CAG और सरकारी अंकेक्षण: सर्वोच्च पद, चार कर्तव्य, DPC अधिनियम की धाराएँ और रिपोर्ट
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग C (Accounting and Auditing): "Meaning and objectives of auditing, audit programme, basic knowledge of social, performance and efficiency audit; elementary knowledge of government audit." सरकारी अंकेक्षण का "elementary knowledge" इस पृष्ठ पर इसके अंकेक्षक, यानी CAG, की भूमिका से पूरा होता है: पद, नियुक्ति, कर्तव्य, शक्तियाँ और रिपोर्ट। CAG की संस्था का विस्तृत लोक-प्रशासन दृष्टिकोण लोक प्रशासन के CAG पृष्ठ पर है।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- उपलब्ध छह पेपरों में सरकारी अंकेक्षण के CAG-पक्ष से दो सीधे प्रश्न आए हैं: 2021 में 2 अंक का "सरकारी अंकेक्षण में सर्वोच्च पद का पदनाम" और 2023 में 2 अंक का "CAG के चार कर्तव्य"। दोनों के उत्तर इसी पृष्ठ में तैयार हैं।
- दोनों प्रश्न तथ्य-आधारित हैं। "पदनाम" का उत्तर एक पंक्ति का है, "चार कर्तव्य" के लिए DPC अधिनियम की धाराएँ 13, 16, 17 और रिपोर्ट-संबंधी प्रावधान चाहिए।
- इस पृष्ठ में अनुच्छेद 148 से 151 और DPC अधिनियम की धाराएँ एक सारणी में रखी गई हैं, ताकि कर्तव्य और शक्ति का फ़र्क़ भी साफ़ रहे।
पहले सरल भाषा में: CAG कौन है और क्यों ज़रूरी है
सरकार करदाताओं का पैसा ख़र्च करती है और विधायिका उसकी अनुमति देती है। अब सवाल यह है कि ख़र्च की जाँच कौन करे। अगर जाँच कार्यपालिका, यानी सरकार, के अपने अधिकारी करें तो वे अपने ही काम को परखने वाले बन जाएँगे। इसीलिए संविधान ने एक अलग, स्वतंत्र पद बनाया: भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India, संक्षेप में CAG)। यही सरकारी अंकेक्षण में सर्वोच्च पद है, और 2021 के प्रश्न का सीधा उत्तर यही है।
CAG का पद संविधान के अनुच्छेद 148 में है। यह वही अनुच्छेद है जो उसकी नियुक्ति, शपथ, वेतन और हटाने की प्रक्रिया तय करता है। उसके कर्तव्य और शक्तियाँ अनुच्छेद 149 के अनुसार संसद की बनाई विधि से तय होती हैं। वह विधि है कर्तव्य, शक्तियाँ और सेवा-शर्तें अधिनियम, 1971, जिसे परीक्षा में DPC अधिनियम (Duties, Powers and Conditions of Service Act) लिखा जा सकता है।
याद रखने का सरल सूत्र: अनुच्छेद 148 में पद, 149 में काम, 150 में लेखों का प्रारूप, 151 में रिपोर्ट। चार अनुच्छेद, चार प्रश्न: कौन है, क्या करता है, किस रूप में लेखे रखे जाते हैं, और रिपोर्ट कहाँ जाती है।
संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 148 से 151 एक नज़र में
| अनुच्छेद | क्या कहता है |
|---|---|
| 148(1) | CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुहर के वारंट से करता है। उसे केवल उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिन पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। |
| 148(2) | पद ग्रहण से पहले राष्ट्रपति या उसके नियुक्त व्यक्ति के सामने तीसरी अनुसूची के प्रारूप में शपथ या प्रतिज्ञान। |
| 148(3) | वेतन और सेवा-शर्तें संसद की विधि से तय होंगी। नियुक्ति के बाद वेतन, छुट्टी, पेंशन या सेवानिवृत्ति-आयु उसके नुक़सान के लिए नहीं बदली जा सकती। |
| 148(4) | पद छोड़ने के बाद वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी आगे के पद के लिए पात्र नहीं है। |
| 148(6) | CAG के कार्यालय का प्रशासनिक ख़र्च, वेतन-भत्तों और पेंशन समेत, भारत की संचित निधि पर भारित है। |
| 149 | CAG संघ, राज्यों और किसी अन्य प्राधिकरण या निकाय के लेखों के संबंध में ऐसे कर्तव्य निभाएगा और ऐसी शक्तियाँ प्रयोग करेगा जो संसद की विधि द्वारा तय हों। |
| 150 | संघ और राज्यों के लेखे उस प्रारूप में रखे जाएँगे जो राष्ट्रपति CAG की सलाह पर निर्धारित करे। |
| 151 | संघ के लेखों पर रिपोर्ट राष्ट्रपति को; वह उसे संसद के प्रत्येक सदन के सामने रखवाता है। राज्य के लेखों पर रिपोर्ट राज्यपाल को; वह उसे राज्य विधान-मंडल के सामने रखवाता है। |
स्वतंत्रता कैसे सुरक्षित रहती है
CAG का काम तभी भरोसेमंद है जब वह न सरकार से डरे और न उसकी कृपा चाहे। अनुच्छेद 148 में यह भरोसा कई परतों में बना है। पहली परत हटाने की प्रक्रिया है: उसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही हटाया जा सकता है, मनमर्ज़ी से नहीं। दूसरी परत वेतन और सेवा-शर्तों की सुरक्षा है, जो नियुक्ति के बाद उसके नुक़सान के लिए नहीं बदली जा सकती। तीसरी परत यह है कि पद छोड़ने के बाद वह केंद्र या राज्य सरकार के अधीन कोई और पद नहीं ले सकता, इसलिए पद पर रहते हुए किसी लाभ की उम्मीद में नरमी बरतने का कारण नहीं रहता। चौथी परत वित्तीय है: कार्यालय का ख़र्च संचित निधि पर भारित है, यानी उसे हर साल बजट-मतदान पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
कार्यकाल की बात DPC अधिनियम की धारा 4 में है: CAG छह वर्ष के लिए पद धारण करता है। यदि इससे पहले वह पैंसठ वर्ष की आयु का हो जाए तो उसी तिथि को पद छोड़ देता है। CAG के लेखा-परीक्षा मानक 2017 भी स्वतंत्रता को पूर्वापेक्षा मानते हैं: विधायिका और कार्यपालिका, दोनों से पर्याप्त स्वतंत्रता किसी भी अंकेक्षण और उसके परिणामों की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक बताई गई है।
कर्तव्य बनाम शक्तियाँ: DPC अधिनियम 1971 की धाराएँ
परीक्षा में "कर्तव्य" का मतलब वे काम हैं जो CAG को करने ही हैं, जबकि "शक्तियाँ" वे अधिकार हैं जिनसे वह यह काम कर पाता है। 2023 का प्रश्न कर्तव्य पूछता है, इसलिए उत्तर में धारा 13, 16, 17 और रिपोर्ट देने का दायित्व आना चाहिए।
धारा 13 के अनुसार CAG भारत की संचित निधि और हर राज्य और विधान-सभा वाले संघ राज्य क्षेत्र की संचित निधि से हुए सारे ख़र्च का अंकेक्षण करता है। वह जाँचता है कि दिखाई गई राशि उस सेवा या प्रयोजन के लिए क़ानूनी रूप से उपलब्ध और लागू थी या नहीं जिस पर वह लगाई गई, और ख़र्च उस प्राधिकार के अनुरूप है या नहीं जो उसे शासित करता है। इसी धारा में आकस्मिकता निधि और लोक लेखे के लेन-देन तथा विभागों के व्यापारिक, विनिर्माण, लाभ-हानि और तुलन-पत्र जैसे लेखों के अंकेक्षण का दायित्व भी है। हर मामले में उसे अपने जाँचे हुए ख़र्च, लेन-देन या लेखों पर रिपोर्ट करनी होती है।
धारा 16 प्राप्तियों के अंकेक्षण का कर्तव्य देती है। CAG देखता है कि संचित निधि में आने वाली राशियों, यानी कर और अन्य राजस्व, के निर्धारण, संग्रह और उचित आवंटन पर प्रभावी नियंत्रण के नियम बने हैं और उनका पालन हो रहा है। धारा 17 उसे किसी विभाग या कार्यालय में रखे भंडार और स्टॉक के लेखों के अंकेक्षण और रिपोर्ट का अधिकार देती है।
धारा 14 उन निकायों के लिए है जो संचित निधि से अनुदान या ऋण पाकर "पर्याप्त रूप से वित्तपोषित" हैं। धारा 15 किसी विशेष प्रयोजन के अनुदान या ऋण की स्थिति में यह देखने की व्यवस्था देती है कि मंज़ूरी देने वाला प्राधिकारी शर्तों की पूर्ति के बारे में किस प्रक्रिया से संतुष्ट हुआ। धारा 19 सरकारी कंपनियों और निगमों के अंकेक्षण की व्यवस्था बताती है और धारा 20 उन निकायों का अंकेक्षण, जिन्हें विधि से CAG को नहीं सौंपा गया है, पर राष्ट्रपति, राज्यपाल या प्रशासक के अनुरोध से सौंपा जा सकता है।
DPC अधिनियम 1971: CAG के कर्तव्य और शक्तियाँ, धारावार
| धारा | विषय | प्रकृति |
|---|---|---|
| 10 | संघ और राज्यों के लेखों का संकलन और रखरखाव; राष्ट्रपति या राज्यपाल आदेश से इस दायित्व से मुक्त कर सकते हैं | कर्तव्य (परंतुकों सहित) |
| 11 | हर वर्ष विनियोग लेखों समेत वार्षिक प्राप्ति-व्यय के लेखे तैयार कर राष्ट्रपति या राज्यपाल को सौंपना | कर्तव्य |
| 12 | जिन लेखों का दायित्व उसके पास है, उनके आधार पर सरकार को सूचना देना और वार्षिक वित्तीय विवरण बनाने में सहायता | कर्तव्य |
| 13 | संचित निधि के ख़र्च, आकस्मिकता निधि और लोक लेखे, तथा विभागों के व्यापारिक और लाभ-हानि लेखों का अंकेक्षण और रिपोर्ट | कर्तव्य |
| 14 | "पर्याप्त रूप से वित्तपोषित" निकायों की प्राप्तियों और ख़र्च का अंकेक्षण (₹25 लाख और 75 प्रतिशत की कसौटी) | कर्तव्य और स्वीकृति-सहित अधिकार |
| 15 | विशेष प्रयोजन के अनुदान या ऋण में मंज़ूरी-प्रक्रिया की जाँच; पूर्व सूचना देकर लेखे देखने का अधिकार | कर्तव्य और अधिकार |
| 16 | संचित निधि में आने वाली सभी प्राप्तियों का अंकेक्षण | कर्तव्य |
| 17 | भंडार और स्टॉक के लेखों का अंकेक्षण और रिपोर्ट | अधिकार ("authority") |
| 18 | कार्यालयों और कोषागारों का निरीक्षण, दस्तावेज़ मँगाना, प्रश्न पूछना और सूचना माँगना | शक्तियाँ |
| 19 और 19A | सरकारी कंपनियों और निगमों का अंकेक्षण; रिपोर्टें सरकार को, जो उन्हें सदन के सामने रखवाती है | कर्तव्य और रिपोर्ट |
| 20 | अनुरोध पर या प्रस्ताव पर अन्य निकायों का अंकेक्षण | अधिकार |
| 21 | अपनी शक्तियाँ अपने अधिकृत अधिकारी से प्रयोग करवाना | प्रत्यायोजन |
| 23 और 24 | अंकेक्षण के दायरे पर विनियम बनाना; आवश्यक होने पर विस्तृत अंकेक्षण का भाग छोड़कर सीमित जाँच | शक्तियाँ |
धारा 17 में मूल शब्द "shall have authority" हैं।
रिपोर्ट: CAG का असली हथियार
CAG के पास अभियोजन या दंड की शक्ति नहीं है। उसकी ताक़त उसकी रिपोर्ट है, जो अनुच्छेद 151 के अनुसार राष्ट्रपति या राज्यपाल को जाती है और वे उसे सदन के सामने रखवाते हैं। रिपोर्ट के सदन में आने पर विधायिका की लोक लेखा समिति (PAC) उसकी जाँच करती है। लोक सभा सचिवालय के परिचय-नोट में CAG को समिति का मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक कहा गया है, यानी वह समिति को तथ्य और विश्लेषण देता है और निर्णय समिति लेती है।
सरकारी कंपनियों की रिपोर्टों का रास्ता कुछ अलग है। DPC अधिनियम की धारा 19A के अनुसार कंपनी या निगम के अंकेक्षण पर CAG की रिपोर्ट संबंधित सरकार को दी जाती है और सरकार उसे सदन के सामने रखवाती है। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 139(5) और 139(7) के अनुसार सरकारी कंपनी के सांविधिक अंकेक्षक की नियुक्ति CAG करता है, धारा 143(5) के अनुसार वह अंकेक्षक को निर्देश देता है और धारा 143(6) के अनुसार अंकेक्षक की रिपोर्ट मिलने के साठ दिन के भीतर पूरक अंकेक्षण कर सकता है। DPC अधिनियम के धारा 19 के पाठ में कंपनी अधिनियम, 1956 का उल्लेख है; वर्तमान व्यवस्था के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 की उक्त धाराएँ पढ़ें।
तीन प्रकार के अंकेक्षण और CAG की भूमिका
लेखा-परीक्षा मानक 2017 के अनुसार CAG का अंकेक्षण-अधिदेश संविधान, DPC अधिनियम और संसद तथा राज्य विधान-मंडलों के विशेष क़ानूनों से बनता है। इसमें वैधानिक निगम, सरकारी कंपनियाँ, सोसाइटी, ट्रस्ट या अलाभकारी कंपनी के रूप में बने स्वायत्त निकाय, नगरीय और ग्रामीण स्थानीय निकाय, और विधि के अधीन सौंपी गई कोई अन्य संस्था आते हैं। इस अधिदेश को पूरा करने के लिए CAG वित्तीय अंकेक्षण, अनुपालन अंकेक्षण, निष्पादन अंकेक्षण या इनके मेल करता है। इन तीनों में निष्पादन अंकेक्षण (performance audit) की गुणवत्ता-जाँच इस श्रृंखला के अलग पृष्ठ में विस्तार से है।
सरल मिलान: वित्तीय अंकेक्षण पूछता है कि "लेखे सही तस्वीर देते हैं या नहीं"; अनुपालन अंकेक्षण पूछता है कि "नियमों का पालन हुआ या नहीं"; निष्पादन अंकेक्षण पूछता है कि "किफ़ायत, कार्यकुशलता और प्रभावशीलता के पैमाने पर काम कैसा रहा"।
आरेख: CAG से रिपोर्ट तक
संविधान (अनुच्छेद 148 से 151)
पद, कार्य, प्रारूप, रिपोर्ट
DPC अधिनियम, 1971
कर्तव्य, शक्तियाँ, सेवा-शर्तें
अंकेक्षण
वित्तीय, अनुपालन, निष्पादन
रिपोर्ट
राष्ट्रपति या राज्यपाल को
सदन में प्रस्तुति
संसद या विधान-मंडल
लोक लेखा समिति
जाँच और सिफ़ारिश
मुख्य तथ्य
- सर्वोच्च पद
- भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (अनुच्छेद 148)
- नियुक्ति
- राष्ट्रपति, वारंट द्वारा; हटाना सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की रीति से (अनुच्छेद 148(1))
- कार्यकाल
- छह वर्ष, या पैंसठ वर्ष की आयु, जो पहले हो (DPC अधिनियम, धारा 4)
- पद छोड़ने के बाद
- केंद्र या राज्य सरकार के अधीन आगे का पद वर्जित (अनुच्छेद 148(4))
- कर्तव्य का स्रोत
- अनुच्छेद 149; संसद की विधि, यानी DPC अधिनियम, 1971
- चार कर्तव्य (परीक्षा-सूत्र, विश्लेषण)
- ख़र्च (धारा 13), प्राप्तियाँ (16), भंडार और स्टॉक (17), रिपोर्ट सौंपना (अनुच्छेद 151)
- लेखों का प्रारूप
- राष्ट्रपति तय करता है, CAG की सलाह पर (अनुच्छेद 150)
- रिपोर्ट का रास्ता
- संघ: राष्ट्रपति से संसद; राज्य: राज्यपाल से विधान-मंडल (अनुच्छेद 151)
- सरकारी कंपनी
- CAG सांविधिक अंकेक्षक नियुक्त करता है (धारा 139(5), 139(7)); पूरक अंकेक्षण (धारा 143(6))
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026
राजस्थान का पहलू
राजस्थान में CAG का काम दो महालेखाकार कार्यालयों से चलता है। cag.gov.in पर महालेखाकार (लेखा-परीक्षा-I), राजस्थान का परिचय-पृष्ठ (देखा गया 2 अक्टूबर 2026) बताता है कि यह कार्यालय राज्य के सिविल विभागों, स्वायत्त निकायों, सरकारी कंपनियों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों का अनुपालन अंकेक्षण, वित्तीय प्रमाणन और निष्पादन अंकेक्षण करता है और राज्य के वित्त और विनियोग लेखों को प्रमाणित करता है। महालेखाकार (लेखा-परीक्षा-II), राजस्थान, जयपुर की रिपोर्ट-सूची (देखी गई 2 अक्टूबर 2026) में राज्य वित्त, अनुपालन, निष्पादन और वित्तीय अंकेक्षण पर रिपोर्टें दिखती हैं। राज्य की रिपोर्टें अनुच्छेद 151(2) के अनुसार राज्यपाल को जाती हैं, जो उन्हें विधान-मंडल के सामने रखवाते हैं।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- "सरकारी अंकेक्षण में सर्वोच्च पद" पर केवल "महालेखाकार" लिख देना। राज्यों में महालेखाकार (Accountant General) होते हैं, पर सर्वोच्च पद CAG का है।
- CAG की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री या संसद लिखना। अनुच्छेद 148(1) में नियुक्ति राष्ट्रपति वारंट से करता है।
- चार कर्तव्यों में केवल "हिसाब जाँचना" लिखना। अलग-अलग कर्तव्य गिनाएँ: ख़र्च, प्राप्तियाँ, भंडार, रिपोर्ट।
- यह लिखना कि रिपोर्ट सीधे संसद को जाती है। रिपोर्ट राष्ट्रपति या राज्यपाल को सौंपी जाती है, जो उसे सदन के सामने रखवाते हैं।
- कर्तव्य और शक्ति को एक मान लेना। धारा 13 और 16 कर्तव्य हैं, धारा 18 निरीक्षण और दस्तावेज़ माँगने की शक्ति है।
- CAG को अभियोजन या दंड की शक्ति वाला अधिकारी बताना। उसकी भूमिका अंकेक्षण करके रिपोर्ट देना है।
केस: विशेष प्रयोजन का अनुदान और CAG की जाँच
उदाहरण (काल्पनिक)काल्पनिक केस: ज़िला स्तर की समिति को दिया गया अनुदान
(यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; किसी वास्तविक संस्था का वर्णन नहीं।) राज्य सरकार ने एक स्वयंसेवी समिति को चारा-बैंक बनाने के लिए एक विशेष प्रयोजन का अनुदान दिया। अनुदान की शर्तों में बैंक का स्थान, निर्माण की समय-सीमा और उपयोग-प्रमाणपत्र शामिल थे।
- स्थिति
- अनुदान के बाद विभाग ने उपयोग-प्रमाणपत्र ले लिया, पर ज़मीन पर चारा-बैंक चलता नहीं मिला। विभाग को लगा कि काग़ज़ पूरे हैं।
- CAG क्या देखता है
- धारा 15 के अनुसार CAG का मुख्य काम यह परखना है कि मंज़ूरी देने वाले प्राधिकारी ने शर्तों की पूर्ति से स्वयं को किस प्रक्रिया से संतुष्ट किया। पूर्व सूचना देकर वह समिति के लेखे भी देख सकता है, बशर्ते धारा 15 के परंतुक के अधीन छूट न दी गई हो।
- रिपोर्ट
- निष्कर्ष राज्य के लेखों पर CAG की रिपोर्ट में राज्यपाल को जाते हैं और राज्यपाल उसे विधान-मंडल के सामने रखवाते हैं।
- समिति की जाँच
- विधान-मंडल की लोक लेखा समिति विभाग से स्पष्टीकरण माँगती है और सुधार की सिफ़ारिश करती है।
सीख
सीख: CAG का काम पैसे की राह का पीछा करना है। धारा 15 में जाँच की धुरी "मंज़ूरी देने वाले की प्रक्रिया" है, निधि पाने वाले की नीयत नहीं। इसीलिए अनुदान देने वाला विभाग अपना उपयोग-प्रमाणपत्र बिना सत्यापन के न माने।
कार्य-उदाहरण: कौन-सी स्थिति किस धारा में आती है?
हल सहित उदाहरणपाँच काल्पनिक स्थितियाँ और उनकी DPC धाराएँ
दिया है
- पाँच स्थितियाँ: (क) राज्य की संचित निधि से सड़क-मरम्मत का ख़र्च, (ख) राज्य के बिक्री-कर की वसूली, (ग) सरकारी गोदाम का स्टॉक, (घ) राज्य सरकार की एक कंपनी का वार्षिक अंकेक्षण, (ङ) राज्य विधान-मंडल के क़ानून से बने निगम का अंकेक्षण, जिसके लिए राज्यपाल ने CAG से अनुरोध किया।
- 1(क) संचित निधि से ख़र्च है, इसलिए धारा 13। CAG जाँचता है कि राशि क़ानूनी रूप से उपलब्ध और लागू थी और ख़र्च प्राधिकार के अनुरूप था।
- 2(ख) संचित निधि में आने वाली प्राप्ति है, इसलिए धारा 16। CAG निर्धारण, संग्रह और आवंटन के नियंत्रणों की जाँच करता है।
- 3(ग) भंडार और स्टॉक के लेखे हैं, इसलिए धारा 17।
- 4(घ) सरकारी कंपनी है, इसलिए धारा 19(1) और कंपनी अधिनियम की व्यवस्था। सांविधिक अंकेक्षक की नियुक्ति CAG करता है और पूरक अंकेक्षण भी कर सकता है। रिपोर्ट धारा 19A के रास्ते से जाती है।
- 5(ङ) राज्य के क़ानून से बने निगम का अंकेक्षण राज्यपाल के अनुरोध से, धारा 19(3) के अनुसार। अनुरोध से पहले CAG से परामर्श और निगम को अपनी बात रखने का उचित अवसर ज़रूरी है।
निष्कर्ष: निष्कर्ष: धारा का चुनाव प्रश्न में "क्या" से तय होता है: ख़र्च (13), प्राप्ति (16), भंडार (17), कंपनी या निगम (19), अन्य निकाय (20)।
पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) और मॉडल उत्तर
2021RAS मुख्य परीक्षापेपर I2 अंक
What is the designation of the person having the highest authority in Government Audit?
आदर्श उत्तर
सर्वोच्च पद: भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), जिसकी नियुक्ति अनुच्छेद 148 में है।
2023RAS मुख्य परीक्षापेपर I2 अंक
Write four duties of the Comptroller and Auditor General of India.
आदर्श उत्तर
(1) संचित निधि का ख़र्च जाँचना। (2) प्राप्तियाँ जाँचना। (3) भंडार जाँचना। (4) रिपोर्ट सौंपना।
अभ्यास प्रश्न (PYQ नहीं)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
अनुच्छेद 148 के अनुसार CAG की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया लिखिए।
आदर्श उत्तर
नियुक्ति राष्ट्रपति वारंट से करता है; हटाना केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की रीति से संभव।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
CAG की स्वतंत्रता की दो संवैधानिक गारंटियाँ बताइए।
आदर्श उत्तर
न्यायाधीश जैसी हटाने की प्रक्रिया, और पद छोड़ने के बाद सरकारी पद की अपात्रता।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
CAG की रिपोर्ट विधायिका तक कैसे पहुँचती है? लिखिए।
आदर्श उत्तर
अनुच्छेद 151 के अनुसार संघ के लेखों पर रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपी जाती है, जो उसे संसद के हर सदन के सामने रखवाता है। राज्य के लेखों पर रिपोर्ट राज्यपाल को जाती है, जो उसे विधान-मंडल के सामने रखवाता है। इसके बाद लोक लेखा समिति रिपोर्ट की जाँच करती है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
DPC अधिनियम की धारा 13, 16 और 17 में CAG के कर्तव्य लिखिए।
आदर्श उत्तर
धारा 13: संचित निधि के ख़र्च का अंकेक्षण, यह देखते हुए कि राशि क़ानूनी रूप से उपलब्ध थी और ख़र्च प्राधिकार के अनुरूप था। धारा 16: संचित निधि की प्राप्तियों का अंकेक्षण। धारा 17: भंडार और स्टॉक के लेखों का अंकेक्षण और रिपोर्ट।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
भारत में CAG की संवैधानिक स्थिति और सरकारी अंकेक्षण में उसकी भूमिका का वर्णन कीजिए।
आदर्श उत्तर
CAG का पद अनुच्छेद 148 में है। राष्ट्रपति उसे वारंट से नियुक्त करता है और उसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की रीति से ही हटाया जा सकता है। पद छोड़ने के बाद वह सरकार के अधीन आगे का पद नहीं ले सकता। उसके कर्तव्य अनुच्छेद 149 के अनुसार DPC अधिनियम, 1971 से तय होते हैं: ख़र्च, प्राप्तियों, भंडार, सरकारी कंपनियों और निगमों का अंकेक्षण और रिपोर्ट। रिपोर्ट अनुच्छेद 151 से राष्ट्रपति या राज्यपाल को जाती है और सदन में रखी जाती है। लोक लेखा समिति उसकी जाँच करती है। इस प्रकार CAG जवाबदेही की कड़ी है।
10 अंक (100 शब्द) का उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
CAG का परिचय दें: संविधान के अनुच्छेद 148 के अंतर्गत भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक सरकारी अंकेक्षण का सर्वोच्च अधिकारी और संघ-राज्यों के लेखों का स्वतंत्र अंकेक्षक है (लगभग 20 शब्द)।
मुख्य भाग
- नियुक्ति और स्वतंत्रता: राष्ट्रपति वारंट से, न्यायाधीश जैसी हटाने की प्रक्रिया, पद के बाद आगे का पद वर्जित (लगभग 25 शब्द)
- कर्तव्य: धारा 13 (ख़र्च), 16 (प्राप्तियाँ), 17 (भंडार), 19 (कंपनी और निगम) (लगभग 25 शब्द)
- शक्तियाँ: निरीक्षण, दस्तावेज़ माँगना, प्रश्न पूछना (धारा 18) (लगभग 10 शब्द)
- रिपोर्ट: अनुच्छेद 151, सदन, लोक लेखा समिति (लगभग 10 शब्द)
निष्कर्ष
अंत में एक पंक्ति: CAG की रिपोर्ट विधायिका और जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही का आधार है (लगभग 10 शब्द)।
अतिरिक्त मूल्य
- एक पंक्ति में लोक प्रशासन के CAG पृष्ठ का संदर्भ
- राजस्थान में दो महालेखाकार कार्यालयों का एक वाक्य
एक पन्ने में दोहराव
- CAG: सरकारी अंकेक्षण का सर्वोच्च पद; अनुच्छेद 148; नियुक्ति राष्ट्रपति, वारंट से
- हटाना: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की रीति; पद के बाद आगे का पद वर्जित
- अनुच्छेद 149 कर्तव्य (संसद की विधि); 150 लेखों का प्रारूप; 151 रिपोर्ट
- DPC अधिनियम 1971: धारा 4 कार्यकाल (6 वर्ष या 65 वर्ष आयु); 13 ख़र्च; 14 पर्याप्त वित्तपोषित; 16 प्राप्तियाँ; 17 भंडार; 18 शक्तियाँ; 19 कंपनी और निगम; 24 सीमित जाँच
- रिपोर्ट: राष्ट्रपति या राज्यपाल, फिर सदन, फिर लोक लेखा समिति
- सरकारी कंपनी: अंकेक्षक की नियुक्ति (139(5)), निर्देश (143(5)), पूरक अंकेक्षण (143(6))
- तीन अंकेक्षण: वित्तीय, अनुपालन, निष्पादन
- 2021: पदनाम = CAG; 2023: चार कर्तव्य = ख़र्च, प्राप्तियाँ, भंडार, रिपोर्ट
याद रखने योग्य शब्द
- CAG
- अनुच्छेद 148
- अनुच्छेद 151
- DPC अधिनियम 1971
- धारा 13
- लोक लेखा समिति