मुख्य सामग्री पर जाएं
REET Level 1 · EVS

नशा व दुष्प्रभाव (Addiction) — REET EVS नोट्स

Read this in English →

यह पेज नशे के प्रकार, प्रमुख मादक पदार्थों के स्रोत व दुष्प्रभाव, तथा भारत में नशा-मुक्ति से जुड़े कानूनों व हेल्पलाइन को कवर करता है। REET EVS में यह सामाजिक बुराइयों से जुड़ा टॉपिक है, जिसमें परिभाषात्मक के साथ-साथ तथ्यात्मक (factual) प्रश्न भी नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

  • REET 2024 में 1 प्रश्न
  • कक्षा 1–5 स्तर
  • 7 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: NDPS Act, 1985 — India Code

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में नशा टॉपिक से अफ़ीम में पाए जाने वाले ऐल्केलॉइड (alkaloid) पर आधारित एक तथ्यात्मक प्रश्न पूछा गया था, जिसमें मॉर्फीन, कोडीन जैसे वास्तविक घटकों में से ऐसा विकल्प पहचानना था जो अफ़ीम में मौजूद नहीं। इससे स्पष्ट है कि REET में यह टॉपिक केवल 'नशा बुरा है' जैसे नैतिक स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि प्रमुख मादक पदार्थों के स्रोत, रासायनिक घटकों और उनके प्रभावों पर तथ्यात्मक प्रश्न भी बनते हैं।

नशा क्या है और इसके प्रकार

नशा (Addiction) किसी ऐसे पदार्थ के बार-बार सेवन की आदत है जो तंत्रिका तंत्र (nervous system) को प्रभावित कर व्यक्ति को शारीरिक व मानसिक रूप से उस पर निर्भर बना देता है। सामान्यतः नशीले पदार्थों को तीन समूहों में बाँटा जाता है — उत्तेजक (stimulants, जैसे तंबाकू, कैफ़ीन), अवसादक (depressants, जैसे शराब, अफ़ीम) और मतिभ्रमकारी (hallucinogens, जैसे गांजा, चरस)।

अफ़ीम (Opium) खसखस/पोस्त के पौधे (Papaver somniferum) के कच्चे फल से निकलने वाले दूध (latex) से प्राप्त होती है, जिसमें मॉर्फीन, कोडीन और नारकोटीन जैसे प्राकृतिक ऐल्केलॉइड पाए जाते हैं। कैफ़ीन एक अलग ऐल्केलॉइड है जो चाय-कॉफी में मिलता है, अफ़ीम में नहीं — REET 2024 का प्रश्न ठीक इसी अंतर पर आधारित था।

शुरुआत में नशा अक्सर जिज्ञासा, सामाजिक दबाव (peer pressure) या तनाव से राहत पाने की कोशिश के रूप में होता है, लेकिन बार-बार सेवन से शरीर उस पदार्थ का 'आदी' (tolerant) हो जाता है और धीरे-धीरे उसी असर के लिए अधिक मात्रा की ज़रूरत पड़ने लगती है — इसी चक्र को व्यसन (addiction cycle) कहा जाता है।

प्रमुख नशीले पदार्थ और उनका प्रभाव

पदार्थमुख्य प्रभाव
तंबाकू (निकोटीन)हृदय व फेफड़ों पर असर, कैंसर का जोखिम बढ़ाता है
शराब (एल्कोहॉल)यकृत (liver) को नुकसान, निर्णय-क्षमता प्रभावित
अफ़ीम व हेरोइनतंत्रिका तंत्र को सुस्त करना, गंभीर शारीरिक निर्भरता
गांजा/चरस (कैनबिस)मस्तिष्क की एकाग्रता व स्मृति पर असर

लगातार सेवन से हर नशीला पदार्थ शरीर के किसी-न-किसी तंत्र (हृदय, यकृत, तंत्रिका तंत्र) को स्थायी नुकसान पहुँचाता है; इसलिए EVS पाठ्यक्रम में इन्हें 'सामाजिक बुराई' की श्रेणी में स्वास्थ्य व सामाजिक — दोनों दृष्टिकोण से पढ़ाया जाता है।

नशे से बचाव — कानून एवं सहायता

भारत में नशीले व मादक पदार्थों की बिक्री, उत्पादन व सेवन को नियंत्रित करने के लिए स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act), 1985 लागू है, जबकि तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन व सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकने हेतु सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 बनाया गया है।

'नशा मुक्त भारत अभियान' के अंतर्गत भारत सरकार ने राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1933 (MANAS) जारी किया है, जिस पर नशे की लत से जुड़ी सहायता, परामर्श व गुप्त शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। विद्यालय स्तर पर शिक्षकों की भूमिका बच्चों को समय रहते जागरूक कर नशे की शुरुआत ही रोकने की है, क्योंकि छोटी उम्र में बनी आदत छुड़ाना कठिन होता है।

COTPA के अंतर्गत विद्यालय परिसर के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है और स्कूल परिसर को 'तंबाकू मुक्त क्षेत्र' (Tobacco Free Zone) के रूप में चिह्नित किया जाना अनिवार्य है — यह प्रावधान EVS शिक्षक के लिए भी व्यावहारिक रूप से प्रासंगिक है।

नशे के सामाजिक व पारिवारिक प्रभाव

नशे की लत केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति, बच्चों की पढ़ाई और घर के माहौल को भी प्रभावित करती है। नशे की वजह से दुर्घटनाएँ, घरेलू कलह और कार्यक्षमता में कमी जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं, जिससे यह केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक बुराई (social evil) मानी जाती है।

राजस्थान में परंपरागत रूप से कुछ सामाजिक अवसरों पर अफ़ीम व तंबाकू के सेवन को स्वीकार्यता मिली रही है, जिससे इनकी लत छुड़ाना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। विद्यालय, स्वास्थ्य विभाग व स्थानीय प्रशासन मिलकर जागरूकता अभियान चलाते हैं, ताकि युवा पीढ़ी इन आदतों से दूर रहे और सामाजिक दबाव को पहचान कर मना करना सीखे।

EVS पाठ्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में यह विश्वास पैदा करना है कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि नई समस्याओं की शुरुआत है — इसलिए स्वस्थ आदतें, खेलकूद व परिवार से खुला संवाद ही सबसे बेहतर बचाव है।

नशे की लत के चेतावनी-संकेत

व्यवहार में बदलाव
पढ़ाई व अन्य गतिविधियों में अचानक अरुचि, चिड़चिड़ापन बढ़ना
शारीरिक संकेत
भूख कम लगना, नींद के पैटर्न में बदलाव, आँखों का लाल होना
सामाजिक संकेत
पुराने दोस्तों-परिवार से दूरी, संदिग्ध नए साथियों का साथ
सही कदम
डाँटने के बजाय बातचीत, परिवार का सहयोग और ज़रूरत पड़ने पर परामर्शदाता/हेल्पलाइन (1933) से संपर्क

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

कक्षा गतिविधि

'ना कहो' (Say No) रोल-प्ले करवाएँ, जिसमें एक बच्चा नशा करने का दबाव डालता है और दूसरा विनम्रता से मना करना सीखता है — इससे व्यवहारिक कौशल विकसित होता है।

शिक्षण सामग्री

पोस्टर/चार्ट के माध्यम से तंबाकू व शराब के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव सरल चित्रों में दिखाएँ — कक्षा 4-5 के लिए उम्र के अनुसार सरल भाषा में जानकारी उपयुक्त है, डरावनी छवियों से बचें।

सामान्य भ्रांति

कई बच्चे मानते हैं कि 'थोड़ा सा नशा नुकसान नहीं करता'। शिक्षक को स्पष्ट करना चाहिए कि निर्भरता (addiction) धीरे-धीरे और बिना एहसास के बनती है, इसलिए शुरुआत से ही बचना ज़रूरी है।

मूल्यांकन विचार

बच्चों से पोस्टर बनवाकर 'नशा मुक्त परिवार/गाँव' का संदेश तैयार करवाएँ और कक्षा में प्रस्तुति करवाएँ — यह रचनात्मक व मूल्य-आधारित मूल्यांकन है।

कहानी विधि

किसी काल्पनिक पात्र की कहानी के माध्यम से बताएँ कि सामाजिक दबाव में एक बार नशा करने से कैसे धीरे-धीरे आदत बन जाती है, और फिर वही पात्र परिवार व दोस्तों की मदद से इससे कैसे बाहर निकलता है — कहानी बच्चों को बिना डराए संदेश देने का सशक्त माध्यम है।

याद रखने की ट्रिक

अफ़ीम से जुड़े ऐल्केलॉइड (मॉर्फीन, कोडीन, नारकोटीन) और चाय-कॉफी के 'कैफ़ीन' को कभी न मिलाएँ — REET में यही सबसे आम 'ट्रैप' विकल्प होता है। याद रखें: कैफ़ीन अफ़ीम में नहीं मिलता, यह अलग पौधों (चाय-कॉफी) से आता है।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 143

अफ़ीम में कौन-सा ऐल्केलॉइड नहीं पाया जाता है ?

  1. Aमॉर्फीन
  2. Bकोडीन
  3. Cसोमनिफेरिन
  4. Dकैफ़ीन

व्याख्या

अफ़ीम पोस्त (Papaver somniferum) के कच्चे फल के दूध (latex) से प्राप्त होती है और इसमें मॉर्फीन, कोडीन जैसे ऐल्केलॉइड पाए जाते हैं। कैफ़ीन चाय और कॉफी में पाया जाने वाला ऐल्केलॉइड है, अफ़ीम में नहीं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ अफ़ीम में पाया जाने वाला ऐल्केलॉइड नहीं है?

  1. Aमॉर्फीन
  2. Bकोडीन
  3. Cनिकोटीन
  4. Dनारकोटीन

व्याख्या

निकोटीन तंबाकू में पाया जाने वाला पदार्थ है, अफ़ीम में नहीं। मॉर्फीन, कोडीन और नारकोटीन अफ़ीम के प्राकृतिक ऐल्केलॉइड हैं।

प्रश्न 2

अफ़ीम किस पौधे से प्राप्त होती है?

  1. Aकैनबिस (भांग का पौधा)
  2. Bपोस्त/खसखस (Papaver somniferum)
  3. Cतंबाकू का पौधा
  4. Dकॉफी का पौधा

व्याख्या

अफ़ीम पोस्त/खसखस के पौधे (Papaver somniferum) के कच्चे फल के दूध (latex) से प्राप्त होती है।

प्रश्न 3

लगातार शराब सेवन से शरीर के किस अंग को सबसे अधिक नुकसान होता है?

  1. Aफेफड़े
  2. Bयकृत (लिवर)
  3. Cत्वचा
  4. Dबाल

व्याख्या

लगातार शराब का सेवन यकृत (liver) को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाता है, जिससे लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।

प्रश्न 4

भारत में नशीले व मादक पदार्थों को नियंत्रित करने वाला मुख्य अधिनियम कौन-सा है?

  1. ANDPS Act, 1985
  2. BRTE Act, 2009
  3. CPOCSO Act, 2012
  4. DIT Act, 2000

व्याख्या

स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act), 1985 भारत में नशीले पदार्थों के उत्पादन, बिक्री व सेवन को नियंत्रित करता है।

प्रश्न 5

'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत जारी टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर कौन-सा है?

  1. A1098
  2. B1930
  3. C1933
  4. D112

व्याख्या

नशे से जुड़ी सहायता व शिकायत के लिए राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1933 (MANAS) जारी किया गया है।

प्रश्न 6

तंबाकू में पाया जाने वाला मुख्य नशीला रसायन कौन-सा है?

  1. Aनिकोटीन
  2. Bमॉर्फीन
  3. Cकैफ़ीन
  4. Dइथेनॉल

व्याख्या

तंबाकू में मुख्य नशीला रसायन निकोटीन है, जो हृदय व फेफड़ों को प्रभावित करता है।

प्रश्न 7

मादक पदार्थों को उनके प्रभाव के आधार पर किन समूहों में बाँटा जाता है?

  1. Aउत्तेजक, अवसादक व मतिभ्रमकारी
  2. Bअम्लीय, क्षारीय व उदासीन
  3. Cजैविक व अजैविक
  4. Dघुलनशील व अघुलनशील

व्याख्या

मादक पदार्थों को उनके तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव के आधार पर उत्तेजक (stimulant), अवसादक (depressant) व मतिभ्रमकारी (hallucinogen) समूहों में बाँटा जाता है।

प्रश्न 8

कक्षा में नशे के दुष्प्रभाव पढ़ाते समय शिक्षक को कक्षा 4-5 के बच्चों के लिए सबसे उपयुक्त तरीका कौन-सा अपनाना चाहिए?

  1. Aडरावनी तस्वीरें दिखाकर भयभीत करना
  2. Bउम्र के अनुसार सरल भाषा व पोस्टर के माध्यम से समझाना
  3. Cटॉपिक को पूरी तरह छोड़ देना
  4. Dकेवल परिभाषा रटवाना

व्याख्या

छोटी कक्षाओं में उम्र-उपयुक्त, सरल व सकारात्मक तरीके से समझाना अधिक प्रभावी होता है; डरावनी छवियों से बचना चाहिए।

प्रश्न 9

यदि कोई बच्चा कक्षा में कहे 'थोड़ा सा नशा नुकसान नहीं करता', तो शिक्षक की सबसे उपयुक्त प्रतिक्रिया क्या होगी?

  1. Aबात को नज़रअंदाज़ करना
  2. Bसमझाना कि निर्भरता धीरे-धीरे और बिना एहसास के बनती है
  3. Cबच्चे को कक्षा से बाहर भेजना
  4. Dइसे सही मानकर आगे बढ़ जाना

व्याख्या

शिक्षक को स्पष्ट व सहज रूप से समझाना चाहिए कि नशे की लत (addiction) धीरे-धीरे बनती है, इसलिए 'थोड़ा-सा' भी खतरनाक हो सकता है।

प्रश्न 10

तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन व सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकने वाला अधिनियम कौन-सा है?

  1. ANDPS Act, 1985
  2. BCOTPA, 2003
  3. CRTI Act, 2005
  4. DConsumer Protection Act, 2019

व्याख्या

सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन व सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान को नियंत्रित करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET में नशा टॉपिक से कैसे प्रश्न पूछे जाते हैं?+

REET 2024 में यह प्रश्न अफ़ीम में मौजूद ऐल्केलॉइड की पहचान पर आधारित था, यानी तथ्यात्मक स्तर पर मादक पदार्थों के स्रोत व घटकों की जानकारी परखी जाती है।

अफ़ीम किस पौधे से प्राप्त होती है?+

अफ़ीम पोस्त/खसखस के पौधे (Papaver somniferum) के कच्चे फल से निकलने वाले दूध (latex) से प्राप्त होती है।

भारत में नशा-मुक्ति हेल्पलाइन नंबर क्या है?+

राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1933 (MANAS) नशे से जुड़ी सहायता व शिकायत के लिए जारी किया गया है।

NDPS Act किस वर्ष लागू हुआ?+

स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) वर्ष 1985 में लागू हुआ।

COTPA अधिनियम किससे संबंधित है?+

सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, बिक्री व सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान को नियंत्रित करता है। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है।

नशीले पदार्थों को कितने समूहों में बाँटा जाता है?+

प्रभाव के आधार पर इन्हें तीन समूहों में बाँटा जाता है — उत्तेजक (stimulants), अवसादक (depressants) और मतिभ्रमकारी (hallucinogens)।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. NDPS Act, 1985 — India Code
  2. MANAS national drug helpline 1933 launch — DD News

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए