परिचय
सामाजिक क्षेत्र भारत के विकास मॉडल की रीढ़ है, क्योंकि आर्थिक वृद्धि तभी सार्थक मानी जाती है जब वह स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सामाजिक सुरक्षा के मानव विकास संकेतकों में भी बदले। RAS प्रारंभिक परीक्षा में यह अध्याय लगभग हर वर्ष पूछा जाता है — कभी किसी योजना के लॉन्च वर्ष और नोडल मंत्रालय के रूप में, कभी दो मिलती-जुलती योजनाओं के बीच अंतर स्पष्ट करने वाले प्रश्न के रूप में, और कभी मानव विकास सूचकांक जैसी अवधारणा के घटकों के रूप में। इस गाइड में हम भारत के सामाजिक क्षेत्र की चार बुनियादी स्तंभों — स्वास्थ्य (आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन), शिक्षा (राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और समग्र शिक्षा), पोषण (पोषण अभियान) तथा सामाजिक सुरक्षा एवं वंचित वर्गों के कल्याण (महिला-बाल विकास, SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक योजनाएं) — को व्यवस्थित रूप से कवर करेंगे, और अंत में मानव विकास सूचकांक (HDI) के जरिए यह देखेंगे कि इन सभी प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसे मापा जाता है।
मुख्य अवधारणाएं
1. सामाजिक क्षेत्र और सामाजिक क्षेत्र व्यय की प्रवृत्तियां
"सामाजिक क्षेत्र" शब्द के अंतर्गत वे सभी सरकारी हस्तक्षेप आते हैं जो सीधे मानव पूंजी और कल्याण को प्रभावित करते हैं — शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल एवं स्वच्छता, आवास, पोषण, सामाजिक सुरक्षा और वंचित वर्गों का कल्याण। भारत में केंद्र और राज्यों दोनों स्तरों पर सामाजिक सेवाओं पर व्यय होता है, और चूंकि स्वास्थ्य व शिक्षा संविधान की समवर्ती/राज्य सूची से जुड़े विषय हैं, इसलिए राज्यों की भूमिका केंद्र से भी बड़ी होती है। आर्थिक सर्वेक्षण प्रतिवर्ष केंद्र और राज्यों के संयुक्त सामाजिक सेवा व्यय को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात के रूप में प्रस्तुत करता है, और हाल के वर्षों में यह अनुपात लगातार बढ़ा है, फिर भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के स्वास्थ्य पर GDP का लगभग 2.5% खर्च करने के लक्ष्य और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के शिक्षा पर GDP का 6% खर्च करने के लक्ष्य से यह अभी भी नीचे है।
परीक्षा की दृष्टि से यह समझना जरूरी है कि सामाजिक क्षेत्र व्यय को आमतौर पर दो तरह से वर्गीकृत किया जाता है — राजस्व व्यय (वेतन, अनुदान, चालू कार्यक्रमों का परिचालन) और पूंजीगत व्यय (अस्पताल, स्कूल भवन, उपकरण जैसी स्थायी परिसंपत्तियां)। भारत में सामाजिक क्षेत्र व्यय का बड़ा हिस्सा अब भी राजस्व प्रकृति का है, जो दीर्घकालिक अवसंरचना निर्माण की तुलना में मौजूदा सेवाओं को चलाए रखने पर अधिक केंद्रित है — यह प्रवृत्ति नीति निर्माताओं और परीक्षकों दोनों के लिए एक बार-बार चर्चित बिंदु है।
2. आयुष्मान भारत — आयुष्मान आरोग्य मंदिर और PM-JAY
आयुष्मान भारत योजना सितंबर 2018 में शुरू की गई, और इसके दो परस्पर-पूरक स्तंभ हैं। पहला स्तंभ — स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र, जिन्हें 2023 में "आयुष्मान आरोग्य मंदिर" नाम दिया गया — मौजूदा उप-केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत कर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा (निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक और पुनर्वास सेवाएं, गैर-संचारी रोगों की जांच, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, वृद्धजन देखभाल सहित) उपलब्ध कराते हैं — यानी यह आपूर्ति-पक्ष (supply-side) का अवसंरचना हस्तक्षेप है। दूसरा और अधिक चर्चित स्तंभ — प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) — दुनिया की सबसे बड़ी सरकार-वित्तपोषित स्वास्थ्य आश्वासन योजना मानी जाती है, जो सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) 2011 के अभाव मानदंडों के आधार पर चयनित लगभग 12 करोड़ से अधिक परिवारों (लगभग 55 करोड़ लाभार्थी) को द्वितीयक और तृतीयक अस्पताल भर्ती के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख का नकद-रहित एवं कागज-रहित कवर प्रदान करती है, जो पूरे देश में पोर्टेबल है।
अक्टूबर 2024 में सरकार ने आयुष्मान वय वंदना योजना शुरू की, जिसके अंतर्गत 70 वर्ष या अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को उनकी आय-श्रेणी की परवाह किए बिना ₹5 लाख का अतिरिक्त (टॉप-अप) स्वास्थ्य कवर एक अलग कार्ड के माध्यम से दिया जाता है — यह मौजूदा पारिवारिक PM-JAY कवर से अतिरिक्त है, न कि उसके स्थान पर। परीक्षा में "आयुष्मान आरोग्य मंदिर" और "PM-JAY" को अलग-अलग स्तंभों के रूप में पहचानना और यह याद रखना जरूरी है कि पहला प्राथमिक स्तर की सेवा-अवसंरचना है जबकि दूसरा अस्पताल भर्ती के लिए बीमा-आधारित वित्तीय सुरक्षा है।
3. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) 2013 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM, 2005 में शुरू) और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (NUHM, 2013 में शुरू) को एक साझा छत्र योजना के अंतर्गत लाकर बनाया गया। यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच 60:40 तथा पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10 का वित्तपोषण अनुपात लागू होता है। NHM का उद्देश्य सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है, विशेषकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संचारी व गैर-संचारी रोग नियंत्रण, तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना (उप-केंद्र, प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) को मजबूत करने पर।
NHM के अंतर्गत ही मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ASHA) और सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) जैसा जमीनी स्तर का कार्यबल काम करता है, तथा जननी सुरक्षा योजना (सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) जैसी उप-योजनाएं इसी छत्र के तहत संचालित होती हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि NHM और आयुष्मान भारत परस्पर विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं — NHM स्वास्थ्य सेवा वितरण और अवसंरचना का व्यापक ढांचा है, जबकि PM-JAY उसी ढांचे के भीतर द्वितीयक-तृतीयक स्तर के इलाज के लिए विशिष्ट वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।
4. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और समग्र शिक्षा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 29 जुलाई 2020 को मंजूरी दी, जिसने 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1992 में संशोधित) का स्थान लिया — यह 34 वर्षों में शिक्षा नीति का पहला व्यापक पुनर्गठन था। इसकी सबसे उल्लेखनीय संरचनात्मक बदलाव पुरानी 10+2 प्रणाली को 5+3+3+4 शैक्षणिक ढांचे से बदलना है — आधारभूत चरण (3-8 वर्ष), प्रारंभिक चरण (8-11 वर्ष), मध्य चरण (11-14 वर्ष) और माध्यमिक चरण (14-18 वर्ष)। नीति कक्षा 5 तक (और संभव हो तो कक्षा 8 तक) मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा, बहु-विषयक शिक्षा, उच्च शिक्षा में एकाधिक प्रवेश-निकास बिंदुओं और अकादमिक क्रेडिट बैंक (ABC) जैसी लचीली व्यवस्थाओं पर जोर देती है, तथा उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) को 2035 तक 50% तक ले जाने और शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय को GDP के 6% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (हर बच्चे का कक्षा 3 तक पढ़ने-लिखने और बुनियादी गणित में दक्ष होना) को NEP 2020 ने "तत्काल राष्ट्रीय मिशन" घोषित किया, जिसे लागू करने के लिए 2021 में निपुण भारत मिशन शुरू किया गया, जिसका लक्ष्य 2026-27 तक हर बच्चे में यह दक्षता सुनिश्चित करना है। स्कूली शिक्षा के क्रियान्वयन का मुख्य वाहन समग्र शिक्षा योजना है, जिसे 2018 में सर्व शिक्षा अभियान (SSA), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA) और शिक्षक शिक्षा की केंद्र प्रायोजित योजना को एकीकृत करके शुरू किया गया था — यह पूर्व-प्राथमिक से लेकर कक्षा 12 तक की संपूर्ण स्कूली शिक्षा को एक ही छत्र योजना के अंतर्गत लाती है, और NEP 2020 के अनुरूप 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए "समग्र शिक्षा 2.0" के रूप में संशोधित की गई है।
5. पोषण अभियान और सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0
पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 8 मार्च 2018 को शुरू किया गया, जिसका लक्ष्य छोटे बच्चों, किशोरियों तथा गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं में अवरुद्ध वृद्धि (स्टंटिंग), कुपोषण, रक्ताल्पता (एनीमिया) और जन्म के समय कम वजन जैसी समस्याओं को समयबद्ध, मापने योग्य लक्ष्यों के साथ घटाना है। यह एक अभिसरण-आधारित मिशन है, जिसमें कई मंत्रालयों (महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, पेयजल एवं स्वच्छता, ग्रामीण विकास) के कार्यक्रमों को एक साझा लक्ष्य के इर्द-गिर्द जोड़ा जाता है, और पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल उपकरण के जरिए आंगनवाड़ी स्तर पर वास्तविक समय में निगरानी की जाती है।
2021-22 के बजट में सरकार ने पोषण अभियान, आंगनवाड़ी सेवाओं (एकीकृत बाल विकास सेवा योजना का मुख्य घटक) और किशोरी बालिकाओं के लिए योजना को मिलाकर मिशन पोषण 2.0 (अब सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के रूप में जाना जाता है) शुरू किया, जिसका उद्देश्य पोषण सामग्री, वितरण तंत्र और आउटरीच को मजबूत करना तथा आंगनवाड़ी केंद्रों की अवसंरचना को "सक्षम आंगनवाड़ी" के रूप में उन्नत करना है। परीक्षा में अक्सर पोषण अभियान (2018, मूल मिशन) को मिशन पोषण 2.0 (2021, विलय व सुदृढ़ीकरण का चरण) से अलग पहचानने के लिए पूछा जाता है।
6. मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य — महिला एवं बाल विकास
मिशन शक्ति 2021 में महिला सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए एक एकीकृत छत्र योजना (2021-22 से 2025-26) के रूप में स्वीकृत की गई, और इसे दो उप-योजनाओं में बांटा गया है। संबल उप-योजना सुरक्षा पर केंद्रित है और इसमें वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन (181), बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (जो मूल रूप से 22 जनवरी 2015 को गिरते बाल लिंगानुपात को संबोधित करने के लिए शुरू हुई थी), नारी अदालत और कामकाजी महिला छात्रावास जैसी पहलें शामिल हैं। समर्थ्य उप-योजना सशक्तिकरण पर केंद्रित है और इसमें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY — पहले जीवित बच्चे के लिए गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नकद प्रोत्साहन, जो अब बढ़ाकर ₹6,000 कर दिया गया है), उज्ज्वला (मानव तस्करी से बचाई गई महिलाओं का पुनर्वास) और शक्ति सदन जैसी योजनाएं शामिल हैं।
बाल संरक्षण की दिशा में मिशन वात्सल्य (2021-22 में शुरू) पूर्ववर्ती एकीकृत बाल संरक्षण योजना (ICPS) का स्थान लेता है, और किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों को लागू करने में सहायता करता है — इसमें चाइल्ड हेल्पलाइन (1098), बाल देखभाल संस्थान और दत्तक ग्रहण (गोद लेना) से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं। परीक्षा में मिशन शक्ति (महिला-केंद्रित, संबल+समर्थ्य) और मिशन वात्सल्य (बाल-केंद्रित, संरक्षण) के बीच फर्क पूछा जाना आम है।
7. सामाजिक सुरक्षा योजनाएं और श्रम संहिताएं
भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था असंगठित क्षेत्र के विशाल कार्यबल (जिसमें कोई नियमित नियोक्ता-कर्मचारी संबंध या औपचारिक सामाजिक सुरक्षा कवर नहीं होता) को शामिल करने के इर्द-गिर्द आकार लेती जा रही है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 — चार श्रम संहिताओं में से एक (अन्य तीन हैं वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता 2020) — कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा, मातृत्व लाभ और उपदान भुगतान जैसे नौ पुराने कानूनों को समेकित करती है, तथा पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाने का प्रावधान करती है।
असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के पंजीकरण और पहचान के लिए अगस्त 2021 में ई-श्रम पोर्टल शुरू किया गया, जो श्रमिकों को एक सार्वभौमिक खाता संख्या (UAN) जारी करता है। पेंशन के मोर्चे पर, प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना (PM-SYM) असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक स्वैच्छिक अंशदायी पेंशन योजना है जो 60 वर्ष की आयु के बाद ₹3,000 प्रति माह की न्यूनतम पेंशन का आश्वासन देती है, जबकि अटल पेंशन योजना (APY) सभी नागरिकों (विशेषकर असंगठित क्षेत्र) के लिए ₹1,000 से ₹5,000 प्रति माह की गारंटीकृत पेंशन प्रदान करती है। इनके अतिरिक्त, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के अंतर्गत वृद्धजन, विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए पेंशन योजनाएं तथा प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) व प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) जैसी न्यूनतम प्रीमियम वाली बीमा योजनाएं भी सामाजिक सुरक्षा जाल का हिस्सा हैं।
8. SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएं
अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का कल्याण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन आता है, अनुसूचित जनजाति का कल्याण जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन तथा अल्पसंख्यक कल्याण अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अधीन आता है। अनुसूचित जातियों के लिए प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) 2021-22 में तीन पूर्ववर्ती योजनाओं (अनुसूचित जाति उप-योजना हेतु विशेष केंद्रीय सहायता, बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना, और प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना) को मिलाकर बनाई गई, जिसके तहत आदर्श ग्राम विकास, छात्रावास निर्माण तथा कौशल-आजीविका अनुदान जैसे घटक शामिल हैं।
अनुसूचित जनजातियों के लिए सबसे उल्लेखनीय हालिया पहल प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) है, जिसे 15 नवंबर 2023 को जनजातीय गौरव दिवस (भगवान बिरसा मुंडा की जयंती) पर विशेष रूप से अति संवेदनशील जनजातीय समूहों (PVTGs) के लिए शुरू किया गया, जो 11 मंत्रालयों के समन्वय से सड़क, बिजली, आवास, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाता है। इसके अलावा एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) आदिवासी छात्रों के लिए तथा वनधन विकास योजना लघु वनोपज के मूल्यवर्धन के जरिए आदिवासी आजीविका बढ़ाने के लिए काम करती है। अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 2023 में कई पूर्ववर्ती योजनाओं (उस्ताद, नई रोशनी सहित) को मिलाकर PM VIKAS (प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन) छत्र योजना बनाई गई, तथा प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक व मेरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्तियां सभी वंचित वर्गों (SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक) के लिए शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने का साझा औजार हैं।
9. मानव विकास सूचकांक (HDI)
मानव विकास सूचकांक (HDI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रतिवर्ष मानव विकास रिपोर्ट में प्रकाशित एक संयुक्त सांख्यिकीय सूचकांक है, जो किसी देश के विकास को केवल आय (GDP) तक सीमित न रखकर तीन आयामों पर मापता है — स्वास्थ्य (जन्म के समय जीवन प्रत्याशा से मापा गया), शिक्षा (वयस्कों के लिए औसत स्कूली वर्ष तथा बच्चों के लिए अपेक्षित स्कूली वर्ष का संयोजन) और जीवन स्तर (क्रय शक्ति समता पर प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय, GNI per capita PPP)। यह अर्थशास्त्री महबूब उल हक और अमर्त्य सेन के कार्यों से प्रेरित है, जिन्होंने विकास को केवल आर्थिक वृद्धि के बजाय मानवीय क्षमताओं के विस्तार के रूप में देखने पर जोर दिया।
भारत को हाल की मानव विकास रिपोर्टों में "मध्यम मानव विकास" (Medium Human Development) श्रेणी में रखा गया है, तथा इसकी वैश्विक रैंक हाल के वर्षों में लगभग 130वें स्थान के आसपास रही है, हालांकि HDI मान समय के साथ धीरे-धीरे बेहतर हुआ है। परीक्षा में अक्सर यह पूछा जाता है कि HDI किन तीन आयामों पर आधारित है और यह GDP-केंद्रित मापों से किस प्रकार भिन्न है — साथ ही NITI आयोग के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National MPI) से भी इसकी तुलना पूछी जा सकती है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के 12 संकेतकों के आधार पर भारत के भीतर वंचना मापता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- आयुष्मान भारत (सितंबर 2018): दो स्तंभ — आयुष्मान आरोग्य मंदिर (प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा) और PM-JAY (₹5 लाख/परिवार/वर्ष का द्वितीयक-तृतीयक अस्पताल भर्ती कवर, SECC 2011 आधारित लगभग 12 करोड़+ परिवार)।
- आयुष्मान वय वंदना योजना (अक्टूबर 2024): 70+ आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को आय-निरपेक्ष ₹5 लाख अतिरिक्त कवर।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM, 2013): NRHM (2005, ग्रामीण) और NUHM (2013, शहरी) का समेकन; ASHA/ANM कार्यबल, जननी सुरक्षा योजना, RBSK, RKSK इसके अंतर्गत।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (29 जुलाई 2020): 1986 की नीति का स्थान लिया; 10+2 के बजाय 5+3+3+4 ढांचा; उच्च शिक्षा GER लक्ष्य 50% (2035 तक); शिक्षा पर व्यय लक्ष्य GDP का 6%।
- निपुण भारत मिशन (2021): कक्षा 3 तक बुनियादी साक्षरता-संख्यात्मकता का लक्ष्य 2026-27 तक।
- समग्र शिक्षा (2018): SSA + RMSA + शिक्षक शिक्षा का एकीकरण; पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक; समग्र शिक्षा 2.0 (2021-22 से 2025-26)।
- पोषण अभियान (8 मार्च 2018): स्टंटिंग, कुपोषण, एनीमिया, कम जन्म वजन घटाने का लक्ष्य; मिशन पोषण 2.0/सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (2021) में आंगनवाड़ी सेवाओं व किशोरी बालिका योजना के साथ विलय।
- मिशन शक्ति (2021): संबल (सुरक्षा — वन स्टॉप सेंटर, हेल्पलाइन 181, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ) + समर्थ्य (सशक्तिकरण — PMMVY, उज्ज्वला)।
- मिशन वात्सल्य (2021-22): बाल संरक्षण, पूर्व ICPS का स्थान लेती है; चाइल्ड हेल्पलाइन 1098।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020: चार श्रम संहिताओं में से एक; गिग व प्लेटफॉर्म श्रमिकों को पहली बार सामाजिक सुरक्षा दायरे में लाती है; ई-श्रम पोर्टल (अगस्त 2021)।
- PM-AJAY (2021-22): SC कल्याण की तीन पूर्व योजनाओं का विलय; PM-JANMAN (15 नवंबर 2023): PVTGs हेतु।
- मानव विकास सूचकांक (HDI): तीन आयाम — स्वास्थ्य (जीवन प्रत्याशा), शिक्षा (स्कूली वर्ष), जीवन स्तर (GNI प्रति व्यक्ति PPP); भारत "मध्यम मानव विकास" श्रेणी में, रैंक लगभग 130वें के आसपास।
परीक्षा टिप्स
- आयुष्मान भारत के दो स्तंभों को कभी न मिलाएं — आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्तर की सेवा-अवसंरचना है, PM-JAY द्वितीयक-तृतीयक भर्ती के लिए बीमा कवर है।
- NHM और PM-JAY प्रतिस्पर्धी नहीं, पूरक हैं — NHM संपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य वितरण तंत्र (अवसंरचना, कार्यबल, कार्यक्रम) है, जबकि PM-JAY उसी तंत्र के भीतर एक विशिष्ट बीमा-आधारित वित्तीय सुरक्षा घटक है।
- पोषण अभियान (2018, मूल मिशन शुरुआत) और मिशन पोषण 2.0 (2021, आंगनवाड़ी सेवाओं व किशोरी योजना के साथ विलय-सुदृढ़ीकरण चरण) को वर्ष और उद्देश्य के आधार पर अलग पहचानें।
- मिशन शक्ति (महिला-केंद्रित, संबल+समर्थ्य उप-योजनाएं) और मिशन वात्सल्य (बाल संरक्षण-केंद्रित) के बीच फर्क को याद रखें — दोनों 2021-22 में शुरू हुईं पर लक्ष्य समूह अलग है।
- HDI के तीन आयाम (स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर) को GDP प्रति व्यक्ति जैसे शुद्ध आय-आधारित मापों से भ्रमित न करें — HDI केवल आय नहीं, बल्कि मानव क्षमताओं का व्यापक माप है।
HDI के तीन आयाम याद रखने के लिए स्मरण करें — "आयु-ज्ञान-आय": आयु = स्वास्थ्य आयाम (जन्म के समय जीवन प्रत्याशा से मापा गया, अर्थात "लंबी आयु"), ज्ञान = शिक्षा आयाम (औसत व अपेक्षित स्कूली वर्ष), आय = जीवन स्तर आयाम (क्रय शक्ति समता पर प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय)। यह UNDP का मूल सूत्र है, जिसे संक्षेप में "Long and healthy life, Knowledge, Decent standard of living" भी कहा जाता है।
दोनों स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रमुख योजनाएं हैं और अक्सर एक-दूसरे से गड़बड़ा जाती हैं, लेकिन इनका काम अलग-अलग है। NHM एक व्यापक कार्यक्रम है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण की पूरी शृंखला — उप-केंद्र, प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, ASHA/ANM कार्यबल, टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम — का संचालन करता है, अर्थात यह आपूर्ति-पक्ष (सेवा उपलब्ध कराने) का ढांचा है। PM-JAY इसके विपरीत मांग-पक्ष (demand-side) की एक विशिष्ट बीमा योजना है, जो केवल पात्र परिवारों को द्वितीयक व तृतीयक स्तर के अस्पताल भर्ती के खर्च से बचाती है — यह प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, टीकाकरण या नियमित जांच को कवर नहीं करती। त्वरित पहचान: यदि प्रश्न "अवसंरचना, कार्यबल या प्राथमिक सेवा वितरण" के बारे में है, तो यह NHM है; यदि प्रश्न "अस्पताल भर्ती के लिए बीमा कवर राशि" के बारे में है, तो यह PM-JAY है।
प्रश्न 1. आयुष्मान भारत योजना के दो स्तंभ कौन-से हैं, और इनमें से कौन-सा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा-अवसंरचना से तथा कौन-सा अस्पताल भर्ती बीमा कवर से जुड़ा है?
✅ पहला स्तंभ आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व में स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र) है, जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा-अवसंरचना है। दूसरा स्तंभ प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) है, जो पात्र परिवारों को द्वितीयक-तृतीयक अस्पताल भर्ती हेतु ₹5 लाख प्रति वर्ष का नकद-रहित बीमा कवर देती है।
प्रश्न 2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने स्कूली शिक्षा की पुरानी 10+2 संरचना को किस नए ढांचे से बदला, और इसका बुनियादी साक्षरता-संख्यात्मकता संबंधी मिशन कौन-सा है?
✅ NEP 2020 ने 10+2 को 5+3+3+4 शैक्षणिक ढांचे (आधारभूत, प्रारंभिक, मध्य, माध्यमिक चरण) से बदला। बुनियादी साक्षरता व संख्यात्मकता सुनिश्चित करने के लिए 2021 में निपुण भारत मिशन शुरू किया गया, जिसका लक्ष्य 2026-27 तक हर बच्चे में यह दक्षता हासिल करना है।
प्रश्न 3. पोषण अभियान और मिशन पोषण 2.0 में क्या फर्क है?
✅ पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन) 8 मार्च 2018 को स्टंटिंग, कुपोषण, एनीमिया और कम जन्म वजन घटाने के लक्ष्य के साथ मूल मिशन के रूप में शुरू हुआ। मिशन पोषण 2.0 (2021-22 बजट में घोषित, अब सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0) ने पोषण अभियान को आंगनवाड़ी सेवाओं व किशोरी बालिकाओं की योजना के साथ मिलाकर पोषण सामग्री, वितरण और अवसंरचना को सुदृढ़ किया।
प्रश्न 4. मिशन शक्ति की दो उप-योजनाएं कौन-सी हैं, और प्रत्येक किस पर केंद्रित है?
✅ संबल उप-योजना सुरक्षा पर केंद्रित है (वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 181, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ)। समर्थ्य उप-योजना सशक्तिकरण पर केंद्रित है (प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, उज्ज्वला, शक्ति सदन)।
प्रश्न 5. मानव विकास सूचकांक (HDI) के तीन आयाम कौन-से हैं, और भारत को हाल की मानव विकास रिपोर्टों में किस श्रेणी में रखा गया है?
✅ HDI के तीन आयाम हैं — स्वास्थ्य (जन्म के समय जीवन प्रत्याशा), शिक्षा (औसत व अपेक्षित स्कूली वर्ष) और जीवन स्तर (क्रय शक्ति समता पर प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय)। भारत को हाल की रिपोर्टों में "मध्यम मानव विकास" श्रेणी में रखा गया है, जिसकी वैश्विक रैंक लगभग 130वें स्थान के आसपास रही है।
सारांश
भारत का सामाजिक क्षेत्र स्वास्थ्य (आयुष्मान भारत के दो स्तंभ — आयुष्मान आरोग्य मंदिर और PM-JAY, तथा NHM का सेवा-वितरण ढांचा), शिक्षा (NEP 2020 का 5+3+3+4 ढांचा और समग्र शिक्षा का क्रियान्वयन तंत्र), पोषण (पोषण अभियान से मिशन पोषण 2.0 तक का सफर), महिला-बाल कल्याण (मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य), सामाजिक सुरक्षा (चार श्रम संहिताओं में सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 सहित) और वंचित वर्गों के कल्याण (PM-AJAY, PM-JANMAN, PM VIKAS) — इन सभी स्तंभों पर एक साथ खड़ा है। मानव विकास सूचकांक याद दिलाता है कि इन सभी प्रयासों का अंतिम लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के रूप में मापी जाने वाली वास्तविक मानव क्षमता का विस्तार है। RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए, हर प्रमुख योजना का लॉन्च वर्ष, नोडल मंत्रालय, तथा निकट संबंधित योजनाओं (जैसे NHM बनाम PM-JAY, या मिशन शक्ति बनाम मिशन वात्सल्य) के बीच का सटीक अंतर याद रखना ही इस विषय से पूछे जाने वाले अधिकांश प्रश्नों को कवर करता है।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •GDP = C + I + G + (X−M); यह एक वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
- •भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में 'हैरोड-डोमर' मॉडल पर आधारित थी।
- •RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई; 1949 में राष्ट्रीयकरण; मुख्यालय मुंबई।
- •भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू; 101वें संशोधन (2016)।
- •GDP = देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं/सेवाओं का बाजार मूल्य।