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पेपर III · इकाई III · भाग क (व्यवहार)

भावनात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence): परिभाषा, चार शाखाएँ, गोलमैन के पाँच घटक और संवेदनशील प्रशासन में उपयोग

भावनात्मक बुद्धि की परिभाषा, सैलोवी-मेयर और गोलमैन के मॉडल, संवेदनशील प्रशासन में प्रयोग, कार्यस्थल पर महत्त्व और विकास; छह पिछले प्रश्न हल सहित।

  • सैलोवी-मेयर
  • गोलमैन
  • चार शाखाएँ
  • संवेदनशील प्रशासन
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (व्यवहार): "Intelligence: cognitive, social and emotional, cultural, appreciative and spiritual intelligence; importance and inculcation at workplace." इस पृष्ठ पर भावनात्मक बुद्धि है: अर्थ, मेयर-सैलोवी का चार-शाखा मॉडल, गोलमैन के पाँच घटक, संवेदनशील प्रशासन में प्रयोग, महत्त्व और संवर्धन।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • भावनात्मक बुद्धि पर 2013 (20 अंक, विकल्प सहित), 2016, 2018 और 2021 में प्रश्न आए, और 2018 में यही विषय नैतिकता वाले पेपर II में भी पूछा गया। कुल पाँच प्रश्न।
  • चार प्रश्न 2 अंक के (15 शब्द) और एक 20 अंक का (200 शब्द) था। 2 अंक के लिए एक सटीक परिभाषा और प्रतिपादक का नाम चाहिए; लंबे प्रश्न के लिए घटक, प्रशासन में प्रयोग और निष्कर्ष की त्रिस्तरीय संरचना।
  • 2024 में भावनात्मक बनाम सांस्कृतिक बुद्धि का तुलनात्मक प्रश्न (5 अंक) आया था; उसका हल नीचे जोड़ा गया है। इसलिए इस पृष्ठ का हर बिंदु केवल परिभाषा के लिए नहीं, तुलना के लिए भी तैयार रखें।

भावनात्मक बुद्धि: पहले एक तस्वीर

एक अस्पताल के बाहर भीड़ जमा है क्योंकि सुबह से जाँच की मशीन ख़राब है। दो अधिकारी मौक़े पर पहुँचते हैं। पहला अधिकारी मशीन के तकनीकी कारण गिनाता है, शोर बढ़ने पर ख़ुद भी तीखा हो जाता है और स्थिति बिगड़ जाती है। दूसरा अधिकारी सबसे पहले अपने भीतर के तनाव को पहचानकर शांत रहता है, भीड़ के ग़ुस्से के पीछे की चिंता (बीमार रिश्तेदार, लंबा इंतज़ार) को भाँपता है, सबसे आगे खड़े वृद्ध से सीधे बात करता है, और स्पष्ट समय-सीमा के साथ वैकल्पिक व्यवस्था की घोषणा करता है। (यह दृश्य समझाने के लिए गढ़ा गया है।) दोनों के पास जानकारी बराबर थी; अंतर भावनाओं को समझने और संभालने की क्षमता का था। इसी को भावनात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence, EI) कहते हैं।

NCERT के मनोविज्ञान पाठ के अनुसार भावनात्मक बुद्धि बुद्धि की अवधारणा को बौद्धिक क्षेत्र से आगे ले जाकर उसमें भावनाओं को भी शामिल करती है। वह इसे बुद्धि का 'भावना-पक्ष' कहता है और यह भी बताता है कि अच्छा IQ और अच्छा शैक्षणिक रिकॉर्ड जीवन में सफल होने के लिए काफ़ी नहीं है, क्योंकि कई शैक्षणिक रूप से प्रतिभाशाली लोग परिवार, कार्यस्थल और संबंधों में कठिनाई झेलते हैं।

परिभाषाएँ

भावनात्मक बुद्धि शब्द को पहली बार शोध-साहित्य में सैलोवी और मेयर ने रखा (NCERT के अनुसार वे इसे प्रस्तुत करने वाले पहले लोग थे)। उनका 1990 का लेख 'Emotional Intelligence' पत्रिका Imagination, Cognition and Personality के खंड 9, अंक 3, पृष्ठ 185 से 211 में छपा। लेख के सार में इसे कौशलों का ऐसा समूह बताया गया है जो तीन कामों में योगदान देता है: अपनी और दूसरों की भावनाओं का सटीक आकलन और अभिव्यक्ति, अपनी और दूसरों की भावनाओं का प्रभावी नियमन, और भावनाओं का प्रयोग जीवन में प्रेरित होने, योजना बनाने और लक्ष्य पाने के लिए।

परीक्षा में सबसे सुविधाजनक रूप वह है जो NCERT और Noba, दोनों में आता है: भावनात्मक बुद्धि अपनी और दूसरों की भावनाओं की निगरानी करने, उनमें अंतर पहचानने और इस सूचना का उपयोग अपनी सोच और कार्य को निर्देशित करने में करने की क्षमता है। जैसे IQ से बुद्धि को व्यक्त किया जाता है, वैसे भावनात्मक भागफल (EQ) से भावनात्मक बुद्धि।

बाद में मेयर, कारूसो और सैलोवी (2016) ने इसे थोड़ा और सटीक रूप दिया: भावनाओं और भावना-संबंधी सूचना के साथ वैध तर्क करने की और सोच को बेहतर बनाने के लिए भावनाओं का उपयोग करने की क्षमता। इन तीनों परिभाषाओं में समान सूत्र यह है कि भावना यहाँ बाधा नहीं, सूचना का स्रोत है, जिसे समझदारी से पढ़ना और इस्तेमाल करना है।

मेयर और सैलोवी का चार-शाखा मॉडल

मेयर, कारूसो और सैलोवी (2016) बताते हैं कि यह चार-शाखा ढाँचा उनके 1997 के मूल काम से चला आ रहा है और 2016 के लेख में उसका संशोधन किया गया है। चारों शाखाएँ नीचे से ऊपर के क्रम में हैं। पहली और सबसे बुनियादी शाखा भावनाओं की पहचान है। उसके ऊपर विचार को सुविधा देने के लिए भावनाओं का प्रयोग आता है। फिर भावनाओं को समझना, और अंत में उन्हें सँभालना। Noba के पाठ में भी चारों क्षमताएँ यही हैं।

यह मॉडल क्षमता-आधारित (ability) है: यह मानता है कि भावनात्मक बुद्धि एक मानसिक योग्यता है, ठीक संज्ञानात्मक बुद्धि की तरह, और इसे प्रदर्शन-कार्यों से परखा जा सकता है। इसके मुक़ाबले गोलमैन का मॉडल व्यापक है। Noba के अनुसार गोलमैन ने 1995 की अपनी पुस्तक 'Emotional Intelligence: Why It Can Matter More Than IQ' में भावना-कौशलों को संज्ञानात्मक बुद्धि और व्यक्तित्व-लक्षणों के साथ जोड़ा। इस भेद की अकादमिक बहस का एक संकेत मेयर, सैलोवी और कारूसो (2008) के लेख के शीर्षक में मिलता है: 'New ability or eclectic traits?'।

चार-शाखा मॉडल और प्रशासनिक उदाहरण

शाखाअर्थ (मेयर-कारूसो-सैलोवी 2016, Noba)प्रशासनिक उदाहरण (विश्लेषण)
1. भावनाओं की पहचानचेहरे, आवाज़ और शारीरिक संकेतों से अपनी और दूसरों की भावनाओं को पहचाननाजन-सुनवाई में आवेदक की झिझक या ग़ुस्से के संकेत पढ़ना
2. भावनाओं से सोच को सुविधाभावनात्मक अवस्थाओं का उपयोग ध्यान और सोच को दिशा देने मेंआपदा के समय चिंता को सतर्कता में बदलकर तैयारी जाँचना
3. भावनाओं को समझनाभावनाओं के अर्थ, कारण और परिणाम तथा भावनात्मक बदलावों को समझनासमझना कि राहत में देरी का ग़ुस्सा असल में असुरक्षा की भावना से उपजा है
4. भावनाओं को सँभालनाअपनी और दूसरों की भावनाओं का नियमन; कब भावना से जुड़ना और कब हटना है, यह तय करनाभीड़ के आक्रोश में संयम रखना और बातचीत को शांत करना

शाखाओं के नाम और अर्थ मेयर-कारूसो-सैलोवी (2016) और Noba से; प्रशासनिक उदाहरण विश्लेषण हैं।

गोलमैन के पाँच घटक

परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाने वाला ढाँचा गोलमैन का है। उनके 'What Makes a Leader?' (HBR, 1998 का लेख; 2004 में पुनःप्रकाशित) में कार्यस्थल की भावनात्मक बुद्धि के पाँच घटक दिए गए हैं: आत्म-जागरूकता (self-awareness), आत्म-नियमन (self-regulation), प्रेरणा (motivation), सहानुभूति (empathy) और सामाजिक कौशल (social skill)। पहले तीन स्व-प्रबंधन के कौशल हैं और बाक़ी दो दूसरों से जुड़ने की क्षमता।

लेख की तालिका के अनुसार आत्म-जागरूकता का अर्थ है अपनी भावनाओं, मनोदशाओं और प्रेरणाओं को, और दूसरों पर उनके प्रभाव को पहचानना और समझना। आत्म-नियमन विघटनकारी आवेगों और मनोदशाओं को नियंत्रित करना या मोड़ना और कार्य करने से पहले सोचने के लिए निर्णय को रोकने की प्रवृत्ति। प्रेरणा का अर्थ है पैसे और पद से परे कारणों से काम करने की लगन। सहानुभूति दूसरों की भावनात्मक बनावट को समझना और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के अनुसार लोगों से व्यवहार करने की कुशलता। सामाजिक कौशल संबंधों को सँभालने और नेटवर्क बनाने की निपुणता, साथ ही साझा आधार खोजकर तालमेल बनाने की क्षमता।

गोलमैन के पाँच घटक: परिभाषा, लक्षण और प्रशासनिक उपयोग

घटकपरिभाषा (HBR तालिका)प्रमुख लक्षण (HBR)प्रशासनिक उपयोग (विश्लेषण)
आत्म-जागरूकताअपनी भावनाओं, मनोदशाओं और प्रेरणाओं को और उनके दूसरों पर प्रभाव को पहचाननाआत्मविश्वास, यथार्थ आत्म-आकलन, आत्म-व्यंग्य वाला हास्य-बोधअपनी सीमा जानकर विशेषज्ञ की सलाह लेना
आत्म-नियमनविघटनकारी आवेगों को नियंत्रित या मोड़ना; कार्य से पहले सोचनाभरोसेमंदी और सत्यनिष्ठा, अस्पष्टता में सहजता, बदलाव के प्रति खुलापनउकसावे पर भी निर्णय को लिखित और नियम-सम्मत रखना
प्रेरणाधन या पद से परे कारणों से कार्य की लगन; ऊर्जा और दृढ़ता से लक्ष्य पाने की प्रवृत्तिउपलब्धि की प्रबल इच्छा, असफलता में भी आशावाद, संगठन के प्रति प्रतिबद्धताकठिन ज़िले या योजना में भी परिणाम पर टिके रहना
सहानुभूतिदूसरों की भावनात्मक बनावट को समझना और उसके अनुसार व्यवहारप्रतिभा को बनाए रखने की निपुणता, अंतर-सांस्कृतिक संवेदनशीलता, सेवा-भावपीड़ित, वृद्ध या वंचित लाभार्थी की स्थिति से सोचना
सामाजिक कौशलसंबंध सँभालने और नेटवर्क बनाने की निपुणता; साझा आधार खोजनाबदलाव का नेतृत्व, प्रभावशीलता, टीम बनाने और चलाने की निपुणताविभागों और पंचायतों को एक लक्ष्य पर साथ लाना

परिभाषाएँ और लक्षण गोलमैन के HBR लेख की तालिका (Emotional Intelligence at Work) से, हिंदी रूपांतर; अंतिम स्तंभ विश्लेषण।

मानचित्र: भावनात्मक बुद्धि के दो प्रमुख मॉडल

भावनात्मक बुद्धि

मेयर-सैलोवी (क्षमता मॉडल)

  • भावनाओं की पहचान
  • सोच को सुविधा
  • भावनाओं को समझना
  • भावनाओं को सँभालना

गोलमैन (कार्यस्थल मॉडल)

  • आत्म-जागरूकता
  • आत्म-नियमन
  • प्रेरणा
  • सहानुभूति
  • सामाजिक कौशल

NCERT (बॉक्स 1.2)

  • अपनी भावनाओं के प्रति संवेदनशील
  • दूसरों की भावनाएँ पढ़ना
  • भावना को निर्णय से जोड़ना
  • भावनाओं का नियमन
तीनों सूचियाँ अलग स्रोतों की हैं, पर विचार वही है: पहचानो, समझो, सँभालो, जोड़ो।

भारतीय परंपरा और NCERT की दृष्टि

NCERT एक रोचक बात कहता है: भावनात्मक बुद्धि की अवधारणा भारतीय परंपरा की बुद्धि-दृष्टि पर टिकी है। उसी पाठ में भारतीय परंपरा की बुद्धि के जिन पक्षों की सूची है, उनमें भावनात्मक क्षमता के बिंदु हैं: भावनाओं का आत्म-नियमन और आत्म-निरीक्षण, ईमानदारी, विनम्रता, सदाचरण और आत्म-मूल्यांकन। इस आधार पर कहा जा सकता है कि संयम और विनम्रता जैसे पारंपरिक मूल्य भावनात्मक बुद्धि से जुड़ते हैं (यह निष्कर्ष विश्लेषण है)।

NCERT बॉक्स 1.2 में भावनात्मक रूप से बुद्धिमान व्यक्ति के लक्षण गिनाता है: अपनी भावनाओं के प्रति संवेदनशील होना; शारीरिक भाषा, स्वर और चेहरे के भावों से दूसरों की भावनाओं को पहचानना; अपनी भावनाओं को सोच से जोड़कर निर्णय लेते समय उन्हें ध्यान में रखना; भावनाओं की प्रकृति और तीव्रता के प्रभाव को समझना; और अपनी तथा दूसरों से व्यवहार में भावनाओं और उनकी अभिव्यक्ति को नियंत्रित और नियमित करना ताकि सौहार्द और शांति बनी रहे।

संवेदनशील प्रशासन में भावनात्मक बुद्धि का प्रयोग

2013 के 20 अंक वाले प्रश्न में 'प्रभावी एवं संवेदनशील प्रशासन' शब्द आए थे। संवेदनशील प्रशासन का अर्थ है ऐसा प्रशासन जो लोगों की ज़रूरतों, पीड़ा और अपेक्षाओं के प्रति सजग रहे, विशेषकर कमज़ोर वर्गों के प्रति। इसके कई क्षेत्र हैं: आपदा और राहत, सांप्रदायिक या सामाजिक तनाव, महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामले, वृद्धों और दिव्यांगों की सेवाएँ, जन-सुनवाई और शिकायत-निवारण, और भीड़ का प्रबंधन।

ऐसे हर क्षेत्र में नियम का ज्ञान ज़रूरी है, पर काफ़ी नहीं। जब कोई महिला थाने या कार्यालय में अपनी शिकायत लेकर आती है, तो उसे सुना जाना उतना ही ज़रूरी है जितना उसके आवेदन की प्रक्रिया। यहाँ आत्म-जागरूकता अधिकारी को अपनी पूर्वधारणा पकड़ने में मदद करती है। आत्म-नियमन उत्तेजक माहौल में भी शांत रखता है। सहानुभूति पीड़ित की स्थिति से देखने की सामर्थ्य देती है। प्रेरणा कठिन और लंबी चलने वाली राहत-परियोजनाओं में टिके रहने की शक्ति देती है। सामाजिक कौशल विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय को सहज बनाता है।

प्रभावी प्रशासन का अर्थ यह है कि परिणाम भी मिले, और भावनात्मक बुद्धि इसमें सहायक है। भीड़ शांत होती है तो राहत जल्दी पहुँचती है। शिकायतकर्ता को सुना गया महसूस होता है तो विवाद अदालत या प्रदर्शन तक कम पहुँचते हैं। टीम का मनोबल बना रहता है तो कर्मचारी बेहतर काम करते हैं। यह सारा तर्क विश्लेषण पर आधारित है। साथ में एक सावधानी: भावनात्मक बुद्धि का अर्थ भावनाओं के आधार पर निर्णय लेना नहीं है। निर्णय क़ानून, तथ्य और नियम पर टिके रहते हैं; भावनात्मक बुद्धि केवल यह तय करती है कि उन्हें कैसे लागू और संप्रेषित किया जाए।

संवेदनशील प्रशासन के क्षेत्र और भावनात्मक बुद्धि की भूमिका

क्षेत्रभावनात्मक चुनौतीकौन-सा घटक सबसे अधिक काम आता है
आपदा और राहतभय, हताशा और अफ़वाहेंआत्म-नियमन, सामाजिक कौशल
सामाजिक या सांप्रदायिक तनावअविश्वास, उग्र प्रतिक्रियासहानुभूति, आत्म-नियमन
महिलाओं और बच्चों के मामलेसंकोच, डर, कलंक का भयसहानुभूति, आत्म-जागरूकता
वृद्ध और दिव्यांग सेवाएँनिर्भरता, असुरक्षा की भावनासहानुभूति, प्रेरणा
जन-सुनवाई और शिकायत-निवारणउपेक्षा और ग़ुस्साआत्म-नियमन, सहानुभूति

यह तालिका विश्लेषण है; 2013 के प्रश्न के 'संवेदनशील प्रशासन' वाले हिस्से को क्षेत्रवार रूप देने के लिए।

कार्यस्थल पर महत्त्व

गोलमैन के HBR लेख के अनुसार असाधारण प्रदर्शन करने वालों को सामान्य प्रदर्शन वालों से अलग करने वाला मुख्य गुण भावनात्मक बुद्धि हो सकती है। लेख में एक उदाहरण है: एक वैश्विक खाद्य और पेय कंपनी के 1996 के अध्ययन में, जहाँ वरिष्ठ प्रबंधकों में भावनात्मक बुद्धि का एक निश्चित स्तर था, उनके प्रभागों ने वार्षिक आय-लक्ष्य से 20 प्रतिशत अधिक प्रदर्शन किया, जबकि वह स्तर न रखने वाले प्रभाग लगभग उतना ही पीछे रहे। यह आँकड़ा निजी कंपनी के एक अध्ययन का है; इसे सरकारी विभागों पर सीधे लागू करना ग़लत होगा, पर यह इस तर्क को सहारा देता है कि कार्यस्थल के परिणाम भावनात्मक कौशलों से जुड़े हैं।

सरकारी कार्यस्थल के लिए तर्क ये हैं (विश्लेषण): पहला, जनता-उन्मुख काम में हर संपर्क भावनात्मक होता है, इसलिए कर्मचारी का व्यवहार विभाग की छवि बनाता है। दूसरा, टीम में असहमति आम है; भावनात्मक बुद्धि उसे टकराव बनने से रोकती है। तीसरा, दबाव वाले निर्णयों (क़ानून-व्यवस्था, आपदा) में आत्म-नियमन ग़लतियाँ घटाता है। चौथा, नेतृत्व के लिए सहानुभूति और सामाजिक कौशल टीम को प्रेरित रखते हैं।

संवर्धन: भावनात्मक बुद्धि कैसे विकसित हो

गोलमैन का कथन है कि भावनात्मक बुद्धि को बढ़ाया जा सकता है, पर पारंपरिक प्रशिक्षण-कार्यक्रमों से नहीं जो मस्तिष्क के तार्किक हिस्से को लक्ष्य करते हैं। उनके अनुसार लंबा अभ्यास, सहकर्मियों से प्रतिपुष्टि और बदलाव की अपनी लगन ज़रूरी हैं। NCERT भी यही संकेत देता है कि विद्यार्थियों की भावनात्मक बुद्धि सुधारने वाले कार्यक्रम सहयोगात्मक व्यवहार बढ़ाते और असामाजिक गतिविधियाँ घटाते हैं।

कार्यस्थल पर इसके व्यावहारिक रूप (विश्लेषण): वरिष्ठों और सहकर्मियों से नियमित प्रतिपुष्टि; कठिन परिस्थितियों का केस-आधारित और भूमिका-अभ्यास; मार्गदर्शक (मेंटर) की व्यवस्था; और संगठन में ऐसा माहौल जहाँ भावनाओं और असहमति पर खुलकर बात हो सके। इन सब में संयम और विनम्रता जैसे पारंपरिक भारतीय मूल्यों को सेवा-संहिता से जोड़ना एक अतिरिक्त आयाम दे सकता है। यहाँ किसी चिकित्सीय या मनोवैज्ञानिक उपचार की बात नहीं हो रही; यह केवल व्यावसायिक कौशल-विकास है।

मुख्य तथ्य

मूल लेख
सैलोवी और मेयर, 1990, Imagination, Cognition and Personality 9(3), 185-211
परिभाषा (NCERT और Noba)
अपनी और दूसरों की भावनाओं की निगरानी, उनमें भेद और सूचना का सोच तथा कार्य में उपयोग
चार-शाखा मॉडल
भावनाओं की पहचान, सोच को सुविधा, भावनाओं को समझना, भावनाओं को सँभालना; 1997 से, 2016 में संशोधित
गोलमैन की पुस्तक
Emotional Intelligence: Why It Can Matter More Than IQ, 1995 (Noba)
गोलमैन के पाँच घटक
आत्म-जागरूकता, आत्म-नियमन, प्रेरणा, सहानुभूति, सामाजिक कौशल (HBR, 1998 का लेख)
HBR का एक अध्ययन-उदाहरण
वैश्विक खाद्य-पेय कंपनी, 1996: निश्चित भावनात्मक बुद्धि वाले प्रभाग आय-लक्ष्य से 20% अधिक

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • भावनात्मक बुद्धि को भावुकता या कमज़ोरी समझ लेना। परिभाषा में 'निगरानी, भेद और उपयोग' तीनों शब्द रखें, ताकि स्पष्ट हो कि यह एक क्षमता है।
  • प्रतिपादकों को गड़बड़ा देना: शब्द सैलोवी और मेयर (1990) का है; उसे लोकप्रिय बनाने वाली पुस्तक गोलमैन की (1995)।
  • गोलमैन के पाँच घटकों में से 'प्रेरणा' भूल जाना या उसे केवल पुरस्कार से जोड़ देना। गोलमैन की प्रेरणा पैसे और पद से परे लगन है।
  • 2013 जैसे लंबे प्रश्न में केवल घटक गिनाकर रुक जाना। प्रश्न 'प्रशासन में उपयोग' भी माँगता है, इसलिए हर घटक के साथ एक प्रशासनिक उदाहरण लिखें।
  • यह लिखना कि भावनात्मक बुद्धि वाला अधिकारी भावनाओं के आधार पर निर्णय ले। निर्णय नियम और तथ्य पर टिकते हैं; भावनात्मक बुद्धि उनके क्रियान्वयन को सँवारती है।