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कर्तव्य: अवधारणा और ब्रैडले का "मेरा स्थान और उसके कर्तव्य"

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RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 2: नैतिक अवधारणाएँ, "कर्तव्य की अवधारणा" (Concept of duty)

  • जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
  • पढ़ने का समय: लगभग 9 मिनट
2 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)

1 प्रश्न, भाग क (2 अंक): 2024 Q2, "My station and its duties"। संबंधित कांट-आधारित प्रश्न (2021 Q8, 2023 Q2) पृष्ठ 6.3 में।

30 सेकंड का सार

याद रखें

  • कर्तव्य वह कार्य है जो हमसे नैतिक, कानूनी या सामाजिक दृष्टि से अपेक्षित है, चाहे रुचिकर हो या नहीं; अधिकार और कर्तव्य पूरक हैं।
  • भारतीय परंपरा में निकट शब्द धर्म और स्वधर्म हैं (गीता 3.35, 18.47); कांट के लिए कर्तव्य-भाव से किया कर्म ही नैतिक है।
  • संविधान में अनुच्छेद 51क के मौलिक कर्तव्य: 42वें संशोधन (1976) से, मूलतः 10, 86वें संशोधन (2002) से 11; अप्रवर्तनीय।
  • ब्रैडले (1876): व्यक्ति के कर्तव्य समाज में उसके स्थान से निकलते हैं, और उन्हें निभाने में आत्म-साक्षात्कार है।
  • आलोचना: यथास्थिति का समर्थन, आदेश-पालन का बहाना; ब्रैडले स्वयं मानते हैं कि सड़े समाज में केवल भूमिका-पालन पर्याप्त नहीं।

भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)

याद रखें

  • प्रश्न (असली PYQ, 2024): Explain 'My station and its duties'.
  • उत्तर: ब्रैडले (1876): व्यक्ति समाज में अपने स्थान के कर्तव्य निभाकर आत्म-साक्षात्कार पाता है।
  • अधिकार और कर्तव्य पूरक हैं: एक का अधिकार दूसरों का कर्तव्य बनता है।
  • सीमा: यह यथास्थिति और अंधे आज्ञापालन का बहाना बन सकता है।

1. अर्थ

कर्तव्य वह कार्य है जो हमसे नैतिक, कानूनी या सामाजिक दृष्टि से करने की अपेक्षा है, चाहे वह रुचिकर हो या नहीं। अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं: एक का अधिकार दूसरे का कर्तव्य बनता है।

2. प्रकार

नैतिक, कानूनी, व्यावसायिक और सामाजिक; सार्वभौमिक (सब पर लागू, जैसे सत्य बोलना) और भूमिका-आधारित (पद या पेशे से जुड़े); करने योग्य (सकारात्मक) और न करने योग्य (निषेधात्मक)।

3. भारतीय परंपरा

कर्तव्य का निकट शब्द है धर्म, और व्यक्तिगत स्तर पर स्वधर्म। गीता (3.35 और 18.47) का भाव है कि अपना धर्म अपूर्ण रूप से निभाना भी पराए धर्म को अच्छी तरह निभाने से श्रेष्ठ है। ऊपर देखी ऋण की धारणा (पृष्ठ 2.3) भी कर्तव्य का आधार है।

4. कांट (संक्षेप)

कांट के अनुसार कर्म का नैतिक मूल्य उसके परिणाम से नहीं, कर्तव्य-भाव से किए जाने से है; वे Groundwork (1785) में बिना शर्त शुभ केवल "शुभ-संकल्प" (good will) को मानते हैं। (विस्तार पृष्ठ 6.3 में।)

5. संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 51क के मौलिक कर्तव्य 42वें संशोधन (1976) से जोड़े गए, स्वर्ण सिंह समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर। मूलतः ये 10 थे; 86वें संशोधन (2002) से 11वाँ जुड़ा (माता-पिता/संरक्षक द्वारा 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर देना)। ये न्यायालय से सीधे लागू नहीं कराए जा सकते (अप्रवर्तनीय), पर नागरिक आचरण के मार्गदर्शक हैं।

6. ब्रैडले: "मेरा स्थान और उसके कर्तव्य" (My Station and Its Duties)

स्रोत: ब्रिटिश दार्शनिक एफ़.एच. ब्रैडले की पुस्तक Ethical Studies (1876) का पाँचवाँ निबंध।

मूल विचार: नैतिक जीवन समाज से कटे अमूर्त व्यक्ति का नहीं होता। हर व्यक्ति समाज में किसी स्थान पर है (पुत्र, शिक्षक, अधिकारी, नागरिक), और उस स्थान से उसके कर्तव्य निकलते हैं। उन्हें निभाना ही नैतिक होना है और इसी में व्यक्ति का आत्म-साक्षात्कार है।

समाज जीवित शरीर की तरह: समाज जीवित शरीर जैसा है और व्यक्ति उसके अंग; अंग का जीवन शरीर से अलग नहीं।

"नैतिक क्यों बनूँ?" का उत्तर: अपने स्थान के कर्तव्य निभाकर ही व्यक्ति अपना सच्चा स्वरूप पाता है।

ब्रैडले की सीमा-रेखा: यह निबंध उनका अंतिम मत नहीं है; उनकी अपनी पुस्तक आगे इस दृष्टि की कमी दिखाती है। समाज दोषपूर्ण हो तो सुधार के आदर्श मौजूदा भूमिकाओं में पूरे नहीं समाते, और सड़े हुए समाज में केवल भूमिका निभाने से आत्म-साक्षात्कार नहीं मिलता।

7. आलोचना

यथास्थिति का समर्थन बन सकता है: जाति या लिंग के नाम पर थोपी भूमिकाएँ "कर्तव्य" कहलाने लगें।

"मैंने तो केवल अपना कर्तव्य निभाया" आदेश के अंधे पालन का बहाना बन सकता है।

अनेक भूमिकाओं के कर्तव्यों में टकराव (परिवार बनाम पद) सुलझाने की कसौटी यह सिद्धांत नहीं देता। (देखें पृष्ठ 7.1: नैतिक दुविधा।)

8. प्रशासन कोण

अधिकारी का स्थान उसका पद है और उसके कर्तव्य हैं संविधान के प्रति निष्ठा, कानून का पालन, निष्पक्षता और जनता की सेवा। पर ब्रैडले की सावधानी के अनुसार पदीय कर्तव्य निभाना तब भी पर्याप्त नहीं जब व्यवस्था स्वयं अन्यायपूर्ण हो: तब विवेक और संवैधानिक मूल्य अंतिम कसौटी हैं।

वास्तविक उदाहरण

मौलिक कर्तव्य, 1976 और 2002.

42वें संविधान संशोधन (1976) ने स्वर्ण सिंह समिति की सिफ़ारिशों पर अनुच्छेद 51क जोड़ा (मूलतः 10 कर्तव्य); 86वें संशोधन (2002) ने 11वाँ कर्तव्य जोड़ा। ये अप्रवर्तनीय हैं, फिर भी अधिकार के साथ दायित्व की याद दिलाते हैं।

स्रोत: भारत का संविधान, अनुच्छेद 51क का पाठ।

ब्रैडले, Ethical Studies, 1876.

निबंध V, "My Station and Its Duties"।

स्रोत: स्टैनफ़ोर्ड एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ फ़िलॉसफ़ी (यह पाँचवाँ निबंध है; छठा निबंध "Ideal Morality" इसकी सीमा दिखाता है)।

उत्तर में कैसे लगाएँ

पहले ब्रैडले (स्रोत और वर्ष) और मूल विचार एक पंक्ति में, फिर प्रशासन-कोण (पद और कर्तव्य), फिर एक पंक्ति में सीमा; भाग ख में अनुच्छेद 51क का वर्ष और अप्रवर्तनीयता।

विचारक और उद्धरण

नामविचारप्रयोग-योग्य पंक्ति
एफ़.एच. ब्रैडलेस्थान से कर्तव्यनिबंध का शीर्षक: "My Station and Its Duties" (Ethical Studies, 1876, निबंध V)
इमैनुएल कांटकर्तव्य-भाव से किया कर्मGroundwork (1785): बिना शर्त शुभ केवल शुभ-संकल्प (भाव, शब्दशः उद्धरण नहीं)
भगवद्गीता 3.35, 18.47स्वधर्मभाव: अपना धर्म अपूर्ण निभाना भी पराए धर्म के अच्छे पालन से श्रेष्ठ (गीता 3.35 और 18.47; भाव, शब्दशः उद्धरण नहीं)
संविधान, अनुच्छेद 51कमौलिक कर्तव्य1976 से जोड़ा गया; 11वाँ 2002 से; अप्रवर्तनीय (तथ्य)

चित्र: संकेंद्रित वृत्त

मैं

भीतर

मेरी भूमिकाएँ

बीच का वृत्त: : परिवार, पद, नागरिक

समाज

बाहर

कर्तव्य

तीरों पर

यदि व्यवस्था अन्यायी हो?

किनारे प्रश्न-चिह्न

पहले इसी अवधारणा का प्रश्न: 2018, 2021, 2023 में "कर्तव्य" पर सीधा प्रश्न नहीं मिला; कर्तव्य-आधारित कांट के प्रश्न (2021 Q8, 2023 Q2) पृष्ठ 6.3 में हैं।

आम गलतियाँ

याद रखें

  • ब्रैडले को केवल प्रशंसा के साथ लिखना; भाग क में भी सीमा का एक संकेत और भाग ग में आलोचना ज़रूरी है।
  • इस निबंध को ब्रैडले का अंतिम और पूर्ण मत लिख देना; उनकी अपनी पुस्तक आगे इसकी सीमा दिखाती है। स्रोत है Ethical Studies (1876), निबंध V।
  • "कर्तव्य" को "आदेश-पालन" के बराबर लिखना; अंधा आज्ञापालन कर्तव्य नहीं है।

आत्म-जाँच (5 प्रश्न)

याद रखें

  • ब्रैडले का "स्थान और कर्तव्य" का विचार एक वाक्य में लिखिए।
  • अनुच्छेद 51क कब जोड़ा गया और 11वाँ कर्तव्य कब आया?
  • गीता में स्वधर्म का भाव क्या है (श्लोक-संख्या सहित)?
  • "मेरा स्थान और उसके कर्तव्य" की दो आलोचनाएँ लिखिए।
  • वरिष्ठ का मौखिक अवैध आदेश मिलने पर विकल्प (ग) का मूल्य-आधार क्या है?