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पेपर I · इकाई III · भाग ग

लेखा मानक: AS और Ind AS की सूची तथा किस कंपनी पर कौन-सा लागू

AS और Ind AS की सूची, नियम 4 की रूपरेखा, नेटवर्थ गणना का हल उदाहरण और अभ्यास प्रश्न।

  • AS सूची
  • Ind AS सूची
  • नियम 4
  • नेटवर्थ
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग ग: "Accounting Standards: basic knowledge." इस पृष्ठ पर AS और Ind AS की सूची, और किस कंपनी पर कौन-सा लागू होता है, यह बताया गया है। मानक क्या है और कैसे बनता है, यह पिछले पृष्ठ (accounting-standards-basics) पर है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • सिलेबस में केवल "basic knowledge" है, इसलिए इस पृष्ठ में सूची और लागू होने के नियम का सार रखा गया है, पूरे मानकों का पाठ नहीं।
  • उपलब्ध पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में लेखा मानकों पर सीधा प्रश्न नहीं आया। फिर भी "किन कंपनियों पर Ind AS लागू है" और "AS 3 / AS 9 / AS 2 क्या है" जैसे प्रश्न 2 या 5 अंक में पूछे जा सकते हैं; यह अनुमान है, पैटर्न का दावा नहीं।
  • संख्याएँ (नेटवर्थ की सीमाएँ) और तारीखें सबसे अधिक भूली जाती हैं; नीचे की तालिका और हल उदाहरण उन्हें पक्का करते हैं।

सरल भाषा में: दो मानक-समूह, एक सवाल

किसी गाँव में दो तरह की सड़कें हों: पक्की राष्ट्रीय सड़क के नियम अलग और ग्राम-सड़क के नियम अलग। हर वाहन को यह जानना पड़ता है कि वह किस सड़क पर है। कंपनियों के लेखा मानकों में भी यही है: कुछ कंपनियाँ भारतीय लेखा मानक (Ind AS) मानती हैं, बाकी पुराने AS। सवाल बस यह है कि कौन-सी कंपनी किस समूह में है।

राजपत्र के अनुसार (कंपनी (भारतीय लेखा मानक) नियम 2015, नियम 3): जिन कंपनी-वर्गों का नियम 4 में उल्लेख है, उन पर Ind AS लागू है; इनसे इतर कंपनियों पर कंपनी (लेखा मानक) नियम 2006 के अनुबंध में दिए AS लागू हैं। नियम यह भी कहता है कि जो कंपनी Ind AS अपनाती है, वह उन्हीं का पालन करेगी, और जो AS अपनाती है वह केवल AS का।

ICAI की अध्ययन-सामग्री एक और स्तर जोड़ती है: AS का प्रयोग (क) Ind AS न अपनाने वाली कंपनियाँ, (ख) लघु और मध्यम आकार की कंपनियाँ (SMC) और (ग) गैर-कंपनी इकाइयाँ करती हैं। SMC की परिभाषा कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की अधिसूचना में है; गैर-कंपनी इकाइयों को ICAI स्तरों में बाँटता है और कुछ मानकों में छूट देता है।

Ind AS लागू होने की रूपरेखा (कंपनी (भारतीय लेखा मानक) नियम 2015, नियम 4)

श्रेणीकब से (लेखा-अवधि जो इस तिथि को या बाद शुरू हो)कौन-सी कंपनियाँ
स्वैच्छिक1 अप्रैल 2015कोई भी कंपनी, उसकी होल्डिंग, सहायक, संयुक्त उद्यम या सहयोगी कंपनी
चरण I1 अप्रैल 2016(क) सूचीबद्ध या सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया वाली कंपनियाँ, जिनका नेटवर्थ ₹500 करोड़ या अधिक; (ख) अन्य कंपनियाँ, जिनका नेटवर्थ ₹500 करोड़ या अधिक; (ग) (क) और (ख) की होल्डिंग, सहायक, संयुक्त उद्यम और सहयोगी कंपनियाँ
चरण II1 अप्रैल 2017(क) सूचीबद्ध कंपनियाँ, जिनका नेटवर्थ ₹500 करोड़ से कम; (ख) असूचीबद्ध कंपनियाँ, जिनका नेटवर्थ ₹250 करोड़ या अधिक पर ₹500 करोड़ से कम; (ग) इनकी होल्डिंग, सहायक, संयुक्त उद्यम और सहयोगी कंपनियाँ
NBFC (2016 का संशोधन)1 अप्रैल 2018NBFC जिनका नेटवर्थ ₹500 करोड़ या अधिक, और उनकी होल्डिंग, सहायक, संयुक्त उद्यम, सहयोगी
NBFC (2016 का संशोधन)1 अप्रैल 2019सूचीबद्ध NBFC (नेटवर्थ ₹500 करोड़ से कम) और असूचीबद्ध NBFC (नेटवर्थ ₹250 करोड़ से ₹500 करोड़ से कम), और उनकी समूह-कंपनियाँ
अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के समूह1 अप्रैल 2018बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) की होल्डिंग, सहायक, संयुक्त उद्यम या सहयोगी कंपनियाँ

राजपत्र: G.S.R. 111(E), 16-02-2015 और संशोधन G.S.R. 365(E), 30-03-2016। ICAI अध्याय 1 में चरण I और II की यही शर्तें हैं। चरण I-II में तुलना के लिए पूर्व वर्ष के आँकड़े भी Ind AS में देने होते हैं।

महत्त्वपूर्ण अपवाद और शर्तें

पहला अपवाद SME एक्सचेंज से जुड़ा है। राजपत्र के परंतुक के अनुसार जिन कंपनियों की प्रतिभूतियाँ SEBI के नियमों के अध्याय XB के SME एक्सचेंज पर, या अध्याय XC के अंतर्गत संस्थागत व्यापार मंच पर (बिना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के) सूचीबद्ध हैं या होने की प्रक्रिया में हैं, उन पर स्वैच्छिक विकल्प को छोड़कर यह रूपरेखा लागू नहीं होती।

दूसरा अपवाद बैंक और बीमा कंपनियाँ हैं। 2016 के संशोधन के बाद नियम 5 के अनुसार बैंकिंग कंपनियाँ और बीमा कंपनियाँ Ind AS का पालन क्रमशः RBI और IRDA की अधिसूचना के अनुसार करेंगी। (मूल 2015 के नियम 5 में बीमा, बैंकिंग और NBFC को इन नियमों के पालन से छूट दी गई थी; NBFC को बाद में अलग समय-सारणी में जोड़ा गया।)

तीसरी बात स्वैच्छिक अपनाने की अपरिवर्तनीयता है। नियम 4(8) के अनुसार Ind AS एक बार स्वेच्छा से अपनाए तो वापसी नहीं होती। नियम 4(9) कहता है कि जो कंपनी Ind AS अपनाना शुरू कर दे, वह आगे भी उन्हीं का पालन करेगी, चाहे बाद में नेटवर्थ जैसी शर्त लागू न रहे। यानी "एक बार Ind AS, हमेशा Ind AS"; इस वाक्य को सुविधा के लिए सूत्र की तरह याद रखें, कानून का शब्द-प्रयोग नहीं।

चौथी बात स्तर की है। नियम 4(3) के अनुसार Ind AS एकल (standalone) और समेकित (consolidated) दोनों विवरणों पर लागू होते हैं। और विदेशी सहायक, सहयोगी या संयुक्त उद्यम अपने एकल विवरण अपने देश की आवश्यकता के अनुसार बना सकते हैं, पर भारतीय कंपनी का समेकित विवरण Ind AS में ही बनेगा (नियम 4(5))। किसी विदेशी कंपनी की भारतीय सहायक कंपनी को भी मापदंड पूरा होने पर Ind AS अपनाने पड़ते हैं (नियम 4(6))।

नेटवर्थ कैसे निकलता है

सब कुछ नेटवर्थ पर टिका है, इसलिए इसकी परिभाषा समझें। कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 2(57) के अनुसार (ICAI द्वारा उद्धृत), नेटवर्थ का अर्थ है चुकता शेयर पूँजी और लाभ तथा प्रतिभूति प्रीमियम खाते से बने सभी आरक्षित कोषों का कुल मूल्य, जिसमें से संचित हानियाँ, आस्थगित व्यय और अलिखित विविध व्यय घटाए जाते हैं (अंकेक्षित तुलन-पत्र के अनुसार)। इसमें संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन, मूल्यह्रास के प्रतिलेखन और समामेलन से बने आरक्षित कोष शामिल नहीं होते।

दूसरी बात गणना की तिथि की है। नियम 4(2) के अनुसार नेटवर्थ कंपनी के एकल वित्तीय विवरणों से 31 मार्च 2014 के, या उसके बाद समाप्त होने वाली पहली अंकेक्षित अवधि के आधार पर निकाला जाता है। जो कंपनी उस तिथि के बाद पहली बार सीमा पार करे, वह उस वर्ष के अंत में सीमा पार करने के बाद अगले वित्तीय वर्ष से Ind AS लागू करती है। राजपत्र का उदाहरण: 31 मार्च 2017 को पहली बार सीमा पार करने वाली कंपनी वित्तीय वर्ष 2017-18 से Ind AS अपनाएगी।

तीसरी बात संक्रमण की है। ICAI का उदाहरण: कोई कंपनी 1 अप्रैल 20X4 से Ind AS अपनाए, तो वह वित्तीय वर्ष 20X4-X5 के लिए पहले Ind AS विवरण बनाएगी, तुलनात्मक आँकड़े 20X3-X4 के देगी, और संक्रमण की तिथि 1 अप्रैल 20X3 मानी जाएगी। यही कारण है कि आवेदन-तिथि से एक वर्ष पहले का आधार-तुलन-पत्र भी Ind AS में बदलना पड़ता है।

भारतीय लेखा मानक (AS): सूची

ASशीर्षकविषय
AS 1लेखा-नीतियों का प्रकटीकरणमहत्त्वपूर्ण लेखा-नीतियाँ बताना
AS 2वस्तु-सूची का मूल्यांकनस्टॉक का मूल्य निर्धारण
AS 3नकदी प्रवाह विवरणनकदी के स्रोत और उपयोग
AS 4आकस्मिकताएँ और तुलन-पत्र की तिथि के बाद की घटनाएँतिथि के बाद की घटनाओं का असर
AS 5अवधि का शुद्ध लाभ या हानि, पूर्व-अवधि मदें और लेखा-नीतियों में परिवर्तनपरिवर्तन और असामान्य मदें
AS 7निर्माण संविदाएँठेकेदारों की लेखा-विधि
AS 9राजस्व-मान्यताआय कब दर्ज हो
AS 10संपत्ति, संयंत्र और उपकरणस्थिर संपत्तियाँ
AS 11विदेशी विनिमय दरों में परिवर्तन के प्रभावविदेशी मुद्रा लेन-देन
AS 12सरकारी अनुदानों का लेखांकनअनुदान
AS 13निवेशों का लेखांकननिवेश
AS 14समामेलन का लेखांकनकंपनियों का विलय
AS 15कर्मचारी लाभसेवा-निवृत्ति आदि
AS 16उधार-लागतब्याज का पूँजीकरण
AS 17खंड रिपोर्टिंगव्यवसाय-खंडों का ब्योरा
AS 18संबद्ध पक्ष प्रकटीकरणसंबद्ध पक्षों से लेन-देन
AS 19पट्टेकिराये पर संपत्ति
AS 20प्रति-अंश आयEPS की गणना
AS 21समेकित वित्तीय विवरणसमूह का हिसाब
AS 22आय पर करकरों की व्यवस्था
AS 23समेकित विवरणों में सहयोगियों में निवेशसहयोगी कंपनियाँ
AS 24बंद होने वाले परिचालनव्यवसाय का बंद होना
AS 25अंतरिम वित्तीय रिपोर्टिंगतिमाही आदि विवरण
AS 26अमूर्त संपत्तियाँपेटेंट आदि
AS 27संयुक्त उपक्रमों में हितों की रिपोर्टिंगसंयुक्त उद्यम
AS 28संपत्तियों की हानि (impairment)संपत्ति के मूल्य में गिरावट
AS 29प्रावधान, आकस्मिक देयताएँ और आकस्मिक संपत्तियाँसंभावित देयताएँ

शीर्षक ICAI की तालिका से (अंग्रेज़ी शीर्षक का हिंदी रूपांतर); ICAI की तालिका में AS 6 और AS 8 नहीं हैं। "विषय" स्तंभ समझाने के लिए है।

भारतीय लेखा मानक (Ind AS): सूची

Ind ASशीर्षक
Ind AS 1वित्तीय विवरणों की प्रस्तुति
Ind AS 2वस्तु-सूची
Ind AS 7नकदी प्रवाह विवरण
Ind AS 8लेखा-नीतियाँ, अनुमानों में परिवर्तन और त्रुटियाँ
Ind AS 10रिपोर्टिंग अवधि के बाद की घटनाएँ
Ind AS 12आयकर
Ind AS 16संपत्ति, संयंत्र और उपकरण
Ind AS 19कर्मचारी लाभ
Ind AS 20सरकारी अनुदानों का लेखांकन और सरकारी सहायता का प्रकटीकरण
Ind AS 21विदेशी विनिमय दरों में परिवर्तन के प्रभाव
Ind AS 23उधार-लागत
Ind AS 24संबद्ध पक्ष प्रकटीकरण
Ind AS 27पृथक वित्तीय विवरण
Ind AS 28सहयोगियों और संयुक्त उद्यमों में निवेश
Ind AS 29अति-मुद्रास्फीति वाली अर्थव्यवस्थाओं में रिपोर्टिंग
Ind AS 32वित्तीय लिखत: प्रस्तुति
Ind AS 33प्रति-अंश आय
Ind AS 34अंतरिम वित्तीय रिपोर्टिंग
Ind AS 36संपत्तियों की हानि
Ind AS 37प्रावधान, आकस्मिक देयताएँ और आकस्मिक संपत्तियाँ
Ind AS 38अमूर्त संपत्तियाँ
Ind AS 40निवेश संपत्ति
Ind AS 41कृषि
Ind AS 101Ind AS का प्रथम बार अंगीकरण
Ind AS 102शेयर-आधारित भुगतान
Ind AS 103व्यावसायिक संयोजन
Ind AS 105बिक्री के लिए धारित गैर-चालू संपत्तियाँ और बंद परिचालन
Ind AS 106खनिज संसाधनों की खोज और मूल्यांकन
Ind AS 107वित्तीय लिखत: प्रकटीकरण
Ind AS 108परिचालन खंड
Ind AS 109वित्तीय लिखत
Ind AS 110समेकित वित्तीय विवरण
Ind AS 111संयुक्त व्यवस्थाएँ
Ind AS 112अन्य संस्थाओं में हितों का प्रकटीकरण
Ind AS 113उचित मूल्य मापन
Ind AS 114नियामकीय आस्थगित खाते
Ind AS 115ग्राहकों के साथ अनुबंधों से राजस्व
Ind AS 116पट्टे
Ind AS 117बीमा अनुबंध

ICAI अध्याय 1 की सूची के अनुसार। मानक समय-समय पर जुड़ते या बदलते हैं, इसलिए पूर्ण और नवीनतम सूची के लिए MCA की अधिसूचना देखें।

सूची को याद रखने की तरकीब

AS की सूची में 27 पंक्तियाँ रटना कठिन है, इसलिए उन्हें विषय के गुच्छों में बाँटें। (यह वर्गीकरण विश्लेषण है, स्रोतों में इसी रूप में नहीं है।) प्रस्तुति और नीति: AS 1, AS 5, AS 3। माप और मूल्यांकन: AS 2 (स्टॉक), AS 10 (संपत्ति), AS 16 (उधार-लागत), AS 26 (अमूर्त संपत्ति), AS 28 (संपत्ति की हानि)। आय और कर: AS 9 (राजस्व), AS 22 (कर), AS 20 (EPS)। समूह और संयोजन: AS 14 (समामेलन), AS 21, AS 23, AS 27 (समेकन और संयुक्त उद्यम)। प्रकटीकरण: AS 17 (खंड), AS 18 (संबद्ध पक्ष), AS 24 (बंद परिचालन), AS 25 (अंतरिम)। इन पाँच गुच्छों से हर नंबर का काम याद रहता है।

Ind AS के लिए उपाय और सरल है: मानक का नंबर देखकर पहचानें कि वह IAS-आधारित (1 से 41 तक) है या IFRS-आधारित (101 से ऊपर)। उदाहरण: Ind AS 2 (वस्तु-सूची) और Ind AS 7 (नकदी प्रवाह) पुराने IAS-शैली के हैं, जबकि Ind AS 115 (राजस्व) और 116 (पट्टे) IFRS-शैली के। परीक्षा में दो-तीन नाम सही लिख देना पूरे उत्तर को वज़न दे देता है।

Ind AS लागू होने का निर्णय-वृक्ष

  1. क्या कंपनी बैंक या बीमा है?

    हाँ: RBI/IRDA की अधिसूचना

  2. SME एक्सचेंज पर सूचीबद्ध?

    हाँ: केवल स्वैच्छिक

  3. सूचीबद्ध या नेटवर्थ ≥ ₹250 करोड़?

    हाँ: चरण I या II

  4. होल्डिंग, सहायक, JV या सहयोगी?

    हाँ: उसी श्रेणी में

  5. उत्तर नहीं

    AS (नियम 2006); चाहें तो स्वैच्छिक Ind AS

राजपत्र और ICAI के आधार पर सरलीकृत रूपरेखा। NBFC की अलग समय-सारणी तालिका में है।

मुख्य तथ्य

Ind AS नियम की अधिसूचना
G.S.R. 111(E), 16 फरवरी 2015; धारा 133 के अंतर्गत
स्वैच्छिक अंगीकरण
1 अप्रैल 2015 या उसके बाद की अवधि से; एक बार अपनाने पर अपरिवर्तनीय
चरण I
1 अप्रैल 2016; नेटवर्थ ₹500 करोड़ या अधिक (सूचीबद्ध या असूचीबद्ध) और उनके समूह
चरण II
1 अप्रैल 2017; सूचीबद्ध (नेटवर्थ ₹500 करोड़ से कम); असूचीबद्ध ₹250 करोड़ से ₹500 करोड़ से कम; और उनके समूह
नेटवर्थ की परिभाषा
धारा 2(57): चुकता पूँजी और लाभ तथा प्रतिभूति प्रीमियम से बने कोष, घटाकर संचित हानि और अलिखित व्यय; पुनर्मूल्यांकन आदि कोष शामिल नहीं
NBFC की समय-सारणी
1 अप्रैल 2018 (नेटवर्थ ₹500 करोड़ या अधिक); 1 अप्रैल 2019 (शेष चर्चित श्रेणियाँ), अधिसूचना 30-03-2016
बैंक और बीमा कंपनियाँ
RBI और IRDA की अधिसूचना के अनुसार Ind AS (नियम 5, संशोधित)
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • Ind AS को सभी कंपनियों पर लागू बता देना: असूचीबद्ध और कम नेटवर्थ वाली कंपनियाँ नियम 4 में नहीं आतीं और AS अपनाती हैं।
  • नेटवर्थ में पुनर्मूल्यांकन आरक्षित कोष जोड़ देना: धारा 2(57) उसे शामिल नहीं करती।
  • सीमा की संख्याएँ उलट देना: ₹500 करोड़ चरण I की, ₹250 करोड़ असूचीबद्ध कंपनियों के चरण II की सीमा है।
  • स्वैच्छिक Ind AS को बाद में छोड़ने की गुंजाइश मानना: नियम 4(8) इसे अपरिवर्तनीय बताता है।
  • बैंक, बीमा और NBFC की स्थिति एक जैसी लिख देना: बैंक और बीमा के लिए RBI और IRDA की अधिसूचना, NBFC के लिए अलग समय-सारणी है।
  • AS 6 और AS 8 को सूची में जोड़ देना: ICAI की तालिका में ये नहीं हैं।

पिछले प्रश्नों के बारे में

उपलब्ध पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में लेखा मानकों पर सीधा प्रश्न नहीं आया, इसलिए इस पृष्ठ पर पिछले वर्ष का कोई प्रश्न नहीं है। नीचे के प्रश्न अपने बनाए अभ्यास प्रश्न हैं।