परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
विकास की अवधारणा भारतीय संविधान और शासन व्यवस्था के मूल आधार को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। RPSC RAS परीक्षा में संविधान के अंतर्गत विकास से संबंधित प्रश्न सामान्य अध्ययन के प्रथम पत्र में पूछे जाते हैं। विकास केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय प्रगति को समेकित करता है। भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों में विकास के विभिन्न आयाम प्रतिफलित होते हैं। राजस्थान के संदर्भ में भी विकास का अध्ययन अत्यावश्यक है क्योंकि यह राज्य के सामाजिक और आर्थिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य अवधारणाएं
१. आर्थिक विकास और समावेशी विकास
आर्थिक विकास से तात्पर्य राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में वृद्धि से है। भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद 38 में राज्य को सामाजिक व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश दिया गया है जो सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय को बढ़ावा दे। समावेशी विकास का अर्थ है कि विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचें, विशेषकर अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों तक। भारतीय संविधान में समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14-18) और शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24) विकास को समावेशी बनाने के लिए व्यवस्थाएं हैं।
२. मानव विकास सूचकांक
मानव विकास सूचकांक (HDI) विकास का एक व्यापक माप है जो जीवन प्रत्याशा, शिक्षा स्तर और प्रति व्यक्ति आय को मापता है। शिक्षा का अधिकार अनुच्छेद 21A (86वां संशोधन, 2002) के अंतर्गत मौलिक अधिकार है; अनुच्छेद 45 एक नीति निदेशक तत्व है जो अब 6 वर्ष तक के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल व शिक्षा से संबंधित है। भारत ने सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को अपनाया है जो 2030 तक गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित हैं। राजस्थान में मानव विकास सूचकांक में सुधार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
३. सतत विकास
सतत विकास वह विकास है जो वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करता है। पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48A में पर्यावरण संरक्षण का निर्देश दिया गया है। जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्रदूषण से निपटना सतत विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत ने पेरिस समझौते को स्वीकार किया है और 2070 तक कार्बन तटस्थता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
४. क्षेत्रीय विकास और विषमता
भारत में विभिन्न क्षेत्रों में विकास में भारी असमानता है। कुछ राज्य अत्यधिक विकसित हैं जबकि अन्य पिछड़े हुए हैं। संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के तहत समुदाय के भौतिक संसाधनों के समान वितरण का निदेश है; अनुच्छेद 39A समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित है। राजस्थान जैसे राज्यों में आर्थिक पिछड़ापन को दूर करने के लिए विशेष ध्यान दिया जाता है। क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने के लिए केंद्रीय और राज्य सरकारें विभिन्न विकास योजनाएं क्रियान्वित करती हैं।
५. सामाजिक विकास और न्याय
सामाजिक विकास में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पोषण और सामाजिक सुरक्षा शामिल है। संविधान के भाग III में मौलिक अधिकार और भाग IV में नीति निदेशक तत्व सामाजिक विकास के लिए व्यवस्थाएं करते हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के विकास के लिए विशेष प्रावधान (अनुच्छेद 15, 16, 17) किए गए हैं। महिला सशक्तिकरण, बाल कल्याण और सामाजिक सुरक्षा भारतीय विकास का केंद्रबिंदु है।
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 38 | सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक न्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्था |
| 39 | जीवन-निर्वाह के साधन व सम्पदा के समान वितरण का निदेश (39b, 39c) |
| 39A | समान न्याय व निःशुल्क विधिक सहायता |
| 41 | बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी की स्थिति में कार्य व सार्वजनिक सहायता का अधिकार |
| 43 | जीवन-निर्वाह योग्य वेतन व अच्छी कार्य स्थितियां |
| 45 | 6 वर्ष तक के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल व शिक्षा (शिक्षा का मौलिक अधिकार अब अनु. 21A में है) |
| 47 | सार्वजनिक स्वास्थ्य व पोषण स्तर में सुधार |
| 48A | पर्यावरण, वन व वन्य जीवन का संरक्षण |
महत्वपूर्ण तथ्य
नीति निदेशक तत्व: भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में नीति निदेशक तत्व दिए गए हैं जो राज्य को सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए सुझाव देते हैं। ये न्यायसंगत नहीं हैं लेकिन शासन के मूल सिद्धांत हैं।
वित्तीय आयोग: केंद्र और राज्यों के बीच संसाधनों का वितरण वित्त आयोग द्वारा किया जाता है। 15वें वित्त आयोग (2021-26) की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई; वर्तमान में 16वां वित्त आयोग (अध्यक्ष: अरविंद पनगढ़िया), 2026-31 की अवधि के लिए कार्यरत है।
NITI आयोग: जनवरी 2015 में राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान (NITI Aayog - National Institution for Transforming India) की स्थापना की गई, जो सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कार्य करता है।
महत्वाकांक्षी जिलों का कार्यक्रम: सरकार ने पिछड़े जिलों के विकास के लिए 2018 में महत्वाकांक्षी जिलों का कार्यक्रम शुरू किया; राजस्थान के बारां, धौलपुर, जैसलमेर, करौली और सिरोही इस कार्यक्रम में शामिल हैं।
सतत विकास लक्ष्य (SDGs): संयुक्त राष्ट्र ने 2030 तक 17 सतत विकास लक्ष्य निर्धारित किए हैं।
राजस्थान विशेष
राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है और इसका विकास राष्ट्रीय प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। राजस्थान में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है और ग्रामीण विकास यहां की प्रमुख आवश्यकता है। राज्य में पर्यटन, खनन और ऊर्जा क्षेत्र विकास के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। राजस्थान को जल-संकट का सामना करना पड़ता है, इसलिए जल संरक्षण और सतत विकास यहां बेहद प्रासंगिक है। राज्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और अन्य विकास योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।
राजस्थान में साक्षरता दर (66.11%, जनगणना 2011) राष्ट्रीय औसत (74.04%) से कम है, इसलिए शिक्षा विकास यहां की सर्वोच्च प्राथमिकता है। महिला सशक्तिकरण के लिए राज्य ने कई योजनाएं चलाई हैं। आदिवासी जनसंख्या का विकास भी राजस्थान में एक चुनौती है। राज्य ने स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन के माध्यम से बुनियादी ढांचे का विकास किया है।
परीक्षा पैटर्न
RPSC RAS परीक्षा में विकास संबंधी प्रश्न निम्नलिखित रूपों में आते हैं:
प्रश्न प्रकार 1: बहु-विकल्पीय प्रश्न (MCQ) - विकास की परिभाषा, नीति निदेशक तत्व, SDG, HDI आदि से सीधे प्रश्न।
प्रश्न प्रकार 2: तुलनात्मक प्रश्न - आर्थिक विकास बनाम समावेशी विकास, सतत विकास बनाम परंपरागत विकास जैसे तुलनाएं।
प्रश्न प्रकार 3: मामला अध्ययन - राजस्थान या भारत के किसी विशेष क्षेत्र के विकास संबंधी केस स्टडी।
प्रश्न प्रकार 4: विश्लेषणात्मक प्रश्न - विकास के विभिन्न आयामों का विश्लेषण और मूल्यांकन।
स्मरण युक्तियां
संविधान अनुच्छेद याद रखें: विकास से संबंधित प्रमुख अनुच्छेद - 38, 39, 39A, 40, 41-43, 45, 47-48A को याद रखें।
NITI आयोग की विशेषताएं: "NITI = National Institution for Transforming India" - यह एक थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है।
SDG के 17 लक्ष्य: गरीबी उन्मूलन (1), भूख समाप्ति (2), स्वास्थ्य (3), शिक्षा (4), लैंगिक समानता (5), स्वच्छ जल (6), सस्ती ऊर्जा (7) आदि।
विकास के स्तंभ: आर्थिक + सामाजिक + पर्यावरणीय = सतत विकास
मुख्य सूचकांक याद रखें: HDI (मानव विकास), जीडीपी (आर्थिक), साक्षरता दर (सामाजिक)।
इस विषय की गहन समझ के लिए भारतीय संविधान के मूल पाठ, राजस्थान की विकास योजनाएं और सतत विकास लक्ष्यों से संबंधित सरकारी प्रतिवेदनों का अध्ययन करें। नियमित अभ्यास और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण आपकी तैयारी को मजबूत करेगा।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
- •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
- •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
- •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
- •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।