सरकारी अंकेक्षण: अर्थ, उद्देश्य, दायरा, कंपनी के अंकेक्षण से अंतर और रिपोर्ट का रास्ता
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग C (Accounting and Auditing): "Meaning and objectives of auditing, audit programme, basic knowledge of social, performance and efficiency audit; elementary knowledge of government audit." इस पृष्ठ पर "government audit" का प्रारंभिक ज्ञान है: अर्थ, उद्देश्य, दायरा और रिपोर्ट का रास्ता। CAG की संस्था का पूरा परिचय लोक प्रशासन के CAG पृष्ठ पर है।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2013-2024 के उपलब्ध छह पेपरों में सरकारी अंकेक्षण पर सीधा प्रश्न 2024 में 2 अंक का आया: सरकारी अंकेक्षण के दो उद्देश्य। 2021 और 2023 के CAG वाले प्रश्न भी इसी क्षेत्र से जुड़ते हैं, जिनके अलग हल इस पृष्ठ के साथ जुड़े CAG-भूमिका पृष्ठ पर हैं।
- सिलेबस में इसके लिए "elementary knowledge" लिखा है, यानी प्रश्न बुनियादी होंगे: अर्थ, उद्देश्य, किसका अंकेक्षण, किसकी रिपोर्ट। इस पृष्ठ में चारों के लिए तैयार बिंदु हैं।
- सरकारी और कंपनी के अंकेक्षण का अंतर यहाँ का सबसे अच्छा तुलनात्मक बिंदु है। यह 5 अंक के प्रश्न के लिए भी तैयार है (विश्लेषण)।
पहले सरल भाषा में: करदाता का पैसा और उसका हिसाब
आप अपने घर का हिसाब ख़ुद रखते हैं और ख़ुद ही उसकी जाँच करते हैं तो किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ता। पर सरकार जो पैसा ख़र्च करती है वह करदाताओं का है और उसे ख़र्च करने की अनुमति विधायिका, यानी संसद या विधान-मंडल, देती है। विधायिका ने जिस काम के लिए जितना पैसा मंज़ूर किया, सरकार ने उसी काम पर, उतना ही और नियम से ख़र्च किया या नहीं, यह देखने के लिए एक ऐसा व्यक्ति चाहिए जो सरकार के अधीन न हो। सरकारी अंकेक्षण (government audit) यही स्वतंत्र जाँच है, और भारत में इसकी संवैधानिक ज़िम्मेदारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के पास है।
परीक्षा के लिए परिभाषा: CAG के लेखा-परीक्षा मानक 2017 के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र का अंकेक्षण साक्ष्य को वस्तुनिष्ठ ढंग से जुटाने और परखने की व्यवस्थित प्रक्रिया है, ताकि पता चले कि जानकारी या वास्तविक स्थिति तय कसौटियों के अनुरूप है या नहीं। यह विधायिका, निगरानी संस्थाओं और आम जनता को सार्वजनिक नीतियों, कार्यक्रमों और कार्यों के प्रबंधन और प्रदर्शन के बारे में स्वतंत्र और वस्तुनिष्ठ आकलन देता है। सरकारी अंकेक्षण इसी का वह रूप है जो केंद्र और राज्य सरकारों के लेखों, ख़र्च, प्राप्तियों और सरकारी निधि से चलने वाली संस्थाओं पर होता है (परीक्षा के लिए यह सार विश्लेषण है)।
ध्यान रखें कि सरकारी अंकेक्षण केवल "हिसाब का जोड़-घटाव" नहीं है। CAG के मानक तीन तरह के अंकेक्षण गिनाते हैं: वित्तीय, अनुपालन और निष्पादन। इनमें पहला सही लेखों की जाँच है, दूसरा नियम-क़ानून के पालन की और तीसरा मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता की।
उद्देश्य: सरकारी अंकेक्षण किसलिए
मानक 2017 का पैरा 2.1.3 कहता है कि सार्वजनिक क्षेत्र का अंकेक्षण सुशासन में चार तरह से योगदान देता है। पहला, इच्छित उपयोगकर्ताओं को स्वतंत्र, वस्तुनिष्ठ और विश्वसनीय जानकारी देना, जो पर्याप्त और उपयुक्त साक्ष्य पर टिकी हो। दूसरा, जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना तथा लोक-निधि और संपत्ति के सही उपयोग में निरंतर सुधार और भरोसा कायम रखना। तीसरा, उन संस्थाओं को मज़बूत करना जो सार्वजनिक क्षेत्र पर सामान्य निगरानी और सुधार का काम करती हैं (जैसे विधायिका की समितियाँ)। चौथा, ज्ञान, व्यापक विश्लेषण और ठोस सिफ़ारिशों से बदलाव के लिए प्रोत्साहन पैदा करना।
इसके साथ DPC अधिनियम की धारा 13 की भाषा एक ठोस, क़ानूनी उद्देश्य देती है: यह पता लगाना कि लेखों में जो राशि ख़र्च दिखाई गई है, वह जिस सेवा या प्रयोजन पर लगी, उसके लिए क़ानूनी रूप से उपलब्ध और लागू थी या नहीं, और ख़र्च उस प्राधिकार के अनुरूप है या नहीं जो उसे शासित करता है। लोक लेखा समिति का भी यही दायित्व है कि वह संतुष्ट हो कि राशि क़ानूनी रूप से उपलब्ध थी, ख़र्च प्राधिकार के अनुरूप था और हर पुनर्विनियोजन निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ (लोक सभा सचिवालय के परिचय-नोट के अनुसार)।
सरकारी अंकेक्षण के उद्देश्य: परीक्षा के लिए सारणी
| उद्देश्य | स्वरूप | आधार |
|---|---|---|
| ख़र्च विधि-सम्मत और प्राधिकार के अनुरूप हो, यह देखना | वैधता और नियमितता | DPC अधिनियम, धारा 13(क) |
| जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना; लोक-निधि के सही उपयोग में भरोसा | जवाबदेही | मानक 2017, पैरा 2.1.3(ख) |
| विधायिका और जनता को स्वतंत्र, वस्तुनिष्ठ, विश्वसनीय जानकारी देना | सूचना और आश्वासन | मानक 2017, पैरा 2.1.2 और 2.1.3(क) |
| निगरानी रखने वाली संस्थाओं (जैसे लोक लेखा समिति) को सक्षम बनाना | संस्थागत मज़बूती | मानक 2017, पैरा 2.1.3(ग) |
| सिफ़ारिशों से सुधार के लिए प्रोत्साहन देना | सुधार | मानक 2017, पैरा 2.1.3(घ) |
| कार्यक्रमों की मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता परखना | निष्पादन | मानक 2017, पैरा 2.2.3 और 3.3.1 |
दो अंक के उत्तर में पहली दो पंक्तियाँ सबसे सुरक्षित हैं। पाँच अंक के उत्तर में पूरी सारणी का सार दें।
दायरा: किसका अंकेक्षण CAG करता है
अनुच्छेद 149 के अनुसार CAG के कर्तव्य और शक्तियाँ संसद की बनाई विधि से तय होती हैं, और वह विधि 1971 का DPC अधिनियम है। मानक 2017 के अनुसार इस अधिनियम की धाराएँ 13 से 21 और 24 अंकेक्षण के सामान्य प्रावधान बताती हैं। CAG का अंकेक्षण-अधिदेश वैधानिक निगमों, सरकारी कंपनियों, सोसायटी, ट्रस्ट या ग़ैर-लाभकारी कंपनी के रूप में बने स्वायत्त निकायों, शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों और क़ानून द्वारा उसे सौंपी गई किसी अन्य संस्था तक फैला है।
अगली तालिका धाराओं को सरल रूप में रखती है। धारा 23 के अनुसार CAG लेखा-परीक्षा के दायरे और विस्तार पर विनियम बना सकता है, और धारा 24 उसे यह अधिकार देती है कि परिस्थिति के अनुसार किसी विस्तृत अंकेक्षण का कोई भाग छोड़कर सीमित जाँच लागू करे। यानी हर रुपये की जाँच नहीं होती; जाँच चयन और जोखिम पर आधारित है (विश्लेषण)।
DPC अधिनियम 1971: क्या-क्या अंकेक्षण का विषय है
| धारा | अंकेक्षण का विषय |
|---|---|
| धारा 13 | संघ, प्रत्येक राज्य और विधान-सभा वाले संघ राज्य-क्षेत्र की संचित निधि से सारा ख़र्च; आकस्मिकता निधि और लोक लेखे के लेन-देन; सरकारी विभागों के व्यापारिक, विनिर्माण, लाभ-हानि लेखे और तुलन-पत्र |
| धारा 14 | संघ या राज्य की संचित निधि से अनुदान या ऋण द्वारा "पर्याप्त रूप से वित्तपोषित" निकाय की सारी प्राप्तियाँ और ख़र्च |
| धारा 15 | किसी विशेष प्रयोजन के लिए दिए गए अनुदान या ऋण में शर्तों की पूर्ति की जाँच-प्रक्रिया की परख |
| धारा 16 | संचित निधि में जमा होने वाली सारी प्राप्तियाँ (राजस्व): निर्धारण, वसूली और सही बँटवारे पर प्रभावी जाँच की व्यवस्था |
| धारा 17 | कार्यालयों और विभागों के भंडार और स्टॉक के लेखे |
| धारा 19 और 19-क | सरकारी कंपनियों का अंकेक्षण कंपनी अधिनियम के प्रावधानों से और संसद के क़ानून से बने निगमों का उनके अपने क़ानून से; रिपोर्ट संबंधित सरकार को, जो सदन में रखवाती है |
| धारा 20 | जिस निकाय का अंकेक्षण क़ानून ने नहीं सौंपा, उसका अंकेक्षण राष्ट्रपति, राज्यपाल या प्रशासक के अनुरोध पर, CAG से परामर्श के बाद, सहमत शर्तों पर |
धारा 19 में 1956 के कंपनी अधिनियम का नाम है; आज सरकारी कंपनियों पर कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 139 और 143 लागू होती हैं।
सरकारी अंकेक्षण और कंपनी के अंकेक्षण में अंतर
कंपनी का वैधानिक अंकेक्षक सामान्यतः कंपनी के लिए नियुक्त होता है और अंशधारकों को रिपोर्ट देता है। सरकारी अंकेक्षण का मूल सरोकार लोक-निधि और विधायिका के प्रति जवाबदेही से है। सरकारी कंपनी में दोनों का मेल दिखता है: कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 139(5) और 139(7) के अनुसार सरकारी कंपनी के सांविधिक अंकेक्षक की नियुक्ति CAG करता है। धारा 143(5) के अनुसार वह अंकेक्षक को उसके अंकेक्षण की रीति पर निर्देश भी देता है, और धारा 143(6) के अनुसार अंकेक्षक की रिपोर्ट मिलने के साठ दिन के भीतर CAG को पूरक अंकेक्षण (supplementary audit) कराने तथा रिपोर्ट पर टिप्पणी करने या उसे पूरक बनाने का अधिकार है।
इस अंतर को परीक्षा में तालिका में लिखना सबसे अच्छा रहता है। उसमें चार-पाँच कसौटियाँ पर्याप्त हैं: कौन नियुक्त करता है, किसे रिपोर्ट, उद्देश्य, दायरा और स्वतंत्रता का आधार।
सरकारी अंकेक्षण बनाम कंपनी (वाणिज्यिक) अंकेक्षण
सरकारी अंकेक्षण
अंकेक्षक कौनCAG, संविधान के अनुच्छेद 148 के अंतर्गत नियुक्त पद
रिपोर्ट किसेराष्ट्रपति या राज्यपाल के माध्यम से संसद या विधान-मंडल को (अनुच्छेद 151)
मूल उद्देश्यजवाबदेही, वैधता, नियमितता, पारदर्शिता, जनहित में सही उपयोग
दायराप्राप्तियाँ, ख़र्च, भंडार, अनुदान, निगम, सरकारी कंपनियाँ, स्थानीय निकाय
अंकेक्षण के प्रकारवित्तीय, अनुपालन और निष्पादन
कंपनी का वैधानिक अंकेक्षण
अंकेक्षक कौनकंपनी का सांविधिक अंकेक्षक; सरकारी कंपनी में नियुक्ति CAG करता है
रिपोर्ट किसेअंशधारकों को; सरकारी कंपनी की रिपोर्ट पर CAG का पूरक अंकेक्षण और टिप्पणी भी
मूल उद्देश्यवित्तीय विवरण सही और निष्पक्ष तस्वीर देते हैं या नहीं
दायराकंपनी के वित्तीय विवरण
अंकेक्षण के प्रकारमुख्यतः वित्तीय; नियमों के अनुसार कुछ अतिरिक्त रिपोर्टिंग
सरकारी कंपनी की पंक्तियाँ कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 139, 143(5) और 143(6) पर आधारित हैं। बाक़ी पंक्तियाँ परीक्षा के लिए तुलनात्मक सार हैं (विश्लेषण)।
रिपोर्ट का रास्ता और लोक लेखा समिति
अनुच्छेद 151 के अनुसार संघ के लेखों से जुड़ी CAG की रिपोर्टें राष्ट्रपति को सौंपी जाती हैं, जो उन्हें संसद के हर सदन के सामने रखवाता है। राज्य के लेखों की रिपोर्टें राज्यपाल को जाती हैं, जो उन्हें राज्य विधान-मंडल के सामने रखवाता है। इसके बाद विधायिका की लोक लेखा समिति (PAC) रिपोर्ट की जाँच करती है। लोक सभा सचिवालय के परिचय-नोट के अनुसार संसद की इस समिति में अधिकतम 22 सदस्य होते हैं: 15 लोक सभा के और अधिकतम 7 राज्य सभा के। 1967-68 में पहली बार विपक्ष के सदस्य को अध्यक्ष बनाया गया और यह परंपरा तब से चली आ रही है; CAG समिति का "मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक" है।
समिति केवल ख़र्च की औपचारिकता नहीं, उसकी "विवेकपूर्णता, ईमानदारी और मितव्ययिता" तक जाती है, यानी नुक़सान, निरर्थक ख़र्च और वित्तीय अनियमितताओं के मामले भी परखती है। अगर किसी सेवा पर मंज़ूर रक़म से अधिक ख़र्च हुआ हो तो समिति उसकी परिस्थितियाँ देखकर सिफ़ारिश करती है। सरकारी कंपनियों और निगमों की रिपोर्टें धारा 19-क के अनुसार पहले संबंधित सरकार को जाती हैं, जो उन्हें संसद या विधान-मंडल के सामने रखवाती है।
सीमाएँ और सुधार (विश्लेषण)
सरकारी अंकेक्षण की पहली सीमा समय की है: अंकेक्षण ख़र्च के बाद होता है, इसलिए रिपोर्ट आने तक कई बार काम पूरा हो चुका होता है। दूसरी सीमा प्रभाव की है: CAG की रिपोर्ट सिफ़ारिश और निष्कर्ष देती है, कार्रवाई विधायिका की समिति और कार्यपालिका करती है। तीसरी, धारा 24 के कारण हर लेन-देन की जाँच नहीं होती; नमूना और जोखिम के आधार पर चयन होता है। चौथी, कुछ निकायों का अंकेक्षण पर्याप्त वित्तपोषण की शर्तों, पूर्व-अनुमोदन या सरकार के अनुरोध पर निर्भर है।
सुधार के बिंदु जो उत्तर में लिखे जा सकते हैं: रिपोर्ट समय पर सदन में रखी जाएँ, समितियाँ सिफ़ारिशों पर अनुवर्ती कार्रवाई की निगरानी करें, डिजिटल लेखों के सहारे निरंतर अंकेक्षण को बढ़ावा मिले और निष्पादन अंकेक्षण का दायरा बढ़ाया जाए। पर इन सुझावों को निष्कर्ष में विश्लेषण के रूप में ही लिखें, किसी आधिकारिक सुधार-योजना के रूप में नहीं।
आरेख: सरकारी अंकेक्षण का सफ़र
विधायिका की मंज़ूरी
बजट और अनुदान-माँगें
सरकार का ख़र्च
विभाग, निकाय, कंपनियाँ
CAG का अंकेक्षण
वित्तीय, अनुपालन, निष्पादन
रिपोर्ट
राष्ट्रपति या राज्यपाल को (अनुच्छेद 151)
सदन में प्रस्तुति
संसद या विधान-मंडल
लोक लेखा समिति
जाँच, सुनवाई, सिफ़ारिश
कार्रवाई
सरकार का उत्तर, अनुवर्ती जाँच
मुख्य तथ्य
- संवैधानिक आधार
- अनुच्छेद 148 से 151; कर्तव्य संसद की विधि से (अनुच्छेद 149)
- विधि
- CAG (कर्तव्य, शक्तियाँ और सेवा-शर्तें) अधिनियम, 1971; धाराएँ 13 से 21 और 24 में अंकेक्षण के सामान्य प्रावधान
- अंकेक्षण के तीन प्रकार
- वित्तीय, अनुपालन, निष्पादन (मानक 2017, पैरा 2.2)
- धारा 14 की शर्त
- अनुदान या ऋण कम से कम ₹25 लाख और कुल ख़र्च का कम से कम 75 प्रतिशत; ₹1 करोड़ या अधिक पर पूर्व-स्वीकृति से; शर्तें न रहने पर भी दो वर्ष और
- धारा 24
- आवश्यक हो तो विस्तृत अंकेक्षण का कोई भाग छोड़कर सीमित जाँच
- रिपोर्ट का रास्ता
- संघ: राष्ट्रपति; राज्य: राज्यपाल; दोनों सदन या विधान-मंडल के सामने रखवाते हैं (अनुच्छेद 151)
- लोक लेखा समिति
- अधिकतम 22 सदस्य: 15 लोक सभा, अधिकतम 7 राज्य सभा; विपक्ष के सदस्य को अध्यक्ष बनाने की परंपरा 1967-68 से
- सरकारी कंपनी
- CAG सांविधिक अंकेक्षक नियुक्त करता है (धारा 139(5), 139(7)); पूरक अंकेक्षण साठ दिन के भीतर (धारा 143(6))
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026
राजस्थान का पहलू
cag.gov.in पर महालेखाकार (लेखा-परीक्षा-I), राजस्थान का परिचय-पृष्ठ (देखा गया 2 अक्टूबर 2026) बताता है कि यह कार्यालय राज्य के सिविल विभागों, स्वायत्त निकायों, सरकारी कंपनियों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों का अनुपालन अंकेक्षण, वित्तीय प्रमाणन और निष्पादन अंकेक्षण करता है, CAG की रिपोर्टें तैयार करता है, राजस्थान सरकार के वित्त और विनियोग लेखों को प्रमाणित करता है और लोक लेखा समिति तथा स्थानीय निकाय समिति को सहायता देता है। महालेखाकार (लेखा-परीक्षा-II), राजस्थान, जयपुर की रिपोर्ट-सूची (देखी गई 2 अक्टूबर 2026) में राज्य वित्त पर अंकेक्षण रिपोर्ट, अनुपालन अंकेक्षण (सिविल), निष्पादन अंकेक्षण और वित्तीय अंकेक्षण जैसे वर्ग दिखते हैं। राज्य की रिपोर्टें अनुच्छेद 151(2) के अनुसार राज्यपाल को जाती हैं।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- सरकारी अंकेक्षण को केवल हिसाब की जाँच या "भ्रष्टाचार पकड़ना" लिख देना। उद्देश्य जवाबदेही, वैधता, नियमितता, पारदर्शिता और सुधार भी हैं।
- यह लिखना कि CAG की रिपोर्ट सीधे संसद को जाती है। अनुच्छेद 151 में रिपोर्ट राष्ट्रपति या राज्यपाल को जाती है, जो उसे सदन के सामने रखवाते हैं।
- धारा 14 में केवल ₹25 लाख लिख देना। 75 प्रतिशत की दूसरी शर्त भी साथ में लिखें।
- सरकारी अंकेक्षण और कंपनी के अंकेक्षण को एक मान लेना। सरकारी में विधायिका के प्रति जवाबदेही मुख्य है और नियुक्ति संवैधानिक पद से है।
- PAC में "ठीक 22 सदस्य" लिखना। लोक सभा सचिवालय के अनुसार समिति में 15 सदस्य लोक सभा के और अधिकतम 7 राज्य सभा के होते हैं, यानी कुल अधिकतम 22।
- 2 अंक के उत्तर में पूरी प्रक्रिया लिखना। दो उद्देश्य, एक-एक वाक्य में, पर्याप्त हैं।
केस: स्वीकृत राशि से अधिक ख़र्च
उदाहरण (काल्पनिक)काल्पनिक केस: मंज़ूरी से ज़्यादा ख़र्च और उसकी जाँच
(यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; किसी वास्तविक विभाग का वर्णन नहीं।) एक विभाग को सड़क-मरम्मत के लिए विधायिका से ₹100 करोड़ की अनुदान-माँग स्वीकृत हुई। साल के अंत में विभाग के लेखों में ख़र्च ₹104 करोड़ दिखा।
- लेखों से
- विनियोग लेखों में अनुदान के सामने वास्तविक ख़र्च रखा जाता है। यहाँ ख़र्च स्वीकृत राशि से ₹4 करोड़ अधिक है।
- अंकेक्षण
- अंकेक्षक देखता है कि अधिक रक़म किस आधार पर ख़र्च हुई, पुनर्विनियोजन नियमानुसार हुआ या नहीं और ख़र्च उस प्राधिकार के भीतर था या नहीं (धारा 13 की कसौटी)।
- रिपोर्ट
- निष्कर्ष CAG की रिपोर्ट में आते हैं। रिपोर्ट राज्यपाल के माध्यम से विधान-मंडल के सामने रखी जाती है।
- समिति
- लोक लेखा समिति अधिक ख़र्च की परिस्थितियाँ परखकर सिफ़ारिश करती है।
सीख
सीख: सरकारी अंकेक्षण का मूल प्रश्न यह है कि क्या ख़र्च विधायिका की मंज़ूरी और क़ानून की सीमा में रहा। इसी वजह से इसकी रिपोर्ट विधायिका को जाती है, किसी विभाग-प्रमुख को नहीं।
कार्य-उदाहरण: क्या निकाय "पर्याप्त रूप से वित्तपोषित" है?
हल सहित उदाहरणधारा 14 की कसौटी पर तीन निकायों का परीक्षण (काल्पनिक संख्याएँ)
दिया है
- धारा 14 की व्याख्या के अनुसार निकाय "पर्याप्त रूप से वित्तपोषित" तब माना जाता है जब किसी वित्तीय वर्ष में संचित निधि से उसे मिला अनुदान कम से कम ₹25 लाख और कुल ख़र्च का कम से कम 75 प्रतिशत।
- तीन काल्पनिक निकाय: निकाय अ: अनुदान ₹30 लाख, कुल ख़र्च ₹36 लाख। निकाय ब: अनुदान ₹40 लाख, कुल ख़र्च ₹70 लाख। निकाय स: अनुदान ₹1.2 करोड़, कुल ख़र्च ₹2 करोड़।
- 1निकाय अ अनुदान ₹30 लाख ≥ ₹25 लाख। अनुपात: 30 ÷ 36 × 100 = 83.3 प्रतिशत ≥ 75 प्रतिशत। दोनों शर्तें पूरी, इसलिए CAG अंकेक्षण करेगा (धारा 14(1))।
- 2निकाय ब अनुदान ₹40 लाख ≥ ₹25 लाख, पर अनुपात 40 ÷ 70 × 100 = 57.1 प्रतिशत < 75 प्रतिशत। शर्त पूरी नहीं, इसलिए धारा 14(1) लागू नहीं।
- 3निकाय स अनुपात 120 ÷ 200 × 100 = 60 प्रतिशत < 75 प्रतिशत, पर अनुदान कम से कम ₹1 करोड़ है। धारा 14(2) के अनुसार राष्ट्रपति या राज्यपाल की पूर्व-स्वीकृति से CAG अंकेक्षण कर सकता है।
- 4आगे के दो वर्ष जिस निकाय का अंकेक्षण इस आधार पर हो चुका हो, उसे शर्तें अगले वर्षों में पूरी न होने पर भी दो और वर्ष तक CAG अंकेक्षण करता रहता है (धारा 14(3))।
निष्कर्ष: निष्कर्ष: दोनों शर्तें, राशि की न्यूनतम सीमा और कुल ख़र्च का अनुपात, साथ-साथ जाँचें। एक पूरी होने से निकाय स्वतः पर्याप्त वित्तपोषित नहीं हो जाता।
पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) और मॉडल उत्तर
2024RAS मुख्य परीक्षापेपर I2 अंक
Two objectives of Government Audit.
आदर्श उत्तर
(1) जाँचना कि ख़र्च विधि-सम्मत और प्राधिकार के अनुरूप हुआ। (2) जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना।
अभ्यास प्रश्न (PYQ नहीं)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
सरकारी अंकेक्षण किसे कहते हैं?
आदर्श उत्तर
सरकार के लेखों, ख़र्च और प्राप्तियों की स्वतंत्र जाँच, जिसकी रिपोर्ट विधायिका को जाती है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
DPC अधिनियम की धारा 14 में "पर्याप्त रूप से वित्तपोषित" निकाय की कसौटी लिखिए।
आदर्श उत्तर
अनुदान कम से कम ₹25 लाख और कुल ख़र्च का कम से कम 75 प्रतिशत।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
सरकारी अंकेक्षण के दायरे में आने वाली संस्थाएँ बताइए।
आदर्श उत्तर
CAG का अंकेक्षण-अधिदेश संघ और राज्यों की संचित निधि के ख़र्च, आकस्मिकता निधि और लोक लेखे, राजस्व प्राप्तियों, भंडार और स्टॉक पर है। साथ ही पर्याप्त वित्तपोषित निकाय, वैधानिक निगम, सरकारी कंपनियाँ, स्वायत्त निकाय, स्थानीय निकाय और क़ानून या अनुरोध से सौंपी गई कोई अन्य संस्था उसके दायरे में आती हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
सरकारी अंकेक्षण और कंपनी के अंकेक्षण में दो अंतर लिखिए।
आदर्श उत्तर
सरकारी अंकेक्षण का अंकेक्षक संविधान के अनुच्छेद 148 का पद CAG है और उसकी रिपोर्ट अनुच्छेद 151 से विधायिका को जाती है। कंपनी का वैधानिक अंकेक्षक अंशधारकों को रिपोर्ट देता है। सरकारी में जवाबदेही, वैधता और निष्पादन भी देखे जाते हैं, कंपनी में मुख्यतः वित्तीय विवरण की सही और निष्पक्ष तस्वीर।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
सरकारी अंकेक्षण के उद्देश्य बताते हुए उसकी सीमाओं का मूल्यांकन कीजिए।
आदर्श उत्तर
सरकारी अंकेक्षण का उद्देश्य है कि ख़र्च विधि-सम्मत और प्राधिकार के अनुरूप हो, विधायिका और जनता को स्वतंत्र जानकारी मिले, जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़े और सिफ़ारिशों से सुधार हो। रिपोर्ट अनुच्छेद 151 से सदन में रखी जाती है और लोक लेखा समिति उसकी जाँच करती है। सीमाएँ: अंकेक्षण ख़र्च के बाद होता है, धारा 24 के कारण सीमित जाँच होती है और कार्रवाई विधायिका और कार्यपालिका पर निर्भर है। समय पर रिपोर्ट, समितियों की अनुवर्ती निगरानी और सिफ़ारिशों पर की गई कार्रवाई की नियमित रिपोर्टिंग सुधार के रास्ते हैं। इस प्रकार जवाबदेही का चक्र पूरा होता है।
10 अंक (100 शब्द) का उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
सरकारी अंकेक्षण को परिभाषित करें: सरकार के लेखों, ख़र्च और प्राप्तियों की स्वतंत्र जाँच जो विधायिका को जवाबदेही देती है; CAG इसका संवैधानिक अंकेक्षक है (लगभग 20 शब्द)।
मुख्य भाग
- उद्देश्य: विधि-सम्मत ख़र्च, जवाबदेही और पारदर्शिता, स्वतंत्र जानकारी, सुधार (लगभग 25 शब्द)
- दायरा: संचित निधि का ख़र्च, प्राप्तियाँ, भंडार, पर्याप्त वित्तपोषित निकाय, निगम, सरकारी कंपनियाँ (लगभग 20 शब्द)
- रिपोर्ट का रास्ता: अनुच्छेद 151, सदन, लोक लेखा समिति (लगभग 15 शब्द)
- सीमा या अंतर: ख़र्च के बाद अंकेक्षण, सीमित जाँच, कंपनी के अंकेक्षण से भेद (लगभग 15 शब्द)
निष्कर्ष
अंत में एक पंक्ति: सरकारी अंकेक्षण लोक-धन के बदले जनता और विधायिका के प्रति जवाबदेही का चक्र पूरा करता है (लगभग 10 शब्द)।
अतिरिक्त मूल्य
- धारा 14 की कसौटी (₹25 लाख और 75 प्रतिशत) का एक उदाहरण
- राजस्थान में महालेखाकार (लेखा-परीक्षा-I और II) कार्यालयों का एक वाक्य
एक पन्ने में दोहराव
- सरकारी अंकेक्षण: केंद्र और राज्य सरकार के लेखों, ख़र्च और प्राप्तियों की स्वतंत्र जाँच; संवैधानिक अंकेक्षक CAG
- अनुच्छेद 148 से 151; अनुच्छेद 149 से कर्तव्य संसद की विधि से, यानी DPC अधिनियम 1971
- उद्देश्य: विधि-सम्मत ख़र्च (धारा 13), जवाबदेही-पारदर्शिता, स्वतंत्र जानकारी, निगरानी संस्थाओं की मज़बूती, सुधार
- धारा 13 संचित निधि का ख़र्च; 14 पर्याप्त वित्तपोषित निकाय (₹25 लाख और 75 प्रतिशत); 16 प्राप्तियाँ; 17 भंडार; 19 सरकारी कंपनियाँ और निगम; 20 अनुरोध पर अन्य निकाय
- धारा 23 दायरे पर विनियम; धारा 24 सीमित जाँच
- तीन प्रकार: वित्तीय, अनुपालन, निष्पादन
- रिपोर्ट: राष्ट्रपति या राज्यपाल, फिर सदन, फिर PAC (अधिकतम 22 सदस्य)
- सरकारी कंपनी: CAG नियुक्ति (धारा 139(5)), निर्देश (143(5)), पूरक अंकेक्षण 60 दिन (143(6))
- सीमाएँ: ख़र्च के बाद, सीमित जाँच, कार्रवाई दूसरों के हाथ
याद रखने योग्य शब्द
- सरकारी अंकेक्षण
- DPC अधिनियम 1971
- अनुच्छेद 151
- संचित निधि
- पर्याप्त वित्तपोषित
- लोक लेखा समिति