लेखा मानक: AS और Ind AS की सूची तथा किस कंपनी पर कौन-सा लागू
AS और Ind AS की सूची, नियम 4 की रूपरेखा, नेटवर्थ गणना का हल उदाहरण और अभ्यास प्रश्न।
- AS सूची
- Ind AS सूची
- नियम 4
- नेटवर्थ
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग ग: "Accounting Standards: basic knowledge." इस पृष्ठ पर AS और Ind AS की सूची, और किस कंपनी पर कौन-सा लागू होता है, यह बताया गया है। मानक क्या है और कैसे बनता है, यह पिछले पृष्ठ (accounting-standards-basics) पर है।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- सिलेबस में केवल "basic knowledge" है, इसलिए इस पृष्ठ में सूची और लागू होने के नियम का सार रखा गया है, पूरे मानकों का पाठ नहीं।
- उपलब्ध पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में लेखा मानकों पर सीधा प्रश्न नहीं आया। फिर भी "किन कंपनियों पर Ind AS लागू है" और "AS 3 / AS 9 / AS 2 क्या है" जैसे प्रश्न 2 या 5 अंक में पूछे जा सकते हैं; यह अनुमान है, पैटर्न का दावा नहीं।
- संख्याएँ (नेटवर्थ की सीमाएँ) और तारीखें सबसे अधिक भूली जाती हैं; नीचे की तालिका और हल उदाहरण उन्हें पक्का करते हैं।
सरल भाषा में: दो मानक-समूह, एक सवाल
किसी गाँव में दो तरह की सड़कें हों: पक्की राष्ट्रीय सड़क के नियम अलग और ग्राम-सड़क के नियम अलग। हर वाहन को यह जानना पड़ता है कि वह किस सड़क पर है। कंपनियों के लेखा मानकों में भी यही है: कुछ कंपनियाँ भारतीय लेखा मानक (Ind AS) मानती हैं, बाकी पुराने AS। सवाल बस यह है कि कौन-सी कंपनी किस समूह में है।
राजपत्र के अनुसार (कंपनी (भारतीय लेखा मानक) नियम 2015, नियम 3): जिन कंपनी-वर्गों का नियम 4 में उल्लेख है, उन पर Ind AS लागू है; इनसे इतर कंपनियों पर कंपनी (लेखा मानक) नियम 2006 के अनुबंध में दिए AS लागू हैं। नियम यह भी कहता है कि जो कंपनी Ind AS अपनाती है, वह उन्हीं का पालन करेगी, और जो AS अपनाती है वह केवल AS का।
ICAI की अध्ययन-सामग्री एक और स्तर जोड़ती है: AS का प्रयोग (क) Ind AS न अपनाने वाली कंपनियाँ, (ख) लघु और मध्यम आकार की कंपनियाँ (SMC) और (ग) गैर-कंपनी इकाइयाँ करती हैं। SMC की परिभाषा कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की अधिसूचना में है; गैर-कंपनी इकाइयों को ICAI स्तरों में बाँटता है और कुछ मानकों में छूट देता है।
Ind AS लागू होने की रूपरेखा (कंपनी (भारतीय लेखा मानक) नियम 2015, नियम 4)
| श्रेणी | कब से (लेखा-अवधि जो इस तिथि को या बाद शुरू हो) | कौन-सी कंपनियाँ |
|---|---|---|
| स्वैच्छिक | 1 अप्रैल 2015 | कोई भी कंपनी, उसकी होल्डिंग, सहायक, संयुक्त उद्यम या सहयोगी कंपनी |
| चरण I | 1 अप्रैल 2016 | (क) सूचीबद्ध या सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया वाली कंपनियाँ, जिनका नेटवर्थ ₹500 करोड़ या अधिक; (ख) अन्य कंपनियाँ, जिनका नेटवर्थ ₹500 करोड़ या अधिक; (ग) (क) और (ख) की होल्डिंग, सहायक, संयुक्त उद्यम और सहयोगी कंपनियाँ |
| चरण II | 1 अप्रैल 2017 | (क) सूचीबद्ध कंपनियाँ, जिनका नेटवर्थ ₹500 करोड़ से कम; (ख) असूचीबद्ध कंपनियाँ, जिनका नेटवर्थ ₹250 करोड़ या अधिक पर ₹500 करोड़ से कम; (ग) इनकी होल्डिंग, सहायक, संयुक्त उद्यम और सहयोगी कंपनियाँ |
| NBFC (2016 का संशोधन) | 1 अप्रैल 2018 | NBFC जिनका नेटवर्थ ₹500 करोड़ या अधिक, और उनकी होल्डिंग, सहायक, संयुक्त उद्यम, सहयोगी |
| NBFC (2016 का संशोधन) | 1 अप्रैल 2019 | सूचीबद्ध NBFC (नेटवर्थ ₹500 करोड़ से कम) और असूचीबद्ध NBFC (नेटवर्थ ₹250 करोड़ से ₹500 करोड़ से कम), और उनकी समूह-कंपनियाँ |
| अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के समूह | 1 अप्रैल 2018 | बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) की होल्डिंग, सहायक, संयुक्त उद्यम या सहयोगी कंपनियाँ |
राजपत्र: G.S.R. 111(E), 16-02-2015 और संशोधन G.S.R. 365(E), 30-03-2016। ICAI अध्याय 1 में चरण I और II की यही शर्तें हैं। चरण I-II में तुलना के लिए पूर्व वर्ष के आँकड़े भी Ind AS में देने होते हैं।
महत्त्वपूर्ण अपवाद और शर्तें
पहला अपवाद SME एक्सचेंज से जुड़ा है। राजपत्र के परंतुक के अनुसार जिन कंपनियों की प्रतिभूतियाँ SEBI के नियमों के अध्याय XB के SME एक्सचेंज पर, या अध्याय XC के अंतर्गत संस्थागत व्यापार मंच पर (बिना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के) सूचीबद्ध हैं या होने की प्रक्रिया में हैं, उन पर स्वैच्छिक विकल्प को छोड़कर यह रूपरेखा लागू नहीं होती।
दूसरा अपवाद बैंक और बीमा कंपनियाँ हैं। 2016 के संशोधन के बाद नियम 5 के अनुसार बैंकिंग कंपनियाँ और बीमा कंपनियाँ Ind AS का पालन क्रमशः RBI और IRDA की अधिसूचना के अनुसार करेंगी। (मूल 2015 के नियम 5 में बीमा, बैंकिंग और NBFC को इन नियमों के पालन से छूट दी गई थी; NBFC को बाद में अलग समय-सारणी में जोड़ा गया।)
तीसरी बात स्वैच्छिक अपनाने की अपरिवर्तनीयता है। नियम 4(8) के अनुसार Ind AS एक बार स्वेच्छा से अपनाए तो वापसी नहीं होती। नियम 4(9) कहता है कि जो कंपनी Ind AS अपनाना शुरू कर दे, वह आगे भी उन्हीं का पालन करेगी, चाहे बाद में नेटवर्थ जैसी शर्त लागू न रहे। यानी "एक बार Ind AS, हमेशा Ind AS"; इस वाक्य को सुविधा के लिए सूत्र की तरह याद रखें, कानून का शब्द-प्रयोग नहीं।
चौथी बात स्तर की है। नियम 4(3) के अनुसार Ind AS एकल (standalone) और समेकित (consolidated) दोनों विवरणों पर लागू होते हैं। और विदेशी सहायक, सहयोगी या संयुक्त उद्यम अपने एकल विवरण अपने देश की आवश्यकता के अनुसार बना सकते हैं, पर भारतीय कंपनी का समेकित विवरण Ind AS में ही बनेगा (नियम 4(5))। किसी विदेशी कंपनी की भारतीय सहायक कंपनी को भी मापदंड पूरा होने पर Ind AS अपनाने पड़ते हैं (नियम 4(6))।
नेटवर्थ कैसे निकलता है
सब कुछ नेटवर्थ पर टिका है, इसलिए इसकी परिभाषा समझें। कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 2(57) के अनुसार (ICAI द्वारा उद्धृत), नेटवर्थ का अर्थ है चुकता शेयर पूँजी और लाभ तथा प्रतिभूति प्रीमियम खाते से बने सभी आरक्षित कोषों का कुल मूल्य, जिसमें से संचित हानियाँ, आस्थगित व्यय और अलिखित विविध व्यय घटाए जाते हैं (अंकेक्षित तुलन-पत्र के अनुसार)। इसमें संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन, मूल्यह्रास के प्रतिलेखन और समामेलन से बने आरक्षित कोष शामिल नहीं होते।
दूसरी बात गणना की तिथि की है। नियम 4(2) के अनुसार नेटवर्थ कंपनी के एकल वित्तीय विवरणों से 31 मार्च 2014 के, या उसके बाद समाप्त होने वाली पहली अंकेक्षित अवधि के आधार पर निकाला जाता है। जो कंपनी उस तिथि के बाद पहली बार सीमा पार करे, वह उस वर्ष के अंत में सीमा पार करने के बाद अगले वित्तीय वर्ष से Ind AS लागू करती है। राजपत्र का उदाहरण: 31 मार्च 2017 को पहली बार सीमा पार करने वाली कंपनी वित्तीय वर्ष 2017-18 से Ind AS अपनाएगी।
तीसरी बात संक्रमण की है। ICAI का उदाहरण: कोई कंपनी 1 अप्रैल 20X4 से Ind AS अपनाए, तो वह वित्तीय वर्ष 20X4-X5 के लिए पहले Ind AS विवरण बनाएगी, तुलनात्मक आँकड़े 20X3-X4 के देगी, और संक्रमण की तिथि 1 अप्रैल 20X3 मानी जाएगी। यही कारण है कि आवेदन-तिथि से एक वर्ष पहले का आधार-तुलन-पत्र भी Ind AS में बदलना पड़ता है।
भारतीय लेखा मानक (AS): सूची
| AS | शीर्षक | विषय |
|---|---|---|
| AS 1 | लेखा-नीतियों का प्रकटीकरण | महत्त्वपूर्ण लेखा-नीतियाँ बताना |
| AS 2 | वस्तु-सूची का मूल्यांकन | स्टॉक का मूल्य निर्धारण |
| AS 3 | नकदी प्रवाह विवरण | नकदी के स्रोत और उपयोग |
| AS 4 | आकस्मिकताएँ और तुलन-पत्र की तिथि के बाद की घटनाएँ | तिथि के बाद की घटनाओं का असर |
| AS 5 | अवधि का शुद्ध लाभ या हानि, पूर्व-अवधि मदें और लेखा-नीतियों में परिवर्तन | परिवर्तन और असामान्य मदें |
| AS 7 | निर्माण संविदाएँ | ठेकेदारों की लेखा-विधि |
| AS 9 | राजस्व-मान्यता | आय कब दर्ज हो |
| AS 10 | संपत्ति, संयंत्र और उपकरण | स्थिर संपत्तियाँ |
| AS 11 | विदेशी विनिमय दरों में परिवर्तन के प्रभाव | विदेशी मुद्रा लेन-देन |
| AS 12 | सरकारी अनुदानों का लेखांकन | अनुदान |
| AS 13 | निवेशों का लेखांकन | निवेश |
| AS 14 | समामेलन का लेखांकन | कंपनियों का विलय |
| AS 15 | कर्मचारी लाभ | सेवा-निवृत्ति आदि |
| AS 16 | उधार-लागत | ब्याज का पूँजीकरण |
| AS 17 | खंड रिपोर्टिंग | व्यवसाय-खंडों का ब्योरा |
| AS 18 | संबद्ध पक्ष प्रकटीकरण | संबद्ध पक्षों से लेन-देन |
| AS 19 | पट्टे | किराये पर संपत्ति |
| AS 20 | प्रति-अंश आय | EPS की गणना |
| AS 21 | समेकित वित्तीय विवरण | समूह का हिसाब |
| AS 22 | आय पर कर | करों की व्यवस्था |
| AS 23 | समेकित विवरणों में सहयोगियों में निवेश | सहयोगी कंपनियाँ |
| AS 24 | बंद होने वाले परिचालन | व्यवसाय का बंद होना |
| AS 25 | अंतरिम वित्तीय रिपोर्टिंग | तिमाही आदि विवरण |
| AS 26 | अमूर्त संपत्तियाँ | पेटेंट आदि |
| AS 27 | संयुक्त उपक्रमों में हितों की रिपोर्टिंग | संयुक्त उद्यम |
| AS 28 | संपत्तियों की हानि (impairment) | संपत्ति के मूल्य में गिरावट |
| AS 29 | प्रावधान, आकस्मिक देयताएँ और आकस्मिक संपत्तियाँ | संभावित देयताएँ |
शीर्षक ICAI की तालिका से (अंग्रेज़ी शीर्षक का हिंदी रूपांतर); ICAI की तालिका में AS 6 और AS 8 नहीं हैं। "विषय" स्तंभ समझाने के लिए है।
भारतीय लेखा मानक (Ind AS): सूची
| Ind AS | शीर्षक |
|---|---|
| Ind AS 1 | वित्तीय विवरणों की प्रस्तुति |
| Ind AS 2 | वस्तु-सूची |
| Ind AS 7 | नकदी प्रवाह विवरण |
| Ind AS 8 | लेखा-नीतियाँ, अनुमानों में परिवर्तन और त्रुटियाँ |
| Ind AS 10 | रिपोर्टिंग अवधि के बाद की घटनाएँ |
| Ind AS 12 | आयकर |
| Ind AS 16 | संपत्ति, संयंत्र और उपकरण |
| Ind AS 19 | कर्मचारी लाभ |
| Ind AS 20 | सरकारी अनुदानों का लेखांकन और सरकारी सहायता का प्रकटीकरण |
| Ind AS 21 | विदेशी विनिमय दरों में परिवर्तन के प्रभाव |
| Ind AS 23 | उधार-लागत |
| Ind AS 24 | संबद्ध पक्ष प्रकटीकरण |
| Ind AS 27 | पृथक वित्तीय विवरण |
| Ind AS 28 | सहयोगियों और संयुक्त उद्यमों में निवेश |
| Ind AS 29 | अति-मुद्रास्फीति वाली अर्थव्यवस्थाओं में रिपोर्टिंग |
| Ind AS 32 | वित्तीय लिखत: प्रस्तुति |
| Ind AS 33 | प्रति-अंश आय |
| Ind AS 34 | अंतरिम वित्तीय रिपोर्टिंग |
| Ind AS 36 | संपत्तियों की हानि |
| Ind AS 37 | प्रावधान, आकस्मिक देयताएँ और आकस्मिक संपत्तियाँ |
| Ind AS 38 | अमूर्त संपत्तियाँ |
| Ind AS 40 | निवेश संपत्ति |
| Ind AS 41 | कृषि |
| Ind AS 101 | Ind AS का प्रथम बार अंगीकरण |
| Ind AS 102 | शेयर-आधारित भुगतान |
| Ind AS 103 | व्यावसायिक संयोजन |
| Ind AS 105 | बिक्री के लिए धारित गैर-चालू संपत्तियाँ और बंद परिचालन |
| Ind AS 106 | खनिज संसाधनों की खोज और मूल्यांकन |
| Ind AS 107 | वित्तीय लिखत: प्रकटीकरण |
| Ind AS 108 | परिचालन खंड |
| Ind AS 109 | वित्तीय लिखत |
| Ind AS 110 | समेकित वित्तीय विवरण |
| Ind AS 111 | संयुक्त व्यवस्थाएँ |
| Ind AS 112 | अन्य संस्थाओं में हितों का प्रकटीकरण |
| Ind AS 113 | उचित मूल्य मापन |
| Ind AS 114 | नियामकीय आस्थगित खाते |
| Ind AS 115 | ग्राहकों के साथ अनुबंधों से राजस्व |
| Ind AS 116 | पट्टे |
| Ind AS 117 | बीमा अनुबंध |
ICAI अध्याय 1 की सूची के अनुसार। मानक समय-समय पर जुड़ते या बदलते हैं, इसलिए पूर्ण और नवीनतम सूची के लिए MCA की अधिसूचना देखें।
सूची को याद रखने की तरकीब
AS की सूची में 27 पंक्तियाँ रटना कठिन है, इसलिए उन्हें विषय के गुच्छों में बाँटें। (यह वर्गीकरण विश्लेषण है, स्रोतों में इसी रूप में नहीं है।) प्रस्तुति और नीति: AS 1, AS 5, AS 3। माप और मूल्यांकन: AS 2 (स्टॉक), AS 10 (संपत्ति), AS 16 (उधार-लागत), AS 26 (अमूर्त संपत्ति), AS 28 (संपत्ति की हानि)। आय और कर: AS 9 (राजस्व), AS 22 (कर), AS 20 (EPS)। समूह और संयोजन: AS 14 (समामेलन), AS 21, AS 23, AS 27 (समेकन और संयुक्त उद्यम)। प्रकटीकरण: AS 17 (खंड), AS 18 (संबद्ध पक्ष), AS 24 (बंद परिचालन), AS 25 (अंतरिम)। इन पाँच गुच्छों से हर नंबर का काम याद रहता है।
Ind AS के लिए उपाय और सरल है: मानक का नंबर देखकर पहचानें कि वह IAS-आधारित (1 से 41 तक) है या IFRS-आधारित (101 से ऊपर)। उदाहरण: Ind AS 2 (वस्तु-सूची) और Ind AS 7 (नकदी प्रवाह) पुराने IAS-शैली के हैं, जबकि Ind AS 115 (राजस्व) और 116 (पट्टे) IFRS-शैली के। परीक्षा में दो-तीन नाम सही लिख देना पूरे उत्तर को वज़न दे देता है।
Ind AS लागू होने का निर्णय-वृक्ष
क्या कंपनी बैंक या बीमा है?
हाँ: RBI/IRDA की अधिसूचना
SME एक्सचेंज पर सूचीबद्ध?
हाँ: केवल स्वैच्छिक
सूचीबद्ध या नेटवर्थ ≥ ₹250 करोड़?
हाँ: चरण I या II
होल्डिंग, सहायक, JV या सहयोगी?
हाँ: उसी श्रेणी में
उत्तर नहीं
AS (नियम 2006); चाहें तो स्वैच्छिक Ind AS
मुख्य तथ्य
- Ind AS नियम की अधिसूचना
- G.S.R. 111(E), 16 फरवरी 2015; धारा 133 के अंतर्गत
- स्वैच्छिक अंगीकरण
- 1 अप्रैल 2015 या उसके बाद की अवधि से; एक बार अपनाने पर अपरिवर्तनीय
- चरण I
- 1 अप्रैल 2016; नेटवर्थ ₹500 करोड़ या अधिक (सूचीबद्ध या असूचीबद्ध) और उनके समूह
- चरण II
- 1 अप्रैल 2017; सूचीबद्ध (नेटवर्थ ₹500 करोड़ से कम); असूचीबद्ध ₹250 करोड़ से ₹500 करोड़ से कम; और उनके समूह
- नेटवर्थ की परिभाषा
- धारा 2(57): चुकता पूँजी और लाभ तथा प्रतिभूति प्रीमियम से बने कोष, घटाकर संचित हानि और अलिखित व्यय; पुनर्मूल्यांकन आदि कोष शामिल नहीं
- NBFC की समय-सारणी
- 1 अप्रैल 2018 (नेटवर्थ ₹500 करोड़ या अधिक); 1 अप्रैल 2019 (शेष चर्चित श्रेणियाँ), अधिसूचना 30-03-2016
- बैंक और बीमा कंपनियाँ
- RBI और IRDA की अधिसूचना के अनुसार Ind AS (नियम 5, संशोधित)
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- Ind AS को सभी कंपनियों पर लागू बता देना: असूचीबद्ध और कम नेटवर्थ वाली कंपनियाँ नियम 4 में नहीं आतीं और AS अपनाती हैं।
- नेटवर्थ में पुनर्मूल्यांकन आरक्षित कोष जोड़ देना: धारा 2(57) उसे शामिल नहीं करती।
- सीमा की संख्याएँ उलट देना: ₹500 करोड़ चरण I की, ₹250 करोड़ असूचीबद्ध कंपनियों के चरण II की सीमा है।
- स्वैच्छिक Ind AS को बाद में छोड़ने की गुंजाइश मानना: नियम 4(8) इसे अपरिवर्तनीय बताता है।
- बैंक, बीमा और NBFC की स्थिति एक जैसी लिख देना: बैंक और बीमा के लिए RBI और IRDA की अधिसूचना, NBFC के लिए अलग समय-सारणी है।
- AS 6 और AS 8 को सूची में जोड़ देना: ICAI की तालिका में ये नहीं हैं।
पिछले प्रश्नों के बारे में
उपलब्ध पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में लेखा मानकों पर सीधा प्रश्न नहीं आया, इसलिए इस पृष्ठ पर पिछले वर्ष का कोई प्रश्न नहीं है। नीचे के प्रश्न अपने बनाए अभ्यास प्रश्न हैं।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): नेटवर्थ की गणना और Ind AS का निर्णय
हल सहित उदाहरणएक असूचीबद्ध कंपनी के तीन परिदृश्य
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; कंपनी और संख्याएँ वास्तविक नहीं हैं। संख्याएँ ₹ करोड़ में हैं।
- ICAI की सामग्री में दिए तरीके (धारा 2(57)) के अनुसार गणना की गई है। असूचीबद्ध कंपनी का तुलन-पत्र: चुकता शेयर पूँजी 120; प्रतिभूति प्रीमियम 90; सामान्य आरक्षित कोष 60; पुनर्मूल्यांकन आरक्षित कोष 30; लाभ-हानि खाते का जमा शेष 40; अलिखित विविध व्यय 25।
- 1चरण 1: शामिल मदें पुनर्मूल्यांकन आरक्षित कोष छोड़कर बाकी जोड़ें: 120 + 90 + 60 + 40 = 310।
- 2चरण 2: घटाएँ अलिखित विविध व्यय 25 घटाएँ: 310 − 25 = ₹285 करोड़ नेटवर्थ।
- 3चरण 3: निर्णय असूचीबद्ध कंपनी का नेटवर्थ ₹250 करोड़ या अधिक पर ₹500 करोड़ से कम है, इसलिए वह चरण II की श्रेणी (ख) में आती है। (पुनर्मूल्यांकन कोष 30 जोड़ने की ग़लती से 315 बनता, जिससे भी निर्णय नहीं बदलता; पर सीमा के पास की कंपनी के लिए यह ग़लती निर्णायक हो सकती है।)
- 4चरण 4: परिदृश्य ख, हानि वाला वर्ष मान लें लाभ-हानि खाते में जमा के बदले 190 का नामे शेष है। नेटवर्थ = 120 + 90 + 60 − 190 − 25 = ₹55 करोड़, जो ₹250 करोड़ से कम है। असूचीबद्ध कंपनी पर Ind AS अनिवार्य नहीं; वह AS का पालन करेगी, या स्वैच्छिक Ind AS ले सकती है।
- 5चरण 5: परिदृश्य ग, बड़ा नेटवर्थ चुकता पूँजी 200, प्रीमियम 180, आरक्षित कोष 150, लाभ-हानि जमा 60, अलिखित व्यय 45: 200 + 180 + 150 + 60 − 45 = ₹545 करोड़। यह ₹500 करोड़ से अधिक है, इसलिए चरण I की श्रेणी (ख) में आएगी, चाहे कंपनी सूचीबद्ध न हो।
निष्कर्ष: मुख्य बात गणना की विधि है: पुनर्मूल्यांकन कोष को छोड़ना, घाटे और अलिखित व्यय को घटाना, और फिर ₹250 करोड़ और ₹500 करोड़ की सीमाओं से मिलान।
केस स्टडी (कल्पित): जयपुर की दो कंपनियाँ और अलग मानक
उदाहरण (काल्पनिक)एक ही कारोबार, अलग लागू मानक
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; कंपनियाँ और संख्याएँ वास्तविक नहीं हैं। जयपुर की एक हस्तशिल्प-निर्माता कंपनी "क" असूचीबद्ध है और उसका नेटवर्थ ₹120 करोड़ है। दूसरी कंपनी "ख" उसी कारोबार में है, पर वह एक सूचीबद्ध कंपनी की सहायक है; उसका अपना नेटवर्थ ₹40 करोड़ है और उसकी होल्डिंग कंपनी Ind AS का पालन करती है।
- कंपनी क
- असूचीबद्ध है और नेटवर्थ ₹250 करोड़ से कम है, इसलिए नियम 4 की श्रेणियों में नहीं आती। वह कंपनी (लेखा मानक) नियम 2006 के AS का पालन करेगी (वह चाहे तो स्वेच्छा से Ind AS ले सकती है, पर फिर वापसी नहीं)।
- कंपनी ख
- अपना नेटवर्थ कम होने पर भी वह होल्डिंग कंपनी के कारण Ind AS के दायरे में आएगी, क्योंकि सूचीबद्ध कंपनी की सहायक कंपनी भी उसी श्रेणी में गिनी जाती है (नियम 4(1) की "होल्डिंग, सहायक..." वाली श्रेणी)।
- सबक
- नियम केवल कंपनी के अपने आकार पर नहीं, समूह-संबंध पर भी टिके हैं। इसी वजह से एक ही कारोबार वाली दो कंपनियाँ अलग मानकों पर चल सकती हैं।
- जाँचने की बात
- वास्तविक कंपनी के लिए सही मानक तय करने से पहले लेखा-वर्ष, सूचीबद्धता, नेटवर्थ और समूह-संबंध, चारों जाँचें; यह केस केवल तर्क दिखाने के लिए है।
सीख
किसी कंपनी पर कौन-सा मानक लागू है, यह चार बातों से तय होता है: सूचीबद्धता, नेटवर्थ, समूह-संबंध और क्षेत्र (बैंक, बीमा, NBFC)।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
चरण I में Ind AS किन कंपनियों पर लागू हुए?
आदर्श उत्तर
1 अप्रैल 2016 से ₹500 करोड़ या अधिक नेटवर्थ वाली कंपनियों और उनकी समूह-कंपनियों पर।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
नेटवर्थ का अर्थ बताइए और बताइए कि Ind AS के निर्णय में यह क्यों महत्त्वपूर्ण है।
आदर्श उत्तर
नेटवर्थ में चुकता शेयर पूँजी और लाभ तथा प्रतिभूति प्रीमियम से बने कोष जुड़ते हैं; संचित हानि और अलिखित व्यय घटते हैं, पुनर्मूल्यांकन कोष शामिल नहीं होता (धारा 2(57))। Ind AS की अनिवार्यता ₹250 करोड़ और ₹500 करोड़ की नेटवर्थ-सीमाओं से तय होती है, इसलिए सही गणना निर्णायक है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
भारत में कंपनियों के लिए AS और Ind AS की लागू होने की स्थिति का वर्णन कीजिए।
आदर्श उत्तर
कंपनी (भारतीय लेखा मानक) नियम 2015 के नियम 4 में बताई श्रेणियों पर Ind AS लागू हैं, बाकी पर कंपनी (लेखा मानक) नियम 2006 के AS। चरण I में 1 अप्रैल 2016 से नेटवर्थ ₹500 करोड़ या अधिक वाली कंपनियाँ आईं और चरण II में 1 अप्रैल 2017 से सूचीबद्ध कंपनियाँ (नेटवर्थ ₹500 करोड़ से कम) और असूचीबद्ध कंपनियाँ (नेटवर्थ ₹250 करोड़ से ₹500 करोड़ से कम), साथ में उनकी समूह-कंपनियाँ। NBFC की समय-सारणी अलग (2018, 2019) है। बैंक और बीमा RBI और IRDA की अधिसूचना मानते हैं। स्वैच्छिक अंगीकरण अपरिवर्तनीय है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "भारत में Ind AS किन कंपनियों पर, कब से लागू हुए?" पहली पंक्ति में नियम का नाम और तारीख लिखें।
मुख्य भाग
- नियम: कंपनी (भारतीय लेखा मानक) नियम 2015, G.S.R. 111(E), 16-02-2015
- चरण I (1 अप्रैल 2016) और चरण II (1 अप्रैल 2017) की शर्तें
- NBFC और बैंक-बीमा की अलग स्थिति
- अपवाद: SME एक्सचेंज; स्वैच्छिक अंगीकरण अपरिवर्तनीय
निष्कर्ष
निष्कर्ष: नेटवर्थ, सूचीबद्धता और समूह-संबंध तय करते हैं कि कंपनी Ind AS या AS में से किसका पालन करेगी।
अतिरिक्त मूल्य
- तालिका के रूप में दो चरण दिखाएँ
- नेटवर्थ की परिभाषा एक पंक्ति में जोड़ें
- संख्याओं के साथ इकाई (₹ करोड़) ज़रूर लिखें
त्वरित पुनरावृत्ति
- AS नियम 2006 के अनुबंध में; Ind AS नियम 2015 (G.S.R. 111(E), 16-02-2015) में
- स्वैच्छिक: 1 अप्रैल 2015 से; अपरिवर्तनीय (नियम 4(8)); एक बार Ind AS, आगे भी Ind AS (नियम 4(9))
- चरण I: 1 अप्रैल 2016; नेटवर्थ ₹500 करोड़ या अधिक + समूह
- चरण II: 1 अप्रैल 2017; सूचीबद्ध ₹500 करोड़ से कम; असूचीबद्ध ₹250 से ₹500 करोड़ से कम + समूह
- NBFC: 1 अप्रैल 2018 (₹500 करोड़ या अधिक), 1 अप्रैल 2019 (शेष); अधिसूचना 30-03-2016
- बैंक और बीमा: RBI और IRDA की अधिसूचना (नियम 5)
- SME एक्सचेंज वाली कंपनियाँ: केवल स्वैच्छिक
- नेटवर्थ (धारा 2(57)): पुनर्मूल्यांकन, मूल्यह्रास-प्रतिलेखन, समामेलन के कोष शामिल नहीं
- पहली बार सीमा पार करने पर अगले वित्तीय वर्ष से Ind AS
- AS सूची: 1 से 29, पर 6 और 8 ICAI की तालिका में नहीं; Ind AS: IAS-आधारित 1 से 41, IFRS-आधारित 101 से ऊपर
याद रखने योग्य शब्द
- Ind AS
- AS
- नेटवर्थ
- चरण I और II
- धारा 2(57)
- नियम 4
- NBFC
- स्वैच्छिक