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REET L1 · पर्यावरण अध्ययन (EVS)

वन एवं संरक्षण

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वन एवं संरक्षण EVS सिलेबस का वह भाग है जो बच्चों को पेड़-पौधों के महत्व, वन्यजीव अभयारण्यों और संरक्षण की परंपरा से परिचित कराता है। यह पेज राजस्थान के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों, बिश्नोई आंदोलन व सरकारी संरक्षण योजनाओं को क्रमबद्ध रूप से समेटता है।

  • REET 2024 में इस टॉपिक से कोई प्रश्न नहीं आया
  • कक्षा 1–5 स्तर
  • 9 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: वन विभाग, राजस्थान सरकार

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 की उत्तर कुंजी में 'वन एवं संरक्षण' से सीधा प्रश्न दर्ज नहीं है। BSER के EVS सिलेबस में यह टॉपिक शामिल है, और सामान्यतः 'कौन-सा राष्ट्रीय उद्यान/अभयारण्य किस ज़िले में है', 'बाघ परियोजना कब शुरू हुई' या पेड़ बचाने के आंदोलनों से जुड़े तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाने की संभावना रहती है।

राजस्थान में वन आवरण

वन आवरण
भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्टों के अनुसार राजस्थान देश के उन राज्यों में शामिल है जहाँ वास्तविक वन-क्षेत्र का प्रतिशत सबसे कम है, क्योंकि राज्य का बड़ा भाग मरुस्थलीय व अर्ध-शुष्क है[स्रोत 2]
वन के प्रकार
उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन (दक्षिणी राजस्थान — उदयपुर, माउंट आबू क्षेत्र), कँटीली झाड़ियों वाले वन (पश्चिमी राजस्थान)
अरावली वन
अरावली पर्वतमाला के सहारे फैला वन-क्षेत्र, जो मिट्टी के कटाव व रेगिस्तान के फैलाव को रोकने में सहायक है

प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान व अभयारण्य

नामज़िलाविशेषता
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यानसवाई माधोपुरबाघों के लिए प्रसिद्ध; 1973 में शुरू हुई 'प्रोजेक्ट टाइगर' के आरंभिक 9 रिज़र्व में शामिल
सरिस्का बाघ रिज़र्वअलवरबाघ पुनर्वास के लिए भी चर्चित रहा
केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यानभरतपुरप्रवासी पक्षियों का प्रसिद्ध अभयारण्य; यूनेस्को धरोहर स्थल
मरु राष्ट्रीय उद्यानजैसलमेर-बाड़मेरमरुस्थलीय पारिस्थितिकी व गोडावण संरक्षण के लिए
टाल छापर अभयारण्यचूरूकृष्णमृग (ब्लैकबक) के लिए प्रसिद्ध
सीतामाता अभयारण्यप्रतापगढ़उड़न गिलहरी सहित दुर्लभ वन्यजीवों के लिए

बिश्नोई समाज और खेजड़ली बलिदान

राजस्थान में वृक्ष-संरक्षण की सबसे प्रेरक गाथा बिश्नोई समाज से जुड़ी है। 1730 में जोधपुर के निकट खेजड़ली गाँव में जब शासकीय आदेश पर खेजड़ी के पेड़ काटे जाने लगे, तो अमृता देवी बिश्नोई ने पेड़ों से चिपककर अपना बलिदान दिया — परंपरा के अनुसार इस घटना में सैकड़ों बिश्नोई महिला-पुरुषों (लोकमान्यता में लगभग 363) ने अपने प्राणों की आहुति दी। इस घटना को भारत के सबसे पुराने पर्यावरण-संरक्षण आंदोलनों में गिना जाता है और इसे बाद के 'चिपको आंदोलन' का प्रेरणा-स्रोत भी माना जाता है।

बिश्नोई समाज आज भी पेड़ों व वन्यजीवों (विशेषकर चिंकारा व काले हिरण) की रक्षा के लिए जाना जाता है — EVS में यह उदाहरण बच्चों को 'स्थानीय परंपराएँ भी पर्यावरण-संरक्षण सिखाती हैं' यह समझाने के लिए उपयुक्त है।

संरक्षण की सरकारी पहलें

'प्रोजेक्ट टाइगर' 1973 में पूरे भारत में शुरू की गई थी, जिसके आरंभिक 9 बाघ रिज़र्व में राजस्थान का रणथंभौर भी शामिल था। इसके अतिरिक्त कोटा क्षेत्र में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व की स्थापना भी की गई। वन महोत्सव जैसे वार्षिक वृक्षारोपण कार्यक्रम स्कूली स्तर पर भी मनाए जाते हैं, जिनमें बच्चों को सीधे भागीदार बनाया जाता है।

हाल के वर्षों में अरावली क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के लिए 'अरावली ग्रीन वॉल' जैसी परियोजनाओं पर भी कार्य हो रहा है, जिसका लक्ष्य मरुस्थल के फैलाव को रोकना व वन-आवरण बढ़ाना है।

वृक्षारोपण अभियान

हर वर्ष जुलाई माह में मनाया जाने वाला 'वन महोत्सव' स्कूलों व सरकारी संस्थानों में वृक्षारोपण को बढ़ावा देने वाला एक वार्षिक अभियान है, जिसकी शुरुआत आज़ादी के बाद पूरे भारत में वन-आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से हुई थी। हाल के वर्षों में 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसे राष्ट्रव्यापी अभियान भी चलाए गए हैं, जिनमें नागरिकों को अपनी माँ के नाम पर एक पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है — इस तरह के अभियान वृक्षारोपण को भावनात्मक रूप से भी जन-आंदोलन बनाते हैं।

विद्यालय स्तर पर बच्चों को ऐसे अभियानों से जोड़ना उन्हें छोटी उम्र से ही पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करता है, जो EVS विषय का एक मूल उद्देश्य भी है।

संरक्षण की चुनौतियाँ — सरिस्का का उदाहरण

वन्यजीव संरक्षण हमेशा सरल नहीं रहा — अलवर का सरिस्का बाघ रिज़र्व इसका एक चर्चित उदाहरण है। अवैध शिकार (पोचिंग) के कारण वर्ष 2004-05 तक सरिस्का से सभी बाघ समाप्त हो गए थे, जिसने पूरे देश में वन्यजीव संरक्षण नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए। इसके बाद वर्ष 2008 से रणथंभौर से बाघों को सरिस्का में स्थानांतरित (पुनर्स्थापित) करने का कार्यक्रम शुरू किया गया, जो भारत में बाघ-पुनर्स्थापन की पहली सफल परियोजनाओं में गिना जाता है।

यह घटना बच्चों को समझाने के लिए एक सशक्त उदाहरण है कि केवल राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर देना ही पर्याप्त नहीं — निरंतर निगरानी, स्थानीय समुदाय की भागीदारी व सख्त कानून-प्रवर्तन भी संरक्षण के लिए उतना ही आवश्यक है।

वनों से आजीविका व अरावली का महत्व

वन केवल लकड़ी का स्रोत नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका का भी आधार हैं। ईंधन-लकड़ी, पशु-चारा और गोंद, महुआ, तेंदू पत्ता जैसे लघु वनोपज (Non-Timber Forest Produce) स्थानीय समुदायों की आय का महत्वपूर्ण साधन हैं। इसी कारण वन-संरक्षण को केवल 'पर्यावरण' का विषय नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका से जुड़ा मुद्दा भी माना जाता है।

अरावली पर्वतमाला के सहारे फैले वन-क्षेत्र का महत्व विशेष रूप से इसलिए है क्योंकि यह मिट्टी के कटाव को रोकता है, भूजल स्तर बनाए रखने में सहायक है, और पूर्वी राजस्थान की उपजाऊ भूमि की ओर मरुस्थल के फैलाव को धीमा करता है। यदि अरावली के वन घटते हैं, तो मरुस्थलीकरण (Desertification) का खतरा बढ़ जाता है — यह EVS में 'पर्यावरण संतुलन' की अवधारणा समझाने के लिए एक सटीक उदाहरण है।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

कक्षा गतिविधि

अमृता देवी बिश्नोई की कहानी सुनाकर 'पेड़ हमारे लिए क्यों ज़रूरी हैं' पर चर्चा कराएँ — यह नैतिक शिक्षा व पर्यावरण-जागरूकता दोनों को जोड़ता है।

शिक्षण सामग्री

स्कूल परिसर में एक पौधा लगवाकर उसकी देखभाल की ज़िम्मेदारी बच्चों को सौंपें — प्रत्यक्ष अनुभव दीर्घकालीन सीख देता है।

सामान्य भ्रांति

बच्चे प्रायः 'अभयारण्य' व 'राष्ट्रीय उद्यान' को एक ही समझते हैं — सरल शब्दों में बताएँ कि दोनों संरक्षित क्षेत्र हैं पर नियम व सुरक्षा-स्तर अलग होते हैं।

मूल्यांकन विचार

'यदि आप एक पेड़ होते तो...' विषय पर छोटी मौखिक/चित्रात्मक अभिव्यक्ति गतिविधि — रचनात्मक व गैर-लिखित मूल्यांकन का उदाहरण।

याद रखने की ट्रिक

'खेजड़ली से चिपको तक' — याद रखें कि 1730 का खेजड़ली बलिदान भारत के वृक्ष-संरक्षण आंदोलनों की शुरुआत मानी जाती है, और यह हिमालयी 'चिपको आंदोलन' (1970 के दशक) से भी पुराना है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

खेजड़ली बलिदान की घटना किस वर्ष हुई थी?

  1. A1730
  2. B1857
  3. C1913
  4. D1973

व्याख्या

1730 में जोधपुर के निकट खेजड़ली गाँव में बिश्नोई समाज के लोगों ने खेजड़ी के वृक्षों को बचाने के लिए बलिदान दिया था।

प्रश्न 2

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान किस ज़िले में स्थित है?

  1. Aअलवर
  2. Bसवाई माधोपुर
  3. Cभरतपुर
  4. Dजैसलमेर

व्याख्या

बाघों के लिए प्रसिद्ध रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान सवाई माधोपुर ज़िले में स्थित है।

प्रश्न 3

'प्रोजेक्ट टाइगर' भारत में किस वर्ष शुरू की गई थी?

  1. A1969
  2. B1973
  3. C1985
  4. D2006

व्याख्या

प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू की गई थी, जिसके आरंभिक 9 बाघ रिज़र्व में राजस्थान का रणथंभौर भी शामिल था।

प्रश्न 4

टाल छापर अभयारण्य किस ज़िले में और किस जीव के लिए प्रसिद्ध है?

  1. Aचूरू, कृष्णमृग
  2. Bअलवर, बाघ
  3. Cजैसलमेर, गोडावण
  4. Dप्रतापगढ़, उड़न गिलहरी

व्याख्या

चूरू ज़िले का टाल छापर अभयारण्य कृष्णमृग (ब्लैकबक) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 5

खेजड़ली आंदोलन को किस बाद के प्रसिद्ध पर्यावरण-आंदोलन का प्रेरणा-स्रोत माना जाता है?

  1. Aनर्मदा बचाओ आंदोलन
  2. Bचिपको आंदोलन
  3. Cसाइलेंट वैली आंदोलन
  4. Dअप्पिको आंदोलन

व्याख्या

1730 का खेजड़ली बलिदान भारत के पुराने वृक्ष-संरक्षण आंदोलनों में गिना जाता है और इसे बाद के हिमालयी चिपको आंदोलन की प्रेरणा माना जाता है।

प्रश्न 6

सीतामाता अभयारण्य किस ज़िले में स्थित है?

  1. Aप्रतापगढ़
  2. Bचूरू
  3. Cअलवर
  4. Dकोटा

व्याख्या

सीतामाता अभयारण्य प्रतापगढ़ ज़िले में स्थित है और उड़न गिलहरी सहित दुर्लभ वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।

प्रश्न 7

बिश्नोई समाज मुख्यतः किन जीवों के संरक्षण के लिए जाना जाता है?

  1. Aबाघ व तेंदुआ
  2. Bचिंकारा व काला हिरण
  3. Cमगरमच्छ
  4. Dहाथी

व्याख्या

बिश्नोई समाज पेड़ों के साथ-साथ चिंकारा व काले हिरण जैसे वन्यजीवों की रक्षा के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।

प्रश्न 8

मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व किस संभाग/क्षेत्र में स्थित है?

  1. Aकोटा
  2. Bजोधपुर
  3. Cबीकानेर
  4. Dउदयपुर

व्याख्या

मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व कोटा क्षेत्र में स्थित एक अपेक्षाकृत नया बाघ रिज़र्व है।

प्रश्न 9

कक्षा 5 में वृक्ष-संरक्षण की भावना विकसित करने के लिए सबसे उपयुक्त कक्षा गतिविधि कौन-सी है?

  1. Aकेवल पाठ रटवाना
  2. Bस्कूल परिसर में पौधा लगवाकर उसकी देखभाल की ज़िम्मेदारी देना
  3. Cपरीक्षा में केवल प्रश्न पूछना
  4. Dकोई गतिविधि न कराना

व्याख्या

प्रत्यक्ष भागीदारी (पौधा लगाना व देखभाल करना) बच्चों में दीर्घकालीन पर्यावरण-जिम्मेदारी की भावना विकसित करती है।

प्रश्न 10

'अरावली ग्रीन वॉल' जैसी परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. Aनए शहर बसाना
  2. Bमरुस्थल के फैलाव को रोकना व वन-आवरण बढ़ाना
  3. Cनई झीलें बनाना
  4. Dखनन को बढ़ावा देना

व्याख्या

अरावली क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने की ऐसी परियोजनाओं का उद्देश्य मरुस्थल के फैलाव को रोकना व वन-आवरण को बढ़ाना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खेजड़ली बलिदान कब और कहाँ हुआ था?+

1730 में जोधपुर के निकट खेजड़ली गाँव में, जब बिश्नोई समाज के लोगों ने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपने प्राण दिए थे।

अमृता देवी बिश्नोई कौन थीं?+

वे खेजड़ली गाँव की एक बिश्नोई महिला थीं, जिन्होंने पेड़ काटे जाने के विरोध में पेड़ से चिपककर सबसे पहले अपना बलिदान दिया।

'प्रोजेक्ट टाइगर' कब शुरू हुई और राजस्थान का कौन-सा उद्यान इसमें शामिल था?+

प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू हुई थी और राजस्थान का रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान इसके आरंभिक 9 रिज़र्व में शामिल था।

टाल छापर अभयारण्य किस जीव के लिए प्रसिद्ध है?+

चूरू ज़िले का टाल छापर अभयारण्य कृष्णमृग (ब्लैकबक) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।

अरावली के वन-क्षेत्र घटने से किस समस्या का खतरा बढ़ता है?+

अरावली के वन घटने से मिट्टी का कटाव बढ़ता है, भूजल स्तर गिरता है और पूर्वी राजस्थान की ओर मरुस्थलीकरण का खतरा बढ़ जाता है।

सरिस्का में बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम कब व कहाँ से शुरू हुआ?+

वर्ष 2008 से रणथंभौर के बाघों को सरिस्का में स्थानांतरित किया गया, क्योंकि अवैध शिकार के कारण 2004-05 तक सरिस्का से सभी बाघ समाप्त हो गए थे।

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आधिकारिक स्रोत

  1. वन विभाग, राजस्थान सरकार
  2. भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India)
  3. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए