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📚 आर्थिक अवधारणाएं एवं भारतीय अर्थव्यवस्था

अंतरिक्ष क्षेत्र — SPADEX, IN-SPACe, FDI नीति एवं भारत का अंतरिक्ष अर्थतंत्र

Space Sector — SPADEX, IN-SPACe, FDI Policy and India's Space Economy

10 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: अगस्त 2026· Economic Concepts and Indian Economy

परिचय

अंतरिक्ष क्षेत्र (Space Sector) पिछले कुछ वर्षों में RAS प्रारंभिक परीक्षा के अर्थव्यवस्था खंड में एक तेजी से उभरता हुआ महत्वपूर्ण विषय बन गया है, क्योंकि भारत सरकार ने इसे केवल एक वैज्ञानिक-रणनीतिक गतिविधि से आगे बढ़ाकर एक पूर्ण व्यावसायिक अर्थव्यवस्था (Commercial Economy) के रूप में विकसित करने की नीति अपनाई है। 16 जनवरी 2025 को भारत ने अपने SPADEX मिशन के अंतर्गत स्वायत्त उपग्रह डॉकिंग (Autonomous Satellite Docking) का सफल प्रदर्शन कर यह उपलब्धि हासिल करने वाला विश्व का चौथा देश (अमेरिका, रूस एवं चीन के बाद) बनकर एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया। इसके समानांतर, अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार 2020, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023, IN-SPACe की स्थापना, उदारीकृत FDI नीति तथा ₹1,000 करोड़ के वेंचर कैपिटल फंड जैसे नीतिगत कदमों ने निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष उद्योग के द्वार खोल दिए हैं। वर्तमान में भारत का अंतरिक्ष अर्थतंत्र लगभग USD 8.4 बिलियन का है, जो वैश्विक अंतरिक्ष बाजार का मात्र लगभग 2% है, किंतु अगले दशक में इसके USD 44 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है — यह तीव्र वृद्धि दर RAS परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था, विज्ञान-प्रौद्योगिकी एवं शासन — तीनों खंडों से प्रश्न बनाने की संभावना रखती है।

मुख्य अवधारणाएँ

1. भारत का अंतरिक्ष अर्थतंत्र: आकार एवं महत्व

भारत का अंतरिक्ष अर्थतंत्र (Space Economy) वर्तमान में लगभग USD 8.4 बिलियन आँका गया है, जो वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (जिसका आकार लगभग USD 400-500 बिलियन के बीच अनुमानित है) में भारत की हिस्सेदारी को केवल लगभग 2% तक सीमित रखता है — जबकि भारत के पास विश्व-स्तरीय अंतरिक्ष क्षमता, कुशल इंजीनियरिंग जनशक्ति एवं सिद्ध प्रक्षेपण तकनीक (जैसे PSLV, GSLV) उपलब्ध है। इसी अंतर को पाटने के उद्देश्य से भारत सरकार ने अनुमान लगाया है कि उचित नीतिगत सुधारों, निजी निवेश एवं व्यावसायीकरण के माध्यम से भारत का अंतरिक्ष अर्थतंत्र अगले दशक के भीतर लगभग USD 44 बिलियन तक पहुँच सकता है — अर्थात् वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की हिस्सेदारी को कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य है।

यह वृद्धि केवल सरकारी निवेश से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी अनिवार्य मानी गई है। इसी कारण भारत सरकार ने पिछले पाँच वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार 2020, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023, IN-SPACe की स्थापना, उदारीकृत FDI नीति तथा समर्पित वेंचर कैपिटल फंड जैसी एक के बाद एक पहलें शुरू कीं, ताकि भारत को वैश्विक अंतरिक्ष सेवा उद्योग (उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण सेवाएँ, भू-प्रेक्षण, संचार एवं नेविगेशन सेवाएँ) में एक प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया जा सके। उल्लेखनीय है कि 2015 से 2024 के बीच भारत ने 400 से अधिक विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं, जो भारत की विश्वसनीय व लागत-प्रभावी प्रक्षेपण सेवाओं (विशेषकर PSLV के माध्यम से) की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

2. SPADEX मिशन — स्वायत्त उपग्रह डॉकिंग (Space Docking Experiment)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने SPADEX (Space Docking Experiment) मिशन के अंतर्गत दो छोटे उपग्रहों — चेज़र (SDX01) एवं टारगेट (SDX02) — को PSLV-C60 रॉकेट के माध्यम से 30 दिसंबर 2024 को प्रक्षेपित किया। इसके बाद ISRO ने कक्षा में इन दोनों उपग्रहों के बीच स्वायत्त डॉकिंग (Autonomous Docking) का सफल प्रदर्शन कर 16 जनवरी 2025 को यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इस सफलता के साथ भारत, अमेरिका, रूस एवं चीन के बाद यह क्षमता प्रदर्शित करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया।

SPADEX की सफलता का महत्व केवल तकनीकी प्रदर्शन तक सीमित नहीं है — अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक भविष्य के महत्वाकांक्षी मिशनों की आधारशिला मानी जाती है, जिनमें चंद्रयान-4 (जिसमें चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाने हेतु कक्षा में डॉकिंग आवश्यक होगी), भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station - BAS, जिसे 2035 तक स्थापित करने का लक्ष्य है) तथा गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यह तकनीक उपग्रहों की मरम्मत, ईंधन भरने (In-Orbit Servicing) तथा मलबा प्रबंधन (Space Debris Management) जैसी वाणिज्यिक अंतरिक्ष सेवाओं के लिए भी अनिवार्य आधार प्रदान करती है, जो भारत के व्यावसायिक अंतरिक्ष अर्थतंत्र के विस्तार में सहायक सिद्ध होगी।

3. अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार 2020 एवं भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023

जून 2020 में घोषित अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार (Space Sector Reforms, 2020) भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ माने जाते हैं। इससे पहले अंतरिक्ष क्षेत्र में गतिविधियाँ लगभग पूरी तरह ISRO के एकाधिकार में सीमित थीं। इन सुधारों के अंतर्गत निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष गतिविधियों की पूरी मूल्य श्रृंखला (End-to-End Value Chain) में भाग लेने की अनुमति दी गई — इसमें उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान निर्माण, प्रक्षेपण सेवाएँ प्रदान करना तथा अंतरिक्ष-आधारित सेवाएँ (जैसे रिमोट सेंसिंग डेटा, संचार सेवाएँ) उपलब्ध कराना शामिल है। इसका मूल उद्देश्य था — निजी निवेश को प्रोत्साहन, नवाचार (Innovation) को बढ़ावा तथा अंतरिक्ष सेवाओं का व्यावसायीकरण (Commercialisation)

इस दिशा में अगला बड़ा कदम अप्रैल 2023 में जारी भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 (Indian Space Policy 2023) था, जिसने भारतीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में विभिन्न संस्थाओं की भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया — ISRO को अनुसंधान एवं विकास (R&D), नई तकनीकों के प्रदर्शन तथा वैज्ञानिक अन्वेषण पर केंद्रित रहना है; NSIL को ISRO द्वारा विकसित तकनीकों के व्यावसायीकरण की जिम्मेदारी दी गई; तथा IN-SPACe को निजी क्षेत्र की गतिविधियों के प्रोत्साहन, प्राधिकरण एवं विनियमन हेतु एकल खिड़की (Single Window) एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया। इस नीति ने स्पष्ट किया कि सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य ISRO को अनुसंधान-केंद्रित संस्था के रूप में पुनर्गठित करना तथा नियमित/परिचालनात्मक गतिविधियों को धीरे-धीरे निजी क्षेत्र व NSIL को हस्तांतरित करना है।

4. IN-SPACe — निजी अंतरिक्ष गतिविधियों की सिंगल विंडो एजेंसी

IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) की स्थापना जून 2020 में की गई थी, तथा इसका मुख्यालय अहमदाबाद (गुजरात) में है। यह अंतरिक्ष विभाग (Department of Space - DOS) के अंतर्गत कार्यरत एक स्वायत्त एवं एकल खिड़की नोडल एजेंसी है, जिसकी भूमिका निजी क्षेत्र (गैर-सरकारी संस्थाओं/Non-Governmental Entities - NGEs) की अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए प्रोत्साहन (Promotion), विनियमन (Regulation) एवं प्राधिकरण (Authorisation) प्रदान करना है। इसका अर्थ है कि कोई भी निजी कंपनी जो उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान संचालन, ग्राउंड स्टेशन स्थापना या अन्य अंतरिक्ष-संबंधी गतिविधि शुरू करना चाहती है, उसे अनुमति के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के बजाय केवल IN-SPACe से संपर्क करना होता है।

IN-SPACe का एक अन्य महत्वपूर्ण कार्य ISRO की सुविधाओं (जैसे परीक्षण सुविधाएँ, प्रक्षेपण पैड) एवं संसाधनों को निजी कंपनियों के साथ साझा करने की सुविधा प्रदान करना भी है, ताकि नई अंतरिक्ष स्टार्टअप कंपनियों को महँगी अवसंरचना में भारी निवेश किए बिना अपनी तकनीक का परीक्षण व विकास करने का अवसर मिल सके। इस प्रकार IN-SPACe भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में निजी निवेश आकर्षित करने, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा भारत को वैश्विक अंतरिक्ष सेवा बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने की केंद्रीय संस्था के रूप में कार्य कर रहा है।

5. उदारीकृत FDI नीति एवं वेंचर कैपिटल फंड

निजी निवेश को और अधिक प्रोत्साहित करने हेतु सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment - FDI) नीति को उदार बनाया। इस नीति के अंतर्गत क्षेत्र को संवेदनशीलता के आधार पर विभाजित किया गया है — कम संवेदनशील उप-क्षेत्रों (जैसे उपग्रह के घटकों/सब-सिस्टम का विनिर्माण एवं उपग्रह से संबंधित उत्पादों व प्रणालियों का निर्माण) में 100% तक FDI स्वतः अनुमोदित मार्ग (Automatic Route) से अनुमति दी गई है, जिसमें सरकार की पूर्व-अनुमति आवश्यक नहीं है। इसके विपरीत, अधिक रणनीतिक (Strategic) उप-क्षेत्रों — जैसे उपग्रहों का निर्माण एवं संचालन, प्रक्षेपण यान (Launch Vehicles) तथा संबंधित प्रणालियाँ/उप-प्रणालियाँ — में FDI सीमा को क्रमशः 74% एवं 49% तक स्वतः अनुमोदित मार्ग से सीमित रखा गया है; इससे ऊपर के निवेश के लिए सरकारी अनुमोदन मार्ग (Government Route) अनिवार्य है। यह स्तरीकृत दृष्टिकोण एक ओर रणनीतिक व राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशीलता को सुरक्षित रखता है, दूसरी ओर विनिर्माण व कम संवेदनशील खंडों में विदेशी पूँजी व तकनीक के प्रवाह को अधिकतम करता है।

निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को प्रारंभिक चरण में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने हेतु अक्टूबर 2024 में सरकार ने ₹1,000 करोड़ के वेंचर कैपिटल फंड (VC Fund) की घोषणा की, जिसे IN-SPACe के अंतर्गत प्रबंधित किया जा रहा है। इस फंड का उद्देश्य अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करना, नवाचार एवं अनुसंधान को बढ़ावा देना, तथा निजी अंतरिक्ष उद्योग के समग्र विकास को गति देना है। यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरिक्ष तकनीक विकास पूँजी-गहन (Capital Intensive) एवं दीर्घकालिक होता है, जिसमें पारंपरिक निजी निवेशक जोखिम लेने में संकोच करते हैं — ऐसे में सरकार-समर्थित VC फंड इस अंतर को पाटने का कार्य करता है।

6. NewSpace India Limited (NSIL) — ISRO की वाणिज्यिक शाखा

NewSpace India Limited (NSIL) की स्थापना मार्च 2019 में अंतरिक्ष विभाग (DOS) के अंतर्गत एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (Central Public Sector Enterprise - CPSE) के रूप में की गई थी। यह ISRO की वाणिज्यिक शाखा (Commercial Arm) के रूप में कार्य करती है तथा इसका मुख्य उद्देश्य ISRO द्वारा विकसित तकनीकों एवं उत्पादों को उद्योग जगत की सहायता से व्यावसायिक रूप से क्रियान्वित करना है। NSIL के प्रमुख कार्यों में शामिल हैं — PSLV एवं छोटे प्रक्षेपण यानों (Small Satellite Launch Vehicle - SSLV) का उद्योग की भागीदारी से उत्पादन एवं संचालन, उपग्रह निर्माण व प्रक्षेपण के माध्यम से वाणिज्यिक अनुबंधों का क्रियान्वयन, ट्रांसपोंडर लीज़िंग सेवाएँ, तथा ISRO की प्रौद्योगिकियों का प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) के माध्यम से निजी उद्योगों को व्यावसायीकरण।

यह ध्यान देने योग्य है कि IN-SPACe एवं NSIL की भूमिकाएँ भिन्न किंतु परस्पर पूरक हैं — IN-SPACe एक नियामक/प्रोत्साहक (Regulator/Promoter) संस्था है जो निजी कंपनियों की अंतरिक्ष गतिविधियों को अनुमति एवं मार्गदर्शन प्रदान करती है, जबकि NSIL एक वाणिज्यिक/परिचालनात्मक (Commercial/Operational) इकाई है जो स्वयं व्यावसायिक अनुबंधों का क्रियान्वयन करती है तथा ISRO की तकनीकों को बाजार तक पहुँचाती है। परीक्षा में इन दोनों संस्थाओं की भूमिकाओं को मिलाना एक सामान्य त्रुटि है, अतः इनके कार्यों को स्पष्ट रूप से याद रखना आवश्यक है।

7. निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स एवं वैश्विक भागीदारी

भारत में निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र (Private Space Startup Ecosystem) पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। इसमें Skyroot Aerospace का विशेष उल्लेख आवश्यक है, जिसने नवंबर 2022 में अपना पहला रॉकेट विक्रम-S (Vikram-S) सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर भारत की पहली निजी कंपनी बनने का गौरव प्राप्त किया, जिसने अंतरिक्ष में रॉकेट भेजा। इसी प्रकार Agnikul Cosmos ने अपने 3D-प्रिंटेड इंजन आधारित रॉकेट अग्निबाण (Agnibaan) का सफल परीक्षण प्रक्षेपण किया है। इनके अतिरिक्त Pixxel (भू-प्रेक्षण/Earth Observation उपग्रह), Dhruva Space (उपग्रह निर्माण एवं प्रक्षेपण सेवाएँ) तथा Bellatrix Aerospace (उपग्रह प्रणोदन प्रणाली) जैसी कंपनियाँ भी भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को गति दे रही हैं।

इन स्टार्टअप्स की सफलता भारत की नीतिगत उदारीकरण नीतियों (अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार 2020, IN-SPACe, FDI उदारीकरण, VC फंड) का प्रत्यक्ष परिणाम है। साथ ही भारत की वैश्विक स्तर पर विश्वसनीयता — विशेषकर 2015-2024 के दौरान 400 से अधिक विदेशी उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण, चंद्रयान-3 की सफलता (अगस्त 2023, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उतरने वाला विश्व का पहला मिशन) तथा गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की प्रगति — ने अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों व निवेशकों का भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं में विश्वास बढ़ाया है। यह संयोजन — सिद्ध तकनीकी क्षमता, उदार नीतिगत ढाँचा तथा बढ़ता निजी निवेश — भारत को आगामी दशक में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर कर रहा है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • SPADEX मिशन: प्रक्षेपण 30 दिसंबर 2024 (PSLV-C60); स्वायत्त डॉकिंग सफलता 16 जनवरी 2025; भारत बना विश्व का चौथा देश (अमेरिका, रूस, चीन के बाद)।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार: जून 2020 में घोषित; निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष गतिविधियों की पूरी मूल्य श्रृंखला में भागीदारी की अनुमति।
  • भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023: अप्रैल 2023 में जारी; ISRO (अनुसंधान), NSIL (व्यावसायीकरण) एवं IN-SPACe (नियमन/प्रोत्साहन) की भूमिकाएँ स्पष्ट रूप से परिभाषित।
  • IN-SPACe: स्थापना जून 2020; मुख्यालय अहमदाबाद; निजी अंतरिक्ष गतिविधियों हेतु सिंगल विंडो एजेंसी — प्रोत्साहन, विनियमन एवं प्राधिकरण।
  • FDI नीति: कम संवेदनशील उप-क्षेत्रों (उपग्रह घटक विनिर्माण) में 100% स्वतः अनुमोदित मार्ग; रणनीतिक उप-क्षेत्रों (उपग्रह निर्माण/संचालन, प्रक्षेपण यान) में 74%/49% तक स्वतः अनुमोदित, इससे ऊपर सरकारी मार्ग।
  • वेंचर कैपिटल फंड: ₹1,000 करोड़, अक्टूबर 2024 में घोषित, IN-SPACe द्वारा प्रबंधित, अंतरिक्ष स्टार्टअप्स हेतु।
  • NSIL: स्थापना मार्च 2019; ISRO की वाणिज्यिक शाखा; PSLV/SSLV उत्पादन, उपग्रह प्रक्षेपण अनुबंध, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण।
  • भारत का अंतरिक्ष अर्थतंत्र: वर्तमान आकार ~USD 8.4 बिलियन (वैश्विक बाजार का ~2%); अगले दशक में ~USD 44 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान।
  • 2015-2024 के दौरान भारत द्वारा 400 से अधिक विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित।
  • प्रमुख निजी स्टार्टअप्स: Skyroot Aerospace (विक्रम-S, नवंबर 2022, पहली निजी रॉकेट लॉन्च), Agnikul Cosmos (अग्निबाण), Pixxel, Dhruva Space, Bellatrix Aerospace।

परीक्षा टिप्स

  • "भारत चौथा देश किसमें बना" — इस प्रकार के तथ्य-आधारित प्रश्न SPADEX के संदर्भ में अत्यंत संभावित हैं; याद रखें कि क्रम है — अमेरिका, रूस, चीन, भारत (स्वायत्त उपग्रह डॉकिंग में)।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार (2020) एवं भारतीय अंतरिक्ष नीति (2023) के वर्षों तथा उद्देश्यों को न मिलाएँ — 2020 का सुधार निजी भागीदारी का द्वार खोलने वाला प्रारंभिक कदम था, जबकि 2023 की नीति ने संस्थाओं (ISRO/NSIL/IN-SPACe) की भूमिकाओं को औपचारिक रूप से परिभाषित किया।
  • FDI सीमाओं को याद रखने के लिए यह समझें कि जितना अधिक "रणनीतिक/संवेदनशील" उप-क्षेत्र, उतनी ही कम स्वतः अनुमोदित सीमा — घटक विनिर्माण (100%) > उपग्रह निर्माण/संचालन (74%) > प्रक्षेपण यान (49%)।
🧠 स्मरण ट्रिक — FDI सीमाओं का क्रम

"100 घटता जाए जैसे-जैसे जोखिम बढ़े" — याद रखें 100-74-49 का घटता क्रम: उपग्रह घटक विनिर्माण (कम संवेदनशील) में 100% स्वतः अनुमोदित, उपग्रह निर्माण/संचालन में 74% स्वतः अनुमोदित, तथा प्रक्षेपण यान (सर्वाधिक रणनीतिक) में केवल 49% स्वतः अनुमोदित। जितना अधिक सामरिक महत्व, उतनी कम स्वतः अनुमोदित सीमा — यही तर्क याद रखने पर तीनों आँकड़े स्वतः स्पष्ट हो जाते हैं।

⚠️ कन्फ्यूज़न बस्टर — IN-SPACe बनाम NSIL

ये दोनों संस्थाएँ अक्सर एक-दूसरे से मिला दी जाती हैं, किंतु इनकी भूमिकाएँ पूर्णतः भिन्न हैं। IN-SPACe (स्थापना 2020) एक नियामक एवं प्रोत्साहक निकाय है — यह निजी कंपनियों को अंतरिक्ष गतिविधियाँ करने की अनुमति (Authorisation) देता है और उनके लिए सिंगल विंडो एजेंसी के रूप में कार्य करता है; यह स्वयं व्यावसायिक अनुबंध नहीं करता। इसके विपरीत, NSIL (स्थापना 2019) एक वाणिज्यिक/परिचालनात्मक कंपनी (CPSE) है — यह स्वयं उपग्रह प्रक्षेपण अनुबंध करती है, PSLV/SSLV का उद्योग-सहभागिता से उत्पादन करवाती है, तथा ISRO की तकनीकों को बाजार में बेचती है। त्वरित पहचान: "अनुमति देने वाला" = IN-SPACe; "स्वयं व्यापार करने वाला" = NSIL।

📝 अभ्यास प्रश्न
Q1. SPADEX मिशन के अंतर्गत भारत ने कब स्वायत्त उपग्रह डॉकिंग का सफल प्रदर्शन किया, और इसके साथ भारत किस स्थान पर पहुँचा?

✅ 16 जनवरी 2025 को (प्रक्षेपण 30 दिसंबर 2024, PSLV-C60 द्वारा); इसके साथ भारत, अमेरिका, रूस एवं चीन के बाद स्वायत्त उपग्रह डॉकिंग प्रदर्शित करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया।

Q2. IN-SPACe की स्थापना कब हुई और इसका मुख्य कार्य क्या है?

✅ जून 2020 में स्थापना (मुख्यालय अहमदाबाद); यह निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के प्रोत्साहन, विनियमन एवं प्राधिकरण हेतु सिंगल विंडो नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।

Q3. अंतरिक्ष क्षेत्र में उदारीकृत FDI नीति के अंतर्गत उपग्रह निर्माण/संचालन एवं प्रक्षेपण यान उप-क्षेत्रों की स्वतः अनुमोदित सीमा क्या है?

✅ उपग्रह निर्माण एवं संचालन में 74% तक स्वतः अनुमोदित मार्ग से FDI की अनुमति है; प्रक्षेपण यान एवं संबंधित प्रणालियों में यह सीमा 49% तक है — इससे ऊपर के निवेश हेतु सरकारी अनुमोदन आवश्यक है।

Q4. अक्टूबर 2024 में अंतरिक्ष स्टार्टअप्स हेतु घोषित वेंचर कैपिटल फंड की राशि कितनी है और इसे कौन प्रबंधित करता है?

✅ ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड, जिसे IN-SPACe के अंतर्गत प्रबंधित किया जा रहा है, ताकि अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता मिल सके।

Q5. भारत की कौन-सी निजी कंपनी ने नवंबर 2022 में अपना पहला रॉकेट (विक्रम-S) सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर इतिहास रचा?

✅ Skyroot Aerospace ने नवंबर 2022 में विक्रम-S रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया, जिससे यह अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने वाली भारत की पहली निजी कंपनी बनी।

सारांश

भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र वैज्ञानिक उपलब्धियों (SPADEX के माध्यम से स्वायत्त उपग्रह डॉकिंग में विश्व का चौथा देश बनना) एवं नीतिगत उदारीकरण (अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार 2020, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023, IN-SPACe, उदार FDI नीति, ₹1,000 करोड़ का VC फंड) के संयोजन से एक तेजी से बढ़ते वाणिज्यिक अर्थतंत्र में परिवर्तित हो रहा है। वर्तमान में USD 8.4 बिलियन का यह अर्थतंत्र अगले दशक में USD 44 बिलियन तक पहुँचने की राह पर है, जिसमें IN-SPACe (नियमन एवं प्रोत्साहन) व NSIL (वाणिज्यिक क्रियान्वयन) — दोनों संस्थाओं की स्पष्ट किंतु पूरक भूमिकाएँ, तथा Skyroot व Agnikul जैसे निजी स्टार्टअप्स की बढ़ती उपस्थिति केंद्रीय भूमिका निभा रही है। RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए SPADEX की तिथियाँ व क्रम, IN-SPACe बनाम NSIL की भूमिकाएँ, FDI सीमाओं का क्रम (100-74-49) तथा अंतरिक्ष अर्थतंत्र के आँकड़े (8.4 बिलियन → 44 बिलियन) याद रखना सर्वाधिक फलदायी रहेगा।

त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • GDP = C + I + G + (X−M); यह एक वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
  • भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में 'हैरोड-डोमर' मॉडल पर आधारित थी।
  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई; 1949 में राष्ट्रीयकरण; मुख्यालय मुंबई।
  • भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू; 101वें संशोधन (2016)।
  • GDP = देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं/सेवाओं का बाजार मूल्य।
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