थार मरुस्थल
थार मरुस्थल राजस्थान की सबसे अनूठी भौगोलिक पहचान है और EVS सिलेबस में इसकी जलवायु, वनस्पति, जीव-जंतु व जल-प्रबंधन पर विशेष बल दिया जाता है। यह पेज मरुस्थल के भूगोल से लेकर राज्य-प्रतीकों (राजकीय पशु, पक्षी, वृक्ष) तक सभी परीक्षा-उपयोगी तथ्य समेटता है।
- REET 2024 में इस टॉपिक से कोई प्रश्न नहीं आया
- कक्षा 1–5 स्तर
- 9 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 की उत्तर कुंजी में 'थार मरुस्थल' से सीधा प्रश्न दर्ज नहीं है। BSER के EVS सिलेबस में यह टॉपिक स्पष्ट रूप से शामिल है, और सामान्यतः 'थार मरुस्थल राजस्थान के कितने प्रतिशत क्षेत्र में फैला है', 'राजकीय पशु/पक्षी/वृक्ष कौन-सा है' या 'मरुस्थल में कौन-सी फसलें/वनस्पतियाँ पाई जाती हैं' जैसे तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाने की संभावना रहती है।
थार मरुस्थल का सामान्य परिचय
- अन्य नाम
- 'महान भारतीय मरुस्थल' (Great Indian Desert)
- विस्तार
- राजस्थान के लगभग 60% भौगोलिक क्षेत्र में फैला — मुख्यतः जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जालौर व पाली ज़िलों में
- विशेषता
- विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या-घनत्व वाला मरुस्थल माना जाता है
- बालुका स्तूप
- रेत के टीलों (धोरा/टिब्बा) से युक्त भू-आकृति; कुछ स्थानों पर अर्धचंद्राकार (बारखान) स्तूप भी मिलते हैं
मरुस्थलीय वनस्पति, जीव-जंतु व राज्य-प्रतीक
| श्रेणी | नाम/उदाहरण |
|---|---|
| राजकीय वृक्ष | खेजड़ी (कल्पवृक्ष) — मरुस्थल में सबसे उपयोगी व सर्वाधिक पाया जाने वाला वृक्ष |
| राजकीय पशु | ऊँट (मरुस्थलीय परिवहन व आजीविका का आधार) |
| राजकीय पक्षी | गोडावण (सोन चिरैया / Great Indian Bustard) — अति संकटग्रस्त प्रजाति, मरु राष्ट्रीय उद्यान (जैसलमेर) में संरक्षित |
| अन्य वनस्पति | कैर, सांगरी (खेजड़ी की फली — 'केर-सांगरी' व्यंजन में उपयोग), रोहिड़ा, बबूल, फोग |
| अन्य जीव | चिंकारा (मृग प्रजाति), रेगिस्तानी लोमड़ी, मरु बिलाव |
इंदिरा गांधी नहर — मरुस्थल में हरियाली
थार मरुस्थल में जल की कमी को दूर करने के लिए इंदिरा गांधी नहर परियोजना बनाई गई, जो पंजाब की सतलुज-ब्यास-रावी नदियों का जल हरिके बैराज से लेकर श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर व जैसलमेर तक पहुँचाती है। यह विश्व की सबसे बड़ी नहर परियोजनाओं में गिनी जाती है और इसने मरुस्थल के बड़े हिस्से को खेती योग्य बनाया है।
नहर से पहले इन क्षेत्रों के लोग वर्षा-जल संचयन की परंपरागत विधियों — जैसे टांका (भूमिगत जलाशय), नाड़ी व खड़ीन — पर निर्भर थे, जो आज भी मरुस्थलीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
मरुस्थलीय जीवन-शैली और अनुकूलन
मरुस्थल के जीव-जंतु व वनस्पतियाँ अत्यधिक गर्मी व कम वर्षा के अनुकूल विकसित हुए हैं — जैसे खेजड़ी की गहरी जड़ें भूमिगत जल तक पहुँचती हैं, और ऊँट लंबे समय तक बिना पानी के रह सकता है। EVS में यह विषय बच्चों को 'जीव अपने परिवेश के अनुसार कैसे ढलते हैं' — इस मूल अवधारणा से जोड़ने के लिए आदर्श है।
थार क्षेत्र के परंपरागत घर मोटी मिट्टी की दीवारों व छोटी खिड़कियों वाले होते हैं, जो भीतर के तापमान को नियंत्रित रखते हैं — इसका विस्तृत विवरण EVS के 'आवास' टॉपिक में मिलता है।
टिड्डी दल — मरुस्थल की एक चुनौती
थार क्षेत्र की खेती के सामने ऐतिहासिक रूप से एक बड़ी चुनौती रही है — टिड्डी दल (Desert Locust) का आक्रमण। अनुकूल मौसम की परिस्थितियों में टिड्डियाँ बड़े झुंडों में पड़ोसी देशों से पश्चिमी राजस्थान होते हुए प्रवेश करती हैं और खड़ी फसलों को थोड़े ही समय में भारी नुकसान पहुँचा सकती हैं। हाल के वर्षों में भी (2019-20) पश्चिमी राजस्थान में टिड्डियों के बड़े आक्रमण देखे गए थे, जिसके बाद निगरानी व नियंत्रण के लिए विशेष उपाय अपनाए गए।
यह उदाहरण बच्चों को दिखाता है कि मरुस्थलीय जीवन में मनुष्य को केवल पानी व गर्मी ही नहीं, बल्कि ऐसी प्राकृतिक घटनाओं से भी निपटना पड़ता है, जो सामान्य कृषि-क्षेत्रों में उतनी बड़ी समस्या नहीं बनतीं।
मरुस्थलीय कृषि
कम व अनिश्चित वर्षा के कारण थार क्षेत्र की खेती मुख्यतः असिंचित (barani) व सूखा-सहनशील फसलों पर निर्भर रही है। बाजरा यहाँ की प्रमुख खाद्य फसल है, जो कम पानी में भी अच्छी उपज देता है। ग्वार (क्लस्टर बीन) एक अन्य महत्वपूर्ण नकदी फसल है — राजस्थान भारत में ग्वार उत्पादन में अग्रणी राज्य है, और इससे प्राप्त 'ग्वार गम' का उपयोग खाद्य उद्योग से लेकर तेल-खनन उद्योग तक में होता है, जिससे यह एक महत्वपूर्ण निर्यात उत्पाद भी बन चुका है।
इंदिरा गांधी नहर के आने के बाद श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ जैसे ज़िलों में गेहूँ व कपास जैसी सिंचित फसलों की खेती भी संभव हुई है, जिससे मरुस्थल के एक बड़े भाग की कृषि-तस्वीर बदल गई है। यह परिवर्तन बच्चों को दिखाने के लिए उपयोगी उदाहरण है कि सही जल-प्रबंधन से चुनौतीपूर्ण भूभाग को भी उत्पादक बनाया जा सकता है।
मरुस्थलीय जनजीवन, पशुपालन व सौर ऊर्जा
थार मरुस्थल के निवासियों की आजीविका पारंपरिक रूप से पशुपालन पर आधारित रही है — भेड़, बकरी व ऊँट पालन यहाँ के ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा है। भेड़ों से प्राप्त ऊन से बुनाई (जैसे जैसलमेर व बीकानेर के परंपरागत ऊनी वस्त्र) एक महत्वपूर्ण गृह-उद्योग रहा है, जो कम वर्षा व सीमित खेती वाले क्षेत्र में आय का वैकल्पिक साधन प्रदान करता है।
हाल के दशकों में थार मरुस्थल की भरपूर धूप व खुले मैदानों ने इसे नवीकरणीय ऊर्जा के लिए भी उपयुक्त बना दिया है — जैसलमेर व बाड़मेर क्षेत्र में बड़े सौर व पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित हुए हैं, जिससे राजस्थान भारत के अग्रणी सौर-ऊर्जा उत्पादक राज्यों में गिना जाता है। यह उदाहरण बच्चों को दिखाता है कि जो भूभाग कृषि के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता था, वही आज ऊर्जा उत्पादन में एक बड़ी शक्ति बन चुका है।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
कक्षा गतिविधि
खेजड़ी की पत्ती/फली (सांगरी) व रेत का नमूना कक्षा में दिखाकर स्पर्श व अवलोकन आधारित सीख कराएँ।
शिक्षण सामग्री
गोडावण (सोन चिरैया) व ऊँट के चित्र/वीडियो दिखाकर उनके मरुस्थलीय अनुकूलन पर चर्चा कराएँ।
सामान्य भ्रांति
बच्चे अक्सर सोचते हैं कि मरुस्थल में कोई वनस्पति या जीव नहीं होता — खेजड़ी, चिंकारा, गोडावण जैसे उदाहरणों से यह भ्रांति दूर करें।
मूल्यांकन विचार
'मरुस्थल में यह जीव/पेड़ कैसे जीवित रहता है' — पर मौखिक चर्चा व चित्र-आधारित प्रश्न से समझ जाँचें।
अंतर-विषयक जोड़
गणित की सरल गतिविधि जोड़कर 'ऊँट कितने दिन बिना पानी के रह सकता है' जैसे आँकड़े पर चर्चा कराई जा सकती है, जिससे EVS व गणित का सहज एकीकरण होता है।
याद रखने की ट्रिक
राजस्थान के चार 'राजकीय प्रतीक' एक साथ याद करें — पशु: ऊँट, पक्षी: गोडावण, वृक्ष: खेजड़ी। तीनों मरुस्थल से सीधे जुड़े हैं, इसलिए इन्हें 'थार का त्रिकोण' के रूप में याद रखना आसान रहता है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
थार मरुस्थल राजस्थान के लगभग कितने प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में फैला हुआ है?
- Aलगभग 30%
- Bलगभग 60%
- Cलगभग 90%
- Dलगभग 15%
व्याख्या
थार मरुस्थल राजस्थान के लगभग 60% भौगोलिक क्षेत्र को कवर करता है, जो मुख्यतः राज्य के पश्चिमी ज़िलों में फैला है।
प्रश्न 2
राजस्थान का राजकीय पशु कौन-सा है?
- Aचिंकारा
- Bऊँट
- Cनीलगाय
- Dमरु बिलाव
व्याख्या
ऊँट को राजस्थान का राजकीय पशु घोषित किया गया है, क्योंकि यह मरुस्थलीय परिवहन व आजीविका का मुख्य आधार है।
प्रश्न 3
राजस्थान का राजकीय पक्षी 'गोडावण' मुख्यतः किस उद्यान में संरक्षित है?
- Aरणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान
- Bकेवलादेव राष्ट्रीय उद्यान
- Cमरु राष्ट्रीय उद्यान, जैसलमेर
- Dसरिस्का बाघ रिज़र्व
व्याख्या
अति संकटग्रस्त गोडावण (Great Indian Bustard) मुख्यतः जैसलमेर के मरु राष्ट्रीय उद्यान (Desert National Park) में संरक्षित किया जाता है।
प्रश्न 4
राजस्थान का राजकीय वृक्ष कौन-सा है, जिसे 'कल्पवृक्ष' भी कहा जाता है?
- Aरोहिड़ा
- Bखेजड़ी
- Cबबूल
- Dकैर
व्याख्या
खेजड़ी वृक्ष को मरुस्थलीय जीवन में उसकी बहुउपयोगिता के कारण 'कल्पवृक्ष' कहा जाता है और यह राजस्थान का राजकीय वृक्ष है।
प्रश्न 5
इंदिरा गांधी नहर का जल मुख्यतः किन नदियों से लिया जाता है?
- Aगंगा व यमुना
- Bसतलुज, ब्यास व रावी
- Cचंबल व बनास
- Dनर्मदा व ताप्ती
व्याख्या
इंदिरा गांधी नहर पंजाब की सतलुज, ब्यास व रावी नदियों का जल हरिके बैराज से लेकर राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों तक पहुँचाती है।
प्रश्न 6
खेजड़ी की फली को क्या कहा जाता है, जो एक प्रसिद्ध राजस्थानी व्यंजन में प्रयुक्त होती है?
- Aसांगरी
- Bबाजरी
- Cकैर
- Dफोग
व्याख्या
खेजड़ी की फली को 'सांगरी' कहते हैं, जो कैर के साथ मिलकर प्रसिद्ध राजस्थानी व्यंजन 'केर-सांगरी' बनाती है।
प्रश्न 7
मरुस्थलीय क्षेत्र में परंपरागत रूप से वर्षा-जल संचयन के लिए किस भूमिगत जलाशय का उपयोग होता है?
- Aबावड़ी
- Bटांका
- Cजोहड़
- Dबांध
व्याख्या
टांका एक भूमिगत जलाशय है, जिसका उपयोग मरुस्थलीय परिवारों द्वारा वर्षा-जल संचयन के लिए परंपरागत रूप से किया जाता रहा है।
प्रश्न 8
कक्षा 4 में मरुस्थलीय जीव-जंतुओं के 'अनुकूलन' की अवधारणा सिखाने का सबसे उपयुक्त तरीका क्या है?
- Aकेवल परिभाषा लिखवाना
- Bऊँट व खेजड़ी के उदाहरण से चर्चा व चित्र-अवलोकन कराना
- Cकोई गतिविधि न कराना
- Dजटिल वैज्ञानिक शब्दावली रटवाना
व्याख्या
प्राथमिक स्तर पर ठोस उदाहरणों (ऊँट, खेजड़ी) व चर्चा से अमूर्त अवधारणाएँ (अनुकूलन) बेहतर समझ में आती हैं।
प्रश्न 9
थार मरुस्थल के बालुका स्तूप (रेत के टीले) को स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता है?
- Aधोरा/टिब्बा
- Bखड़ीन
- Cनाड़ी
- Dबेरी
व्याख्या
थार मरुस्थल में रेत के टीलों को स्थानीय भाषा में 'धोरा' या 'टिब्बा' कहा जाता है।
प्रश्न 10
थार मरुस्थल को विश्व-स्तर पर किस विशेषता के लिए जाना जाता है?
- Aसबसे ठंडा मरुस्थल
- Bसबसे अधिक जनसंख्या-घनत्व वाला मरुस्थल
- Cसबसे छोटा मरुस्थल
- Dसमुद्र-तटीय मरुस्थल
व्याख्या
थार मरुस्थल को विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या-घनत्व वाला मरुस्थल माना जाता है, क्योंकि यहाँ नहरी सिंचाई व परंपरागत जल-प्रबंधन से बड़ी आबादी बसी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
थार मरुस्थल राजस्थान के कितने प्रतिशत क्षेत्र में फैला है?+
थार मरुस्थल राजस्थान के लगभग 60% भौगोलिक क्षेत्र में फैला हुआ है, जो मुख्यतः पश्चिमी ज़िलों में स्थित है।
राजस्थान का राजकीय पक्षी कौन-सा है?+
गोडावण (सोन चिरैया / Great Indian Bustard) राजस्थान का राजकीय पक्षी है, जो अति संकटग्रस्त प्रजाति है।
इंदिरा गांधी नहर का जल किन नदियों से आता है?+
पंजाब की सतलुज, ब्यास व रावी नदियों का जल हरिके बैराज से होकर इंदिरा गांधी नहर के माध्यम से राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों तक पहुँचता है।
खेजड़ी को 'कल्पवृक्ष' क्यों कहा जाता है?+
खेजड़ी मरुस्थलीय जीवन के लिए भोजन, चारा, ईंधन व छाया — हर रूप में उपयोगी होने के कारण 'कल्पवृक्ष' कहलाती है।
थार मरुस्थल आज किस नई ऊर्जा-क्षमता के लिए जाना जाता है?+
भरपूर धूप व खुले मैदानों के कारण जैसलमेर-बाड़मेर क्षेत्र सौर व पवन ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन गया है।
टिड्डी दल किस प्रकार की समस्या है और यह मुख्यतः कहाँ प्रभाव डालता है?+
टिड्डी दल कीटों के बड़े झुंडों का आक्रमण है, जो पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर क्षेत्र) की खड़ी फसलों को अल्प समय में भारी नुकसान पहुँचा सकता है।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए