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पेपर III · इकाई III · भाग क (व्यवहार)

सामाजिक बुद्धि (Social Intelligence): अर्थ, थॉर्नडाइक की परिभाषा, SPACE मॉडल और कार्यस्थल पर विकास

सामाजिक बुद्धि का अर्थ, थॉर्नडाइक से अल्ब्रेख़्त तक का विकास, भावनात्मक बुद्धि से भेद, कार्यस्थल पर महत्त्व और संवर्धन, उदाहरण सहित।

  • थॉर्नडाइक
  • SPACE
  • अंतर्वैयक्तिक
  • कार्यस्थल
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (व्यवहार): "Intelligence: cognitive, social and emotional, cultural, appreciative and spiritual intelligence; importance and inculcation at workplace." इस पृष्ठ पर सामाजिक बुद्धि है: अर्थ, विकास-क्रम, घटक, कार्यस्थल पर महत्त्व और उसे बढ़ाने के उपाय।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013 से 2024 के पेपरों में सामाजिक बुद्धि पर सीधा प्रश्न नहीं दिखा। फिर भी यह सिलेबस की सूची में नाम से दर्ज है, इसलिए 2 से 5 अंक के प्रश्न की पूरी संभावना खुली है।
  • भावनात्मक बुद्धि के प्रश्न (2013 से 2021 तक पाँच बार) इसी अवधारणा की अगली कड़ी हैं। सामाजिक बुद्धि समझ लेने पर भावनात्मक बुद्धि का उत्तर 'पृष्ठभूमि' के साथ लिखा जा सकता है।
  • प्रशासन में नतीजे अक्सर लोगों को साथ लेकर चलने से आते हैं, इसलिए 'कार्यस्थल पर महत्त्व और संवर्धन' वाले हिस्से का तैयार उत्तर 10 अंक के किसी भी बुद्धि-संबंधी प्रश्न में काम आएगा।

सामाजिक बुद्धि: एक सीधी-सी बात

एक ज़िला कलेक्टर के सामने दो पंचायतें हैं जो कुएँ के पानी पर वर्षों से भिड़ी हुई हैं। एक अधिकारी क़ानून की धाराएँ पढ़कर सुना देता है और बैठक बिना नतीजे के ख़त्म हो जाती है। दूसरा अधिकारी बैठक से पहले दोनों गाँवों के बुज़ुर्गों से अलग-अलग मिलता है, यह भाँप लेता है कि असली झगड़ा पानी का कम और पुराने सम्मान का ज़्यादा है, किसे पहले बोलने देना है और किसे बाद में, यह तय करता है, और अंत में ऐसा समाधान सुझाता है जिसे दोनों अपना मान सकें। (यह दृश्य समझाने के लिए गढ़ा गया है।) दूसरे अधिकारी के पास जो अतिरिक्त चीज़ है, उसी को सामाजिक बुद्धि कहा जाता है।

सीधे शब्दों में, सामाजिक बुद्धि लोगों को समझने और उनके साथ समझदारी से व्यवहार करने की क्षमता है। यह किताबी जानकारी से अलग है। इसमें दूसरे का मन पढ़ना, माहौल को परखना, सही समय पर सही बात कहना और अलग-अलग तरह के लोगों के साथ तालमेल बिठाना शामिल है।

परिभाषा और विकास-क्रम

इस अवधारणा की जड़ें एडवर्ड थॉर्नडाइक के 1920 के लेख में हैं (Harper's Magazine, खंड 140, पृष्ठ 227 से 235, 'Intelligence and its Uses')। उन्होंने लिखा कि सामाजिक बुद्धि का अर्थ है पुरुषों और महिलाओं, लड़कों और लड़कियों को समझने और सँभालने की योग्यता, यानी मानवीय संबंधों में समझदारी से कार्य करना (पृष्ठ 228)। परीक्षा के लिए इस परिभाषा के तीन शब्द काम के हैं: समझना (understand), सँभालना या प्रबंधित करना (manage) और समझदारी से कार्य करना (act wisely)।

बाद के शोधकर्ताओं ने इस विचार को अलग दिशाओं में बढ़ाया। J.F. Kihlstrom के संकलन के अनुसार वेक्सलर (1939, 1958) ने इस अवधारणा पर कम ध्यान दिया और उनके मत में सामाजिक बुद्धि सामान्य बुद्धि का ही सामाजिक परिस्थितियों में प्रयोग है। दूसरी ओर कैंटर और किहलस्ट्रॉम (1987) ने इसे सामाजिक जगत के बारे में व्यक्ति के ज्ञान-भंडार के रूप में परिभाषित किया। इसका मतलब यह हुआ कि सामाजिक रूप से कुशल व्यक्ति के पास सामाजिक नियमों, भूमिकाओं और लोगों के व्यवहार का समृद्ध ज्ञान होता है, जिसे वह हर मुलाक़ात में इस्तेमाल करता है।

गिलफ़र्ड के बुद्धि-संरचना मॉडल में 'व्यवहारात्मक' विषय-वस्तु भी शामिल है, जिसमें लोगों के व्यवहार, दृष्टिकोण और आवश्यकताओं की सूचना आती है। NCERT इस मॉडल का ज़िक्र करते हुए यह बात बताता है। गार्डनर की अंतर्वैयक्तिक बुद्धि (दूसरों के उद्देश्य, भावनाएँ और व्यवहार समझकर सहज संबंध बनाने की क्षमता) भी इसी परिवार की है। इस तरह सामाजिक बुद्धि की धारा थॉर्नडाइक से चलकर गिलफ़र्ड और गार्डनर तक पहुँचती है।

भावनात्मक बुद्धि से इसका गहरा रिश्ता है। 1990 के अपने मूल शोध-लेख में सैलोवी और मेयर ने बताया कि वे भावनात्मक बुद्धि की अवधारणा तक पहुँचने के लिए बुद्धि के साहित्य, ख़ासकर सामाजिक बुद्धि के साहित्य, की पड़ताल करते हैं। 2016 के अपने लेख में मेयर, कारूसो और सैलोवी भावनात्मक बुद्धि को सामाजिक बुद्धि (समूहों के बारे में तर्क) और व्यक्तिगत बुद्धि (व्यक्तित्व-गुणों और आत्म-समझ के बारे में तर्क) से अलग रखते हैं और तीनों को 'hot intelligences' के वर्ग में रखते हैं।

सामाजिक बुद्धि का सूत्र

  1. परिस्थिति और लोगों को पढ़ना

    कौन, किस भूमिका में, किस अपेक्षा के साथ

  2. समझना

    सामाजिक नियमों और संबंधों का ज्ञान

  3. सँभालना

    सही शब्द, सही समय, सही व्यक्ति

  4. समझदारी से कार्य

    सहयोग और स्वीकार्य समाधान

थॉर्नडाइक (1920): 'समझना और सँभालना, मानवीय संबंधों में समझदारी से कार्य करना'।

आधुनिक मॉडल: अल्ब्रेख़्त का SPACE

कार्यस्थल के संदर्भ में सबसे चर्चित व्यावहारिक ढाँचा कार्ल अल्ब्रेख़्त (Karl Albrecht) की पुस्तक 'Social Intelligence: The New Science of Success' (2006) का है। पुस्तक के विवरण और समीक्षा के अनुसार वे सामाजिक बुद्धि को 'दूसरों के साथ अच्छी तरह निभाने और उनका सहयोग जीतने की क्षमता' कहते हैं और उसे पाँच आयामों वाले SPACE मॉडल में रखते हैं: Situational awareness (स्थिति-बोध), Presence (उपस्थिति), Authenticity (प्रामाणिकता), Clarity (स्पष्टता) और Empathy (सहानुभूति)।

इन पाँचों का सरल हिंदी रूप इस प्रकार समझा जा सकता है (यह नामों के शब्दार्थ पर आधारित व्याख्या है, पुस्तक की परिभाषाओं का अनुवाद नहीं)। स्थिति-बोध यानी कमरे का माहौल और लोगों के संकेत पढ़ना। उपस्थिति यानी बातचीत में अपने व्यक्तित्व और बर्ताव से असर छोड़ना। प्रामाणिकता यानी जो हैं उसी में ईमानदार रहना ताकि भरोसा बने। स्पष्टता यानी अपनी बात को समझने लायक ढंग से रखना। सहानुभूति यानी दूसरे की जगह खड़े होकर सोचना।

डैनियल गोलमैन की 2006 की पुस्तक 'Social Intelligence: The New Science of Human Relationships' इसी विषय को जीव-विज्ञान और तंत्रिका-विज्ञान की दृष्टि से देखती है। पुस्तक के विवरण के अनुसार वह यह तर्क रखती है कि मनुष्य जुड़ाव के लिए बना है और संबंधों का मन और शरीर पर असर पड़ता है। परीक्षा में दोनों लेखकों के नाम और वर्ष याद रख लेना काफ़ी है; किसी ढाँचे की बारीक सूची लिखने की ज़रूरत तभी है जब प्रश्न उसी के बारे में हो।

सामाजिक बनाम भावनात्मक बनाम संज्ञानात्मक बुद्धि

आधारसंज्ञानात्मकसामाजिकभावनात्मक
मुख्य विषयतथ्य, तर्क, समस्यालोग, समूह और संबंधभावनाएँ और भावना-संबंधी सूचना
विशिष्ट प्रश्नसही उत्तर क्या है?यह व्यक्ति या समूह क्या चाहता है और कैसे साथ चलेगा?मैं और सामने वाला क्या महसूस कर रहे हैं और उसका क्या करूँ?
प्रशासनिक उदाहरणनीति-प्रारूप की जाँचपंचायतों के बीच समझौता करानाआक्रोशित भीड़ के सामने संयम से बात करना
संबंधित स्रोतवेक्सलर, बिनेथॉर्नडाइक (1920), अल्ब्रेख़्तसैलोवी और मेयर (1990), गोलमैन

'सामाजिक = समूह, भावनात्मक = भावना' का भेद मेयर, कारूसो और सैलोवी (2016) के आधार पर; स्तंभों में उदाहरण विश्लेषण हैं।

कार्यस्थल पर महत्त्व

यह खंड सिलेबस की 'importance at workplace' पंक्ति का उत्तर है। यहाँ के बिंदु विश्लेषण हैं, किसी अधिकृत स्रोत का दावा नहीं। प्रशासन कोई अकेले करने का काम नहीं है। एक ज़िले में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, चिकित्सा विभाग, पंचायत और स्थानीय नेता, सबको एक लक्ष्य पर साथ लाना पड़ता है। इस साथ लाने की कला का आधार सामाजिक बुद्धि है।

पहला महत्त्व समन्वय का है। अलग-अलग विभागों में सत्ता, अपेक्षाओं और भाषा की भिन्नता होती है। जो अधिकारी यह पहचान लेता है कि किस विभाग को किस बात से असुरक्षा है, वह बैठक में उसी हिसाब से बात रखता है। दूसरा महत्त्व नेतृत्व का है: टीम कब तनाव में है, किसे प्रोत्साहन चाहिए और किसे स्पष्टता, यह पढ़ने वाला प्रबंधक सही निर्णय लेता है। तीसरा महत्त्व जन-संपर्क का है। जन-सुनवाई में पीड़ित व्यक्ति केवल आवेदन नहीं देता, वह सुना जाना भी चाहता है। चौथा महत्त्व संघर्ष-समाधान का है, जैसा शुरुआती दृश्य में दिखा।

एक पाँचवाँ पक्ष नैतिक है। लोगों को सँभालने की क्षमता का दुरुपयोग हेरफेर के लिए भी हो सकता है। इसलिए अल्ब्रेख़्त के मॉडल में प्रामाणिकता का स्थान महत्त्वपूर्ण है और परीक्षा के उत्तर में 'पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनहित के दायरे में' जैसी शर्त जोड़ना उत्तर को संतुलित बनाता है।

सामाजिक बुद्धि के व्यवहारिक संकेत

क्षमताकार्यस्थल पर कैसी दिखती हैकमी हो तो क्या होता है
लोगों को पढ़नाबैठक में कौन असहमत है पर चुप है, यह पहचान लेनाअसंतोष दबा रहता है और बाद में विस्फोट करता है
भूमिकाओं का ज्ञानपटवारी, तहसीलदार और सरपंच से अलग-अलग लहजे में बात करनाअनजाने में अपमान या अनावश्यक टकराव
सही समय का चुनावकठिन विषय तब उठाना जब दूसरा पक्ष सुनने की स्थिति में होसही बात भी ग़लत समय पर कहे जाने से बेअसर
स्पष्ट और सरल संवादतकनीकी या क़ानूनी बात आम भाषा में समझानाआदेशों की ग़लत व्याख्या और बार-बार स्पष्टीकरण
साझा हित खोजनादोनों पक्षों के बीच साझा लक्ष्य रेखांकित करनाजीत-हार की मानसिकता और लंबी खींचतान

यह तालिका थॉर्नडाइक के 'समझना और सँभालना' वाले दो कामों को कार्यस्थल के व्यवहार में बाँटने का विश्लेषण है।

भारतीय प्रशासनिक संदर्भ में सामाजिक बुद्धि

भारत में प्रशासनिक काम का एक बड़ा हिस्सा ऐसे समाज के बीच होता है जहाँ जाति, समुदाय, बोली, रीति-रिवाज और स्थानीय सत्ता-संरचनाएँ अलग-अलग परतों में काम करती हैं। इसलिए औपचारिक नियम जानना काफ़ी नहीं होता; यह भी जानना पड़ता है कि गाँव में किसकी बात का वज़न है, किस विषय पर संवेदनशीलता है और कौन-सा शब्द ग़लत अर्थ ले सकता है। यह सामाजिक ज्ञान (कैंटर और किहलस्ट्रॉम की भाषा में सामाजिक जगत का ज्ञान-भंडार) अनुभव और खुले मन से बनता है।

पंचायती राज संस्थाओं के साथ काम करते समय निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच सहयोग की ज़रूरत रहती है। यहाँ सामाजिक बुद्धि वाला अधिकारी निर्वाचित प्रतिनिधि को मंच और सम्मान देता है, पर नियम और बजट की सीमाएँ भी स्पष्ट रखता है। आपदा-राहत जैसे संकट में भी यही क्षमता काम आती है, जब अफ़वाह रोकने, भीड़ को समझाने और स्वयंसेवकों को एक दिशा देने का काम एक साथ आ जाता है।

एक चेतावनी भी है। सामाजिक बुद्धि का अर्थ किसी सामाजिक दबाव के आगे झुक जाना नहीं है। संवैधानिक मूल्य और क़ानून सर्वोपरि रहते हैं; सामाजिक बुद्धि केवल यह तय करने में मदद करती है कि उन्हें लागू कैसे किया जाए, ताकि प्रतिरोध कम और स्वीकार्यता अधिक हो।

कार्यस्थल पर सामाजिक बुद्धि का संवर्धन

सिलेबस की दूसरी पंक्ति 'inculcation at workplace' है, यानी इसे विकसित कैसे किया जाए। यहाँ भी बिंदु विश्लेषण हैं। सबसे पहला उपाय सुनने की आदत है: बैठक में अपनी बात रखने से पहले दूसरे की बात पूरी सुनना और उसे अपने शब्दों में दोहराकर पुष्टि करना। दूसरा उपाय दृष्टिकोण बदलकर देखना है; किसी निर्णय को जाँचने से पहले पूछें कि इसका असर पटवारी, गाँव की महिला या दुकानदार पर कैसा होगा।

तीसरा उपाय क्षेत्रीय अनुभव है। जो अधिकारी कार्यालय के बाहर गाँव, मंडी और अस्पताल जाते हैं, उनमें सामाजिक संकेतों को पढ़ने की समझ तेज़ होती है। चौथा उपाय भूमिका-अभ्यास (role play) और केस-चर्चा है, जिसमें कठिन वार्तालापों का पूर्वाभ्यास होता है। पाँचवाँ उपाय प्रतिपुष्टि है: वरिष्ठ या सहकर्मी से यह पूछना कि मेरी बात कैसे सुनी गई। छठा उपाय संगठन-स्तर का है: टीम-बैठकों में सबको बोलने का अवसर देने वाला माहौल और ऐसे प्रशिक्षण, जिनमें पदानुक्रम के आर-पार संवाद का अभ्यास हो।

संवर्धन की सीमा भी याद रखें। सामाजिक बुद्धि केवल मिलनसारिता नहीं है। अल्ब्रेख़्त के मॉडल का 'प्रामाणिकता' आयाम यही याद दिलाता है कि लोगों को पढ़ने की क्षमता ईमानदारी और जनहित के दायरे में ही प्रशासन के लिए उपयोगी है।

मुख्य तथ्य

थॉर्नडाइक का मूल लेख
Harper's Magazine, खंड 140, 1920, पृष्ठ 227 से 235; परिभाषा पृष्ठ 228
थॉर्नडाइक की परिभाषा
पुरुषों, महिलाओं, लड़कों और लड़कियों को समझने और सँभालने की योग्यता; मानवीय संबंधों में समझदारी से कार्य करना
कैंटर और किहलस्ट्रॉम
1987: सामाजिक जगत के बारे में व्यक्ति का ज्ञान-भंडार
वेक्सलर का दृष्टिकोण
1939, 1958: सामाजिक बुद्धि सामान्य बुद्धि का सामाजिक परिस्थितियों में प्रयोग (Kihlstrom का संकलन)
अल्ब्रेख़्त का SPACE
Situational awareness, Presence, Authenticity, Clarity, Empathy; पुस्तक 2006
गोलमैन की पुस्तक
Social Intelligence: The New Science of Human Relationships, 2006

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • सामाजिक बुद्धि को केवल मिलनसार स्वभाव समझ लेना। परिभाषा में 'समझना' और 'सँभालना' दोनों हों।
  • सामाजिक और भावनात्मक बुद्धि को एक ही चीज़ बता देना। सामाजिक में केंद्र लोग और समूह हैं, भावनात्मक में भावना-संबंधी सूचना।
  • थॉर्नडाइक को भावनात्मक बुद्धि का प्रतिपादक लिख देना। थॉर्नडाइक (1920) सामाजिक बुद्धि के लिए जाने जाते हैं; भावनात्मक बुद्धि का मूल लेख सैलोवी और मेयर (1990) का है।
  • कार्यस्थल के उदाहरण में केवल निजी कंपनी का उदाहरण देना। प्रशासनिक संदर्भ (जन-सुनवाई, समन्वय बैठक, विवाद-समाधान) अंक बढ़ाते हैं।