केस 9.14: बेटे के लिए नौकरी का प्रस्ताव
- काल्पनिक केस
- कठिनाई
- मध्यम
- पाठ्यक्रम बिंदु
- 7: दुविधा, हितों का टकराव
- परखे जाने वाले मूल्य और कानून
- हितों का टकराव, सत्यनिष्ठा, प्रकटीकरण, निष्पक्षता; राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 का नियम 5 और नियम 3(1); नोलन के सिद्धांत "निःस्वार्थता" और "ईमानदारी"
उदाहरण (काल्पनिक)बेटे के लिए नौकरी का प्रस्ताव
अनिल राजस्थान के एक जिले में उप निदेशक हैं और जिले के विद्यालयों में कंप्यूटर प्रयोगशाला की आपूर्ति की निविदा की मूल्यांकन समिति के सदस्य हैं। तीन कंपनियों ने बोली लगाई है, उनमें से एक "फ़र्म क" की बोली सबसे कम है। अनिल का बेटा हाल ही में इंजीनियरिंग पूरी कर चुका है और बेरोज़गार है; घर पर ऋण भी है। कंपनी के निदेशक अनिल से मिलते हैं और बड़ी विनम्रता से कहते हैं, "आपका बेटा होनहार है। हम उसे अपने यहाँ अच्छे वेतन पर रखना चाहते हैं। इसका निविदा से कोई संबंध नहीं।" अनिल जानते हैं कि बोली की तकनीकी जाँच में कंपनी के कुछ दस्तावेज़ कमज़ोर लग रहे हैं। समिति के अन्य सदस्य ध्यान दे रहे हैं। समिति की रिपोर्ट अगले सप्ताह देनी है और सहकर्मी अब तक अनिल को सीधा अधिकारी मानते आए हैं। उनकी पत्नी कहती हैं कि यह प्रस्ताव तो उनकी प्रार्थना का उत्तर है।
- हितधारक
- अनिल का बेटा, अनिल और परिवार, अन्य दो बोलीदाता (सबसे कमज़ोर, क्योंकि वे अनजान हैं), समिति के सदस्य, विद्यालय और विद्यार्थी (जिन्हें अच्छे उपकरण मिलने हैं), विभाग।
- मुद्दा
- पुत्र-हित और परिवार की ज़रूरत बनाम सार्वजनिक कर्तव्य की निष्पक्षता; हितों का टकराव, जहाँ भले ही अनिल पक्षपात न करें, पक्षपात की आशंका बन जाती है।
- विकल्प
- क. चुपचाप प्रस्ताव मान लेना और निविदा में निष्पक्ष रहने का भरोसा रखना (परिवार को राहत; पर टकराव, निविदा पर संदेह, नियम का उल्लंघन)। ख. प्रस्ताव ठुकराना, पर किसी को न बताना और मूल्यांकन में बने रहना (अपना हाथ साफ़; पर टकराव की आशंका बनी रहती है, कंपनी के मन में उम्मीद)। ग. लिखित रूप में प्रकटीकरण करना, मूल्यांकन से अलग हो जाना, बेटे को निविदा के निपटने तक प्रस्ताव न मानने की सलाह देना, और जब निविदा का निर्णय हो जाए और ज़रूरी हो तो सरकार की पूर्व स्वीकृति से ही आगे बढ़ना (कुछ देर का नुकसान; पर विश्वसनीयता बची रहती है)।
- सर्वश्रेष्ठ
- ग। आचरण नियम 5 के अनुसार जिन फ़र्मों से सरकारी कर्मचारी का आधिकारिक संबंध है, उनमें पुत्र, पुत्री या आश्रित को रोज़गार देने के लिए सरकार की पूर्व स्वीकृति चाहिए। नियम 3(1) सत्यनिष्ठा माँगता है और नोलन की "निःस्वार्थता" कहती है कि निर्णय केवल जनहित में हों।
सीख
कार्रवाई: अल्प: प्रस्ताव की पूरी लिखित सूचना वरिष्ठ को (यह प्रभाव डालने का प्रयास भी हो सकता है, इसलिए बातचीत का ब्योरा भी), समिति से अलग होना, बेटे को निविदा तक रुकने को कहना, समिति का पुनर्गठन। दीर्घ: समिति सदस्यों से हित-घोषणा का नियम, नौकरी-प्रस्ताव और उपहार का रिकॉर्ड, निविदा-प्रक्रिया की पारदर्शिता।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
(10 अंक, 100 शब्द) अनिल को क्या करना चाहिए? पाँच चरणों के कार्ड से हल कीजिए।
आदर्श उत्तर
हितधारक हैं मेरा बेटा और परिवार, अन्य बोलीदाता, समिति, विद्यार्थी और विभाग। मुद्दा परिवार की ज़रूरत बनाम निविदा की निष्पक्षता का है; टकराव की आशंका ही नुकसान है। रास्ते तीन हैं: चुपचाप मान लेना, ठुकराकर चुप रहना, या लिखित प्रकटीकरण करके अलग होना। पहला नियम तोड़ता है; दूसरे में आशंका बनी रहती है। मैं तीसरा चुनूँगा, क्योंकि आचरण नियम 5 के अनुसार पुत्र के रोज़गार के लिए पूर्व स्वीकृति चाहिए और नियम 3(1) सत्यनिष्ठा माँगता है। मैं प्रस्ताव की सूचना वरिष्ठ को लिखूँगा, समिति से अलग हो जाऊँगा और बेटे को निविदा तक रुकने को कहूँगा। दीर्घकाल में हित-घोषणा का नियम बनवाऊँगा।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
(5 अंक, 50 शब्द) हितों के टकराव में "प्रकटीकरण" और "अलग हो जाना" का महत्व बताइए।
आदर्श उत्तर
प्रकटीकरण से पारदर्शिता, अलग हो जाने से निष्पक्षता बचती है; टकराव केवल पक्षपात से नहीं, उसकी आशंका से भी बनता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
(5 अंक, 50 शब्द) ऐसे टकराव रोकने की दीर्घकालिक व्यवस्था सुझाइए।
आदर्श उत्तर
हित-घोषणा, रिकॉर्ड, पारदर्शी प्रक्रिया, समिति में अदला-बदली।