परिचय
लगभग 65 वर्षों तक भारत की विकास रणनीति योजना आयोग के माध्यम से चलती रही - अर्थशास्त्रियों की एक नामित संस्था, जो हर पाँच वर्ष में नई पंचवर्षीय योजना तैयार करती थी और यह भी तय करती थी कि केंद्रीय "योजना" निधि मंत्रालयों व राज्यों के बीच कैसे बाँटी जाए। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2015 को समाप्त हुई, जब योजना आयोग के स्थान पर NITI Aayog (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) की स्थापना की गई - यह मात्र नामकरण-परिवर्तन नहीं था, बल्कि एक केंद्रीकृत, निधि-आवंटक आयोग से एक विकेंद्रीकृत, सलाहकार थिंक टैंक की ओर बदलाव था, जो "सहकारी संघवाद" पर आधारित है, जहाँ राज्य केवल केंद्र द्वारा तय आवंटन प्राप्त नहीं करते, बल्कि राष्ट्रीय नीति निर्माण में भागीदार बनते हैं।
RAS/RPSC प्रारंभिक परीक्षा में यह बदलाव बार-बार पूछा जाता है - तिथियाँ, गवर्निंग काउंसिल की संरचना, NITI Aayog के मार्गदर्शक दस्तावेज़, और सबसे बढ़कर पुराने आयोग से इसका कार्यात्मक अंतर। यह गाइड पंचवर्षीय योजनाओं के इतिहास को संक्षेप में रखते हुए NITI Aayog की संरचना और वर्तमान कार्यप्रणाली पर गहराई से केंद्रित है।
मुख्य अवधारणाएं
1. पंचवर्षीय योजनाओं से NITI Aayog तक - संक्षिप्त पृष्ठभूमि
योजना आयोग की स्थापना 15 मार्च 1950 को कैबिनेट प्रस्ताव द्वारा हुई थी (संविधान या संसद के किसी अधिनियम से नहीं), जिसमें प्रधानमंत्री पदेन अध्यक्ष होते थे। इसने 1951 से 2017 के बीच बारह पंचवर्षीय योजनाएं तैयार कीं, और हर योजना की रणनीति के साथ-साथ यह भी तय किया कि हर मंत्रालय व राज्य को कितना धन मिलेगा। 2010 के दशक के आरंभ तक यह कठोर पाँच-वर्षीय चक्र और आयोग की ऊपर-से-नीचे आवंटन शक्ति एक विशाल, विविधतापूर्ण, उदारीकृत होती अर्थव्यवस्था के लिए उपयुक्त नहीं रह गई थी, जहाँ राज्य अपनी प्राथमिकताओं में अधिक भागीदारी चाहते थे। 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना आयोग को भंग कर, पुनः कैबिनेट प्रस्ताव द्वारा उसके स्थान पर NITI Aayog का गठन किया - अतः अपने पूर्ववर्ती की भांति NITI Aayog भी एक असंवैधानिक, गैर-सांविधिक निकाय है।
2. NITI Aayog की संरचना और गठन
NITI Aayog के पदेन अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं। इसकी कार्यकारी संरचना में कई स्तर हैं: उपाध्यक्ष (प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त, कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा, दैनिक कार्यों का संचालन करते हैं); गवर्निंग काउंसिल - सर्वोच्च निकाय, जिसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल/प्रशासक प्रधानमंत्री के साथ शामिल होते हैं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर सहमति बनाने हेतु समय-समय पर बैठक करते हैं; क्षेत्रीय परिषदें, जो राज्यों के किसी समूह से जुड़े मुद्दों हेतु निश्चित अवधि के लिए गठित होती हैं और प्रधानमंत्री या उनके नामित व्यक्ति की अध्यक्षता में कार्य करती हैं; पूर्णकालिक सदस्य (राज्य मंत्री के समकक्ष दर्जा); अधिकतम दो अंशकालिक सदस्य, जो प्रमुख विश्वविद्यालयों व शोध संस्थानों से रोटेशन आधार पर लिए जाते हैं; केंद्रीय मंत्रिपरिषद से अधिकतम चार पदेन सदस्य; विशेषज्ञता वाले विशेष आमंत्रित सदस्य; और एक CEO (प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त, सचिव स्तर का दर्जा), जो प्रशासन का प्रबंधन करते हैं।
यही योजना आयोग से सबसे बड़ा संरचनात्मक अंतर है - योजना आयोग को दिशा एक अलग, बड़ी संस्था राष्ट्रीय विकास परिषद से मिलती थी, जबकि वास्तविक योजना-निर्माण व निधि-आवंटन दिल्ली में नियुक्त सदस्यों के एक छोटे समूह द्वारा किया जाता था। इसके विपरीत NITI Aayog राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के प्रमुखों को राष्ट्रीय योजना-निर्माण में स्थायी, अंतर्निहित भागीदार बनाता है - यही "सहकारी संघवाद" का मूल है, जिसे "केंद्र-से-राज्य" नियोजन से "टीम इंडिया" नियोजन की ओर बदलाव कहा जाता है।
3. मार्गदर्शक दस्तावेज़ - पाँच-वर्षीय चक्र का स्थानापन्न
एक कठोर पंचवर्षीय योजना के बजाय, NITI Aayog तीन नेस्टेड दस्तावेज़ों के साथ कार्य करता है: 15-वर्षीय विज़न दस्तावेज़ (दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य, सतत विकास लक्ष्यों - SDGs - के अनुरूप, मूलतः 2030 तक की परिकल्पना), 7-वर्षीय रणनीति पत्र (दीर्घकालिक विज़न को मध्यम अवधि की रणनीति में बदलना), और 3-वर्षीय कार्य एजेंडा (पहला 2017-18 से 2019-20 तक था, जिसमें मंत्रालय-वार स्पष्ट जिम्मेदारी व समय-सीमा वाले ठोस कदम शामिल हैं)। यह 15-7-3 संरचना दीर्घकालिक दिशा को अल्पकालिक लचीलेपन के साथ जोड़ती है, जो पुराने कठोर पाँच-वर्षीय चक्र में संभव नहीं था।
4. कार्य और भूमिका - थिंक टैंक, निधि-आवंटक नहीं
NITI Aayog केंद्र और राज्यों को दिशात्मक व नीतिगत सुझाव देने वाला सरकार का प्रमुख नीति थिंक टैंक है। इसके मुख्य कार्य हैं: राज्यों के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना (पाँच-वर्षीय आवंटन के बजाय); रणनीति व दीर्घकालिक नीतिगत ढाँचे तैयार करना; कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की निगरानी व मूल्यांकन करना; नवाचार व उद्यमिता के पारितंत्र को बढ़ावा देना; तथा अंतर-मंत्रालयी व केंद्र-राज्य मुद्दों का समाधान करना। योजना आयोग से सबसे बड़ा कार्यात्मक अंतर यह है कि NITI Aayog मंत्रालयों या राज्यों को योजना निधि आवंटित नहीं करता - यह भूमिका अब केंद्रीय वित्त मंत्रालय (केंद्रीय बजट के माध्यम से) और वित्त आयोग के पास है।
5. NITI Aayog से जुड़ी प्रमुख पहलें
SDG इंडिया इंडेक्स, जो 2018 से प्रतिवर्ष जारी होता है, संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की प्रगति के आधार पर उनकी रैंकिंग करता है। आकांक्षी जिला कार्यक्रम, जो जनवरी 2018 में आरंभ हुआ, देश के सबसे अविकसित जिलों में डेटा-आधारित तीव्र परिवर्तन लाता है और पाँच क्षेत्रों पर नज़र रखता है: स्वास्थ्य व पोषण, शिक्षा, कृषि व जल संसाधन, वित्तीय समावेशन व कौशल विकास, तथा बुनियादी ढाँचा। अटल इनोवेशन मिशन (AIM) स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब्स तथा स्टार्ट-अप्स के लिए अटल इन्क्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा देता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| विशेषता | योजना आयोग (1950-2014) | NITI Aayog (2015-वर्तमान) |
|---|---|---|
| स्थापना | 15 मार्च 1950, कैबिनेट प्रस्ताव द्वारा | 1 जनवरी 2015, कैबिनेट प्रस्ताव द्वारा |
| विधिक स्थिति | असंवैधानिक, गैर-सांविधिक | असंवैधानिक, गैर-सांविधिक |
| अध्यक्ष | प्रधानमंत्री (पदेन) | प्रधानमंत्री (पदेन) |
| योजना-निधि आवंटन शक्ति | हाँ - एक प्रमुख शक्ति | नहीं - पूर्णतः सलाहकार |
| मार्गदर्शक दस्तावेज़ | एक कठोर पंचवर्षीय योजना (12 योजनाएं, 1951-2017) | 15-वर्षीय विज़न, 7-वर्षीय रणनीति, 3-वर्षीय कार्य एजेंडा |
| राज्यों की भूमिका | मुख्यतः अलग राष्ट्रीय विकास परिषद के माध्यम से | मुख्यमंत्री/उपराज्यपाल गवर्निंग काउंसिल के प्रत्यक्ष सदस्य |
| मूल पहचान | केंद्रीय नियोजन + निधि-आवंटक प्राधिकरण | नीति थिंक टैंक / सलाहकार निकाय |
- NITI Aayog का पूर्ण रूप है - नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया।
- CEO की नियुक्ति प्रधानमंत्री करते हैं और उन्हें भारत सरकार के सचिव के समकक्ष दर्जा प्राप्त होता है।
- अरविंद पानगढ़िया NITI Aayog के पहले उपाध्यक्ष (2015-2017) रहे - यह एक उपयोगी संदर्भ तथ्य है, हालाँकि वर्तमान पदाधिकारी समय के साथ बदल सकते हैं, परीक्षा से पहले इसे सत्यापित कर लें।
- आकांक्षी जिला कार्यक्रम पाँच क्षेत्रों पर नज़र रखता है: स्वास्थ्य/पोषण, शिक्षा, कृषि/जल संसाधन, वित्तीय समावेशन/कौशल विकास, तथा बुनियादी ढाँचा।
परीक्षा टिप्स
- सीधा तुलनात्मक प्रश्न अपेक्षित है: "योजना आयोग के पास कौन-सी शक्ति थी जो NITI Aayog के पास नहीं है?" - उत्तर: राज्यों/मंत्रालयों को निधि आवंटन।
- दोनों तिथियाँ याद रखें: योजना आयोग - 15 मार्च 1950; NITI Aayog - 1 जनवरी 2015।
- गवर्निंग काउंसिल (सभी राज्यों के मुख्यमंत्री + केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में) को छोटी क्षेत्रीय परिषदों (विशिष्ट मुद्दों/क्षेत्रों हेतु, सीमित अवधि) या पुरानी राष्ट्रीय विकास परिषद से भ्रमित न करें।
- 15-7-3 दस्तावेज़ संरचना को घटते क्रम में याद रखें - विज़न (15 वर्ष), रणनीति (7 वर्ष), कार्य एजेंडा (3 वर्ष) - एक साथ एक ही ब्लॉक की तरह।
NITI Aayog के तीन नियोजन दस्तावेज़ एक साफ घटते क्रम में चलते हैं: 15 वर्ष = विज़न (बड़ी तस्वीर, SDG-आधारित मंज़िल), 7 वर्ष = रणनीति पत्र (मध्यावधि रास्ता), 3 वर्ष = कार्य एजेंडा (मंत्रालय-वार, तात्कालिक सूची - पहला 2017-18 से 2019-20 तक)। इसे याद करें - "15 में देखो, 7 में योजना बनाओ, 3 में करो" - और 15-7-3 की उल्टी गिनती संख्या व क्रम दोनों याद करा देगी।
इस विषय पर सबसे अधिक पूछा जाने वाला अंतर। योजना आयोग (1950-2014): एक निधि-आवंटक प्राधिकरण, जो तय करता था कि हर मंत्रालय/राज्य को कितनी योजना-निधि मिलेगी - ऊपर-से-नीचे, केंद्रीकृत ढाँचा; राज्यों की आवाज़ मुख्यतः अलग राष्ट्रीय विकास परिषद के माध्यम से सुनी जाती थी। NITI Aayog (2015-वर्तमान): एक पूर्णतः सलाहकार थिंक टैंक, जिसके पास योजना निधि आवंटित करने की कोई शक्ति नहीं है (यह काम अब वित्त मंत्रालय/केंद्रीय बजट व वित्त आयोग के पास है); यह सहमति-निर्माण से काम करता है, जहाँ हर राज्य का मुख्यमंत्री व केंद्रशासित प्रदेश का उपराज्यपाल सीधे इसकी गवर्निंग काउंसिल में बैठता है। एक पंक्ति में: योजना आयोग = धन + ऊपर-से-नीचे; NITI Aayog = सलाह + सहकारी संघवाद, धन नहीं।
प्रश्न 1. NITI Aayog की स्थापना किस तिथि को हुई, और इसने किस संस्था का स्थान लिया?
✅ 1 जनवरी 2015; इसने योजना आयोग (स्थापना 15 मार्च 1950) का स्थान लिया।
प्रश्न 2. NITI Aayog की गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता कौन करता है, और इसके सदस्य कौन हैं?
✅ प्रधानमंत्री इसकी अध्यक्षता करते हैं; सदस्य हैं - सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल/प्रशासक।
प्रश्न 3. कठोर पंचवर्षीय योजना के स्थान पर NITI Aayog किन तीन दस्तावेज़ों का उपयोग करता है, और किस अवधि हेतु?
✅ 15-वर्षीय विज़न, 7-वर्षीय रणनीति पत्र, और 3-वर्षीय कार्य एजेंडा (पहला 2017-18 से 2019-20 तक था)।
प्रश्न 4. योजना आयोग और NITI Aayog के बीच सबसे बड़ा कार्यात्मक अंतर क्या है?
✅ योजना आयोग मंत्रालयों व राज्यों को योजना-निधि आवंटित करता था; NITI Aayog के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है और यह पूर्णतः सलाहकार थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है।
प्रश्न 5. अविकसित जिलों के कायाकल्प हेतु NITI Aayog के प्रमुख कार्यक्रम का नाम बताएं तथा इसके पाँच निगरानी क्षेत्र बताएं।
✅ आकांक्षी जिला कार्यक्रम (जनवरी 2018 में आरंभ); यह स्वास्थ्य/पोषण, शिक्षा, कृषि/जल संसाधन, वित्तीय समावेशन/कौशल विकास, तथा बुनियादी ढाँचे पर नज़र रखता है।
सारांश
NITI Aayog ने 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग का स्थान लिया, जिससे कठोर, केंद्रीय रूप से आवंटित पंचवर्षीय योजनाओं (1951-2017) का युग समाप्त हुआ। प्रधानमंत्री अभी भी अध्यक्ष हैं, परंतु यह संस्था एक गवर्निंग काउंसिल पर आधारित है, जिसमें हर राज्य के मुख्यमंत्री व केंद्रशासित प्रदेश के उपराज्यपाल प्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं - यही "सहकारी संघवाद" का आधार है - और इसे उपाध्यक्ष, पूर्णकालिक व अंशकालिक सदस्यों, पदेन सदस्यों तथा CEO का सहयोग प्राप्त है। एक पंचवर्षीय योजना के स्थान पर यह 15-वर्षीय विज़न, 7-वर्षीय रणनीति पत्र और 3-वर्षीय कार्य एजेंडा के माध्यम से कार्य करता है। परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण तथ्य कार्यात्मक है: योजना आयोग के विपरीत, NITI Aayog राज्यों या मंत्रालयों को योजना-निधि आवंटित नहीं कर सकता - और आज इसे SDG इंडिया इंडेक्स, आकांक्षी जिला कार्यक्रम तथा अटल इनोवेशन मिशन जैसी पहलों के माध्यम से बेहतर याद रखा जाता है।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •GDP = C + I + G + (X−M); यह एक वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
- •भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में 'हैरोड-डोमर' मॉडल पर आधारित थी।
- •RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई; 1949 में राष्ट्रीयकरण; मुख्यालय मुंबई।
- •भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू; 101वें संशोधन (2016)।
- •GDP = देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं/सेवाओं का बाजार मूल्य।