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REET Level 1 · EVS

गतिविधि आधारित EVS शिक्षण (Activity-Based Learning) — REET नोट्स

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यह पेज गतिविधि-आधारित EVS शिक्षण (Activity-Based Learning) के सिद्धांत, इसके लाभ-सीमाएँ और कक्षा में इसके व्यावहारिक उपयोग को उदाहरणों सहित कवर करता है। REET में यह एक शुद्ध शिक्षणशास्त्र (pedagogy) टॉपिक है, जहाँ EVS विषय-वस्तु से अधिक 'शिक्षण विधि' की समझ जाँची जाती है।

  • REET 2024 में 1 प्रश्न
  • शिक्षण विधि स्तर
  • 6 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में पूछा गया था कि पाठ्य-सहगामी क्रियाओं (co-curricular activities) के आयोजन का उद्देश्य क्या नहीं है — सही उत्तर था 'शैक्षिक कार्यक्रम व शिक्षण विधियों को कसौटी पर कसना', क्योंकि यह मूल्यांकन/शोध का कार्य है, गतिविधि आयोजन का नहीं। इससे स्पष्ट है कि REET में यह टॉपिक गतिविधि-आधारित शिक्षण के 'वास्तविक उद्देश्यों' व 'सीमाओं' दोनों की बारीक समझ जाँचता है, न कि केवल सामान्य परिभाषा।

गतिविधि-आधारित शिक्षण क्या है?

गतिविधि-आधारित शिक्षण (Activity-Based Learning - ABL) वह शिक्षण पद्धति है जिसमें बच्चे केवल सुनकर या रटकर नहीं, बल्कि स्वयं करके, देखकर, छूकर व अनुभव करके सीखते हैं — इसे 'करके सीखना' (Learning by Doing) भी कहा जाता है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) में इसी सिद्धांत पर बल दिया गया है, जिसमें बच्चे को ज्ञान का निष्क्रिय ग्रहणकर्ता नहीं बल्कि सक्रिय निर्माता (active constructor of knowledge) माना जाता है।

EVS विषय अपनी प्रकृति से ही गतिविधि-आधारित शिक्षण के लिए सबसे उपयुक्त है, क्योंकि इसके अधिकांश विषय (पौधे, जल, पर्यावरण, परिवार) बच्चे के तात्कालिक परिवेश से जुड़े होते हैं और उन्हें प्रत्यक्ष अवलोकन, प्रयोग व भ्रमण के माध्यम से आसानी से सिखाया जा सकता है। यही कारण है कि REET के EVS पाठ्यक्रम में विषय-वस्तु के साथ-साथ 'EVS कैसे पढ़ाएँ' से जुड़े शिक्षणशास्त्रीय टॉपिक भी शामिल किए गए हैं।

गतिविधि-आधारित शिक्षण की सैद्धांतिक जड़ें शिक्षाविद् जॉन ड्यूई (John Dewey) के 'Learning by Doing' सिद्धांत व मनोवैज्ञानिक ज्याँ पियाजे (Jean Piaget) के रचनावाद (Constructivism) सिद्धांत में मिलती हैं, जो मानते हैं कि बच्चा अपने वातावरण के साथ सक्रिय अंतःक्रिया (interaction) से स्वयं ज्ञान का निर्माण करता है, न कि केवल दूसरों से जानकारी ग्रहण करके। REET के बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) खंड में पियाजे व ड्यूई दोनों के सिद्धांत अलग से भी पढ़ाए जाते हैं, इसलिए यह टॉपिक CDP व EVS-शिक्षणशास्त्र दोनों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

कक्षा में इसका उपयोग — गतिविधि-आधारित EVS शिक्षण के उदाहरण

EVS टॉपिकगतिविधि-आधारित शिक्षण उदाहरण
पौधे व उनके भागविद्यालय के बगीचे में जाकर पौधे के विभिन्न भागों (जड़, तना, पत्ती) को छूकर व देखकर पहचानना
जल के स्रोतमिट्टी, रेत व कंकड़ से सरल जल-छानने (filtration) का मॉडल बनाना
परिवार व संबंधअपने परिवार का वंश-वृक्ष (family tree) चार्ट बनाना
मौसम व ऋतुएँकई दिनों तक तापमान/मौसम का अवलोकन कर डायरी में दर्ज करना
स्वच्छतास्कूल परिसर की सफाई में सीधे भाग लेकर कचरा छाँटने का अभ्यास करना
प्रदूषण व पर्यावरणआसपास के क्षेत्र में सफाई-सर्वेक्षण करवाकर प्रदूषण के स्रोत खोजना व सुधार के सुझाव तैयार करवाना

हर उदाहरण में बच्चा केवल जानकारी नहीं पढ़ता, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभव द्वारा सीखता है — यही गतिविधि-आधारित शिक्षण का मूल सिद्धांत है।

पाठ्य-सहगामी क्रियाएँ (Co-Curricular Activities) — उद्देश्य व सीमाएँ

पाठ्य-सहगामी क्रियाओं (जैसे खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी, भ्रमण) के आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों का शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखना, उनमें सद्गुणों (जैसे सहयोग, नेतृत्व, अनुशासन) का विकास करना और आवश्यक उपकरणों/साधनों से परिचय कराना है — यानी यह पाठ्यक्रम को व्यावहारिक व रोचक बनाने का माध्यम है।

पाठ्य-सहगामी क्रियाओं के सामान्य उदाहरणों में वाद-विवाद प्रतियोगिता, विज्ञान प्रदर्शनी, खेल-दिवस, सांस्कृतिक कार्यक्रम व शैक्षिक भ्रमण (educational excursions) शामिल हैं — ये गतिविधियाँ नियमित कक्षा-शिक्षण की पूरक (complementary) होती हैं, प्रतिस्थापन (replacement) नहीं।

हालाँकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि शैक्षिक कार्यक्रमों व शिक्षण विधियों की प्रभावशीलता को परखना (कसौटी पर कसना) पाठ्य-सहगामी क्रियाओं का उद्देश्य नहीं है — यह कार्य मूल्यांकन (evaluation) व शैक्षिक अनुसंधान (educational research) के अंतर्गत आता है। REET 2024 का प्रश्न ठीक इसी अंतर पर आधारित था, इसलिए 'गतिविधि आयोजन' व 'मूल्यांकन/अनुसंधान' को अलग-अलग समझना बेहद ज़रूरी है।

गतिविधि-आधारित शिक्षण के लाभ व सीमाएँ

गतिविधि-आधारित शिक्षण के कई लाभ हैं — बच्चों में विषय के प्रति रुचि बढ़ती है, सीखी गई बात लंबे समय तक याद रहती है (क्योंकि यह अनुभव से जुड़ी होती है), और सोचने-समझने व समस्या-समाधान का व्यावहारिक कौशल विकसित होता है। यह विशेष रूप से छोटे बच्चों (कक्षा 1-5) के लिए उपयुक्त है, क्योंकि इस उम्र में अमूर्त (abstract) अवधारणाओं को समझना कठिन होता है, जबकि मूर्त (concrete) अनुभव आसानी से समझ में आते हैं।

हालाँकि, गतिविधि-आधारित शिक्षण की कुछ व्यावहारिक सीमाएँ भी हैं — इसमें सामान्य व्याख्यान विधि से अधिक समय लगता है, कक्षा में अधिक बच्चे होने पर प्रबंधन कठिन हो सकता है, और शिक्षक को पहले से बेहतर योजना व तैयारी करनी पड़ती है। इसलिए एक कुशल शिक्षक हर टॉपिक के लिए यह तय करता है कि किस हिस्से को गतिविधि से और किस हिस्से को संक्षिप्त व्याख्यान से पढ़ाना बेहतर रहेगा।

गतिविधि-आधारित शिक्षण बहु-बुद्धि सिद्धांत (Multiple Intelligences, हावर्ड गार्डनर) से भी जुड़ा है, क्योंकि अलग-अलग बच्चे अलग-अलग तरीकों से बेहतर सीखते हैं — कोई देखकर (visual), कोई सुनकर (auditory), तो कोई स्वयं करके (kinesthetic); गतिविधि-आधारित शिक्षण विशेष रूप से गतिबोधक (kinesthetic) शिक्षार्थियों के लिए बहुत प्रभावी सिद्ध होता है।

कक्षा में इसका उपयोग

योजना बनाना

हर पाठ के लिए एक छोटी गतिविधि पहले से योजनाबद्ध करें (जैसे विषय से जुड़ी वस्तु लाना, चित्र बनाना या सरल प्रयोग करना), ताकि सैद्धांतिक ज्ञान तुरंत व्यावहारिक अनुभव से जुड़ जाए।

स्थानीय संसाधनों का उपयोग

महँगी या बाहरी सामग्री के बजाय आसपास उपलब्ध स्थानीय वस्तुओं (पत्ते, कंकड़, मिट्टी, पुराना कागज़) का उपयोग करें — इससे गतिविधि-आधारित शिक्षण संसाधन-सीमित (low-resource) विद्यालयों में भी संभव हो पाता है, जो राजस्थान के अधिकांश ग्रामीण सरकारी विद्यालयों के लिए विशेष रूप से व्यावहारिक है।

समूह कार्य

बच्चों को छोटे समूहों में बाँटकर गतिविधियाँ करवाएँ, जिससे सहयोग, संवाद व नेतृत्व जैसे सामाजिक कौशल भी विकसित हों, न कि केवल विषय-ज्ञान।

प्रतिबिंब (Reflection)

हर गतिविधि के बाद बच्चों से पूछें 'तुमने क्या सीखा?' या 'यह पहले से कैसे अलग था?' — यह प्रतिबिंबात्मक चर्चा (reflective discussion) गतिविधि को सतही अनुभव से गहरी समझ में बदलती है।

समय-प्रबंधन

हर गतिविधि के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करें और पहले से सामग्री तैयार रखें, ताकि बड़ी कक्षा में भी गतिविधि व्यवस्थित ढंग से पूरी हो सके और पाठ्यक्रम की गति प्रभावित न हो।

याद रखने की ट्रिक

गतिविधि-आधारित शिक्षण व मूल्यांकन को कभी न मिलाएँ — गतिविधि का उद्देश्य है 'सीखना व अनुभव', जबकि मूल्यांकन/अनुसंधान का उद्देश्य है 'परखना व जाँचना'। REET में जब भी प्रश्न 'उद्देश्य नहीं है' पूछे (जैसे 2024 में), सबसे पहले यही जाँचें कि दिया गया विकल्प 'मूल्यांकन/अनुसंधान' की श्रेणी में तो नहीं आता।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 138

कौन-सा उद्देश्य पाठ्य-सहगामी क्रियाओं के आयोजन का नहीं है ?

  1. Aशारीरिक एवं मानसिक स्वस्थता दोनों को बनाए रखना
  2. Bबालकों में विकसित होने वाले सद्गुणों का ज्ञान प्राप्त करना
  3. Cआवश्यक उपकरणों तथा साधनों की परिचयात्मक जानकारी
  4. Dशैक्षिक कार्यक्रम और शिक्षण विधियों को कसौटी पर कसना

व्याख्या

पाठ्य-सहगामी क्रियाओं का उद्देश्य बच्चों का शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य, सद्गुणों का विकास और आवश्यक उपकरणों/साधनों से परिचय जैसे व्यावहारिक पक्षों का विकास करना है। शैक्षिक कार्यक्रम और शिक्षण विधियों को कसौटी पर कसना (परखना) मूल्यांकन या शोध का कार्य है, पाठ्य-सहगामी क्रियाओं के आयोजन का उद्देश्य नहीं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'गतिविधि-आधारित शिक्षण' किस सिद्धांत पर आधारित है?

  1. Aरटने पर
  2. Bकरके सीखना (Learning by Doing)
  3. Cकेवल सुनने पर
  4. Dकेवल परीक्षा पर

व्याख्या

गतिविधि-आधारित शिक्षण 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें बच्चे प्रत्यक्ष अनुभव से सीखते हैं।

प्रश्न 2

निम्नलिखित में से कौन-सा पाठ्य-सहगामी क्रियाओं के आयोजन का उद्देश्य नहीं है?

  1. Aशारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखना
  2. Bसद्गुणों का विकास करना
  3. Cशैक्षिक कार्यक्रमों व शिक्षण विधियों को कसौटी पर कसना
  4. Dउपकरणों/साधनों से परिचय कराना

व्याख्या

शैक्षिक कार्यक्रमों व शिक्षण विधियों को कसौटी पर कसना (परखना) मूल्यांकन/शोध का कार्य है, पाठ्य-सहगामी क्रियाओं के आयोजन का उद्देश्य नहीं।

प्रश्न 3

NCF 2005 के अनुसार बच्चे को किस रूप में देखा जाता है?

  1. Aज्ञान का निष्क्रिय ग्रहणकर्ता
  2. Bज्ञान का सक्रिय निर्माता (active constructor)
  3. Cकेवल परीक्षा देने वाला व्यक्ति
  4. Dशिक्षक का सहायक मात्र

व्याख्या

NCF 2005 बच्चे को ज्ञान का सक्रिय निर्माता मानती है, जो अपने अनुभवों के आधार पर स्वयं समझ बनाता है, न कि केवल जानकारी ग्रहण करता है।

प्रश्न 4

EVS विषय गतिविधि-आधारित शिक्षण के लिए विशेष रूप से उपयुक्त क्यों माना जाता है?

  1. Aइसमें केवल परीक्षा होती है
  2. Bइसके विषय बच्चे के तात्कालिक परिवेश से जुड़े होते हैं
  3. Cइसमें कोई प्रयोग नहीं होता
  4. Dयह केवल किताबी विषय है

व्याख्या

EVS के अधिकांश विषय (पौधे, जल, परिवार) बच्चे के रोज़मर्रा के परिवेश से जुड़े होते हैं, इसलिए प्रत्यक्ष अवलोकन व अनुभव से आसानी से सिखाए जा सकते हैं।

प्रश्न 5

किसी विद्यालय में महँगी सामग्री उपलब्ध न होने पर गतिविधि-आधारित शिक्षण के लिए सबसे उपयुक्त रणनीति क्या है?

  1. Aगतिविधि करवाना बंद कर देना
  2. Bस्थानीय व आसानी से उपलब्ध वस्तुओं (पत्ते, कंकड़, मिट्टी) का उपयोग करना
  3. Cकेवल किताब से पढ़ाना
  4. Dबच्चों को घर भेज देना

व्याख्या

स्थानीय संसाधनों का उपयोग गतिविधि-आधारित शिक्षण को संसाधन-सीमित विद्यालयों में भी संभव बनाता है, इसके लिए महँगी सामग्री ज़रूरी नहीं।

प्रश्न 6

परिवार व संबंध टॉपिक पढ़ाने के लिए सबसे उपयुक्त गतिविधि-आधारित उदाहरण कौन-सा है?

  1. Aपरिभाषा रटवाना
  2. Bबच्चों से अपने परिवार का वंश-वृक्ष (family tree) चार्ट बनवाना
  3. Cकेवल किताब पढ़वाना
  4. Dटॉपिक छोड़ देना

व्याख्या

वंश-वृक्ष चार्ट बनवाना बच्चों को अपने परिवार के अनुभव से जोड़कर सिखाता है, जो गतिविधि-आधारित शिक्षण का उदाहरण है।

प्रश्न 7

किसी गतिविधि के बाद बच्चों से 'तुमने क्या सीखा?' पूछना किस शिक्षणशास्त्रीय चरण का हिस्सा है?

  1. Aप्रतिबिंब/चिंतन (Reflection)
  2. Bकेवल मनोरंजन
  3. Cअनुशासन
  4. Dपरीक्षा तैयारी

व्याख्या

गतिविधि के बाद 'तुमने क्या सीखा' जैसी चर्चा प्रतिबिंब (reflection) कहलाती है, जो सतही अनुभव को गहरी समझ में बदलने में मदद करती है।

प्रश्न 8

समूह कार्य (group work) के माध्यम से गतिविधि-आधारित शिक्षण से बच्चों में मुख्यतः क्या विकसित होता है?

  1. Aकेवल विषय-ज्ञान
  2. Bविषय-ज्ञान के साथ सहयोग, संवाद व नेतृत्व जैसे सामाजिक कौशल
  3. Cकेवल परीक्षा कौशल
  4. Dकुछ भी विकसित नहीं होता

व्याख्या

समूह में गतिविधि करने से बच्चों में विषय-ज्ञान के साथ-साथ सहयोग, संवाद व नेतृत्व जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कौशल भी विकसित होते हैं।

प्रश्न 9

गतिविधि-आधारित शिक्षण व पारंपरिक व्याख्यान (lecture) विधि में मुख्य अंतर क्या है?

  1. Aदोनों बिल्कुल समान हैं
  2. Bगतिविधि-आधारित शिक्षण में बच्चा स्वयं अनुभव से सीखता है, व्याख्यान में केवल सुनता है
  3. Cव्याख्यान में बच्चा अधिक सक्रिय होता है
  4. Dगतिविधि-आधारित शिक्षण में किताब की ज़रूरत नहीं होती

व्याख्या

गतिविधि-आधारित शिक्षण में बच्चा प्रत्यक्ष अनुभव व क्रिया से सीखता है, जबकि पारंपरिक व्याख्यान विधि में बच्चा मुख्यतः सुनकर जानकारी ग्रहण करता है।

प्रश्न 10

शैक्षिक कार्यक्रमों व शिक्षण विधियों की प्रभावशीलता को परखना किस श्रेणी का कार्य माना जाता है?

  1. Aपाठ्य-सहगामी क्रिया
  2. Bमूल्यांकन/शैक्षिक अनुसंधान
  3. Cखेल गतिविधि
  4. Dगतिविधि-आधारित शिक्षण

व्याख्या

शैक्षिक कार्यक्रमों व शिक्षण विधियों को परखना (कसौटी पर कसना) मूल्यांकन व शैक्षिक अनुसंधान के अंतर्गत आता है, पाठ्य-सहगामी क्रिया या गतिविधि-आधारित शिक्षण का उद्देश्य नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गतिविधि-आधारित शिक्षण (Activity-Based Learning) क्या है?+

यह वह शिक्षण पद्धति है जिसमें बच्चे स्वयं करके, देखकर व अनुभव करके सीखते हैं, न कि केवल सुनकर या रटकर — इसे 'करके सीखना' भी कहा जाता है।

पाठ्य-सहगामी क्रियाओं के आयोजन का उद्देश्य क्या है?+

पाठ्य-सहगामी क्रियाओं का उद्देश्य बच्चों का शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखना, सद्गुणों का विकास करना व आवश्यक उपकरणों से परिचय कराना है — शैक्षिक कार्यक्रमों को परखना इसका उद्देश्य नहीं है।

EVS विषय गतिविधि-आधारित शिक्षण के लिए विशेष रूप से उपयुक्त क्यों है?+

EVS के अधिकांश विषय (पौधे, जल, परिवार, पर्यावरण) बच्चे के तात्कालिक परिवेश से जुड़े होते हैं, इसलिए इन्हें प्रत्यक्ष अवलोकन व प्रयोग से आसानी से सिखाया जा सकता है।

NCF 2005 का गतिविधि-आधारित शिक्षण से क्या संबंध है?+

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) बच्चे को ज्ञान का निष्क्रिय ग्रहणकर्ता नहीं बल्कि सक्रिय निर्माता मानती है, जो गतिविधि-आधारित व अनुभव-आधारित शिक्षण को सैद्धांतिक आधार देता है।

गतिविधि-आधारित शिक्षण की व्यावहारिक सीमाएँ क्या हैं?+

इसमें व्याख्यान विधि से अधिक समय लगता है, बड़ी कक्षा में प्रबंधन कठिन हो सकता है, और शिक्षक को पहले से अधिक तैयारी व योजना करनी पड़ती है।

गतिविधि-आधारित शिक्षण किन शिक्षाविदों/सिद्धांतों से प्रेरित है?+

यह मुख्यतः जॉन ड्यूई के 'Learning by Doing' सिद्धांत व ज्याँ पियाजे के रचनावाद (Constructivism) सिद्धांत से प्रेरित है, जो मानते हैं कि बच्चा सक्रिय अनुभव से स्वयं ज्ञान का निर्माण करता है।

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए