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📚 भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन

संविधान की प्रस्तावना: पूर्ण पाठ, शब्द, संशोधन | RAS Notes

Preamble of the Constitution: Full Text & Amendments | RAS

⏱ 12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: मार्च 2026· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

भारतीय संविधान की प्रस्तावना हमारे राष्ट्र के आधारभूत मूल्यों और दृष्टिकोण का एक शक्तिशाली प्रतिबिंब है। यह प्रस्तावना जवाहरलाल नेहरू के उद्देश्य प्रस्ताव (13 दिसंबर 1946) पर आधारित है, जिसे संविधान सभा की प्रारूप समिति (अध्यक्ष: डॉ. भीमराव अंबेडकर) ने अंतिम रूप दिया; पंडित ठाकुर दास भार्गव ने इसे "संविधान की आत्मा" कहा था। यह भारत के लिए एक निर्देश पत्र है जो समाज के प्रत्येक पहलू को प्रभावित करता है। RPSC RAS परीक्षा में प्रस्तावना से कई प्रश्न पूछे जाते हैं क्योंकि यह भारतीय शासन प्रणाली की बुनियाद तैयार करती है। प्रस्तावना के माध्यम से हम भारत के संविधान के उद्देश्य, सिद्धांत और आदर्शों को समझ सकते हैं।

मुख्य अवधारणाएं

भारत एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में

प्रस्तावना में "संप्रभु" शब्द का अर्थ है कि भारत पूर्णतः स्वतंत्र राष्ट्र है। भारत किसी अन्य राष्ट्र या सत्ता के अधीन नहीं है। भारत अपने आंतरिक और बाह्य मामलों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है। संप्रभुता का अर्थ है कि भारत के पास स्वयं को शासित करने की पूर्ण शक्ति है। यह शब्द भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उद्देश्यों को प्रतिफलित करता है। भारतीय संविधान में यह सिद्धांत मौलिक अधिकारों और नागरिकों की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था का संस्थापन

प्रस्तावना में "लोकतांत्रिक" शब्द से तात्पर्य है कि भारत में सत्ता जनता के हाथों में निहित है। भारतीय लोकतंत्र सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के सिद्धांत पर आधारित है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक वयस्क नागरिक को वोट देने का अधिकार है, चाहे उसकी जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है। भारतीय संसद, राज्य विधानसभाएं और स्थानीय निकाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

गणराज्य के रूप में स्थापना

प्रस्तावना में "गणराज्य" शब्द का अर्थ है कि भारत का कोई राजा नहीं होगा, बल्कि राष्ट्र का प्रमुख एक निर्वाचित राष्ट्रपति होगा। यह राजतंत्र से भिन्न है। गणराज्य में सत्ता का हस्तांतरण वंशानुगत आधार पर नहीं होता, बल्कि निर्वाचन के माध्यम से होता है। भारत के राष्ट्रपति पांच वर्ष की अवधि के लिए चुने जाते हैं। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि सर्वोच्च सत्ता किसी व्यक्ति विशेष में केंद्रित न हो।

धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत

प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत निहित है, यद्यपि इस शब्द को 42वें संविधान संशोधन (1976) के द्वारा जोड़ा गया था। धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है कि राज्य किसी भी धर्म को विशेष महत्व नहीं देगा और सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करेगा। यह सिद्धांत धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करता है और सांप्रदायिक सद्भावना को बढ़ावा देता है। भारत में सभी नागरिकों को अपने धर्म को मानने और प्रचार करने की स्वतंत्रता है।

सामाजिक समानता और न्याय

प्रस्तावना में सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय और राजनीतिक न्याय का वर्णन है। ये तीनों न्याय भारतीय समाज को समान आधार पर विकसित करने का लक्ष्य रखते हैं। सामाजिक न्याय का अर्थ है जातिगत भेदभाव को समाप्त करना। आर्थिक न्याय का अर्थ है कि सभी को आजीविका और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना। राजनीतिक न्याय का अर्थ है कि सभी को समान राजनीतिक अधिकार प्रदान करना। ये सिद्धांत भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक सिद्धांतों में परिलक्षित होते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

प्रस्तावना का मूल पाठ: "हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ई॰ को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"

संविधान की प्रकृति: प्रस्तावना से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय संविधान जनता की इच्छा से बनाया गया है, न कि किसी बाहरी शक्ति द्वारा थोपा गया।

संशोधन: प्रस्तावना में 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा "समाजवादी" और "धर्मनिरपेक्ष" शब्द जोड़े गए थे। यह संशोधन इंदिरा गांधी के कार्यकाल में किया गया था।

न्यायिक महत्व: बेरूबारी संघ मामले (1960) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है और न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं। केशवानंद भारती मामले (1973) में इस मत को बदलते हुए कहा गया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है और संविधान की मूल संरचना को दर्शाती है, तथा संसद इसे संशोधित कर सकती है पर मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती। एलआईसी बनाम उपभोक्ता शिक्षा मामले (1995) में इसकी पुनः पुष्टि हुई।

चार उद्देश्य: प्रस्तावना भारत के नागरिकों के लिए न्याय (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक), स्वतंत्रता (विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना की), समता (प्रतिष्ठा और अवसर की) तथा बंधुत्व (व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता-अखंडता सुनिश्चित करने वाला) का संकल्प करती है।

शब्दअर्थकब जोड़ा गयास्रोत/प्रेरणा
संप्रभुकिसी बाहरी सत्ता के अधीन नहींमूल, 1949स्वतंत्रता संग्राम
समाजवादीआर्थिक-सामाजिक समानता का लक्ष्य42वां संशोधन, 1976—
पंथनिरपेक्षराज्य किसी धर्म को विशेष दर्जा नहीं देगा42वां संशोधन, 1976—
लोकतंत्रात्मकसत्ता जनता के हाथ मेंमूल, 1949—
गणराज्यनिर्वाचित राष्ट्राध्यक्ष, कोई राजा नहींमूल, 1949—
न्यायसामाजिक, आर्थिक, राजनीतिकमूल, 1949रूसी क्रांति (1917)
स्वतंत्रता, समता, बंधुत्वविचार/अवसर की स्वतंत्रता-समानता, भाईचारामूल, 1949फ्रांसीसी क्रांति (1789)
एकता और अखंडतापहले केवल "एकता" था42वां संशोधन, 1976 ("अखंडता" जोड़ा)—
प्रस्तावना से जुड़े प्रमुख वाद और घटनाएं
  1. 13 दिसंबर 1946नेहरू का उद्देश्य प्रस्ताव
  2. 26 नवंबर 1949प्रस्तावना अंगीकृत
  3. 1960बेरूबारी संघ — प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं, अप्रवर्तनीय
  4. 1973केशवानंद भारती — प्रस्तावना संविधान का भाग, मूल संरचना दर्शाती है
  5. 197642वां संशोधन — समाजवादी, पंथनिरपेक्ष जोड़े गए; "एकता" की जगह "एकता और अखंडता"

राजस्थान विशेष

राजस्थान का संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राजस्थान के प्रतिनिधियों ने संविधान सभा में सक्रिय भूमिका निभाई थी। डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रस्तावना के विचार भारत की विविधता को समझते हैं, और राजस्थान इसी विविधता का एक प्रमुख उदाहरण है। राजस्थान में भी, जैसे देश के अन्य राज्यों में, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय की व्यवस्था उसी एक संविधान और उसकी प्रस्तावना के अंतर्गत चलती है — राज्य का कोई अलग संविधान नहीं है।

परीक्षा पैटर्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न: RPSC RAS परीक्षा में प्रस्तावना से बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। ये प्रश्न प्रस्तावना के मुख्य विचारों, संशोधनों और कानूनी महत्व से संबंधित हो सकते हैं।

निबंधात्मक प्रश्न: RPSC की मुख्य परीक्षा में प्रस्तावना पर विस्तृत उत्तर मांगे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए: "प्रस्तावना भारतीय संविधान की आत्मा कैसे है? विस्तार से समझाइए।"

तुलनात्मक प्रश्न: प्रस्तावना को अन्य देशों की प्रस्तावनाओं से तुलना करने वाले प्रश्न भी आ सकते हैं।

कानूनी निर्णय: सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय जो प्रस्तावना पर आधारित हैं, उनसे प्रश्न आ सकते हैं।

स्मरण युक्तियां

याद रखने के लिए मुख्य बातें: पांच स्वरूप — "संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य" — और चार उद्देश्य — "न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व" — प्रस्तावना के केंद्रबिंदु हैं।

संशोधन की तिथि: 42वां संविधान संशोधन 18 दिसंबर 1976 को किया गया था। इसे "लघु संविधान" भी कहा जाता है।

तीन न्याय याद रखें: (1) सामाजिक न्याय, (2) आर्थिक न्याय, (3) राजनीतिक न्याय - ये तीनों प्रस्तावना का अभिन्न अंग हैं।

महत्वपूर्ण मामले: बेरूबारी संघ मामला (1960), केशवानंद भारती मामला (1973), एस.आर. बोम्मई मामला (1994) और एलआईसी बनाम उपभोक्ता शिक्षा मामला (1995) जैसे महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय प्रस्तावना से संबंधित हैं।

तुलनात्मक अध्ययन: अमेरिकी संविधान की प्रस्तावना के साथ भारतीय प्रस्तावना की तुलना करें। अमेरिकी प्रस्तावना में "We the people" जबकि भारतीय प्रस्तावना में "हम भारत के लोग" है।

चार्ट बनाएं: प्रस्तावना के विभिन्न पहलुओं को चार्ट के रूप में बनाएं जो दृश्य स्मृति में मदद करे।

समसामयिक जुड़ाव: वर्तमान राजनीतिक घटनाओं को प्रस्तावना के सिद्धांतों से जोड़कर समझें। इससे प्रस्तावना का व्यावहारिक महत्व समझ में आएगा।

निष्कर्ष: प्रस्तावना भारतीय संविधान का मूल आधार है। RPSC RAS परीक्षा की तैयारी के लिए प्रस्तावना का गहन अध्ययन करना अत्यावश्यक है। इसे बार-बार पढ़ें, समझें और विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देने का अभ्यास करें।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
  • •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
  • •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
  • •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
  • •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।
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  1. RAS 2015

    संविधान संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति की वीटो शक्ति, “अपनी अनुमति देंगे” शब्द प्रतिस्थापित कर, किस संशोधन द्वारा समाप्त की गई-

    1. (A) तेईसवाँ संशोधन
    2. (B) चौबीसवाँ संशोधन
    3. (C) बयालीसवाँ संशोधन
    4. (D) चौवालीसवाँ संशोधन

    उत्तर: (B) चौबीसवाँ संशोधन

  2. RAS 2023

    भारत के संविधान की निम्नलिखित में से कौन-सी अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन द्वारा संविधान में जोड़ी गई थी?

    1. (A) छठी
    2. (B) दसवीं
    3. (C) नौवीं
    4. (D) सातवीं

    उत्तर: (C) नौवीं

  3. RAS 2021

    राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से संबंधित किस संविधान संशोधन अधिनियम को उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया था?

    1. (A) 98वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
    2. (B) 97वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
    3. (C) 99वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
    4. (D) 100वाँ संविधान संशोधन अधिनियम

    उत्तर: (C) 99वाँ संविधान संशोधन अधिनियम

  4. RAS 2015

    सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर पहचानिए : सूची-I (वाद) (a) ए.के. गोपालन (b) रोमेश थापर (c) शंकरी प्रसाद (d) चंपकम दोराइराजन सूची-II (विषय) (I) शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में समानता (II) संविधान संशोधन की संसद की शक्ति (III) निवारक निरोध की प्रक्रिया (IV) वाक्-स्वातंत्र्य पर प्रतिबंध

    1. (A) a-III, b-IV, c-II, d-I
    2. (B) a-II, b-IV, c-I, d-III
    3. (C) a-IV, b-III, c-II, d-I
    4. (D) a-I, b-II, c-III, d-IV

    उत्तर: यह प्रश्न आयोग/बोर्ड ने अंतिम उत्तर-कुंजी में हटा दिया था।

  5. RAS 2024

    भारत के संविधान में किस वर्ष यह जोड़ा गया कि राज्य आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण किसी भी नागरिक को निःशुल्क विधिक सहायता सुनिश्चित करेगा ?

    1. (A) 1978
    2. (B) 1976
    3. (C) 1975
    4. (D) 1979

    उत्तर: (B) 1976

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