जल स्रोत एवं जल संरक्षण: REET EVS नोट्स
यह पेज जल के स्रोतों, जल चक्र और राजस्थान की पारंपरिक जल-संरक्षण संरचनाओं (जोहड़, टांका, खड़ीन, नाड़ी, बावड़ी) को REET परीक्षा की दृष्टि से कवर करता है। REET 2024 में इसी टॉपिक से राजस्थान-विशिष्ट तथ्यों पर प्रश्न पूछे गए थे, इसलिए स्थानीय उदाहरण याद रखना खास फायदेमंद है।
- REET 2024 में 2 प्रश्न
- कक्षा 1-5 स्तर
- 8 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में इस टॉपिक से पूछे गए दोनों प्रश्न राजस्थान-केंद्रित तथ्यों पर आधारित थे — एक प्रश्न आभानेरी (दौसा) की चाँद बावड़ी जैसी ऐतिहासिक जल-संरचना की पहचान पर था, और दूसरा परंपरागत सिंचाई साधनों (मोट, ढेकली, रहट) को आधुनिक ड्रिप सिंचाई से अलग पहचानने पर। यानी EVS में जल टॉपिक शुद्ध विज्ञान (जल के स्रोत, जल चक्र) के साथ-साथ राजस्थान की स्थानीय जल-संस्कृति से भी जुड़ा हुआ पूछा जाता है — कक्षा 1-5 स्तर पर बुनियादी अवधारणाओं को स्थानीय उदाहरणों से जोड़कर याद रखना जरूरी है।
जल के स्रोत और जल चक्र
पृथ्वी पर जल दो मुख्य रूपों में मिलता है — सतही जल (surface water) और भूमिगत जल (underground water)। नदी, झील, तालाब, समुद्र और बाँध सतही जल के स्रोत हैं, जबकि कुआं, हैंडपंप और नलकूप (ट्यूबवेल) भूमिगत जल के स्रोत हैं। वर्षा जल दोनों प्रकार के जल का मूल स्रोत है — यही रिसकर भूमिगत जल बनता है और बहकर नदी-तालाबों को भरता है।
जल चक्र (water cycle) एक सतत प्रक्रिया है जिसमें सूर्य की गर्मी से समुद्र, नदी व तालाबों का पानी वाष्प बनकर ऊपर उठता है (वाष्पीकरण), ठंडी हवा में बादल बनकर संघनित होता है (संघनन), और फिर वर्षा के रूप में वापस धरती पर गिरता है। कक्षा 3-5 के बच्चों को यह चक्र किसी बर्तन में पानी गर्म करके भाप बनते और ढक्कन पर बूँद जमते हुए दिखाकर आसानी से समझाया जा सकता है।
राजस्थान की पारंपरिक जल-संरचनाएँ
| संरचना | स्वरूप | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| जोहड़ | वर्षा के बहते पानी को रोकने वाला छोटा तालाब | भूमिगत जल स्तर बढ़ाना, पशुओं व खेतों के लिए पानी |
| टांका / कुंड | घर या आँगन में बनी भूमिगत टंकी | छत का वर्षा जल एकत्र कर पीने के लिए सुरक्षित रखना |
| खड़ीन | ढाल वाली भूमि पर मिट्टी की मेड़ से बना कैचमेंट | वर्षा जल रोककर खेती योग्य नमी बनाए रखना (पश्चिमी राजस्थान) |
| नाड़ी | रेतीले मैदानों में बना उथला तालाब | गाँव के पीने व घरेलू उपयोग के लिए वर्षा जल संग्रहण |
| बावड़ी | सीढ़ीदार गहरा कुआं | पीने व सिंचाई के लिए भूमिगत जल तक सीढ़ियों से पहुँच |
स्रोत: इंडिया वाटर पोर्टल[स्रोत 2]
चाँद बावड़ी, आभानेरी
राजस्थान की सबसे प्रसिद्ध बावड़ियों में से एक चाँद बावड़ी दौसा जिले के आभानेरी गाँव में स्थित है। इतिहासकार इसे लगभग 8वीं-9वीं शताब्दी में निकुम्भ वंश के राजा चंद द्वारा बनवाया गया मानते हैं (हालाँकि निर्माण की सटीक तिथि व शासक की पुष्टि करने वाला कोई शिलालेख नहीं मिला है, यह अनुमान स्थापत्य शैली की समानता पर आधारित है)। यह करीब 100 फुट (लगभग 13 मंजिल) गहरी है और इसमें बड़ी संख्या में सीढ़ियाँ ज्यामितीय पैटर्न में बनी हैं, जिससे यह भारत की सबसे गहरी व बड़ी बावड़ियों में गिनी जाती है — REET 2024 में यही तथ्य पूछा गया था। ऐसी बावड़ियाँ प्रायः मंदिर परिसर के पास बनाई जाती थीं ताकि गर्मियों में भी ठंडा व स्वच्छ जल उपलब्ध रहे।
जल-संरचनाओं से जुड़े कुछ और तथ्य
पारंपरिक सिंचाई साधन बनाम आधुनिक सिंचाई
पुराने समय में किसान कुओं व जलाशयों से पानी निकालकर खेतों तक पहुँचाने के लिए मोट (बैलों की सहायता से चमड़े की बाल्टी खींचना), ढेकली (लीवर की तरह काम करने वाला यंत्र) और रहट (पानी के डिब्बों वाला घूमता चक्र) जैसी परंपरागत विधियाँ इस्तेमाल करते थे। आज ड्रिप (टपक) सिंचाई और फव्वारा (स्प्रिंकलर) सिंचाई जैसी आधुनिक विधियाँ पानी की बचत करते हुए सीधे पौधों की जड़ों तक पानी पहुँचाती हैं — REET में अक्सर इन दोनों समूहों को अलग-अलग पहचानने वाला प्रश्न पूछा जाता है।
जल संरक्षण के आसान उपाय हर घर व स्कूल में अपनाए जा सकते हैं — नल को इस्तेमाल के बाद तुरंत बंद करना, टपकते नल की तुरंत मरम्मत कराना, छत के वर्षा जल को टांके या टंकी में संग्रहित करना, कपड़े-बर्तन धोने के बाद बचे पानी से पौधों को सींचना, और खेतों में ड्रिप सिंचाई अपनाना। राजस्थान में औसत वर्षा देश के अन्य भागों से कम होती है, इसलिए यहाँ जल की हर बूँद बचाना खास तौर पर जरूरी है — यही कारण है कि यहाँ की सदियों पुरानी पारंपरिक जल-संस्कृति आज भी सीख देने योग्य मानी जाती है।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
कक्षा गतिविधि
बच्चों को विद्यालय के आसपास के जल स्रोत (हैंडपंप, कुआं, टंकी) दिखाने ले जाएं और पूछें कि पानी कहाँ से आ रहा है — इससे सतही व भूमिगत जल का अंतर अनुभव से समझ आता है।
शिक्षण सामग्री
जल चक्र दिखाने के लिए पारदर्शी बर्तन में पानी गर्म करके ढक्कन पर जमी बूँदें दिखाएं, या चार्ट पर जोहड़-बावड़ी-टांका के सरल चित्र बनाकर कक्षा में लगाएं।
सामान्य भ्रांति
बच्चे अक्सर सोचते हैं कि नल का पानी बिना सीमा के हमेशा मिलता रहेगा और उसका स्रोत नहीं समझते; शिक्षक को बताना चाहिए कि नल का पानी भी नदी, बांध या भूमिगत जल से ही आता है और सीमित है।
आकलन विचार
बच्चों से अपने घर में इस्तेमाल होने वाले जल स्रोत का चित्र बनाकर एक वाक्य में लिखने को कहें कि वे पानी कैसे बचाते हैं, और अगले सप्ताह उनसे उस आदत का पालन करने की जानकारी भी पूछें ताकि सीख व्यवहार में बदले।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
पानी 'रोकने-रखने' की संरचनाओं को याद रखें — टांका घर की छत का पानी टंकी में रोकता है (पीने के लिए), खड़ीन खेत की ढाल का पानी मेड़ से रोकता है (खेती के लिए), और बावड़ी-जोहड़-नाड़ी जमीन में बना तालाब/कुआं है जहाँ से सीढ़ियों या रस्सी से पानी निकाला जाता है।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 137
यह भारत की सबसे गहरी व बड़ी बावड़ियों में से एक है
- Aतुरजी का झालरा
- Bआभानेरी की चाँद बावड़ी
- Cभंडारों की बड़ी बावड़ी
- Dपन्ना मीना की बावड़ी
व्याख्या
दौसा जिले के आभानेरी गाँव की चाँद बावड़ी भारत की सबसे गहरी और बड़ी बावड़ियों में से एक मानी जाती है। इसका निर्माण निकुम्भ वंश के राजा चाँद (चन्द्र) के समय माना जाता है और इसमें अनेक मंजिलों तक सीढ़ियाँ बनी हैं।
प्रश्न 139
कुओं, झीलों एवं नहरों के जल को खेतों तक पहुँचाने का कौन-सा पारम्परिक तरीका नहीं है ?
- Aमोट
- Bढेकली
- Cरहट
- Dड्रिप तंत्र
व्याख्या
मोट (चरस), ढेकली और रहट कुओं व जलाशयों से पानी निकालकर खेतों तक पहुँचाने की पारम्परिक विधियाँ हैं। ड्रिप (टपक) सिंचाई तंत्र एक आधुनिक सिंचाई विधि है जिसमें पाइपों द्वारा बूँद-बूँद पानी पौधों की जड़ों तक पहुँचाया जाता है, इसलिए यह पारम्परिक तरीका नहीं है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
पीने के लिए वर्षा जल को भूमिगत टंकी में संग्रहित करने की पारंपरिक राजस्थानी संरचना को क्या कहते हैं?
- Aजोहड़
- Bटांका
- Cखड़ीन
- Dबावड़ी
व्याख्या
टांका (कुंड) घर या आँगन में बनी भूमिगत टंकी है जिसमें छत का वर्षा जल एकत्र कर पीने के लिए सुरक्षित रखा जाता है। जोहड़ भूजल स्तर बढ़ाने वाला तालाब है, खड़ीन खेती के लिए और बावड़ी सीढ़ीदार कुआं है।
प्रश्न 2
निम्नलिखित में से कौन-सा जल का भूमिगत स्रोत है?
- Aनदी
- Bझील
- Cकुआं
- Dतालाब
व्याख्या
कुआं भूमिगत जल तक पहुँचने का साधन है, जबकि नदी, झील और तालाब सतही जल के स्रोत हैं।
प्रश्न 3
खेतों में ढाल पर मिट्टी की मेड़ बनाकर वर्षा जल को रोककर खेती योग्य बनाने की पश्चिमी राजस्थान की पारंपरिक विधि कहलाती है -
- Aनाड़ी
- Bखड़ीन
- Cबावड़ी
- Dरहट
व्याख्या
खड़ीन में ढाल वाली भूमि पर मिट्टी की मेड़ बनाकर वर्षा जल रोका जाता है, जिससे खेत में नमी बनी रहती है। नाड़ी पीने के पानी का तालाब है, बावड़ी सीढ़ीदार कुआं है और रहट सिंचाई का यंत्र है।
प्रश्न 4
दौसा जिले के आभानेरी गाँव में स्थित प्रसिद्ध बावड़ी है -
- Aतुरजी का झालरा
- Bपन्ना मीना की बावड़ी
- Cचाँद बावड़ी
- Dराजा की बावड़ी
व्याख्या
चाँद बावड़ी दौसा जिले के आभानेरी गाँव में स्थित है और भारत की सबसे गहरी व बड़ी बावड़ियों में गिनी जाती है। बाकी विकल्प अन्य स्थानों की बावड़ियाँ हैं।
प्रश्न 5
कक्षा 3 के बच्चों को जल चक्र (water cycle) समझाने के लिए सबसे उपयुक्त गतिविधि है -
- Aजल चक्र की परिभाषा रटवाना
- Bगर्म पानी के बर्तन को ढक्कन से ढककर भाप का जमना दिखाना
- Cकेवल पाठ्यपुस्तक पढ़ाना
- Dबिना उदाहरण के बोर्ड पर आरेख बनाना
व्याख्या
प्रत्यक्ष प्रयोग (गर्म पानी से भाप बनना और ढक्कन पर बूँद जमना) बच्चों को वाष्पीकरण-संघनन की प्रक्रिया अनुभव से समझाता है, जो रटने से बेहतर तरीका है।
प्रश्न 6
रहट, ढेकली और मोट किसके लिए प्रयोग होने वाली परंपरागत विधियाँ हैं?
- Aवर्षा मापने के लिए
- Bकुओं से पानी निकालकर खेतों तक पहुँचाने के लिए
- Cजल शुद्ध करने के लिए
- Dवर्षा जल संग्रहण के लिए
व्याख्या
रहट, ढेकली और मोट कुओं व जलाशयों से पानी निकालकर सिंचाई हेतु खेतों तक पहुँचाने की पारंपरिक विधियाँ हैं।
प्रश्न 7
निम्नलिखित में से कौन-सी आधुनिक सिंचाई विधि है, जिसमें पौधों की जड़ों तक बूँद-बूँद पानी पहुँचाया जाता है?
- Aरहट
- Bढेकली
- Cड्रिप (टपक) सिंचाई
- Dमोट
व्याख्या
ड्रिप सिंचाई में पाइपों द्वारा बूँद-बूँद पानी सीधे जड़ों तक पहुँचाया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है। बाकी तीनों पारंपरिक साधन हैं।
प्रश्न 8
राजस्थान के नागौर व बाड़मेर जैसे रेतीले मैदानी क्षेत्रों में वर्षा जल एकत्र करने वाला उथला परंपरागत तालाब कहलाता है -
- Aखड़ीन
- Bनाड़ी
- Cटांका
- Dजोहड़
व्याख्या
नाड़ी रेतीले मैदानों में बना उथला तालाब है जो वर्षा जल एकत्र कर गाँव को कई महीनों तक पीने व घरेलू उपयोग का पानी देता है। टांका घर की भूमिगत टंकी है, खड़ीन खेती के लिए है।
प्रश्न 9
बच्चों में पानी बचाने की आदत डालने के लिए शिक्षक सबसे पहले क्या करा सकते हैं?
- Aबच्चों को केवल किताब से जल संरक्षण के नियम याद करवाएं
- Bबच्चों को टपकते नल की सूचना देने व स्कूल में नल जाँचने का जिम्मा सौंपे
- Cजल संरक्षण पर कोई चर्चा न करें
- Dबच्चों को केवल परीक्षा में निबंध लिखने को कहें
व्याख्या
व्यावहारिक व जिम्मेदारी वाली गतिविधि (टपकता नल जाँचना, सूचना देना) बच्चों में आदत को क्रियात्मक रूप से विकसित करती है, जबकि केवल रटना या निबंध लिखवाना असरदार नहीं होता।
प्रश्न 10
सतही जल (surface water) का उदाहरण नहीं है -
- Aनदी
- Bतालाब
- Cहैंडपंप
- Dझील
व्याख्या
हैंडपंप भूमिगत जल निकालने का साधन है, जबकि नदी, तालाब और झील सतही जल के उदाहरण हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान में जल संरक्षण की परंपरागत विधियाँ कौन-कौन सी हैं?+
जोहड़, टांका/कुंड, खड़ीन, नाड़ी और बावड़ी राजस्थान की प्रमुख परंपरागत जल-संरचनाएँ हैं, जो वर्षा जल को अलग-अलग तरीकों से संग्रहित करती हैं।
REET में जल टॉपिक से कितने प्रश्न आते हैं?+
REET 2024 में EVS के इस टॉपिक से 2 प्रश्न पूछे गए थे; राजस्थान से जुड़े तथ्य याद रखना फायदेमंद रहता है।
जल चक्र क्या है?+
वाष्पीकरण, संघनन और वर्षा की सतत प्रक्रिया जिससे पानी समुद्र-नदी से बादल बनकर फिर धरती पर लौटता है, जल चक्र कहलाता है।
बावड़ी और जोहड़ में क्या अंतर है?+
बावड़ी सीढ़ीदार गहरा कुआं है जहाँ सीढ़ियों से उतरकर पानी तक पहुँचा जाता है, जबकि जोहड़ वर्षा के बहते पानी को रोकने वाला खुला छोटा तालाब है।
कक्षा 1-5 के EVS सिलेबस में जल टॉपिक की गहराई कितनी है?+
इस स्तर पर जल के स्रोत, जल चक्र की बुनियादी समझ और जल बचाने की आदतें सिखाई जाती हैं; राजस्थान की स्थानीय जल-संरचनाएँ रोचक उदाहरण के रूप में जोड़ी जाती हैं।
मोट, ढेकली और रहट में से कौन-सी विधि पारंपरिक नहीं है?+
मोट, ढेकली और रहट तीनों पारंपरिक हैं; इनके विपरीत ड्रिप सिंचाई एक आधुनिक विधि है जो REET में अक्सर विकल्प के रूप में दी जाती है।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए