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कर लगाना — GST, आयकर एवं कर सुधार — RAS 2026 नोट्स

Taxation — GST, Income Tax and Tax Reforms — RAS 2026 Notes

12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: अगस्त 2026· Economic Concepts and Indian Economy

परिचय

कराधान (Taxation) राजकोषीय नीति का सबसे मूल आधार है — यह वह साधन है जिसके ज़रिए सरकार जनता व व्यवसायों से अनिवार्य अंशदान लेकर सार्वजनिक सेवाओं, अवसंरचना व कल्याण योजनाओं का वित्तपोषण करती है। RAS प्रारंभिक परीक्षा में यह विषय राजकोषीय नीति व बजट से जुड़ा तो है ही, लेकिन इसकी अपनी विशिष्ट माँग है — GST की संरचना, दरें व परिषद, आयकर की नई व्यवस्था, नया आयकर अधिनियम 2025, तथा कर-GDP अनुपात जैसे आँकड़े हर वर्ष अद्यतन होते हैं और परीक्षा में सीधे पूछे जाते हैं। ध्यान रहे कि करों से प्राप्त राजस्व का केंद्र-राज्यों के बीच बँटवारा वित्त आयोग द्वारा तय होता है (जिसका विस्तृत विवरण राजकोषीय नीति व राजकोषीय संघवाद वाले नोट्स में दिया गया है) — यहाँ हम मुख्यतः कर-ढाँचे, GST व आयकर की संरचना पर केंद्रित रहेंगे।

मुख्य अवधारणाएँ

1. प्रत्यक्ष कर बनाम अप्रत्यक्ष कर

प्रत्यक्ष कर वह कर है जिसका भार व घटना (Impact व Incidence) एक ही व्यक्ति/संस्था पर पड़ता है — इसे किसी अन्य पर हस्तांतरित (Shift) नहीं किया जा सकता; उदाहरण हैं आयकर, निगम कर (Corporation Tax) व संपत्ति कर। यह प्रायः प्रगतिशील (Progressive) होता है — अधिक आय वालों पर अधिक दर से कर लगता है, जिससे यह आय-असमानता घटाने में सहायक होता है। इसके विपरीत अप्रत्यक्ष कर में कर की घटना (Incidence) उपभोक्ता पर पड़ती है जबकि कर जमा करने का दायित्व (Impact) विक्रेता/उत्पादक पर होता है — अर्थात कर का भार आगे हस्तांतरित हो जाता है; उदाहरण हैं GST, सीमा शुल्क व केंद्रीय उत्पाद शुल्क। यह सामान्यतः समानुपाती या प्रतिगामी (Regressive) प्रकृति का होता है, क्योंकि अमीर-गरीब दोनों एक ही वस्तु पर समान दर से कर चुकाते हैं, जिससे यह गरीबों पर अपेक्षाकृत भारी पड़ता है। भारत के कुल कर राजस्व में परंपरागत रूप से अप्रत्यक्ष करों का हिस्सा अधिक रहा है, हालाँकि पिछले एक दशक में प्रत्यक्ष कर संग्रह (विशेषकर आयकर) में तेज़ी से वृद्धि हुई है और अब दोनों का अनुपात लगभग बराबर आ रहा है।

2. आयकर की संरचना — पुरानी व नई व्यवस्था तथा नया आयकर अधिनियम 2025

भारत में व्यक्तिगत आयकर स्लैब-आधारित एवं प्रगतिशील है। बजट 2020 में एक वैकल्पिक नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) शुरू की गई थी जिसमें कम दरें तो हैं, पर अधिकांश छूट व कटौतियाँ (जैसे धारा 80C, HRA) उपलब्ध नहीं हैं; बजट 2023 से यह नई व्यवस्था डिफ़ॉल्ट (Default) बना दी गई, यद्यपि करदाता चाहें तो पुरानी व्यवस्था चुन सकते हैं। बजट 2025-26 में नई व्यवस्था के तहत स्लैब को और उदार बनाया गया — ₹4 लाख तक आय कर-मुक्त, ₹4-8 लाख पर 5%, ₹8-12 लाख पर 10%, ₹12-16 लाख पर 15%, ₹16-20 लाख पर 20%, ₹20-24 लाख पर 25% तथा ₹24 लाख से ऊपर 30%; इसके साथ धारा 87A के तहत छूट (Rebate) की सीमा बढ़ाकर ऐसी कर दी गई कि ₹12 लाख तक की कर-योग्य आय पर प्रभावी रूप से कोई कर देय नहीं है (वेतनभोगियों हेतु मानक कटौती सहित यह सीमा ₹12.75 लाख तक पहुँच जाती है)। सबसे बड़ा हालिया सुधार यह है कि छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 के स्थान पर संसद ने अगस्त 2025 में नया आयकर अधिनियम, 2025 (Income-tax Act, 2025) पारित किया, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा (कर-निर्धारण वर्ष 2026-27 से); इसका उद्देश्य भाषा को सरल बनाना, धाराओं व शब्दों की संख्या घटाना तथा "कर वर्ष (Tax Year)" जैसी नई शब्दावली अपनाकर पुरानी "निर्धारण वर्ष/पूर्व वर्ष" प्रणाली को सरल करना है — यह अधिनियम कराधान के मूल सिद्धांतों में बड़ा बदलाव नहीं करता, बल्कि इसे संहिताबद्ध (Codify) व सरल करता है।

3. GST — पृष्ठभूमि, संवैधानिक आधार एवं संरचना

वस्तु एवं सेवा कर (GST) भारत का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार है, जिसे "एक राष्ट्र, एक कर, एक बाज़ार" के सिद्धांत पर 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के ज़रिए संवैधानिक आधार देकर 1 जुलाई 2017 से लागू किया गया। इसने केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, VAT, केंद्रीय बिक्री कर (CST), प्रवेश कर (Entry Tax), विलासिता कर, चुंगी (Octroi) व मनोरंजन कर (स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाने वाले को छोड़कर) जैसे लगभग 17 केंद्रीय व राज्य करों को समाहित कर एक "गंतव्य-आधारित उपभोग कर (Destination-based Consumption Tax)" का रूप ले लिया — अर्थात कर उस राज्य को मिलता है जहाँ वस्तु/सेवा का अंतिम उपभोग होता है, न कि जहाँ उत्पादन होता है। पेट्रोलियम उत्पाद (कच्चा तेल, पेट्रोल, डीज़ल, ATF, प्राकृतिक गैस) व मानव-उपभोग हेतु मदिरा (Alcohol for Human Consumption) अभी भी GST से बाहर हैं और राज्यों द्वारा अलग से कराधान योग्य हैं; बिजली व स्टाम्प शुल्क भी GST के दायरे से बाहर हैं। भारत में GST का दोहरा ढाँचा (Dual GST Model) अपनाया गया है, जिसमें राज्य के भीतर लेन-देन पर केंद्र CGST (Central GST) और राज्य SGST (State GST) वसूलते हैं (संघ शासित प्रदेशों में SGST के स्थान पर UTGST लगता है), जबकि अंतर-राज्यीय लेन-देन व आयात पर केंद्र IGST (Integrated GST) वसूलता है, जिसे बाद में गंतव्य राज्य के साथ बाँटा जाता है — यह व्यवस्था इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की निरंतरता बनाए रखकर कर के व्यापक प्रभाव (Cascading/"Tax on Tax") को समाप्त करती है।

4. GST परिषद — गठन, संरचना एवं निर्णय-प्रक्रिया

अनुच्छेद 279A के तहत गठित GST परिषद एक संवैधानिक संघीय निकाय है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं; इसके सदस्यों में केंद्रीय राजस्व/वित्त राज्य मंत्री तथा प्रत्येक राज्य/संघ शासित प्रदेश (विधानसभा सहित) के वित्त या कराधान प्रभारी मंत्री शामिल होते हैं। यह परिषद GST की दरें, छूट, थ्रेशोल्ड सीमा तथा कर-प्रशासन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेती है। मतदान में केंद्र का भार कुल मतों का एक-तिहाई (1/3) और सभी राज्यों को मिलाकर दो-तिहाई (2/3) भार होता है; किसी भी प्रस्ताव को पारित करने हेतु डाले गए मतों के तीन-चौथाई (75%) बहुमत की आवश्यकता होती है — इस तरह न तो केंद्र और न ही कोई एक राज्य अकेले निर्णय को रोक या थोप सकता है, जो भारत के सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का उदाहरण है। GST लागू होने से राज्यों के राजस्व-नुकसान की भरपाई हेतु पहले पाँच वर्षों (2017-2022) तक GST क्षतिपूर्ति उपकर (Compensation Cess) के ज़रिए मुआवज़ा दिया गया, जिसकी अवधि बाद में ऋण-चुकौती हेतु आगे बढ़ाई गई।

5. GST दरें एवं GST 2.0 सुधार (सितंबर 2025)

प्रारंभ में GST की चार-स्तरीय दर-संरचना थी — 0%, 5%, 12%, 18% व 28% — तथा विलासिता व अहितकर (Sin/Demerit) वस्तुओं (जैसे तंबाकू, पान मसाला, महँगी कारें) पर 28% के ऊपर अतिरिक्त क्षतिपूर्ति उपकर भी लगता था। परंतु 56वीं GST परिषद बैठक (सितंबर 2025) में एक बड़े सरलीकरण को मंज़ूरी दी गई, जिसे लोकप्रिय रूप से "GST 2.0" कहा जाता है — इसके तहत 22 सितंबर 2025 से चार दरों को घटाकर मुख्यतः दो स्तरों — 5% (आवश्यक/जन-उपयोगी वस्तुएँ) व 18% (मानक दर) — में समेट दिया गया, जबकि तंबाकू, पान मसाला, महँगी कारों व अन्य विलासिता/अहितकर वस्तुओं हेतु एक नई 40% की विशेष दर बनाई गई। इस सुधार का उद्देश्य कर-ढाँचे को सरल बनाना, अनुपालन-बोझ घटाना, दरों को लेकर होने वाले वर्गीकरण-विवाद (Classification Disputes) कम करना तथा उपभोक्ताओं व मध्यम वर्ग को राहत देना था; रोज़मर्रा की कई वस्तुओं (जैसे खाद्य पदार्थ, साबुन, टूथपेस्ट, दवाइयाँ) को 18%/12% से घटाकर 5% या शून्य दर में लाया गया।

6. सीमा शुल्क, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, उपकर व अधिभार

GST के दायरे से बाहर रह गए क्षेत्रों (पेट्रोलियम, मदिरा) पर अब भी केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Union Excise Duty) लगता है, जबकि विदेश से आयातित व निर्यातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क (Customs Duty) लगाया जाता है — यह न केवल राजस्व का स्रोत है, बल्कि घरेलू उद्योग को संरक्षण (Protectionism) व व्यापार-नीति के साधन के रूप में भी उपयोग होता है। उपकर (Cess)अधिभार (Surcharge) दोनों केंद्र द्वारा किसी विशेष उद्देश्य (जैसे स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर, कृषि अवसंरचना उपकर) या उच्च-आय वर्ग पर अतिरिक्त बोझ हेतु लगाए जाते हैं, परंतु दोनों में बुनियादी अंतर यह है कि ये विभाज्य पूल (Divisible Pool) का हिस्सा नहीं होते, अर्थात वित्त आयोग की सिफ़ारिश अनुसार होने वाले कर-हस्तांतरण में राज्यों को इनमें हिस्सा नहीं मिलता — यही कारण है कि हाल के वर्षों में केंद्र द्वारा उपकर व अधिभार पर निर्भरता बढ़ने को राज्य "राजकोषीय संघवाद के लिए चुनौती" मानते हैं, क्योंकि इससे राज्यों का प्रभावी हिस्सा घटता है।

7. कर-GDP अनुपात, कर उत्प्लावकता (Tax Buoyancy) एवं प्रत्यक्ष कर संहिता

कर-GDP अनुपात (Tax-to-GDP Ratio) यह दर्शाता है कि कुल कर संग्रह GDP के कितने प्रतिशत के बराबर है — यह किसी अर्थव्यवस्था की "करारोपण क्षमता के वास्तविक उपयोग" व औपचारिकीकरण (Formalization) का सूचक माना जाता है। भारत का केंद्रीय कर-GDP अनुपात लगभग 11-12% तथा केंद्र+राज्य संयुक्त अनुपात लगभग 17-18% के आसपास रहता है, जो OECD देशों के औसत (लगभग 34%) से काफी कम है — इसका मुख्य कारण बड़ा अनौपचारिक (Informal) क्षेत्र, कृषि आय पर कर-छूट तथा कर-अनुपालन में कमी माना जाता है। कर उत्प्लावकता (Tax Buoyancy) मापती है कि GDP में एक प्रतिशत वृद्धि होने पर कर-राजस्व में कितने प्रतिशत की वृद्धि होती है (कर राजस्व में प्रतिशत परिवर्तन ÷ GDP में प्रतिशत परिवर्तन); उत्प्लावकता 1 से अधिक होना स्वस्थ संकेत है, क्योंकि इसका अर्थ है कि कर-संग्रह GDP वृद्धि से भी तेज़ गति से बढ़ रहा है (बेहतर अनुपालन, औपचारिकीकरण व दर-सुधार के कारण), जबकि 1 से कम उत्प्लावकता कर-प्रणाली की संरचनात्मक कमज़ोरी दर्शाती है। ऐतिहासिक रूप से 2009 में एक प्रत्यक्ष कर संहिता (Direct Tax Code — DTC) का मसौदा तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य आयकर अधिनियम 1961 व संपत्ति कर अधिनियम को मिलाकर एक सरल, आधुनिक कानून बनाना था, परंतु यह मसौदा कभी अधिनियमित नहीं हुआ; इसके स्थान पर अब नया आयकर अधिनियम, 2025 उसी सरलीकरण के उद्देश्य को साकार करता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • GST — 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016; लागू तिथि 1 जुलाई 2017; "एक राष्ट्र, एक कर, एक बाज़ार"।
  • GST परिषद — अनुच्छेद 279A; अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री; मतदान भार केंद्र 1/3, राज्य (सम्मिलित) 2/3; निर्णय हेतु 75% बहुमत आवश्यक।
  • GST 2.0 सुधार — 56वीं GST परिषद बैठक, सितंबर 2025; 22 सितंबर 2025 से लागू; दो मुख्य दरें 5% व 18%; विलासिता/अहितकर वस्तुओं पर 40% विशेष दर।
  • GST से बाहर — पेट्रोलियम उत्पाद (कच्चा तेल, पेट्रोल, डीज़ल, ATF, प्राकृतिक गैस), मानव-उपभोग हेतु मदिरा, बिजली, स्टाम्प शुल्क।
  • आयकर अधिनियम, 2025 — अगस्त 2025 में पारित; आयकर अधिनियम 1961 का स्थान लेगा; प्रभावी 1 अप्रैल 2026।
  • नई कर व्यवस्था (बजट 2025-26) — ₹12 लाख तक कर-योग्य आय पर धारा 87A छूट से प्रभावी रूप से शून्य कर; स्लैब 5%-30% (₹4 लाख से ऊपर क्रमिक रूप से)।
  • उपकर व अधिभार विभाज्य पूल (Divisible Pool) का हिस्सा नहीं होते — राज्यों को इनमें हिस्सा नहीं मिलता।
  • भारत का केंद्रीय कर-GDP अनुपात लगभग 11-12%; कर उत्प्लावकता 1 से अधिक होना स्वस्थ संकेत माना जाता है।

परीक्षा टिप्स

  • CGST/SGST/IGST किस लेन-देन पर लागू होता है (राज्य-भीतर बनाम अंतर-राज्यीय), यह भेद बार-बार पूछा जाता है — सावधानी से याद रखें।
  • GST 2.0 (सितंबर 2025) की नई दरें (5%, 18%, 40%) और पुरानी चार-स्तरीय संरचना (5/12/18/28) के बीच भ्रम से बचें — परीक्षा में तिथि (22 सितंबर 2025) व बैठक संख्या (56वीं) भी पूछी जा सकती है।
  • GST से बाहर रखी गई पाँच वस्तुओं (पेट्रोलियम की 4 + प्राकृतिक गैस) की सूची कंठस्थ रखें — यह अत्यंत लोकप्रिय प्रश्न है।
  • उपकर व अधिभार का विभाज्य पूल से बाहर होना — राजकोषीय संघवाद के अध्याय से जोड़कर पूछा जा सकता है।
🧠 स्मरण ट्रिक — GST से बाहर की वस्तुएँ

"पाँच पेट्रो भाई और एक शराबी बाहर हैं": कच्चा तेल, पेट्रोल, डीज़ल, ATF, प्राकृतिक गैस (पाँच पेट्रोलियम उत्पाद) + मानव-उपभोग हेतु मदिरा — ये छह वस्तुएँ अभी भी GST के दायरे से बाहर हैं और राज्यों द्वारा अलग से कर योग्य हैं।

⚠️ कन्फ्यूज़न बस्टर — उपकर (Cess) बनाम अधिभार (Surcharge)

दोनों केंद्र सरकार लगाती है, इसलिए भ्रम होता है। उपकर एक विशिष्ट उद्देश्य (जैसे स्वास्थ्य व शिक्षा, कृषि अवसंरचना) के लिए, सामान्यतः सभी करदाताओं पर मूल कर राशि पर लगाया जाता है, और इसकी वसूली उस उद्देश्य तक सीमित होती है। अधिभार किसी विशिष्ट उद्देश्य से नहीं जुड़ा होता — यह केवल उच्च-आय वर्ग/उच्च कर-दायित्व वाले करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ के रूप में लगाया जाता है ताकि अमीरों से अधिक राजस्व जुटाया जा सके। दोनों में समानता यह है कि दोनों ही राज्यों के साथ साझा किए जाने वाले विभाज्य पूल का हिस्सा नहीं होते।

📝 अभ्यास प्रश्न
Q1. GST किस संवैधानिक संशोधन के तहत तथा किस तिथि से लागू हुआ?

✅ 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016; 1 जुलाई 2017 से लागू।

Q2. GST परिषद में मतदान का भार केंद्र व राज्यों के बीच कैसे बँटा है, और निर्णय हेतु कितने बहुमत की आवश्यकता है?

✅ केंद्र — 1/3, सभी राज्य मिलाकर — 2/3; निर्णय हेतु डाले गए मतों का 75% बहुमत आवश्यक।

Q3. GST 2.0 सुधार के तहत सितंबर 2025 से GST की मुख्य दरें क्या हैं?

✅ दो मुख्य दरें — 5% व 18%; विलासिता/अहितकर वस्तुओं पर विशेष 40% दर (22 सितंबर 2025 से लागू, 56वीं GST परिषद बैठक)।

Q4. आयकर अधिनियम 1961 के स्थान पर कौन-सा नया अधिनियम कब से प्रभावी होगा?

✅ आयकर अधिनियम, 2025 (अगस्त 2025 में पारित); 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी।

Q5. उपकर व अधिभार राज्यों को वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित कर-हस्तांतरण में शामिल क्यों नहीं होते?

✅ क्योंकि ये विभाज्य पूल (Divisible Pool) का हिस्सा नहीं होते — केवल मूल करों (जैसे आयकर, CGST, निगम कर) का ही बँटवारा वित्त आयोग की सिफ़ारिश अनुसार होता है।

सारांश

कराधान भारत की राजकोषीय नीति की रीढ़ है — प्रत्यक्ष कर (आयकर, निगम कर) व अप्रत्यक्ष कर (GST, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क) मिलकर सरकार को राजस्व देते हैं। GST ने 2017 से "एक राष्ट्र, एक कर" के सिद्धांत पर अप्रत्यक्ष कराधान को दोहरे ढाँचे (CGST/SGST/IGST) में एकीकृत किया, और GST परिषद (अनुच्छेद 279A) सहकारी संघवाद के माध्यम से इसे संचालित करती है; सितंबर 2025 के GST 2.0 सुधार ने चार दरों को घटाकर मुख्यतः 5% व 18% (तथा विलासिता वस्तुओं पर 40%) कर दिया। आयकर के मोर्चे पर नई कर व्यवस्था डिफ़ॉल्ट बन चुकी है और नया आयकर अधिनियम 2025, अप्रैल 2026 से पुराने 1961 के कानून का स्थान लेगा। कर-GDP अनुपात व कर उत्प्लावकता जैसे संकेतक भारत की कर-क्षमता के औपचारिकीकरण को मापते हैं, जबकि उपकर व अधिभार का विभाज्य पूल से बाहर रहना राजकोषीय संघवाद की एक सतत चुनौती बना हुआ है। RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए GST की दरें/तिथियाँ, परिषद की मतदान-संरचना तथा नया आयकर अधिनियम सबसे अधिक संभावित प्रश्न-क्षेत्र हैं।

त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • GDP = C + I + G + (X−M); यह एक वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
  • भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में 'हैरोड-डोमर' मॉडल पर आधारित थी।
  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई; 1949 में राष्ट्रीयकरण; मुख्यालय मुंबई।
  • भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू; 101वें संशोधन (2016)।
  • GDP = देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं/सेवाओं का बाजार मूल्य।
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