परिचय
ऊर्जा (Energy) क्षेत्र RAS प्रारंभिक परीक्षा के अर्थव्यवस्था खंड का एक महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि यह किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है — औद्योगिक उत्पादन, कृषि सिंचाई, परिवहन और घरेलू उपभोग, सभी ऊर्जा की निरंतर उपलब्धता पर निर्भर करते हैं। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है, और जुलाई 2026 तक देश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता लगभग 552 GW तक पहुँच चुकी है। यह विषय दो आयामों को जोड़ता है — पहला, पारंपरिक ऊर्जा ढाँचा (कोयला, तापीय विद्युत, तेल-गैस, विद्युत क्षेत्र की संरचना) और दूसरा, तीव्र गति से बदलता नवीकरणीय एवं जलवायु-संबंधी परिदृश्य (सौर मिशन, नेट-जीरो 2070, हरित हाइड्रोजन)। RAS अभ्यर्थियों के लिए दोनों पक्षों — स्थायी संस्थागत तथ्य और वर्तमान योजनाएँ/लक्ष्य — पर समान रूप से पकड़ आवश्यक है।
मुख्य अवधारणाएँ
1. विद्युत क्षेत्र की संरचना: उत्पादन, पारेषण एवं वितरण
भारत का विद्युत क्षेत्र तीन कड़ियों में संगठित है — उत्पादन (Generation), पारेषण (Transmission) और वितरण (Distribution)। उत्पादन केंद्रीय क्षेत्र (NTPC, NHPC, NPCIL जैसे केंद्रीय PSU), राज्य क्षेत्र (राज्य विद्युत उत्पादन निगम) और निजी क्षेत्र — तीनों द्वारा किया जाता है, जिसमें निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी उदारीकरण के बाद से निरंतर बढ़ी है। पारेषण का दायित्व मुख्यतः केंद्रीय पारेषण उपयोगिता (Central Transmission Utility) के रूप में कार्यरत पावरग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (POWERGRID) तथा राज्य पारेषण उपयोगिताओं पर है। ऐतिहासिक रूप से भारत पाँच क्षेत्रीय ग्रिडों (उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी, पश्चिमी, उत्तर-पूर्वी) में बँटा था; दिसंबर 2013 में दक्षिणी ग्रिड को शेष चार ग्रिडों से जोड़कर पूरे देश को "एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक आवृत्ति" (One Nation, One Grid, One Frequency) के अंतर्गत एक ही समकालिक (Synchronous) राष्ट्रीय ग्रिड में एकीकृत कर दिया गया — जो विश्व के सबसे बड़े एकीकृत ग्रिडों में से एक है।
वितरण की जिम्मेदारी मुख्यतः राज्य-स्वामित्व वाली विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) पर है, यद्यपि दिल्ली (टाटा पावर, BSES) और मुंबई (अदाणी इलेक्ट्रिसिटी, टाटा पावर) जैसे कुछ शहरों में निजी वितरण कंपनियाँ भी कार्यरत हैं। विद्युत अधिनियम, 2003 ने इस क्षेत्र को उदारीकृत करते हुए उत्पादन को लाइसेंस-मुक्त किया, खुली पहुँच (Open Access) की व्यवस्था दी, तथा केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) एवं राज्य विद्युत नियामक आयोगों (SERC) की स्थापना कर टैरिफ निर्धारण को नियामक ढाँचे में लाया। हाल के वर्षों में विद्युत क्षेत्र के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के रूप में इंडिया एनर्जी स्टैक (India Energy Stack - IES) विकसित किया जा रहा है, जो आधार/UPI मॉडल की तर्ज पर उपभोक्ताओं, DISCOMs, उत्पादकों एवं नियामकों के लिए एकीकृत व परस्पर-संचालित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगा।
2. कोयला एवं तापीय ऊर्जा
कोयला भारत की ऊर्जा सुरक्षा की आधारशिला बना हुआ है — देश की कुल विद्युत उत्पादन में कोयला-आधारित तापीय विद्युत का योगदान लगभग 74% है। भारत के पास विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा कोयला भंडार है और यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उपभोक्ता देश है। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL), कोयला मंत्रालय के अंतर्गत, विश्व की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी है और घरेलू उत्पादन के बड़े हिस्से के लिए जिम्मेदार है। कोयला क्षेत्र में सुधार की दिशा में कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 तथा 2020 में शुरू की गई वाणिज्यिक कोयला खनन (Commercial Coal Mining) नीति महत्वपूर्ण कदम हैं, जिसके अंतर्गत निजी कंपनियों को बिना किसी अंत-उपयोग प्रतिबंध के कोयला खनन व बिक्री की अनुमति दी गई — इससे पहले निजी क्षेत्र केवल अपने उपयोग (Captive) हेतु ही कोयला खनन कर सकता था।
तापीय विद्युत का प्रभुत्व होने के बावजूद भारत अपनी घरेलू माँग को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण मात्रा में कोयला आयात करता है, विशेषकर उच्च-गुणवत्ता (कोकिंग) कोयले के लिए, जो इस्पात उद्योग हेतु आवश्यक है। कोयला, विद्युत सहित आठ प्रमुख अवसंरचना उद्योगों ("कोर इंडस्ट्रीज़") में शामिल है, जिनका औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में लगभग 40% भारांश है — इनमें रिफाइनरी उत्पाद (28.04%), विद्युत (19.85%), इस्पात (17.92%) और कोयला (10.33%) सबसे अधिक भारांश वाले घटक हैं।
3. नवीकरणीय ऊर्जा: सौर, पवन एवं जल विद्युत
जुलाई 2026 तक भारत की कुल गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 300.50 GW तक पहुँच चुकी है, जो कुल स्थापित विद्युत क्षमता के 54% से अधिक है; इसमें सौर क्षमता 164.59 GW और पवन क्षमता 58.14 GW है। इस उपलब्धि के साथ भारत कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में विश्व में तीसरे स्थान पर, स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में तीसरे स्थान पर, तथा स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है। स्रोतवार, सौर ऊर्जा सबसे आगे है।
सौर ऊर्जा के विस्तार का मूल आधार जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (JNNSM / राष्ट्रीय सौर मिशन) है, जो जनवरी 2010 में शुरू किया गया और जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAPCC) के आठ राष्ट्रीय मिशनों में से एक है; इसका मूल लक्ष्य 2022 तक 20 GW सौर क्षमता था, जिसे 2015 में संशोधित कर 100 GW (60 GW ग्राउंड-माउंटेड + 40 GW रूफटॉप) कर दिया गया। इसे आगे बढ़ाने वाली प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं — पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (फरवरी 2024), जिसका परिव्यय ₹75,021 करोड़ है और जिसका लक्ष्य 1 करोड़ परिवारों में रूफटॉप सौर संस्थापन व 30 GW रूफटॉप क्षमता वृद्धि है (लाभार्थियों को प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलती है, अनुमानित वार्षिक उत्सर्जन कमी लगभग 720 लाख टन CO2); पीएम-कुसुम योजना (2019), जो कृषि के सौरकरण हेतु सोलर पंप व विकेंद्रीकृत सौर संयंत्र उपलब्ध कराती है; सोलर पार्क योजना (2014), जो बड़े ग्रिड-कनेक्टेड सौर संयंत्रों हेतु भूमि, ट्रांसमिशन व अन्य स्वीकृतियाँ सुलभ कराती है; तथा पीएम-जनमन सौर विद्युतीकरण (2023), जो अति संवेदनशील जनजातीय समूहों (PVTGs) के परिवारों का सौर विद्युतीकरण सुनिश्चित करती है।
पवन ऊर्जा में भारत का विकास मुख्यतः गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे तटीय व अर्ध-शुष्क राज्यों में केंद्रित है, जबकि जल विद्युत का बड़ा हिस्सा हिमालयी राज्यों व नदी घाटी परियोजनाओं से आता है। हरित हाइड्रोजन को भविष्य के ऊर्जा स्रोत के रूप में बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (जनवरी 2023, नोडल मंत्रालय: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय-MNRE) शुरू किया गया है, जिसका 2030 तक लक्ष्य 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) प्रतिवर्ष हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता स्थापित करना है, ताकि भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग व निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाया जा सके। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत ने फ्रांस के साथ मिलकर 2015 में पेरिस COP21 सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance - ISA) की शुरुआत की, जिसका मुख्यालय गुरुग्राम (हरियाणा) में है।
4. ऊर्जा मिश्रण, लक्ष्य एवं नेट-जीरो 2070
नवंबर 2021 में ग्लासगो में आयोजित COP26 जलवायु सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने भारत के लिए पंचामृत (Panchamrit) नामक पाँच जलवायु प्रतिबद्धताएँ घोषित कीं — (i) 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता स्थापित करना, (ii) 2030 तक अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करना, (iii) 2030 तक अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में 1 अरब टन की कमी लाना, (iv) 2030 तक अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता में 2005 के स्तर की तुलना में 45% की कमी लाना, तथा (v) 2070 तक नेट-जीरो (शुद्ध-शून्य) उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करना। यह लक्ष्य विकसित देशों (जिनमें से अधिकांश ने 2050 नेट-जीरो का लक्ष्य रखा है) की तुलना में लंबी समय-सीमा रखता है, जो भारत के विकासशील देश होने तथा "साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व" (CBDR) के सिद्धांत को दर्शाता है।
भारत के समग्र ऊर्जा मिश्रण में जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) का प्रभुत्व अभी भी बना हुआ है, किंतु नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ रही है — कुल स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी पहले ही 54% से अधिक हो चुकी है (यद्यपि वास्तविक विद्युत उत्पादन में यह हिस्सेदारी क्षमता कारक/Capacity Factor में अंतर के कारण अपेक्षाकृत कम है, क्योंकि सौर व पवन ऊर्जा रुक-रुक कर उपलब्ध होती है)। इसी कारण ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ (Battery Energy Storage Systems - BESS), पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो परियोजनाएँ, तथा ग्रिड आधुनिकीकरण को नीतिगत प्राथमिकता दी जा रही है।
- 2003विद्युत अधिनियम: उत्पादन लाइसेंस-मुक्त, CERC/SERC
- 2010राष्ट्रीय सौर मिशन (NAPCC का मिशन)
- दिसंबर 2013एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक आवृत्ति
- 2015UDAY (नवंबर); ISA की शुरुआत (COP21)
- नवंबर 2021COP26: पंचामृत व नेट-जीरो 2070
- जनवरी 2023राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
- फरवरी 2024पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना
5. UDAY योजना एवं ऊर्जा सुरक्षा
उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (UDAY - Ujwal DISCOM Assurance Yojana) नवंबर 2015 में विद्युत मंत्रालय द्वारा शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य वित्तीय रूप से संकटग्रस्त राज्य विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) का वित्तीय एवं परिचालनात्मक कायाकल्प करना था। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकारों ने अपनी DISCOMs के 75% ऋण को अपने ऊपर ले लिया — 50% चरण में 2015-16 में और शेष 25% 2016-17 में — जिसे UDAY बॉन्ड के रूप में जारी किया गया। योजना का लक्ष्य औसत आपूर्ति लागत (ACS) और औसत राजस्व प्राप्ति (ARR) के बीच के अंतर को समाप्त करना तथा पारेषण एवं वाणिज्यिक (AT&C) हानियों को घटाकर 15% तक लाना था। बाद में DISCOMs के सुधार हेतु इसे पुनरीक्षित वितरण क्षेत्र योजना (Revamped Distribution Sector Scheme - RDSS, 2021) द्वारा आगे बढ़ाया गया, जो स्मार्ट मीटरिंग व अवसंरचना उन्नयन पर केंद्रित है।
ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) का आशय है — किसी देश की अपनी जनसंख्या व अर्थव्यवस्था की ऊर्जा आवश्यकताओं को बिना किसी व्यवधान के, वहनीय कीमतों पर, विविध व विश्वसनीय स्रोतों से पूरा करने की क्षमता। भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति के प्रमुख स्तंभ हैं — आयात स्रोतों का विविधीकरण, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) का निर्माण, घरेलू अन्वेषण को बढ़ावा (जैसे खुला क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति-OALP, हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति-HELP 2016), नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार, ऊर्जा दक्षता उपाय, तथा परमाणु ऊर्जा क्षमता में वृद्धि। भारत की रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार निगम (ISPRL) ने विशाखापत्तनम, मंगलौर और पादुर में भूमिगत भंडारण सुविधाएँ स्थापित की हैं, जो आपातकालीन आपूर्ति व्यवधान की स्थिति में कुछ दिनों की खपत के बराबर कच्चा तेल संग्रहीत रखती हैं।
6. परमाणु ऊर्जा एवं तेल-गैस क्षेत्र
भारत की परमाणु ऊर्जा का संचालन मुख्यतः न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) द्वारा किया जाता है। वर्तमान में परमाणु ऊर्जा की स्थापित क्षमता लगभग 8.8 GW है, जो कुल विद्युत क्षमता का एक छोटा किंतु स्थिर हिस्सा है। बजट 2025 में सरकार ने विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन की घोषणा की, जिसके अंतर्गत 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है तथा लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (Small Modular Reactors - SMRs) के अनुसंधान हेतु ₹20,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। निजी क्षेत्र की भागीदारी सुगम बनाने के लिए दिसंबर 2025 में पारित SHANTI अधिनियम, 2025 ने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 तथा असैन्य दायित्व परमाणु क्षति अधिनियम, 2010 को निरस्त कर नागरिक परमाणु क्षेत्र के लिए एकीकृत कानून बनाया है।
तेल एवं गैस क्षेत्र में ओएनजीसी (ONGC) भारत की सबसे बड़ी घरेलू कच्चा तेल व प्राकृतिक गैस उत्पादक कंपनी है, जबकि इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) व हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) प्रमुख रिफाइनिंग व विपणन कंपनियाँ हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 85% से अधिक भाग आयात के माध्यम से पूरा करता है, जिससे वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत की व्यापार व चालू खाता स्थिति को सीधे प्रभावित करता है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) मई 2016 में शुरू की गई, जिसका उद्देश्य गरीब व वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन (LPG) उपलब्ध कराना तथा परंपरागत चूल्हों से होने वाले वायु प्रदूषण को घटाना था। प्रारंभिक लक्ष्य 5 करोड़ LPG कनेक्शन का था (बाद में बढ़ाकर 8 करोड़ किया गया); उज्ज्वला 2.0 (2021) में अतिरिक्त कनेक्शन जोड़े गए और कुल कनेक्शन 10 करोड़ से अधिक हो गए। इसके समानांतर पाइप्ड प्राकृतिक गैस (PNG) व सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क का विस्तार पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) की देखरेख में किया जा रहा है, जिसका लक्ष्य ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को वर्तमान लगभग 6-7% से बढ़ाकर 2030 तक 15% करना है; इस दिशा में पूर्वी भारत को जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा परियोजना (गैस पाइपलाइन) उल्लेखनीय है।
7. ऊर्जा दक्षता: BEE एवं PAT योजना
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency - BEE) की स्थापना 1 मार्च 2002 को ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के अंतर्गत विद्युत मंत्रालय के तहत की गई थी, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊर्जा तीव्रता को घटाने हेतु नीतियाँ व रणनीतियाँ विकसित की जा सकें। इस अधिनियम में 2022 में महत्वपूर्ण संशोधन (Energy Conservation (Amendment) Act, 2022) किया गया, जिसके अंतर्गत कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (Carbon Credit Trading Scheme) की शुरुआत की गई और बड़े उपभोक्ताओं के लिए गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को अनिवार्य बनाया गया।
BEE की सबसे महत्वपूर्ण पहल PAT योजना (Perform, Achieve, Trade) है, जिसे 2012 में राष्ट्रीय उन्नत ऊर्जा दक्षता मिशन (NMEEE) के अंतर्गत शुरू किया गया — यह भी NAPCC के आठ मिशनों में से एक है। यह एक बाज़ार-आधारित तंत्र है जिसके अंतर्गत ऊर्जा-गहन उद्योगों (जैसे तापीय विद्युत, इस्पात, सीमेंट, उर्वरक, कपड़ा) को विशिष्ट ऊर्जा खपत लक्ष्य दिए जाते हैं; जो इकाइयाँ अपने लक्ष्य से अधिक ऊर्जा बचत करती हैं, उन्हें अतिरिक्त बचत के लिए ऊर्जा बचत प्रमाणपत्र (Energy Saving Certificates - ESCerts) मिलते हैं, जिन्हें वे उन इकाइयों को बेच सकती हैं जो अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पातीं — इस तरह यह योजना ऊर्जा दक्षता को लाभदायक बनाती है। इसके अतिरिक्त BEE उपकरणों के लिए स्टार रेटिंग / स्टैंडर्ड्स एंड लेबलिंग (S&L) कार्यक्रम चलाता है (जैसे रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर पर स्टार रेटिंग), तथा ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (EESL) के माध्यम से उजाला योजना (UJALA) के अंतर्गत सस्ते LED बल्बों का वितरण कर घरेलू ऊर्जा खपत घटाने में सहायक रहा है।
| योजना / मिशन | वर्ष | मंत्रालय / संस्था | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| राष्ट्रीय सौर मिशन (JNNSM) | 2010 | MNRE | सौर क्षेत्र का समग्र विकास (मूल लक्ष्य 20 GW, 2015 में 100 GW) |
| पीएम-कुसुम | 2019 | MNRE | किसानों के लिए सोलर पंप व सौर संयंत्र |
| UDAY | नवंबर 2015 | विद्युत मंत्रालय | DISCOMs का वित्तीय पुनरुद्धार (75% ऋण राज्यों द्वारा अधिग्रहीत) |
| RDSS | 2021 | विद्युत मंत्रालय | स्मार्ट मीटरिंग व वितरण अवसंरचना उन्नयन |
| राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन | जनवरी 2023 | MNRE | 2030 तक 5 MMT प्रतिवर्ष हरित हाइड्रोजन |
| पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना | फरवरी 2024 | MNRE | 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सौर, 300 यूनिट/माह मुफ्त बिजली |
| PMUY (उज्ज्वला) | मई 2016 | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय | गरीब परिवारों को LPG कनेक्शन |
| PAT योजना | 2012 | BEE (विद्युत मंत्रालय) | ऊर्जा-गहन उद्योगों में ऊर्जा बचत का व्यापार (ESCerts) |
महत्वपूर्ण तथ्य
- कुल स्थापित विद्युत क्षमता (जुलाई 2026): लगभग 552 GW।
- गैर-जीवाश्म क्षमता (जुलाई 2026): 300.50 GW (कुल का 54% से अधिक); सौर 164.59 GW, पवन 58.14 GW; वैश्विक रैंक — कुल नवीकरणीय में तीसरा, सौर में तीसरा, पवन में चौथा।
- कोयला विद्युत उत्पादन में ~74% योगदान देता है; भारत का कोयला भंडार विश्व में 5वाँ सबसे बड़ा; कोयला उपभोक्ता के रूप में विश्व में दूसरा सबसे बड़ा।
- राष्ट्रीय सौर मिशन (JNNSM): जनवरी 2010; NAPCC के 8 मिशनों में से एक; मूल लक्ष्य 2022 तक 20 GW (2015 में संशोधित कर 100 GW)।
- पीएम सूर्य घर योजना (फरवरी 2024): परिव्यय ₹75,021 करोड़; लक्ष्य 1 करोड़ रूफटॉप संस्थापन/30 GW क्षमता; 300 यूनिट/माह मुफ्त बिजली।
- नेट-जीरो लक्ष्य वर्ष 2070 (COP26, ग्लासगो, नवंबर 2021 में घोषित "पंचामृत" के अंतर्गत); 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता व 50% ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से।
- UDAY योजना: नवंबर 2015; DISCOMs के 75% ऋण का राज्यों द्वारा अधिग्रहण; बाद में RDSS (2021) द्वारा आगे बढ़ाया गया।
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: जनवरी 2023; नोडल मंत्रालय MNRE; 2030 तक 5 MMT प्रतिवर्ष उत्पादन लक्ष्य।
- बजट 2025 में परमाणु ऊर्जा मिशन: 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता का लक्ष्य; SMR अनुसंधान हेतु ₹20,000 करोड़ आवंटित। दिसंबर 2025 में SHANTI अधिनियम ने 1962 और 2010 के अधिनियम निरस्त किए।
- PMUY (उज्ज्वला योजना): मई 2016 शुरू; प्रारंभिक लक्ष्य 5 करोड़ (बाद में 8 करोड़); उज्ज्वला 2.0 (2021) के बाद कुल 10 करोड़+ कनेक्शन।
- BEE की स्थापना: 1 मार्च 2002, ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के अंतर्गत; PAT योजना 2012 में NMEEE के तहत शुरू।
परीक्षा टिप्स
- क्षमता (GW) और वैश्विक रैंक के आँकड़े समय के साथ अपडेट होते रहते हैं — इन्हें सटीक संख्या के बजाय सापेक्ष प्रवृत्ति (भारत नवीकरणीय ऊर्जा में शीर्ष 3-4 देशों में) के रूप में याद रखें, और परीक्षा से ठीक पहले नवीनतम आधिकारिक आँकड़े (MNRE/केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण) अवश्य जाँचें।
- योजनाओं के नाम, वर्ष व नोडल मंत्रालय को आपस में न मिलाएँ — जैसे JNNSM (2010, NAPCC मिशन) बनाम पीएम सूर्य घर (2024, रूफटॉप-केंद्रित) बनाम राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (2023) — तीनों अलग-अलग हैं किंतु अक्सर एक साथ भ्रमित किए जाते हैं।
- UDAY व RDSS के बीच अंतर स्पष्ट रखें — UDAY (2015) मुख्यतः DISCOMs के ऋण-बोझ को कम करने पर केंद्रित थी, जबकि RDSS (2021) अवसंरचना उन्नयन व स्मार्ट मीटरिंग पर केंद्रित है।
"500-50-1-45-70" याद रखें — 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता, 50% ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से, कार्बन उत्सर्जन में 1 अरब टन की कमी, कार्बन तीव्रता में 45% की कमी (2005 आधार वर्ष), तथा 70 यानी वर्ष 2070 तक नेट-जीरो। ये पाँचों अंक क्रमवार पढ़ने पर "पंचामृत" के पाँचों वादे स्वतः याद आ जाते हैं।
दोनों योजनाएँ सौर ऊर्जा से जुड़ी होने के कारण अक्सर मिला दी जाती हैं, लेकिन इनका दायरा अलग है। राष्ट्रीय सौर मिशन/JNNSM (2010) एक व्यापक राष्ट्रीय नीति-ढाँचा है — यह NAPCC के 8 मिशनों में से एक है और बड़े ग्रिड-कनेक्टेड सौर संयंत्रों सहित संपूर्ण सौर क्षेत्र के विकास का लक्ष्य रखता है। इसके विपरीत, पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (2024) एक विशिष्ट, घर-केंद्रित योजना है जो केवल आवासीय रूफटॉप सौर संस्थापन व मुफ्त बिजली (300 यूनिट/माह) पर केंद्रित है। त्वरित पहचान: "मिशन" शब्द व्यापक नीति-ढाँचे का संकेत देता है, जबकि "सूर्य घर" शब्द सीधे घरों की छतों से जुड़ी योजना का संकेत देता है।
Q1. भारत ने नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य किस सम्मेलन में और किस वर्ष तक प्राप्त करने की घोषणा की?
✅ नवंबर 2021 में ग्लासगो में आयोजित COP26 सम्मेलन में; लक्ष्य वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करना है, जो "पंचामृत" के पाँच लक्ष्यों में से एक है।
Q2. UDAY योजना के अंतर्गत राज्य सरकारों ने DISCOMs के कितने प्रतिशत ऋण का अधिग्रहण किया, और यह किस वर्ष शुरू हुई?
✅ नवंबर 2015 में शुरू; राज्यों ने अपनी DISCOMs के 75% ऋण का अधिग्रहण किया (50% चरण 2015-16 में, शेष 25% 2016-17 में)।
Q3. PAT योजना किस बड़े राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत आती है, और यह किस प्रकार कार्य करती है?
✅ यह राष्ट्रीय उन्नत ऊर्जा दक्षता मिशन (NMEEE, NAPCC का एक मिशन; PAT की शुरुआत 2012 में) के अंतर्गत आती है; यह ऊर्जा-गहन उद्योगों को दक्षता लक्ष्य देकर ऊर्जा बचत प्रमाणपत्र (ESCerts) के व्यापार के माध्यम से एक बाज़ार-आधारित प्रोत्साहन प्रणाली बनाती है।
Q4. भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता (300.50 GW, जुलाई 2026) में सौर और पवन की क्षमता कितनी है?
✅ सौर ऊर्जा सबसे बड़ा स्रोत है (164.59 GW); पवन ऊर्जा की क्षमता 58.14 GW है (जुलाई 2026)।
Q5. बजट 2025 में घोषित परमाणु ऊर्जा मिशन का 2047 तक क्षमता लक्ष्य क्या है, और निजी भागीदारी के लिए कौन-सा नया कानून बना?
✅ 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य; दिसंबर 2025 में पारित SHANTI अधिनियम ने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 तथा असैन्य दायित्व परमाणु क्षति अधिनियम, 2010 को निरस्त कर निजी भागीदारी का रास्ता खोला।
सारांश
भारत का ऊर्जा क्षेत्र एक साथ दो चुनौतियों का सामना कर रहा है — तेजी से बढ़ती ऊर्जा माँग को विश्वसनीय ढंग से पूरा करना, और जलवायु प्रतिबद्धताओं (2030 का 500 GW गैर-जीवाश्म लक्ष्य, 2070 का नेट-जीरो) को साकार करना। लगभग 552 GW की कुल स्थापित क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की 54% से अधिक हिस्सेदारी (300.50 GW, जिसमें सौर सबसे आगे है) इस बदलाव की गति दिखाती है, फिर भी कोयला अभी भी वास्तविक विद्युत उत्पादन का लगभग 74% प्रदान करता है। UDAY व RDSS जैसी योजनाएँ वितरण क्षेत्र को वित्तीय रूप से मजबूत बनाती हैं, जबकि उज्ज्वला योजना व सिटी गैस विस्तार घरेलू ऊर्जा पहुँच बढ़ाते हैं, और BEE की PAT योजना औद्योगिक ऊर्जा दक्षता को बाज़ार-आधारित तरीके से प्रोत्साहित करती है। RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रत्येक योजना का वर्ष, नोडल मंत्रालय व मूल उद्देश्य, तथा नवीकरणीय बनाम पारंपरिक ऊर्जा के अनुपातिक आँकड़े याद रखना सर्वाधिक फलदायी रहेगा।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •GDP = C + I + G + (X−M); यह एक वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
- •भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में 'हैरोड-डोमर' मॉडल पर आधारित थी।
- •RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई; 1949 में राष्ट्रीयकरण; मुख्यालय मुंबई।
- •भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू; 101वें संशोधन (2016)।
- •GDP = देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं/सेवाओं का बाजार मूल्य।