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पेपर I · इकाई III · भाग ग

GST: बुनियादी जानकारी

GST की पृष्ठभूमि, 101वाँ संशोधन, अनुच्छेद 246A-269A-279A, GST परिषद्, CGST-SGST-IGST की संरचना और GSTN; बिना दरों के हल उदाहरणों सहित।

  • 101वाँ संशोधन
  • GST परिषद्
  • CGST-SGST-IGST
  • GSTN
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग ग (लेखांकन एवं अंकेक्षण): "Basic knowledge of Goods and Services Tax." इस पृष्ठ पर GST की बुनियाद है: अर्थ, पृष्ठभूमि, संवैधानिक ढाँचा, GST परिषद् और संरचना। पंजीकरण, रिटर्न और इनपुट टैक्स क्रेडिट अलग पृष्ठ पर हैं। इस पृष्ठ पर कोई दर या सीमा नहीं दी गई है; वर्तमान दरें और सीमाएँ GST के आधिकारिक पोर्टल gst.gov.in पर देखें।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • सिलेबस में 'Basic knowledge of GST' दर्ज है, पर 2013, 2016, 2018, 2021, 2023 और 2024 के पेपरों में GST पर सीधा प्रश्न नहीं पूछा गया। यह अब तक खुला हुआ विषय है और हाल का होने से समसामयिक प्रश्न की संभावना बनती है (अनुमान)।
  • प्रश्न बने तो अवधारणा, संवैधानिक अनुच्छेद (246A, 269A, 279A), GST परिषद्, CGST-SGST-IGST का ढाँचा और GST से पहले की समस्याएँ पूछे जा सकते हैं; ये बिंदु नीचे स्रोत-सहित दिए हैं।
  • GST के नियम, दरें और सीमाएँ समय-समय पर बदलती हैं। इसलिए परीक्षा में ढाँचा और सिद्धांत लिखें; आँकड़े तभी लिखें जब पक्के याद हों।

पहले एक तस्वीर: एक देश, एक बाज़ार

मान लीजिए रेल से पूरे देश की यात्रा करनी है। यदि हर राज्य की सीमा पर नया टिकट खरीदना पड़े, नई कतार लगे और पिछले टिकट का पैसा आगे न गिना जाए, तो यात्रा कितनी थकाऊ होगी? GST से पहले माल की यात्रा ऐसी ही थी (समझाने के लिए जोड़ी गई तुलना)। PIB का तथ्य-पत्र बताता है कि 1 जुलाई 2017 से पहले भारत की अप्रत्यक्ष कर-व्यवस्था बहुत बँटी हुई थी: केंद्र और राज्य अलग-अलग माल और सेवाओं पर कर लगाते थे, दरें, कानून और प्रक्रियाएँ अनेक थीं, और राज्यों की सीमा पर कर-नाके लगे रहते थे। तथ्य-पत्र के अनुसार इससे उद्योग का बोझ बढ़ता था और हर राज्य अपने-आप में अलग बाज़ार बन जाता था।

GST यानी वस्तु एवं सेवा कर इसी बिखराव को समेटने के लिए आया। संविधान के अनुच्छेद 366(12A) में इसकी परिभाषा दी गई है: वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति (supply) पर लगा कोई भी कर, केवल मानव-उपभोग की मदिरा की आपूर्ति पर लगने वाले करों को छोड़कर (CBIC की प्रस्तुति के अनुसार)। यहाँ 'आपूर्ति' शब्द महत्त्वपूर्ण है: केंद्रीय GST अधिनियम की धारा 7(1) के अनुसार इसमें प्रतिफल के बदले, व्यवसाय के क्रम में या उसकी अभिवृद्धि में की गई सभी प्रकार की आपूर्ति आती है, जैसे बिक्री, अंतरण, विनिमय, किराया, पट्टा या निपटान, साथ ही प्रतिफल के बदले सेवाओं का आयात।

सरल भाषा में, GST उस समय लगता है जब कोई माल या सेवा किसी को सौंपी जाती है, चाहे बिक्री से, किराये से या किसी और रूप में। पुराने कर कभी माल के निर्माण पर लगते थे, कभी बिक्री पर और कभी सेवा पर; GST ने इन सबको 'आपूर्ति' की एक ही कसौटी पर ला दिया।

GST से पहले की कर-व्यवस्था और उसकी समस्याएँ

CBIC की प्रस्तुति के अनुसार GST से पहले केंद्र और राज्य, दोनों के अलग-अलग कर थे। केंद्र के करों में उत्पाद शुल्क, अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, औषधीय और प्रसाधन-सामग्री अधिनियम के अंतर्गत उत्पाद शुल्क, अतिरिक्त सीमा-शुल्क (CVD और SAD), सेवा कर तथा अधिभार और उपकर शामिल थे। राज्यों के करों में राज्य वैट या बिक्री कर, केंद्रीय बिक्री कर, क्रय कर, मनोरंजन कर (स्थानीय निकायों वाले को छोड़कर), विलासिता कर, प्रवेश कर, लॉटरी-सट्टा-जुआ पर कर और अधिभार तथा उपकर आते थे। PIB के अनुसार GST ने 17 बड़े कर और 13 उपकर समाहित किए।

इस व्यवस्था की कमियाँ PIB के तथ्य-पत्र में गिनाई गई हैं: दरों, कानूनों और प्रक्रियाओं की बहुलता से अनुपालन का भारी बोझ; कर पर कर, जैसे वैट उस मूल्य पर लगना जिसमें उत्पाद शुल्क पहले से जुड़ा हो; माल के एक राज्य से दूसरे में जाने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट की कड़ी टूटना, जिससे व्यापारी की छिपी लागत बढ़ती थी; और राज्यों की सीमाओं पर कर-नाकों से माल की आवाजाही में रुकावट। तथ्य-पत्र यह भी कहता है कि उद्योग का कारखाना या गोदाम कहाँ लगे, यह निर्णय विशुद्ध कारोबारी कारणों की जगह कर-व्यवस्था से प्रभावित होता था।

GST से पहले और GST के बाद: मुख्य अंतर

बिंदुGST से पहलेGST के बाद
करों की संख्याअनेक केंद्रीय और राज्य कर तथा उपकरअनेक करों का समाहित होना (PIB: 17 कर, 13 उपकर)
कर पर करकुछ करों में कर के मूल्य पर भी करइनपुट टैक्स क्रेडिट से कड़ी जुड़ी रहने का प्रावधान
अंतर-राज्यीय आवाजाहीसीमा पर कर-नाकेकर-नाकों का हटना (PIB के अनुसार)
कानून और प्रक्रियाअनेक अधिनियम और प्रक्रियाएँसमान कानून का ढाँचा; समान, कंप्यूटरीकृत प्रक्रिया
बाज़ारहर राज्य अलग बाज़ार जैसाएक राष्ट्रीय बाज़ार का लक्ष्य
कर-अधिकारकेंद्र माल पर, राज्य सेवा-बिक्री पर बँटेकेंद्र और राज्य दोनों को एक साथ लगाने की शक्ति

GST की यात्रा: प्रमुख पड़ाव

  1. 2000

    GST की अवधारणा, मॉडल बनाने के लिए समिति

  2. 2006

    बजट 2006-07 में 1 अप्रैल 2010 से GST की घोषणा

  3. 2009

    पहला चर्चा-पत्र

  4. 2011

    संविधान (115वाँ संशोधन) विधेयक; 2014 में लोक सभा भंग होने पर व्यपगत

  5. 2014-15

    संविधान (122वाँ संशोधन) विधेयक प्रस्तुत; मई 2015 में लोक सभा से पारित (PIB)

  6. अगस्त 2016

    राज्य सभा 3.8.2016 और लोक सभा 8.8.2016 को पारित; 101वाँ संशोधन अधिनियम

  7. सितंबर 2016

    संशोधन लागू; GST परिषद् का गठन और पहली बैठक

  8. अप्रैल-मई 2017

    CGST, IGST, UTGST और क्षतिपूर्ति उपकर अधिनियम पारित; परिषद् ने सभी नियमों की सिफ़ारिश की

  9. 1 जुलाई 2017

    GST का शुभारंभ

संवैधानिक ढाँचा: 101वाँ संशोधन

संविधान (101वाँ संशोधन) अधिनियम, 2016 ने GST के लिए रास्ता खोला। CBIC की प्रस्तुति के अनुसार विधेयक राज्य सभा में 3 अगस्त 2016 और लोक सभा में 8 अगस्त 2016 को पारित हुआ और 8 सितंबर 2016 को अधिनियम के रूप में अधिसूचित हुआ। PIB का तथ्य-पत्र अगस्त 2016 में अधिनियम का बनना और सितंबर 2016 में संवैधानिक बदलावों का लागू होना बताता है, जिसके साथ GST परिषद् बनी और उसकी पहली बैठक हुई।

संशोधन की मुख्य बातें तालिका में हैं। इनमें सबसे ज़रूरी बात यह है कि पहली बार केंद्र और राज्य, दोनों को माल और सेवाओं पर एक साथ कर लगाने और वसूलने का अधिकार मिला (अनुच्छेद 246A)। अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर कर केंद्र लगाता है (अनुच्छेद 269A), और नीति तथा दरों जैसे प्रश्नों पर सिफ़ारिश GST परिषद् करती है (अनुच्छेद 279A)।

GST से जुड़े प्रमुख संवैधानिक प्रावधान

प्रावधानविषय
अनुच्छेद 246Aमाल और सेवा कर पर केंद्र और राज्य दोनों की समवर्ती शक्ति: लगाने और वसूलने की
अनुच्छेद 269Aअंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य में आपूर्ति (आयात सहित) पर कर, जिसे केंद्र लगाएगा और वसूलेगा
अनुच्छेद 279AGST परिषद्
अनुच्छेद 366(12A)'माल और सेवा कर' की परिभाषा
अनुच्छेद 366(26A)'सेवा' का अर्थ: माल के अतिरिक्त कुछ भी
अनुच्छेद 366(26B)'राज्य': कुछ अनुच्छेदों के लिए विधानमंडल वाला संघ राज्य क्षेत्र भी शामिल
संशोधन अधिनियम का खंड 19राज्यों को राजस्व-हानि की क्षतिपूर्ति पाँच वर्ष तक, GST परिषद् की सिफ़ारिश पर

GST परिषद्: संघवाद का मंच

GST परिषद् संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत बनी संस्था है। CBIC की प्रस्तुति के अनुसार इसका अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री होता है, उपाध्यक्ष राज्य मंत्रियों में से चुना जाता है, और सदस्य होते हैं केंद्र के वित्त राज्य मंत्री तथा सभी राज्यों के वित्त या कराधान मंत्री। गणपूर्ति कुल सदस्यों का 50 प्रतिशत है और निर्णय के लिए 75 प्रतिशत बहुमत चाहिए, जिसमें केंद्र के मत का भार एक-तिहाई और सभी राज्यों के मतों का भार दो-तिहाई होता है।

परिषद् का काम GST से जुड़ी हर बात पर सिफ़ारिश करना है: कानून, नियम, दरें और छूट। PIB इसे सहकारी संघवाद का उदाहरण बताता है और कहता है कि लगभग सभी निर्णय सदस्यों की सहमति से हुए। CBIC की प्रस्तुति (2019) के अनुसार तब तक 34 बैठकों में किसी निर्णय के लिए मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी थी। यह आँकड़ा उस तिथि का है; आगे की बैठकों के बारे में आधिकारिक विज्ञप्तियाँ देखें।

परीक्षा-दृष्टि से यह याद रखें: परिषद् सिफ़ारिश करती है, लेकिन 75 प्रतिशत की शर्त में राज्यों का सम्मिलित भार दो-तिहाई है। इससे न तो केंद्र अकेले निर्णय थोप सकता है और न कुछ राज्य अकेले निर्णय रोक सकते हैं: दोनों को एक-दूसरे का सहयोग चाहिए (विश्लेषण)।

GST की संरचना: CGST, SGST, IGST

भारत में GST दोहरी संरचना का है, क्योंकि कर केंद्र और राज्य दोनों वसूलते हैं। राज्य के भीतर होने वाली आपूर्ति पर दो कर लगते हैं: केंद्रीय GST (CGST) और राज्य GST (SGST, संघ राज्य क्षेत्र के लिए UTGST)। केंद्रीय GST अधिनियम की धारा 9(1) में CGST को राज्य के भीतर की आपूर्ति पर लगने वाला कर बताया गया है। जब माल या सेवा एक राज्य से दूसरे राज्य में जाती है, तब केंद्र एकीकृत GST (IGST) लगाता है और वसूलता है (अनुच्छेद 269A)। आयात भी इसी अनुच्छेद में आता है।

इस ढाँचे का फ़ायदा यह है कि अंतर-राज्यीय माल पर कर की कड़ी टूटती नहीं: खरीदने वाला व्यापारी IGST को इनपुट टैक्स क्रेडिट की तरह आगे गिन सकता है। CBIC की प्रस्तुति के अनुसार मानव-उपभोग की मदिरा GST से बाहर रही; पाँच पेट्रोलियम उत्पादों (कच्चा तेल, हाई स्पीड डीज़ल, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस और विमान ईंधन) पर GST परिषद् जो तिथि तय करे उससे लगना था; तंबाकू GST में है, पर उस पर केंद्र को अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने की शक्ति है; और स्थानीय निकायों का मनोरंजन कर उनके पास रहा। यह स्थिति 2019 की प्रस्तुति की है; वर्तमान सूची परिषद् के निर्णयों और gst.gov.in पर देखें।

मानचित्र: GST की संरचना

GST (दोहरी संरचना)

राज्य के भीतर आपूर्ति

  • CGST (केंद्र को)
  • SGST या UTGST (राज्य या संघ राज्य क्षेत्र को)

राज्यों के बीच आपूर्ति और आयात

  • IGST (केंद्र लगाता और वसूलता है)

GST परिषद् (अनुच्छेद 279A)

  • अध्यक्ष: केंद्रीय वित्त मंत्री
  • सदस्य: राज्यों के वित्त मंत्री
  • 75 प्रतिशत बहुमत; भार केंद्र 1/3, राज्य 2/3

GST की मुख्य विशेषताएँ और GSTN

PIB के अनुसार GST की मुख्य विशेषताएँ ये हैं: माल और सेवाओं की आपूर्ति पर एक समान कर-ढाँचा जिससे देश एक बाज़ार बने; पूरे देश में समान प्रक्रियाएँ; सरल पंजीकरण; एक रिटर्न; न्यूनतम भौतिक संपर्क; तेज़ रिफ़ंड; पूरी तरह आईटी-आधारित प्रणाली; और माल की मुक्त आवाजाही, क्योंकि कर-नाके हटे। ये सरकारी तथ्य-पत्र के दावे हैं; इनकी व्यावहारिक सफलता पर बहस हो सकती है।

इस आईटी-आधारित प्रणाली की रीढ़ वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (GSTN) है। PIB के अनुसार यह केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई विशेष-उद्देश्य संस्था है, जिसका काम व्यावसायिक प्रक्रियाओं को स्वचालित करना है और जिसमें केंद्र और राज्यों की बराबर की भागीदारी है। पंजीकरण, रिटर्न और भुगतान जैसे काम इसी के माध्यम से पोर्टल (gst.gov.in) पर होते हैं; प्रक्रिया अगले पृष्ठ में है।

PIB की प्रेस विज्ञप्ति में एक ख़ास सिद्धांत आता है: खरीदार को इनपुट पर कर का क्रेडिट तभी मिलेगा जब विक्रेता ने वास्तव में सरकार को कर चुकाया हो। इससे दोनों पक्षों पर अनुपालन का दबाव बनता है। केंद्रीय GST अधिनियम की धारा 16(2) भी क्रेडिट के लिए शर्तें रखती है, जिनमें यह भी है कि जिस कर पर क्रेडिट लिया जा रहा है वह वास्तव में सरकार को चुकाया जा चुका हो।

विश्लेषण: GST से अपेक्षित लाभ और व्यावहारिक चुनौतियाँ

सरकारी तथ्य-पत्रों में GST से जो लाभ अपेक्षित बताए गए हैं, वे तीन स्तरों पर गिने जा सकते हैं। व्यापारी के लिए कर पर कर घटने और क्रेडिट की कड़ी बने रहने से लागत का हिसाब साफ़ होता है। उपभोक्ता के लिए आदर्श स्थिति यह है कि कर की पूरी कड़ी का बोझ अंत में एक बार, पारदर्शी रूप में पड़े। सरकार के लिए एक साझा आईटी-मंच से कर-आधार का दायरा बढ़ाना और चोरी पर नज़र रखना आसान होता है। यह सब अपेक्षा है; वास्तविक परिणाम आँकड़ों और समय के साथ तय होते हैं (विश्लेषण)।

व्यावहारिक चुनौतियों की चर्चा भी परीक्षा-उत्तर को संतुलित बनाती है। छोटे कारोबारियों के लिए नई ऑनलाइन प्रणाली सीखने और नियमित रिटर्न भरने का अनुपालन-बोझ एक चुनौती रही है। दोहरी संरचना में केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बनाए रखना, पोर्टल की तकनीकी क्षमता और रिटर्न-मिलान की जटिलता भी बार-बार उठने वाले विषय हैं। राज्यों को राजस्व-हानि की क्षतिपूर्ति का प्रावधान इसी चिंता से जुड़ा है कि कर-अधिकार साझा करने पर राज्यों की आय सुरक्षित रहे। परीक्षा में 'GST के लाभ और सीमाएँ' जैसे प्रश्न पर दोनों पक्ष एक-एक पंक्ति में लिखें और निष्कर्ष में परिषद् की भूमिका जोड़ें (विश्लेषण)।

मुख्य तथ्य

संविधान संशोधन
101वाँ संशोधन अधिनियम, 2016; राज्य सभा 3.8.2016, लोक सभा 8.8.2016; 8.9.2016 को अधिसूचित (CBIC)
GST का शुभारंभ
30 जून-1 जुलाई 2017 की मध्यरात्रि, संसद का केंद्रीय कक्ष (PIB)
अनुच्छेद 246A, 269A, 279A
समवर्ती शक्ति; केंद्र द्वारा IGST; GST परिषद् (CBIC)
GST परिषद् का निर्णय-नियम
75 प्रतिशत बहुमत; केंद्र 1/3 और राज्य 2/3 भार (CBIC)
समाहित कर
PIB के अनुसार 17 कर और 13 उपकर
GSTN
केंद्र द्वारा बनाई विशेष-उद्देश्य संस्था; केंद्र और राज्यों की बराबर भागीदारी (PIB)
GST से बाहर रही मदें (2019 की प्रस्तुति)
मानव-उपभोग की मदिरा; पाँच पेट्रोलियम उत्पाद परिषद् की तिथि तक; तंबाकू पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क की शक्ति

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • GST को केवल 'केंद्र का कर' लिखना। यह केंद्र और राज्य दोनों का साझा, दोहरी संरचना वाला कर है।
  • IGST और CGST-SGST को गड्डमड्ड करना। राज्य के भीतर CGST और SGST; राज्यों के बीच और आयात पर IGST।
  • GST परिषद् को केंद्र-नियंत्रित बताना। निर्णय के लिए 75 प्रतिशत बहुमत चाहिए, जिसमें राज्यों का भार दो-तिहाई है।
  • पुरानी तिथि या पुरानी प्रस्तुति के आँकड़े (जैसे परिषद् की 34 बैठकें) वर्तमान बताकर लिखना।
  • दरें और सीमाएँ याद के भरोसे लिखना। वे बदलती रहती हैं; ढाँचा लिखें और दरों के लिए gst.gov.in का संदर्भ दें।