परिचय
"हाल के सुधार" RAS प्रारंभिक परीक्षा के आर्थिक भाग का वह अंश है जो 1991 के LPG (उदारीकरण-निजीकरण-वैश्वीकरण) सुधारों से आगे बढ़कर वर्ष 2014 के बाद हुए संरचनात्मक आर्थिक परिवर्तनों पर केंद्रित है — जैसे GST, विमुद्रीकरण, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), बैंकिंग सुधार, PLI योजनाएँ, श्रम संहिताएँ, कृषि सुधार कानून, विनिवेश एवं डिजिटल भुगतान क्रांति। यह "सुधार" नामक टॉपिक (जो विशेष रूप से 1991 के NEP/LPG सुधारों को कवर करता है) से भिन्न है, इसलिए परीक्षा में दोनों को अलग-अलग समयरेखा (1991 बनाम 2014-2026) से जोड़कर याद रखना ज़रूरी है। पिछले एक दशक में भारत ने कर-प्रणाली, दिवाला-प्रक्रिया, बैंकिंग ढाँचे, श्रम कानूनों एवं विनिर्माण नीति में एक साथ बड़े बदलाव किए हैं, जिससे यह अनुभाग RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए अत्यंत सामयिक (current affairs-heavy) व उच्च-भार वाला बन जाता है।
मुख्य अवधारणाएँ
1. वस्तु एवं सेवा कर (GST) — एक राष्ट्र, एक कर एवं GST 2.0
वस्तु एवं सेवा कर (GST) भारत का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार है, जिसे 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के आधार पर 1 जुलाई 2017 से लागू किया गया। इसने उत्पाद शुल्क, सेवा कर, VAT, चुंगी जैसे दर्जनों केंद्रीय व राज्य करों को मिलाकर "एक राष्ट्र, एक कर" व्यवस्था बनाई। GST तीन रूपों में लगता है — CGST (केंद्र, अंतर-राज्य के भीतर लेन-देन पर), SGST (राज्य, राज्य के भीतर लेन-देन पर) और IGST (केंद्र, अंतर-राज्य लेन-देन पर, जो केंद्र-राज्य में बँट जाता है)। इसे नियंत्रित करने वाली संवैधानिक संस्था GST परिषद (अनुच्छेद 279A) है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं और जिसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य होते हैं।
शुरुआत में GST की चार प्रमुख दरें थीं — 5%, 12%, 18% व 28% (साथ में विलासिता/अहितकर वस्तुओं पर उपकर)। सितंबर 2025 में लागू हुए "GST 2.0" सुधार ने इस बहु-स्तरीय ढाँचे को सरल बनाते हुए इसे मुख्यतः दो दरों — 5% (मेरिट दर) व 18% (मानक दर) — तक सीमित कर दिया, जबकि तंबाकू, पान-मसाला व अन्य विलासिता/अहितकर वस्तुओं पर 40% की विशेष दर रखी गई; यह परिवर्तन 22 सितंबर 2025 (नवरात्रि प्रारंभ) से प्रभावी हुआ। GST संग्रहण मासिक रूप से ₹1.7-2 लाख करोड़ के स्तर पर स्थिर हो चुका है, जो अप्रत्यक्ष कराधान के औपचारीकरण (formalisation) का संकेत है।
2. विमुद्रीकरण (2016) एवं डिजिटल भुगतान क्रांति
8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री ने आधी रात से ₹500 व ₹1,000 के पुराने नोटों (जो कुल प्रचलित मुद्रा-मूल्य का लगभग 86% थे) को अमान्य घोषित कर दिया — इसे विमुद्रीकरण (Demonetisation) कहा जाता है। इसके घोषित उद्देश्य थे — काले धन पर अंकुश, जाली मुद्रा व आतंकी-वित्तपोषण की रोकथाम, तथा डिजिटल व औपचारिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना। RBI की वार्षिक रिपोर्ट (2018) के अनुसार लगभग 99.3% अमान्य नोट बैंकिंग व्यवस्था में वापस लौट आए, जिसके चलते इसके काले धन उन्मूलन प्रभाव को लेकर आलोचना भी हुई, किंतु इसने डिजिटल भुगतान को बड़ा बढ़ावा दिया।
विमुद्रीकरण के तुरंत बाद और डिजिटल इंडिया अभियान (2015) के अंतर्गत, NPCI द्वारा 2016 में लॉन्च किए गए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) ने भारत को विश्व के सबसे बड़े वास्तविक-समय (real-time) डिजिटल भुगतान बाज़ार में बदल दिया — आज भारत वैश्विक रीयल-टाइम भुगतान लेन-देन में सबसे बड़ा हिस्सेदार है। जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) त्रिमूर्ति ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को सक्षम बनाया, जिससे सब्सिडी-रिसाव में उल्लेखनीय कमी आई। इंडिया स्टैक (India Stack) — आधार, UPI, DigiLocker, अकाउंट एग्रीगेटर — को अब भारत की सबसे बड़ी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) उपलब्धि माना जाता है और कई देश इसे अपना रहे हैं।
3. दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016
दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code - IBC), 2016 भारत की ऋण-वसूली व्यवस्था में सबसे बड़ा सुधार है, जिसने SICA, कंपनी अधिनियम के परिसमापन प्रावधानों तथा अन्य बिखरे कानूनों की जगह एक समय-सीमाबद्ध (मूल रूप से 180+90 दिन) एकीकृत प्रक्रिया स्थापित की। इसके तहत कॉर्पोरेट देनदारों के मामलों की सुनवाई राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) में और व्यक्तिगत/भागीदारी फर्मों के मामलों की सुनवाई ऋण वसूली अधिकरण (DRT) में होती है, जबकि पूरी प्रक्रिया का नियमन भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) करता है। "ऋणदाता-नियंत्रित" (creditor-in-control) मॉडल इसकी मुख्य विशेषता है — कर्ज़दार कंपनी का नियंत्रण समाधान पेशेवर (Resolution Professional) व लेनदारों की समिति (CoC) के हाथ में चला जाता है।
IBC ने भारत को विश्व बैंक की Ease of Doing Business रैंकिंग में "Resolving Insolvency" संकेतक पर बड़ी छलांग दिलाई और "प्रवर्तक-अनुकूल" व्यवस्था को "लेनदार-अनुकूल" व्यवस्था में बदल दिया। IBBI आँकड़ों के अनुसार समाधान हुए मामलों में लेनदारों को परिसमापन मूल्य (Liquidation Value) की तुलना में औसतन 150-160% तक वसूली मिली है, हालाँकि स्वीकृत दावों (admitted claims) के सापेक्ष वास्तविक वसूली दर लगभग 30-32% ही रही है — यह भेद परीक्षा में भ्रामक प्रश्नों का आधार बनता है। समय के साथ IBC में कई संशोधन (जैसे प्री-पैकेज्ड इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस - MSME के लिए 2021 में जोड़ा गया) किए गए हैं।
4. बैंकिंग क्षेत्र सुधार — पुनर्पूंजीकरण एवं विलय
2015 में RBI द्वारा की गई आस्ति गुणवत्ता समीक्षा (Asset Quality Review - AQR) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के भारी NPA (गैर-निष्पादित आस्तियों) को उजागर किया, जिसके बाद सरकार ने इंद्रधनुष योजना (Indradhanush, 2015) के अंतर्गत PSBs के पुनर्पूंजीकरण, प्रबंधन-सुधार व शासन-सुधार का व्यापक खाका पेश किया। 2017-2019 के बीच सरकार ने पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड के ज़रिए PSBs में लगभग ₹2.11 लाख करोड़ की पूँजी डाली।
इसके समानांतर, बैंकिंग क्षेत्र के समेकन (consolidation) की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया — 2017 में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का उसके पाँच सहयोगी बैंकों व भारतीय महिला बैंक के साथ विलय हुआ; फिर अप्रैल 2020 में दस PSBs को मिलाकर चार बड़े बैंक बनाए गए (पंजाब नेशनल बैंक + ओरिएंटल बैंक ऑफ़ कॉमर्स + यूनाइटेड बैंक; कैनरा बैंक + सिंडिकेट बैंक; यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया + आंध्रा बैंक + कॉर्पोरेशन बैंक; इंडियन बैंक + इलाहाबाद बैंक)। इन विलयों से PSBs की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई, जिससे बड़े, अधिक पूँजी-सक्षम व वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बैंक बने। साथ ही, दिवालिया बैंकों के NPA प्रबंधन हेतु राष्ट्रीय आस्ति पुनर्निर्माण कंपनी (NARCL - "बैड बैंक") की स्थापना 2021 में की गई।
5. मेक इन इंडिया, PLI योजनाएँ एवं विनिवेश/निजीकरण
मेक इन इंडिया अभियान (25 सितंबर 2014) का उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना था। इसे गति देने हेतु 2020 में उत्पादन-सहबद्ध प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive - PLI) योजनाएँ शुरू की गईं, जो लगभग 14 प्रमुख क्षेत्रों (मोबाइल विनिर्माण, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल-ऑटो कंपोनेंट, टेक्सटाइल, सेमीकंडक्टर आदि) में कुल मिलाकर लगभग ₹1.97 लाख करोड़ के परिव्यय के साथ बढ़ी हुई उत्पादन/बिक्री के आधार पर वित्तीय प्रोत्साहन देती हैं। PLI के परिणामस्वरूप भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है और इलेक्ट्रॉनिक्स भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन गई है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (2021, ₹76,000 करोड़) भी इसी शृंखला का हिस्सा है, जो फैब, ATMP व डिस्प्ले विनिर्माण को प्रोत्साहन देता है।
दूसरी ओर, सरकार ने रणनीतिक क्षेत्रों में न्यूनतम सार्वजनिक उपस्थिति व शेष क्षेत्रों में निजीकरण की नई सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम नीति (2021) लागू की। इसके अंतर्गत सबसे चर्चित उदाहरण एयर इंडिया है, जिसे जनवरी 2022 में टाटा संस को वापस बेचा गया — 1953 में राष्ट्रीयकृत होने के लगभग 69 वर्ष बाद यह पुनः निजी हाथों में गई। LIC का IPO (मई 2022) भारत के इतिहास का सबसे बड़ा IPO था, जबकि BPCL का प्रस्तावित विनिवेश उपयुक्त बोलीदाता न मिलने के कारण 2022 में वापस ले लिया गया। रणनीतिक विनिवेश के साथ-साथ राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP, 2021) के ज़रिए मौजूदा सार्वजनिक अवसंरचना आस्तियों (सड़क, रेलवे, ऊर्जा) का "एसेट रीसाइक्लिंग" भी सुधार-एजेंडे का हिस्सा है।
6. श्रम संहिताएँ एवं कृषि सुधार कानून
श्रम-सुधार के अंतर्गत सरकार ने 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित करते हुए चार श्रम संहिताएँ बनाईं — वेतन संहिता (2019), औद्योगिक संबंध संहिता (2020), व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता (2020) तथा सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020, जिसमें पहली बार गिग व प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को औपचारिक मान्यता दी गई)। लंबी देरी के बाद, राज्यों के नियम तैयार होने पर ये चारों संहिताएँ पूरे देश में 21 नवंबर 2025 से एक साथ प्रभावी की गईं — यह श्रम-कानूनों के सरलीकरण व औपचारीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
कृषि क्षेत्र में सितंबर 2020 में तीन कृषि सुधार कानून पारित किए गए थे — किसान उपज व्यापार व वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) अधिनियम, मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवा पर किसान (सशक्तीकरण व संरक्षण) करार अधिनियम, तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम — इनका उद्देश्य किसानों को APMC मंडियों के बाहर भी उपज बेचने की स्वतंत्रता देना था। किंतु व्यापक किसान-विरोध (विशेषतः पंजाब-हरियाणा में) के बाद सरकार ने नवंबर 2021 में कृषि कानून निरसन अधिनियम द्वारा तीनों कानून वापस ले लिए — RAS परीक्षा के लिए यह याद रखना ज़रूरी है कि ये कानून "पारित तो हुए किंतु लागू रहते हुए निरस्त कर दिए गए।"
7. वन नेशन वन राशन कार्ड एवं नवीनतम बजट सुधार
वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC, 2019 में शुरू) योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत राशन कार्ड की अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करती है, जिससे प्रवासी श्रमिक व उनके परिवार देश में कहीं भी उचित मूल्य की दुकान से खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं; अब यह लगभग सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लागू हो चुकी है और यह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित सामाजिक-सुरक्षा सुधार का उदाहरण है।
हाल के केंद्रीय बजटों में भी कई महत्वपूर्ण सुधार घोषित किए गए हैं। केंद्रीय बजट 2025-26 में नई आयकर व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की वार्षिक आय को प्रभावी रूप से कर-मुक्त बनाया गया (वेतनभोगियों हेतु मानक कटौती सहित ₹12.75 लाख तक), राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (NMM) की घोषणा हुई (2035 तक GDP में विनिर्माण की हिस्सेदारी 25% तक बढ़ाने का लक्ष्य), बीमा क्षेत्र में FDI सीमा 74% से बढ़ाकर 100% की गई, तथा परमाणु ऊर्जा मिशन शुरू किया गया। इसके अतिरिक्त, नया आयकर अधिनियम, 2025 (जो पुराने आयकर अधिनियम, 1961 का स्थान लेगा) पारित हुआ, जो अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और भाषा को सरल व अधिनियम को संक्षिप्त बनाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- GST — 1 जुलाई 2017 से लागू; 101वाँ संविधान संशोधन, 2016; GST परिषद — अनुच्छेद 279A; GST 2.0 (5%/18%/40% स्लैब) — 22 सितंबर 2025 से प्रभावी।
- विमुद्रीकरण — 8 नवंबर 2016; ₹500/₹1,000 के पुराने नोट अमान्य; UPI — NPCI द्वारा 2016 में लॉन्च।
- IBC — 2016 में पारित; NCLT (कॉर्पोरेट) व DRT (व्यक्तिगत) अधिकरण; नियामक — IBBI; मूल समय-सीमा 180+90 दिन।
- PSB विलय — अप्रैल 2020 में 10 बैंकों का विलय होकर 4 बड़े बैंक बने; कुल PSBs 27 से घटकर 12; पुनर्पूंजीकरण — लगभग ₹2.11 लाख करोड़ (2017-19)।
- PLI योजनाएँ — 2020 में शुरू, ~14 क्षेत्र, कुल परिव्यय ~₹1.97 लाख करोड़; एयर इंडिया का निजीकरण — जनवरी 2022 (टाटा संस को); LIC IPO — मई 2022 (भारत का सबसे बड़ा IPO)।
- चार श्रम संहिताएँ (2019-2020 में पारित) — 21 नवंबर 2025 से देशभर में प्रभावी; तीन कृषि कानून (सितंबर 2020) — नवंबर 2021 में निरस्त।
परीक्षा टिप्स
- "हाल के सुधार" (2014-2026) को "1991 के LPG सुधार" से मिलाएँ नहीं — दोनों की पृष्ठभूमि, नेतृत्व व तिथियाँ बिल्कुल अलग हैं।
- हर सुधार की तीन बातें याद रखें — प्रारंभ/लागू होने की तिथि, नोडल कानून/संस्था, और मुख्य संख्यात्मक आँकड़ा (जैसे PSB संख्या 27→12, GST स्लैब 4→2+1)।
- कृषि कानूनों के मामले में "पारित (2020) बनाम निरस्त (2021)" का क्रम याद रखें — यह बार-बार भ्रम पैदा करता है।
"G-I-B-L-A-D" याद रखें: GST (2017) → IBC (2016) → Banking मर्जर (2020) → Labour Codes (2025 से प्रभावी) → Agri Laws (2020 पारित, 2021 निरस्त) → Disinvestment (एयर इंडिया 2022)। यह क्रम याद रहने से तिथियों की गड़बड़ी नहीं होती।
दोनों टॉपिक "सुधार" शब्द से जुड़े हैं, इसलिए भ्रम आम है। "सुधार" (1991) का अर्थ है 24 जुलाई 1991 को नरसिम्हा राव-मनमोहन सिंह सरकार द्वारा भुगतान संतुलन संकट के बाद लागू LPG (उदारीकरण-निजीकरण-वैश्वीकरण) मॉडल। "हाल के सुधार" इसका विस्तार नहीं, बल्कि 2014 के बाद की एक बिल्कुल अलग पीढ़ी के सुधार हैं — जो कर-प्रणाली (GST), दिवाला-प्रक्रिया (IBC), बैंकिंग-ढाँचे व डिजिटल अवसंरचना पर केंद्रित हैं। परीक्षा में जब भी "1991" या "नई आर्थिक नीति (NEP)" शब्द दिखे, समझें कि प्रश्न पुराने टॉपिक से है; जब "2016 के बाद" या विशिष्ट योजना का नाम (GST, IBC, PLI आदि) दिखे, तो यह "हाल के सुधार" से जुड़ा प्रश्न है।
Q1. GST किस तिथि से देशभर में लागू हुआ और यह किस संविधान संशोधन पर आधारित है?
✅ 1 जुलाई 2017; 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016।
Q2. IBC के अंतर्गत कॉर्पोरेट देनदारों के मामलों की सुनवाई किस अधिकरण में होती है, और नियामक संस्था कौन-सी है?
✅ राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT); नियामक — भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI)।
Q3. अप्रैल 2020 के PSB विलय के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या 27 से घटकर कितनी रह गई?
✅ 12।
Q4. चारों श्रम संहिताएँ देशभर में किस तिथि से प्रभावी हुईं, और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
✅ 21 नवंबर 2025; इसने पहली बार गिग व प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को औपचारिक मान्यता दी।
Q5. सितंबर 2020 में पारित तीन कृषि सुधार कानून कब और किस अधिनियम के ज़रिए निरस्त किए गए?
✅ नवंबर 2021 में, कृषि कानून निरसन अधिनियम, 2021 के ज़रिए।
सारांश
2014 के बाद भारत में हुए सुधार 1991 के LPG मॉडल से भिन्न एक नई पीढ़ी के संरचनात्मक बदलाव हैं — GST (2017) ने अप्रत्यक्ष कराधान को एकीकृत किया, IBC (2016) ने ऋण-वसूली को समय-सीमाबद्ध व लेनदार-केंद्रित बनाया, विमुद्रीकरण (2016) व UPI ने डिजिटल भुगतान क्रांति को गति दी, बैंकिंग विलय व पुनर्पूंजीकरण ने PSBs को सुदृढ़ किया, PLI योजनाओं व विनिवेश ने विनिर्माण व दक्षता को बढ़ावा दिया, तथा श्रम संहिताओं (2025 से प्रभावी) व कृषि कानूनों (पारित-निरस्त) ने नीति-निर्माण की जटिलताओं को उजागर किया। RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए हर सुधार की तिथि, नोडल संस्था/कानून व मुख्य आँकड़ा — यही सबसे अधिक पूछा जाने वाला भाग है।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •GDP = C + I + G + (X−M); यह एक वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
- •भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में 'हैरोड-डोमर' मॉडल पर आधारित थी।
- •RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई; 1949 में राष्ट्रीयकरण; मुख्यालय मुंबई।
- •भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू; 101वें संशोधन (2016)।
- •GDP = देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं/सेवाओं का बाजार मूल्य।