भावनात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence): परिभाषा, चार शाखाएँ, गोलमैन के पाँच घटक और संवेदनशील प्रशासन में उपयोग
भावनात्मक बुद्धि की परिभाषा, सैलोवी-मेयर और गोलमैन के मॉडल, संवेदनशील प्रशासन में प्रयोग, कार्यस्थल पर महत्त्व और विकास; छह पिछले प्रश्न हल सहित।
- सैलोवी-मेयर
- गोलमैन
- चार शाखाएँ
- संवेदनशील प्रशासन
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (व्यवहार): "Intelligence: cognitive, social and emotional, cultural, appreciative and spiritual intelligence; importance and inculcation at workplace." इस पृष्ठ पर भावनात्मक बुद्धि है: अर्थ, मेयर-सैलोवी का चार-शाखा मॉडल, गोलमैन के पाँच घटक, संवेदनशील प्रशासन में प्रयोग, महत्त्व और संवर्धन।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- भावनात्मक बुद्धि पर 2013 (20 अंक, विकल्प सहित), 2016, 2018 और 2021 में प्रश्न आए, और 2018 में यही विषय नैतिकता वाले पेपर II में भी पूछा गया। कुल पाँच प्रश्न।
- चार प्रश्न 2 अंक के (15 शब्द) और एक 20 अंक का (200 शब्द) था। 2 अंक के लिए एक सटीक परिभाषा और प्रतिपादक का नाम चाहिए; लंबे प्रश्न के लिए घटक, प्रशासन में प्रयोग और निष्कर्ष की त्रिस्तरीय संरचना।
- 2024 में भावनात्मक बनाम सांस्कृतिक बुद्धि का तुलनात्मक प्रश्न (5 अंक) आया था; उसका हल नीचे जोड़ा गया है। इसलिए इस पृष्ठ का हर बिंदु केवल परिभाषा के लिए नहीं, तुलना के लिए भी तैयार रखें।
भावनात्मक बुद्धि: पहले एक तस्वीर
एक अस्पताल के बाहर भीड़ जमा है क्योंकि सुबह से जाँच की मशीन ख़राब है। दो अधिकारी मौक़े पर पहुँचते हैं। पहला अधिकारी मशीन के तकनीकी कारण गिनाता है, शोर बढ़ने पर ख़ुद भी तीखा हो जाता है और स्थिति बिगड़ जाती है। दूसरा अधिकारी सबसे पहले अपने भीतर के तनाव को पहचानकर शांत रहता है, भीड़ के ग़ुस्से के पीछे की चिंता (बीमार रिश्तेदार, लंबा इंतज़ार) को भाँपता है, सबसे आगे खड़े वृद्ध से सीधे बात करता है, और स्पष्ट समय-सीमा के साथ वैकल्पिक व्यवस्था की घोषणा करता है। (यह दृश्य समझाने के लिए गढ़ा गया है।) दोनों के पास जानकारी बराबर थी; अंतर भावनाओं को समझने और संभालने की क्षमता का था। इसी को भावनात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence, EI) कहते हैं।
NCERT के मनोविज्ञान पाठ के अनुसार भावनात्मक बुद्धि बुद्धि की अवधारणा को बौद्धिक क्षेत्र से आगे ले जाकर उसमें भावनाओं को भी शामिल करती है। वह इसे बुद्धि का 'भावना-पक्ष' कहता है और यह भी बताता है कि अच्छा IQ और अच्छा शैक्षणिक रिकॉर्ड जीवन में सफल होने के लिए काफ़ी नहीं है, क्योंकि कई शैक्षणिक रूप से प्रतिभाशाली लोग परिवार, कार्यस्थल और संबंधों में कठिनाई झेलते हैं।
परिभाषाएँ
भावनात्मक बुद्धि शब्द को पहली बार शोध-साहित्य में सैलोवी और मेयर ने रखा (NCERT के अनुसार वे इसे प्रस्तुत करने वाले पहले लोग थे)। उनका 1990 का लेख 'Emotional Intelligence' पत्रिका Imagination, Cognition and Personality के खंड 9, अंक 3, पृष्ठ 185 से 211 में छपा। लेख के सार में इसे कौशलों का ऐसा समूह बताया गया है जो तीन कामों में योगदान देता है: अपनी और दूसरों की भावनाओं का सटीक आकलन और अभिव्यक्ति, अपनी और दूसरों की भावनाओं का प्रभावी नियमन, और भावनाओं का प्रयोग जीवन में प्रेरित होने, योजना बनाने और लक्ष्य पाने के लिए।
परीक्षा में सबसे सुविधाजनक रूप वह है जो NCERT और Noba, दोनों में आता है: भावनात्मक बुद्धि अपनी और दूसरों की भावनाओं की निगरानी करने, उनमें अंतर पहचानने और इस सूचना का उपयोग अपनी सोच और कार्य को निर्देशित करने में करने की क्षमता है। जैसे IQ से बुद्धि को व्यक्त किया जाता है, वैसे भावनात्मक भागफल (EQ) से भावनात्मक बुद्धि।
बाद में मेयर, कारूसो और सैलोवी (2016) ने इसे थोड़ा और सटीक रूप दिया: भावनाओं और भावना-संबंधी सूचना के साथ वैध तर्क करने की और सोच को बेहतर बनाने के लिए भावनाओं का उपयोग करने की क्षमता। इन तीनों परिभाषाओं में समान सूत्र यह है कि भावना यहाँ बाधा नहीं, सूचना का स्रोत है, जिसे समझदारी से पढ़ना और इस्तेमाल करना है।
मेयर और सैलोवी का चार-शाखा मॉडल
मेयर, कारूसो और सैलोवी (2016) बताते हैं कि यह चार-शाखा ढाँचा उनके 1997 के मूल काम से चला आ रहा है और 2016 के लेख में उसका संशोधन किया गया है। चारों शाखाएँ नीचे से ऊपर के क्रम में हैं। पहली और सबसे बुनियादी शाखा भावनाओं की पहचान है। उसके ऊपर विचार को सुविधा देने के लिए भावनाओं का प्रयोग आता है। फिर भावनाओं को समझना, और अंत में उन्हें सँभालना। Noba के पाठ में भी चारों क्षमताएँ यही हैं।
यह मॉडल क्षमता-आधारित (ability) है: यह मानता है कि भावनात्मक बुद्धि एक मानसिक योग्यता है, ठीक संज्ञानात्मक बुद्धि की तरह, और इसे प्रदर्शन-कार्यों से परखा जा सकता है। इसके मुक़ाबले गोलमैन का मॉडल व्यापक है। Noba के अनुसार गोलमैन ने 1995 की अपनी पुस्तक 'Emotional Intelligence: Why It Can Matter More Than IQ' में भावना-कौशलों को संज्ञानात्मक बुद्धि और व्यक्तित्व-लक्षणों के साथ जोड़ा। इस भेद की अकादमिक बहस का एक संकेत मेयर, सैलोवी और कारूसो (2008) के लेख के शीर्षक में मिलता है: 'New ability or eclectic traits?'।
चार-शाखा मॉडल और प्रशासनिक उदाहरण
| शाखा | अर्थ (मेयर-कारूसो-सैलोवी 2016, Noba) | प्रशासनिक उदाहरण (विश्लेषण) |
|---|---|---|
| 1. भावनाओं की पहचान | चेहरे, आवाज़ और शारीरिक संकेतों से अपनी और दूसरों की भावनाओं को पहचानना | जन-सुनवाई में आवेदक की झिझक या ग़ुस्से के संकेत पढ़ना |
| 2. भावनाओं से सोच को सुविधा | भावनात्मक अवस्थाओं का उपयोग ध्यान और सोच को दिशा देने में | आपदा के समय चिंता को सतर्कता में बदलकर तैयारी जाँचना |
| 3. भावनाओं को समझना | भावनाओं के अर्थ, कारण और परिणाम तथा भावनात्मक बदलावों को समझना | समझना कि राहत में देरी का ग़ुस्सा असल में असुरक्षा की भावना से उपजा है |
| 4. भावनाओं को सँभालना | अपनी और दूसरों की भावनाओं का नियमन; कब भावना से जुड़ना और कब हटना है, यह तय करना | भीड़ के आक्रोश में संयम रखना और बातचीत को शांत करना |
शाखाओं के नाम और अर्थ मेयर-कारूसो-सैलोवी (2016) और Noba से; प्रशासनिक उदाहरण विश्लेषण हैं।
गोलमैन के पाँच घटक
परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाने वाला ढाँचा गोलमैन का है। उनके 'What Makes a Leader?' (HBR, 1998 का लेख; 2004 में पुनःप्रकाशित) में कार्यस्थल की भावनात्मक बुद्धि के पाँच घटक दिए गए हैं: आत्म-जागरूकता (self-awareness), आत्म-नियमन (self-regulation), प्रेरणा (motivation), सहानुभूति (empathy) और सामाजिक कौशल (social skill)। पहले तीन स्व-प्रबंधन के कौशल हैं और बाक़ी दो दूसरों से जुड़ने की क्षमता।
लेख की तालिका के अनुसार आत्म-जागरूकता का अर्थ है अपनी भावनाओं, मनोदशाओं और प्रेरणाओं को, और दूसरों पर उनके प्रभाव को पहचानना और समझना। आत्म-नियमन विघटनकारी आवेगों और मनोदशाओं को नियंत्रित करना या मोड़ना और कार्य करने से पहले सोचने के लिए निर्णय को रोकने की प्रवृत्ति। प्रेरणा का अर्थ है पैसे और पद से परे कारणों से काम करने की लगन। सहानुभूति दूसरों की भावनात्मक बनावट को समझना और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के अनुसार लोगों से व्यवहार करने की कुशलता। सामाजिक कौशल संबंधों को सँभालने और नेटवर्क बनाने की निपुणता, साथ ही साझा आधार खोजकर तालमेल बनाने की क्षमता।
गोलमैन के पाँच घटक: परिभाषा, लक्षण और प्रशासनिक उपयोग
| घटक | परिभाषा (HBR तालिका) | प्रमुख लक्षण (HBR) | प्रशासनिक उपयोग (विश्लेषण) |
|---|---|---|---|
| आत्म-जागरूकता | अपनी भावनाओं, मनोदशाओं और प्रेरणाओं को और उनके दूसरों पर प्रभाव को पहचानना | आत्मविश्वास, यथार्थ आत्म-आकलन, आत्म-व्यंग्य वाला हास्य-बोध | अपनी सीमा जानकर विशेषज्ञ की सलाह लेना |
| आत्म-नियमन | विघटनकारी आवेगों को नियंत्रित या मोड़ना; कार्य से पहले सोचना | भरोसेमंदी और सत्यनिष्ठा, अस्पष्टता में सहजता, बदलाव के प्रति खुलापन | उकसावे पर भी निर्णय को लिखित और नियम-सम्मत रखना |
| प्रेरणा | धन या पद से परे कारणों से कार्य की लगन; ऊर्जा और दृढ़ता से लक्ष्य पाने की प्रवृत्ति | उपलब्धि की प्रबल इच्छा, असफलता में भी आशावाद, संगठन के प्रति प्रतिबद्धता | कठिन ज़िले या योजना में भी परिणाम पर टिके रहना |
| सहानुभूति | दूसरों की भावनात्मक बनावट को समझना और उसके अनुसार व्यवहार | प्रतिभा को बनाए रखने की निपुणता, अंतर-सांस्कृतिक संवेदनशीलता, सेवा-भाव | पीड़ित, वृद्ध या वंचित लाभार्थी की स्थिति से सोचना |
| सामाजिक कौशल | संबंध सँभालने और नेटवर्क बनाने की निपुणता; साझा आधार खोजना | बदलाव का नेतृत्व, प्रभावशीलता, टीम बनाने और चलाने की निपुणता | विभागों और पंचायतों को एक लक्ष्य पर साथ लाना |
परिभाषाएँ और लक्षण गोलमैन के HBR लेख की तालिका (Emotional Intelligence at Work) से, हिंदी रूपांतर; अंतिम स्तंभ विश्लेषण।
मानचित्र: भावनात्मक बुद्धि के दो प्रमुख मॉडल
भावनात्मक बुद्धि
मेयर-सैलोवी (क्षमता मॉडल)
- भावनाओं की पहचान
- सोच को सुविधा
- भावनाओं को समझना
- भावनाओं को सँभालना
गोलमैन (कार्यस्थल मॉडल)
- आत्म-जागरूकता
- आत्म-नियमन
- प्रेरणा
- सहानुभूति
- सामाजिक कौशल
NCERT (बॉक्स 1.2)
- अपनी भावनाओं के प्रति संवेदनशील
- दूसरों की भावनाएँ पढ़ना
- भावना को निर्णय से जोड़ना
- भावनाओं का नियमन
भारतीय परंपरा और NCERT की दृष्टि
NCERT एक रोचक बात कहता है: भावनात्मक बुद्धि की अवधारणा भारतीय परंपरा की बुद्धि-दृष्टि पर टिकी है। उसी पाठ में भारतीय परंपरा की बुद्धि के जिन पक्षों की सूची है, उनमें भावनात्मक क्षमता के बिंदु हैं: भावनाओं का आत्म-नियमन और आत्म-निरीक्षण, ईमानदारी, विनम्रता, सदाचरण और आत्म-मूल्यांकन। इस आधार पर कहा जा सकता है कि संयम और विनम्रता जैसे पारंपरिक मूल्य भावनात्मक बुद्धि से जुड़ते हैं (यह निष्कर्ष विश्लेषण है)।
NCERT बॉक्स 1.2 में भावनात्मक रूप से बुद्धिमान व्यक्ति के लक्षण गिनाता है: अपनी भावनाओं के प्रति संवेदनशील होना; शारीरिक भाषा, स्वर और चेहरे के भावों से दूसरों की भावनाओं को पहचानना; अपनी भावनाओं को सोच से जोड़कर निर्णय लेते समय उन्हें ध्यान में रखना; भावनाओं की प्रकृति और तीव्रता के प्रभाव को समझना; और अपनी तथा दूसरों से व्यवहार में भावनाओं और उनकी अभिव्यक्ति को नियंत्रित और नियमित करना ताकि सौहार्द और शांति बनी रहे।
संवेदनशील प्रशासन में भावनात्मक बुद्धि का प्रयोग
2013 के 20 अंक वाले प्रश्न में 'प्रभावी एवं संवेदनशील प्रशासन' शब्द आए थे। संवेदनशील प्रशासन का अर्थ है ऐसा प्रशासन जो लोगों की ज़रूरतों, पीड़ा और अपेक्षाओं के प्रति सजग रहे, विशेषकर कमज़ोर वर्गों के प्रति। इसके कई क्षेत्र हैं: आपदा और राहत, सांप्रदायिक या सामाजिक तनाव, महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामले, वृद्धों और दिव्यांगों की सेवाएँ, जन-सुनवाई और शिकायत-निवारण, और भीड़ का प्रबंधन।
ऐसे हर क्षेत्र में नियम का ज्ञान ज़रूरी है, पर काफ़ी नहीं। जब कोई महिला थाने या कार्यालय में अपनी शिकायत लेकर आती है, तो उसे सुना जाना उतना ही ज़रूरी है जितना उसके आवेदन की प्रक्रिया। यहाँ आत्म-जागरूकता अधिकारी को अपनी पूर्वधारणा पकड़ने में मदद करती है। आत्म-नियमन उत्तेजक माहौल में भी शांत रखता है। सहानुभूति पीड़ित की स्थिति से देखने की सामर्थ्य देती है। प्रेरणा कठिन और लंबी चलने वाली राहत-परियोजनाओं में टिके रहने की शक्ति देती है। सामाजिक कौशल विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय को सहज बनाता है।
प्रभावी प्रशासन का अर्थ यह है कि परिणाम भी मिले, और भावनात्मक बुद्धि इसमें सहायक है। भीड़ शांत होती है तो राहत जल्दी पहुँचती है। शिकायतकर्ता को सुना गया महसूस होता है तो विवाद अदालत या प्रदर्शन तक कम पहुँचते हैं। टीम का मनोबल बना रहता है तो कर्मचारी बेहतर काम करते हैं। यह सारा तर्क विश्लेषण पर आधारित है। साथ में एक सावधानी: भावनात्मक बुद्धि का अर्थ भावनाओं के आधार पर निर्णय लेना नहीं है। निर्णय क़ानून, तथ्य और नियम पर टिके रहते हैं; भावनात्मक बुद्धि केवल यह तय करती है कि उन्हें कैसे लागू और संप्रेषित किया जाए।
संवेदनशील प्रशासन के क्षेत्र और भावनात्मक बुद्धि की भूमिका
| क्षेत्र | भावनात्मक चुनौती | कौन-सा घटक सबसे अधिक काम आता है |
|---|---|---|
| आपदा और राहत | भय, हताशा और अफ़वाहें | आत्म-नियमन, सामाजिक कौशल |
| सामाजिक या सांप्रदायिक तनाव | अविश्वास, उग्र प्रतिक्रिया | सहानुभूति, आत्म-नियमन |
| महिलाओं और बच्चों के मामले | संकोच, डर, कलंक का भय | सहानुभूति, आत्म-जागरूकता |
| वृद्ध और दिव्यांग सेवाएँ | निर्भरता, असुरक्षा की भावना | सहानुभूति, प्रेरणा |
| जन-सुनवाई और शिकायत-निवारण | उपेक्षा और ग़ुस्सा | आत्म-नियमन, सहानुभूति |
यह तालिका विश्लेषण है; 2013 के प्रश्न के 'संवेदनशील प्रशासन' वाले हिस्से को क्षेत्रवार रूप देने के लिए।
कार्यस्थल पर महत्त्व
गोलमैन के HBR लेख के अनुसार असाधारण प्रदर्शन करने वालों को सामान्य प्रदर्शन वालों से अलग करने वाला मुख्य गुण भावनात्मक बुद्धि हो सकती है। लेख में एक उदाहरण है: एक वैश्विक खाद्य और पेय कंपनी के 1996 के अध्ययन में, जहाँ वरिष्ठ प्रबंधकों में भावनात्मक बुद्धि का एक निश्चित स्तर था, उनके प्रभागों ने वार्षिक आय-लक्ष्य से 20 प्रतिशत अधिक प्रदर्शन किया, जबकि वह स्तर न रखने वाले प्रभाग लगभग उतना ही पीछे रहे। यह आँकड़ा निजी कंपनी के एक अध्ययन का है; इसे सरकारी विभागों पर सीधे लागू करना ग़लत होगा, पर यह इस तर्क को सहारा देता है कि कार्यस्थल के परिणाम भावनात्मक कौशलों से जुड़े हैं।
सरकारी कार्यस्थल के लिए तर्क ये हैं (विश्लेषण): पहला, जनता-उन्मुख काम में हर संपर्क भावनात्मक होता है, इसलिए कर्मचारी का व्यवहार विभाग की छवि बनाता है। दूसरा, टीम में असहमति आम है; भावनात्मक बुद्धि उसे टकराव बनने से रोकती है। तीसरा, दबाव वाले निर्णयों (क़ानून-व्यवस्था, आपदा) में आत्म-नियमन ग़लतियाँ घटाता है। चौथा, नेतृत्व के लिए सहानुभूति और सामाजिक कौशल टीम को प्रेरित रखते हैं।
संवर्धन: भावनात्मक बुद्धि कैसे विकसित हो
गोलमैन का कथन है कि भावनात्मक बुद्धि को बढ़ाया जा सकता है, पर पारंपरिक प्रशिक्षण-कार्यक्रमों से नहीं जो मस्तिष्क के तार्किक हिस्से को लक्ष्य करते हैं। उनके अनुसार लंबा अभ्यास, सहकर्मियों से प्रतिपुष्टि और बदलाव की अपनी लगन ज़रूरी हैं। NCERT भी यही संकेत देता है कि विद्यार्थियों की भावनात्मक बुद्धि सुधारने वाले कार्यक्रम सहयोगात्मक व्यवहार बढ़ाते और असामाजिक गतिविधियाँ घटाते हैं।
कार्यस्थल पर इसके व्यावहारिक रूप (विश्लेषण): वरिष्ठों और सहकर्मियों से नियमित प्रतिपुष्टि; कठिन परिस्थितियों का केस-आधारित और भूमिका-अभ्यास; मार्गदर्शक (मेंटर) की व्यवस्था; और संगठन में ऐसा माहौल जहाँ भावनाओं और असहमति पर खुलकर बात हो सके। इन सब में संयम और विनम्रता जैसे पारंपरिक भारतीय मूल्यों को सेवा-संहिता से जोड़ना एक अतिरिक्त आयाम दे सकता है। यहाँ किसी चिकित्सीय या मनोवैज्ञानिक उपचार की बात नहीं हो रही; यह केवल व्यावसायिक कौशल-विकास है।
मुख्य तथ्य
- मूल लेख
- सैलोवी और मेयर, 1990, Imagination, Cognition and Personality 9(3), 185-211
- परिभाषा (NCERT और Noba)
- अपनी और दूसरों की भावनाओं की निगरानी, उनमें भेद और सूचना का सोच तथा कार्य में उपयोग
- चार-शाखा मॉडल
- भावनाओं की पहचान, सोच को सुविधा, भावनाओं को समझना, भावनाओं को सँभालना; 1997 से, 2016 में संशोधित
- गोलमैन की पुस्तक
- Emotional Intelligence: Why It Can Matter More Than IQ, 1995 (Noba)
- गोलमैन के पाँच घटक
- आत्म-जागरूकता, आत्म-नियमन, प्रेरणा, सहानुभूति, सामाजिक कौशल (HBR, 1998 का लेख)
- HBR का एक अध्ययन-उदाहरण
- वैश्विक खाद्य-पेय कंपनी, 1996: निश्चित भावनात्मक बुद्धि वाले प्रभाग आय-लक्ष्य से 20% अधिक
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- भावनात्मक बुद्धि को भावुकता या कमज़ोरी समझ लेना। परिभाषा में 'निगरानी, भेद और उपयोग' तीनों शब्द रखें, ताकि स्पष्ट हो कि यह एक क्षमता है।
- प्रतिपादकों को गड़बड़ा देना: शब्द सैलोवी और मेयर (1990) का है; उसे लोकप्रिय बनाने वाली पुस्तक गोलमैन की (1995)।
- गोलमैन के पाँच घटकों में से 'प्रेरणा' भूल जाना या उसे केवल पुरस्कार से जोड़ देना। गोलमैन की प्रेरणा पैसे और पद से परे लगन है।
- 2013 जैसे लंबे प्रश्न में केवल घटक गिनाकर रुक जाना। प्रश्न 'प्रशासन में उपयोग' भी माँगता है, इसलिए हर घटक के साथ एक प्रशासनिक उदाहरण लिखें।
- यह लिखना कि भावनात्मक बुद्धि वाला अधिकारी भावनाओं के आधार पर निर्णय ले। निर्णय नियम और तथ्य पर टिकते हैं; भावनात्मक बुद्धि उनके क्रियान्वयन को सँवारती है।
केस स्टडी (कल्पित): राहत शिविर में आक्रोश
उदाहरण (काल्पनिक)एक अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट की भावनात्मक बुद्धि
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; स्थान और पात्र वास्तविक नहीं हैं। भारी बाढ़ के बाद राहत-शिविर में तीन दिन से भोजन-वितरण में देरी हो रही है। सुबह भीड़ ने अधिकारी की गाड़ी घेर ली है और नारेबाज़ी हो रही है।
- आत्म-जागरूकता
- अधिकारी ने पहचाना कि उसे खीझ आ रही है, क्योंकि वह स्वयं पूरी रात जागा है। उसने तुरंत जवाब देने की जगह कुछ क्षण रुककर साँस ली।
- आत्म-नियमन
- उसने ऊँची आवाज़ का जवाब ऊँची आवाज़ से नहीं दिया। उसने गाड़ी से उतरकर खुले में खड़े होकर बात करना चुना।
- सहानुभूति
- उसने समझा कि ग़ुस्से के पीछे बच्चों की भूख और अपनी बारी न आने का डर है। उसने स्वीकार किया कि देरी हुई है और सीधे कुछ महिलाओं और बुज़ुर्गों से बात की।
- सामाजिक कौशल
- उसने शिविर के दो स्थानीय युवकों को वितरण-सूची की निगरानी में शामिल किया और अगले एक घंटे में पहली खेप पहुँचाने का समय बताया।
सीख
भावनात्मक बुद्धि ने अधिकारी को नियम तोड़ने के लिए नहीं, नियमों के भीतर भरोसा बनाने के लिए सक्षम किया। पहले व्यक्ति शांत हुआ, फिर भीड़, और उसके बाद वितरण सुधरा।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): आक्रोशित आवेदक से बातचीत के चरण
हल सहित उदाहरणभावनात्मक बुद्धि के घटकों को प्रक्रिया में बदलना
दिया है
- यह प्रक्रिया-उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; यह किसी विभाग का अधिकृत निर्देश नहीं है।
- स्थिति: एक वृद्ध पेंशनर तीसरी बार कार्यालय आया है और काउंटर पर तेज़ आवाज़ में शिकायत कर रहा है।
- 1चरण 1: ख़ुद को पहचानना (आत्म-जागरूकता) अपनी प्रतिक्रिया नोट करें: क्या मैं झुँझला रहा हूँ? उसे बिना जताए स्वीकार करें।
- 2चरण 2: रुकना (आत्म-नियमन) तुरंत जवाब न दें। पहले उसकी बात पूरी होने दें और शांत आवाज़ में बात शुरू करें।
- 3चरण 3: समझना (सहानुभूति) पूछें कि असली समस्या क्या है: भुगतान रुकना, दस्तावेज़ में त्रुटि, या बार-बार चक्कर लगाना? भावना को नाम दें: 'आपको परेशानी हुई है'।
- 4चरण 4: समाधान और अनुवर्तन (सामाजिक कौशल) फ़ाइल की वास्तविक स्थिति बताएँ, जो समय-सीमा दे सकें वही दें, नाम और संपर्क दर्ज करें और तय तारीख़ पर स्वयं स्थिति बताएँ।
निष्कर्ष: चारों चरण चार मूल कौशलों (जागरूकता, नियमन, सहानुभूति, सामाजिक कौशल) को एक दोहराने योग्य क्रम में बाँधते हैं। इसमें किसी नियम की अनदेखी नहीं होती; केवल व्यवहार बदलता है।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2024RAS मुख्य परीक्षापेपर III5 अंक
Cultural vs emotional intelligence
आदर्श उत्तर
सांस्कृतिक बुद्धि विविध सांस्कृतिक परिवेश में प्रभावी ढंग से कार्य करने की क्षमता है, जिसके चार आयाम हैं: मेटाकॉग्निटिव, संज्ञानात्मक, प्रेरणात्मक और व्यवहारात्मक। भावनात्मक बुद्धि अपनी और दूसरों की भावनाओं को पहचानने, समझने और सँभालने की क्षमता है। पहली संदर्भ-विशिष्ट है, दूसरी सामान्य; दोनों पूरक हैं, क्योंकि भावनाओं की अभिव्यक्ति संस्कृतियों में अलग हो सकती है।
2021RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
संवेगात्मक बुद्धि से क्या आशय है?
आदर्श उत्तर
सैलोवी-मेयर: अपनी व दूसरों की भावनाओं को पहचानने, समझने और सोच-कार्य में उपयोग करने की क्षमता।
2018RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
सांवेगिक बुद्धि क्या है?
आदर्श उत्तर
यह भावनाओं के आकलन, नियमन और उपयोग का कौशल-समूह है (सैलोवी और मेयर, 1990)।
2016RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
संवेगात्मक बुद्धि क्या है?
आदर्श उत्तर
अपनी और दूसरों की भावनाओं को समझने, नियंत्रित करने और व्यवहार में उपयोग करने की क्षमता।
2018RAS मुख्य परीक्षापेपर II2 अंक
संवेगात्मक बुद्धिमत्ता से आप क्या समझते हैं?
आदर्श उत्तर
भावनाओं को पहचानने, समझने और सँभालने की क्षमता; इससे अधिकारी तनाव में संयमित निर्णय लेता है।
2013RAS मुख्य परीक्षापेपर III20 अंक
'भावनात्मक परिपक्वता' से आपका क्या अभिप्राय है? प्रभावी एवं संवेदनशील प्रशासन में इसके तत्त्वों की व्याख्या करें तथा इसके उपयोग को समझाएँ।
आदर्श उत्तर
यहाँ भावनात्मक परिपक्वता से आशय भावनात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence) है, जिसे प्रश्न के अंग्रेज़ी पाठ में भी पूछा गया है। सैलोवी और मेयर के अनुसार यह अपनी और दूसरों की भावनाओं को पहचानने, परखने और उसकी सूचना से सोच तथा कार्य को निर्देशित करने की क्षमता है।
तत्त्व (गोलमैन): आत्म-जागरूकता, आत्म-नियमन, प्रेरणा, सहानुभूति और सामाजिक कौशल। पहले तीन स्व-प्रबंधन के और अंतिम दो दूसरों से जुड़ने के कौशल हैं। मेयर और सैलोवी का चार-शाखा मॉडल भी इसी विचार को पहचान, उपयोग, समझ और प्रबंधन के रूप में रखता है।
प्रशासन में उपयोग: आत्म-जागरूकता से अधिकारी अपनी पूर्वधारणा पहचानता है। आत्म-नियमन से भीड़ और दबाव में संयम रहता है। सहानुभूति से महिलाओं, वृद्धों और वंचितों की पीड़ा समझ आती है। प्रेरणा से राहत-योजनाओं में निरंतरता रहती है। सामाजिक कौशल से विभागों और पंचायतों का समन्वय सधता है।
इस प्रकार जन-सुनवाई, आपदा-राहत और तनाव-प्रबंधन में परिणाम बेहतर आते हैं। पर निर्णय नियम और तथ्य पर ही टिके रहें; भावनात्मक बुद्धि केवल उनके क्रियान्वयन को मानवीय बनाती है। इसलिए संवेदनशील प्रशासन के लिए यह आवश्यक कौशल है।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
गोलमैन के भावनात्मक बुद्धि के पाँच घटकों के नाम लिखिए।
आदर्श उत्तर
आत्म-जागरूकता, आत्म-नियमन, प्रेरणा, सहानुभूति और सामाजिक कौशल, ये गोलमैन के भावनात्मक बुद्धि के पाँच घटक हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
भावनात्मक बुद्धि और संज्ञानात्मक बुद्धि में अंतर बताइए।
आदर्श उत्तर
संज्ञानात्मक बुद्धि तथ्यों, तर्क और समस्या-समाधान की क्षमता है, जिसे परंपरागत रूप से IQ से मापा जाता है। भावनात्मक बुद्धि अपनी और दूसरों की भावनाओं को पहचानने, समझने और सँभालने की क्षमता है। संज्ञानात्मक बुद्धि 'क्या सही है' बताती है; भावनात्मक बुद्धि 'उसे लोगों के साथ कैसे निभाएँ' बताती है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
प्रशासन में भावनात्मक बुद्धि को कैसे विकसित किया जा सकता है?
आदर्श उत्तर
गोलमैन के अनुसार भावनात्मक बुद्धि बढ़ाई जा सकती है, पर इसके लिए लंबा अभ्यास, सहकर्मियों से प्रतिपुष्टि और स्वयं की लगन चाहिए; केवल तार्किक प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं। प्रशासन में इसके उपाय ये हो सकते हैं: कठिन परिस्थितियों का केस-आधारित और भूमिका-अभ्यास, मार्गदर्शक की व्यवस्था, नियमित प्रतिपुष्टि और ऐसा कार्य-वातावरण जहाँ असहमति और भावनाओं पर खुलकर बात हो सके, ताकि कर्मचारी बिना झिझक अपनी कठिनाई रख सकें।
इनके साथ संयम और विनम्रता जैसे मूल्यों को सेवा-आचरण से जोड़ना उपयोगी है। परिणामस्वरूप जन-सुनवाई और आपदा-प्रबंधन में टकराव घटता और विश्वास बढ़ता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
मेयर और सैलोवी के चार-शाखा मॉडल की चारों शाखाएँ लिखिए।
आदर्श उत्तर
मेयर और सैलोवी के अनुसार भावनात्मक बुद्धि की चार शाखाएँ हैं: भावनाओं की पहचान, सोच को सुविधा देने के लिए भावनाओं का उपयोग, भावनाओं को समझना और भावनाओं को सँभालना। पहली शाखा सबसे बुनियादी मानी गई है, क्योंकि बाक़ी तीनों उसी पहचान पर टिकती हैं।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "भावनात्मक बुद्धि क्या है? प्रशासन में इसके घटक और उपयोग बताइए।" पहली पंक्ति में सैलोवी और मेयर की परिभाषा लिखें। (2 अंक में केवल यही पंक्ति और प्रतिपादक का नाम काफ़ी है; 10 अंक में आगे के बिंदु जोड़ें।)
मुख्य भाग
- घटक: गोलमैन के पाँच (या मेयर-सैलोवी की चार शाखाएँ) एक पंक्ति में
- प्रत्येक घटक के साथ एक प्रशासनिक उदाहरण (भीड़, जन-सुनवाई, राहत शिविर)
- संवेदनशील प्रशासन के दो क्षेत्र: आपदा, महिलाओं और बच्चों के मामले
- एक पंक्ति में संवर्धन: प्रतिपुष्टि, अभ्यास, मार्गदर्शन
निष्कर्ष
निष्कर्ष: भावनात्मक बुद्धि नियम का विकल्प नहीं, उसे मानवीय ढंग से लागू करने की क्षमता है; इसलिए संवेदनशील और प्रभावी प्रशासन के लिए आवश्यक है।
अतिरिक्त मूल्य
- 20 अंक के उत्तर में चारों भाग (परिभाषा, घटक, उपयोग, निष्कर्ष) रखें
- कमज़ोर वर्ग शब्द आए तो सहानुभूति और आत्म-जागरूकता पर ज़ोर
- NCERT के 'भारतीय परंपरा में भावनात्मक क्षमता' (संयम, विनम्रता, ईमानदारी) का एक वाक्य जोड़ें
त्वरित पुनरावृत्ति
- भावनात्मक बुद्धि: अपनी और दूसरों की भावनाओं की निगरानी, भेद और उपयोग (सैलोवी और मेयर)
- मूल लेख: सैलोवी और मेयर, 1990, Imagination, Cognition and Personality
- चार-शाखा मॉडल: पहचान, सोच को सुविधा, समझना, सँभालना (मेयर-सैलोवी; 1997 से)
- गोलमैन: पुस्तक 1995; HBR लेख 'What Makes a Leader?' (1998; 2004 में पुनःप्रकाशित)
- पाँच घटक: आत्म-जागरूकता, आत्म-नियमन, प्रेरणा, सहानुभूति, सामाजिक कौशल
- पहले तीन स्व-प्रबंधन; अंतिम दो दूसरों से जुड़ने के कौशल
- मेयर-सैलोवी: क्षमता मॉडल; गोलमैन: व्यापक मॉडल जिसमें व्यक्तित्व-लक्षण भी
- संवेदनशील प्रशासन: आपदा, तनाव, महिलाओं-बच्चों के मामले, जन-सुनवाई (विश्लेषण)
- संवर्धन: प्रतिपुष्टि, लंबा अभ्यास, मार्गदर्शन (गोलमैन; NCERT)
- छह पिछले प्रश्न: 2013 (20), 2016, 2018 (पेपर III), 2018 (पेपर II), 2021 (सभी 2) और 2024 (5, सांस्कृतिक बनाम भावनात्मक)
याद रखने योग्य शब्द
- सैलोवी और मेयर
- गोलमैन
- चार शाखाएँ
- पाँच घटक
- संवेदनशील प्रशासन