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REET L1 · पर्यावरण अध्ययन (EVS)

आर्द्रभूमि

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आर्द्रभूमि (वेटलैंड) वे जल-क्षेत्र हैं जहाँ पानी व ज़मीन का मिश्रित पारिस्थितिकी तंत्र होता है — यह टॉपिक EVS में जैव-विविधता व जल-संरक्षण की समझ बनाने के लिए पढ़ाया जाता है। यह पेज राजस्थान के रामसर स्थलों और परंपरागत जल-संरचनाओं को स्पष्ट रूप से समझाता है।

  • REET 2024 में इस टॉपिक से कोई प्रश्न नहीं आया
  • कक्षा 1–5 स्तर
  • 8 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Ramsar Convention on Wetlands

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 की उत्तर कुंजी में 'आर्द्रभूमि' से सीधा प्रश्न दर्ज नहीं है। BSER के EVS सिलेबस में यह टॉपिक शामिल है, और सामान्यतः 'राजस्थान में कितने रामसर स्थल हैं', 'आर्द्रभूमि किसे कहते हैं' या परंपरागत जल-संरचनाओं (जोहड़, टांका) से जुड़े तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाने की संभावना रहती है।

आर्द्रभूमि (वेटलैंड) क्या है?

आर्द्रभूमि वह क्षेत्र है जहाँ भूमि स्थायी या मौसमी रूप से पानी से ढकी या संतृप्त रहती है — जैसे झील, दलदल, तालाब या नदी के किनारे का गीला क्षेत्र। यह क्षेत्र पौधों व जीवों (विशेषकर पक्षियों) की अनेक प्रजातियों का घर होता है और भूजल स्तर बनाए रखने, बाढ़ नियंत्रण व जल-शुद्धिकरण में सहायक होता है।

आर्द्रभूमियों के महत्व को पहचानते हुए 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में एक अंतरराष्ट्रीय संधि हुई थी, जिसे 'रामसर कन्वेंशन' कहा जाता है — इसी तिथि की स्मृति में हर वर्ष 2 फरवरी को 'विश्व आर्द्रभूमि दिवस' मनाया जाता है।

राजस्थान के रामसर स्थल

स्थलज़िलावर्ष व विशेषता
केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यानभरतपुर1981 में रामसर सूची में शामिल; प्रवासी पक्षियों का प्रसिद्ध आश्रय-स्थल
सांभर झीलजयपुर-नागौर-अजमेर सीमा1990 में रामसर सूची में शामिल; खारे पानी की झील, फ्लेमिंगो पक्षियों का आगमन
खींचनफलोदी (जोधपुर क्षेत्र)डेमोज़ेल क्रेन ('कुरजां') पक्षियों के लिए प्रसिद्ध; हाल ही में रामसर सूची में शामिल
मेनारउदयपुर'पक्षी ग्राम' के नाम से प्रसिद्ध; हाल ही में रामसर सूची में शामिल

वर्तमान में राजस्थान के कुल 4 स्थल रामसर सूची (अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियाँ) में शामिल हैं।[स्रोत 1]

परंपरागत जल-संरचनाएँ भी आर्द्रभूमि का हिस्सा

राजस्थान में सदियों से लोगों ने वर्षा-जल संचयन के लिए छोटी-छोटी परंपरागत संरचनाएँ बनाईं, जो आर्द्रभूमि तंत्र का ही हिस्सा मानी जाती हैं — जोहड़ (छोटा तालाब जो भूजल स्तर बढ़ाता है), खड़ीन (मरुस्थलीय क्षेत्र में खेती के लिए विशेष जल-रोकाव प्रणाली, मुख्यतः जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा विकसित) व बावड़ी (सीढ़ीदार कुआँ)। दौसा ज़िले की आभानेरी की चांद बावड़ी विश्व की सबसे गहरी व प्रसिद्ध बावड़ियों में गिनी जाती है।

ये संरचनाएँ बताती हैं कि आर्द्रभूमि केवल बड़ी प्राकृतिक झीलों तक सीमित नहीं, बल्कि मानव-निर्मित छोटी जल-संरचनाएँ भी पारिस्थितिकी संतुलन में योगदान देती हैं — यह EVS की 'परंपरागत ज्ञान व पर्यावरण' थीम से सीधे जुड़ता है।

आर्द्रभूमि के लाभ — एक नज़र में

आर्द्रभूमियाँ प्रकृति की 'किडनी' कहलाती हैं क्योंकि ये जल को छानकर शुद्ध करने, बाढ़ के अतिरिक्त पानी को सोखने और सूखे के समय धीरे-धीरे जल छोड़ने का कार्य करती हैं। इसके साथ ही ये कार्बन को अपने भीतर संचित रखकर जलवायु-परिवर्तन को नियंत्रित करने में भी सहायक होती हैं, जिससे इन्हें 'कार्बन सिंक' की श्रेणी में भी रखा जाता है।

मछली-पालन, सिंघाड़े की खेती व नरकट (रीड) से बनने वाले हस्तशिल्प जैसी आजीविकाएँ भी अनेक आर्द्रभूमियों के आसपास रहने वाले समुदायों को प्राप्त होती हैं — यह दिखाता है कि आर्द्रभूमि-संरक्षण पारिस्थितिकी के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी सीधा जुड़ा है।

सांभर झील की आर्थिक भूमिका

सांभर झील न केवल पारिस्थितिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है — यहाँ से भारत के कुल नमक उत्पादन का एक उल्लेखनीय हिस्सा प्राप्त होता है, और यह देश के सबसे पुराने व बड़े अंतर्देशीय नमक-उत्पादन केंद्रों में गिनी जाती है। सर्दियों में यहाँ फ्लेमिंगो जैसे प्रवासी पक्षी बड़ी संख्या में पहुँचते हैं, जिससे यह झील नमक-उद्योग व पक्षी-पर्यटन — दोनों का संगम स्थल बन जाती है।

प्रत्येक वर्ष केवलादेव व अन्य आर्द्रभूमियों में 'एशियाई जलपक्षी गणना' (Asian Waterbird Census) जैसे वैज्ञानिक सर्वेक्षण भी आयोजित किए जाते हैं, जिनसे पक्षियों की संख्या व प्रजातियों का दीर्घकालिक रिकॉर्ड रखा जाता है — यह डेटा आर्द्रभूमि के स्वास्थ्य को समझने व समय रहते संरक्षण-उपाय करने में सहायक होता है।

नदी-आधारित आर्द्रभूमि — राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य

आर्द्रभूमि केवल झीलों तक सीमित नहीं — नदियों के किनारे का क्षेत्र भी एक महत्वपूर्ण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र होता है। चंबल नदी के किनारे राजस्थान, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश — तीन राज्यों की सीमाओं में फैला राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, घड़ियाल (Gharial) व गंगा नदी डॉल्फिन जैसे दुर्लभ जलीय जीवों के संरक्षण के लिए स्थापित किया गया है।

यह उदाहरण बच्चों को यह समझाने के लिए उपयोगी है कि आर्द्रभूमि व नदी-पारिस्थितिकी तंत्र आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं, और स्वच्छ बहता जल न केवल मनुष्यों बल्कि अनेक दुर्लभ जलीय प्रजातियों के अस्तित्व के लिए भी आवश्यक है।

केवलादेव का इतिहास और आर्द्रभूमियों पर संकट

केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास रोचक है — इसे मूलतः 19वीं सदी में भरतपुर के महाराजा द्वारा बत्तख-शिकार के लिए एक संरक्षित क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया था। बाद में इसके पारिस्थितिक महत्व को पहचानते हुए इसे पक्षी अभयारण्य और फिर राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया; यह 1981 में ही रामसर सूची में शामिल हो चुका था, और 1985 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी घोषित किया गया।

आज आर्द्रभूमियाँ कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं — जल-स्रोतों में प्रदूषण, अतिक्रमण, अत्यधिक भूजल दोहन व जलवायु परिवर्तन के कारण जल-स्तर में कमी जैसी समस्याएँ आर्द्रभूमियों की जैव-विविधता को प्रभावित करती हैं। सांभर झील जैसे स्थलों पर नमक-खनन गतिविधियों के कारण पारिस्थितिक संतुलन पर दबाव बना रहता है, इसलिए संरक्षित क्षेत्र घोषित करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सहभागिता भी आवश्यक मानी जाती है।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

कक्षा गतिविधि

यदि स्कूल के निकट कोई तालाब/जोहड़ हो तो अवलोकन भ्रमण कराएँ और वहाँ मिलने वाले पक्षियों व पौधों की सूची बनवाएँ।

शिक्षण सामग्री

प्रवासी पक्षियों (सारस, फ्लेमिंगो, कुरजां) के चित्र दिखाकर 'ये पक्षी सर्दियों में यहाँ क्यों आते हैं' पर चर्चा कराएँ।

सामान्य भ्रांति

बच्चे अक्सर 'झील' व 'आर्द्रभूमि' को अलग-अलग मान लेते हैं — समझाएँ कि झील भी एक प्रकार की आर्द्रभूमि ही है, बशर्ते वह जैव-विविधता को सहारा दे।

मूल्यांकन विचार

'आर्द्रभूमि से हमें क्या-क्या लाभ मिलते हैं' — इस पर चित्र बनवाकर या मौखिक सूची बनवाकर मूल्यांकन करें।

याद रखने की ट्रिक

राजस्थान के 4 रामसर स्थल याद रखें — 'के-स-खी-मे' यानी केवलादेव, सांभर, खींचन, मेनार। इनमें केवलादेव सबसे पुराना (1981) व खींचन-मेनार सबसे नए स्थल हैं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

रामसर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किस वर्ष हुए थे?

  1. A1971
  2. B1985
  3. C1990
  4. D2005

व्याख्या

आर्द्रभूमियों के संरक्षण हेतु रामसर कन्वेंशन पर 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षर हुए थे।

प्रश्न 2

राजस्थान का कौन-सा स्थल सबसे पहले (1981 में) रामसर सूची में शामिल हुआ था?

  1. Aसांभर झील
  2. Bकेवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान
  3. Cखींचन
  4. Dमेनार

व्याख्या

भरतपुर का केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान 1981 में रामसर सूची में शामिल होने वाला राजस्थान का पहला स्थल था।

प्रश्न 3

खींचन गाँव किस पक्षी के आगमन के लिए प्रसिद्ध है?

  1. Aमोर
  2. Bडेमोज़ेल क्रेन (कुरजां)
  3. Cगोडावण
  4. Dतोता

व्याख्या

जोधपुर क्षेत्र का खींचन गाँव हर सर्दी में हज़ारों डेमोज़ेल क्रेन (कुरजां) पक्षियों के आगमन के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 4

'पक्षी ग्राम' के नाम से प्रसिद्ध रामसर स्थल कौन-सा है?

  1. Aमेनार
  2. Bसांभर
  3. Cकेवलादेव
  4. Dखींचन

व्याख्या

उदयपुर ज़िले का मेनार गाँव अपनी झीलों में आने वाले पक्षियों की विविधता के कारण 'पक्षी ग्राम' कहलाता है।

प्रश्न 5

मरुस्थलीय क्षेत्र में खेती हेतु जल-रोकाव की परंपरागत प्रणाली को क्या कहा जाता है?

  1. Aखड़ीन
  2. Bबावड़ी
  3. Cजोहड़
  4. Dटांका

व्याख्या

खड़ीन प्रणाली मुख्यतः जैसलमेर क्षेत्र में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा विकसित की गई, जो वर्षा-जल को रोककर खेती योग्य बनाती है।

प्रश्न 6

चांद बावड़ी, जो विश्व की सबसे गहरी बावड़ियों में गिनी जाती है, किस ज़िले में स्थित है?

  1. Aदौसा (आभानेरी)
  2. Bजैसलमेर
  3. Cबीकानेर
  4. Dअलवर

व्याख्या

चांद बावड़ी दौसा ज़िले के आभानेरी गाँव में स्थित है और विश्व की सबसे गहरी व प्रसिद्ध बावड़ियों में गिनी जाती है।

प्रश्न 7

विश्व आर्द्रभूमि दिवस किस तारीख को मनाया जाता है?

  1. A22 मार्च
  2. B5 जून
  3. C2 फरवरी
  4. D16 अक्टूबर

व्याख्या

1971 की रामसर संधि की स्मृति में हर वर्ष 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया जाता है।

प्रश्न 8

कक्षा 4 में आर्द्रभूमि पढ़ाते समय 'झील भी आर्द्रभूमि है' — यह समझाने का सबसे उपयुक्त तरीका क्या है?

  1. Aकेवल परिभाषा रटवाना
  2. Bझील व दलदल के चित्र दिखाकर समानता व अंतर पर चर्चा कराना
  3. Cयह विषय छोड़ देना
  4. Dकठिन वैज्ञानिक शब्द प्रयोग करना

व्याख्या

चित्रों की तुलना व चर्चा से बच्चे यह समझ पाते हैं कि झील, दलदल व तालाब — सभी आर्द्रभूमि की श्रेणी में आते हैं।

प्रश्न 9

सांभर झील किस वर्ष रामसर सूची में शामिल हुई थी?

  1. A1981
  2. B1990
  3. C2013
  4. D2019

व्याख्या

सांभर झील 1990 में रामसर की अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि सूची में शामिल हुई थी।

प्रश्न 10

जोहड़ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. Aयातायात सुगम बनाना
  2. Bभूजल स्तर बढ़ाना
  3. Cबिजली उत्पादन करना
  4. Dनमक उत्पादन करना

व्याख्या

जोहड़ एक छोटा परंपरागत तालाब है, जिसका मुख्य उद्देश्य वर्षा-जल को रोककर भूजल स्तर को बढ़ाना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में कुल कितने रामसर स्थल हैं?+

वर्तमान में राजस्थान में कुल 4 रामसर स्थल हैं — केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान, सांभर झील, खींचन व मेनार।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस कब मनाया जाता है?+

हर वर्ष 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया जाता है, जो 1971 में हुई रामसर संधि की स्मृति में है।

खींचन गाँव किस पक्षी के लिए प्रसिद्ध है?+

जोधपुर क्षेत्र का खींचन गाँव डेमोज़ेल क्रेन (स्थानीय नाम 'कुरजां') पक्षियों के शीतकालीन आगमन के लिए प्रसिद्ध है।

खड़ीन प्रणाली किसने विकसित की थी?+

मरुस्थलीय क्षेत्र (मुख्यतः जैसलमेर) में खेती हेतु जल-रोकाव की खड़ीन प्रणाली पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा विकसित की गई थी।

केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान मूलतः किस उद्देश्य से विकसित किया गया था?+

इसे मूलतः 19वीं सदी में भरतपुर के महाराजा द्वारा बत्तख-शिकार के लिए एक संरक्षित क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया था, बाद में यह राष्ट्रीय उद्यान व रामसर स्थल बना।

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य किन जीवों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है?+

यह अभयारण्य घड़ियाल (Gharial) व गंगा नदी डॉल्फिन जैसे दुर्लभ जलीय जीवों के संरक्षण के लिए स्थापित किया गया है और राजस्थान, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश की सीमाओं में फैला है।

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आधिकारिक स्रोत

  1. Ramsar Convention on Wetlands
  2. वन विभाग, राजस्थान सरकार

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए