परिचय
पर्यटन क्षेत्र (Tourism Sector) भारतीय अर्थव्यवस्था के सेवा क्षेत्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण उप-क्षेत्र है, जो अपने श्रम-प्रधान (Labour-Intensive) स्वरूप और विदेशी मुद्रा अर्जन की क्षमता के कारण RAS प्रारंभिक परीक्षा की अर्थव्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। पर्यटन न केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सीधा योगदान देता है, बल्कि होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, खान-पान, गाइड सेवाओं जैसे असंख्य सहायक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार भी सृजित करता है — यही कारण है कि इसे "गुणक प्रभाव" (Multiplier Effect) वाला क्षेत्र कहा जाता है। पर्यटन उपग्रह लेखा (TSA) के अनुसार वर्ष 2023-24 में भारत के GDP में पर्यटन का योगदान लगभग 5.2% रहा और इस क्षेत्र ने लगभग 8.46 करोड़ प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार को सहारा दिया। राजस्थान, अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, किलों-महलों, मरुस्थलीय पर्यटन एवं सांस्कृतिक विविधता के कारण, भारत के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में गिना जाता है, जिससे RAS परीक्षा की दृष्टि से यह विषय आर्थिक भूगोल और राज्य-विशिष्ट प्रासंगिकता — दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बन जाता है।
मुख्य अवधारणाएँ
1. GDP, रोजगार एवं विदेशी मुद्रा आय में पर्यटन का योगदान
पर्यटन क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था में तीन प्रमुख आयामों से योगदान देता है — आर्थिक उत्पादन (GDP), रोजगार सृजन, और विदेशी मुद्रा अर्जन। वर्ष 2023-24 में (पर्यटन उपग्रह लेखा के अनुसार) भारत के GDP में पर्यटन क्षेत्र का योगदान लगभग 5.2% रहा, जो दर्शाता है कि यह क्षेत्र अकेले ही अर्थव्यवस्था के एक उल्लेखनीय हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। रोजगार के मोर्चे पर, पर्यटन क्षेत्र ने लगभग 8.46 करोड़ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार को सहारा दिया। यह आँकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पर्यटन क्षेत्र में रोजगार सृजन की तीव्रता (Employment Intensity) पूँजी-प्रधान उद्योगों की तुलना में बहुत अधिक होती है — अर्थात प्रति इकाई निवेश पर पर्यटन क्षेत्र में अधिक रोजगार उत्पन्न होते हैं, जिससे यह भारत जैसी श्रम-अधिशेष अर्थव्यवस्था के लिए विशेष रूप से उपयुक्त क्षेत्र बन जाता है।
विदेशी मुद्रा आय (Foreign Exchange Earnings - FEE) के संदर्भ में, वर्ष 2024 में पर्यटन क्षेत्र से भारत को लगभग USD 35 बिलियन की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। यह आय भारत के चालू खाते (Current Account) को संतुलित करने में सहायक होती है, ठीक उसी तरह जैसे सेवा निर्यात के अन्य घटक (सॉफ्टवेयर सेवाएँ, व्यावसायिक परामर्श सेवाएँ) योगदान देते हैं। पर्यटन से प्राप्त विदेशी मुद्रा को "अदृश्य निर्यात" (Invisible Exports) की श्रेणी में रखा जाता है, क्योंकि इसमें किसी भौतिक वस्तु का निर्यात नहीं होता, बल्कि विदेशी पर्यटक भारत आकर यहाँ व्यय करते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा देश के भीतर ही अर्जित होती है।
| संकेतक | आँकड़ा | वर्ष |
|---|---|---|
| GDP में पर्यटन का योगदान | लगभग 5.2% | 2023-24 (TSA) |
| प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार | लगभग 8.46 करोड़ | 2023-24 (TSA) |
| विदेशी मुद्रा आय (FEE) | लगभग USD 35 बिलियन | 2024 |
| विदेशी पर्यटक आगमन (FTA) | लगभग 99.5 लाख (2023: लगभग 95.2 लाख) | 2024 |
2. घरेलू बनाम विदेशी पर्यटक रुझान
भारत में पर्यटन को मुख्यतः दो श्रेणियों में बाँटा जाता है — घरेलू पर्यटन (Domestic Tourism) और विदेशी पर्यटन (Foreign/Inbound Tourism)। हाल के वर्षों में घरेलू पर्यटक यात्राओं (Domestic Tourist Visits - DTVs) में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है, जो कोविड-19 महामारी के पश्चात घरेलू यात्रा में आई तेज़ी, बेहतर सड़क व रेल संपर्क, तथा मध्यम वर्ग की बढ़ती क्रय शक्ति का परिणाम है। इसके विपरीत, विदेशी पर्यटक आगमन (Foreign Tourist Arrivals - FTAs) में वृद्धि धीमी रही है — वर्ष 2024 में लगभग 99.5 लाख विदेशी पर्यटक आए (2023 में लगभग 95.2 लाख), जो कोविड-पूर्व वर्ष 2019 के लगभग 1.09 करोड़ से अब भी कम है।
यह अंतर RAS परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की पर्यटन नीति की प्राथमिकताओं को समझने में सहायक है — घरेलू पर्यटन आंतरिक उपभोग व क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देता है, जबकि विदेशी पर्यटन सीधे विदेशी मुद्रा अर्जन से जुड़ा है। इसीलिए सरकार दोनों श्रेणियों के लिए अलग-अलग रणनीतियाँ अपनाती है — घरेलू पर्यटन हेतु "देखो अपना देश" जैसे जागरूकता अभियान, तथा विदेशी पर्यटन हेतु ई-वीज़ा सरलीकरण व अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग अभियान (जैसे "Incredible India")।
3. चिकित्सा एवं वेलनेस पर्यटन (Medical & Wellness Tourism)
भारत चिकित्सा एवं वेलनेस पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। यह भारत की उच्च-गुणवत्ता किंतु अपेक्षाकृत किफायती स्वास्थ्य सेवाओं, कुशल चिकित्सकों, आधुनिक अस्पतालों तथा आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा जैसी पारंपरिक वेलनेस पद्धतियों के संयोजन के कारण संभव हुआ है। वर्ष 2025 में लगभग 5.07 लाख विदेशी नागरिक चिकित्सा उपचार के लिए भारत आए (कुल विदेशी पर्यटक आगमन का लगभग 5.5%), और भारत के चिकित्सा पर्यटन का अनुमानित बाजार आकार 2025 में लगभग USD 8.7 बिलियन आँका गया है, जिसमें आगामी वर्षों में निरंतर उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान है।
चिकित्सा पर्यटन में मुख्यतः हृदय शल्य चिकित्सा, अंग प्रत्यारोपण, अस्थि रोग उपचार, दंत चिकित्सा तथा कॉस्मेटिक सर्जरी जैसी सेवाओं के लिए बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मध्य पूर्व तथा अफ्रीकी देशों से बड़ी संख्या में मरीज़ भारत आते हैं। इसे सुगम बनाने हेतु भारत सरकार ने विशेष मेडिकल वीज़ा (M-Visa) तथा साथ आने वाले परिचारकों हेतु मेडिकल अटेंडेंट वीज़ा (MX-Visa) की व्यवस्था की है। वेलनेस पर्यटन के अंतर्गत केरल का आयुर्वेद पर्यटन तथा ऋषिकेश (उत्तराखंड) का योग पर्यटन विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जबकि राजस्थान भी हेरिटेज हवेलियों में स्थापित आयुर्वेदिक व स्पा रिसॉर्ट्स के माध्यम से इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है।
4. FDI नीति एवं पर्यटन अवसंरचना में निवेश
भारत सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए एक उदार नीति अपनाई है। पर्यटन एवं आतिथ्य (Hospitality) क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) स्वचालित मार्ग (Automatic Route) के अंतर्गत अनुमत है, अर्थात इस क्षेत्र में निवेश हेतु भारत सरकार से पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती। यह उदार नीति होटल, रिसॉर्ट्स, कन्वेंशन सेंटर, थीम पार्क तथा अन्य पर्यटन अवसंरचना परियोजनाओं में विदेशी पूँजी व तकनीकी विशेषज्ञता के प्रवाह को प्रोत्साहित करती है, जिससे विश्वस्तरीय अवसंरचना का विकास संभव होता है।
FDI के अतिरिक्त, पर्यटन अवसंरचना विकास हेतु केंद्र सरकार पर्यटन मंत्रालय के माध्यम से राज्यों को केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) के अंतर्गत वित्तीय सहायता भी प्रदान करती है, ताकि गंतव्य-स्तरीय अवसंरचना (सड़क संपर्क, पर्यटक सुविधा केंद्र, स्वच्छता, संकेतीकरण आदि) का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
5. सरकारी योजनाएँ: स्वदेश दर्शन, प्रसाद एवं देखो अपना देश
भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय पर्यटन क्षेत्र के समग्र विकास हेतु कई महत्वपूर्ण योजनाएँ संचालित करता है। स्वदेश दर्शन योजना (Swadesh Darshan Scheme), जिसे बाद में "स्वदेश दर्शन 2.0" के रूप में पुनर्गठित किया गया, थीम-आधारित पर्यटन परिपथों (जैसे बौद्ध परिपथ, तटीय परिपथ, हिमालयी परिपथ, रेगिस्तान परिपथ) के एकीकृत विकास पर केंद्रित है, ताकि पर्यटकों को एक ही क्षेत्र में विविध अनुभव उपलब्ध कराए जा सकें। इस योजना के अंतर्गत राजस्थान का मरु परिपथ (Desert Circuit) भी शामिल है, जिसकी स्वीकृत परियोजना "सांभर झील नगर एवं अन्य गंतव्यों का विकास" है।
प्रसाद योजना (PRASHAD - Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual, Heritage Augmentation Drive) तीर्थाटन एवं आध्यात्मिक महत्व के स्थलों के एकीकृत विकास पर केंद्रित है, जिसमें बुनियादी अवसंरचना, स्वच्छता, सुगम्यता तथा पर्यटक सुविधाओं में सुधार शामिल है — इसके अंतर्गत राजस्थान में "पुष्कर/अजमेर का एकीकृत विकास" परियोजना (2015-16 में स्वीकृत) लाभान्वित हुई है। इसके अतिरिक्त, "देखो अपना देश" (Dekho Apna Desh) पहल एक जागरूकता एवं प्रोत्साहन अभियान है, जिसका उद्देश्य भारतीय नागरिकों को अपने ही देश के विविध व समृद्ध पर्यटन स्थलों को देखने-समझने के लिए प्रेरित करना है, जिससे घरेलू पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
| योजना / पहल | मुख्य उद्देश्य | राजस्थान का उदाहरण |
|---|---|---|
| स्वदेश दर्शन (अब 2.0) | थीम-आधारित पर्यटन परिपथों का एकीकृत विकास | मरु परिपथ — सांभर झील नगर एवं अन्य गंतव्य |
| प्रसाद (PRASHAD) | तीर्थाटन व आध्यात्मिक-विरासत स्थलों का अवसंरचनात्मक विकास | पुष्कर/अजमेर का एकीकृत विकास (2015-16) |
| देखो अपना देश | घरेलू पर्यटन हेतु जागरूकता अभियान (अवसंरचना निर्माण नहीं) | — |
6. ई-वीज़ा नीति एवं पर्यटक वीज़ा सुविधाएँ
विदेशी पर्यटकों के लिए भारत यात्रा को सरल बनाने हेतु सरकार ने ई-वीज़ा (e-Visa) प्रणाली शुरू की है, जिसके अंतर्गत पात्र देशों के नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर त्वरित स्वीकृति प्राप्त कर सकते हैं, जिससे परंपरागत दूतावास-आधारित वीज़ा प्रक्रिया की तुलना में समय व जटिलता दोनों में उल्लेखनीय कमी आई है। ई-वीज़ा के अंतर्गत ई-टूरिस्ट वीज़ा, ई-बिजनेस वीज़ा तथा ई-मेडिकल वीज़ा जैसी उप-श्रेणियाँ शामिल हैं, जो पर्यटन के विभिन्न उद्देश्यों को समायोजित करती हैं। यह सरलीकृत वीज़ा व्यवस्था विदेशी पर्यटक आगमन (FTA) बढ़ाने की दिशा में एक प्रमुख नीतिगत उपकरण मानी जाती है, विशेषकर उन देशों से आगमन बढ़ाने में जहाँ पारंपरिक वीज़ा प्रक्रिया एक बाधा मानी जाती रही है।
7. पर्यटन क्षेत्र का श्रम-प्रधान स्वरूप एवं राजस्थान की प्रासंगिकता
पर्यटन क्षेत्र को एक श्रम-प्रधान (Labour-Intensive) क्षेत्र माना जाता है क्योंकि इसमें प्रति इकाई पूँजी निवेश पर अपेक्षाकृत अधिक रोजगार सृजित होता है — होटल कर्मी, गाइड, टैक्सी चालक, हस्तशिल्प कारीगर, स्थानीय विक्रेता आदि इससे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते हैं। यही कारण है कि पर्यटन को ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक विविधीकरण तथा आय-असमानता कम करने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है।
राजस्थान की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का विशेष महत्व है, क्योंकि राज्य की GSDP (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) में पर्यटन क्षेत्र का उल्लेखनीय योगदान है। जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, जैसलमेर व बीकानेर जैसे शहर अपने किलों-महलों के लिए, जबकि पुष्कर व अजमेर धार्मिक पर्यटन के लिए, और थार मरुस्थल साहसिक व पारिस्थितिकी पर्यटन (Desert Tourism) के लिए जाने जाते हैं। "पधारो म्हारे देश" राज्य का प्रसिद्ध पर्यटन नारा है। RAS प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी में राष्ट्रीय पर्यटन आँकड़ों के साथ-साथ राजस्थान की पर्यटन नीति, राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) तथा राज्य-विशिष्ट पर्यटन परिपथों का अध्ययन भी उपयोगी है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- 2023-24 में GDP में पर्यटन क्षेत्र का योगदान (TSA): लगभग 5.2%।
- रोजगार: लगभग 8.46 करोड़ प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार (2023-24)।
- 2024 में पर्यटन से विदेशी मुद्रा आय: लगभग USD 35 बिलियन।
- घरेलू पर्यटक यात्राओं (DTVs) की प्रवृत्ति: सकारात्मक/वृद्धिशील; विदेशी पर्यटक आगमन (FTAs): 2024 में लगभग 99.5 लाख (2023: लगभग 95.2 लाख), 2019 के लगभग 1.09 करोड़ से कम।
- 2025 में उपचार हेतु भारत आए विदेशी चिकित्सा पर्यटक: लगभग 5.07 लाख (FTA का लगभग 5.5%)।
- 2025 में भारत के चिकित्सा पर्यटन का बाजार आकार: लगभग USD 8.7 बिलियन।
- पर्यटन क्षेत्र (होटल/आतिथ्य) में FDI नीति: 100% स्वचालित मार्ग (Automatic Route) से अनुमत।
- प्रमुख योजनाएँ: स्वदेश दर्शन (थीम-आधारित परिपथ विकास), प्रसाद (तीर्थाटन विकास), देखो अपना देश (घरेलू पर्यटन जागरूकता)।
- विदेशी पर्यटकों के लिए ई-वीज़ा सुविधा उपलब्ध — ई-टूरिस्ट, ई-बिजनेस व ई-मेडिकल वीज़ा उप-श्रेणियाँ शामिल।
- पर्यटन एक श्रम-प्रधान (Labour-Intensive) तथा विदेशी मुद्रा अर्जक (Forex-Earning) क्षेत्र है — राजस्थान की अर्थव्यवस्था में इसकी विशेष भूमिका है।
परीक्षा टिप्स
- GDP योगदान (लगभग 5.2%), रोजगार (लगभग 8.46 करोड़) तथा विदेशी मुद्रा आय (लगभग USD 35 बिलियन) — इन तीनों आँकड़ों को आपस में न मिलाएँ; प्रत्येक अलग आयाम को दर्शाता है।
- स्वदेश दर्शन (परिपथ/सर्किट विकास) बनाम प्रसाद (तीर्थाटन/धार्मिक स्थल विकास) बनाम देखो अपना देश (जागरूकता अभियान, कोई अवसंरचना निर्माण नहीं) — तीनों योजनाओं के उद्देश्य में स्पष्ट अंतर याद रखें।
- घरेलू पर्यटन में तेज़ वृद्धि और विदेशी पर्यटक आगमन में धीमी वृद्धि (2019 के स्तर से अब भी कम) की प्रवृत्ति को एक साथ जोड़कर पढ़ें।
"5.2 - 8.46 - 35" याद रखें — GDP में 5.2% योगदान, 8.46 करोड़ रोजगार (दोनों 2023-24), तथा 35 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा आय (2024)। इन तीन अंकों से पर्यटन क्षेत्र के तीनों प्रमुख आर्थिक आयाम — उत्पादन, रोजगार व विदेशी मुद्रा — तुरंत स्मरण हो जाते हैं।
दोनों योजनाएँ पर्यटन मंत्रालय द्वारा संचालित अवसंरचना विकास योजनाएँ होने के कारण अक्सर मिला दी जाती हैं, लेकिन इनका केंद्र-बिंदु अलग है। स्वदेश दर्शन योजना विषयगत/थीम-आधारित पर्यटन परिपथों (जैसे रेगिस्तान परिपथ, बौद्ध परिपथ, तटीय परिपथ) के समग्र विकास पर केंद्रित है — इसका दायरा व्यापक व बहु-स्थल आधारित है। इसके विपरीत, प्रसाद योजना विशेष रूप से तीर्थाटन एवं आध्यात्मिक महत्व के व्यक्तिगत स्थलों (जैसे अजमेर, पुष्कर, वाराणसी, अमृतसर) के अवसंरचनात्मक कायाकल्प पर केंद्रित है। त्वरित पहचान: "दर्शन" शब्द व्यापक परिपथ-आधारित योजना का संकेत देता है, जबकि "प्रसाद" शब्द सीधे तीर्थ/आध्यात्मिक स्थलों से जुड़ी योजना का संकेत देता है।
Q1. भारत के GDP में पर्यटन क्षेत्र का योगदान (2023-24) तथा वर्ष 2024 की विदेशी मुद्रा आय कितनी थी?
✅ GDP में योगदान लगभग 5.2% रहा, तथा पर्यटन क्षेत्र से भारत को लगभग USD 35 बिलियन की विदेशी मुद्रा आय प्राप्त हुई।
Q2. भारत में पर्यटन क्षेत्र में FDI की क्या नीति है?
✅ पर्यटन एवं आतिथ्य (Hospitality) क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) स्वचालित मार्ग (Automatic Route) से अनुमत है, अर्थात इसके लिए सरकार से पूर्व अनुमोदन आवश्यक नहीं है।
Q3. स्वदेश दर्शन योजना और प्रसाद योजना के उद्देश्यों में क्या अंतर है?
✅ स्वदेश दर्शन योजना थीम-आधारित पर्यटन परिपथों के एकीकृत विकास पर केंद्रित है, जबकि प्रसाद योजना विशेष रूप से तीर्थाटन एवं आध्यात्मिक महत्व के स्थलों के अवसंरचनात्मक विकास पर केंद्रित है।
Q4. भारत में चिकित्सा एवं वेलनेस पर्यटन से संबंधित प्रमुख आँकड़े क्या हैं?
✅ वर्ष 2025 में लगभग 5.07 लाख विदेशी नागरिक चिकित्सा उपचार हेतु भारत आए, और भारत के चिकित्सा पर्यटन का अनुमानित बाजार आकार लगभग USD 8.7 बिलियन है।
Q5. पर्यटन क्षेत्र को "श्रम-प्रधान" क्षेत्र क्यों कहा जाता है, और राजस्थान के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
✅ पर्यटन क्षेत्र में प्रति इकाई पूँजी निवेश पर अपेक्षाकृत अधिक रोजगार सृजित होता है (होटल, गाइड, हस्तशिल्प, परिवहन आदि से जुड़े रोजगार), जिससे यह रोजगार-सघन क्षेत्र बनता है। राजस्थान, अपनी ऐतिहासिक विरासत, मरुस्थलीय पर्यटन व धार्मिक स्थलों के कारण, इस क्षेत्र से राज्य की GSDP व रोजगार में उल्लेखनीय योगदान प्राप्त करता है।
सारांश
पर्यटन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बहु-आयामी संपत्ति है — यह GDP में लगभग 5.2% योगदान देता है, लगभग 8.46 करोड़ प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार को सहारा देता है (2023-24), तथा वर्ष 2024 में लगभग USD 35 बिलियन की विदेशी मुद्रा अर्जित करता है। घरेलू पर्यटन में तेज़ वृद्धि तथा विदेशी पर्यटक आगमन में धीमी वृद्धि की प्रवृत्ति, चिकित्सा-वेलनेस पर्यटन का तीव्र विस्तार (2025 में लगभग 5.07 लाख चिकित्सा पर्यटक, USD 8.7 बिलियन बाजार), 100% स्वचालित FDI नीति, तथा स्वदेश दर्शन, प्रसाद व देखो अपना देश जैसी सरकारी योजनाएँ इस क्षेत्र के विकास को दिशा देती हैं। राजस्थान के लिए, अपनी समृद्ध विरासत के कारण, पर्यटन आर्थिक भूगोल का एक केंद्रीय स्तंभ है। RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए इन सभी आँकड़ों, योजनाओं व राज्य-विशिष्ट संदर्भों को एक साथ जोड़कर याद रखना सर्वाधिक फलदायी रहेगा।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •GDP = C + I + G + (X−M); यह एक वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
- •भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में 'हैरोड-डोमर' मॉडल पर आधारित थी।
- •RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई; 1949 में राष्ट्रीयकरण; मुख्यालय मुंबई।
- •भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू; 101वें संशोधन (2016)।
- •GDP = देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं/सेवाओं का बाजार मूल्य।