भारत की मिट्टियाँ एवं फसलें
भारत की प्रमुख मृदाओं (मिट्टियों) के प्रकार, उनकी विशेषताओं और उनसे जुड़ी फसलों को यह पेज REET परीक्षा के नज़रिए से समझाता है। REET 2024 में इस टॉपिक से मृदा वर्गीकरण, स्थानान्तरित कृषि के क्षेत्रीय नाम और शुष्क खेती जैसी बारीकियों पर प्रश्न पूछे गए।
- REET 2024 में 4 प्रश्न
- कक्षा 6–8 स्तर
- 10 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में इस टॉपिक से मृदाओं के प्रकार (जलोढ़ मिट्टी के खादर-बांगर भेद), स्थानान्तरित कृषि के क्षेत्रीय नाम (बेवर, पोडू, कुमारी, वालरे) और मोटे अनाज व शुष्क खेती से जुड़े आँकड़े पूछे गए। प्रश्न सुमेलन (matching) और सीधे तथ्य दोनों तरह के आते हैं, इसलिए मिट्टी-क्षेत्र-फसल के त्रिकोण को साथ में याद करें।
भारत की प्रमुख मृदाएँ
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वर्गीकरण के अनुसार भारत में मुख्यतः आठ प्रकार की मृदाएँ पाई जाती हैं — जलोढ़, काली (रेगुर), लाल-पीली, लैटेराइट, शुष्क/मरुस्थलीय, लवणीय-क्षारीय, पीटयुक्त-दलदली और वन/पर्वतीय मृदा। सबसे अधिक क्षेत्रफल पर जलोढ़ मृदा फैली है, जो सिंधु-गंगा के मैदान, नर्मदा-तापी घाटी और तटीय क्षेत्रों में मिलती है। यह नदियों द्वारा लाई गई सबसे उपजाऊ मिट्टी है, जिसमें पोटाश व फॉस्फोरिक अम्ल की मात्रा अधिक पर नाइट्रोजन व ह्यूमस कम होता है।
जलोढ़ मृदा के दो उप-भेद हैं — खादर, जो नदियों के बाढ़ क्षेत्र में हर वर्ष नई जमा होने वाली महीन व अधिक उपजाऊ मिट्टी है, और बांगर, जो ऊँचे भागों में जमा पुरानी जलोढ़ मिट्टी है। काली मृदा (रेगुर) दक्कन के पठार (महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक) में ज्वालामुखी बेसाल्ट चट्टानों के अपघटन से बनी है और कपास की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है, इसलिए इसे 'काली कपासी मिट्टी' भी कहते हैं — सूखने पर इसमें चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं जिससे यह स्वतः जुताई जैसा प्रभाव देती है।
लाल-पीली मृदा दक्षिणी भारत (तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, झारखंड) के पुराने क्रिस्टलीय चट्टानी क्षेत्रों में मिलती है; इसका लाल रंग लौह ऑक्साइड की उपस्थिति से आता है। लैटेराइट मृदा पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर भारत और तटीय कर्नाटक-केरल में अधिक वर्षा व तेज़ निक्षालन के कारण बनती है — यह चाय, कॉफी और काजू के लिए उपयुक्त है। राजस्थान, पश्चिमी गुजरात व दक्षिणी पंजाब में मिलने वाली शुष्क/मरुस्थलीय मृदा में रेत की मात्रा अधिक व नमी बहुत कम होती है, पर सिंचाई (जैसे इंदिरा गांधी नहर) मिलने पर यह भी उपजाऊ बन जाती है।
स्थानान्तरित कृषि: क्षेत्रवार नाम
| क्षेत्र/राज्य | स्थानीय नाम |
|---|---|
| मध्य प्रदेश | बेवर / दहिया |
| आंध्र प्रदेश | पोडू / पेंडा |
| पश्चिमी घाट (केरल) | कुमारी |
| दक्षिणी राजस्थान | वालरे / वाल्टरे |
| पूर्वोत्तर भारत | झूम |
स्थानान्तरित (झूम) कृषि में जंगल का एक टुकड़ा साफ कर, जलाकर थोड़े समय खेती की जाती है और उपज घटने पर दूसरे टुकड़े पर स्थानांतरित हो जाते हैं — हर क्षेत्र में इसे अलग नाम से जाना जाता है।
फसल ऋतुएँ: खरीफ, रबी व जायद
| ऋतु | बुवाई-कटाई का समय | प्रमुख फसलें |
|---|---|---|
| खरीफ | जून-जुलाई (मानसून के साथ बुवाई) से सितंबर-अक्टूबर (कटाई) | धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, कपास, जूट, सोयाबीन |
| रबी | अक्टूबर-नवंबर (बुवाई) से मार्च-अप्रैल (कटाई) | गेहूँ, चना, सरसों, जौ, मटर |
| जायद | मार्च से जून (ग्रीष्मकाल, सिंचाई पर निर्भर) | तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, मूंग जैसी सब्ज़ियाँ व फल |
शुष्क खेती और मोटे अनाज
भारत में जिन क्षेत्रों में वार्षिक वर्षा 75 सेंटीमीटर से कम होती है, वहाँ नमी-संरक्षण तकनीकों के सहारे शुष्क खेती (dry farming) की जाती है। इसमें बाजरा, ज्वार, चना, मूंग और ग्वार जैसी कम पानी में उगने वाली फसलें प्रमुख हैं। इसके विपरीत, जिन इलाकों में वर्षा अधिक होती है वहाँ सिंचित या आर्द्र भूमि खेती प्रचलित है।
मोटे अनाजों (मिलेट्स) में बाजरा सबसे प्रमुख है, और राजस्थान इसका सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है — कुल मोटे अनाज उत्पादन में भी राजस्थान देश में अग्रणी है। यह तथ्य REET परीक्षार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर छात्र पंजाब या हरियाणा को (जो गेहूँ-धान के लिए प्रसिद्ध हैं) मोटे अनाज का सबसे बड़ा उत्पादक मान बैठते हैं।
प्रमुख फसलों के अग्रणी उत्पादक राज्य
- गेहूँ
- उत्तर प्रदेश (देश का सबसे बड़ा उत्पादक), उसके बाद मध्य प्रदेश व पंजाब
- चावल
- पश्चिम बंगाल
- गन्ना
- उत्तर प्रदेश
- मोटे अनाज (बाजरा सहित)
- राजस्थान
हरित क्रांति का प्रभाव
1960 के दशक के मध्य में हरित क्रांति (Green Revolution) के दौरान उच्च उत्पादन क्षमता वाली गेहूँ व चावल की किस्मों, रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और सुनिश्चित सिंचाई के व्यापक प्रयोग से पंजाब, हरियाणा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खाद्यान्न उत्पादन में भारी वृद्धि हुई। इसी कारण आज भी पंजाब-हरियाणा गेहूँ व धान की गहन खेती के लिए जाने जाते हैं, जबकि वर्षा-सिंचित व असमान भूमि वाले पूर्वी व मध्य भारत में इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहा।
हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया, लेकिन इसके साथ ही भूजल के अतिदोहन, मिट्टी की उर्वरता में गिरावट और फसल-विविधता में कमी जैसी चुनौतियाँ भी सामने आईं — इसलिए आजकल संतुलित उर्वरक प्रयोग व वर्षा-जल संचयन जैसे उपायों पर ज़ोर दिया जा रहा है।
मृदा अपरदन और संरक्षण के उपाय
तेज़ हवा, बहते पानी और गलत कृषि पद्धतियों से ऊपरी उपजाऊ मिट्टी की परत बह जाने या उड़ जाने की प्रक्रिया को मृदा अपरदन (Soil Erosion) कहते हैं। इसे रोकने के लिए ढलान वाले खेतों में सीढ़ीनुमा खेती (terrace farming), पहाड़ी ढलानों पर बाँध बनाकर पानी का बहाव रोकना, समोच्च रेखा पर जुताई (contour ploughing) और वृक्षारोपण जैसे उपाय अपनाए जाते हैं। शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में हवा से होने वाले अपरदन को रोकने के लिए खेतों के किनारे वृक्षों की कतार (शेल्टर बेल्ट) लगाई जाती है, जैसा राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में किया जाता है।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
कक्षा गतिविधि
अलग-अलग प्रकार की मिट्टी के नमूने (जलोढ़, काली, लाल, रेतीली) कक्षा में लाकर छात्रों को छूकर, रंग व बनावट के आधार पर पहचान करवाएँ।
शिक्षण सहायक सामग्री
भारत के मानचित्र पर मृदा-प्रकारों को रंगों से चिह्नित करता एक चार्ट, और खरीफ-रबी-जायद फसलों की तस्वीरों वाला पोस्टर उपयोगी रहता है।
सामान्य भ्रांति
छात्र अक्सर सोचते हैं कि सभी शुष्क क्षेत्रों में खेती संभव नहीं — जबकि उचित सिंचाई (जैसे नहर) मिलने पर मरुस्थलीय मिट्टी भी उपजाऊ बन सकती है, जैसा राजस्थान की इंदिरा गांधी नहर परियोजना में हुआ।
आकलन विचार
छात्रों से अपने घर/गाँव के आसपास उगने वाली फसलों की सूची बनवाकर पूछें कि वह किस ऋतु (खरीफ/रबी/जायद) की फसल है और किस मिट्टी में उगती है।
याद रखने की ट्रिक
स्थानांतरित कृषि के नाम राज्य के साथ जोड़कर याद करें: 'मध्य प्रदेश-बेवर, आंध्र प्रदेश-पोडू, पश्चिमी घाट-कुमारी, दक्षिणी राजस्थान-वालरे'। खादर-बांगर याद रखें: 'खादर मतलब खेत की नई मिट्टी, बांगर मतलब बहुत पुरानी'।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 95
निम्नलिखित स्थानान्तरित कृषि व उनके क्षेत्र को सुमेलित कीजिए : स्थानान्तरित कृषि – क्षेत्र (1) बेवर – (a) मध्य प्रदेश (2) पोडू – (b) आंध्र प्रदेश (3) कुमारी – (c) पश्चिमी घाट (4) वालरे – (d) दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान कूट: (1) (2) (3) (4)
- A(a) (d) (c) (b)
- B(a) (b) (c) (d)
- C(d) (c) (b) (a)
- D(c) (a) (b) (d)
व्याख्या
स्थानान्तरित (झूम) कृषि को भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों से जाना जाता है। NCERT के अनुसार मध्य प्रदेश में इसे 'बेवर' (दहिया), आंध्र प्रदेश में 'पोडू' (पेंडा), पश्चिमी घाट में 'कुमारी' और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में 'वालरे' (वाल्टरे) कहते हैं। अतः सही सुमेल 1-a, 2-b, 3-c, 4-d यानी विकल्प (B) है।
प्रश्न 124
खादर और बांगर भारत में कौन-सी मृदा के उदाहरण हैं ?
- Aकाली
- Bलाल-पीली
- Cशुष्क
- Dजलोढ़
व्याख्या
खादर और बांगर जलोढ़ मृदा के प्रकार हैं। खादर नदियों के बाढ़ क्षेत्र में हर वर्ष जमा होने वाली नई, महीन और अधिक उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी है, जबकि बांगर ऊँचे भागों में जमा पुरानी जलोढ़ मिट्टी है। ये उत्तरी मैदान में विशेष रूप से पाई जाती हैं।
प्रश्न 134
भारत में मोटे अनाज का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है ?
- Aराजस्थान
- Bपंजाब
- Cहरियाणा
- Dगुजरात
व्याख्या
मोटे अनाज (मिलेट्स) में बाजरा प्रमुख है और राजस्थान देश में बाजरे का सबसे बड़ा उत्पादक है; कुल मोटे अनाज उत्पादन में भी राजस्थान अग्रणी है। पंजाब और हरियाणा मुख्यतः गेहूँ-धान के लिए जाने जाते हैं।
प्रश्न 93
भारत में शुष्क खेती की जाती है
- A75 सेमी से कम वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र में
- B75 से 100 सेमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र में
- C100 से 110 सेमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र में
- D110 से 140 सेमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र में
व्याख्या
भारत में शुष्क खेती (dry farming) उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ वार्षिक वर्षा 75 सेमी से कम होती है। ऐसे क्षेत्रों में नमी संरक्षण की तकनीकों के साथ बाजरा, ज्वार, मूंग, चना, ग्वार जैसी कम पानी वाली फसलें उगाई जाती हैं। 75 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में आर्द्र भूमि खेती (wetland farming) या सिंचित खेती प्रमुख होती है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
जलोढ़ मिट्टी सबसे अधिक किस क्षेत्र में पाई जाती है?
- Aदक्कन का पठार
- Bसिंधु-गंगा का मैदान
- Cपश्चिमी घाट
- Dथार मरुस्थल
व्याख्या
जलोढ़ मिट्टी मुख्यतः नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी है, जो सिंधु-गंगा के मैदान में सबसे व्यापक रूप से फैली है।
प्रश्न 2
काली मिट्टी (रेगुर) किस फसल के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है?
- Aचाय
- Bकपास
- Cकाजू
- Dचावल
व्याख्या
काली मिट्टी में नमी धारण क्षमता अधिक होती है, जो कपास की खेती के लिए आदर्श मानी जाती है; इसे 'काली कपासी मिट्टी' भी कहते हैं।
प्रश्न 3
खादर और बांगर किस प्रकार की मृदा के भेद हैं?
- Aकाली मिट्टी
- Bलाल-पीली मिट्टी
- Cजलोढ़ मिट्टी
- Dलैटेराइट मिट्टी
व्याख्या
खादर (नई) और बांगर (पुरानी) जलोढ़ मिट्टी के दो उप-भेद हैं, जो उत्तरी मैदान में पाए जाते हैं।
प्रश्न 4
लैटेराइट मृदा मुख्यतः किन फसलों के लिए उपयुक्त है?
- Aगेहूँ, चना
- Bचाय, कॉफी, काजू
- Cकपास, ज्वार
- Dगन्ना, धान
व्याख्या
लैटेराइट मृदा पश्चिमी घाट व तटीय क्षेत्रों में अधिक वर्षा से बनती है और चाय, कॉफी, काजू जैसी बागानी फसलों के लिए उपयुक्त है।
प्रश्न 5
खरीफ फसल की कटाई सामान्यतः किस समय होती है?
- Aगर्मी में
- Bवर्षा शुरू होते ही
- Cसितंबर-अक्टूबर में
- Dवसंत ऋतु में
व्याख्या
खरीफ फसलें जून-जुलाई में मानसून के साथ बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर में काटी जाती हैं।
प्रश्न 6
रबी फसलों की बुवाई का समय है
- Aजून-जुलाई
- Bअक्टूबर-नवंबर
- Cमार्च-अप्रैल
- Dजनवरी
व्याख्या
रबी फसलें अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती हैं और मार्च-अप्रैल में काटी जाती हैं; गेहूँ, चना, सरसों इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रश्न 7
'पोडू' नामक स्थानांतरित कृषि मुख्यतः किस राज्य में प्रचलित है?
- Aमध्य प्रदेश
- Bआंध्र प्रदेश
- Cराजस्थान
- Dकेरल
व्याख्या
आंध्र प्रदेश में स्थानांतरित कृषि को 'पोडू' या 'पेंडा' कहा जाता है।
प्रश्न 8
भारत में शुष्क खेती किस वार्षिक वर्षा सीमा से कम वाले क्षेत्रों में की जाती है?
- A50 सेमी
- B75 सेमी
- C100 सेमी
- D125 सेमी
व्याख्या
75 सेमी से कम वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में नमी-संरक्षण तकनीकों के साथ शुष्क खेती की जाती है।
प्रश्न 9
कक्षा 7 के छात्रों को मृदा के प्रकार पहचानना सिखाने का सबसे प्रभावी तरीका है
- Aकेवल परिभाषा याद करवाना
- Bवास्तविक मिट्टी के नमूनों से स्पर्श व अवलोकन गतिविधि करवाना
- Cचित्र दिखाकर बिना चर्चा के आगे बढ़ जाना
- Dटॉपिक छोड़ देना
व्याख्या
मूर्त (concrete) अनुभव से सीखना कक्षा 6-8 के छात्रों के लिए अमूर्त परिभाषाओं की तुलना में अधिक प्रभावी होता है, विशेषकर भूगोल जैसे अवलोकन-आधारित विषयों में।
प्रश्न 10
यदि छात्र मरुस्थलीय मिट्टी को हमेशा 'अनुपजाऊ' मानने की भ्रांति रखते हैं, तो शिक्षक को क्या करना चाहिए?
- Aभ्रांति को नज़रअंदाज करना
- Bसिंचाई परियोजनाओं के उदाहरण से स्पष्ट करना कि सिंचाई मिलने पर यह मिट्टी भी उपजाऊ बनती है
- Cछात्र को गलत बताकर आगे बढ़ जाना
- Dविषय दोबारा न पढ़ाना
व्याख्या
वास्तविक उदाहरणों (जैसे इंदिरा गांधी नहर परियोजना) से गलत धारणाओं को सुधारना प्रभावी शिक्षण-शास्त्र का हिस्सा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में भारत की मिट्टियों से कितने प्रश्न आते हैं?+
REET 2024 में इस टॉपिक से लगभग 3-4 प्रश्न पूछे गए, विशेषकर मृदा वर्गीकरण और स्थानान्तरित कृषि पर।
खादर और बांगर में क्या अंतर है?+
खादर नदी के बाढ़ क्षेत्र की नई उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी है, जबकि बांगर ऊँचे भाग की पुरानी जलोढ़ मिट्टी है।
भारत की सबसे उपजाऊ मिट्टी कौन-सी मानी जाती है?+
जलोढ़ मिट्टी, जो सिंधु-गंगा के मैदान में सबसे व्यापक रूप से फैली है।
शुष्क खेती किन क्षेत्रों में होती है?+
75 सेमी से कम वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में, जहाँ बाजरा-ज्वार जैसी कम पानी वाली फसलें उगाई जाती हैं।
भारत में मोटे अनाज (बाजरा) का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है?+
राजस्थान, जो कुल मोटे अनाज उत्पादन में भी देश में अग्रणी है।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए