मुख्य सामग्री पर जाएं
पृष्ठ 6.4

उपयोगितावाद: बेंथम, मिल, कर्म-उपयोगितावाद और नियम-उपयोगितावाद, सुख-गणना

Read this in English →

RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 6: "Contribution of moral thinkers and philosophers from India and the world" (भारत और विश्व के नैतिक चिंतकों एवं दार्शनिकों का योगदान)

  • जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
  • पढ़ने का समय: लगभग 11 मिनट
2 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)

उपयोगितावाद नाम से 1 प्रश्न: 2024 भाग ग Q12 (10 अंक: उपयोगितावाद, सर्वोदय और लोकसंग्रह की तुलना)। निकट संबंधी: 2023 भाग ग Q12 (कर्तव्यवाद बनाम परिणामवाद; पृष्ठ 6.6) और 2024 भाग ख Q10 (सुखवाद; पृष्ठ 6.5)।

30 सेकंड का सार

याद रखें

  • उपयोगितावाद के अनुसार वही कर्म सही है जो सबसे अधिक लोगों के लिए सबसे अधिक सुख (utility) बढ़ाए; निर्णय परिणाम से होता है।
  • बेंथम (1748 से 1832) ने सुख-दुख को तौलने की सुख-गणना बताई: तीव्रता, अवधि, निश्चितता, निकटता, उर्वरता, शुद्धता और विस्तार।
  • मिल (1806 से 1873) ने कहा कि सुख की गुणवत्ता भी मायने रखती है: संतुष्ट मूर्ख से असंतुष्ट सुकरात बेहतर।
  • कर्म-उपयोगितावाद हर कर्म को परिणाम से परखता है; नियम-उपयोगितावाद उन नियमों को जिनका सामान्य पालन सबसे अधिक लाभ दे।
  • प्रशासन के लिए: प्राथमिकता, लागत-लाभ और अभाव में बँटवारा। सीमा: अल्पसंख्यक का हित दब सकता है; इसलिए अधिकारों की एक न्यूनतम रेखा चाहिए।

भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)

याद रखें

  • प्रश्न: उपयोगितावाद को परिभाषित कीजिए।
  • उत्तर: उपयोगितावाद: वही कर्म सही है जो अधिकतम लोगों के लिए अधिकतम सुख उत्पन्न करे।
  • बेंथम की सुख-गणना तीव्रता, अवधि, निश्चितता, निकटता, उर्वरता, शुद्धता और विस्तार से सुख तौलती है।
  • कर्म-उपयोगितावाद हर कर्म परखता है; नियम-उपयोगितावाद उन नियमों को, जिनके पालन से लाभ अधिकतम हो।

1. मूल विचार (उपयोगिता का सिद्धांत)

बेंथम की Introduction to the Principles of Morals and Legislation (1780 में छपी, 1789 में प्रकाशित) का पहला अध्याय: "Nature has placed mankind under the governance of two sovereign masters, pain and pleasure." यानी हम सुख और दुख के अधीन हैं, इसलिए सही-गलत की कसौटी भी इन्हीं से बनती है। मिल (Utilitarianism, 1861 में किस्तों में, 1863 में पुस्तक): "actions are right in proportion as they tend to promote happiness, wrong as they tend to produce the reverse of happiness." ("सुख" से मिल का अर्थ: सुख और दुख का अभाव।)

2. बेंथम: मात्रा की गणना

बेंथम सुखों को मात्रा से तौलते हैं, गुण से नहीं। सुख-गणना के सात आयाम (Principles, अध्याय IV): तीव्रता (intensity), अवधि (duration), निश्चितता (certainty), निकटता (propinquity), उर्वरता (fecundity), शुद्धता (purity), विस्तार (extent: कितने लोग)। उन्होंने स्मरण-पद्य भी दिया: "Intense, long, certain, speedy, fruitful, pure; / Such marks in pleasures and in pains endure." (ये सात बातें सुख और दुख दोनों पर लागू हैं।) Stanford Encyclopedia के अनुसार बेंथम ने स्वयं माना कि इस गणना को हर नैतिक निर्णय से पहले कठोरता से करना ज़रूरी नहीं; यह नीति और कानून के लिए आदर्श नमूना है। "सबसे अधिक लोगों का सबसे अधिक सुख" वाक्य बेंथम की 1776 की Fragment on Government में मिलता है, और माना जाता है कि बाद में बेंथम ने "अधिकतम संख्या" वाला अंश छोड़ दिया, क्योंकि उसका अर्थ गलत लिया जा सकता था (अल्पसंख्यक की बलि); इस बात की किसी स्रोत में पुष्टि कर लें।

3. मिल: गुण का प्रश्न

मिल: "It is better to be a human being dissatisfied than a pig satisfied; better to be Socrates dissatisfied than a fool satisfied." यानी बौद्धिक और नैतिक सुख निम्न सुखों से श्रेष्ठ हैं; दोनों को जानने वाले "सक्षम निर्णायक" उच्च सुख को चुनते हैं। मिल ने यह भी माना कि सत्य, वचन-पालन जैसे नैतिक नियम सामान्यतः मार्गदर्शक रहें, हर बार नई गणना की ज़रूरत नहीं।

4. कर्म-उपयोगितावाद बनाम नियम-उपयोगितावाद

(Stanford Encyclopedia की परिभाषाओं पर आधारित)

बिंदुकर्म-उपयोगितावाद (Act)नियम-उपयोगितावाद (Rule)
कसौटीकर्म सही है यदि वह इस स्थिति में अधिकतम शुभ करेकर्म सही है यदि वह उस नियम के अनुसार हो जिसके सामान्य पालन से अधिकतम शुभ हो
लचीलापनअधिककम, पर भरोसे और स्थिरता का लाभ
अधिकार-रक्षाकमज़ोर (किसी एक मामले में बलि संभव)मज़बूत (नियम सबके लिए समान)
प्रशासन मेंआपातकालीन निर्णय, अभाव में बँटवाराकानून, प्रक्रियाएँ, उचित प्रक्रिया

मिल को किस श्रेणी में रखें, इस पर विद्वान एकमत नहीं हैं: Stanford Encyclopedia बेंथम और मिल, दोनों को "hedonistic act consequentialist" (सुखवादी कर्म-परिणामवादी) कहती है, जबकि कुछ विद्वान (जैसे जे. ओ. उर्मसन) मिल को नियम-उपयोगितावादी पढ़ते हैं (उर्मसन वाली बात की किसी स्रोत में पुष्टि कर लें)। उत्तर में "बेंथम और मिल मुख्यतः कर्म-उपयोगितावाद के प्रवर्तक माने जाते हैं; नियम-उपयोगितावाद बाद के विचारकों ने विकसित किया" लिखना सुरक्षित है।

5. ताकत और सीमाएँ

ताकत: सबको बराबर गिनता है; परिणाम-केंद्रित; सार्वजनिक नीति, बजट और स्वास्थ्य जैसे फ़ैसलों में व्यावहारिक।

सीमाएँ: (क) अल्पसंख्यक के हित दब सकते हैं; (ख) सुख को नापना कठिन; (ग) अधिकार और न्याय की रक्षा सुनिश्चित नहीं; (घ) परिणाम पहले से पूरी तरह ज्ञात नहीं होते।

उत्तर: अधिकारों की न्यूनतम रेखा (कोई भी केवल गिनती के लिए बलि न चढ़े), परामर्श, और नियम-आधारित प्रक्रिया।

6. 2024 के तुलनात्मक प्रश्न के लिए संकेत

(विवरण पृष्ठ 5.5 सर्वोदय और 4.4 लोकसंग्रह पर; यहाँ केवल तुलना-रेखा)

विचारकेंद्रअंतर (हमारी व्याख्या)
उपयोगितावादअधिकतम लोगों का अधिकतम सुख, कुल योगयोग बढ़ाने में कुछ पीछे छूट सकते हैं
सर्वोदयसबका उदय, अंतिम व्यक्ति तकयोग नहीं, हर व्यक्ति मायने रखता है
लोकसंग्रहसमाज को जोड़े रखने के लिए कर्तव्य-भाव से कर्मपरिणाम नहीं, कर्तव्य और निष्काम भाव पर बल

7. प्रशासन में प्रयोग

लागत-लाभ विश्लेषण, सीमित संसाधनों की प्राथमिकता, टीकाकरण या आपदा-राहत में कार्य-योजना। पर हर जगह अधिकारों की रेखा के साथ।

ऑक्सीजन-आवंटन, 2021.

कोविड की दूसरी लहर में सीमित ऑक्सीजन के बँटवारे पर सर्वोच्च न्यायालय ने 8 मई 2021 को टास्क फ़ोर्स बनाया; इसकी चर्चा नीतिशास्त्र की शाखाओं वाले पृष्ठ (1.3) में है। यहाँ केवल संदर्भ दिया गया है।

उत्तर में कैसे लगाएँ

परिभाषा, सुख-गणना या मिल की गुणवत्ता, कर्म बनाम नियम, एक वास्तविक उदाहरण (पोलियो 1995-2014), फिर सीमा और अधिकार-रेखा।

विचारक और उद्धरण

नामविचारप्रयोग-योग्य पंक्ति
जेरेमी बेंथमसुख-दुख ही कसौटी"Nature has placed mankind under the governance of two sovereign masters, pain and pleasure." (Principles of Morals and Legislation, अध्याय I)
जेरेमी बेंथमसुख-गणना"Intense, long, certain, speedy, fruitful, pure; Such marks in pleasures and in pains endure." (अध्याय IV)
जे. एस. मिलसुख की गुणवत्ता"It is better to be a human being dissatisfied than a pig satisfied; better to be Socrates dissatisfied than a fool satisfied." (Utilitarianism, अध्याय II)
जे. एस. मिलउपयोगिता का सूत्र"actions are right in proportion as they tend to promote happiness, wrong as they tend to produce the reverse of happiness."

चित्र: दो शाखाएँ और परीक्षण

सिद्धांत: अधिकतम का अधिकतम शुभ

ऊपर

बेंथम: मात्रा, सात आयाम की सुख-गणना

बाईं शाखा: दाईं शाखा

मिल: गुणवत्ता, सक्षम निर्णायक

कर्म-उपयोगितावाद: कर्म की जाँच

नीचे दो खाने

नियम-उपयोगितावाद: नियम की जाँच

अधिकारों की न्यूनतम रेखा: कोई बलि न चढ़े

किनारे पर लाल पट्टी

पहले इसी अवधारणा का प्रश्न: उपयोगितावाद नाम से पहली बार 2024 में, 10 अंक के तुलनात्मक रूप में। सुखवाद का प्रश्न भी उसी वर्ष आया। पूछने की प्रवृत्ति तुलना और प्रशासन में उपयोग की ओर है।

आम गलतियाँ

याद रखें

  • उपयोगितावाद को "बहुमत हमेशा सही" लिख देना; मिल ने गुणवत्ता और हर व्यक्ति की समान गिनती पर बल दिया, और अल्पसंख्यक की रक्षा के उपाय आवश्यक माने जाते हैं।
  • सुख को केवल भोग समझना; मिल के लिए बौद्धिक और नैतिक सुख उच्च हैं।
  • कर्म और नियम उपयोगितावाद का भेद न लिखना, या बेंथम और मिल को निश्चित रूप से नियम-उपयोगितावादी कह देना; विद्वान एकमत नहीं हैं।

आत्म-जाँच (5 प्रश्न)

याद रखें

  • उपयोगिता के सिद्धांत को एक वाक्य में लिखिए।
  • सुख-गणना के सात आयाम गिनाइए।
  • मिल ने बेंथम से क्या अलग जोड़ा?
  • कर्म और नियम उपयोगितावाद में एक अंतर बताइए।
  • उपयोगितावाद की दो सीमाएँ और एक समाधान लिखिए।