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पेपर III · इकाई III · भाग क (व्यवहार)

सराहनात्मक बुद्धि (Appreciative Intelligence): अर्थ, तीन घटक और कार्यस्थल पर महत्त्व

सराहनात्मक बुद्धि का अर्थ, तीन घटक, आशावाद से भेद, कार्यस्थल पर महत्त्व और संवर्धन, प्रशासनिक उदाहरण सहित।

  • थाचेनकेरी
  • पुनर्संरचना
  • तीन घटक
  • कार्यस्थल
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (व्यवहार): "Intelligence: cognitive, social and emotional, cultural, appreciative and spiritual intelligence; importance and inculcation at workplace." इस पृष्ठ पर सराहनात्मक बुद्धि (Appreciative Intelligence) है: अर्थ, तीन घटक, कार्यस्थल पर महत्त्व और संवर्धन।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013 से 2024 के पेपरों में सराहनात्मक बुद्धि पर सीधा प्रश्न नहीं दिखा। पर सिलेबस की सूची में इसका अलग नाम है, इसलिए 2 अंक (परिभाषा) या 5 अंक (घटक और कार्यस्थल पर महत्त्व) का प्रश्न बन सकता है।
  • एक सटीक परिभाषा (ओक-और-बलूत वाली उपमा), तीन घटक और एक प्रशासनिक उदाहरण याद हों तो उत्तर सुगठित बनता है।
  • सिलेबस इस इकाई में 'कार्यस्थल पर महत्त्व और संवर्धन' भी माँगता है। इस पृष्ठ का हर उत्तर इन दोनों हिस्सों को साथ लेकर चलता है।

सराहनात्मक बुद्धि: पहले एक तस्वीर

एक तहसील में हर साल पानी की कमी की शिकायत आती है। पिछले अधिकारी की फ़ाइलों में यही लिखा रहता है कि 'क्षेत्र जल-विहीन है, कुछ नहीं हो सकता'। नया अधिकारी गाँवों का दौरा करता है और देखता है कि दो गाँवों में कुछ किसान सीमित पानी से भी बूँद-बूँद सिंचाई और पारंपरिक जल-संरक्षण से फ़सल निकाल रहे हैं। वह समस्या को 'पानी नहीं है' से बदलकर 'कम पानी में खेती के उदाहरण मौजूद हैं, उन्हें कैसे बढ़ाएँ' के रूप में देखता है, और फिर उन किसानों को प्रशिक्षकों के रूप में जोड़कर एक योजना बनाता है। (यह दृश्य समझाने के लिए गढ़ा गया है।) अधिकारी ने तथ्य नहीं बदले; उसने तथ्यों को देखने का ढंग बदला और उसमें से आगे की राह खोजी। इसी क्षमता को सराहनात्मक बुद्धि कहा जाता है।

यह केवल 'अच्छा सोचना' नहीं है। इसमें स्थिति के भीतर छिपी संभावना को पहचानना और उसे साकार करने की ठोस कार्य-योजना बनाना शामिल है। इस बिंदु पर आगे के खंडों में बार-बार लौटेंगे, क्योंकि परीक्षा में अक्सर इसे सामान्य आशावाद से अलग दिखाना होता है।

अर्थ और प्रतिपादक

सराहनात्मक बुद्धि की अवधारणा तोजो थाचेनकेरी (Tojo Thatchenkery) और कैरोल मेट्ज़कर (Carol Metzker) की पुस्तक 'Appreciative Intelligence: Seeing the Mighty Oak in the Acorn' (Berrett-Koehler, 2006) से जुड़ी है। पुस्तक के शीर्षक में ही उपमा है: बलूत के छोटे फल (acorn) में विशाल बलूत वृक्ष (mighty oak) को देख लेना। पुस्तक के विवरण के अनुसार लेखक इसे केवल आशावाद से अलग बताते हैं: इस गुण वाले लोग यथार्थवादी और कार्य-उन्मुख होते हैं, और उनमें केवल सकारात्मक संभावना पहचानने की नहीं, बल्कि उसका लाभ उठाने की कार्य-योजना बनाने की क्षमता भी होती है।

वर्ल्ड बिज़नेस एकेडमी के 2006 के लेख में थाचेनकेरी और मेट्ज़कर इसे किसी भी स्थिति में निहित सृजनात्मक संभावना (generative potential), यानी बलूत में छिपे वृक्ष, को देखने और उसे साकार करने की क्षमता बताते हैं। बुकुरियन और कोस्टिन (2010) के शोध-लेख में भी इसे 'बलूत में विशाल वृक्ष देख पाने' की क्षमता कहा गया है, जो वर्तमान परिस्थितियों में छिपी उस संभावना को पहचानती है जो तात्कालिक हालात के कारण ढकी रहती है।

परीक्षा के लिए सुविधाजनक परिभाषा: सराहनात्मक बुद्धि किसी स्थिति में निहित सृजनात्मक संभावना को देखने और उसे साकार करने की क्षमता है (थाचेनकेरी और मेट्ज़कर)। पहले भाग (देखना) और दूसरे भाग (साकार करना) दोनों का उत्तर में होना अंक बढ़ाता है।

तीन घटक

पुस्तक की विषय-सूची और बाद के शोध-लेख एक ही तीन-घटक ढाँचा बताते हैं। पहला घटक है पुनर्संरचना या पुनर्परिभाषा (reframing): स्थिति को देखने का तरीक़ा बदलना, ताकि उसके भीतर के नए अर्थ और अवसर दिखें। बुकुरियन और कोस्टिन के अनुसार प्रबंधक जान-बूझकर परिस्थिति की पुनर्व्याख्या करते हैं और समस्या को नए ढंग से परिभाषित करके नए समाधान निकालते हैं।

दूसरा घटक है सकारात्मक पक्ष की सराहना (appreciating the positive): जो मौजूद है, जो काम कर रहा है और जो ताक़त है, उसे पहचानना और उस पर निर्माण करना, कमियों पर अटके रहने के बजाय। तीसरा घटक है वर्तमान से भविष्य के खुलने को देखना (seeing how the future unfolds from the present): यह पहचानना कि आज की कौन-सी बात आगे के वांछित परिणाम की ओर ले जा सकती है, यानी वर्तमान की सृजनात्मक (generative) बातों को ठोस भविष्य की उपलब्धि में बदलना।

लेखकों के 2006 के लेख में इस क्षमता से जुड़े चार गुण भी गिनाए गए हैं: दृढ़ता (persistence), यह विश्वास कि अपने कार्य मायने रखते हैं (conviction that one's actions matter), अनिश्चितता को सह पाने की क्षमता (tolerance for uncertainty) और अदम्य लचीलापन (irrepressible resilience)। बुकुरियन और कोस्टिन चार गुणों की यही सूची देते हैं, पर चौथे को 'कठिन परिस्थितियों में उबर आने की क्षमता' कहते हैं। परीक्षा में तीन घटकों के बाद इन चार गुणों को एक पंक्ति में जोड़ना उत्तर को पूरा करता है।

सराहनात्मक बुद्धि के तीन घटक

घटकअर्थप्रशासनिक उदाहरण (विश्लेषण)
पुनर्संरचना (Reframing)स्थिति को देखने का तरीक़ा बदलना, ताकि नए अर्थ और विकल्प दिखें'यहाँ पानी नहीं है' को 'कम पानी में खेती के उदाहरण कैसे बढ़ाएँ' में बदलना
सकारात्मक की सराहनाजो पहले से सही चल रहा है उसे पहचानना और उसी पर निर्माण करनाअच्छे प्रदर्शन वाली आँगनवाड़ी की पद्धति को दूसरे केंद्रों में ले जाना
वर्तमान से भविष्य की झलकआज की संभावना को आगे के परिणाम से जोड़ना और कार्य-योजना बनानाछोटे पायलट के परिणाम से पूरे ब्लॉक के लिए चरणबद्ध योजना तैयार करना

तीनों घटक Thatchenkery और Metzker (2006) की पुस्तक की विषय-सूची, उन्हीं के World Business Academy लेख (2006) और Bucurean तथा Costin (2010) से; उदाहरण स्तंभ विश्लेषण है।

मानचित्र: सराहनात्मक बुद्धि

सराहनात्मक बुद्धि (बलूत में वृक्ष)

पुनर्संरचना

  • नया दृष्टिकोण
  • समस्या की नई परिभाषा

सकारात्मक की सराहना

  • जो काम कर रहा है उसे देखना
  • ताक़त पर निर्माण

भविष्य की झलक

  • संभावना से योजना
  • कार्य-उन्मुख क्रियान्वयन

आशावाद से भेद

  • यथार्थवादी
  • कार्य-उन्मुख
तीन घटक और 'आशावाद से भेद' पुस्तक के विवरण और शोध-लेख पर आधारित।

आशावाद, भावनात्मक बुद्धि और सराहनात्मक बुद्धि का भेद

परीक्षा में अक्सर इस अवधारणा को आशावाद या सकारात्मक सोच जैसा बताने की ग़लती हो जाती है। पुस्तक का विवरण यहाँ साफ़ है: यह मात्र आशावाद से अलग है। आशावादी व्यक्ति मान सकता है कि सब ठीक हो जाएगा। सराहनात्मक बुद्धि वाला व्यक्ति यथार्थ को जस का तस देखता है, उसमें से संभावना खोजता है और फिर कार्य-योजना बनाता है।

भावनात्मक बुद्धि से तुलना करें तो भावनात्मक बुद्धि भावनाओं को पहचानने और सँभालने के बारे में है, जबकि सराहनात्मक बुद्धि स्थिति की व्याख्या और उसमें संभावना पहचानने के बारे में। दोनों एक-दूसरे का सहारा बनती हैं (विश्लेषण): निराशा के क्षण में भावनात्मक नियमन अधिकारी को शांत रखता है, और फिर सराहनात्मक बुद्धि उसे अगला रास्ता दिखाती है। संज्ञानात्मक बुद्धि से भी संबंध है, क्योंकि पुनर्संरचना सोचने की एक विधि है; पर यहाँ विचार का केंद्र 'अवसर देखना' है।

आशावाद बनाम सराहनात्मक बुद्धि

सामान्य आशावाद

यथार्थ से संबंधअच्छा ही होगा, यह मान लेना

कार्य-योजनाआवश्यक नहीं

जोखिमों पर नज़रकभी-कभी अनदेखी

परिणाममनोदशा में सुधार

सराहनात्मक बुद्धि

यथार्थ से संबंधयथार्थ को देखकर उसमें संभावना खोजना

कार्य-योजनासंभावना का लाभ उठाने की ठोस योजना

जोखिमों पर नज़रयथार्थवादी रहकर बाधाओं का ध्यान

परिणामनए विकल्प, नवाचार और कार्रवाई

'यथार्थवादी और कार्य-उन्मुख' वाली बात पुस्तक के विवरण से; तालिका के अन्य बिंदु तुलनात्मक विश्लेषण हैं।

कार्यस्थल पर महत्त्व

सिलेबस की 'importance at workplace' पंक्ति के लिए यह खंड है। नीचे के बिंदु विश्लेषण हैं। बुकुरियन और कोस्टिन (2010) का लेख रोमानिया के केवल दस प्रबंधकों के छोटे प्रश्नावली-सर्वेक्षण पर आधारित है, इसलिए उसके निष्कर्षों को सामान्य नियम की तरह न लिखें। लेख का मुख्य कथन है कि सफल प्रबंधकों में दैनिक घटनाओं, बाधाओं, उत्पादों और लोगों को अनुकूल ढंग से देखने की सचेत या अचेतन क्षमता रहती है।

प्रशासन में इसका महत्त्व कई जगह दिखता है। पहला, संसाधन की कमी वाली जगहों पर जो है उसी का सर्वश्रेष्ठ उपयोग खोजने में। दूसरा, असफल योजना के पुनरीक्षण में: 'योजना क्यों विफल हुई' के साथ 'कहाँ यह सफल रही और क्यों' पूछकर सीख निकालना। तीसरा, परिवर्तन के समय: कर्मचारी बदलाव से घबराते हैं, और अधिकारी जब पुराने कौशल में उपलब्ध ताक़त को नई व्यवस्था की आवश्यकता से जोड़कर दिखाता है तो प्रतिरोध घटता है। चौथा, टीम का मनोबल: कमियों की सूची से ज़्यादा ताक़त की पहचान टीम को प्रेरित रखती है। पाँचवाँ, जन-नीति में स्थानीय मॉडलों की पहचान, जैसे समुदाय में पहले से मौजूद अच्छी पहलों को योजनाओं में जोड़ना।

एक संतुलन-वाक्य भी जोड़ें: सराहनात्मक बुद्धि का अर्थ कमियों या भ्रष्टाचार की अनदेखी नहीं है। लेखा-परीक्षा, निगरानी और जवाबदेही अपनी जगह रहेंगे; यह दृष्टि केवल इतना जोड़ती है कि समाधान की खोज में उपलब्ध ताक़त और संभावना भी देखी जाए।

सराहनात्मक बुद्धि वाले अधिकारी के संकेत

संकेतव्यवहार में कैसा दिखता हैविपरीत स्थिति
प्रश्न बदलना'क्या ग़लत है' के साथ 'क्या सही चल रहा है' भी पूछनाकेवल दोष-खोज और बहाने
संसाधन की पहचानसमुदाय, कर्मचारियों और स्थानीय पहलों की ताक़त गिनना'संसाधन नहीं हैं' पर रुक जाना
छोटी शुरुआत से बड़ी दृष्टिपायलट की सफलता से चरणबद्ध विस्तार की योजनापरिणाम के इंतज़ार में अनिर्णय
यथार्थ की स्वीकृतिकमियों और जोखिमों को खुलकर स्वीकार करनाआँख मूँदकर आशावाद
कार्रवाई और परखकार्य-योजना बनाना और आँकड़ों से परिणाम जाँचनाकेवल बातचीत और नारे

यह तालिका पुस्तक के विवरण की 'यथार्थवादी और कार्य-उन्मुख' पंक्ति और तीन घटकों को व्यवहार-संकेतों में बदलने का विश्लेषण है।

पुनर्संरचना के पाँच प्रश्न: प्रशासनिक उपयोग

किसी समस्या को पुनर्संरचित करने के लिए पाँच सरल प्रश्न काम आ सकते हैं (यह विश्लेषण है, किसी अधिकृत सूची का हिस्सा नहीं)। पहला: यह समस्या वास्तव में किसकी है और किसे इससे नुक़सान हो रहा है? दूसरा: कहाँ, किस जगह या किस दल में यही समस्या कम दिखती है, और वहाँ क्या अलग है? तीसरा: पहले से कौन-सी ताक़त, कौन-सा संसाधन और कौन-सा अनुभव उपलब्ध है? चौथा: यदि अगले एक वर्ष में सब ठीक हो जाए, तो उसकी पहली झलक आज कहाँ दिख सकती है? पाँचवाँ: उस झलक को बड़ा करने के लिए अगला छोटा क़दम क्या है?

ये प्रश्न तीनों घटकों को साथ लाते हैं। पहला और दूसरा पुनर्संरचना का काम करते हैं, तीसरा सकारात्मक की सराहना का और चौथा-पाँचवाँ वर्तमान से भविष्य की झलक का। अधिकारी इन्हें फ़ाइल की टिप्पणी, समीक्षा-बैठक और योजना के प्रारूप में इस्तेमाल कर सकता है।

बाधाएँ: कहाँ यह दृष्टि कमज़ोर पड़ती है

कुछ संगठनात्मक आदतें इस दृष्टि को दबा देती हैं। यदि समीक्षा-बैठकों में केवल दोष गिनाए जाते हैं और अच्छे अनुभव पर चर्चा नहीं होती, तो कर्मचारी कमियाँ छिपाने और जोखिम से बचने की ओर झुकते हैं। यदि हर नवाचार को पहले 'असंभव' मान लिया जाए, तो पायलट तक शुरू नहीं हो पाते। यदि पुरानी फ़ाइलों में एक ही निष्कर्ष वर्षों तक दोहराया जाए, तो नए अधिकारी भी उसी चश्मे से देखने लगते हैं (ये सब विश्लेषण हैं)।

इन बाधाओं के उत्तर में संगठन के भीतर दो आदतें लाभदायक हैं: सफलताओं का दस्तावेज़ीकरण और सीख साझा करना, और समस्या-कथन को एक पंक्ति में दोबारा लिखने का अभ्यास। दोनों बातें बिना अतिरिक्त संसाधन के लागू हो सकती हैं।

कार्यस्थल पर संवर्धन

बुकुरियन और कोस्टिन (2010) के लेख की सिफ़ारिशों की सूची में दस बिंदु हैं; वह दस प्रबंधकों के छोटे सर्वेक्षण पर टिकी है, इसलिए इन्हें सुझाव-स्तर की बात मानें। उनके मुख्य सूत्र ये हैं: अनुकूल संगठनात्मक वातावरण बनाना; कर्मचारियों के साथ अपनी सकारात्मक दृष्टि साझा करना और उनके प्रस्तावों पर प्रतिपुष्टि देना; सफलता के अनुभव सहकर्मियों से साझा करना; और इस क्षमता के विकास के लिए विशेष प्रशिक्षण-पाठ्यक्रमों में भाग लेना।

प्रशासनिक संदर्भ में इन्हें इस प्रकार उतारा जा सकता है (विश्लेषण)। समीक्षा-बैठकों में एक नियम: हर कमी के साथ एक सफलता भी रखी जाए। कार्यालय के भीतर अच्छे नवाचारों को पहचानने और साझा करने की व्यवस्था हो, ताकि दूसरे दफ़्तर उनसे सीख सकें। प्रशिक्षण में पुनर्संरचना के अभ्यास हों, जैसे ऊपर की तालिका। और बदलाव के समय कर्मचारियों से यह पूछा जाए कि उनके पास कौन-सी ताक़त है जिसे नई व्यवस्था में उपयोग किया जा सकता है।

संवर्धन की दो सावधानियाँ हैं। पहली, यह क्षमता तथ्यों और जवाबदेही की जगह नहीं ले सकती। दूसरी, किसी कर्मचारी की वास्तविक शिकायत को 'सकारात्मक सोचो' कहकर दबा देना इसका दुरुपयोग है। सराहनात्मक बुद्धि का सही प्रयोग समस्या को स्वीकार करता है और फिर संभावना खोजता है।

मुख्य तथ्य

प्रमुख पुस्तक
Appreciative Intelligence: Seeing the Mighty Oak in the Acorn, थाचेनकेरी और मेट्ज़कर, Berrett-Koehler, 2006
तीन घटक
पुनर्संरचना; सकारात्मक की सराहना; वर्तमान से भविष्य के खुलने को देखना
परिभाषा (World Business Academy, 2006)
किसी स्थिति में निहित सृजनात्मक संभावना को देखना और साकार करना
चार गुण (लेखकों का 2006 का लेख)
दृढ़ता; कार्य मायने रखने का विश्वास; अनिश्चितता सहने की क्षमता; अदम्य लचीलापन (बुकुरियन-कोस्टिन में चौथा: कठिनाई से उबरने की क्षमता)
आशावाद से भेद
यथार्थवादी और कार्य-उन्मुख; संभावना का लाभ उठाने की कार्य-योजना
शोध-लेख
बुकुरियन और कोस्टिन, 2010, Annals of the University of Petroşani, Economics 10(3), 25-32

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • सराहनात्मक बुद्धि को केवल सकारात्मक सोच या आशावाद लिख देना। पुस्तक का विवरण इसे आशावाद से अलग बताता है: यथार्थवादी और कार्य-उन्मुख।
  • तीन घटकों में से 'वर्तमान से भविष्य के खुलने को देखना' भूल जाना। यही घटक संभावना को कार्य-योजना से जोड़ता है।
  • इसे Appreciative Inquiry (संगठन-विकास की विधि) के साथ गड़बड़ा देना। यहाँ सिलेबस की चर्चा बुद्धि के रूप में है, किसी विधि के रूप में नहीं।
  • उदाहरण में कमियों की अनदेखी का सुझाव देना। उत्तर में सदैव लिखें कि जवाबदेही और तथ्य अपनी जगह रहते हैं।