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📚 भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन

संविधान संशोधन सूची व अनुच्छेद 368 | RAS Polity

Constitutional Amendments & Article 368 | RAS Polity

⏱ 12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: मार्च 2026· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

भारतीय संविधान का संशोधन (Amendment) संविधान के प्रावधानों में परिवर्तन, संशोधन या जोड़ करने की प्रक्रिया है। यह संविधान की एक गतिशील प्रकृति को दर्शाता है जो समय और परिस्थितियों के साथ स्वयं को अनुकूल बनाता है। RPSC RAS परीक्षा में संशोधन से संबंधित प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह भारतीय राजनीतिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को समझने का मूलभूत पहलू है।

संविधान के संशोधन की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 368 में विस्तार से वर्णित है। इस विषय पर परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न, लघु उत्तरीय प्रश्न और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं। संशोधन की संख्या, प्रकार, प्रक्रिया और प्रभाव - सभी महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य अवधारणाएं

संशोधन की परिभाषा और आवश्यकता

संशोधन से तात्पर्य संविधान के किसी भी अनुच्छेद, अनुसूची या प्रावधान में आवश्यक परिवर्तन करना है। संविधान को अत्यधिक कठोर न बनाकर लचीला रखने के लिए संशोधन की प्रक्रिया आवश्यक है। समाज की बदलती परिस्थितियों, नई राजनीतिक चुनौतियों और सामाजिक विकास के अनुरूप संविधान में संशोधन किया जाता है। भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया न तो बहुत सरल है और न ही बहुत कठोर है।

अनुच्छेद 368 - संशोधन प्रक्रिया

अनुच्छेद 368 संविधान का सबसे महत्वपूर्ण अनुच्छेद है जो संशोधन से संबंधित है। इसके अनुसार संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत आवश्यक है। विशेष बहुमत का अर्थ है - प्रत्येक सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और साथ ही उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। कुछ अनुच्छेदों में संशोधन के लिए अतिरिक्त आवश्यकता यह है कि संशोधन विधेयक को कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों की अनुमति लेनी होती है।

संविधान संशोधन विधेयक की प्रक्रिया (अनुच्छेद 368)
  1. विधेयक पेशसंसद के किसी भी सदन में
  2. विशेष बहुमत से पारितदोनों सदनों में अलग-अलग
  3. राज्यों का अनुमोदनकेवल संघीय विषयों पर - आधे राज्यों के विधानमंडल
  4. राष्ट्रपति की सहमतिअनिवार्य (24वें संशोधन 1971 से)
  5. संशोधन लागू

संशोधन के प्रकार

संविधान में संशोधन तीन प्रकार से किए जा सकते हैं: (1) संसद के साधारण बहुमत द्वारा - यह अनुच्छेद 368 के दायरे से बाहर है, (2) विशेष बहुमत द्वारा, और (3) विशेष बहुमत और आधे राज्यों के अनुमोदन द्वारा - जिसमें दोनों शर्तें पूरी करनी होती हैं। संविधान की मूल संरचना को प्रभावित करने वाले संशोधनों के विरुद्ध न्यायिक समीक्षा द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा दी गई है।

प्रकारआवश्यक बहुमतउदाहरण
साधारण बहुमतसंसद के प्रत्येक सदन में उपस्थित व मतदान करने वालों का साधारण बहुमत (अनुच्छेद 368 से बाहर)नए राज्यों का गठन व सीमा परिवर्तन (अनु. 2-4), पांचवीं व छठी अनुसूची
विशेष बहुमतकुल सदस्य संख्या का बहुमत + उपस्थित व मतदान करने वालों का दो-तिहाईमौलिक अधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्व और अधिकांश अनुच्छेद
विशेष बहुमत + राज्यों का अनुमोदनविशेष बहुमत + कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलराष्ट्रपति का निर्वाचन (अनु. 54-55), अनु. 73 व 162, संघ-राज्य विधायी संबंध, सातवीं अनुसूची, अनु. 368

मूल संरचना सिद्धांत

सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) वाद में 7:6 के बहुमत से यह निर्णय दिया कि संसद संविधान की मूल संरचना को संशोधित नहीं कर सकती। मूल संरचना में संविधान की बुनियादी विशेषताएं जैसे संघीय व्यवस्था, लोकतंत्र, संसदीय प्रणाली, विधि का शासन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, राज्यों की शक्तियों का संरक्षण, धर्मनिरपेक्षता, समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता शामिल हैं। यह सिद्धांत संविधान की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

संशोधनों का ऐतिहासिक विकास

अब तक भारतीय संविधान में 106 संशोधन किए जा चुके हैं (106वां: नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023)। कुछ महत्वपूर्ण संशोधन नीचे तालिका में दिए गए हैं।

संशोधनवर्षप्रमुख विषय
पहला1951मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध; नौवीं अनुसूची जोड़ी गई
सातवां1956राज्य पुनर्गठन - राज्यों का क, ख, ग, घ वर्गीकरण समाप्त
10वां1961दादरा और नगर हवेली का भारत में विलय
15वां1963उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष
24वां1971संसद को मौलिक अधिकार संशोधित करने की शक्ति; राष्ट्रपति की सहमति अनिवार्य
26वां1971रियासतों के शासकों के प्रिवी पर्स समाप्त
42वां1976"लघु संविधान" - प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता; मौलिक कर्तव्य (अनु. 51क)
44वां1978संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार से हटा, अनु. 300क में रखा गया
52वां1985दल-बदल विरोधी कानून (दसवीं अनुसूची)
61वां1989मताधिकार की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष
73वां / 74वां1992पंचायती राज / नगरपालिका
86वां2002शिक्षा का अधिकार (अनु. 21क)
91वां2003दल-बदल कानून में सुधार; मंत्रिपरिषद का आकार सदन की सदस्य संख्या के 15% तक सीमित
97वां2011सहकारी समितियां
101वां2016वस्तु एवं सेवा कर (GST)
102वां2018राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा
103वां2019आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) को 10% आरक्षण
106वां2023लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण

महत्वपूर्ण तथ्य

संशोधन की प्रक्रिया के मुख्य चरण:

  • संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है
  • यदि राज्यों की अनुमति आवश्यक है तो विधेयक पारित होने के बाद राज्यों को भेजा जाता है
  • कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं को स्वीकृति देनी होती है
  • राष्ट्रपति की अनुमति से संशोधन लागू हो जाता है

संशोधन की सीमाएं:

  • संविधान की मूल संरचना को संशोधित नहीं किया जा सकता
  • नागरिकों के मौलिक अधिकारों को पूर्णतः समाप्त नहीं किया जा सकता
  • न्यायिक समीक्षा का अधिकार बनाए रखा जाता है

राज्यों के अनुमोदन वाले विषय: राष्ट्रपति का निर्वाचन (अनुच्छेद 54-55), संघ व राज्यों की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार (अनुच्छेद 73, 162), उच्चतम व उच्च न्यायालय से जुड़े प्रावधान, संघ-राज्य विधायी संबंध, सातवीं अनुसूची, संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व और अनुच्छेद 368 - इनके संशोधन के लिए विशेष बहुमत के साथ आधे राज्यों का अनुमोदन भी चाहिए। मौलिक अधिकारों जैसे अन्य अनुच्छेदों के लिए केवल विशेष बहुमत पर्याप्त है।

राजस्थान विशेष

राजस्थान के संदर्भ में संशोधनों का महत्व इस प्रकार है: 7वें संशोधन (1956) द्वारा राज्यों का क, ख, ग, घ वर्गीकरण समाप्त हुआ और 1 नवंबर 1956 को राजस्थान अपने वर्तमान स्वरूप में आया। 26वें संशोधन (1971) द्वारा रियासतों के शासकों के प्रिवी पर्स और विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए।

राजस्थान राज्य में पंचायती राज संस्थाओं की स्थापना के लिए 73वें संशोधन का विशेष महत्व है। इस संशोधन के माध्यम से राजस्थान में गांव स्तर पर प्रशासन को मजबूत किया गया।

परीक्षा पैटर्न

RPSC RAS परीक्षा में संशोधन से संबंधित प्रश्नों के प्रकार:

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): बहुविकल्पीय प्रश्नों में संशोधन के प्रकार, संख्या, प्रक्रिया और विशेष संशोधनों के बारे में प्रश्न पूछे जा सकते हैं। अनुच्छेद 368 की जानकारी, मूल संरचना सिद्धांत, महत्वपूर्ण संशोधन और उनके प्रभाव से संबंधित प्रश्न सामान्य रूप से आते हैं।

मुख्य परीक्षा (Mains): लिखित परीक्षा में संशोधन की प्रक्रिया, मूल संरचना सिद्धांत, महत्वपूर्ण संशोधन और उनके राजनीतिक प्रभाव पर विस्तृत उत्तर मांगे जाते हैं।

साक्षात्कार (Interview): संशोधन प्रक्रिया की समझ, मूल संरचना सिद्धांत और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

स्मरण युक्तियां

संशोधन याद रखने के सूत्र:

तीन प्रकार का बहुमत: 'साधारण विशेष राज्य' - साधारण बहुमत (अनु. 368 से बाहर), विशेष बहुमत (कुल सदस्यों का बहुमत + उपस्थित व मतदान करने वालों का दो-तिहाई), राज्य अनुमति (आधे राज्य)।

महत्वपूर्ण संशोधन संख्याएं:

  • 1वां = मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध, नौवीं अनुसूची
  • 10वां = दादरा-नगर हवेली का विलय
  • 42वां = लघु संविधान (समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता, मौलिक कर्तव्य)
  • 44वां = संपत्ति का अधिकार हटा (अनु. 300क)
  • 52वां = दल-बदल कानून
  • 73वां/74वां = पंचायत/नगरपालिका
  • 86वां = शिक्षा का अधिकार
  • 101वां = GST; 102वां = राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग

मूल संरचना के मुख्य तत्व: 'संघीय लोकतंत्रिक संसदीय शासन' - संघीय व्यवस्था, लोकतंत्र, संसदीय प्रणाली, विधि का शासन, मौलिक अधिकार, न्यायिक समीक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता।

अनुच्छेद 368 की याद रखने की बातें: यह अनुच्छेद स्वयं संविधान को संशोधित करने की शक्ति प्रदान करता है। संसद को संविधान में संशोधन का अधिकार है, पर यह असीमित नहीं है। न्यायालय मूल संरचना की रक्षा करता है।

व्यावहारिक टिप्स: परीक्षा में संशोधन के प्रश्नों का उत्तर देते समय अनुच्छेद 368, मूल संरचना सिद्धांत, विभिन्न प्रकार के संशोधन और उनकी प्रक्रिया को स्पष्ट करें। राजस्थान से संबंधित विशेष बातों को जोड़ने से उत्तर अधिक प्रभावी हो जाता है।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
  • •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
  • •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
  • •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
  • •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।
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इस टॉपिक से जुड़े पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)

आधिकारिक प्रश्नपत्रों के असली प्रश्न, उत्तर सहित।

  1. RAS 2015

    सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। सूची-I (संविधान संशोधन का प्रावधान) (a) अनुच्छेद 19 के अंतर्गत सहकारी समितियाँ बनाने का अधिकार (b) बैकलॉग रिक्तियों को भरने में SC/ST आरक्षण का संरक्षण (c) राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग का गठन (d) मंत्रिपरिषद के आकार को सीमित करना सूची-II (संविधान संशोधन की संख्या) (I) 81वाँ संशोधन (II) 91वाँ संशोधन (III) 97वाँ संशोधन (IV) 99वाँ संशोधन

    1. (A) a-I, b-IV, c-II, d-III
    2. (B) a-III, b-I, c-IV, d-II
    3. (C) a-II, b-III, c-I, d-IV
    4. (D) a-III, b-II, c-IV, d-I

    उत्तर: (B) a-III, b-I, c-IV, d-II

  2. RAS 2013

    संवैधानिक संशोधनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: - (i) अनुच्छेद 368 में संवैधानिक संशोधन की दो विधियाँ उल्लिखित हैं। - (ii) संवैधानिक संशोधन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है। - (iii) संवैधानिक संशोधन विधेयक पर संसद के दोनों सदनों के बीच किसी विवाद की स्थिति में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है। - (iv) राष्ट्रपति संवैधानिक संशोधन विधेयक पर वीटो नहीं कर सकते। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

    1. (A) केवल (i) और (iii)
    2. (B) केवल (i) और (iv)
    3. (C) केवल (ii) और (iv)
    4. (D) (ii), (iii) और (iv)

    उत्तर: (B) केवल (i) और (iv)

  3. RAS 2015

    निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : (I) 44वें संविधान संशोधन, 1978 के माध्यम से राज्य नीति के सभी निदेशक तत्वों को अनुच्छेद 14 और 19 में उल्लिखित मौलिक अधिकारों पर वरीयता दी गई है। (II) उच्चतम न्यायालय ने मिनर्वा मिल्स मामले, 1980 में अपने निर्णय में यह व्यवस्था दी कि केवल अनुच्छेद 39 (b) और (c) में उल्लिखित राज्य नीति के निदेशक तत्वों को अनुच्छेद 14 और 19 के मौलिक अधिकारों पर दी गई वरीयता संवैधानिक है।

    1. (A) केवल I सही है।
    2. (B) केवल II सही है।
    3. (C) I और II दोनों सही हैं।
    4. (D) न तो I और न ही II सही है।

    उत्तर: (B) केवल II सही है।

  4. RAS 2015

    मिज़ोरम को निम्नलिखित में से किस संविधान संशोधन द्वारा राज्य का दर्जा प्रदान किया गया- नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :

    1. (A) 54वाँ
    2. (B) 55वाँ
    3. (C) 52वाँ
    4. (D) 53वाँ

    उत्तर: (D) 53वाँ

  5. RAS 2013

    संविधान के अनुच्छेद 356 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: - (i) राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता एक वस्तुनिष्ठ वास्तविकता है। - (ii) इस अनुच्छेद के अंतर्गत की गई उद्घोषणा की समीक्षा उच्चतम न्यायालय द्वारा की जा सकती है। - (iii) इस उद्घोषणा के साथ राज्य विधानसभा को भंग किया जा सकता है। - (iv) इस उद्घोषणा का संसद के प्रत्येक सदन द्वारा दो माह के भीतर अनुमोदन किया जाना होता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

    1. (A) केवल (i), (ii) और (iv)
    2. (B) केवल (i), (ii) और (iii)
    3. (C) केवल (iii) और (iv)
    4. (D) (ii), (iii) और (iv)

    उत्तर: (A) केवल (i), (ii) और (iv)

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