क्रेडिट तभी मिलता है जब उसके पास पंजीकृत आपूर्तिकर्ता का जारी किया कर-बीजक या डेबिट नोट हो। इसलिए बीजक में आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता की पहचान, विवरण, मूल्य और कर की राशि साफ़ दर्ज होना ज़रूरी है। बीजक के ब्योरे की सूची और उसकी समय-सीमाएँ नियमों में हैं और बदलती रहती हैं।

धारा 35 के अनुसार पंजीकृत व्यक्ति को अपने प्रमुख कारोबार-स्थल पर माल के उत्पादन, भंडार, आपूर्ति, खरीद और कर की राशि के खाते और अभिलेख रखने होते हैं। यही अभिलेख रिटर्न के आँकड़ों का आधार हैं और अंकेक्षण में सत्यापन के काम आते हैं। इस दृष्टि से GST का कार्य-प्रवाह लेखांकन और अंकेक्षण के विषय से सीधे जुड़ता है: बही में दर्ज बिक्री, खरीद और कर के आँकड़े रिटर्न से मिलने चाहिए।

रिटर्न: प्रकार और उद्देश्य

रिटर्न वह ब्योरा है जो करदाता पोर्टल पर भरता है। धारा 37 के तहत हर पंजीकृत व्यक्ति, कुछ अपवादों को छोड़कर, कर-अवधि में की गई बाहरी आपूर्तियों का ब्योरा इलेक्ट्रॉनिक रूप में देता है। नियम 59 के अनुसार यह ब्योरा फ़ॉर्म GSTR-1 में भरा जाता है। इसी ब्योरे के आधार पर खरीदार के लिए उसकी खरीद का ब्योरा पोर्टल पर उपलब्ध होता है।

धारा 39 के अनुसार हर पंजीकृत व्यक्ति, कुछ श्रेणियों को छोड़कर, कर-अवधि का रिटर्न भरता है और उसी में कर का भुगतान दिखाता है। नियम 61 में कर-अवधि के रिटर्न का फ़ॉर्म GSTR-3B बताया गया है। इसलिए व्यवहार में कर-अवधि का सारांश रिटर्न GSTR-3B के रूप में जाना जाता है, जिसमें बिक्री पर देय कर, लिया गया इनपुट टैक्स क्रेडिट और भुगतान का ब्योरा रहता है। रिटर्न-प्रणाली में समय-समय पर बदलाव हुए हैं; वर्तमान फ़ॉर्म और समय-सारणी के लिए gst.gov.in देखें।

धारा 44 के अनुसार हर पंजीकृत व्यक्ति, कुछ श्रेणियों को छोड़कर, प्रत्येक वित्तीय वर्ष का वार्षिक रिटर्न भरता है, जो नियम 80 में फ़ॉर्म GSTR-9 है। कर-अवधि के रिटर्न में गलती या छूट रह जाए तो वार्षिक रिटर्न सारे वर्ष का समेकित मिलान करने का अवसर देता है। छोटे करदाताओं के लिए अलग सरल व्यवस्था (धारा 10 के तहत कर देने वाले) और उनके लिए अलग रिटर्न-फ़ॉर्म भी हैं, पर उनकी शर्तें और सीमाएँ यहाँ नहीं दी गई हैं।

रिटर्न के मुख्य प्रकार: एक नज़र में

रिटर्नक्या दर्शाता हैआधार
GSTR-1बाहरी आपूर्तियों (बिक्री) का ब्योराधारा 37; नियम 59
GSTR-3Bकर-अवधि का सारांश: देय कर, ली गई क्रेडिट और भुगतानधारा 39; नियम 61
GSTR-9वित्तीय वर्ष का वार्षिक रिटर्नधारा 44; नियम 80
GSTR-4धारा 10 के तहत कर देने वाले का रिटर्ननियम 62

वर्तमान रिटर्न-प्रणाली और समय-सारणी gst.gov.in पर देखें।

कैश लेजर और क्रेडिट लेजर

धारा 49 GST में भुगतान की व्यवस्था का केंद्र है और यह दो इलेक्ट्रॉनिक खाते बताती है। इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में करदाता द्वारा इंटरनेट बैंकिंग, कार्ड, NEFT या RTGS जैसे साधनों से जमा की गई राशि दर्ज होती है। इस राशि से कर, ब्याज, दंड, शुल्क या कोई भी देय राशि चुकाई जा सकती है। इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में करदाता की स्व-निर्धारित इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा होती है, और इसका उपयोग केवल देय (आउटपुट) कर के भुगतान में हो सकता है (धारा 49(3) और 49(4))।

दोनों लेजर में अंतर याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है। कैश लेजर में असली पैसा होता है और वह किसी भी देय राशि में लग सकता है। क्रेडिट लेजर में कर का क्रेडिट होता है जो खरीद पर दिए कर से बना है, और वह केवल कर की देनदारी घटाने में काम आता है। धारा 49(6) के अनुसार दोनों में से किसी लेजर के शेष की वापसी (रिफ़ंड) धारा 54 के अनुसार और उसकी शर्तों के अधीन हो सकती है।

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC): अवधारणा और शर्तें

इनपुट टैक्स क्रेडिट का अर्थ है कि कारोबारी अपनी खरीद पर जो कर चुकाता है, वह अपनी बिक्री पर देय कर में से घटा सकता है। धारा 16(1) के अनुसार हर पंजीकृत व्यक्ति उस माल या सेवा पर लगे इनपुट कर का क्रेडिट लेने का अधिकारी है जो उसके कारोबार में या कारोबार के संवर्धन में प्रयुक्त होती है। इससे कर पर कर नहीं लगता और कर की कड़ी बनी रहती है, जिसे पिछले पृष्ठ के कार्य-उदाहरण में दिखाया गया है।

पर क्रेडिट बिना शर्त नहीं मिलता। धारा 16(2) में प्रमुख शर्तें हैं (अंग्रेज़ी पाठ में खंड (a), (aa), (b), (ba), (c), (d))। (क) खरीदार के पास पंजीकृत आपूर्तिकर्ता का कर-बीजक या डेबिट नोट या निर्धारित कर-भुगतान दस्तावेज़ हो। (कक) वित्त अधिनियम, 2021 से जोड़ी गई शर्त: उस बीजक का ब्योरा आपूर्तिकर्ता ने अपनी बाहरी आपूर्ति के विवरण में भरा हो और वह धारा 37 के अनुसार खरीदार को सूचित हो चुका हो; व्यवहार में इसका अर्थ है कि आपूर्ति पोर्टल पर खरीदार के विवरण में दिखे। (ख) माल या सेवा प्राप्त हो चुकी हो; धारा के स्पष्टीकरण में प्राप्ति की अवधारणा खरीदार के निर्देश पर किसी और को डिलीवरी तक फैली है। (खक) वित्त अधिनियम, 2022 से जोड़ी गई शर्त: धारा 38 के अंतर्गत खरीदार को सूचित क्रेडिट के ब्योरे पर रोक न लगी हो। (ग) आपूर्ति पर लगा कर वास्तव में सरकार को चुकाया जा चुका हो, नकद में या क्रेडिट के उपयोग से, धारा 41 के अधीन। (घ) खरीदार ने धारा 39 के तहत अपना रिटर्न भर दिया हो। माल किश्तों में आए तो क्रेडिट अंतिम किश्त की प्राप्ति पर मिलता है। यही कारण है कि विक्रेता की चूक का असर खरीदार के क्रेडिट पर पड़ सकता है (विश्लेषण)। क्रेडिट कब तक लिया जा सकता है, इसकी समय-सीमा धारा 16(4) में है, और धारा 16(5) तथा 16(6) में कुछ वर्षों के बीजकों तथा रद्द पंजीकरण की बहाली के विशेष प्रावधान हैं; ये संशोधित होते रहे हैं, इसलिए तिथियाँ यहाँ नहीं दी गई हैं। शर्तों का वर्तमान पाठ CBIC के अद्यतन अधिनियम में देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ।

क्रेडिट के उपयोग का क्रम भी निश्चित है। धारा 49(5) के अनुसार IGST का क्रेडिट पहले IGST की देनदारी में लगता है, फिर शेष क्रेडिट CGST में और उसके बाद SGST या UTGST में (अधिनियम का पाठ)। नियम 88A के अनुसार IGST की देनदारी चुकाने के बाद शेष IGST क्रेडिट CGST और SGST या UTGST में किसी भी क्रम में लगाया जा सकता है। CGST का क्रेडिट पहले CGST में, फिर IGST में लगता है। SGST का क्रेडिट पहले SGST में, फिर IGST में लगता है। CGST का क्रेडिट SGST की देनदारी में और SGST का क्रेडिट CGST की देनदारी में नहीं लग सकता। धारा 49A के अनुसार CGST, SGST या UTGST का क्रेडिट तभी लगता है जब IGST का उपलब्ध क्रेडिट पहले पूरा उपयोग हो चुका हो। उपयोग का क्रम सरकार परिषद की सिफ़ारिश पर नियमों से तय कर सकती है (धारा 49B), इसलिए व्यवहार का क्रम नियमों में देखें। इस क्रम को नीचे के कार्य-उदाहरण में अंकों से देखें। आगे के संशोधन और नियम gst.gov.in और CBIC की अधिसूचनाओं में देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ।

मुख्य तथ्य

पंजीकरण का आवेदन
धारा 25(1): हर उस राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में अलग आवेदन जहाँ पंजीकरण की बाध्यता है, अधिनियम में तय अवधि के भीतर (CBIC, CGST अधिनियम)
पंजीकरण के फ़ॉर्म
REG-01 (आवेदन), REG-02 (पावती), REG-03 (नोटिस), REG-04 (उत्तर), REG-05 (अस्वीकृति), REG-06 (प्रमाणपत्र); नियम 8 से 10, मूल पाठ (CBIC)
GSTIN
15 अक्षर: राज्य कोड 2 + PAN 10 + इकाई कोड 2 + चेकसम 1 (नियम 10(1))
रिटर्न की धाराएँ
बाहरी आपूर्ति धारा 37; रिटर्न धारा 39; वार्षिक रिटर्न धारा 44; GSTR-3B नियम 61 (CBIC)
लेजर और भुगतान
इलेक्ट्रॉनिक कैश और क्रेडिट लेजर, धारा 49; शेष की वापसी धारा 49(6) और धारा 54 की शर्तों के अधीन
ITC की शर्तें
धारा 16(2): कर-बीजक या डेबिट नोट (क); आपूर्तिकर्ता द्वारा ब्योरा भरा जाना और खरीदार को सूचित होना (कक, वित्त अधिनियम 2021); माल या सेवा की प्राप्ति (ख); धारा 38 में सूचित क्रेडिट पर रोक न होना (खक, वित्त अधिनियम 2022); कर का वास्तविक भुगतान (ग); रिटर्न दाखिल (घ)
ITC की समय-सीमा के प्रावधान
धारा 16(4): समय-सीमा; धारा 16(5), 16(6): विशेष प्रावधान (वित्त (सं. 2) अधिनियम 2024 से जोड़े गए, पूर्व-प्रभाव सहित); तिथियाँ आधिकारिक पाठ में देखें
ITC के उपयोग का क्रम
IGST पहले IGST में, फिर CGST और SGST; CGST और SGST क्रेडिट आपस में नहीं (धारा 49(5)); IGST क्रेडिट पहले पूरा उपयोग (धारा 49A); शेष IGST क्रेडिट CGST और SGST में किसी भी क्रम में (नियम 88A)
वर्तमान प्रक्रिया
पंजीकरण, रिटर्न और भुगतान की वर्तमान प्रक्रिया के लिए GST पोर्टल gst.gov.in

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • कैश लेजर और क्रेडिट लेजर को एक बताना। कैश में जमा राशि है और किसी भी देय राशि में लगती है; क्रेडिट लेजर का उपयोग केवल कर के भुगतान में होता है।
  • CGST का क्रेडिट SGST की देनदारी में लगा देना। धारा 49(5) के अनुसार दोनों आपस में नहीं लगते; धारा 49A के अनुसार IGST क्रेडिट सबसे पहले पूरा लगता है।
  • क्रेडिट की शर्तों में केवल बीजक लिखना। बीजक, आपूर्तिकर्ता के ब्योरे का पोर्टल पर सूचित होना, प्राप्ति, सूचित क्रेडिट पर रोक न होना, कर का वास्तविक भुगतान और रिटर्न दाखिल, सब लिखें।
  • GSTIN को कोई यादृच्छिक संख्या बताना। उसकी 15 अक्षर की बनावट है: राज्य कोड, PAN, इकाई कोड और चेकसम।
  • दरें, सीमाएँ और नियत तिथियाँ याद के भरोसे लिखना। वे बदलती हैं; प्रवाह लिखें और वर्तमान जानकारी के लिए gst.gov.in का संदर्भ दें।