परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
भारतीय संविधान के अनुसार उपराष्ट्रपति (Vice President) देश का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है। यह पद राष्ट्रपति के बाद आता है और राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। RPSC RAS परीक्षा के भारतीय संविधान खंड में यह विषय महत्वपूर्ण है। यह विषय राजनीतिक प्रणाली, संविधानिक पद और शक्तियों के वितरण को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उपराष्ट्रपति का पद भारतीय राजनीति में एक विशिष्ट स्थान रखता है क्योंकि यह विधायिका और कार्यपालिका दोनों से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर, या राष्ट्रपति के अनुपस्थित अथवा अस्वस्थ होने पर, उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन करता है। परीक्षा की तैयारी के दौरान इस पद की संरचना, योग्यता, चुनाव प्रक्रिया और कार्यों को विस्तार से समझना आवश्यक है।
मुख्य अवधारणाएं
उपराष्ट्रपति की परिभाषा और संवैधानिक स्थिति
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। यह एक संवैधानिक पद है; अनुच्छेद 64 के अनुसार उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति (Chairman) होता है। उपराष्ट्रपति की शक्तियां और कार्य संविधान द्वारा निर्धारित किए जाते हैं। संविधान के भाग V में अनुच्छेद 63 से 71 तक उपराष्ट्रपति से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
उपराष्ट्रपति की योग्यताएं
उपराष्ट्रपति के लिए अनुच्छेद 66(3) और 66(4) में निर्धारित योग्यताएं इस प्रकार हैं: वह भारत का नागरिक होना चाहिए। आयु कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए। राज्यसभा का सदस्य होने के लिए योग्य होना चाहिए। उसे किसी सरकार के अधीन किसी लाभकारी पद पर नहीं होना चाहिए। ये योग्यताएं परीक्षा में बार-बार पूछी जाती हैं और सभी को याद रखना आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति का चुनाव
उपराष्ट्रपति का चुनाव एक अप्रत्यक्ष चुनाव (Indirect Election) प्रक्रिया द्वारा होता है। संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य (निर्वाचित और मनोनीत दोनों) आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति में एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) द्वारा गुप्त मतदान से उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं (अनुच्छेद 66)। राज्य विधानसभाओं के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते, यही राष्ट्रपति के चुनाव से मुख्य अंतर है। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, पर वह उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक पद पर बना रहता है। वह पुनः चुना जा सकता है। वह राष्ट्रपति को संबोधित त्यागपत्र देकर किसी भी समय पद छोड़ सकता है।
उपराष्ट्रपति की शक्तियां और कार्य
उपराष्ट्रपति की प्रमुख शक्तियां और कार्य निम्नलिखित हैं: राज्यसभा का पदेन सभापति होना उपराष्ट्रपति का मुख्य कार्य है। राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करता है। राष्ट्रपति की मृत्यु, त्यागपत्र या पद से हटाए जाने की स्थिति में, या राष्ट्रपति के अनुपस्थित अथवा अस्वस्थ होने पर, कार्यवाहक राष्ट्रपति (Acting President) के रूप में कार्य करता है (अनुच्छेद 65); रिक्ति की स्थिति में यह अवधि अधिकतम 6 माह की होती है, जिसके भीतर नया राष्ट्रपति चुना जाना आवश्यक है। राज्यसभा में मतों की बराबरी होने पर ही सभापति निर्णायक मत (casting vote) देता है; वह सदस्य के रूप में सामान्य मतदान नहीं करता। राष्ट्रपति के कार्य करते समय वह राज्यसभा के सभापति के कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करता।
उपराष्ट्रपति को पद से हटाना
अनुच्छेद 67(ख) में उपराष्ट्रपति को पद से हटाने की प्रक्रिया दी गई है। इसके लिए राज्यसभा में कम से कम 14 दिन की पूर्व सूचना देकर प्रस्ताव लाया जाता है, जो राज्यसभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत से पारित होना चाहिए। इसके बाद लोकसभा को साधारण बहुमत से उससे सहमत होना होता है। यह महाभियोग नहीं, विधायिका द्वारा पारित प्रस्ताव से हटाने की प्रक्रिया है और इसमें राष्ट्रपति की कोई भूमिका नहीं है। अब तक भारत में किसी भी उपराष्ट्रपति को इस प्रकार पद से हटाया नहीं गया है।
- राज्यसभा में प्रस्तावकम से कम 14 दिन की पूर्व सूचना
- राज्यसभा में पारित होनातत्कालीन सभी सदस्यों का बहुमत
- लोकसभा की सहमतिसाधारण बहुमत
- उपराष्ट्रपति पद से हटाए गए
| बिंदु | राष्ट्रपति | उपराष्ट्रपति |
|---|---|---|
| अनुच्छेद | 52-62 | 63-71 |
| निर्वाचक मंडल | संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य + राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य | संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य (मनोनीत सहित); राज्य विधानसभाएँ शामिल नहीं |
| निर्वाचन पद्धति | आनुपातिक प्रतिनिधित्व, एकल संक्रमणीय मत, गुप्त मतदान | आनुपातिक प्रतिनिधित्व, एकल संक्रमणीय मत, गुप्त मतदान |
| न्यूनतम आयु | 35 वर्ष | 35 वर्ष |
| कार्यकाल | 5 वर्ष | 5 वर्ष (उत्तराधिकारी के पद ग्रहण तक पद पर) |
| हटाने की विधि | महाभियोग (अनुच्छेद 61), दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत | राज्यसभा का प्रस्ताव + लोकसभा की सहमति (अनुच्छेद 67-ख) |
महत्वपूर्ण तथ्य
भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1952-1962) भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति थे। वे दो कार्यकाल तक उपराष्ट्रपति रहे और बाद में भारत के राष्ट्रपति (1962-1967) भी बने।
वर्तमान उपराष्ट्रपति: सी. पी. राधाकृष्णन भारत के 15वें उपराष्ट्रपति हैं; उन्होंने 12 सितंबर 2025 को पद की शपथ ली। जगदीप धनखड़ ने जुलाई 2025 में त्यागपत्र दिया था।
संविधान में संदर्भ: अनुच्छेद 63 से 71 तक उपराष्ट्रपति से संबंधित प्रावधान हैं। संविधान का भाग V कार्यपालिका से संबंधित है जिसमें उपराष्ट्रपति का स्थान है।
राज्यसभा की भूमिका: उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति है। राज्यसभा की अधिकतम संख्या 250 (238 निर्वाचित + 12 मनोनीत) हो सकती है; वर्तमान में 245 सदस्य (233 निर्वाचित + 12 मनोनीत) हैं। उपराष्ट्रपति इस सदन का सभापति होता है।
कार्यकाल: उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और वह पुनः निर्वाचित हो सकता है। कार्यकाल समाप्त होने पर भी वह उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक पद पर बना रहता है। पद रिक्त होने पर (कार्यकाल समाप्ति के अलावा) नया चुनाव यथाशीघ्र कराया जाता है (अनुच्छेद 68); राष्ट्रपति की रिक्ति वाली 6 माह की सीमा उपराष्ट्रपति पर लागू नहीं होती।
वेतन और सुविधाएं: उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में वेतन और भत्ते मिलते हैं, जो संसद द्वारा बनाई गई विधि से निर्धारित होते हैं।
- 1952-1962डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
- 1962-1967डॉ. ज़ाकिर हुसैन
- 1967-1969वी. वी. गिरि
- 1969-1974गोपाल स्वरूप पाठक
- 1974-1979बी. डी. जत्ती
- 1979-1984एम. हिदायतुल्लाह
- 1984-1987आर. वेंकटरमण
- 1987-1992शंकर दयाल शर्मा
- 1992-1997के. आर. नारायणन
- 1997-2002कृष्णकांत
- 2002-2007भैरोंसिंह शेखावत
- 2007-2017मोहम्मद हामिद अंसारी
- 2017-2022एम. वेंकैया नायडू
- 2022-2025जगदीप धनखड़ (जुलाई 2025 में त्यागपत्र)
- सितंबर 2025 सेसी. पी. राधाकृष्णन (15वें उपराष्ट्रपति)
राजस्थान विशेष
राजस्थान के सांसद (लोकसभा और राज्यसभा) उपराष्ट्रपति के चुनाव में मतदान करते हैं, जबकि राज्य विधानसभा के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत भारत के उपराष्ट्रपति (2002-2007) रहे।
परीक्षा पैटर्न
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ): RPSC RAS परीक्षा में उपराष्ट्रपति से संबंधित प्रश्न आ सकते हैं। ये प्रश्न सामान्यतः योग्यता, चुनाव प्रक्रिया, कार्यकाल और शक्तियों पर आधारित होते हैं।
विषय आधारित प्रश्न: भारतीय संविधान के संदर्भ में उपराष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति पर प्रश्न पूछे जाते हैं। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की भूमिका में अंतर पूछा जाता है।
तुलनात्मक विश्लेषण: परीक्षा में उपराष्ट्रपति और अन्य संवैधानिक पदों की तुलना पूछी जाती है। लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति (उपराष्ट्रपति) में अंतर पूछा जा सकता है।
वर्णनात्मक प्रश्न: मुख्य परीक्षा में उपराष्ट्रपति की भूमिका और महत्व पर विस्तृत प्रश्न पूछे जाते हैं। उपराष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया पर भी प्रश्न आते हैं।
स्मरण युक्तियां
संविधान अनुच्छेद: अनुच्छेद 63-71 को एक इकाई के रूप में याद रखें। "उपराष्ट्रपति = अनुच्छेद 63 से शुरू" यह याद रखें। पद से हटाने संबंधी अनुच्छेद (67) को विशेष ध्यान दें।
योग्यता याद रखने की तकनीक: "भारतीय नागरिक, 35 वर्ष, राज्यसभा योग्य, लाभकारी पद से मुक्त" - इस क्रम में याद रखें। राष्ट्रपति की न्यूनतम आयु भी 35 वर्ष है, पर उसके लिए लोकसभा की सदस्यता की योग्यता चाहिए (उपराष्ट्रपति के लिए राज्यसभा की)।
चुनाव प्रक्रिया: "दोनों सदन + एकल संक्रमणीय मत" यह सूत्र याद रखें। संसद के सभी सदस्य (लोकसभा + राज्यसभा, मनोनीत सहित) मतदान करते हैं।
मुख्य कार्य: "राज्यसभा सभापति + कार्यवाहक राष्ट्रपति" - ये दो मुख्य कार्य याद रखें। अन्य राष्ट्रीय अध्यक्षों से इसे अलग करें।
इतिहास याद रखना: भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे। उनके नाम को उनके योगदान के साथ जोड़ें। उन्होंने बाद में राष्ट्रपति बनने का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।
तुलनात्मक अध्ययन: राष्ट्रपति (अनु. 52-62), उपराष्ट्रपति (अनु. 63-71), प्रधानमंत्री (अनु. 74-75) को एक चार्ट में तुलना करें। इससे प्रत्येक पद की विशेषताएं स्पष्ट हो जाएंगी।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु: अनुच्छेद 66(3) में निर्धारित योग्यताओं को याद रखें। हटाने की प्रक्रिया (राज्यसभा में प्रस्ताव, 14 दिन की पूर्व सूचना, फिर लोकसभा की सहमति) को ध्यान दें। राज्यसभा का पदेन सभापति होने की भूमिका को विशेष महत्व दें।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
- •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
- •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
- •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
- •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।