आनुवंशिकता (Heredity & Genetics) — REET नोट्स
यह पेज REET Level 2 (गणित-विज्ञान) के लिए आनुवंशिकता के मूल सिद्धांत — मेंडल के नियम, आनुवंशिकी की शब्दावली और रोग-प्रतिरोधी फसल किस्मों को कवर करता है। REET 2024 में इस टॉपिक से पादप प्रजनन द्वारा विकसित रोग-प्रतिरोधी किस्मों पर सीधे प्रश्न पूछे गए थे, इसलिए यहाँ शास्त्रीय आनुवंशिकता और व्यावहारिक कृषि-आनुवंशिकी दोनों को सरल उदाहरणों सहित स्पष्ट किया गया है ताकि कक्षा 6-8 में पढ़ाना भी आसान रहे।
- REET 2024 में 2 प्रश्न
- कक्षा 6-8 स्तर
- 9 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में इस टॉपिक से दोनों प्रश्न पादप प्रजनन (plant breeding) द्वारा विकसित रोग-प्रतिरोधी फसल किस्मों पर आधारित थे — सरसों की 'पूसा स्वर्णिम' किस्म श्वेत किट्ट रोग के प्रति और गेहूँ की 'हिमगिरी' किस्म हिलबंट रोग के प्रति प्रतिरोधी बताई गई। यानी REET में आनुवंशिकता को केवल मेंडल के सैद्धांतिक नियमों तक सीमित न रखकर, कृषि में आनुवंशिकी के व्यावहारिक उपयोग (सुधरी हुई किस्में) के रूप में भी पूछा जाता है, इसलिए दोनों पक्षों की तैयारी ज़रूरी है।
आनुवंशिकता क्या है
आनुवंशिकता (Heredity) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा माता-पिता के शारीरिक व अन्य लक्षण संतान में स्थानांतरित होते हैं। ये लक्षण जीन (gene) के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचते हैं। आनुवंशिकता के वैज्ञानिक अध्ययन को आनुवंशिकी (Genetics) कहते हैं।
ऑस्ट्रियाई वैज्ञानिक ग्रेगर जोहान मेंडल को 'आनुवंशिकी का जनक' कहा जाता है। उन्होंने मटर के पौधे (Pisum sativum) पर वर्षों तक प्रयोग किए — मटर को इसलिए चुना गया क्योंकि इसमें स्पष्ट रूप से अलग दिखने वाले जोड़े गुण (जैसे लंबा/बौना पौधा, गोल/झुर्रीदार बीज, बैंगनी/सफेद फूल) पाए जाते हैं और यह तेज़ी से कई पीढ़ियों तक उगाया जा सकता है। मेंडल ने अपने निष्कर्ष सन् 1866 में प्रकाशित किए, हालाँकि इन्हें वैज्ञानिक मान्यता सन् 1900 के बाद मिली, जब तीन अन्य वैज्ञानिकों ने स्वतंत्र रूप से इसी तरह के परिणाम पाकर मेंडल के कार्य को पुनः खोजा।
मेंडल के आनुवंशिकता के नियम
| नियम | अर्थ |
|---|---|
| प्रभाविता का नियम (Law of Dominance) | जब किसी लक्षण के दो विपरीत रूप (जैसे लंबा व बौना) एक साथ मौजूद हों, तो एक रूप (प्रभावी/dominant) संतान में प्रकट होता है और दूसरा (अप्रभावी/recessive) दब जाता है |
| पृथक्करण का नियम (Law of Segregation) | युग्मक (gamete) बनते समय किसी लक्षण के जीन-युग्म के दोनों अलील एक-दूसरे से अलग होकर अलग-अलग युग्मकों में चले जाते हैं |
| स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) | जब दो या अधिक भिन्न लक्षणों (जैसे बीज का रंग व आकार) का एक साथ अध्ययन किया जाए, तो प्रत्येक लक्षण का वंशागमन दूसरे लक्षण से स्वतंत्र रूप से होता है |
आनुवंशिकी की मूल शब्दावली
- जीन (Gene)
- किसी लक्षण को नियंत्रित करने वाली आनुवंशिक इकाई
- अलील (Allele)
- एक ही जीन के दो वैकल्पिक रूप (जैसे लंबाई के लिए लंबा व बौना अलील)
- प्रभावी लक्षण (Dominant)
- वह लक्षण जो संतान (F1) में प्रकट होता है
- अप्रभावी लक्षण (Recessive)
- वह लक्षण जो प्रभावी के साथ होने पर दब जाता है और छिपा रहता है
- जीनोटाइप (Genotype)
- जीव की आनुवंशिक (जीन) संरचना
- फीनोटाइप (Phenotype)
- जीव के दिखाई देने वाले (बाहरी) लक्षण
- समयुग्मजी (Homozygous)
- जब किसी लक्षण के दोनों अलील समान हों
- विषमयुग्मजी (Heterozygous)
- जब किसी लक्षण के दोनों अलील भिन्न-भिन्न हों
मनुष्य में लिंग निर्धारण
मनुष्य की प्रत्येक कोशिका में 23 जोड़े गुणसूत्र (chromosomes) होते हैं, जिनमें से एक जोड़ा लिंग-गुणसूत्र (sex chromosome) कहलाता है। स्त्री में दो समान लिंग-गुणसूत्र (XX) होते हैं जबकि पुरुष में दो भिन्न लिंग-गुणसूत्र (XY) होते हैं। संतान का लिंग इस बात पर निर्भर करता है कि पिता से X या Y में से कौन-सा गुणसूत्र मिलता है — माता सदैव X ही देती है।
विविधता (Variation) का महत्व
प्रजनन के दौरान संतानों में माता-पिता से कुछ भिन्नता (variation) उत्पन्न होती है, जिससे एक ही जाति के सभी जीव पूरी तरह एक जैसे नहीं होते। यह विविधता जीवों को बदलते वातावरण में जीवित रहने और अनुकूलन करने में मदद करती है — यदि सभी जीव बिल्कुल एक जैसे होते, तो किसी प्रतिकूल परिस्थिति (जैसे नई बीमारी) से पूरी जाति एक साथ समाप्त हो सकती थी। इसी कारण विविधता को विकास (evolution) की एक बुनियादी शर्त माना जाता है, और यही सिद्धांत पादप प्रजनन में भी उपयोग होता है, जहाँ वैज्ञानिक विभिन्न किस्मों में से वांछित गुण (जैसे रोग-प्रतिरोधकता) चुनकर बेहतर किस्में विकसित करते हैं।
पादप प्रजनन से विकसित कुछ रोग-प्रतिरोधी किस्में
| फसल | किस्म | प्रतिरोधी रोग |
|---|---|---|
| सरसों | पूसा स्वर्णिम | श्वेत किट्ट (White rust) |
| गेहूँ | हिमगिरी | पत्ती रतुआ (Leaf rust) व हिल बंट |
पादप प्रजनन (plant breeding) में संकरण (hybridisation) व चयन (selection) द्वारा ऐसी किस्में विकसित की जाती हैं जो कीट-रोगों के प्रति प्रतिरोधी हों, कम पानी में भी टिकें और उपज भी अधिक दें।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
कक्षा गतिविधि
कक्षा में मौजूद विद्यार्थियों के किसी एक दृश्य गुण (जैसे कान की लौ जुड़ी या अलग) की गिनती करवाकर सरल चार्ट बनवाएँ — इससे प्रभावी-अप्रभावी लक्षण की अवधारणा वास्तविक उदाहरण से समझ में आती है।
शिक्षण सहायक सामग्री
मटर के लंबे/बौने पौधे या हरे/पीले बीज के चित्र दिखाकर मेंडल के प्रयोग को सरल चित्रों के माध्यम से समझाएँ।
सामान्य भ्रांति
विद्यार्थी प्रायः मानते हैं कि माता-पिता के गुण मिलकर 'मिश्रित' (blend) हो जाते हैं। स्पष्ट करें कि गुण मिश्रित नहीं होते — केवल प्रभावी गुण प्रकट होता है, जबकि अप्रभावी गुण छिपा रहता है और अगली पीढ़ी में फिर से प्रकट हो सकता है।
मूल्यांकन विचार
विद्यार्थियों से पूछें कि यदि माता-पिता दोनों की आँखें भूरी (प्रभावी) हैं, तो क्या संतान की आँखें भी हमेशा भूरी होंगी — इससे प्रभावी-अप्रभावी लक्षण की गहरी समझ जाँची जा सकती है, क्योंकि दोनों माता-पिता अप्रभावी अलील भी छिपाए रख सकते हैं और आगे संतान में यह प्रकट भी हो सकता है।
याद रखने की ट्रिक
मेंडल के तीनों नियमों को याद रखें — 'प्र-पृ-स': प्रभाविता का नियम, पृथक्करण का नियम, स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम। तीनों के पहले अक्षर प, पृ, स क्रम में याद कर लें।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 124
सरसों में “श्वेत किट्ट” रोग के प्रति प्रतिरोधक किस्म है
- Aपूसा कोमल
- Bपूसा शुभ्रा
- Cपूसा सदाबहार
- Dपूसा स्वर्णिम
व्याख्या
पादप प्रजनन (plant breeding) द्वारा विकसित रोग-प्रतिरोधी किस्मों में सरसों (Brassica, करन राई) की किस्म पूसा स्वर्णिम श्वेत किट्ट (white rust) रोग के प्रति प्रतिरोधी है। पूसा कोमल लोबिया की (बैक्टीरियल ब्लाइट प्रतिरोधी), पूसा शुभ्रा फूलगोभी की और पूसा सदाबहार मिर्च की किस्म है।
प्रश्न 138
गेहूँ में हिलबंट रोग के प्रति प्रतिरोधक किस्म है
- Aपूसा शुभ्रा
- Bआई आर आर आई
- Cपूसा सदाबहार
- Dहिमगिरी
व्याख्या
NCERT (कक्षा 9, खाद्य संसाधनों में सुधार) के अनुसार गेहूँ की किस्म 'हिमगिरी' पत्तियों के रतुआ (leaf rust) और हिल बंट रोग के प्रति प्रतिरोधी है। पूसा शुभ्रा फूलगोभी की और पूसा सदाबहार मिर्च की किस्म है, जबकि IRRI अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान का नाम है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
आनुवंशिकी (Genetics) का जनक किसे कहा जाता है?
- Aचार्ल्स डार्विन
- Bग्रेगर मेंडल
- Cलुई पाश्चर
- Dरॉबर्ट हुक
व्याख्या
ग्रेगर मेंडल ने मटर के पौधे पर प्रयोग कर आनुवंशिकता के नियम दिए, इसलिए उन्हें आनुवंशिकी का जनक कहा जाता है।
प्रश्न 2
मेंडल ने अपने प्रयोगों के लिए मुख्यतः किस पौधे को चुना था?
- Aगेहूँ
- Bमटर
- Cधान
- Dसरसों
व्याख्या
मटर के पौधे में स्पष्ट विपरीत गुण-जोड़े पाए जाते हैं और यह तेज़ी से कई पीढ़ियों तक उगाया जा सकता है, इसलिए मेंडल ने इसे चुना।
प्रश्न 3
जब कोई गुण संतान में प्रकट होकर दूसरे गुण को दबा देता है, तो प्रकट होने वाला गुण कहलाता है —
- Aअप्रभावी (recessive)
- Bप्रभावी (dominant)
- Cउत्परिवर्ती
- Dसंकर
व्याख्या
जो गुण संतान (F1) में प्रकट होकर दूसरे गुण को दबा देता है, उसे प्रभावी (dominant) गुण कहते हैं।
प्रश्न 4
जीव की आनुवंशिक (जीन) संरचना को कहते हैं —
- Aफीनोटाइप
- Bजीनोटाइप
- Cहोमोजाइगस
- Dएलील
व्याख्या
जीव की आनुवंशिक संरचना को जीनोटाइप कहते हैं, जबकि उसके बाहरी दिखाई देने वाले लक्षण फीनोटाइप कहलाते हैं।
प्रश्न 5
मेंडल के किस नियम के अनुसार युग्मक निर्माण के समय जीन-युग्म के दोनों अलील अलग-अलग हो जाते हैं?
- Aप्रभाविता का नियम
- Bपृथक्करण का नियम
- Cस्वतंत्र अपव्यूहन का नियम
- Dउत्परिवर्तन का नियम
व्याख्या
पृथक्करण के नियम के अनुसार युग्मक बनते समय जीन-युग्म के दोनों अलील अलग होकर अलग-अलग युग्मकों में जाते हैं।
प्रश्न 6
मनुष्य में संतान का लिंग निर्धारण मुख्यतः किस पर निर्भर करता है?
- Aमाता से मिलने वाला गुणसूत्र
- Bपिता से मिलने वाला X या Y गुणसूत्र
- Cसंतान की आयु
- Dवातावरण
व्याख्या
माता सदैव X गुणसूत्र देती है; पिता से X या Y में से जो गुणसूत्र मिलता है, वही संतान का लिंग तय करता है।
प्रश्न 7
सरसों की कौन-सी किस्म श्वेत किट्ट (white rust) रोग के प्रति प्रतिरोधी विकसित की गई है?
- Aपूसा कोमल
- Bहिमगिरी
- Cपूसा स्वर्णिम
- Dपूसा शुभ्रा
व्याख्या
सरसों की पूसा स्वर्णिम किस्म पादप प्रजनन द्वारा श्वेत किट्ट रोग के प्रति प्रतिरोधी विकसित की गई है।
प्रश्न 8
कक्षा में आनुवंशिकता का सरल परिचय देने के लिए सबसे उपयुक्त गतिविधि है —
- Aसीधे जटिल आनुवंशिक समीकरण पढ़ाना
- Bमाता-पिता व बच्चों के किसी दृश्य गुण (जैसे आँखों का रंग) का उदाहरण देना
- Cविषय को कक्षा 6-8 में न पढ़ाना
- Dकेवल परिभाषा रटवाना
व्याख्या
रोज़मर्रा के परिचित उदाहरण से जटिल अवधारणा को सरल बनाकर समझाना कक्षा 6-8 स्तर के लिए सबसे प्रभावी है।
प्रश्न 9
विद्यार्थियों की सामान्य भ्रांति है कि माता-पिता के गुण संतान में 'मिश्रित' हो जाते हैं। इस भ्रांति का सही स्पष्टीकरण है —
- Aयह सही है, गुण हमेशा मिश्रित होते हैं
- Bगुण मिश्रित नहीं होते; प्रभावी गुण प्रकट होता है, अप्रभावी छिपा रहता है
- Cकेवल माता के गुण प्रकट होते हैं
- Dकेवल पिता के गुण प्रकट होते हैं
व्याख्या
मेंडल के प्रभाविता के नियम के अनुसार गुण मिश्रित नहीं होते, बल्कि प्रभावी गुण प्रकट होता है और अप्रभावी गुण छिपा रहकर अगली पीढ़ी में फिर प्रकट हो सकता है।
प्रश्न 10
दो भिन्न लक्षणों (जैसे बीज का रंग और आकार) का वंशागमन एक-दूसरे से स्वतंत्र होने का सिद्धांत कौन-सा है?
- Aप्रभाविता का नियम
- Bपृथक्करण का नियम
- Cस्वतंत्र अपव्यूहन का नियम
- Dबहुगुणित नियम
व्याख्या
स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम के अनुसार दो या अधिक भिन्न लक्षणों का वंशागमन एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में आनुवंशिकता से कितने प्रश्न आते हैं?+
REET 2024 में इस टॉपिक से 2 प्रश्न पूछे गए थे, दोनों ही रोग-प्रतिरोधी फसल किस्मों पर आधारित थे।
मेंडल को 'आनुवंशिकी का जनक' क्यों कहा जाता है?+
मेंडल ने मटर के पौधे पर व्यवस्थित प्रयोग कर आनुवंशिकता के तीन नियम दिए, जो आज भी आनुवंशिकी की नींव माने जाते हैं, इसलिए उन्हें यह उपाधि दी गई है।
जीनोटाइप और फीनोटाइप में क्या अंतर है?+
जीनोटाइप जीव की आनुवंशिक (जीन) संरचना है, जबकि फीनोटाइप जीव के बाहर से दिखाई देने वाले लक्षण हैं।
मनुष्य में लड़का या लड़की होना किस पर निर्भर करता है?+
यह पिता से मिलने वाले X या Y लिंग-गुणसूत्र पर निर्भर करता है; माता सदैव X गुणसूत्र देती है, इसलिए पिता का योगदान निर्णायक होता है।
पूसा स्वर्णिम व हिमगिरी किस्में किन रोगों के प्रति प्रतिरोधी हैं?+
सरसों की पूसा स्वर्णिम किस्म श्वेत किट्ट रोग के प्रति और गेहूँ की हिमगिरी किस्म पत्ती रतुआ व हिल बंट रोग के प्रति प्रतिरोधी विकसित की गई हैं।
विविधता (variation) आनुवंशिकता में क्यों महत्वपूर्ण है?+
विविधता के कारण एक ही जाति के जीव पूरी तरह एक जैसे नहीं होते, जिससे बदलते वातावरण व नई बीमारियों के प्रति जाति के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है — यही विकास (evolution) की एक बुनियादी शर्त और आधार मानी जाती है।
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बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए