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पेपर III · इकाई III · भाग क (Behavior)

कल के नेता (Leaders of Tomorrow): अवसर और चुनौतियाँ

भावी नेता की दो शक्तियाँ और छह माँगें, एक्सीडरशिप और वितरित नेतृत्व, मूल्य-आधारित शैलियाँ, विविधता और संस्कृति, तथा मिशन कर्मयोगी।

  • Conger की छह माँगें
  • एक्सीडरशिप
  • वितरित नेतृत्व
  • विविधता
  • मिशन कर्मयोगी
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (Behavior): "Leadership profiles: theories, types and styles; challenges and effectiveness at workplace; leaders of tomorrow: opportunities and challenges." इस पृष्ठ पर अंतिम खंड है: भविष्य के नेता की माँगें, अवसर और चुनौतियाँ।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013 से 2024 के पेपरों (2013 से 2024 के छह पेपरों) में इस उप-विषय पर सीधा प्रश्न नहीं मिलता। पर सिलेबस की पंक्ति में यह नामित है, इसलिए 'भविष्य के नेता: अवसर और चुनौतियाँ' जैसा 5 या 10 अंक का प्रश्न पूछा जा सकता है।
  • यह विषय नए तथ्यों से नहीं, ढाँचे से जीतता है: नेता की छह माँगें, मूल्य-आधारित शैलियाँ, विविधता और संस्कृति, तथा भारत की क्षमता-निर्माण पहल। इस पृष्ठ में हर उत्तर का ढाँचा तैयार है।
  • पिछले चार पृष्ठों (सिद्धांत, प्रकार, शैलियाँ, चुनौतियाँ) की बातें यहाँ भविष्य की भाषा में जुड़ती हैं, इसलिए इसे सबसे अंत में पढ़ें।

कल का नेता आज के नेता से अलग क्यों

नेतृत्व की हर पीढ़ी अपने समय की माँग से बनती है। OpenStax की पाठ्यपुस्तक के अनुसार पिछले कुछ दशकों की पहचान तेज़ बदलाव, कड़ी प्रतिस्पर्धा, नई प्रौद्योगिकियों के विस्फोट और ऊँची अनिश्चितता रही है, और संगठन पुनर्गठित हो रहे हैं: नेटवर्क वाले, आभासी (virtual) और बिना कठोर सीमाओं वाले ढाँचे उभर रहे हैं। जहाँ कठोर पदानुक्रम ढीला पड़ता है, वहाँ पद की शक्ति से काम चलाना कठिन हो जाता है और नेतृत्व की भूमिका बढ़ जाती है। उसी खंड में Jay A. Conger का कथन उद्धृत है कि बड़े बदलाव के समय नेता लोगों को 'आत्मविश्वास और दिशा का रास्ता' देते हैं, और आज के बदलावों की विशालता केवल अधिक नेतृत्व ही नहीं, 'नए रूप के नेतृत्व' की भी माँग करेगी।

Conger के अनुसार अगली पीढ़ी के नेता का स्वरूप दो शक्तियों से तय होता है। पहली शक्ति संगठन का बाहरी वातावरण है: वैश्विक प्रतिस्पर्धा नेतृत्व की अनूठी माँगें पैदा करती है। दूसरी शक्ति संगठन के भीतर बढ़ती विविधता है, जो सदस्यों, काम और संगठन के संबंध को चुनौतीपूर्ण भी बनाती है और बहुत सकारात्मक भी। परीक्षा के लिए यह 'दो शक्तियाँ' वाला वाक्य अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि पूरे विषय का उत्तर इन्हीं दो धुरियों पर लिखा जा सकता है: बाहर की चुनौती और भीतर की विविधता।

सरकारी संदर्भ में इन दोनों शक्तियों का सीधा अनुवाद है। बाहरी वातावरण में नागरिकों की बढ़ती अपेक्षाएँ, डिजिटल सेवाओं की गति, तथा योजनाओं का जटिल अंतर-विभागीय स्वरूप आता है। भीतरी वातावरण में अलग-अलग भर्ती-स्रोतों से आए अधिकारी, अलग पीढ़ियाँ, अलग भाषाई और सामाजिक पृष्ठभूमि, तथा महिला और पुरुष सहकर्मी शामिल हैं (विश्लेषण)। एक ज़िला कलेक्टर को आज एक साथ यह देखना होता है कि बाहर से आने वाली माँग का उत्तर कैसे दिया जाए और भीतर की टीम को एक साथ कैसे चलाया जाए।

Conger के अनुसार 21वीं सदी के नेता की छह माँगें

माँग (OpenStax में दिया वर्णन)आशयप्रशासनिक अनुवाद (विश्लेषण)
रणनीतिक अवसरवादी (strategic opportunist)दूरदर्शी नेता प्रतिस्पर्धियों से पहले रणनीतिक अवसर पहचानते हैंयोजना-अभिसरण या नई तकनीक का लाभ पहले पहचान कर ज़िले में लागू करना
वैश्विक रूप से जागरूकविदेशी बाज़ार, वैश्विक अर्थशास्त्र और भू-राजनीति की समझनिवेश, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय मानकों की समझ वाला प्रशासक
विकेंद्रित संगठन चलाने में सक्षमगति, लचीलेपन और सीखने की माँग से ऊँची भागीदारी वाले ढाँचे बढ़ेंगेज़मीनी कर्मचारियों और स्थानीय निकायों को निर्णय का अधिकार देना
विविधता के प्रति संवेदनशीलविविध कार्यबल की ज़रूरतें और चिंताएँ अलग होंगीभाषा, लिंग, पृष्ठभूमि और पीढ़ी के भेद के प्रति सजग टीम-प्रबंधन
अंतर-वैयक्तिक रूप से सक्षमबहु-सांस्कृतिक अपेक्षाओं के प्रति अत्यंत जागरूकता और संवेदनशीलतासुनने, समझाने और टकराव सुलझाने की क्षमता
संगठनात्मक समुदाय के निर्माताकाम और संगठन आवश्यकता-पूर्ति का बड़ा स्रोत बनेंगे; सदस्यों में स्वामित्व की भावनासाझा मिशन और 'अपने विभाग' का भाव पैदा करना

आधार: OpenStax, Organizational Behavior, खंड 12.9 (Conger की सूची का सार); तीसरा स्तंभ व्याख्या के लिए जोड़ा गया विश्लेषण है। Conger की सूची पाठ्यपुस्तक में उद्धृत पुराना पूर्वानुमान है; उसे आज की स्थिति पर लागू करना विश्लेषण है।

नए सहस्राब्दी का नेता: 'एक्सीडरशिप' और नए प्रतिमान

UGC की ई-पाठशाला (INFLIBNET) की इकाई 'Leadership in the New Millennium' का तर्क है कि जैसे-जैसे संगठन 21वीं सदी की ओर बढ़ते हैं, प्रबंधन के कुछ पहलू आवश्यक रहेंगे, पर नेतृत्व का 'प्रीमियम' बहुत बढ़ जाएगा। इसी इकाई में 'एक्सीडरशिप' (exceeder-ship) की अवधारणा आती है: व्यावसायिक जगत के दो अधिकारियों का हवाला देते हुए इसे तय लक्ष्यों से आगे निकलने की इच्छा को संगठन की सोच और प्रदर्शन में बैठाना बताया गया है। यानी ऐसी प्रदर्शन-संस्कृति जिसमें 'कर सकते हैं' का भाव हो, विश्वास, ध्यान, नवाचार और ईमानदारी हो, और लोग सकारात्मक होकर निर्णय लेने के लिए सशक्त हों। सरकारी भाषा में इसका अर्थ है 'केवल लक्ष्य पूरा करना' से आगे बढ़कर सेवा की गुणवत्ता सुधारना।

उसी अध्याय में शीर्ष नेतृत्व के भावी प्रतिमानों की एक सूची दी गई है जिसे 'अच्छे से महान' संगठन बनाने के लिए ज़रूरी बताया गया है। इसमें से परीक्षा के लिए उपयोगी बिंदु ये हैं: स्वयं नेता बनना; कोच और सुगमकर्ता बनना; लोगों को सशक्त करना; नेतृत्व का वितरण करना; दृष्टि और रणनीति से तालमेल; साझा मूल्य और स्वस्थ संस्कृति; 'संबंध-शक्ति' और नेटवर्क वाली टीमें; प्रतिबद्धता हासिल करना; गुणवत्ता, सेवा और ग्राहक पर ध्यान; सहयोग और एकीकरण; परस्पर निर्भरता को बढ़ावा; विविधता का सम्मान और उसका लाभ; सतत सीखना और नवाचार; वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य होना; तथा व्यापक दायरा, यानी 'मेरी टीम, मेरी कंपनी, मेरा समुदाय, मेरा विश्व'। यह सूची कंठस्थ करने की नहीं, चार समूहों में याद करने की है: लोग (कोच, सशक्तीकरण, विविधता), दृष्टि (रणनीति, मूल्य, संस्कृति), संबंध (नेटवर्क, सहयोग, परस्पर निर्भरता), और परिणाम (गुणवत्ता, नवाचार, प्रतिस्पर्धा)।

ध्यान दीजिए कि ये चरित्र-लक्षण नहीं, भूमिकाएँ हैं। पारंपरिक नेता आदेश देता था; भावी नेता कोच, सुगमकर्ता और नेटवर्क-निर्माता है। 'नेतृत्व का वितरण' का अर्थ है कि नेतृत्व केवल शीर्ष पर बैठे एक व्यक्ति का काम नहीं रहता, बल्कि अलग-अलग स्तर पर सक्षम लोग अपने-अपने क्षेत्र में नेतृत्व करते हैं। जैसे एक पंचायत समिति की बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा और जल के प्रभारी अपने-अपने मुद्दे पर आगे बढ़कर नेतृत्व लें (कल्पित उदाहरण)।

परंपरागत नेता और भावी नेता

पहलूपरंपरागत नेताभावी नेता
भूमिकानिर्देश देने वालाकोच, सुगमकर्ता, नेटवर्क-निर्माता
शक्ति का आधारपद और अधिकार'संबंध-शक्ति', विश्वास और साझा दृष्टि
निर्णयऊपर से नीचे, केंद्रितसशक्तीकरण और वितरित नेतृत्व
विविधतासमस्या की तरह देखी जाती हैसम्मान किया जाता है और लाभ उठाया जाता है
दायराअपना विभाग या दफ़्तरटीम, संगठन, समुदाय और विश्व
सीखनाअनुभव पर टिकासतत सीखना और नवाचार

आधार: INFLIBNET, 'Leadership in the New Millennium' की सूची और OpenStax खंड 12.9 की व्याख्या; तुलना-तालिका का रूप विश्लेषण है।

मूल्य-आधारित नेतृत्व: सेवक, प्रामाणिक और नैतिक

Bauer और Erdogan की पाठ्यपुस्तक बताती है कि 21वीं सदी के शुरुआती वर्षों के बड़े कॉर्पोरेट-नैतिकता घोटालों ने हितधारकों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखने वाले नैतिक नेतृत्व का महत्त्व बढ़ाया। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने सेवक नेतृत्व (servant leadership) का परिचय दिया है: ऐसा दृष्टिकोण जो नेता की भूमिका को दूसरों की ज़रूरतें पूरी करने के रूप में परिभाषित करता है। सेवक नेता कर्मचारियों को पहले रखते हैं, उनकी निजी ज़रूरतें समझते हैं, उन्हें सशक्त करते हैं और उनके कैरियर-विकास में मदद करते हैं। यह दृष्टि भविष्य की माँगों (कोच, सशक्तीकरण) से सीधी मिलती है। विस्तृत परिभाषा और Greenleaf का संदर्भ 'नेतृत्व के प्रकार' पृष्ठ पर देखें।

प्रामाणिक नेतृत्व (authentic leadership) का सार 'स्वयं बने रहिए' है। यह कहता है कि प्रभावी नेता को हालात के अनुसार गिरगिट की तरह शैली नहीं बदलनी चाहिए, बल्कि अपने मूल्यों पर टिके रहना चाहिए। पाठ्यपुस्तक के अनुसार प्रामाणिक नेता अपने अनुभवों से शक्ति लेते हैं और उनकी एक प्रमुख विशेषता आत्म-जागरूकता है। विविध और अनिश्चित वातावरण में, जहाँ नेता को अनेक तरह के लोगों से व्यवहार करना है, यह विचार भरोसा बनाने में उपयोगी माना जा सकता है (विश्लेषण)। ध्यान रहे कि प्रामाणिकता का अर्थ अपनी कमज़ोरियों पर अड़े रहना नहीं है; इसका अर्थ है मूल्यों में स्थिर रहना।

नैतिक नेतृत्व इस पूरी सूची की बुनियाद है। उसी पाठ्यपुस्तक के खंड 12.6 के अनुसार नेता नैतिक वातावरण का स्वर तय करते हैं: रोल-मॉडल बनकर, नैतिक आचरण को पुरस्कृत और अनैतिक को सार्वजनिक रूप से दंडित करके तथा नैतिकता की ऊँची अपेक्षाएँ रखकर। उच्च नैतिक विकास वाले नेता अधिक नैतिक संगठनात्मक वातावरण बनाते हैं। वहीं यह चेतावनी भी है कि लोग अधिकारी के कहने पर ऐसे काम भी कर बैठते हैं जिनसे दूसरों को जोखिम हो (मिलग्राम के प्रयोग का हवाला)। इसलिए भविष्य के लोक-सेवक नेता को न केवल स्वयं नैतिक होना है, बल्कि ऐसी संस्कृति बनानी है जिसमें अधीनस्थ ग़लत आदेश पर प्रश्न उठा सकें।

विविधता और संस्कृति: भावी नेता की अनिवार्य परीक्षा

UGC की ई-पाठशाला की 'Diversity and Its Management' इकाई के अनुसार कार्यस्थल की विविधता का अर्थ संगठन के लोगों के बीच भिन्नताओं की विविधता है, जिसमें आयु, लिंग, मानसिक या शारीरिक क्षमताएँ, जाति-नस्ल, जातीय विरासत और यौन अभिविन्यास जैसे प्राथमिक आयाम तथा भौगोलिक स्थान, सांस्कृतिक अनुभव, कार्य-अनुभव, आय, धर्म, पहली भाषा, संगठन में भूमिका, संवाद-शैली और शिक्षा जैसे द्वितीयक आयाम आते हैं। इसी इकाई में विविधता-प्रबंधन को ऐसी प्रक्रिया बताया गया है जो ऐसा सकारात्मक कार्य-वातावरण रचे और बनाए रखे जहाँ समानताओं और भिन्नताओं का मूल्य हो, ताकि सब अपनी क्षमता तक पहुँच सकें और संगठन के रणनीतिक लक्ष्यों में योगदान दे सकें।

यही इकाई विविध कार्यबल के लाभ गिनाती है: वैश्विक बाज़ार की बेहतर समझ, समस्या-समाधान में अलग-अलग दृष्टिकोणों का योगदान, व्यक्तिगत विकास के अवसर, कुछ ग्राहक-समूहों से बेहतर संवाद, और बदलती माँगों के अनुसार अधिक विविध समाधान। विविधता की उपेक्षा के परिणाम भी गिनाए गए हैं: अस्वस्थ तनाव, संघर्ष से घटती उत्पादकता, प्रतिभा को आकर्षित और रोके रखने में असमर्थता, शिकायतें और क़ानूनी कार्रवाइयाँ। विविधता स्वीकारने में बाधाएँ भी बताई गई हैं: पूर्वाग्रह (prejudice), जातीय-केंद्रवाद (ethnocentrism), रूढ़ियाँ (stereotypes), भेदभाव (discrimination), उत्पीड़न और प्रतिक्रिया (backlash)। इन बाधाओं की विस्तृत चर्चा 'कार्यस्थल पर लैंगिक मुद्दे' पृष्ठ पर लिंग के संदर्भ में की गई है।

इन सबके साथ संस्कृति की बात जुड़ती है। Bauer और Erdogan के अनुसार अधिकांश नेतृत्व-सिद्धांत अमेरिकी संदर्भ में विकसित हुए हैं और अन्य संस्कृतियों में उनकी वैधता अलग-अलग हो सकती है; किसी नेता से अपेक्षाएँ संस्कृति के साथ बदल जाती हैं। (इसके विस्तार के लिए 'नेतृत्व शैलियाँ' पृष्ठ का GLOBE खंड देखें।) भारत जैसे बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक देश के प्रशासनिक नेता के लिए इसका व्यावहारिक अर्थ है कि एक ही शैली हर ज़िले, हर समुदाय और हर टीम में काम नहीं करेगी (विश्लेषण)।

भारतीय संदर्भ: मिशन कर्मयोगी और भावी लोक-सेवक

भारत सरकार ने भावी सिविल सेवकों की तैयारी के लिए एक संरचित पहल की है। PIB के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 सितंबर 2020 को राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता-निर्माण कार्यक्रम (NPCSCB), यानी मिशन कर्मयोगी, को मंज़ूरी दी। इसका एक मार्गदर्शक सिद्धांत 'नियम-आधारित' से 'भूमिका-आधारित' मानव संसाधन प्रबंधन की ओर संक्रमण है, और लक्ष्य यह है कि सभी सिविल सेवकों को अपनी व्यवहारिक (behavioural), कार्यात्मक और विषयगत क्षमताएँ लगातार बढ़ाने का अवसर मिले। इसके लिए डिजिटल मंच iGOT-कर्मयोगी बनाया गया है। PIB का 16 दिसंबर 2021 का तथ्य-पत्र भी इसी रूपरेखा की पुष्टि करता है।

भावी नेता की ऊपर बताई माँगों से इसका मेल स्पष्ट है। 'सतत सीखना' और 'कोच बनना' जैसी माँगें तब पूरी होती हैं जब सीखना एक बार का प्रशिक्षण न होकर चलती रहने वाली प्रक्रिया हो। 'व्यवहारिक क्षमता' में वही बातें आती हैं जिन्हें इस पाठ्यक्रम में संवाद, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और टीम-नेतृत्व जैसे विषयों में पढ़ा गया है। परीक्षा की दृष्टि से इसका उपयोग यह है कि 'भावी नेता' के उत्तर के अंत में एक प्रामाणिक भारतीय उदाहरण जोड़ा जा सके। यहाँ कार्यक्रम के विवरण (कितने अधिकारी, कितनी राशि आदि) लिखने की ज़रूरत नहीं है; मंज़ूरी की तिथि, 'नियम से भूमिका' का सिद्धांत और iGOT-कर्मयोगी मंच का नाम पर्याप्त हैं।

अवसर और चुनौतियाँ: उत्तर का मूल ढाँचा

पहलूअवसरचुनौतीसमाधान की दिशा (विश्लेषण)
बाहरी वातावरणनई प्रौद्योगिकियों और वैश्विक ज्ञान तक पहुँचतेज़ बदलाव, कड़ी प्रतिस्पर्धा, अनिश्चिततास्थिति पढ़ने का अभ्यास, रणनीतिक दूरदर्शिता
संरचनानेटवर्क और विकेंद्रित ढाँचों में तेज़ निर्णयपुरानी पदानुक्रमिक आदतें; प्रतिरोधअधिकार का प्रत्यायोजन; वितरित नेतृत्व
कार्यबलविविध विचार और अधिक रचनात्मक समाधानरूढ़ियाँ, पूर्वाग्रह, प्रतिक्रियाविविधता-प्रशिक्षण, समावेशी भर्ती और मूल्यांकन
नैतिकताजनविश्वास और संगठन की प्रतिष्ठाअधिकार के दबाव में अनैतिक आज्ञापालनरोल-मॉडल व्यवहार; प्रश्न उठाने का वातावरण
क्षमतासतत सीखना, मिशन कर्मयोगी जैसी पहलनेता को हमेशा 'पूरा नेता' मान लेने की भूलभूमिका-आधारित क्षमता-निर्माण; फ़ीडबैक

आधार: OpenStax 12.9 (बदलाव, संरचना), INFLIBNET (विविधता के लाभ और बाधाएँ), Bauer-Erdogan 12.6 (नैतिकता), PIB (मिशन कर्मयोगी); समाधान स्तंभ विश्लेषण है।

भावी नेता: अवसर और चुनौतियाँ

कल का नेता

दो शक्तियाँ (Conger)

  • बाहरी वातावरण: वैश्विक प्रतिस्पर्धा
  • भीतरी वातावरण: बढ़ती विविधता

छह माँगें

  • रणनीतिक अवसरवादी, वैश्विक जागरूकता
  • विकेंद्रित संगठन, विविधता के प्रति संवेदनशील
  • अंतर-वैयक्तिक सक्षमता, समुदाय-निर्माता

नए प्रतिमान

  • एक्सीडरशिप
  • कोच, सशक्तीकरण, वितरित नेतृत्व
  • सतत सीखना और नवाचार

मूल्य और नैतिकता

  • सेवक, प्रामाणिक, नैतिक नेतृत्व
  • रोल-मॉडल और नैतिक वातावरण

भारतीय पहल

  • मिशन कर्मयोगी (2 सितंबर 2020)
  • नियम से भूमिका; iGOT-कर्मयोगी
आधार: OpenStax 12.9, INFLIBNET, Bauer-Erdogan 12.5 और 12.6, PIB।

मुख्य तथ्य

दो शक्तियाँ
संगठन का बाहरी वातावरण (वैश्विक प्रतिस्पर्धा) और भीतरी विविधता: Conger, OpenStax खंड 12.9 में उद्धृत
नेता की छह माँगें
रणनीतिक अवसरवादी; वैश्विक जागरूक; विकेंद्रित संगठन चलाने में सक्षम; विविधता के प्रति संवेदनशील; अंतर-वैयक्तिक रूप से सक्षम; संगठनात्मक समुदाय के निर्माता
एक्सीडरशिप
तय लक्ष्यों से आगे जाने की इच्छा को संगठन की सोच और प्रदर्शन में बैठाने की अवधारणा (INFLIBNET)
सेवक नेतृत्व
नेता की भूमिका दूसरों की ज़रूरतें पूरी करना (Bauer-Erdogan)
नैतिक नेतृत्व
रोल-मॉडल बनना, नैतिक आचरण को पुरस्कृत और अनैतिक को दंडित करना, ऊँची अपेक्षाएँ रखना
मिशन कर्मयोगी
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंज़ूरी 2 सितंबर 2020; 'नियम-आधारित' से 'भूमिका-आधारित' प्रबंधन; iGOT-कर्मयोगी
मिशन कर्मयोगी: तथ्य-पत्र
PIB, 16 दिसंबर 2021
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • 'भावी नेता' के उत्तर में भविष्यवाणी लिखना (जैसे 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता सब बदल देगी') जिसका स्रोत न हो। मान्य तर्क है: बाहरी वातावरण, भीतरी विविधता, और उनसे उपजी नेता की माँगें।
  • नेतृत्व-गुणों और भूमिकाओं को गडमड कर देना। भावी नेता की बात भूमिकाओं (कोच, सुगमकर्ता, नेटवर्क-निर्माता) में कही जाती है।
  • केवल अवसर लिखना और चुनौतियाँ भूल जाना, या उलटा। 10 अंक के उत्तर में दोनों बराबर आएँ और हर चुनौती के साथ एक समाधान जुड़े।
  • मिशन कर्मयोगी के साथ बिना स्रोत के आँकड़े (संख्या, राशि) जोड़ना। केवल मंज़ूरी की तिथि, 'नियम से भूमिका' और iGOT-कर्मयोगी लिखना पर्याप्त है।
  • सेवक, प्रामाणिक और नैतिक नेतृत्व को एक ही चीज़ मान लेना। सेवक: दूसरों की सेवा; प्रामाणिक: स्वयं के मूल्यों पर टिकना; नैतिक: आचरण से वातावरण तय करना।