केस 9.17: स्वयं सहायता समूह और आटा
- काल्पनिक केस
- कठिनाई
- कठिन
- पाठ्यक्रम बिंदु
- 7: नैतिक दुविधा: सही बनाम सही
- परखे जाने वाले मूल्य और कानून
- बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षा बनाम आजीविका और करुणा; आनुपातिकता, निष्पक्षता; अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 47 (पोषण और जनस्वास्थ्य राज्य का प्राथमिक कर्तव्य); राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 (बच्चों के पोषण संबंधी हक, सामान्य उल्लेख); खाद्य सुरक्षा मानक (सामान्य उल्लेख)
उदाहरण (काल्पनिक)स्वयं सहायता समूह और आटा
लक्ष्मी राजस्थान के एक जिले में जिला कार्यक्रम अधिकारी हैं और जिले की आँगनवाड़ियों में पोषाहार की आपूर्ति उनके अधीन है। बारह महिलाओं का एक स्वयं सहायता समूह कई महीने से आँगनवाड़ियों को आटा देता है। यह समूह उन महिलाओं का है जिनमें कई विधवाएँ और निर्धन परिवार हैं और यही उनकी मुख्य आय है। नियमित नमूना जाँच में आटे के एक बैच में नमी अधिक और कीड़े पाए जाते हैं, जो मानक के अनुसार असफल है। उसी बैच का आटा कुछ आँगनवाड़ियों में जा चुका है; कुछ बच्चों को पेट-दर्द की शिकायत की खबर भी है, पर कारण स्पष्ट नहीं। समूह की नेता रोती हुई कहती है, "बारिश में गोदाम में नमी आ गई, गलती से हुआ। ठेका रद्द हुआ तो हम सब बेसहारा।" एक अधिकारी कहता है, "समूह को हमेशा के लिए काली सूची में डाल दो।" दूसरा कहता है, "पहली बार है, छोड़ दीजिए।"
- हितधारक
- आँगनवाड़ी के बच्चे और उनके परिवार (सबसे कमज़ोर पक्ष), समूह की बारह महिलाएँ, आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, विभाग, जाँच प्रयोगशाला, लक्ष्मी।
- मुद्दा
- बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षा बनाम महिलाओं की आजीविका और करुणा। दोनों पक्ष सही हैं; इसलिए आनुपातिक और चरणबद्ध समाधान चाहिए।
- विकल्प
- क. समूह को हमेशा के लिए काली सूची में डालना (सुरक्षा कड़ी; पर पहली गलती पर अनुपात से अधिक दंड, महिलाओं की आजीविका खत्म, भविष्य में सुधार का रास्ता बंद)। ख. पहली बार समझकर बैच चलने देना और कुछ न करना (करुणा; पर बच्चों को जोखिम, मानक की अनदेखी)। ग. तुरंत उस बैच को रोकना और वापस लेना, प्रभावित बच्चों की जाँच और उपचार कराना, वैकल्पिक आपूर्ति से पोषाहार जारी रखना, समूह को लिखित नोटिस, भंडारण और स्वच्छता का प्रशिक्षण और दोबारा नमूना जाँच, और केवल दोहराव पर कठोर कार्रवाई (काम अधिक; पर बच्चे सुरक्षित और महिलाएँ अवसर के साथ)।
- सर्वश्रेष्ठ
- ग। अनुच्छेद 47 पोषण और जनस्वास्थ्य को राज्य का प्राथमिक कर्तव्य बताता है और अनुच्छेद 21 में स्वास्थ्य और जीवन की गरिमा है; आनुपातिकता का सिद्धांत कहता है कि दंड गलती के अनुरूप हो।
सीख
कार्रवाई: अल्प: बैच वापस, बच्चों की चिकित्सा जाँच, परिवारों और आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को खुली सूचना, नोटिस, वैकल्पिक आपूर्ति। दीर्घ: आपूर्तिकर्ताओं के लिए नियमित गुणवत्ता जाँच और प्रशिक्षण, भंडारण सहायता, मानकों की सार्वजनिक सूचना, बार-बार असफल होने पर ही अनुबंध समाप्त।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
(10 अंक, 100 शब्द) लक्ष्मी को क्या करना चाहिए? पाँच चरणों के कार्ड से हल कीजिए।
आदर्श उत्तर
सबसे कमज़ोर हितधारक आँगनवाड़ी के बच्चे हैं; समूह की महिलाएँ, कार्यकर्ता और विभाग भी जुड़े हैं। मुद्दा बच्चों की सुरक्षा बनाम महिलाओं की आजीविका का है; दोनों सही हैं। रास्ते तीन हैं: हमेशा के लिए काली सूची, कुछ न करना, या तुरंत बैच रोककर चरणबद्ध सुधार। पहला अनुपात से अधिक दंड है; दूसरा बच्चों को जोखिम में डालता है। मैं तीसरा चुनूँगी, क्योंकि अनुच्छेद 47 पोषण को राज्य का प्राथमिक कर्तव्य बताता है और दंड अनुपात में होना चाहिए। मैं बैच वापस लूँगी, बच्चों की जाँच कराऊँगी, समूह को नोटिस और प्रशिक्षण दूँगी। दीर्घकाल में नियमित गुणवत्ता जाँच रखूँगी।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
(5 अंक, 50 शब्द) "सही बनाम सही" की दुविधा इस केस में समझाइए।
आदर्श उत्तर
दुविधा में दो मूल्य दोनों सही हैं; इसलिए तुरंत सुरक्षा पहले, फिर करुणा और सुधार का अवसर।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
(5 अंक, 50 शब्द) पोषाहार आपूर्ति की गुणवत्ता के दीर्घकालिक उपाय सुझाइए।
आदर्श उत्तर
नियमित जाँच, प्रशिक्षण, भंडारण सहायता, सार्वजनिक मानक, दोहराव पर कठोरता।