प्रकाश का परावर्तन व दर्पण
यह पेज प्रकाश के परावर्तन के नियमों, समतल व गोलीय (अवतल-उत्तल) दर्पणों में प्रतिबिम्ब निर्माण और दर्पण सूत्र को REET परीक्षा के नज़रिए से कवर करता है। REET में इस टॉपिक से गणनात्मक (numerical) और अवधारणात्मक दोनों तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए नियम याद रखने के साथ-साथ लागू करना भी आना चाहिए।
- REET 2024 में 2 प्रश्न
- कक्षा 6-8 स्तर
- 9 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में इस टॉपिक से दो प्रश्न पूछे गए — दोनों ही सीधे नियम रटने के बजाय उसे लागू करने वाले थे। पहला प्रश्न समतल दर्पण में वस्तु व प्रतिबिम्ब के बीच की दूरी निकालने का गणनात्मक प्रश्न था, और दूसरा दो लम्बवत रखे समतल दर्पणों में परावर्तन कोण जोड़ने वाला ज्यामितीय प्रश्न था। इससे स्पष्ट है कि REET में परावर्तन के नियमों और दर्पण के गुणों को केवल परिभाषा के रूप में नहीं बल्कि चित्र व संख्यात्मक स्थिति में लागू करके पूछा जाता है। अवतल-उत्तल दर्पण के प्रतिबिम्ब निर्माण, सूत्र और उपयोग से जुड़े सीधे प्रश्न भी पिछले वर्षों में REET में आते रहे हैं।
परावर्तन के नियम
जब प्रकाश किसी पॉलिश की हुई सतह (जैसे दर्पण) से टकराकर वापस लौटता है, तो इस प्रक्रिया को परावर्तन (reflection) कहते हैं। परावर्तन के दो नियम हैं: पहला, आपतन कोण (angle of incidence) सदैव परावर्तन कोण (angle of reflection) के बराबर होता है। दूसरा, आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब (normal) — तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं। ये दोनों नियम समतल और गोलीय, दोनों प्रकार के दर्पणों पर समान रूप से लागू होते हैं, और REET में दिए गए ज्यामितीय आरेख वाले प्रश्नों को हल करने की कुंजी यही दो नियम हैं।
परावर्तन दो प्रकार का होता है — नियमित परावर्तन (regular reflection) और विसरित परावर्तन (diffuse/irregular reflection)। दर्पण जैसी चिकनी व पॉलिश सतह पर समांतर आपतित किरणें परावर्तन के बाद भी समांतर ही रहती हैं, इसलिए स्पष्ट प्रतिबिम्ब बनता है — इसे नियमित परावर्तन कहते हैं। इसके विपरीत, कागज़, दीवार या लकड़ी जैसी खुरदरी सतहों पर समांतर किरणें अलग-अलग दिशाओं में बिखर जाती हैं और कोई स्पष्ट प्रतिबिम्ब नहीं बनता — इसे विसरित परावर्तन कहते हैं। ध्यान देने की बात यह है कि दोनों ही स्थितियों में परावर्तन के दोनों नियम (आपतन कोण = परावर्तन कोण) हर बिंदु पर लागू होते हैं, केवल सतह की बनावट के कारण किरणों की दिशा में अंतर आता है। विसरित परावर्तन के कारण ही हम बिना चमकदार वस्तुओं को भी हर कोण से देख पाते हैं।
समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब के गुण
| गुण | विवरण |
|---|---|
| प्रकृति | आभासी (virtual) व सीधा (erect) |
| आकार | वस्तु के बराबर (न बड़ा, न छोटा) |
| दूरी | प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर, जितनी वस्तु दर्पण के आगे है |
| विशेष गुण | पार्श्व परिवर्तन (lateral inversion) — बायाँ-दायाँ आपस में बदल जाता है |
नोट: वस्तु व प्रतिबिम्ब के बीच कुल दूरी = वस्तु की दर्पण से दूरी × 2 (क्योंकि प्रतिबिम्ब उतनी ही दूरी पीछे बनता है)।
अवतल व उत्तल दर्पण में प्रतिबिम्ब निर्माण
| वस्तु की स्थिति (अवतल दर्पण) | प्रतिबिम्ब की स्थिति | आकार व प्रकृति |
|---|---|---|
| अनंत पर | फोकस F पर | अत्यंत छोटा, बिंदु-सा, वास्तविक व उल्टा |
| वक्रता केंद्र C से परे | F व C के बीच | छोटा, वास्तविक व उल्टा |
| वक्रता केंद्र C पर | C पर ही | वस्तु के बराबर, वास्तविक व उल्टा |
| C व F के बीच | C से परे | बड़ा, वास्तविक व उल्टा |
| फोकस F पर | अनंत पर | अत्यंत बड़ा, वास्तविक व उल्टा |
| ध्रुव P व F के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा, आभासी व सीधा |
उत्तल दर्पण में वस्तु चाहे कहीं भी हो, प्रतिबिम्ब सदैव दर्पण के पीछे, आभासी, सीधा व छोटा ही बनता है — इसलिए यह सदैव पूरे क्षेत्र को एक ही प्रतिबिम्ब में दिखा पाता है।
दर्पण सूत्र व चिन्ह परिपाटी
- दर्पण सूत्र
- 1/v + 1/u = 1/f (v = प्रतिबिम्ब दूरी, u = वस्तु दूरी, f = फोकस दूरी)
- आवर्धन (magnification)
- m = -v/u = h'/h; ऋणात्मक m = वास्तविक-उल्टा प्रतिबिम्ब, धनात्मक m = आभासी-सीधा प्रतिबिम्ब
- फोकस व वक्रता त्रिज्या
- f = R/2 (फोकस दूरी, वक्रता त्रिज्या की आधी होती है)
- चिन्ह परिपाटी (सामान्य नियम)
- सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव से मापी जाती हैं; वस्तु दूरी (u) सदैव ऋणात्मक; अवतल दर्पण का f ऋणात्मक, उत्तल दर्पण का f धनात्मक
अवतल व उत्तल दर्पण के मुख्य उपयोग
- अवतल दर्पण
- शेविंग/मेकअप दर्पण (वस्तु को पास रखने पर बड़ा-सीधा प्रतिबिम्ब), टॉर्च व वाहन की हेडलाइट के परावर्तक (फोकस पर बल्ब रखकर समांतर किरणें फेंकने के लिए), दंत चिकित्सक का दर्पण, सौर कुकर (किरणों को केंद्रित कर ऊष्मा पैदा करने के लिए)
- उत्तल दर्पण
- वाहनों का साइड/रियर-व्यू मिरर, सड़क के मोड़ों व दुकानों में सुरक्षा दर्पण — दोनों में इसे इसलिए चुना जाता है क्योंकि यह सदैव सीधा प्रतिबिम्ब बनाता है और छोटे आकार में भी अधिक चौड़ा क्षेत्र दिखा देता है
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गतिविधि
कक्षा में चम्मच के दोनों ओर (उभरा व दबा हुआ भाग) चेहरा देखकर विद्यार्थियों से पूछें कि प्रतिबिम्ब कब सीधा और कब उल्टा दिखता है — यह अवतल-उत्तल सतह के व्यवहार को सहज रूप से समझा देता है।
शिक्षण सहायक सामग्री
टॉर्च, प्रोट्रैक्टर व समतल दर्पण से परावर्तन के नियम को कक्षा में स्वयं मापकर सत्यापित कराएँ; अवतल-उत्तल दर्पण के वास्तविक नमूने दिखाकर किरण आरेख बनवाएँ।
सामान्य भ्रांति
बहुत-से विद्यार्थी सोचते हैं कि समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब वस्तु से छोटा बनता है या दर्पण की सतह पर ही बनता है, या यह कि अवतल व उत्तल दर्पण में केवल आकार का अंतर होता है — प्रयोग से स्पष्ट करें कि प्रतिबिम्ब वस्तु के बराबर आकार का और दर्पण के पीछे बनता प्रतीत होता है, तथा अवतल-उत्तल दर्पण की वक्रता दिशा ही उनके भिन्न व्यवहार का कारण है।
आकलन
विद्यार्थियों को अवतल दर्पण के सामने अलग-अलग दूरी पर वस्तु रखकर परिणामी प्रतिबिम्ब का किरण-आरेख बनाने व उसकी प्रकृति (वास्तविक/आभासी, बड़ा/छोटा) लिखने को कहें।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
समतल दर्पण की दूरी वाले प्रश्नों में सीधे उत्तर मत भरें — प्रश्न अक्सर 'दर्पण से दूरी' और 'वस्तु व प्रतिबिम्ब के बीच की दूरी' में उलझाते हैं। याद रखें: वस्तु व प्रतिबिम्ब के बीच कुल दूरी सदैव वस्तु की दर्पण से दूरी की दोगुनी होती है, क्योंकि प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 136
एक व्यक्ति समतल दर्पण से 6 मीटर दूर खड़ा है । व्यक्ति तथा उसके प्रतिबिम्ब के बीच दूरी मीटर में होगी :
- A12
- B3
- C6
- D7.5
व्याख्या
समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने होती है। व्यक्ति दर्पण से 6 मीटर आगे और प्रतिबिम्ब 6 मीटर पीछे है, अतः दोनों के बीच दूरी = 6 + 6 = 12 मीटर। 6 मीटर केवल दर्पण से प्रतिबिम्ब की दूरी है।
प्रश्न 126
दो समतल दर्पण X व Y एक-दूसरे के लम्बवत रखे हैं । प्रकाश की एक किरण दर्पण X पर 30° के कोण पर आपतित है, जैसा कि नीचे चित्र में दर्शाया गया है । तो दूसरे दर्पण Y से परावर्तित होने वाली किरण का उसी दर्पण Y पर आपतित किरण से कोण होगा
चित्र: Two plane mirrors X and Y meet at a right angle. A light ray strikes mirror X at 30 degrees from the normal, reflects to mirror Y, and reflects again. Diagram added and verified: the angle of incidence on Y works out to 60 degrees, giving an angle of 120 degrees between the incident and reflected ray at Y, matching the stored answer.
- A30°
- B60°
- C90°
- D120°
व्याख्या
दर्पण X पर आपतन कोण 30° है, अतः परावर्तन कोण भी 30° होगा। दोनों दर्पण लम्बवत हैं, इसलिए परावर्तित किरण दर्पण Y पर 90° − 30° = 60° के आपतन कोण से पड़ेगी। Y से परावर्तन कोण भी 60° होगा, अतः Y पर आपतित और परावर्तित किरण के बीच कोण = 60° + 60° = 120°।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
यदि आपतन कोण 40° है, तो परावर्तन कोण कितना होगा?
- A20°
- B80°
- C50°
- D40°
व्याख्या
परावर्तन के नियम के अनुसार आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है। अतः आपतन कोण 40° होने पर परावर्तन कोण भी 40° ही होगा।
प्रश्न 2
दो समतल दर्पण एक-दूसरे के लम्बवत (90° के कोण पर) रखे गए हैं। इनके बीच रखी वस्तु के कुल कितने प्रतिबिम्ब बनेंगे?
- A2
- B3
- C4
- Dअनंत
व्याख्या
दो दर्पणों के बीच बनने वाले प्रतिबिम्बों की संख्या का सूत्र n = (360°/θ) − 1 है, जब 360/θ एक सम पूर्णांक हो। यहाँ θ = 90°, इसलिए n = (360/90) − 1 = 4 − 1 = 3 प्रतिबिम्ब बनेंगे।
प्रश्न 3
एक अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 cm है। इसकी फोकस दूरी कितनी होगी?
- A5 cm
- B40 cm
- C20 cm
- D10 cm
व्याख्या
फोकस दूरी (f) और वक्रता त्रिज्या (R) में संबंध f = R/2 होता है। अतः f = 20/2 = 10 cm।
प्रश्न 4
उत्तल दर्पण द्वारा किसी भी वस्तु का सदैव बनने वाला प्रतिबिम्ब होता है:
- Aआभासी, सीधा व छोटा
- Bवास्तविक, उल्टा व बड़ा
- Cवास्तविक, सीधा व समान आकार
- Dआभासी, उल्टा व बड़ा
व्याख्या
उत्तल दर्पण में वस्तु चाहे कहीं भी रखी हो, प्रतिबिम्ब सदैव दर्पण के पीछे, आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा ही बनता है।
प्रश्न 5
एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 10 cm है। यदि वस्तु को दर्पण से 20 cm दूरी पर रखा जाए, तो बनने वाले प्रतिबिम्ब की प्रकृति होगी:
- Aआभासी, सीधा, बड़ा
- Bवास्तविक, उल्टा, समान आकार
- Cवास्तविक, उल्टा, छोटा
- Dआभासी, सीधा, समान आकार
व्याख्या
यहाँ फोकस दूरी 10 cm है, इसलिए वक्रता केंद्र C = 2f = 20 cm पर होगा। वस्तु 20 cm अर्थात ठीक C पर रखी गई है — इस स्थिति में प्रतिबिम्ब भी C पर ही, वास्तविक, उल्टा और वस्तु के बराबर आकार का बनता है।
प्रश्न 6
समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब का बायाँ-दायाँ भाग आपस में बदल जाने की घटना कहलाती है:
- Aअपवर्तन
- Bव्यतिकरण
- Cपार्श्व परिवर्तन
- Dप्रकीर्णन
व्याख्या
समतल दर्पण में बना प्रतिबिम्ब बायाँ-दायाँ उलटा दिखाई देता है, इस घटना को पार्श्व परिवर्तन (lateral inversion) कहते हैं — यही कारण है कि दर्पण में लिखा कोई शब्द उल्टा पढ़ाई देता है।
प्रश्न 7
जिस प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है, वह कहलाता है:
- Aआभासी प्रतिबिम्ब
- Bसीधा प्रतिबिम्ब
- Cवास्तविक प्रतिबिम्ब
- Dविवर्तित प्रतिबिम्ब
व्याख्या
वास्तविक (real) प्रतिबिम्ब वह होता है जो प्रकाश किरणों के वास्तविक मिलन से बनता है और जिसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है, जबकि आभासी प्रतिबिम्ब पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 8
वाहनों के साइड/रियर-व्यू मिरर में उत्तल दर्पण का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह:
- Aवास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है
- Bवस्तु से बड़ा प्रतिबिम्ब बनाता है
- Cपीछे का चौड़ा क्षेत्र एक साथ दिखाता है
- Dकेवल पास की वस्तुएँ दिखाता है
व्याख्या
उत्तल दर्पण का प्रतिबिम्ब सदैव छोटा व आभासी बनता है, जिससे कम जगह में पीछे का अधिक व्यापक क्षेत्र (wider field of view) एक साथ दिख जाता है, जो ड्राइविंग में सुरक्षा के लिए उपयोगी है।
प्रश्न 9
किसी अवतल दर्पण के सामने वस्तु को फोकस (F) व ध्रुव (P) के बीच रखने पर बनने वाला प्रतिबिम्ब होता है:
- Aदर्पण के पीछे, आभासी व बड़ा
- Bदर्पण के आगे, वास्तविक व छोटा
- CC पर, वास्तविक व समान आकार
- Dअनंत पर
व्याख्या
अवतल दर्पण में वस्तु को P व F के बीच रखने पर प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनता है, जो आभासी, सीधा और वस्तु से बड़ा होता है — इसी सिद्धांत पर शेविंग दर्पण काम करता है।
प्रश्न 10
कक्षा 7 में विद्यार्थियों को दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण समझाने के लिए शिक्षक की सबसे उपयुक्त गतिविधि है:
- Aकेवल श्यामपट्ट पर नियम लिखकर याद कराना
- Bवास्तविक अवतल-उत्तल दर्पण, मोमबत्ती व पर्दे से प्रयोग कराना
- Cकेवल पाठ्यपुस्तक का चित्र दिखाना
- Dपरिभाषाएँ रटवाना
व्याख्या
कक्षा 6-8 स्तर पर अमूर्त अवधारणाएँ (जैसे प्रतिबिम्ब निर्माण) प्रयोगात्मक गतिविधि से बेहतर समझ में आती हैं। वास्तविक दर्पण, मोमबत्ती व पर्दे से प्रयोग कराने पर विद्यार्थी स्वयं देख पाते हैं कि प्रतिबिम्ब कब वास्तविक-उल्टा और कब आभासी-सीधा बनता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में प्रकाश के परावर्तन व दर्पण से कितने प्रश्न आते हैं?+
REET 2024 में इस टॉपिक से 2 प्रश्न पूछे गए थे। विज्ञान खंड में भौतिकी के अन्य टॉपिक (जैसे अपवर्तन-लेंस, ऊष्मा) मिलाकर भी नियमित रूप से प्रश्न आते हैं, इसलिए इसे अच्छी तरह तैयार करना फायदेमंद है।
दर्पण सूत्र क्या है?+
दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f है, जहाँ u वस्तु दूरी, v प्रतिबिम्ब दूरी और f फोकस दूरी है। चिन्ह परिपाटी के अनुसार दूरियाँ दर्पण के ध्रुव से मापी जाती हैं।
समतल दर्पण में बना प्रतिबिम्ब वास्तविक होता है या आभासी?+
समतल दर्पण में सदैव आभासी (virtual) और सीधा प्रतिबिम्ब बनता है, जो वस्तु के बराबर आकार का होता है और पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों के साइड मिरर में क्यों होता है?+
उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा व छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है, जिससे यह वस्तु से बड़ा क्षेत्र (wider field of view) दिखा पाता है — इसी कारण वाहन चालक को पीछे का अधिक क्षेत्र दिखता है।
पार्श्व परिवर्तन (lateral inversion) क्या है? नियमित व विसरित परावर्तन में क्या अंतर है?+
समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब का बायाँ भाग दायाँ और दायाँ भाग बायाँ दिखाई देता है — इसे पार्श्व परिवर्तन कहते हैं। इसके अलावा, चिकनी सतह पर समांतर किरणें परावर्तन के बाद भी समांतर रहती हैं (नियमित परावर्तन), जबकि खुरदरी सतह पर किरणें बिखर जाती हैं (विसरित परावर्तन), हालाँकि दोनों में परावर्तन के नियम समान रहते हैं।
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बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए