नेतृत्व के सिद्धांत (Leadership Theories): गुण, व्यवहार और परिस्थिति से पथ-लक्ष्य तक
नेतृत्व की प्रक्रिया, गुण, व्यवहार और परिस्थिति के सिद्धांत, फ़िडलर और पथ-लक्ष्य विस्तार से; 2013 और 2023 के प्रश्न हल सहित।
- नेतृत्व की प्रक्रिया
- गुण-सिद्धांत
- फ़िडलर
- पथ-लक्ष्य
- हर्सी-ब्लैंचर्ड
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (Behavior): "Leadership profiles: theories, types and styles; challenges and effectiveness at workplace; leaders of tomorrow: opportunities and challenges." सिलेबस में 'theories' शब्द बिना नाम के आया है, इसलिए इस पृष्ठ पर पाठ्यपुस्तकों के तीन मानक वर्ग (गुण, व्यवहार, परिस्थिति) और परीक्षा में पूछे गए पथ-लक्ष्य सिद्धांत को पढ़ा जाएगा। प्रकार, शैलियाँ, चुनौतियाँ और भविष्य के नेता अलग पृष्ठों पर हैं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2013 से 2024 के पेपरों में इस विषय के दो प्रश्न मिलते हैं: 2013 (पेपर III) में 5 अंक का "नेतृत्व नेता, अनुयायी और परिस्थिति का प्रकार्य है" पर टिप्पणी, और 2023 (पेपर I) में 2 अंक का पथ-लक्ष्य सिद्धांत के चार नेतृत्व व्यवहार।
- पहला प्रश्न विचार की समझ जाँचता है (तीनों घटकों का आपसी संबंध), दूसरा किसी नामित सिद्धांत की सीधी सूची। दोनों के लिए तीन चीज़ें पक्की रखें: नेतृत्व की प्रक्रिया के घटक, फ़िडलर का मॉडल और पथ-लक्ष्य के चार व्यवहार।
- सिद्धांत एक के बाद एक आए हैं और हर सिद्धांत पिछले की कमी दूर करने के लिए बना है। यह कड़ी (गुण, फिर व्यवहार, फिर परिस्थिति) 5 और 10 अंक के उत्तर को क्रमबद्ध ढाँचा देती है।
नेतृत्व क्या है और प्रबंधन से कैसे अलग है
एक कल्पित उदाहरण लीजिए। एक पंचायत समिति में विकास अधिकारी (BDO) नियुक्त होकर आया है। कर्मचारी उसकी बात इसलिए मानते हैं कि पद के साथ आदेश देने, छुट्टी स्वीकृत करने और रिपोर्ट लिखने के अधिकार जुड़े हैं। उसी कार्यालय में एक वरिष्ठ लिपिक है जिसके पास कोई औपचारिक अधिकार नहीं, फिर भी नए कर्मचारी उसी से पूछकर काम करते हैं, क्योंकि उसका ज्ञान और व्यवहार लोगों को भरोसा देता है। पहला उदाहरण प्रबंधन (management) का है, दूसरा नेतृत्व (leadership) का। एक ही व्यक्ति में दोनों हो सकते हैं, पर दोनों एक चीज़ नहीं हैं।
परीक्षा के लिए परिभाषा इस प्रकार रखी जा सकती है: नेतृत्व दो या अधिक परस्पर निर्भर व्यक्तियों के बीच सामाजिक (अंतर-वैयक्तिक) प्रभाव का वह संबंध है जिससे समूह साझा लक्ष्य की ओर बढ़ता है (OpenStax)। अल्फ़र्ड और बीटी के शब्दों में नेतृत्व अनुयायियों से बिना दबाव और स्वेच्छा से वांछित कार्य कराने की क्षमता है; चेस्टर बर्नार्ड इसे व्यक्ति के उस व्यवहार का गुण कहते हैं जिससे वह संगठित प्रयासों में लोगों की गतिविधियों को दिशा देता है (UGC e-PG पाठशाला)। इन परिभाषाओं में तीन शब्द बार-बार आते हैं: प्रभाव, अनुयायी और साझा लक्ष्य।
OpenStax के अनुसार नेता और प्रबंधक में चार अंतर प्रमुख हैं: प्रबंधक प्रायः नियुक्त होता है जबकि नेता समूह के भीतर घटनाओं से उभर सकता है; प्रबंधक की शक्ति पद से आती है जबकि नेता की शक्ति ज्ञान, व्यक्तित्व और संबंधों से; प्रबंधक के अधीनस्थ पुरस्कार और दंड के कारण अनुपालन करते हैं जबकि नेता के अनुयायी इसलिए चलते हैं कि वे चलना चाहते हैं; और इसलिए नेता मुख्यतः आंतरिक प्रेरणा से तथा प्रबंधक मुख्यतः बाहरी प्रेरणा से काम कराता है। साथ ही यह भी जोड़ा गया है कि दोनों अलग हैं पर परस्पर विरोधी नहीं; अच्छे प्रबंधक में नेतृत्व की और प्रभावी नेता में प्रबंधन की क्षमता होनी चाहिए।
प्रबंधक और नेता: एक नज़र में
| आधार | प्रबंधक | नेता |
|---|---|---|
| परिभाषा का केंद्र | योजना, संगठन, निर्देशन और नियंत्रण की प्रक्रिया | साझा लक्ष्य के लिए सामाजिक प्रभाव का संबंध |
| पद तक पहुँचने का रास्ता | अकसर संगठन द्वारा नियुक्त | घटनाओं और समूह की स्वीकृति से भी उभरता है |
| शक्ति का स्रोत | पद, पुरस्कार और दंड का अधिकार | ज्ञान (विशेषज्ञता), व्यक्तित्व और आपसी संबंध |
| अनुपालन का आधार | पद का अधिकार और प्रोत्साहन-दंड | अनुयायी की अपनी इच्छा |
| प्रेरणा का प्रकार | मुख्यतः बाहरी (extrinsic) | मुख्यतः आंतरिक (intrinsic) |
आधार: OpenStax, Organizational Behavior, खंड 12.1। सरकारी कार्यालय में किसी पद पर नियुक्त होना प्रबंधन का अवसर है; उस पद पर नेतृत्व सिद्ध करना अलग बात है।
नेतृत्व की प्रक्रिया: नेता, अनुयायी और परिस्थिति
2013 का प्रश्न इसी बिंदु पर टिका है, इसलिए इसे ठीक से समझ लेना चाहिए। OpenStax के अनुसार नेतृत्व एक गतिशील आदान-प्रदान की प्रक्रिया है, जो समय के साथ नेता और अनुयायी के बीच बनती है। इसके पाँच घटक हैं: नेता, अनुयायी, संदर्भ (परिस्थिति), स्वयं प्रक्रिया और परिणाम। इनमें से कोई भी घटक बदलता है तो नेतृत्व का स्वरूप बदल जाता है।
नेता वह है जो समूह की गतिविधि का केंद्र बनकर उसका सुर तय करता है और समूह की दो आवश्यकताएँ पूरी करता है: कार्य की आवश्यकता (लक्ष्य की ओर प्रगति) और संबंध-रक्षा की आवश्यकता (सदस्यों का आपस में निभना, साझा मानदंड)। अनुयायी निष्क्रिय खिलाड़ी नहीं है। एडविन हॉलैंडर के हवाले से OpenStax लिखती है कि अनुयायी ही परिस्थिति को परखता है, तय करता है कि नेता से क्या चाहिए, और या तो नेतृत्व स्वीकार करता है या ठुकरा देता है। अनुयायी का व्यक्तित्व भी शैली तय करता है: आंतरिक नियंत्रण-केंद्र (internal locus of control) वाले लोग सहभागी शैली में अधिक खिलते हैं, जबकि तैयारी या प्रेरणा की कमी वाले अनुयायियों को अधिक निर्देश चाहिए।
परिस्थिति में कार्य की प्रकृति (संरचित या असंरचित), लक्ष्य की स्पष्टता, वातावरण की स्थिरता और समूह की ज्ञान-पूँजी आते हैं। एक असेंबली लाइन के नेतृत्व की परिस्थिति, एक स्वयं-प्रबंधित टीम की और एक अनुसंधान प्रयोगशाला की परिस्थिति से अलग है; एक जगह सफल तरीका दूसरी जगह असफल हो सकता है। नेता, अनुयायी और परिस्थिति एक-दूसरे को प्रभावित करते रहते हैं: नेता अनुयायियों को, अनुयायी नेता को, परिस्थिति दोनों को और दोनों परिस्थिति को। परिणाम दो स्तर पर देखे जाते हैं: समूह के स्तर पर (कार्य-आवश्यकता और संबंध-आवश्यकता पूरी हुई या नहीं) और व्यक्ति के स्तर पर (उपस्थिति, प्रेरणा, प्रदर्शन, संतोष, विश्वास)।
इसी आधार पर OpenStax निष्कर्ष देती है कि नेतृत्व नेता, अनुयायी और संदर्भ की परस्पर क्रिया का प्रकार्य (function) है। यही 2013 के उद्धरण का सार है: कोई व्यक्ति केवल अपने गुणों से सफल नेता नहीं बन जाता, और कोई शैली हर जगह श्रेष्ठ नहीं होती।
नेतृत्व की प्रक्रिया के पाँच घटक
नेतृत्व की प्रक्रिया
नेता
- कार्य और संबंध की आवश्यकताएँ पूरी करता है
- समूह का सुर तय करता है
अनुयायी
- स्वीकार या अस्वीकार करता है
- तैयारी, आत्म-छवि और नियंत्रण-केंद्र
परिस्थिति
- कार्य संरचित या असंरचित
- लक्ष्य स्पष्ट या अस्पष्ट
प्रक्रिया
- समय के साथ बना आदान-प्रदान
- प्रभाव दोनों दिशाओं में
परिणाम
- समूह: कार्य और संबंध की पूर्ति
- व्यक्ति: संतोष, प्रदर्शन, विश्वास
सिद्धांतों का नक्शा: एक के बाद एक आई खोज
नेतृत्व के सिद्धांत किसी एक दिन में नहीं बने। हर दौर के शोधकर्ताओं ने एक सवाल पूछा और उसका अधूरा उत्तर अगले दौर के सवाल की वजह बना। पहले दौर ने पूछा कि नेता कौन होता है, यानी उसमें कौन-से गुण हैं (गुण-सिद्धांत)। जब कोई तय सूची नहीं मिली तो सवाल बना कि नेता करता क्या है (व्यवहार-सिद्धांत)। जब कोई एक व्यवहार भी हर जगह सफल नहीं निकला तो सवाल बना कि कौन-सा तरीका किस परिस्थिति में चलता है (परिस्थिति या आकस्मिकता सिद्धांत)। इसके बाद के नए सिद्धांत (परिवर्तनकारी, करिश्माई, सेवक, प्रामाणिक नेतृत्व आदि) अगले पृष्ठों में हैं।
UGC e-PG पाठशाला का अध्याय भी यही क्रम अपनाता है: गुण-सिद्धांत, व्यवहार-सिद्धांत (लेविन, ओहायो स्टेट, मिशिगन, नेतृत्व ग्रिड), परिस्थिति-सिद्धांत (फ़िडलर, पथ-लक्ष्य, व्रूम-येटन-जैगो, हर्सी-ब्लैंचर्ड) और हाल के सिद्धांत। Bauer और Erdogan की पुस्तक भी इसी ढर्रे पर चलती है। इसलिए उत्तर में इसी क्रम से लिखना सुरक्षित है।
सिद्धांतों का क्रम
गुण-सिद्धांत
नेता कौन? गुणों की खोज
व्यवहार-सिद्धांत
नेता क्या करता है? कार्य और संबंध
परिस्थिति-सिद्धांत
कौन-सा तरीका कहाँ? फ़िडलर, पथ-लक्ष्य
नए सिद्धांत
परिवर्तनकारी, करिश्माई, सेवक, प्रामाणिक
1. गुण-सिद्धांत (Trait Theory)
सबसे पुराना तरीका यह मानता था कि नेता जन्मजात या स्थायी गुणों से पहचाने जाते हैं। UGC e-PG पाठशाला थॉमस कार्लाइल को इस सोच का अग्रदूत बताती है और गुणों को तीन वर्गों में रखती है: शारीरिक गुण (क़द, उम्र, सहनशक्ति), व्यक्तित्व के गुण (रचनात्मकता, अनुकूलनशीलता, आत्मविश्वास, सत्यनिष्ठा, भावनात्मक बुद्धि) और व्यक्तिगत क्षमताएँ (सामाजिक व संचार कौशल, बुद्धि, सहयोग)। इनमें शारीरिक गुणों का नेतृत्व से संबंध शोध में नहीं मिला, जबकि व्यक्तित्व और क्षमताओं का सकारात्मक संबंध दिखा।
Bauer और Erdogan बताते हैं कि 1940 तक शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुँच गए थे कि नेतृत्व निर्धारित करने वाले गुण खोजना व्यर्थ है, क्योंकि अलग-अलग अध्ययनों में गुण मापने के तरीके ही अलग थे। बाद में व्यक्तित्व के 'बिग फ़ाइव' ढाँचे के विकास के साथ स्थिति बदली। जुड, बोनो, इलीज़ और गरहार्ट (2002) की समीक्षा बताती है कि कुछ गुण नेतृत्व के उभरने और प्रभावशीलता से जुड़े हैं: बहिर्मुखता (extraversion) का संबंध सबसे प्रबल है; इसके अलावा कर्तव्यनिष्ठा (conscientiousness) और अनुभवों के प्रति खुलापन (openness) भी नेतृत्व से जुड़े पाए गए। इनके अलावा बुद्धि (सामान्य मानसिक क्षमता और भावनात्मक बुद्धि), आत्म-सम्मान और सत्यनिष्ठा भी जुड़े पाए गए हैं।
सीमाएँ भी साफ़ हैं। बुद्धि का नेतृत्व से संबंध सकारात्मक पर मध्यम है। सबसे बड़ी कमी यह है कि गुण-दृष्टि परिस्थिति को अनदेखा करती है: सेना में साहस नेता का निर्णायक गुण हो सकता है, किसी कंपनी में नहीं; नियम-बद्ध बड़े संगठनों जैसे सरकार और सेना में नेता के गुण उसके व्यवहार को कम बदलते हैं। इसीलिए अब निष्कर्ष यह है कि गुणों की छोटी सूची खोजने के बजाय यह देखा जाए कि किन परिस्थितियों में कौन-सा गुण असर करता है। गुण-सिद्धांत फिर भी काम का है: चयन करते समय संगठन ज़िम्मेदारी के पदों के लिए उपयुक्त लोग चुनने में इसका उपयोग कर सकते हैं।
2. व्यवहार-सिद्धांत (Behavioural Theories)
गुणों से बात नहीं बनी तो ध्यान इस पर गया कि प्रभावी नेता वास्तव में करते क्या हैं, क्योंकि व्यवहार देखा और मापा जा सकता है और सिखाया भी जा सकता है। 1940 के दशक के अंत में दो बड़े शोध-कार्यक्रम शुरू हुए।
ओहायो स्टेट अध्ययन (राल्फ़ स्टॉगडिल के निर्देशन में) ने नेता के व्यवहार के दो आयाम पहचाने: संरचना-प्रवर्तन (initiating structure) और सहृदयता या परवाह (consideration)। संरचना-प्रवर्तन कार्य-उन्मुख व्यवहार है: कार्य का समय-निर्धारण, भूमिकाओं की स्पष्टता, निर्देश, मानकों का पालन। सहृदयता संबंध-उन्मुख व्यवहार है: मैत्रीपूर्ण रवैया, सदस्यों की राय का सम्मान, खुला संवाद, भावनाओं की परवाह। शुरू में लोग मानते थे कि नेता को या तो कार्य-उन्मुख होना होगा या संबंध-उन्मुख; आगे साफ़ हुआ कि कोई भी नेता दोनों को किसी भी अनुपात में अपना सकता है।
मिशिगन विश्वविद्यालय के अध्ययन ने इसी से मिलते दो प्रकार बताए: कार्य-केंद्रित (job-centred) और कर्मचारी-केंद्रित (employee-centred)। दो स्वतंत्र समूहों के एक जैसे निष्कर्ष ने इन आयामों की विश्वसनीयता बढ़ाई। दोनों अध्ययनों का साझा नतीजा यह रहा कि दोनों प्रकार के व्यवहार संगठन के लिए उपयोगी हैं, पर अलग उद्देश्य के लिए। जब नेता संबंध-उन्मुख होता है तो कर्मचारियों का संतोष बढ़ता है; जब कार्य-उन्मुख होता है तो उत्पादकता कुछ अधिक होती है। यह भी देखा गया कि कार्य-उन्मुख व्यवहार बहुत अधिक हो तो कर्मचारियों में थकान या बर्नआउट का जोखिम बन सकता है।
नेतृत्व ग्रिड (Leadership Grid) रॉबर्ट ब्लेक और जेन माउटन ने बनाई। इसमें उत्पादन की चिंता और लोगों की चिंता, दोनों को 1 से 9 के पैमाने पर रखा जाता है। पाँच मुख्य शैलियाँ मानी जाती हैं: 1,1 (निष्क्रिय प्रबंधन, न्यूनतम प्रयास), 9,1 (अधिकार-अनुपालन, उत्पादन पर ज़ोर), 1,9 (कंट्री क्लब, आत्मीय माहौल पर ज़ोर), 5,5 (संगठन-आदमी, मध्यम चिंता) और 9,9 (टीम प्रबंधन, दोनों की उच्च चिंता)। ब्लेक और माउटन 9,9 को आदर्श मानते हैं, पर शोध यह नहीं मानता कि कोई एक शैली हर परिस्थिति में श्रेष्ठ है।
व्यवहार-दृष्टि की सीमा गुण-दृष्टि जैसी ही निकली: इसने भी परिस्थिति को अनदेखा किया। एक हाई स्कूल प्रधानाचार्य की प्रभावशीलता के कारण सेना या बड़े उद्योग के नेता से अलग हो सकते हैं। इसीलिए अगला क़दम शर्तें खोजना था कि कब कौन-सा व्यवहार असरदार है।
3. परिस्थिति-सिद्धांत: फ़िडलर का आकस्मिकता मॉडल
फ़्रेड फ़िडलर का सिद्धांत (उनकी 1967 की पुस्तक A Theory of Leadership Effectiveness पर आधारित) सबसे पुराने और प्रभावशाली परिस्थिति-सिद्धांतों में है। इसमें नेता की शैली मापने के लिए 'सबसे कम पसंद सहकर्मी' पैमाना (Least Preferred Coworker, LPC) है। नेता से उस सहकर्मी के बारे में सोचने को कहा जाता है जिसके साथ काम करना उसे सबसे कठिन लगा, और फिर उसे मित्रवत, सहयोगी जैसे विशेषणों पर आँका जाता है। जो नेता उस कठिन सहकर्मी को भी अपेक्षाकृत सकारात्मक आँकता है, उसका LPC अंक ऊँचा होता है और वह संबंध-उन्मुख माना जाता है। जो नेता उसे नकारात्मक आँकता है, उसका अंक निम्न होता है और वह कार्य-उन्मुख माना जाता है।
फ़िडलर के अनुसार शैली व्यक्तित्व के गुण की तरह स्थिर है, इसलिए नेता को शैली बदलने को कहने के बजाय सही व्यक्ति को सही परिस्थिति में रखना या परिस्थिति को बदलना चाहिए। परिस्थिति की अनुकूलता तीन बातों से तय होती है: नेता-सदस्य संबंध (माहौल मैत्रीपूर्ण या तनावपूर्ण), कार्य की संरचना (नियम और लक्ष्य कितने स्पष्ट) और पद-शक्ति (पुरस्कार और दंड का वैध अधिकार कितना)। तीनों अनुकूल हों तो परिस्थिति बहुत अनुकूल है, तीनों प्रतिकूल हों तो बहुत प्रतिकूल।
भविष्यवाणी यह है: बहुत अनुकूल और बहुत प्रतिकूल, दोनों परिस्थितियों में निम्न LPC (कार्य-उन्मुख) नेता सफल होगा; मध्यम अनुकूलता में उच्च LPC (संबंध-उन्मुख) नेता सफल होगा। शोध ने इन भविष्यवाणियों का आंशिक समर्थन किया है; निम्न LPC नेता वाले हिस्से को अधिक समर्थन मिला, उच्च LPC वाले हिस्से को कम। LPC अंक की मापन-विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठे हैं। फिर भी मॉडल इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि इसने स्पष्ट रूप से माना कि नेतृत्व की प्रभावशीलता संदर्भ पर निर्भर है।
फ़िडलर मॉडल: परिस्थिति और उपयुक्त नेता
| परिस्थिति की अनुकूलता | तीन शर्तों की स्थिति | जिस नेता को सफल माना गया |
|---|---|---|
| बहुत अनुकूल | अच्छे संबंध, संरचित कार्य, मज़बूत पद-शक्ति | निम्न LPC (कार्य-उन्मुख) |
| मध्यम | शर्तों का मिला-जुला रूप | उच्च LPC (संबंध-उन्मुख) |
| बहुत प्रतिकूल | खराब संबंध, असंरचित कार्य, कमज़ोर पद-शक्ति | निम्न LPC (कार्य-उन्मुख) |
आधार: Bauer और Erdogan (Saylor अभिलेख) खंड 12.4 और UGC e-PG पाठशाला। शोध का समर्थन आंशिक है।
4. पथ-लक्ष्य सिद्धांत (Path-Goal Theory)
2023 का प्रश्न इसी सिद्धांत से था, इसलिए इसे विस्तार से पढ़ें। रॉबर्ट जे. हाउस ने 1971 में Administrative Science Quarterly में यह सिद्धांत रखा (हाउस और इवांस के साथ जुड़े काम का हवाला भी मिलता है)। यह प्रेरणा के अपेक्षा-सिद्धांत (expectancy theory) पर आधारित है: कर्मचारी तब प्रेरित होता है जब उसे लगे कि (क) उसका प्रयास अच्छे प्रदर्शन तक ले जाएगा, (ख) अच्छे प्रदर्शन पर पुरस्कार मिलेगा और (ग) पुरस्कार उसके लिए मूल्यवान है। नाम का भाव यह है कि नेता का काम अनुयायी के सामने लक्ष्य तक का 'रास्ता' साफ़ करना है: मनचाहे पुरस्कार उपलब्ध कराना, रास्ते की रुकावटें हटाना और स्पष्ट करना कि कौन-सा व्यवहार पुरस्कार तक पहुँचाएगा।
फ़िडलर से बड़ा अंतर यह है कि पथ-लक्ष्य में नेता की शैली स्थिर नहीं मानी जाती। एक ही नेता परिस्थिति देखकर कोई भी शैली अपना सकता है, इसलिए यह सिद्धांत अधिक लचीला है। इसके अनुसार नेतृत्व के चार व्यवहार (शैलियाँ) हैं।
पथ-लक्ष्य के चार नेतृत्व व्यवहार
| व्यवहार (शैली) | नेता क्या करता है | कब अधिक कारगर |
|---|---|---|
| निर्देशात्मक (Directive) | अपेक्षाएँ, कार्यक्रम और नियम स्पष्ट करता है; बताता है कि क्या और कैसे करना है | भूमिका को लेकर अस्पष्टता हो; अनुभवहीन कर्मचारी। अत्यधिक योग्य कर्मचारियों पर कम असरदार |
| सहयोगी या समर्थनकारी (Supportive) | कर्मचारियों की भलाई और ज़रूरतों की परवाह, मैत्रीपूर्ण और सुगम | काम उबाऊ, तनावपूर्ण या अप्रिय हो; कर्मचारी का आत्मविश्वास कम हो |
| सहभागी (Participative) | निर्णयों में कर्मचारियों से परामर्श लेता है और सुझावों पर विचार करता है | कर्मचारी अधिक योग्य हों; निर्णय उनसे जुड़े हों; आंतरिक नियंत्रण-केंद्र वाले लोग |
| उपलब्धि-उन्मुख (Achievement-oriented) | चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखता है, उत्कृष्टता पर ज़ोर देता है और क्षमता में विश्वास जताता है | कर्मचारी योग्य हों और उनमें उपलब्धि की चाह प्रबल हो |
आधार: Bauer और Erdogan (Saylor अभिलेख) खंड 12.4, OpenStax खंड 12.6, UGC e-PG पाठशाला। परिस्थितिजन्य कारकों में कर्मचारी की विशेषताएँ (योग्यता, नियंत्रण-केंद्र, उपलब्धि-प्रेरणा) और कार्य की विशेषताएँ (अस्पष्टता, तनाव, अप्रियता) आती हैं।
सिद्धांत का शोध-समर्थन आंशिक पर उत्साहजनक है। यह जटिल है, इसलिए पूरी तरह परखा नहीं गया। इसका सबसे बड़ा योगदान यह स्वीकार कराना है कि नेता को परिस्थिति के अनुसार अपनी शैली बदलनी चाहिए। इसके अनुसार नेता पहले स्थिति का आकलन करता है (कार्य कितना संरचित है, समूह कितना संगठित और अनुभवी है, संगठन की संस्कृति क्या है, अधीनस्थ की योग्यता और ज़रूरतें क्या हैं) और फिर उपयुक्त शैली चुनता है।
5. हर्सी-ब्लैंचर्ड का परिस्थितिजन्य नेतृत्व
हर्सी और ब्लैंचर्ड का मॉडल अनुयायी की तैयारी (readiness) या परिपक्वता पर टिका है। अनुयायी की तैयारी उसकी योग्यता और प्रतिबद्धता (इच्छा) से बनती है। नेता को निर्देश (कार्य-व्यवहार) और समर्थन (संबंध-व्यवहार) की मात्रा इसी के अनुसार बदलनी चाहिए। चार शैलियाँ चलती हैं: निर्देशन या 'बताना' (नए, कम योग्य किंतु उत्साही अनुयायियों के लिए), प्रशिक्षण या 'समझाना' (कुछ योग्यता आ गई पर प्रतिबद्धता डगमगाती है), समर्थन या 'सहभागिता' (योग्यता पर्याप्त, प्रतिबद्धता कम-ज़्यादा) और प्रत्यायोजन (योग्य और प्रतिबद्ध अनुयायी)। पाठ्यपुस्तकों में शैलियों के नाम थोड़े बदलते हैं (telling, selling, participating, delegating या directing, coaching, supporting, delegating); भाव एक ही है। यह मॉडल प्रबंधकों में लोकप्रिय है और समझने में आसान है, पर इसके बुनियादी अनुमानों के शोध-समर्थन को मिश्रित बताया गया है, इसलिए अन्य सिद्धांतों के साथ पढ़ना चाहिए।
तीन परिस्थिति-सिद्धांतों की तुलना
| बिंदु | फ़िडलर | पथ-लक्ष्य (हाउस) | हर्सी-ब्लैंचर्ड |
|---|---|---|---|
| केंद्र में क्या | नेता की शैली (LPC) और परिस्थिति की अनुकूलता | नेता का व्यवहार और अधीनस्थ-कार्य की विशेषताएँ | अनुयायी की तैयारी (योग्यता और प्रतिबद्धता) |
| शैली बदल सकती है? | नहीं, परिस्थिति या नेता बदलें | हाँ, नेता लचीला है | हाँ, अनुयायी के स्तर के अनुसार |
| शैलियाँ | कार्य-उन्मुख या संबंध-उन्मुख | निर्देशात्मक, सहयोगी, सहभागी, उपलब्धि-उन्मुख | बताना, समझाना, सहभागिता, प्रत्यायोजन |
| शोध-समर्थन | आंशिक | आंशिक पर उत्साहजनक | मिश्रित |
आधार: Bauer और Erdogan (Saylor अभिलेख) खंड 12.4 और UGC e-PG पाठशाला।
2013 के कथन पर टिप्पणी कैसे लिखें
कथन है कि नेतृत्व नेता, अनुयायी और परिस्थिति का प्रकार्य है। टिप्पणी में पहले कथन से सहमति रखिए, फिर तीन घटकों की भूमिका एक-एक पंक्ति में बताइए, फिर सिद्धांतों से प्रमाण दीजिए। गुण-सिद्धांत ने केवल नेता को देखा और अधूरा रहा; व्यवहार-सिद्धांत ने नेता का व्यवहार देखा पर परिस्थिति छोड़ दी; फ़िडलर और पथ-लक्ष्य जैसे परिस्थिति-सिद्धांतों ने परिस्थिति और अनुयायी को जोड़ा। इसके बाद एक सरकारी उदाहरण दीजिए, जैसे आपदा-राहत में निर्देशात्मक शैली और अनुभवी विशेषज्ञ टीम के साथ सहभागी शैली। अंत में एक सावधानी लिखिए कि कथन का अर्थ यह नहीं कि नेता के गुण अप्रासंगिक हैं; वे परिस्थिति के साथ मिलकर काम करते हैं।
मुख्य तथ्य
- गुण-सिद्धांत में 1940 का निष्कर्ष
- 1940 तक शोधकर्ताओं ने गुणों की खोज को निष्फल माना; बिग फ़ाइव के बाद नई सफलता
- बहिर्मुखता
- नेतृत्व के उभरने और प्रभावशीलता से सबसे प्रबल संबंध (Judge आदि, 2002)
- ओहायो स्टेट के दो आयाम
- संरचना-प्रवर्तन (कार्य) और सहृदयता (संबंध)
- मिशिगन के दो प्रकार
- कार्य-केंद्रित और कर्मचारी-केंद्रित
- नेतृत्व ग्रिड
- ब्लेक और माउटन; उत्पादन और लोगों की चिंता, 1 से 9 का पैमाना; 9,9 आदर्श शैली
- फ़िडलर के मॉडल की शर्तें
- नेता-सदस्य संबंध, कार्य की संरचना, पद-शक्ति; मापक LPC
- पथ-लक्ष्य सिद्धांत
- रॉबर्ट हाउस, 1971, Administrative Science Quarterly, खंड 16; चार व्यवहार
- पथ-लक्ष्य का आधार
- प्रेरणा का अपेक्षा-सिद्धांत (expectancy theory)
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- पथ-लक्ष्य के चार व्यवहारों में 'लोकतांत्रिक' या 'स्वेच्छाचारी' लिख देना। ये लेविन की शैलियाँ हैं (शैलियों वाले पृष्ठ में)। पथ-लक्ष्य के चार नाम हैं: निर्देशात्मक, सहयोगी, सहभागी, उपलब्धि-उन्मुख।
- फ़िडलर और पथ-लक्ष्य को एक जैसा बताना। फ़िडलर में शैली स्थिर है और परिस्थिति बदली जाती है, पथ-लक्ष्य में नेता शैली बदलता है।
- 2013 जैसे 'टिप्पणी' वाले प्रश्न में सीधे परिभाषा लिख देना। टिप्पणी में पहले कथन पर अपना मत, फिर तीन घटक और फिर प्रमाण चाहिए।
- गुण-सिद्धांत को पूरी तरह ग़लत बता देना। वह आज भी चयन और विकास में काम आता है, बस परिस्थिति से जुड़कर।
- हर्सी-ब्लैंचर्ड की शैलियों के नाम पुस्तकों में अलग मिलते हैं (telling या directing आदि)। उत्तर में एक ही नाम-समूह चुनिए और अंग्रेज़ी शब्द कोष्ठक में लिख दीजिए।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): शैली का चुनाव
हल सहित उदाहरणएक ज़िला कार्यालय की तीन परिस्थितियाँ
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; कार्यालय और पात्र वास्तविक नहीं हैं।
- ज़िला कार्यालय का शाखा-अधिकारी तीन अलग स्थितियों में है: (क) नए भर्ती हुए लिपिक जिन्हें पोर्टल पर प्रविष्टि का तरीका नहीं पता; (ख) पुराने अनुभवी कर्मचारी जो रोज़ एक ही उबाऊ मिलान-कार्य करते हैं और दबाव में हैं; (ग) कुशल तकनीकी स्टाफ़ जिससे नई ऑनलाइन प्रणाली का ढाँचा बनवाना है।
- 1चरण 1: स्थिति (क) भूमिका अस्पष्ट है और अनुभव कम है, इसलिए निर्देशात्मक व्यवहार: कदम-दर-कदम तरीका बताना, समय-सारणी देना, गलतियाँ तुरंत सुधारना।
- 2चरण 2: स्थिति (ख) काम उबाऊ और तनावपूर्ण है, भूमिका स्पष्ट है। यहाँ और निर्देश देना नुकसानदेह होगा; सहयोगी व्यवहार: कठिनाई सुनना, काम की स्वीकृति देना, अनावश्यक दबाव घटाना।
- 3चरण 3: स्थिति (ग) स्टाफ़ योग्य है और निर्णय उसके काम से जुड़ा है, इसलिए सहभागी व्यवहार: डिज़ाइन पर राय लेना, सुझावों को निर्णय में शामिल करना। यदि स्टाफ़ में उपलब्धि की चाह प्रबल हो तो चुनौतीपूर्ण लक्ष्य (उपलब्धि-उन्मुख) जोड़ा जा सकता है।
निष्कर्ष: एक ही अधिकारी ने तीन स्थितियों में तीन अलग व्यवहार चुने। यही पथ-लक्ष्य सिद्धांत का सार है: शैली नेता की पहचान नहीं, परिस्थिति और अधीनस्थ की ज़रूरत का उत्तर है।
केस स्टडी (कल्पित): आपदा-राहत शिविर और सामान्य दिन
उदाहरण (काल्पनिक)एक ही अधिकारी, दो परिस्थितियाँ
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; अधिकारी, स्थान और घटना वास्तविक नहीं हैं। भारी बारिश के बाद एक तहसील में अस्थायी राहत-शिविर लगता है। उप-खंड अधिकारी (SDM) के सामने स्वयंसेवक, अलग-अलग विभागों के कर्मचारी और घबराए हुए लोग हैं। शिविर के पहले दो दिन उसने साफ़ निर्देश दिए: किसकी ड्यूटी कहाँ, राशन कब बँटेगा, रिपोर्ट किसे जाएगी। हालात सँभलने के बाद शिविर के बाद की पुनर्वास योजना पर उसने अनुभवी विभागीय अधिकारियों और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों की बैठक बुलाकर उनकी राय माँगी।
- पहले दो दिन
- परिस्थिति असंरचित और अस्पष्ट थी, भूमिकाएँ तय नहीं थीं। निर्देशात्मक व्यवहार उपयुक्त रहा।
- पुनर्वास की बैठक
- प्रतिभागी योग्य और अनुभवी थे, निर्णय उनके क्षेत्र से जुड़े थे। सहभागी व्यवहार उपयुक्त रहा।
- फ़िडलर की दृष्टि से
- शिविर में पद-शक्ति मज़बूत पर संबंध नए और कार्य असंरचित था, यानी परिस्थिति कठिन; ऐसे में कार्य-उन्मुख नेता की भविष्यवाणी की जाती है।
- 2013 के कथन से जुड़ाव
- अधिकारी वही है, पर परिस्थिति और अनुयायियों की स्थिति बदली तो प्रभावी व्यवहार बदल गया। नेतृत्व तीनों का प्रकार्य है।
सीख
प्रभावी नेता के पास एक से अधिक शैलियों का भंडार होना चाहिए और परिस्थिति को पढ़ने की क्षमता भी। केवल एक शैली पर टिके रहना सीमित प्रभावशीलता देता है।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2023RAS मुख्य परीक्षापेपर I2 अंक
Four leadership behaviours in Path-Goal theory.
आदर्श उत्तर
रॉबर्ट हाउस के पथ-लक्ष्य सिद्धांत के चार व्यवहार: निर्देशात्मक, सहयोगी, सहभागी और उपलब्धि-उन्मुख।
2013RAS मुख्य परीक्षापेपर III5 अंक
"नेतृत्व एक नेता, अनुयायी एवं परिस्थिति का समर्थन है।" टिप्पणी करें। (मुद्रित हिंदी पाठ; अंग्रेज़ी: "Leadership is a function of leader, followers and situation." Comment.)
आदर्श उत्तर
कथन उचित है। नेता समूह को दिशा देता है, अनुयायी उसे स्वीकारते या ठुकराते हैं और परिस्थिति तय करती है कि कौन-सी शैली चलेगी। गुण-सिद्धांत ने केवल नेता को देखा; फ़िडलर और पथ-लक्ष्य ने तीनों को जोड़ा। इसलिए कोई शैली हर जगह श्रेष्ठ नहीं।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
फ़िडलर के मॉडल में LPC अंक क्या दर्शाता है?
आदर्श उत्तर
LPC अंक बताता है कि नेता कार्य-उन्मुख है या संबंध-उन्मुख; ऊँचा अंक संबंध-उन्मुख शैली दर्शाता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
ओहायो स्टेट अध्ययनों के दो नेतृत्व-आयाम समझाइए।
आदर्श उत्तर
ओहायो स्टेट अध्ययनों ने दो आयाम पहचाने। संरचना-प्रवर्तन कार्य-उन्मुख है: भूमिकाएँ तय करना, निर्देश देना, मानक बनाए रखना। सहृदयता संबंध-उन्मुख है: सम्मान, खुला संवाद और सदस्यों की भावनाओं की परवाह। नेता दोनों व्यवहार किसी भी अनुपात में एक साथ अपना सकता है, इसलिए एक को चुनना ज़रूरी नहीं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
गुण-सिद्धांत की सीमाएँ बताते हुए वर्तमान में उसकी उपयोगिता लिखिए।
आदर्श उत्तर
गुण-सिद्धांत मानता है कि नेता विशेष गुणों से पहचाने जाते हैं। इसकी पहली सीमा यह है कि 1940 तक गुणों की कोई तय सूची नहीं मिली, क्योंकि मापन के तरीके अलग थे। दूसरी, यह परिस्थिति को अनदेखा करता है: सेना में साहस निर्णायक हो सकता है, कंपनी में नहीं। तीसरी, बुद्धि जैसे गुणों का नेतृत्व से संबंध मध्यम ही है। फिर भी बहिर्मुखता, कर्तव्यनिष्ठा, खुलापन, आत्म-सम्मान और सत्यनिष्ठा नेतृत्व से जुड़े मिले हैं। इसलिए यह सिद्धांत ज़िम्मेदारी के पदों के चयन में उपयोगी है, पर परिस्थिति के साथ जोड़कर।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
हर्सी-ब्लैंचर्ड मॉडल की चार नेतृत्व शैलियाँ किस आधार पर बदलती हैं?
आदर्श उत्तर
चारों शैलियाँ अनुयायी की तैयारी पर बदलती हैं, जो उसकी योग्यता और प्रतिबद्धता से बनती है। नए अनुयायी के लिए निर्देशन, कुछ योग्यता आने पर प्रशिक्षण, योग्य पर अनिश्चित प्रतिबद्धता वाले के लिए समर्थन और योग्य व प्रतिबद्ध अनुयायी के लिए प्रत्यायोजन उपयुक्त माना गया है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "नेतृत्व के सिद्धांतों का क्रमिक विकास बताते हुए पथ-लक्ष्य सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।" पहली पंक्ति में नेतृत्व की परिभाषा लिखें। (5 अंक के प्रश्न में यही ढाँचा 50 शब्दों में लिखें।)
मुख्य भाग
- क्रम: गुण (नेता कौन) से व्यवहार (नेता क्या करता है) और फिर परिस्थिति (कब कौन-सा तरीका)
- हर चरण की एक सीमा, जिसने अगला चरण बनाया
- पथ-लक्ष्य: अपेक्षा-सिद्धांत पर आधारित, चार व्यवहार, दो परिस्थितिजन्य समूह (अधीनस्थ और कार्य की विशेषताएँ)
- फ़िडलर से अंतर: नेता शैली बदल सकता है
निष्कर्ष
निष्कर्ष: नेतृत्व नेता, अनुयायी और परिस्थिति की परस्पर क्रिया है; इसलिए प्रभावी नेता लचीला और परिस्थिति को पढ़ने वाला होता है।
अतिरिक्त मूल्य
- एक सरकारी उदाहरण जोड़ें (राहत-शिविर या नई भर्ती वाली शाखा)
- तालिका बनाकर चार व्यवहार और उनकी परिस्थितियाँ लिखें
- एक पंक्ति में पर्याप्त शोध-समर्थन की सीमा का उल्लेख करें
त्वरित पुनरावृत्ति
- नेतृत्व: साझा लक्ष्य के लिए सामाजिक प्रभाव का संबंध; प्रबंधक पद से, नेता प्रभाव से
- प्रक्रिया के पाँच घटक: नेता, अनुयायी, संदर्भ, प्रक्रिया, परिणाम; नेतृत्व इनकी परस्पर क्रिया का प्रकार्य है
- क्रम: गुण, फिर व्यवहार, फिर परिस्थिति; हर चरण पिछले की कमी दूर करता है
- गुण: बहिर्मुखता सबसे प्रबल, फिर कर्तव्यनिष्ठा और खुलापन; 1940 का निराशाजनक निष्कर्ष
- व्यवहार: ओहायो (संरचना-प्रवर्तन, सहृदयता), मिशिगन (कार्य-केंद्रित, कर्मचारी-केंद्रित), ग्रिड (ब्लेक और माउटन, 9,9)
- फ़िडलर: LPC; तीन शर्तें (संबंध, संरचना, पद-शक्ति); निम्न LPC चरम परिस्थितियों में, उच्च LPC मध्यम में
- पथ-लक्ष्य (हाउस, 1971): निर्देशात्मक, सहयोगी, सहभागी, उपलब्धि-उन्मुख; आधार अपेक्षा-सिद्धांत
- फ़िडलर में शैली स्थिर, पथ-लक्ष्य में लचीली
- हर्सी-ब्लैंचर्ड: अनुयायी की तैयारी (योग्यता और प्रतिबद्धता); चार शैलियाँ
- पिछले प्रश्न: 2013 (5 अंक, तीन घटकों पर टिप्पणी) और 2023 (2 अंक, पथ-लक्ष्य के चार व्यवहार)
याद रखने योग्य शब्द
- नेतृत्व
- गुण-सिद्धांत
- ओहायो स्टेट
- फ़िडलर
- LPC
- पथ-लक्ष्य
- हर्सी-ब्लैंचर्ड