रोग एवं बचाव (Diseases and Prevention) — REET EVS नोट्स
यह पेज रोगों के वर्गीकरण (संचारी-असंचारी), उनके कारक सूक्ष्मजीवों (जीवाणु, विषाणु, प्रोटोज़ोआ, कवक) और बचाव के उपायों को कवर करता है। REET EVS में रोग व उसके कारक जीव का सुमेलन (matching) एक नियमित रूप से पूछा जाने वाला पैटर्न है।
- REET 2024 में 1 प्रश्न
- कक्षा 1–5 स्तर
- 6 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में एक सुमेलन (matching) प्रश्न पूछा गया था, जिसमें विषाणु जनित रोग (चिकन पॉक्स), जीवाणु जनित रोग (तपेदिक), प्रोटोज़ोआ जनित रोग (मलेरिया) और कुपोषण जनित रोग (क्वाशियोरकर) को सही क्रम में जोड़ना था। इससे स्पष्ट है कि REET में रोगों को उनके 'कारक' (जीवाणु/विषाणु/प्रोटोज़ोआ/कवक/कुपोषण) के आधार पर वर्गीकृत करना सबसे महत्वपूर्ण कौशल है।
रोगों का कारक के आधार पर वर्गीकरण
| कारक | उदाहरण रोग |
|---|---|
| जीवाणु (Bacteria) | तपेदिक/क्षय रोग (TB), टाइफाइड, हैजा (कॉलरा), कुष्ठ रोग |
| विषाणु (Virus) | चिकन पॉक्स, खसरा, इन्फ्लुएंज़ा (फ्लू), पोलियो, डेंगू, कोविड-19 |
| प्रोटोज़ोआ (Protozoa) | मलेरिया (प्लाज़्मोडियम), अमीबियासिस, कालाज़ार |
| कवक (Fungus) | दाद (Ringworm), खाज-खुजली से जुड़े त्वचा रोग |
| कुपोषण (Malnutrition) | क्वाशियोरकर, मैरास्मस, रतौंधी |
| कृमि (Worms/Helminths) | उदरकृमि (Roundworm), फीताकृमि (Tapeworm) — आमतौर पर दूषित भोजन/मिट्टी के संपर्क से फैलते हैं |
REET 2024 का प्रश्न ठीक इसी वर्गीकरण पर आधारित था — हर श्रेणी से कम-से-कम एक उदाहरण पक्का याद रखें।[स्रोत 1]
संचारी व असंचारी रोग
संचारी रोग (Communicable Diseases) वे हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे संपर्क, हवा, दूषित जल-भोजन या कीट (जैसे मच्छर) के माध्यम से फैलते हैं — जैसे तपेदिक, फ्लू, मलेरिया। इसके विपरीत असंचारी रोग (Non-Communicable Diseases) एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलते, बल्कि जीवनशैली, आनुवंशिकता या पोषण की कमी से होते हैं — जैसे मधुमेह (डायबिटीज़), उच्च रक्तचाप, हृदय रोग।
मच्छरों से फैलने वाले रोगों (vector-borne diseases) में मलेरिया मादा एनाफ़िलीज़ मच्छर से, डेंगू व चिकनगुनिया एडीज़ मच्छर से फैलते हैं — इसलिए मच्छरों पर नियंत्रण (जलभराव रोकना, मच्छरदानी का उपयोग) इन रोगों की रोकथाम की कुंजी है।
संचारी रोगों को फैलने के माध्यम के आधार पर भी वर्गीकृत किया जा सकता है — वायुजनित रोग (air-borne, जैसे तपेदिक, फ्लू, सामान्य सर्दी-जुकाम) साँस के ज़रिए फैलते हैं; जलजनित रोग (water-borne, जैसे टाइफाइड, हैजा, डायरिया) दूषित पानी-भोजन से फैलते हैं; और संपर्कजनित रोग (contact-borne, जैसे खाज-खुजली, दाद) त्वचा के सीधे संपर्क या साझा वस्तुओं से फैलते हैं। REET में कभी-कभी रोग को उसके 'फैलने के माध्यम' के आधार पर वर्गीकृत करने वाले प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं, इसलिए 'कारक जीव' के साथ-साथ 'फैलने का तरीका' भी याद रखना उपयोगी है।
कुछ सामान्य रोगों के प्रमुख लक्षण
- मलेरिया
- तेज़ बुखार के साथ ठंड लगना व कँपकँपी, बुखार का बार-बार आना-जाना
- टाइफाइड
- लगातार धीरे-धीरे बढ़ता बुखार, पेट दर्द, कमजोरी
- चिकन पॉक्स
- शरीर पर पानी-भरे लाल दाने, हल्का बुखार, खुजली
- डायरिया/दस्त
- बार-बार पतला मल, जिससे शरीर में जल व लवण (electrolytes) की कमी हो सकती है
- तपेदिक (टीबी)
- दो सप्ताह से अधिक लगातार खाँसी, शाम को हल्का बुखार, वज़न घटना व भूख न लगना — ये लक्षण दिखने पर तुरंत जाँच करानी चाहिए
स्वच्छ जल, स्वच्छता व दस्त-रोग की रोकथाम
दूषित जल व भोजन से फैलने वाले रोगों (जैसे टाइफाइड, हैजा, डायरिया) की रोकथाम के लिए पीने का पानी उबालकर या फिल्टर करके पीना, खाने से पहले हाथ धोना और खुले में शौच से बचना सबसे प्रभावी उपाय हैं। दस्त (डायरिया) होने पर सबसे पहला व सबसे ज़रूरी उपचार ओआरएस (ORS - Oral Rehydration Solution) का घोल देना है, जो शरीर में पानी व लवण की कमी को तुरंत पूरा करता है।
विद्यालयों में स्वच्छ शौचालय व पीने के साफ़ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना संचारी रोगों को रोकने की पहली शर्त मानी जाती है — इसीलिए EVS सिलेबस में 'स्वच्छता' व 'रोग एवं बचाव' टॉपिक एक-दूसरे से जुड़े क्रम में रखे गए हैं।
टीकाकरण — रोगों से बचाव का प्रमुख माध्यम
भारत में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को जन्म से लेकर किशोरावस्था तक पोलियो, बीसीजी (क्षय रोग से बचाव), खसरा, डीपीटी (डिप्थीरिया-पर्टुसिस-टिटनेस) जैसे कई रोगों के टीके निःशुल्क लगाए जाते हैं। मिशन इंद्रधनुष जैसे विशेष अभियान उन बच्चों तक टीकाकरण पहुँचाने के लिए चलाए जाते हैं जो नियमित टीकाकरण से छूट गए हों।
विद्यालय शिक्षक बच्चों में स्वास्थ्य जागरूकता व नियमित टीकाकरण की जानकारी फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए REET पाठ्यक्रम में रोगों व बचाव का यह टॉपिक शिक्षक की व्यावहारिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। इसके अलावा, विद्यालय में समय-समय पर होने वाली स्वास्थ्य जाँच (health check-up camps) व वृद्धि निगरानी (growth monitoring) भी शिक्षकों के सहयोग से ही सफल होती है।
भारत में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (Universal Immunization Programme, UIP) वर्ष 1985 में शुरू किया गया था, जो विश्व के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक है। पल्स पोलियो अभियान के निरंतर प्रयासों से भारत को वर्ष 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 'पोलियो-मुक्त' घोषित किया गया — यह दर्शाता है कि सामूहिक व निरंतर टीकाकरण से गंभीर संचारी रोगों को भी जड़ से समाप्त किया जा सकता है।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
कक्षा गतिविधि
'हाथ धोने के 6 चरण' (WHO हैंडवॉश तकनीक) का व्यावहारिक प्रदर्शन करवाएँ — यह सरल आदत कई संचारी रोगों से बचाव में सबसे प्रभावी सिद्ध हुई है।
शिक्षण सामग्री
रोग-कारक-लक्षण के फ्लैश-कार्ड बनाकर 'सुमेलन खेल' (matching game) खेलें, जिसमें बच्चे रोग को सही कारक (जीवाणु/विषाणु/प्रोटोज़ोआ) से जोड़ें।
सामान्य भ्रांति
बच्चे अक्सर सभी रोगों को 'कीटाणु से होने वाला' एक जैसा मान लेते हैं। शिक्षक को स्पष्ट करना चाहिए कि मधुमेह जैसे असंचारी रोग किसी कीटाणु से नहीं, बल्कि जीवनशैली व आनुवंशिकता से जुड़े हैं।
क्षेत्र-आधारित उदाहरण
अपने गाँव/शहर में हाल ही में फैली किसी मौसमी बीमारी (जैसे बरसात में डेंगू या सर्दी में फ्लू) की चर्चा कर बच्चों से पूछें कि उसके कारण व बचाव क्या हो सकते हैं — इससे पढ़ाई स्थानीय अनुभव से जुड़ जाती है।
मूल्यांकन विचार
बच्चों से पूछें 'तुम्हें बुखार आने पर घर में क्या सावधानियाँ बरती जाती हैं?' — इस चर्चा से रोग-निवारण की व्यावहारिक समझ का आकलन होता है।
जीवन-कौशल गतिविधि
ORS घोल बनाने की सरल प्रक्रिया (सही मात्रा में नमक-चीनी-पानी) कक्षा में प्रदर्शित करें — यह जीवन-रक्षक व्यावहारिक कौशल है जो घर पर भी काम आता है।
रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के सामान्य उपाय
संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि व स्वच्छता की आदतें शरीर की प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता (immunity) को मज़बूत बनाती हैं, जिससे संक्रमण होने की संभावना व गंभीरता दोनों घटती हैं। EVS पाठ्यक्रम बच्चों में यह समझ विकसित करता है कि 'बीमार होने पर इलाज' के साथ-साथ 'बीमार न होने की आदतें' अपनाना भी उतना ही ज़रूरी है — इसे निवारक स्वास्थ्य (preventive health) कहा जाता है।
याद रखने की ट्रिक
रोग-कारक याद रखने की ट्रिक — 'विषाणु से Viral रोग (चिकन पॉक्स, खसरा, फ्लू), जीवाणु से टीबी-टाइफाइड, प्रोटोज़ोआ से मलेरिया-कालाज़ार, कवक से दाद'। REET 2024 के सुमेलन प्रश्न जैसे प्रश्नों में हर कारक का कम-से-कम एक 'पक्का' उदाहरण दिमाग में रखने से सही जोड़ी तुरंत मिल जाती है।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 121
निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए तथा सही उत्तर का चयन कीजिए । (i) वायरस जनित रोग (a) तपेदिक (ii) जीवाणु जनित रोग (b) मलेरिया (iii) प्रोटोज़ोआ जनित रोग (c) क्वाशियोरकर (iv) कुपोषण के कारण होने वाला रोग (d) चिकन पोक्स (i) (ii) (iii) (iv)
- A(a) (d) (c) (b)
- B(d) (a) (b) (c)
- C(c) (b) (a) (d)
- D(b) (c) (d) (a)
व्याख्या
चिकन पॉक्स वायरस (Varicella-zoster) से, तपेदिक (TB) जीवाणु (Mycobacterium tuberculosis) से, मलेरिया प्रोटोज़ोआ (Plasmodium) से और क्वाशियोरकर प्रोटीन की कमी (कुपोषण) से होता है। अतः सही मिलान (i)-(d), (ii)-(a), (iii)-(b), (iv)-(c) है, जो विकल्प (B) है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
तपेदिक (क्षय रोग/TB) किस कारक से होता है?
- Aविषाणु
- Bजीवाणु
- Cप्रोटोज़ोआ
- Dकवक
व्याख्या
तपेदिक (TB) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु से होता है।
प्रश्न 2
निम्नलिखित में से कौन-सा रोग विषाणु (वायरस) जनित है?
- Aटाइफाइड
- Bमलेरिया
- Cखसरा
- Dदाद
व्याख्या
खसरा (Measles) एक विषाणु जनित रोग है। टाइफाइड जीवाणु से, मलेरिया प्रोटोज़ोआ से और दाद कवक से होता है।
प्रश्न 3
मलेरिया फैलाने वाला मच्छर कौन-सा है?
- Aएडीज़ मच्छर
- Bमादा एनाफ़िलीज़ मच्छर
- Cक्यूलेक्स मच्छर
- Dघरेलू मक्खी
व्याख्या
मलेरिया मादा एनाफ़िलीज़ मच्छर के काटने से फैलता है, जो प्लाज़्मोडियम परजीवी को मनुष्य के रक्त में पहुँचाता है।
प्रश्न 4
मधुमेह (डायबिटीज़) किस श्रेणी का रोग है?
- Aसंचारी रोग
- Bअसंचारी रोग
- Cविषाणु जनित रोग
- Dप्रोटोज़ोआ जनित रोग
व्याख्या
मधुमेह एक असंचारी रोग है, जो जीवनशैली व आनुवंशिकता से जुड़ा है और एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता।
प्रश्न 5
BCG टीका किस रोग से बचाव के लिए लगाया जाता है?
- Aपोलियो
- Bखसरा
- Cक्षय रोग (तपेदिक)
- Dमलेरिया
व्याख्या
BCG टीका क्षय रोग (तपेदिक) से बचाव के लिए नवजात शिशुओं को लगाया जाता है।
प्रश्न 6
दाद (Ringworm) रोग किस कारक से होता है?
- Aजीवाणु
- Bविषाणु
- Cकवक
- Dप्रोटोज़ोआ
व्याख्या
दाद (Ringworm) एक कवक (Fungus) जनित त्वचा रोग है।
प्रश्न 7
संचारी रोग किस प्रकार फैलते हैं?
- Aकेवल आनुवंशिकता से
- Bसंपर्क, हवा, दूषित जल-भोजन या कीट के माध्यम से
- Cकेवल जीवनशैली से
- Dकभी नहीं फैलते
व्याख्या
संचारी रोग प्रत्यक्ष संपर्क, हवा, दूषित जल-भोजन या मच्छर जैसे कीटों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं।
प्रश्न 8
संचारी रोगों से बचाव के लिए कक्षा में सबसे प्रभावी व्यावहारिक गतिविधि कौन-सी है?
- Aकेवल किताब से परिभाषा पढ़ाना
- Bहाथ धोने के सही तरीके का व्यावहारिक प्रदर्शन करवाना
- Cटॉपिक को छोड़ देना
- Dकेवल रोगों के नाम रटवाना
व्याख्या
सही तरीके से हाथ धोना (hand hygiene) कई संचारी रोगों से बचाव का सबसे सरल व प्रभावी व्यावहारिक उपाय है, जो छोटे बच्चों को आदत के रूप में सिखाया जा सकता है।
प्रश्न 9
मच्छरों से होने वाले रोगों (vector-borne diseases) की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय क्या है?
- Aकेवल दवा खाना
- Bआसपास जलभराव रोकना व मच्छरदानी का उपयोग करना
- Cकुछ न करना
- Dकेवल ठंडा पानी पीना
व्याख्या
मच्छर रुके हुए साफ़ या गंदे पानी में पनपते हैं, इसलिए जलभराव रोकना व मच्छरदानी का उपयोग मलेरिया-डेंगू जैसे रोगों से बचाव में सबसे प्रभावी है।
प्रश्न 10
क्वाशियोरकर किस श्रेणी में आता है?
- Aविषाणु जनित रोग
- Bजीवाणु जनित रोग
- Cकुपोषण जनित रोग
- Dप्रोटोज़ोआ जनित रोग
व्याख्या
क्वाशियोरकर प्रोटीन की गंभीर कमी से होने वाला कुपोषण जनित रोग है, किसी सूक्ष्मजीव से नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संचारी व असंचारी रोग में क्या अंतर है?+
संचारी रोग एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं (जैसे तपेदिक, फ्लू), जबकि असंचारी रोग नहीं फैलते और जीवनशैली/आनुवंशिकता से जुड़े होते हैं (जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप)।
मलेरिया किस कारक से होता है?+
मलेरिया प्लाज़्मोडियम नामक प्रोटोज़ोआ से होता है, जो मादा एनाफ़िलीज़ मच्छर के काटने से मनुष्य में फैलता है।
BCG टीका किस रोग से बचाव के लिए लगाया जाता है?+
BCG (Bacillus Calmette-Guérin) टीका क्षय रोग/तपेदिक (Tuberculosis) से बचाव के लिए नवजात शिशुओं को लगाया जाता है।
डेंगू व चिकनगुनिया किस मच्छर से फैलते हैं?+
डेंगू व चिकनगुनिया एडीज़ (Aedes) मच्छर के काटने से फैलते हैं, जो सामान्यतः दिन के समय काटता है और साफ़ रुके हुए पानी में पनपता है।
दस्त (डायरिया) होने पर सबसे पहला उपचार क्या है?+
दस्त होने पर सबसे पहला व सबसे ज़रूरी उपचार ओआरएस (ORS) का घोल देना है, जो शरीर में पानी व लवण की कमी को तुरंत पूरा करता है।
मिशन इंद्रधनुष किससे संबंधित है?+
मिशन इंद्रधनुष उन बच्चों तक टीकाकरण पहुँचाने का विशेष अभियान है जो नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से छूट गए हों; इसे 2014 में शुरू किया गया था।
रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के सामान्य उपाय क्या हैं?+
संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि व स्वच्छता की आदतें शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को स्वाभाविक रूप से मज़बूत बनाती हैं।
भारत को पोलियो-मुक्त कब घोषित किया गया?+
भारत को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 2014 में पोलियो-मुक्त घोषित किया गया, जो पल्स पोलियो अभियान की वर्षों की निरंतर मेहनत का परिणाम था।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए