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मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) — भर्ती, चयन, प्रशिक्षण, मूल्यांकन एवं प्रतिकर

Human Resource Management (HRM) — Recruitment, Selection, Training, Appraisal and Compensation

14 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: अगस्त 2026· Management

परिचय

मानव संसाधन प्रबंधन (Human Resource Management — HRM) RAS प्रारंभिक परीक्षा के प्रबंधन खंड का एक अत्यंत महत्वपूर्ण उप-विषय है, जिसमें परिभाषाएँ, विचारक-सिद्धांत जोड़े (फ्लिप्पो, डेल योडर, नाडलर, टी.वी. राव), प्रक्रियात्मक चरण (भर्ती, चयन, प्रशिक्षण, मूल्यांकन) तथा तुलनात्मक तालिकाएँ (HRM बनाम कार्मिक प्रबंधन, HRM बनाम HRD) एक साथ पूछी जाती हैं। संक्षेप में, HRM संगठन में कार्यरत मानव संसाधनों की प्राप्ति (procurement) से लेकर उनके विकास, प्रतिकर, एकीकरण, अनुरक्षण और अंततः पृथक्करण तक की संपूर्ण यात्रा का प्रबंधन करने वाली प्रक्रिया है, जिसका अंतिम लक्ष्य व्यक्तिगत, संगठनात्मक व सामाजिक — तीनों स्तरों के उद्देश्यों की एक साथ पूर्ति करना है। यह टॉपिक भर्ती व चयन, प्रशिक्षण व विकास, निष्पादन मूल्यांकन, प्रतिकर प्रबंधन तथा कैरियर नियोजन जैसे व्यावहारिक उप-क्षेत्रों की नींव रखता है, जो RAS प्रारंभिक परीक्षा में तथ्यात्मक व अवधारणात्मक दोनों प्रकार के प्रश्नों का स्रोत बनते हैं।

मुख्य अवधारणाएँ

1. HRM की अवधारणा, परिभाषा, उद्देश्य एवं क्षेत्र

एडविन बी. फ्लिप्पो (Edwin B. Flippo) के अनुसार, "मानव संसाधन प्रबंधन मानव संसाधनों की प्राप्ति (Procurement), विकास (Development), प्रतिकर (Compensation), एकीकरण (Integration), अनुरक्षण (Maintenance) और पृथक्करण (Separation) से संबंधित नियोजन, संगठन, निर्देशन एवं नियंत्रण की वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से व्यक्तिगत, संगठनात्मक और सामाजिक — तीनों स्तर के उद्देश्यों की प्राप्ति की जाती है।" यह छह-कार्यों वाली परिभाषा (संक्षेप में PDCIMS) परीक्षा-दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें HRM का संपूर्ण जीवन-चक्र समाहित है — कर्मचारी की भर्ती से लेकर सेवानिवृत्ति/पृथक्करण तक।

HRM के मुख्य उद्देश्यों में शामिल हैं — संगठन के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु सक्षम व प्रेरित कार्यबल उपलब्ध कराना; कर्मचारियों के कौशल, ज्ञान व क्षमताओं का अधिकतम उपयोग व विकास करना; उच्च कर्मचारी मनोबल व कार्य-संतुष्टि बनाए रखना; औद्योगिक संबंधों में सामंजस्य स्थापित करना; तथा कानूनी व नैतिक मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना। इस प्रकार HRM के उद्देश्य चार व्यापक श्रेणियों में बाँटे जा सकते हैं — सामाजिक उद्देश्य (कानूनी व नैतिक दायित्वों की पूर्ति), संगठनात्मक उद्देश्य (संगठनात्मक दक्षता में योगदान), कार्यात्मक उद्देश्य (संगठन की आवश्यकतानुसार HR योगदान बनाए रखना) तथा व्यक्तिगत उद्देश्य (कर्मचारियों के निजी लक्ष्यों में सहयोग)।

डेल योडर (Dale Yoder) ने HRM के क्षेत्र (scope) को 11 प्रमुख कार्य-क्षेत्रों में विभाजित किया है, जो परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण वर्गीकरण है — (1) मानव संसाधन नियोजन, (2) कार्य विश्लेषण एवं अभिकल्पना, (3) भर्ती, (4) चयन, (5) नियुक्ति एवं अधिष्ठापन, (6) प्रशिक्षण एवं विकास, (7) निष्पादन मूल्यांकन, (8) प्रतिकर प्रबंधन, (9) अभिप्रेरण एवं सहभागिता, (10) कैरियर एवं उत्तराधिकार नियोजन, तथा (11) कर्मचारी कल्याण। इस सूची में HRM के सभी उप-विषय (भर्ती से लेकर कैरियर नियोजन तक) समाहित हैं, जो इसे इस टॉपिक की रीढ़ बनाता है।

2. HRM बनाम कार्मिक प्रबंधन (Personnel Management)

ऐतिहासिक रूप से संगठनों में कर्मचारी-प्रबंधन को कार्मिक प्रबंधन (Personnel Management) के रूप में देखा जाता था, जो एक संकुचित, प्रशासनिक व अल्पकालिक कार्य था। समय के साथ यह एक व्यापक, रणनीतिक व दीर्घकालिक दृष्टिकोण वाले मानव संसाधन प्रबंधन में परिवर्तित हुआ। दोनों के बीच का अंतर RAS परीक्षा में बार-बार पूछा जाने वाला बिंदु है — कार्मिक प्रबंधन अल्पकालिक, प्रतिक्रियात्मक (reactive) व तदर्थ (ad hoc) दृष्टिकोण अपनाता है, जबकि HRM दीर्घकालिक, सक्रिय (proactive) व समेकित (integrated) दृष्टिकोण अपनाता है।

कर्मचारी संबंधों के प्रति दृष्टिकोण में भी मौलिक अंतर है — कार्मिक प्रबंधन बहुलवादी (pluralist), सामूहिक व निम्न-विश्वास पर आधारित संबंध मानता है (जहाँ प्रबंधन व कर्मचारी हितों में टकराव सामान्य माना जाता है), जबकि HRM एकतावादी (unitarist) दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें प्रबंधन व कर्मचारियों के हित एक साझा लक्ष्य की ओर उन्मुख माने जाते हैं तथा वैयक्तिक, उच्च-विश्वास आधारित संबंधों पर बल दिया जाता है। कार्मिक प्रबंधन में उत्तरदायित्व मुख्यतः कार्मिक विशेषज्ञों (HR विभाग) तक सीमित रहता है और इसकी संरचना नौकरशाहीपूर्ण व केंद्रीकृत होती है; इसके विपरीत HRM में मानव संसाधन प्रबंधन प्रत्येक प्रबंधक का समेकित उत्तरदायित्व माना जाता है और संरचना लचीली व विकेंद्रीकृत होती है। सबसे महत्वपूर्ण अंतर यह है कि कार्मिक प्रबंधन कर्मचारी को मुख्यतः एक "लागत" (cost) मानकर उसे न्यूनतम करने पर केंद्रित रहता है, जबकि HRM कर्मचारी को एक मूल्यवान "संपत्ति" (asset/human capital) मानकर उसके अधिकतम उपयोग व विकास पर बल देता है।

3. मानव संसाधन विकास (HRD) बनाम HRM

मानव संसाधन विकास (Human Resource Development — HRD) शब्द का प्रवर्तन लियोनार्ड नाडलर (Leonard Nadler) ने वर्ष 1969 में किया, जिन्होंने इसे "एक निर्धारित समय-सीमा में आयोजित संगठित गतिविधियों की श्रृंखला के रूप में परिभाषित किया, जिसका उद्देश्य व्यवहारगत परिवर्तन (behavioural change) उत्पन्न करना है।" भारत में HRD की अवधारणा को व्यवस्थित प्रणाली के रूप में विकसित करने का श्रेय टी.वी. राव (T.V. Rao) को जाता है, जिन्हें "भारत में HRD के जनक" के रूप में जाना जाता है। उन्होंने HRD को एक ऐसी सतत प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जिसके माध्यम से कर्मचारियों की क्षमताओं (competencies), ज्ञान व कौशल को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाता है ताकि वे वर्तमान व भावी भूमिकाओं को प्रभावी ढंग से निभा सकें।

HRM एवं HRD परस्पर संबंधित परंतु भिन्न अवधारणाएँ हैं, जिन्हें अक्सर परीक्षा में मिलाया जाता है। HRM एक व्यापक छत्र (umbrella) अवधारणा है जिसमें भर्ती, चयन, प्रतिकर, औद्योगिक संबंध, अनुशासन व पृथक्करण सहित कर्मचारी-प्रबंधन के सभी प्रशासनिक व रणनीतिक कार्य शामिल हैं, जबकि HRD इसी छत्र के भीतर स्थित एक विकासोन्मुख उप-प्रणाली (sub-system) है, जो विशेष रूप से प्रशिक्षण, संगठन विकास (OD), क्षमता मूल्यांकन (potential appraisal), कैरियर नियोजन व निरंतर सीखने पर केंद्रित रहती है। दूसरे शब्दों में, HRM का दायरा प्रशासनिक व नियंत्रणकारी है जबकि HRD का दायरा विकासात्मक व सतत (continuous) है — HRM जहाँ "कर्मचारी को प्रबंधित करना" चाहता है, वहीं HRD "कर्मचारी को विकसित करना" चाहता है।

टी.वी. राव के अनुसार, एक समेकित HRD प्रणाली (Integrated HRD System) में कई परस्पर-जुड़ी उप-प्रणालियाँ शामिल होती हैं — निष्पादन मूल्यांकन (Performance Appraisal), क्षमता मूल्यांकन (Potential Appraisal), कैरियर नियोजन (Career Planning), प्रशिक्षण (Training), संगठन विकास (Organisation Development), पुरस्कार प्रणाली (Rewards), कार्यजीवन गुणवत्ता (Quality of Work Life) तथा मानव संसाधन सूचना प्रणाली (HRIS)। इस प्रकार, HRD को HRM के 11 क्षेत्रों में से "प्रशिक्षण एवं विकास" तथा "कैरियर व उत्तराधिकार नियोजन" जैसे विकासोन्मुख उप-क्षेत्रों के गहन, संगठित व सैद्धांतिक विस्तार के रूप में समझा जा सकता है।

4. मानव संसाधन नियोजन (Human Resource Planning — HRP) की प्रक्रिया

मानव संसाधन नियोजन संगठन के मानव संसाधनों के अर्जन, उपयोग, विकास एवं प्रतिधारण (retention) की एक रणनीति है, जिसका उद्देश्य सही समय पर सही संख्या व सही प्रकार के कर्मचारी उपलब्ध कराना तथा मौजूदा कर्मचारियों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करना है। इसकी प्रक्रिया चार मुख्य चरणों में चलती है — पूर्वानुमान (Forecasting, भावी आवश्यकताओं का आकलन), सूचीकरण (Inventorying, वर्तमान कर्मचारियों की योग्यता व कौशल का मूल्यांकन), पूर्वेक्षण (Anticipating, मौजूदा संसाधनों की भावी आवश्यकताओं से तुलना कर कमी/अधिशेष की पहचान), तथा नियोजन (Planning, भर्ती-प्रशिक्षण-पदोन्नति कार्यक्रम बनाना)।

HRP का केंद्र-बिंदु मांग पूर्वानुमान (Demand Forecasting) व आपूर्ति पूर्वानुमान (Supply Forecasting) है। मांग पूर्वानुमान हेतु दो उपागम अपनाए जाते हैं — मात्रात्मक उपागम (Quantitative Approach), जिसमें प्रवृत्ति विश्लेषण (Trend Analysis — कर्मचारी संख्या व किसी व्यावसायिक कारक जैसे बिक्री के ऐतिहासिक संबंध पर आधारित; सूत्र: आवश्यक कर्मचारी = पूर्वानुमानित व्यावसायिक कारक ÷ प्रति कर्मचारी उत्पादकता) तथा गणितीय प्रतिरूपण (बहु-प्रतिगमन मॉडल) शामिल हैं; तथा गुणात्मक उपागम (Qualitative Approach), जिसमें विशेषज्ञ पूर्वानुमान (Expert Forecasting) व डेल्फी तकनीक (Delphi Technique — विशेषज्ञों के गुमनाम व चक्रीय पूर्वानुमानों का संश्लेषण, जो व्यक्तिगत पूर्वाग्रह को घटाती है) शामिल हैं। आपूर्ति पूर्वानुमान में आंतरिक स्रोतों (स्टाफिंग टेबल, मार्कोव विश्लेषण, कौशल सूची, प्रतिस्थापन चार्ट) व बाह्य स्रोतों (शैक्षणिक संस्थान, रोजगार कार्यालय, भर्ती एजेंसियाँ) दोनों का विश्लेषण किया जाता है।

5. भर्ती (Recruitment) — स्रोत एवं विधियाँ

भर्ती संभावित कर्मचारियों की खोज करना तथा उन्हें संगठन में रिक्त पदों हेतु आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करने की प्रक्रिया है। एडविन बी. फ्लिप्पो के अनुसार, भर्ती एक सकारात्मक (positive) प्रक्रिया है क्योंकि यह आवेदकों की संख्या बढ़ाकर नियुक्ति अनुपात (hiring ratio) को सुधारती है — इसके विपरीत चयन एक नकारात्मक (negative) प्रक्रिया मानी जाती है क्योंकि इसमें विभिन्न चरणों में अनुपयुक्त उम्मीदवारों को अस्वीकृत किया जाता है।

भर्ती के दो प्रमुख स्रोत हैं — आंतरिक स्रोत (Internal Sources: पदोन्नति, स्थानांतरण, पूर्व कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति), जिनका लाभ है कर्मचारी मनोबल में वृद्धि व कम लागत, परंतु इनकी सीमा है नए विचारों का अभाव व संगठनात्मक इनब्रीडिंग की आशंका; तथा बाह्य स्रोत (External Sources: शैक्षणिक व प्रशिक्षण संस्थान, रोजगार कार्यालय, भर्ती एजेंसियाँ, ऑनलाइन जॉब पोर्टल), जो नए विचार व व्यापक चयन उपलब्ध कराते हैं परंतु अधिक महँगे व समय-साध्य होते हैं। भर्ती की विधियों को तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है — प्रत्यक्ष विधियाँ (कैंपस भर्ती, मैन्ड एग्जीबिशन), अप्रत्यक्ष विधियाँ (समाचार-पत्र, ऑनलाइन जॉब पोर्टल के माध्यम से विज्ञापन) तथा तृतीय-पक्ष विधियाँ (निजी रोजगार एजेंसियाँ, ट्रेड यूनियन, व्यावसायिक संगठन)।

6. चयन (Selection) — प्रक्रिया एवं परीक्षण

चयन आवेदकों के समूह में से सर्वाधिक उपयुक्त उम्मीदवार को चुनने की प्रक्रिया है, जो सामान्यतः क्रमिक-बाधा तकनीक (Successive-Hurdles Technique) पर आधारित होती है — जिसमें उम्मीदवार को कई चरणों से गुजरना पड़ता है, और जिसे योडर ने "गो, नो-गो गेज (Go, No-Go Gauges)" कहा है। चयन प्रक्रिया के प्रमुख चरण हैं — आवेदन जाँच, चयन परीक्षण, साक्षात्कार, शारीरिक परीक्षण, संदर्भ जाँच तथा अंतिम चयन। चयन परीक्षणों को चार श्रेणियों में बाँटा जाता है — उपलब्धि/निपुणता परीक्षण (पूर्व-अर्जित ज्ञान व कौशल मापने वाले), अभिक्षमता परीक्षण (नई क्षमता सीखने की संभावना मापने वाले, जिसमें मानसिक, यांत्रिक व मनोगत्यात्मक उप-प्रकार शामिल हैं), व्यक्तित्व परीक्षण (वस्तुनिष्ठ, प्रक्षेपी व स्थिति परीक्षण) तथा रुचि परीक्षण।

साक्षात्कार (Interview) सर्वाधिक प्रयुक्त चयन तकनीक है, जिसका उद्देश्य सूचना प्राप्त करना, सूचना प्रदान करना तथा उम्मीदवार को अभिप्रेरित करना है। साक्षात्कार रेटिंग हेतु सुप्रसिद्ध सात-सूत्री योजना (Seven-Point Plan) में शारीरिक बनावट, उपलब्धियाँ, बुद्धि, विशेष अभिक्षमताएँ, रुचियाँ, स्वभाव व परिस्थितियाँ — इन सात तत्वों का मूल्यांकन किया जाता है। साक्षात्कार की एक प्रमुख सीमा प्रभामंडल प्रभाव (Halo Effect) है, जहाँ एक प्रभावशाली गुण पूरे मूल्यांकन को प्रभावित कर देता है। परीक्षा-दृष्टि से यह भी उल्लेखनीय है कि फ्रेनोलॉजी, फिजियोग्नॉमी व ग्राफोलॉजी जैसी विधियाँ छद्म-वैज्ञानिक (pseudo-scientific) मानी जाती हैं और इनमें वैज्ञानिक विश्वसनीयता का अभाव होने के कारण इन्हें चयन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।

7. प्रशिक्षण एवं विकास (Training and Development) की विधियाँ

एडविन बी. फ्लिप्पो के अनुसार, "प्रशिक्षण किसी विशेष कार्य को करने हेतु कर्मचारी के ज्ञान व कौशल को बढ़ाने की प्रक्रिया है।" प्रशिक्षण मुख्यतः वर्तमान कार्य-निष्पादन सुधारने पर केंद्रित होता है (अल्पकालिक, कार्य-उन्मुख), जबकि विकास (Development) कर्मचारियों को भावी जिम्मेदारियों हेतु तैयार करता है (दीर्घकालिक, कैरियर-उन्मुख) — यह अंतर परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है। प्रशिक्षण की विधियों को दो व्यापक श्रेणियों में बाँटा जाता है — कार्य-स्थल प्रशिक्षण (On-the-Job Training: कोचिंग, मेंटरिंग, कार्य आवर्तन/Job Rotation, प्रशिक्षुता/Apprenticeship, इंटर्नशिप) तथा कार्य-स्थल-बाह्य प्रशिक्षण (Off-the-Job Training: व्याख्यान, केस स्टडी, भूमिका-अभिनय/Role-playing, अनुकरण/Simulation, वेस्टिब्यूल प्रशिक्षण, प्रबंधन खेल/Management Games, ई-लर्निंग)।

प्रशिक्षण के प्रभाव का मूल्यांकन करने हेतु सर्वाधिक प्रयुक्त ढाँचा किर्कपैट्रिक के चार स्तर (Kirkpatrick's Four Levels) हैं — (1) प्रतिक्रिया (Reaction: प्रतिभागियों को कार्यक्रम कैसा लगा), (2) अधिगम (Learning: ज्ञान-कौशल में कितना सुधार हुआ), (3) व्यवहार (Behaviour: कार्यस्थल व्यवहार में कितना परिवर्तन आया), तथा (4) परिणाम (Results: उत्पादकता, गुणवत्ता व लाभप्रदता में सुधार)। यह चार-स्तरीय ढाँचा RAS परीक्षा में क्रम सहित पूछा जाने वाला एक महत्वपूर्ण MCQ बिंदु है।

8. निष्पादन मूल्यांकन (Performance Appraisal) की विधियाँ — 360-डिग्री, MBO, BARS

एडविन बी. फ्लिप्पो के अनुसार, "निष्पादन मूल्यांकन किसी कर्मचारी की वर्तमान कार्य में उत्कृष्टता तथा किसी बेहतर कार्य हेतु उसकी संभावनाओं से संबंधित व्यवस्थित, आवधिक (periodic) व निष्पक्ष रेटिंग है।" निष्पादन मूल्यांकन विधियों को दो श्रेणियों में बाँटा जाता है। परंपरागत विधियों (Traditional Methods) में निबंध मूल्यांकन, सीधी क्रमबद्धता, चेकलिस्ट विधि, ग्राफिक रेटिंग स्केल व संख्यात्मक रेटिंग स्केल शामिल हैं, जो अपेक्षाकृत सरल परंतु व्यक्तिनिष्ठ (subjective) होती हैं।

आधुनिक विधियों (Modern Methods) में तीन विशेष रूप से परीक्षा-प्रासंगिक विधियाँ हैं — 360-डिग्री फीडबैक, जो आधुनिक विधियों में सर्वाधिक बहुआयामी विधि है, जिसमें कर्मचारी के निष्पादन पर पर्यवेक्षकों, सहकर्मियों, अधीनस्थों, ग्राहकों तथा स्वयं कर्मचारी से फीडबैक एकत्रित कर एक समग्र (360°) चित्र बनाया जाता है; उद्देश्यों द्वारा प्रबंधन (Management By Objectives — MBO), जिसमें प्रबंधक व कर्मचारी मिलकर मापने योग्य लक्ष्य तय करते हैं और निष्पादन का मूल्यांकन उनकी प्राप्ति के आधार पर होता है (यह पीटर ड्रकर की अवधारणा का ही व्यावहारिक विस्तार है); तथा व्यवहार-आधारित निर्धारित रेटिंग स्केल (Behaviourally Anchored Rating Scale — BARS), जो संख्यात्मक रेटिंग को कार्य-व्यवहार के विशिष्ट उदाहरणों से जोड़ती है, जिससे यह पारंपरिक ग्राफिक रेटिंग व गुणात्मक विवरण दोनों का लाभ देती है। इनके अतिरिक्त मूल्यांकन केंद्र (Assessment Centre), संतुलित स्कोरकार्ड (Balanced Scorecard) व क्षमता मूल्यांकन (Potential Appraisal) भी आधुनिक विधियों में शामिल हैं।

निष्पादन मूल्यांकन में कई त्रुटियाँ/बाधाएँ (Errors/Barriers) उत्पन्न हो सकती हैं, जो परीक्षा में उदाहरण सहित पूछी जाती हैं — प्रभामंडल प्रभाव (Halo Effect: एक सकारात्मक गुण समग्र रेटिंग को प्रभावित करना), हॉर्न प्रभाव (Horn Effect: एक नकारात्मक गुण समग्र रेटिंग को प्रतिकूल बनाना), केंद्रीय प्रवृत्ति (Central Tendency: सभी को औसत के निकट रेट करना), उदारता त्रुटि (Leniency Error), कठोरता त्रुटि (Strictness Error), हाल की घटनाओं का प्रभाव (Recency Effect) तथा रूढ़िबद्धता (Stereotyping)।

9. प्रतिकर प्रबंधन एवं कैरियर नियोजन के मूल सिद्धांत

प्रतिकर प्रबंधन (Compensation Management) में कर्मचारियों को उनकी सेवाओं के बदले प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के पुरस्कार देना शामिल है — प्रत्यक्ष प्रतिकर में मूल वेतन, महँगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), बोनस व प्रोत्साहन शामिल हैं, जबकि अप्रत्यक्ष प्रतिकर (फ्रिंज बेनिफिट्स) में भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, बीमा, अवकाश व अन्य कल्याणकारी सुविधाएँ शामिल हैं। भारत में उचित न्यूनतम पारिश्रमिक संरचना समझने हेतु उचित वेतन समिति (Committee on Fair Wages, 1948) द्वारा दी गई तीन-स्तरीय वेतन अवधारणा परीक्षा-दृष्टि से महत्वपूर्ण है — न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage: बुनियादी जीवन-निर्वाह हेतु आवश्यक न्यूनतम राशि), उचित मजदूरी (Fair Wage: न्यूनतम व निर्वाह मजदूरी के बीच, जो उद्योग की भुगतान-क्षमता को भी ध्यान में रखती है), तथा निर्वाह मजदूरी (Living Wage: सर्वाधिक ऊँचा स्तर, जो बुनियादी आवश्यकताओं के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य व मामूली आराम भी सुनिश्चित करे)। आंतरिक वेतन-समता सुनिश्चित करने हेतु कार्य मूल्यांकन (Job Evaluation — रैंकिंग, वर्गीकरण, बिंदु विधि व कारक-तुलना विधि द्वारा) का प्रयोग किया जाता है।

कैरियर नियोजन (Career Planning) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपने कौशल, रुचियों व मूल्यों का आकलन कर यथार्थवादी कैरियर लक्ष्य तय करता है तथा उन्हें प्राप्त करने की योजना बनाता है — यह मुख्यतः एक व्यक्ति-केंद्रित प्रक्रिया है, जबकि कैरियर विकास (Career Development) संगठन द्वारा कर्मचारियों की कैरियर-आवश्यकताओं को संगठनात्मक अवसरों से जोड़ने की सतत, औपचारिक प्रक्रिया है। टी.वी. राव के समेकित HRD मॉडल में कैरियर नियोजन को क्षमता मूल्यांकन (Potential Appraisal) व उत्तराधिकार नियोजन (Succession Planning) से सीधे जोड़ा गया है, जिससे संगठन भावी नेतृत्व-आवश्यकताओं की समय रहते पहचान कर सके।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • फ्लिप्पो की HRM परिभाषा — छह कार्य: प्राप्ति, विकास, प्रतिकर, एकीकरण, अनुरक्षण, पृथक्करण (PDCIMS)।
  • डेल योडर — HRM के क्षेत्र (scope) को 11 कार्य-क्षेत्रों में विभाजित किया।
  • HRD शब्द के प्रवर्तक — लियोनार्ड नाडलर (1969); भारत में HRD के जनक — टी.वी. राव।
  • टी.वी. राव का समेकित HRD मॉडल — निष्पादन मूल्यांकन, क्षमता मूल्यांकन, कैरियर नियोजन, प्रशिक्षण, OD, पुरस्कार, QWL, HRIS।
  • भर्ती — सकारात्मक प्रक्रिया; चयन — नकारात्मक/निर्मूलनकारी प्रक्रिया (फ्लिप्पो)।
  • चयन में क्रमिक-बाधा तकनीक — योडर द्वारा "गो, नो-गो गेज" नाम दिया गया।
  • प्रशिक्षण-मूल्यांकन के किर्कपैट्रिक के 4 स्तर — प्रतिक्रिया, अधिगम, व्यवहार, परिणाम।
  • आधुनिक निष्पादन मूल्यांकन विधियाँ — 360-डिग्री फीडबैक, MBO (ड्रकर), BARS, मूल्यांकन केंद्र, संतुलित स्कोरकार्ड।
  • उचित वेतन समिति (1948) की तीन-स्तरीय वेतन अवधारणा — न्यूनतम, उचित व निर्वाह मजदूरी।

परीक्षा टिप्स

  • विचारक-सिद्धांत जोड़ियों (फ्लिप्पो-परिभाषा, डेल योडर-11 क्षेत्र, नाडलर-HRD शब्द, टी.वी. राव-भारतीय HRD मॉडल, ड्रकर-MBO) को दोनों दिशाओं से याद रखें।
  • HRM बनाम कार्मिक प्रबंधन तथा HRM बनाम HRD — दोनों तुलनाएँ बार-बार मिलाई जाती हैं; ध्यान रहे HRD, HRM का ही विकासोन्मुख उप-भाग है, समानार्थी नहीं।
  • निष्पादन मूल्यांकन की त्रुटियों (हैलो/हॉर्न/केंद्रीय प्रवृत्ति/रीसेंसी) के उदाहरण-आधारित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं — प्रत्येक त्रुटि का एक ठोस उदाहरण याद रखें।
🧠 स्मरण ट्रिक — फ्लिप्पो का PDCIMS

"प्रिय दोस्त, चलो इस मंच से प्रयाण-सफर शुरू करें" जैसा वाक्य याद रखें — Procurement (प्राप्ति), Development (विकास), Compensation (प्रतिकर), Integration (एकीकरण), Maintenance (अनुरक्षण), Separation (पृथक्करण)। ध्यान रहे, यह क्रम कर्मचारी के पूरे जीवन-चक्र को दर्शाता है — भर्ती से लेकर सेवानिवृत्ति तक।

⚠️ कन्फ्यूज़न बस्टर — HRM बनाम HRD

दोनों शब्द मिलते-जुलते लगते हैं, इसलिए परीक्षा में मिलाए जाते हैं। HRM (मानव संसाधन प्रबंधन) एक व्यापक छत्र-अवधारणा है जिसमें भर्ती, चयन, प्रतिकर, अनुशासन व पृथक्करण सहित कर्मचारी-प्रबंधन के सभी प्रशासनिक कार्य शामिल हैं — यह प्रबंधन व नियंत्रण पर केंद्रित है। HRD (मानव संसाधन विकास) HRM के भीतर स्थित एक विकासोन्मुख उप-प्रणाली है, जो केवल प्रशिक्षण, संगठन विकास, क्षमता मूल्यांकन व कैरियर नियोजन जैसी सतत विकास-गतिविधियों पर केंद्रित रहती है। त्वरित पहचान: यदि बात "प्रबंधित करने" (प्रशासनिक कार्य) की है तो HRM; यदि बात "विकसित करने" (सतत क्षमता-निर्माण) की है तो HRD।

📝 अभ्यास प्रश्न
Q1. एडविन बी. फ्लिप्पो की HRM परिभाषा में उल्लिखित छह कार्य कौन-से हैं?

✅ प्राप्ति (Procurement), विकास (Development), प्रतिकर (Compensation), एकीकरण (Integration), अनुरक्षण (Maintenance) व पृथक्करण (Separation) — संक्षेप में PDCIMS।

Q2. भर्ती व चयन में से कौन-सी प्रक्रिया "सकारात्मक" तथा कौन-सी "नकारात्मक" मानी जाती है?

✅ भर्ती सकारात्मक (आवेदक-संख्या बढ़ाती है) तथा चयन नकारात्मक/निर्मूलनकारी (अनुपयुक्त उम्मीदवारों को अस्वीकृत करती है) मानी जाती है।

Q3. व्यवहार-आधारित निर्धारित रेटिंग स्केल (BARS) संख्यात्मक रेटिंग को किससे जोड़ती है?

✅ कार्य-व्यवहार के विशिष्ट, वास्तविक उदाहरणों (specific behavioural examples) से।

Q4. "मानव संसाधन विकास (Human Resource Development)" शब्द किसने और कब प्रस्तुत किया?

✅ लियोनार्ड नाडलर (Leonard Nadler) ने वर्ष 1969 में।

Q5. उचित वेतन समिति (1948) के अनुसार तीन प्रकार की मजदूरी कौन-सी हैं?

✅ न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage), उचित मजदूरी (Fair Wage) व निर्वाह मजदूरी (Living Wage)।

सारांश

मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) फ्लिप्पो के अनुसार प्राप्ति, विकास, प्रतिकर, एकीकरण, अनुरक्षण व पृथक्करण — इन छह कार्यों के माध्यम से व्यक्तिगत, संगठनात्मक व सामाजिक उद्देश्यों की एक साथ प्राप्ति करने वाली प्रक्रिया है, जिसका क्षेत्र (डेल योडर के अनुसार) 11 उप-कार्यों में फैला है। यह पुराने, प्रतिक्रियात्मक कार्मिक प्रबंधन से आगे बढ़कर एक सक्रिय, रणनीतिक कार्य बन गया है, जिसके भीतर HRD (नाडलर व टी.वी. राव के अनुसार) कर्मचारियों के सतत विकास पर केंद्रित एक विशेष उप-प्रणाली के रूप में कार्य करता है। भर्ती (सकारात्मक) व चयन (नकारात्मक) की स्पष्ट भूमिकाएँ, प्रशिक्षण-विकास की व्यापक विधियाँ (किर्कपैट्रिक के 4 स्तर), निष्पादन मूल्यांकन की आधुनिक विधियाँ (360-डिग्री, MBO, BARS) तथा प्रतिकर व कैरियर नियोजन के मूल सिद्धांत मिलकर HRM को RAS प्रारंभिक परीक्षा के प्रबंधन खंड का एक संपूर्ण, उच्च-भार वाला टॉपिक बनाते हैं। विचारक-सिद्धांत जोड़ियों व त्रुटियों के उदाहरणों को दोनों दिशाओं से याद रखना सर्वाधिक फलदायी रणनीति है।

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