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पेपर I · इकाई III · भाग ग

कंपनी का तुलन-पत्र (Balance Sheet): अनुसूची III का स्वरूप, चालू-गैर-चालू भेद और यह क्या प्रकट करता है

कंपनी के तुलन-पत्र का स्वरूप, चालू-गैर-चालू भेद, अनुसूची III, हल उदाहरण और 2016 का प्रश्न।

  • तुलन-पत्र
  • अनुसूची III
  • चालू-गैर-चालू
  • धारा 129
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग ग: "Financial statement of a company; techniques of analysis of financial statements; cash flow statement." इस पृष्ठ पर कंपनी का तुलन-पत्र (balance sheet) है; लाभ-हानि विवरण अलग पृष्ठ (company-profit-loss) पर है, और विश्लेषण-तकनीकें तथा नकदी प्रवाह विवरण अपने पृष्ठों पर।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2016 के विशेष मुख्य पेपर I में 2 अंक (15 शब्द) का प्रश्न आया था: तुलन-पत्र क्या प्रकट करता है, कोई दो बिंदु। उसके बाद उपलब्ध पेपरों (2018, 2021, 2023, 2024) में तुलन-पत्र पर सीधा प्रश्न नहीं आया, पर विश्लेषण वाले प्रश्न (अनुपात, प्रवृत्ति, तकनीकें) इसी तुलन-पत्र के आँकड़ों पर टिकते हैं।
  • तुलन-पत्र का ढाँचा, चालू और गैर-चालू का भेद, और अनुसूची III के मुख्य शीर्ष, तीनों 2 अंक और 5 अंक, दोनों स्तर के उत्तरों में काम आते हैं।
  • अनुपात वाला 2024 का 5 अंक का प्रश्न (चालू अनुपात, द्रुत अनुपात) तुलन-पत्र की मदों को ठीक से पहचानने पर निर्भर था; इसलिए यह पृष्ठ आगे के अनुपात-पृष्ठों की नींव है।

सरल भाषा में: तुलन-पत्र क्या है

किसी शादी-समारोह की एक तस्वीर उस पल की झलक देती है: कौन-कौन मौजूद है, किसने क्या पहना है। पर उससे यह नहीं पता चलता कि पूरे दिन क्या-क्या हुआ। तुलन-पत्र (Balance Sheet) कंपनी के हिसाब की ऐसी ही तस्वीर है, जो एक निश्चित तिथि (जैसे 31 मार्च) पर बताती है कि कंपनी के पास क्या है (संपत्तियाँ), उस पर किसका कितना दावा है (देयताएँ), और मालिकों का अपना हिस्सा कितना है (शेयरधारकों की निधि)। जो फ़िल्म पूरे वर्ष की कहानी कहती है, वह लाभ-हानि विवरण है। NCERT के अनुसार तुलन-पत्र "स्थिति विवरण" (position statement) है, जो लेखांकन अवधि के अंत में कंपनी की स्थिति दिखाता है; लाभ-हानि विवरण उस अवधि के परिणाम।

कानून की भाषा में कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 2(40) कहती है कि कंपनी का वित्तीय विवरण (financial statement) वित्तीय वर्ष के अंत का तुलन-पत्र, लाभ-हानि खाता (गैर-लाभकारी कंपनी में आय-व्यय खाता), नकदी प्रवाह विवरण, इक्विटी में परिवर्तन का विवरण (जहाँ लागू) और इनसे जुड़े व्याख्यात्मक नोट शामिल करता है। इसी धारा के परंतुक के अनुसार एक व्यक्ति कंपनी, लघु कंपनी, निष्क्रिय कंपनी और (स्टार्ट-अप) निजी कंपनी के विवरण में नकदी प्रवाह विवरण आवश्यक नहीं है। इन सबमें तुलन-पत्र पहला है।

परीक्षा-योग्य परिभाषा: तुलन-पत्र किसी कंपनी की एक निश्चित तिथि की संपत्तियों, देयताओं और शेयरधारकों की निधि का क्रमबद्ध विवरण है, जो उस तिथि पर उसकी वित्तीय स्थिति प्रकट करता है और अनुसूची III के प्रारूप में बनाया जाता है।

तुलन-पत्र किस आधार पर बनता है

हर कंपनी का तुलन-पत्र मनमाने ढंग से नहीं बनता। ICAI के अनुसार धारा 129 कहती है कि वित्तीय विवरण कंपनी की स्थिति का सही और निष्पक्ष चित्र दें, धारा 133 के अंतर्गत अधिसूचित लेखा मानकों का पालन करें और अनुसूची III में बताए प्रारूप में बनें। अनुसूची III कंपनी अधिनियम 2013 के साथ ही अधिसूचित हुई थी (ICAI)। इसके दो प्रभाग हैं जो आप परीक्षा में पढ़ेंगे: प्रभाग I उन कंपनियों के लिए जिनके विवरण कंपनी (लेखा मानक) नियम 2006 के अनुसार बनते हैं, और प्रभाग II उन कंपनियों के लिए जो कंपनी (भारतीय लेखा मानक) नियम 2015 का पालन करती हैं (Ind AS)। NBFC के लिए प्रभाग III है (ICAI)।

NCERT कक्षा 12 बताती है कि यह प्रारूप सभी भारतीय कंपनियों पर लागू है, पर बीमा या बैंकिंग कंपनी पर और उस कंपनी पर नहीं, जिसके लिए किसी अन्य अधिनियम में तुलन-पत्र का प्रारूप निर्धारित है। यह भी कि लेखा मानक अनुसूची III पर भारी पड़ते हैं, और अनुसूची में प्रयुक्त शब्दों के अर्थ लागू लेखा मानकों के अनुसार होंगे। यानी यदि मानक और अनुसूची में टकराव हो, तो मानक के अनुसार परिवर्तन किया जाएगा।

तुलन-पत्र का प्रारूप (अनुसूची III, प्रभाग I): मुख्य शीर्ष

भागमुख्य शीर्ष और उप-शीर्ष
समता और देयताएँ 1. शेयरधारकों की निधि(क) शेयर पूँजी; (ख) आरक्षित कोष और अधिशेष; (ग) शेयर वारंट के विरुद्ध प्राप्त राशि
2. आवंटन के लिए लंबित शेयर आवेदन राशिअलग शीर्ष
3. गैर-चालू देयताएँ(क) दीर्घकालीन उधार; (ख) आस्थगित कर देयताएँ (शुद्ध); (ग) अन्य दीर्घकालीन देयताएँ; (घ) दीर्घकालीन प्रावधान
4. चालू देयताएँ(क) अल्पकालीन उधार; (ख) व्यापार देय (trade payables); (ग) अन्य चालू देयताएँ; (घ) अल्पकालीन प्रावधान
संपत्तियाँ 1. गैर-चालू संपत्तियाँ(क) संपत्ति, संयंत्र और उपकरण: मूर्त संपत्तियाँ, अमूर्त संपत्तियाँ, पूँजीगत कार्य प्रगति में, विकासाधीन अमूर्त संपत्तियाँ; (ख) गैर-चालू निवेश; (ग) आस्थगित कर संपत्ति (शुद्ध); (घ) दीर्घकालीन ऋण और अग्रिम; (ङ) अन्य गैर-चालू संपत्तियाँ
2. चालू संपत्तियाँ(क) चालू निवेश; (ख) वस्तु-सूची (inventories); (ग) व्यापार प्राप्य (trade receivables); (घ) नकद और नकद-समतुल्य; (ङ) अल्पकालीन ऋण और अग्रिम; (च) अन्य चालू संपत्तियाँ

ICAI (अनुसूची III, प्रभाग I) और इंडिया कोड के पाठ के अनुसार; NCERT कक्षा 12 में वही संरचना है, जहाँ मूर्त और अमूर्त संपत्तियाँ "स्थिर संपत्तियाँ" शीर्ष में रखी गई हैं। संशोधित अनुसूची में अतिरिक्त प्रकटीकरण जुड़े हैं; मुख्य शीर्ष वही हैं।

चालू और गैर-चालू: निर्णायक भेद

तुलन-पत्र की सबसे ज़रूरी बात संपत्तियों और देयताओं को चालू और गैर-चालू में बाँटना है। अनुसूची III के सामान्य निर्देश कहते हैं कि कोई संपत्ति तब "चालू" है जब (क) उसके कंपनी के सामान्य परिचालन-चक्र में प्राप्त होने या बिक्री/उपभोग के लिए होने की अपेक्षा है, (ख) वह मुख्यतः व्यापार के लिए धारित है, (ग) वह रिपोर्टिंग तिथि के बारह महीनों के भीतर प्राप्त होने की अपेक्षा है, या (घ) वह नकद या नकद-समतुल्य है (जब तक कि उसे बारह महीने तक विनिमय या दायित्व-निपटान से रोका न गया हो)। शेष सब संपत्तियाँ गैर-चालू हैं।

देयता के लिए यही कसौटी उलटकर लगती है: वह चालू है यदि (क) उसका कंपनी के सामान्य परिचालन-चक्र में निपटाया जाना अपेक्षित है, (ख) वह मुख्यतः व्यापार के लिए धारित है, (ग) उसे रिपोर्टिंग तिथि के बारह महीनों में चुकाना है, या (घ) कंपनी को उसके निपटान को कम से कम बारह महीने टालने का बिना शर्त अधिकार नहीं है। शेष गैर-चालू। परिचालन-चक्र (operating cycle) का अर्थ है प्रसंस्करण के लिए संपत्ति प्राप्त करने से लेकर उसके नकद या नकद-समतुल्य में वसूल होने तक का समय; जहाँ इसे पहचाना न जा सके, वहाँ बारह महीने माना जाता है।

इसे एक किराना दुकान की मिसाल से समझें: दुकान का स्टॉक कुछ हफ़्तों में बिक जाता है, इसलिए वह चालू संपत्ति है। दुकान की इमारत वर्षों चलेगी, इसलिए गैर-चालू। इसी तरह अगले महीने चुकाया जाने वाला उधार चालू देयता और पाँच साल में चुकाया जाने वाला बैंक-ऋण गैर-चालू देयता है।

प्रमुख शीर्षों की व्याख्या

शेयरधारकों की निधि में शेयर पूँजी, आरक्षित कोष और अधिशेष तथा शेयर वारंट के विरुद्ध प्राप्त राशि आती है। आरक्षित कोष और अधिशेष को अनुसूची III के अनुसार इन वर्गों में बाँटा जाता है: पूँजीगत आरक्षित कोष, पूँजी प्रतिदान आरक्षित कोष, प्रतिभूति प्रीमियम, डिबेंचर प्रतिदान आरक्षित कोष, पुनर्मूल्यांकन आरक्षित कोष, शेयर विकल्प बकाया खाता, अन्य आरक्षित कोष और अधिशेष (यानी लाभ-हानि विवरण का शेष)। जिस कोष के विरुद्ध विशेष निवेश अलग रखे गए हों, उसे "निधि" (fund) कहा जाता है।

अधिशेष का एक नियम परीक्षा में पूछा जाता है: लाभ-हानि विवरण का नामे (debit) शेष "अधिशेष" शीर्ष के अंतर्गत ऋणात्मक आँकड़े के रूप में दिखाया जाता है, और ऋणात्मक अधिशेष समायोजित करने के बाद "आरक्षित कोष और अधिशेष" का शेष ऋणात्मक भी हो तो उसी शीर्ष में दिखाया जाता है (अनुसूची III; NCERT में यही उदाहरण है)।

व्यापार प्राप्य और व्यापार देय के नाम भी अनुसूची में तय हैं। NCERT के अनुसार पहले के "विविध देनदार" और "विविध लेनदार" की जगह अब "व्यापार प्राप्य" और "व्यापार देय" शब्द चलते हैं। अनुसूची के अनुसार कोई प्राप्य "व्यापार प्राप्य" तब है जब वह सामान्य व्यवसाय में बेचे गए माल या दी गई सेवा से देय राशि हो; और व्यापार देय वह जो सामान्य व्यवसाय में खरीदे गए माल या प्राप्त सेवा के लिए देय हो।

तुलन-पत्र में राशियाँ कंपनी के कारोबार के आकार के अनुसार पूर्णांकित की जाती हैं: अनुसूची के अनुसार ₹100 करोड़ से कम कारोबार वाली कंपनी निकटतम सैकड़ों, हज़ारों, लाखों या दस-लाखों (मिलियन) में, और ₹100 करोड़ या अधिक वाली कंपनी निकटतम लाखों, दस-लाखों या करोड़ों में राशि दिखाती है। पिछली रिपोर्टिंग अवधि के आँकड़े (तुलनात्मक) भी साथ में देने होते हैं, सिवाय पहले विवरण के।

प्रभाग I और प्रभाग II: तुलन-पत्र में मुख्य अंतर

बिंदुप्रभाग I (AS वाली कंपनियाँ)प्रभाग II (Ind AS वाली कंपनियाँ)
किन पर लागूजिनके विवरण कंपनी (लेखा मानक) नियम 2006 के अनुसार बनते हैंजिनके विवरण कंपनी (भारतीय लेखा मानक) नियम 2015 के अनुसार बनते हैं
क्रम"समता और देयताएँ" पहले, "संपत्तियाँ" बाद में"संपत्तियाँ" पहले, "समता और देयताएँ" बाद में
निधि का नामशेयरधारकों की निधि: शेयर पूँजी, आरक्षित कोष और अधिशेषइक्विटी: इक्विटी शेयर पूँजी और अन्य इक्विटी
वित्तीय मदव्यापार प्राप्य, निवेश आदि सीधे चालू या गैर-चालू शीर्षों में"वित्तीय संपत्तियाँ" और "वित्तीय देयताएँ" का अलग वर्ग (निवेश, व्यापार प्राप्य, ऋण, उधार आदि)
अतिरिक्त विवरणसामान्यतः तुलन-पत्र और लाभ-हानि विवरणतुलन-पत्र और लाभ-हानि विवरण के साथ इक्विटी में परिवर्तन का विवरण भी

ICAI अनुबंध (अनुसूची III) और ICAI अध्याय 1 के आधार पर तालिका। प्रभाग II में "वित्तीय संपत्तियों" की उप-सूची और कर संपत्ति/देयता के अलग शीर्ष हैं।

तुलन-पत्र क्या प्रकट करता है (2016 का प्रश्न)

यह प्रश्न तीन परतों में सोचें। पहली परत संपत्ति और दावे की है: तुलन-पत्र बताता है कि कंपनी के पास कौन-सी संपत्तियाँ हैं (मशीन, इमारत, स्टॉक, नकद) और उनका वित्त-पोषण किस स्रोत से हुआ, मालिकों से (शेयर पूँजी, आरक्षित कोष) या बाहरी लोगों से (ऋण, लेनदार)। NCERT के अनुसार वित्तीय विवरण निवेशकों को लंबी और छोटी अवधि की शोधन-क्षमता (solvency) और लाभदायकता का आकलन करने में मदद करते हैं।

दूसरी परत तरलता (liquidity) की है। चालू संपत्तियों और चालू देयताओं का मिलान दिखाता है कि कंपनी अगले बारह महीनों के भुगतान कर पाएगी या नहीं। तीसरी परत पूँजी-संरचना की है: कुल पूँजी में मालिकों का हिस्सा कितना है और ऋण का कितना, यानी कंपनी कितनी हद तक उधार पर चल रही है। NCERT यह भी कहती है कि ऋण देने वाली संस्थाएँ कंपनी के वित्तीय निष्पादन के आधार पर ऋण देती हैं; यही कारण है कि बैंक सबसे पहले तुलन-पत्र देखते हैं।

सीमा भी याद रखें: NCERT के अनुसार तुलन-पत्र ऐतिहासिक लागत पर बना है, इसलिए वर्तमान बाज़ार-स्थिति नहीं दिखाता; संपत्तियों के दिखाए मूल्य बलपूर्वक परिसमापन में उतने नहीं मिल सकते; बाज़ार खोने या अनुबंध समाप्त होने जैसी महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ इसमें नहीं आतीं; और वह केवल मुद्रा में मापी गई जानकारी देता है, गुणात्मक जानकारी नहीं (जैसे श्रम-संबंध)। यह भी कि तुलन-पत्र केवल उसी तिथि का सत्य है, भविष्य के बदलाव नहीं दिखाता।

तुलन-पत्र पढ़ने का तरीक़ा: पाँच कदम

तुलन-पत्र देखकर केवल कुल जोड़ बता देना पर्याप्त नहीं होता। परीक्षक यह देखता है कि अभ्यर्थी आँकड़ों से निष्कर्ष निकाल पाता है या नहीं। इसके लिए पाँच कदम अपनाए जा सकते हैं।

पहला कदम: दोनों ओर का जोड़ मिलाएँ। इक्विटी और देयताओं का कुल जोड़ संपत्तियों के कुल जोड़ के बराबर होना चाहिए। दूसरा कदम: संपत्तियों को चालू और गैर-चालू में अलग करके देखें कि पैसा कहाँ फँसा है। तीसरा कदम: चालू संपत्तियों में से चालू देयताएँ घटाकर कार्यशील पूँजी (working capital) निकालें। चौथा कदम: कुल पूँजी में अपने मालिकों का हिस्सा और बाहरी लोगों का हिस्सा अलग करें। पाँचवाँ कदम: दीर्घकालीन उधार को शेयरधारकों के कोष से भाग देकर देखें कि कंपनी कितनी उधार पर टिकी है।

उदाहरण के लिए, किसी दुकानदार के पास बहीखाते में बहुत बड़ी इमारत और मशीनें हों, पर बाज़ार में उधार चुकाने के लिए नकद या बिकने लायक माल कम हो, तो वह बाहर से मज़बूत दिखकर भी भीतर से तंग हो सकता है। तुलन-पत्र ठीक यही अंतर पकड़ता है। नीचे के कार्य-उदाहरण में यही पाँच कदम संख्याओं के साथ दिखाए गए हैं।

एक और बात: तुलन-पत्र किसी एक तारीख़ की तस्वीर है, पूरे साल की फ़िल्म नहीं। वर्ष के बीच में कंपनी की स्थिति कैसी रही, यह जानने के लिए लाभ-हानि विवरण और नकद प्रवाह विवरण भी देखने पड़ते हैं। इसी कारण वार्षिक वित्तीय विवरण के सभी घटक साथ पढ़े जाते हैं, अलग-अलग नहीं।

कंपनी का तुलन-पत्र: संरचना

तुलन-पत्र

समता और देयताएँ

  • शेयरधारकों की निधि
  • आवंटन लंबित शेयर आवेदन राशि
  • गैर-चालू देयताएँ
  • चालू देयताएँ

संपत्तियाँ

  • गैर-चालू: मूर्त, अमूर्त, निवेश
  • चालू: वस्तु-सूची, प्राप्य, नकद

वर्गीकरण की कसौटी

  • परिचालन-चक्र
  • बारह महीने
  • व्यापार हेतु धारित
  • नकद-समतुल्य

चालू या गैर-चालू: निर्णय का क्रम

  1. परिचालन-चक्र में वसूल/निपटेगा?

    हाँ: चालू

  2. व्यापार हेतु धारित?

    हाँ: चालू

  3. बारह महीनों में वसूल/देय?

    हाँ: चालू

  4. नकद या नकद-समतुल्य (बाधा रहित)?

    हाँ: चालू

  5. ऊपर कोई नहीं

    गैर-चालू

अनुसूची III के सामान्य निर्देशों के आधार पर; देयता के लिए चौथी कसौटी "निपटान टालने का बिना शर्त अधिकार नहीं" है।

मुख्य तथ्य

वित्तीय विवरण की परिभाषा
धारा 2(40): तुलन-पत्र, लाभ-हानि खाता, नकदी प्रवाह विवरण, इक्विटी में परिवर्तन (यदि लागू), नोट
सही और निष्पक्ष चित्र
धारा 129: मानक (धारा 133) और अनुसूची III
तुलन-पत्र के मुख्य भाग
शेयरधारकों की निधि; आवंटन लंबित आवेदन राशि; गैर-चालू और चालू देयताएँ; गैर-चालू और चालू संपत्तियाँ
चालू संपत्ति की कसौटी
परिचालन-चक्र; व्यापार हेतु; बारह महीने; नकद-समतुल्य
परिचालन-चक्र की अवधि
जहाँ पहचान न हो, बारह महीने माना जाता है
पूर्णांकन का नियम
₹100 करोड़ से कम कारोबार: निकटतम सैकड़ा-हज़ार-लाख-मिलियन; ₹100 करोड़ या अधिक: लाख-मिलियन-करोड़
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • तुलन-पत्र को "एक अवधि का लाभ-हानि" बताना: यह एक तिथि की स्थिति है, अवधि का परिणाम लाभ-हानि विवरण देता है।
  • चालू और गैर-चालू का भेद केवल तिथि से कर देना: असली कसौटी परिचालन-चक्र और बारह महीने की है।
  • NCERT के पुराने "स्थिर संपत्तियाँ" और अनुसूची के "संपत्ति, संयंत्र और उपकरण" में उलझना: दोनों शब्द अलग-अलग संस्करणों में मिलते हैं; उत्तर में दोनों का एक बार उल्लेख सुरक्षित है।
  • डिबेंचर को हमेशा गैर-चालू मान लेना: जिसका भुगतान बारह महीनों में देय हो, उसकी चालू परिपक्वता चालू देयता में जाती है।
  • लाभ-हानि के नामे शेष को संपत्ति की ओर "हानि" के रूप में दिखाना: अनुसूची III के अनुसार वह "अधिशेष" में ऋणात्मक दिखाया जाता है।
  • दो अंक के प्रश्न में केवल "संपत्ति और देयता" लिख देना: दो अलग बिंदु (जैसे वित्तीय स्थिति और तरलता) लिखें।