परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153-162 के तहत राज्य का प्रमुख कार्यपालिका प्राधिकारी है। भारत के राष्ट्रपति की भांति राज्यपाल भी राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्य करता है। यह पद RPSC RAS परीक्षा के भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था और शासन विभाग में अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। राजस्थान जैसे प्रमुख राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को समझने के लिए राज्यपाल की भूमिका, शक्तियों और कार्यों का विस्तृत ज्ञान आवश्यक है। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों में इस विषय से नियमित रूप से प्रश्न आए हैं।
मुख्य अवधारणाएं
1. राज्यपाल की परिभाषा और संवैधानिक स्थिति
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है जो भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है। संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। राज्यपाल का पद राष्ट्रपति के पद के समान ही संवैधानिक महत्व रखता है, किंतु वह कार्यकारी अधिकारों में राष्ट्रपति से भिन्न होता है। राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका का प्रतीक माना जाता है और वह राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
2. नियुक्ति प्रक्रिया और योग्यताएं
राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। राज्यपाल बनने के लिए आवश्यक योग्यताएं निम्नलिखित हैं: (क) भारतीय नागरिक होना चाहिए, (ख) कम से कम 35 वर्ष की आयु होनी चाहिए, (ग) संसद के किसी सदन या राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं होना चाहिए (यदि सदस्य हो, तो राज्यपाल नियुक्त होने की तिथि से उसकी सीट रिक्त मानी जाती है - अनु. 158), (घ) किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए। राज्यपाल की नियुक्ति सामान्यतः पांच वर्ष की अवधि के लिए की जाती है, परंतु वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (इच्छा तक) पद धारण करता है और पुनः नियुक्त भी किया जा सकता है।
3. राज्यपाल की कार्यकारी शक्तियां
राज्यपाल को व्यापक कार्यकारी शक्तियां दी गई हैं। राज्य की कार्यपालिका की सभी शक्तियां राज्यपाल के नाम से प्रयोग की जाती हैं। राज्यपाल मुख्यमंत्री को नियुक्त करता है (अनु. 164) और अन्य मंत्रियों को मुख्यमंत्री की सलाह पर नियुक्त करता है तथा मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पद की शपथ दिलाता है। राज्यपाल राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों, महाधिवक्ता आदि की नियुक्ति भी करता है। कुछ मामलों में उसके पास विवेकाधीन शक्तियां भी होती हैं (अनु. 163), जैसे त्रिशंकु विधानसभा में मुख्यमंत्री का चयन।
4. राज्यपाल की विधायी शक्तियां
राज्यपाल को महत्वपूर्ण विधायी शक्तियां भी प्राप्त हैं। राज्यपाल विधानसभा का सत्र आहूत करता है, सत्रावसान करता है और विधानसभा को भंग कर सकता है (अनु. 174)। राज्यपाल राज्य विधानमंडल का अभिन्न अंग है और विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक पर उसकी सहमति आवश्यक है। विधेयक पर उसके चार विकल्प हैं (अनु. 200): (1) स्वीकृति देना, (2) सहमति रोकना, (3) धन विधेयक को छोड़कर अन्य विधेयक को पुनर्विचार हेतु लौटाना, (4) राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करना। विधानमंडल के सत्र में न होने पर राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है (अनु. 213)। राजस्थान में विधान परिषद नहीं है; जिन राज्यों में परिषद है, वहां राज्यपाल उसके 1/6 सदस्य मनोनीत करता है।
- विधेयक राज्य विधानमंडल से पारितराज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत
- राज्यपाल के चार विकल्पस्वीकृति / सहमति रोकना / पुनर्विचार हेतु लौटाना (धन विधेयक को छोड़कर) / राष्ट्रपति हेतु आरक्षित करना
- पुनर्विचार के बाद पुनः पारितराज्यपाल सहमति देने को बाध्य
- राष्ट्रपति के लिए आरक्षित विधेयक (अनु. 201)राष्ट्रपति स्वीकृति दे सकते हैं या सहमति रोक सकते हैं
5. राज्यपाल की न्यायिक शक्तियां
राज्यपाल को विशिष्ट न्यायिक शक्तियां भी प्राप्त हैं। अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को क्षमा, प्रविलंबन, विराम, परिहार तथा लघुकरण की शक्ति है। यह शक्ति केवल उन विषयों के कानून के विरुद्ध अपराधों पर लागू होती है जिन पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है। राज्यपाल मृत्युदंड को माफ नहीं कर सकता (केवल उसे स्थगित, परिहार या लघुकरण कर सकता है) और सैनिक न्यायालय (कोर्ट मार्शल) के दंड में भी क्षमा नहीं दे सकता - ये शक्तियां राष्ट्रपति के पास हैं। जेलों का प्रशासन राज्य सरकार का विषय है, राज्यपाल का नहीं।
| बिंदु | राष्ट्रपति | राज्यपाल |
|---|---|---|
| नियुक्ति | निर्वाचक मंडल द्वारा निर्वाचित | राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त (अनु. 155) |
| पद से हटाना | महाभियोग (अनु. 61) | राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत, कभी भी हटाया जा सकता है |
| क्षमादान | मृत्युदंड और कोर्ट मार्शल में भी (अनु. 72) | मृत्युदंड माफ नहीं, केवल स्थगन/परिहार/लघुकरण (अनु. 161) |
| अध्यादेश | अनु. 123 | अनु. 213 |
| शपथ दिलाते हैं | भारत के मुख्य न्यायाधीश | उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश |
महत्वपूर्ण तथ्य
राज्यपाल की अवधि: राज्यपाल का कार्यकाल सामान्यतः पांच वर्ष का होता है। वह अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद पुनः नियुक्ति के लिए पात्र होता है। राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, इसलिए राष्ट्रपति (केंद्र सरकार की सलाह पर) उसे कार्यकाल पूरा होने से पहले कभी भी हटा सकता है।
राज्यपाल का वेतन और भत्ते: राज्यपाल के वेतन और भत्ते राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं। राज्यपाल को निःशुल्क आवास (राजभवन) और आधिकारिक कर्मचारी भी प्रदान किए जाते हैं। उसका वेतन व भत्ते संसद द्वारा निर्धारित होते हैं और कार्यकाल में उनमें कमी नहीं की जा सकती।
राज्यपाल की जिम्मेदारी: राज्यपाल राज्य की शांति, सुरक्षा और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। वह संविधान और विधि के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ लेता है, जो उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं (अनु. 159)। राज्यपाल का मुख्य कर्तव्य संविधान के अनुरूप राज्य का प्रशासन सुचारु रूप से चलाना है।
राज्यपाल का संरक्षण (उन्मुक्ति): अनु. 361 के अनुसार राज्यपाल अपने पद के कार्यों के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं है। पद पर रहते हुए उसके विरुद्ध कोई फौजदारी कार्यवाही नहीं हो सकती और उसकी गिरफ्तारी या कारावास का आदेश नहीं दिया जा सकता। दीवानी कार्यवाही के लिए दो माह पूर्व लिखित सूचना देना आवश्यक है।
राजस्थान विशेष
राजस्थान भारत का एक प्रमुख राज्य है जहां राज्यपाल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राजस्थान में राज्यपाल का आधिकारिक निवास और कार्यालय जयपुर में है (राजभवन, जिसका नाम दिसंबर 2025 में बदलकर लोक भवन किया गया)। राजस्थान के वर्तमान राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे हैं, जिन्होंने 31 जुलाई 2024 को पद की शपथ ली; उनसे पहले कलराज मिश्र (9 सितंबर 2019 से 31 जुलाई 2024) राज्यपाल थे। राज्यपाल राजस्थान के राज्य विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति भी होता है। राजस्थान विधानसभा के 200 सदस्य जनता द्वारा निर्वाचित होते हैं, राज्यपाल उनकी नियुक्ति नहीं करता। त्रिशंकु विधानसभा या गठबंधन की स्थिति में राज्यपाल की भूमिका अत्यंत संवेदनशील होती है।
परीक्षा पैटर्न
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ): परीक्षा में राज्यपाल से संबंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं जैसे: (क) राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है? (ख) राज्यपाल के लिए न्यूनतम आयु क्या है? (ग) राज्यपाल की शक्तियों का उल्लेख संविधान के किन अनुच्छेदों में है?
वर्णनात्मक प्रश्न: दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में राज्यपाल की भूमिका, शक्तियों और जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रश्न पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिए: "राज्यपाल की कार्यकारी शक्तियों की व्याख्या करें।"
तुलनात्मक प्रश्न: राष्ट्रपति और राज्यपाल की तुलना करने वाले प्रश्न भी परीक्षा में आते हैं। राजस्थान के संदर्भ में विशेष प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं।
स्मरण युक्तियां
संविधान के अनुच्छेद: राज्यपाल संबंधी सभी महत्वपूर्ण अनुच्छेद याद रखें: अनुच्छेद 153 (राज्यपाल का पद), 154 (राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित), 155 (नियुक्ति), 156 (पदावधि), 157 (नियुक्ति की योग्यताएं), 158 (पद की शर्तें), 159 (शपथ), 160 (अप्रत्याशित स्थिति में राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन), 161 (क्षमादान की शक्ति), 162 (राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार), 163-164 (मंत्रिपरिषद, मुख्यमंत्री), 200 (विधेयक पर सहमति), 213 (अध्यादेश), 361 (संरक्षण)।
पांच प्रमुख कार्य: (1) कार्यकारी प्रमुख, (2) विधायी कार्य, (3) न्यायिक क्षमाएं, (4) सुरक्षा और शांति, (5) संवैधानिक संरक्षक - इन पांच मुख्य कार्यों को अच्छी तरह याद रखें।
राजस्थान-केंद्रित तथ्य: राजस्थान के वर्तमान राज्यपाल (हरिभाऊ बागडे) और उनके पूर्ववर्ती (कलराज मिश्र) का नाम याद रखें। राजस्थान की राजनीतिक परिस्थितियों में राज्यपाल की भूमिका को समझें।
तुलनात्मक अध्ययन: राष्ट्रपति के साथ राज्यपाल की समानताओं और अंतरों को एक तालिका में संगठित करके याद रखें। यह परीक्षा में तुलनात्मक प्रश्नों का उत्तर देने में सहायक होगा।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
- •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
- •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
- •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
- •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।