व्यावसायिक तनाव और उसके स्रोत: GAS, Holmes-Rahe पैमाना, सीखी हुई असहायता
तनाव की NCERT समझ, स्रोतों का वर्गीकरण, NIOSH की छह श्रेणियाँ, GAS, जीवन-घटना पैमाने, सीखी हुई असहायता और प्रशासनिक तनाव; सभी छह पिछले प्रश्न हल सहित।
- तनाव के स्रोत
- GAS
- जीवन-घटना पैमाना
- सीखी हुई असहायता
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (व्यवहार): "Burnout, stress and coping at workplace: occupational stress; sources and coping styles; personality and stress; gender issues at workplace." इस पृष्ठ पर व्यावसायिक तनाव और उसके स्रोत हैं: तनाव की अवधारणा, स्रोतों के प्रकार, सामान्य अनुकूलन संलक्षण (GAS), जीवन-घटना पैमाने और सीखी हुई असहायता। सामना करने की शैलियाँ और व्यक्तित्व अलग पृष्ठों पर हैं। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है; किसी व्यक्ति की स्थिति पहचानने या उपचार के लिए नहीं है।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- व्यवहार खंड में सबसे ज़्यादा प्रश्न इसी विषय से आए हैं: 2016 (सामान्य अनुकूलन संलक्षण, 2 अंक), 2018 (सामान्य अनुकूलन संलक्षण, 2 अंक; पेपर II में प्रशासनिक अधिकारी के मानसिक तनाव के कारण, 5 अंक), 2021 (तनाव के स्रोत, 2 अंक) और 2024 (सीखी हुई असहायता तथा सामाजिक पुनः-समायोजन रेटिंग पैमाना, दोनों 2 अंक)। कुल छह प्रश्न।
- 2 अंक के उत्तर के लिए परिभाषा और एक पहचान-चिह्न (जैसे GAS के तीन चरण या पैमाने के रचयिता) पर्याप्त हैं; 5 अंक के लिए स्रोतों का वर्गीकरण और एक प्रशासनिक उदाहरण चाहिए।
- इसी विषय का 'प्रशासनिक अधिकारी के तनाव के कारण' वाला प्रश्न 2018 में नैतिकता इकाई (पेपर II) में आया था, इसलिए इस पृष्ठ का अंतिम भाग उसी ढंग से तैयार है।
पहले सरल भाषा में
प्रेशर कुकर में भाप बनती है तो सीटी बजती है। थोड़ी भाप खाना पकाने में काम आती है; भाप ज़्यादा हो और निकलने का रास्ता न हो, तो ढक्कन पर दबाव बढ़ता जाता है। तनाव भी ऐसा ही है। थोड़ा दबाव ऊर्जा और ध्यान देता है, पर जब माँगें व्यक्ति की सँभालने की क्षमता से बड़ी लगने लगें और कोई निकास न दिखे, तो शरीर और मन दोनों पर बोझ पड़ता है।
कलेक्टर कार्यालय में चुनाव की तैयारी, आपदा-राहत और जन-सुनवाई एक साथ चल रही हो तो हर कर्मचारी पर वही माँगें होती हैं, पर सबको तनाव एक जैसा नहीं होता। जिसे लगता है कि काम सँभाल लूँगा, उसके लिए यह चुनौती है; जिसे लगता है कि मेरे बस का नहीं, उसके लिए यह ख़तरा है। इसलिए तनाव को समझने के लिए दो चीज़ें साथ देखनी पड़ती हैं: बाहर से आने वाली माँगें और भीतर का आकलन।
तनाव क्या है: NCERT की समझ
परिभाषा (उत्तर में लिखने योग्य): NCERT के अनुसार तनाव (stress) उन प्रतिक्रियाओं का रूप है जो कोई जीव ऐसी घटना के जवाब में देता है जो उसके संतुलन को बिगाड़े और उसकी सामना करने की क्षमता से अधिक हो। सेली (Hans Selye) ने इसे 'किसी भी माँग के प्रति शरीर की अविशिष्ट प्रतिक्रिया' कहा था। जिन घटनाओं से यह प्रतिक्रिया जन्मती है उन्हें तनावकारक (stressors) कहा जाता है, और बाहरी तनावकारकों के प्रति प्रतिक्रिया को तनाव-जनित विकृति (strain) कहा गया है।
NCERT यह भी बताती है कि तनाव हर बार हानिकारक नहीं होता। अच्छा तनाव (eustress) शिखर-प्रदर्शन में मदद करता है; वही जब बढ़कर कष्टकारी हो जाए तो उसे विपत्ति-तनाव (distress) कहा जाता है। तनाव कोई ऐसी चीज़ नहीं जो केवल व्यक्ति में हो या केवल वातावरण में; वह व्यक्ति और उसके सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण के आदान-प्रदान की चलती प्रक्रिया है।
लेज़ारस (Lazarus) के संज्ञानात्मक सिद्धांत के अनुसार दो मूल्यांकन होते हैं। प्राथमिक मूल्यांकन (primary appraisal) में घटना को सकारात्मक, तटस्थ या नकारात्मक आँका जाता है, और नकारात्मक घटना को हानि (harm), ख़तरे (threat) या चुनौती (challenge) के रूप में देखा जाता है। द्वितीयक मूल्यांकन (secondary appraisal) में अपने संसाधनों, यानी स्वास्थ्य, कौशल, सकारात्मक दृष्टिकोण और सामाजिक सहारे, का आकलन होता है। अगर संसाधन पर्याप्त लगें तो तनाव कम महसूस होता है।
NCERT के अनुसार तनाव की तीव्रता, अवधि, जटिलता और पूर्वानुमेयता भी परिणाम तय करती है। अधिक तीव्र, लंबे, जटिल और अप्रत्याशित तनाव के परिणाम अक्सर अधिक नकारात्मक होते हैं; कम तीव्र, छोटे, कम जटिल और अपेक्षित तनाव के परिणाम हल्के।
तनाव के स्रोत: NCERT का वर्गीकरण
| वर्ग | अर्थ | NCERT में दिए उदाहरण | प्रशासनिक संदर्भ (विश्लेषण) |
|---|---|---|---|
| शारीरिक और पर्यावरणीय | शरीर पर पड़ने वाली माँगें और आसपास की परिस्थितियाँ | अत्यधिक शारीरिक श्रम, अपौष्टिक भोजन, चोट, नींद की कमी; वायु-प्रदूषण, भीड़, शोर, गर्मी-सर्दी; आग, भूकंप, बाढ़ जैसी आपदाएँ | गर्मी में मेले की ड्यूटी, भीड़-प्रबंधन, बाढ़ या अकाल-राहत का मैदानी काम |
| मनोवैज्ञानिक | जो तनाव व्यक्ति अपने मन में स्वयं पैदा करता है; आंतरिक स्रोत | चिंता, कुंठा (frustration), द्वंद्व (conflict), आंतरिक और सामाजिक दबाव | नियम और ऊपर के निर्देश के बीच खिंचाव; 'हर फ़ाइल बिल्कुल सही हो' वाली पूर्णता की अपेक्षा |
| सामाजिक | दूसरों से संपर्क और संबंधों से उपजे तनाव | परिवार में मृत्यु या बीमारी, तनावपूर्ण संबंध, पड़ोसियों से परेशानी | स्थानांतरण के कारण परिवार से दूरी; सहकर्मियों या वरिष्ठों से तनावपूर्ण संबंध |
NCERT कक्षा 12, अध्याय 3 के अनुसार। अंतिम स्तंभ विश्लेषण है, NCERT का कथन नहीं।
तनाव के तीन मुख्य स्रोत: जीवन-घटनाएँ, दैनिक झंझट और आघातकारी घटनाएँ
NCERT तनाव के तीन प्रमुख स्रोत बताती है: बड़ी तनावपूर्ण जीवन-घटनाएँ (life events), रोज़मर्रा के झंझट (hassles) और आघातकारी घटनाएँ (traumatic events)। जीवन-घटनाएँ वे बदलाव हैं जो दिनचर्या को उलट देते हैं, जैसे किसी प्रिय की मृत्यु, नया घर, लंबे संबंध का टूटना। अगर ऐसी कई घटनाएँ थोड़े समय में हो जाएँ, तो उनसे निपटना कठिन हो जाता है। ये योजनाबद्ध भी हो सकती हैं (नए मकान में जाना) और अनपेक्षित भी।
दैनिक झंझट वे निजी परेशानियाँ हैं जो रोज़ के जीवन में झेलनी पड़ती हैं: शोर, आवाजाही की थकान, बिजली-पानी की कमी, ट्रैफ़िक। NCERT लिखती है कि जितना अधिक तनाव लोग इन झंझटों से बताते हैं, उतना ही उनका मनोवैज्ञानिक कल्याण कमज़ोर होता है। कुछ नौकरियों में ऐसे झंझट बहुत बार आते हैं। सरकारी दफ़्तर में रोज़ की अधूरी फ़ाइलें, नेटवर्क की रुकावट और बार-बार की मीटिंग इसी श्रेणी में समझी जा सकती हैं (यह विश्लेषण है)।
आघातकारी घटनाओं में आग, रेल या सड़क दुर्घटना, लूट, भूकंप, सुनामी जैसी चरम घटनाएँ आती हैं। NCERT के अनुसार इनके प्रभाव कुछ समय बाद भी दिख सकते हैं और कई महीने बने रहें तो पेशेवर सहायता की आवश्यकता होती है। यहाँ सही परीक्षा-वाक्य यही है कि ऐसी स्थिति का आकलन और उपचार योग्य पेशेवर का काम है।
मनोवैज्ञानिक तनाव के भीतर: कुंठा, द्वंद्व और दबाव
NCERT मनोवैज्ञानिक तनाव के कुछ प्रमुख स्रोत गिनाती है। कुंठा तब होती है जब किसी लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए कोई व्यक्ति या चीज़ आवश्यकता या अभिप्रेरक को रोक दे; जैसे भेदभाव, अपमान या कम अंक। द्वंद्व (conflict) दो या अधिक असंगत आवश्यकताओं या अभिप्रेरकों के बीच होता है: पढ़ाई जारी रखें या नौकरी करें; या ऐसे काम के लिए दबाव, जो अपने मूल्यों के ख़िलाफ़ हो।
दबाव दो तरह के बताए गए हैं। आंतरिक दबाव उन अपेक्षाओं से बनता है जो व्यक्ति स्वयं से रखता है, जैसे 'मुझे सब कुछ पूरी तरह सही करना है'; ऐसी अपेक्षाएँ निराशा तक ले जा सकती हैं। सामाजिक दबाव उन लोगों से आता है जो हमसे अत्यधिक माँग करते हैं या जिनके साथ व्यक्तित्व का टकराव रहता है। प्रशासनिक सेवा में नियम-पालन और जन-अपेक्षा के बीच का द्वंद्व इसी श्रेणी का सटीक उदाहरण है।
व्यावसायिक तनाव के स्रोत: NIOSH की छह श्रेणियाँ
| श्रेणी (NIOSH) | क्या शामिल है | प्रशासनिक उदाहरण (विश्लेषण) |
|---|---|---|
| कार्य का ढाँचा (design of tasks) | भारी कार्यभार, कम विश्राम, लंबे घंटे और पाली; नीरस काम जिसमें कौशल का उपयोग न हो और नियंत्रण का भाव कम हो | चुनाव या जनगणना की ड्यूटी में लगातार लंबे घंटे; केवल प्रविष्टि-कार्य |
| प्रबंधन-शैली | निर्णयों में कर्मचारियों की भागीदारी का अभाव, संगठन में कमज़ोर संवाद, परिवार-अनुकूल नीतियों का अभाव | हर छोटे निर्णय पर ऊपर की स्वीकृति; स्थानांतरण नीति में अस्पष्टता |
| पारस्परिक संबंध | ख़राब सामाजिक वातावरण; सहकर्मियों और पर्यवेक्षकों से सहयोग की कमी | अलग-थलग पड़ा तहसील कार्यालय का कर्मचारी |
| कार्य-भूमिकाएँ | परस्पर टकराती या अस्पष्ट अपेक्षाएँ; अत्यधिक ज़िम्मेदारी; बहुत सी भूमिकाएँ | एक अधिकारी पर दो-तीन विभागों का अतिरिक्त प्रभार |
| करियर संबंधी चिंताएँ | नौकरी की असुरक्षा, उन्नति के अवसर की कमी, ऐसे तेज़ बदलाव जिनके लिए कर्मचारी तैयार नहीं | पदोन्नति में देरी; अचानक डिजिटल प्रणाली का लागू होना |
| पर्यावरणीय परिस्थितियाँ | भीड़, शोर, प्रदूषण, असुविधाजनक या ख़तरनाक कार्य-स्थिति | बाढ़-राहत शिविर; भीड़ वाले आयोजन की निगरानी |
NIOSH (अमेरिकी संस्थान), प्रकाशन 99-101 (1999) के 'Job Conditions That May Lead to Stress' के अनुसार; अंतिम स्तंभ विश्लेषण है।
NIOSH का दृष्टिकोण और WHO की सूची
NIOSH के अनुसार नौकरी का तनाव (job stress) तब पैदा होता है जब नौकरी की माँगें कर्मचारी की क्षमताओं, संसाधनों या ज़रूरतों से मेल न खाएँ। NIOSH चुनौती और तनाव को अलग रखता है: चुनौती ऊर्जा देती है और नया सीखने को प्रेरित करती है, जबकि पूरी न हो सकने वाली माँगें थकावट में बदल जाती हैं। NIOSH का रुख यह है कि कार्य की परिस्थितियाँ तनाव की प्राथमिक कारण हैं, पर व्यक्तिगत कारक, जैसे सहयोगी मित्रों का नेटवर्क या कार्य-परिवार का संतुलन, इसके असर को घटा-बढ़ा सकते हैं।
WHO के तथ्य-पत्र 'Mental health at work' में कार्यस्थल के मनो-सामाजिक जोखिमों (psychosocial risks) की सूची दी गई है। इनमें कौशल का कम उपयोग या कौशल से कम होना, अत्यधिक कार्यभार या गति, कर्मचारियों की कमी, लंबे या अनियमित घंटे, कार्य-रूपरेखा पर नियंत्रण का अभाव, असुरक्षित भौतिक परिस्थितियाँ, नकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने वाली संगठन-संस्कृति, सहकर्मियों का सीमित सहयोग या तानाशाह पर्यवेक्षण, हिंसा, उत्पीड़न और धौंस, भेदभाव, अस्पष्ट भूमिका, नौकरी की असुरक्षा, अपर्याप्त वेतन और घर-काम की टकराती माँगें शामिल हैं।
कारसेक (Karasek) के 1979 के शोध-लेख का शीर्षक 'Job demands, job decision latitude, and mental strain' है। इसका सार परीक्षा के लिए इतना ही रखें कि कार्य की माँगों के साथ निर्णय-स्वतंत्रता यानी नियंत्रण भी देखा जाता है; माँगें अधिक हों और नियंत्रण कम तो मानसिक विकृति की संभावना बढ़ती है।
सामान्य अनुकूलन संलक्षण (General Adaptation Syndrome, GAS)
परिभाषा (2 अंक के लिए): सामान्य अनुकूलन संलक्षण सेली द्वारा बताया गया वह तीन-चरणीय प्रतिक्रिया-प्रतिरूप है जो शरीर लंबे समय तक चलने वाले तनावकारक के जवाब में दिखाता है। NCERT के अनुसार सेली ने प्रयोगशाला में पशुओं को ऊँचे तापमान, एक्स-रे और इंसुलिन के इंजेक्शन जैसे अनेक तनावकारकों के संपर्क में रखा और अस्पतालों में विभिन्न चोटों और बीमारियों वाले रोगियों को भी देखा; सभी में शरीर की प्रतिक्रिया का एक-सा ढर्रा मिला, जिसे उन्होंने GAS कहा। सेली का प्रारंभिक संक्षिप्त लेख 'A syndrome produced by diverse nocuous agents' 1936 में Nature (खंड 138, पृष्ठ 32) में छपा, और विस्तृत प्रस्तुति 1946 में Journal of Clinical Endocrinology (6(2):117-230) में।
NCERT के अनुसार तीन चरण हैं। पहला है चेतावनी या अलार्म प्रतिक्रिया (alarm reaction): तनावकारक के आते ही एड्रिनल-पिट्यूटरी-कॉर्टेक्स तंत्र सक्रिय होता है, तनाव-प्रतिक्रिया के हार्मोन निकलते हैं और जीव लड़ने या भागने (fight or flight) को तैयार हो जाता है। दूसरा है प्रतिरोध (resistance): तनाव लंबा खिंचे तो शरीर संसाधनों का सावधानी से उपयोग करता है और ख़तरे का सामना करने की कोशिश करता है। तीसरा है थकावट (exhaustion): लगातार संपर्क रहने पर शरीर के संसाधन चुक जाते हैं, अलार्म और प्रतिरोध वाली प्रणालियाँ बेअसर होने लगती हैं और तनाव-जनित रोगों की संभावना बढ़ जाती है।
आलोचना भी परीक्षा-योग्य है। NCERT के अनुसार सेली के प्रतिरूप में मनोवैज्ञानिक कारकों की भूमिका बहुत सीमित मानी गई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि घटनाओं का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन तनाव तय करने में महत्त्वपूर्ण है, और प्रतिक्रिया उतनी सामान्य और अविशिष्ट नहीं जितनी सेली ने समझी; अलग-अलग तनावकारक कुछ भिन्न ढर्रे बना सकते हैं और अलग-अलग व्यक्तियों के प्रतिक्रिया-तरीक़े अलग होते हैं।
GAS के तीन चरण
| चरण | क्या होता है (NCERT) | परीक्षा के लिए एक पंक्ति |
|---|---|---|
| 1. चेतावनी (alarm reaction) | तनावकारक से एड्रिनल-पिट्यूटरी-कॉर्टेक्स तंत्र सक्रिय; हार्मोन निकलते हैं; जीव लड़ने या भागने को तैयार | पहली प्रतिक्रिया: शरीर सतर्क |
| 2. प्रतिरोध (resistance) | तनाव जारी रहे तो शरीर संसाधनों का सावधान उपयोग करता है और सामना करने का प्रयास करता है | टिके रहने की कोशिश |
| 3. थकावट (exhaustion) | लंबे संपर्क में संसाधन चुक जाते हैं; पिछली दोनों चरणों की प्रणालियाँ बेअसर; तनाव-जनित रोगों की संभावना | संसाधन चुकना |
NCERT कक्षा 12, अध्याय 3, चित्र 3.3 की व्याख्या के अनुसार।
जीवन-घटना पैमाना: Holmes और Rahe का सामाजिक पुनः-समायोजन रेटिंग पैमाना
परिभाषा (2 अंक के लिए): सामाजिक पुनः-समायोजन रेटिंग पैमाना (Social Readjustment Rating Scale) Holmes और Rahe द्वारा बनाया गया जीवन-घटना पैमाना है, जिसमें जीवन की बड़ी घटनाओं को उनसे आने वाले पुनः-समायोजन के अनुसार संख्यात्मक भार दिया जाता है। इसका मूल लेख 1967 में Journal of Psychosomatic Research (खंड 11, अंक 2, पृष्ठ 213-218) में छपा। परीक्षा के लिए रचयिता, वर्ष और विचार पर्याप्त हैं; मूल पैमाने के अंक याद करना ज़रूरी नहीं।
NCERT के बॉक्स 3.1 के अनुसार Holmes और Rahe ने तनाव का जीवन-घटना मापक बनाया, और उसी पर आधारित 'प्रिज़म्पटिव स्ट्रेसफ़ुल लाइफ़ इवेंट्स स्केल' भारतीय आबादी के लिए सिंह, कौर और कौर ने विकसित किया। यह स्व-मूल्यांकन प्रश्नावली है जिसमें इक्यावन जीवन-परिवर्तन हैं। हर घटना को गंभीरता के अनुसार संख्यात्मक मान दिया गया है; सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की घटनाएँ ली जाती हैं, क्योंकि दोनों में बदलाव है। उत्तरदाता का तनाव-अंक पिछले एक वर्ष में अनुभव की गई घटनाओं के मानों का भारित योग है।
सीमाएँ भी याद रखें। NCERT के अनुसार जीवन-घटनाओं और किसी ख़ास बीमारी की संवेदनशीलता के बीच सहसंबंध कम है, यानी जीवन-घटना और तनाव का संबंध कमज़ोर पाया गया है। यह भी प्रश्न रहा है कि घटनाओं से बीमारी हुई या बीमारी से घटनाएँ। घटना का असर व्यक्ति के हिसाब से बदलता है; पहली बार अनुभव की उम्र, आवृत्ति, अवधि और सामाजिक सहारा भी देखे जाने चाहिए।
भारतीय प्रश्नावली के नमूना-मान (NCERT, बॉक्स 3.1)
- परिवार के निकट सदस्य की मृत्यु66
- अप्रत्याशित दुर्घटना या आघात53
- परिवार के सदस्य की बीमारी52
- मित्र से संबंध-विच्छेद47
- परीक्षाओं में बैठना43
- खान-पान की आदतों में बदलाव27
| जीवन-घटना | औसत तनाव-अंक |
|---|---|
| परिवार के निकट सदस्य की मृत्यु | 66 |
| अप्रत्याशित दुर्घटना या आघात | 53 |
| परिवार के सदस्य की बीमारी | 52 |
| मित्र से संबंध-विच्छेद | 47 |
| परीक्षाओं में बैठना | 43 |
| खान-पान की आदतों में बदलाव | 27 |
ये भारतीय पैमाने के नमूना-मान हैं, Holmes और Rahe (1967) के मूल अंक नहीं।
सीखी हुई असहायता (Learned helplessness)
सरल भाषा में: किसी फ़ाइल को आगे बढ़ाने की हर कोशिश बार-बार बेअसर रहे और कुछ भी बदलता न दिखे, तो आदमी एक दिन कोशिश ही छोड़ देता है, भले ही बाद में रास्ता खुल गया हो। यही सीखी हुई असहायता का सहज रूप है।
NCERT (कक्षा 11, अध्याय 5, बॉक्स 5.2) के अनुसार Seligman और Maier ने कुत्तों पर प्रयोग किया। पहले चरण में कुत्तों को ध्वनि के साथ बिजली का झटका ऐसे दिया गया कि उनके पास बचने या टालने का कोई रास्ता नहीं था। दूसरे चरण में वे ऐसी स्थिति में रखे गए जहाँ दीवार से सिर लगाकर झटके से बचा जा सकता था, पर पहले अपरिहार्य झटका झेल चुके कुत्ते बचने की कोशिश किए बिना झटका सहते रहे। इस व्यवहार को सीखी हुई असहायता कहा गया। NCERT के अनुसार मनुष्यों में भी यही दिखा है: बार-बार की विफलता से कम दृढ़ता और ख़राब प्रदर्शन दिखता है।
मूल शोध-लेख Seligman और Maier (1967), 'Failure to escape traumatic shock', Journal of Experimental Psychology 74(1):1-9 है; उसी वर्ष Overmier और Seligman का लेख भी छपा, जिसका शीर्षक 'Effects of inescapable shock upon subsequent escape and avoidance responding' है। पचास वर्ष बाद Maier और Seligman (2016) ने 'Learned helplessness at fifty: insights from neuroscience' में लिखा कि मूल सिद्धांत ('कुछ भी करो, कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता' यह सीख लेना) उल्टा था। उनके अनुसार लंबे समय तक प्रतिकूल घटनाओं के जवाब में निष्क्रियता सीखी नहीं जाती, वह स्वाभाविक प्रारंभिक प्रतिक्रिया है; जो सीखा जाता है वह नियंत्रण की पहचान है, जिससे निष्क्रियता पर क़ाबू पाया जा सकता है।
प्रशासनिक संदर्भ (विश्लेषण): जिस कार्यालय में कर्मचारियों के सुझावों पर कभी कुछ नहीं होता और परिणाम मेहनत से स्वतंत्र दिखता है, वहाँ पहल घटती है। इसलिए नियंत्रण का भाव लौटाने वाले उपाय, जैसे निर्णयों में भागीदारी और ठोस प्रतिक्रिया, तनाव घटाने की दिशा में काम आ सकते हैं।
प्रशासनिक अधिकारी के मानसिक तनाव के मुख्य कारण
यह खंड 2018 के पेपर II (नैतिकता इकाई) के प्रश्न की तैयारी के लिए है। नीचे की तालिका NIOSH और NCERT की श्रेणियों को प्रशासनिक संदर्भ में रखती है। इसके उदाहरण और उनका मिलान विश्लेषण है, किसी सर्वेक्षण का निष्कर्ष नहीं।
उत्तर में तीन स्तर लिखना उपयोगी है। संगठन के स्तर पर कार्यभार, भूमिका-द्वंद्व, नियंत्रण की कमी, स्थानांतरण और पदोन्नति की अनिश्चितता। मैदानी स्तर पर आपदा, भीड़, क़ानून-व्यवस्था और असुविधाजनक कार्य-परिस्थितियाँ। व्यक्ति के स्तर पर पूर्णता की अपेक्षा, नैतिक द्वंद्व और परिवार से दूरी। अंत में यह जोड़ें कि इन कारणों के समाधान संगठन और व्यक्ति, दोनों के स्तर पर खोजे जाते हैं।
प्रशासनिक अधिकारी के तनाव के कारण: श्रेणी के अनुसार
| श्रेणी | कारण | स्रोत-आधार |
|---|---|---|
| कार्यभार और समय का दबाव | चुनाव, आपदा-राहत और जन-सुनवाई की एक साथ ज़िम्मेदारी; लंबे घंटे; अतिरिक्त प्रभार | NIOSH: कार्य का ढाँचा; WHO: अत्यधिक कार्यभार |
| भूमिका-द्वंद्व | नियम और राजनीतिक या जन-अपेक्षा में टकराव; जवाबदेही का भार | NIOSH: कार्य-भूमिकाएँ; NCERT: द्वंद्व |
| नियंत्रण और भागीदारी | निर्णय में सीमित स्वतंत्रता; ऊपर से बार-बार निर्देश | NIOSH: प्रबंधन-शैली; Karasek: निर्णय-स्वतंत्रता |
| करियर और स्थानांतरण | स्थानांतरण, पदोन्नति में अनिश्चितता | NIOSH: करियर संबंधी चिंताएँ |
| परिवेश और सुरक्षा | भीड़, गर्मी, आपदा-स्थल; सुरक्षा संबंधी जोखिम | NCERT: भौतिक और पर्यावरणीय; NIOSH: पर्यावरणीय परिस्थितियाँ |
| व्यक्ति और संबंध | पूर्णता की अपेक्षा; सहकर्मियों से टकराव; परिवार से दूरी | NCERT: आंतरिक और सामाजिक दबाव |
श्रेणियाँ NIOSH और NCERT से; प्रशासनिक उदाहरण विश्लेषण।
GAS: तीन चरणों का प्रवाह
तनावकारक
लंबे समय तक बना रहने वाला दबाव
1. चेतावनी
तंत्र सक्रिय, हार्मोन निकलते हैं, लड़ने या भागने की तैयारी
2. प्रतिरोध
संसाधनों का सावधान उपयोग; सामना करने की कोशिश
3. थकावट
संसाधन चुकते हैं; तनाव-जनित रोगों की संभावना बढ़ती है
मानचित्र: व्यावसायिक तनाव और उसके स्रोत
व्यावसायिक तनाव
अवधारणा
- सेली: माँग के प्रति अविशिष्ट प्रतिक्रिया
- eustress और distress
- लेज़ारस: प्राथमिक और द्वितीयक मूल्यांकन
स्रोत (NCERT)
- जीवन-घटनाएँ
- दैनिक झंझट
- आघातकारी घटनाएँ
- शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक
नौकरी के स्रोत (NIOSH)
- कार्य का ढाँचा
- प्रबंधन-शैली
- पारस्परिक संबंध
- भूमिकाएँ
- करियर
- परिवेश
मॉडल
- GAS: चेतावनी, प्रतिरोध, थकावट
- Holmes और Rahe (1967)
- सीखी हुई असहायता
मुख्य तथ्य
- तनाव की NCERT परिभाषा
- संतुलन बिगाड़ने वाली और सामना करने की क्षमता से अधिक घटना के प्रति प्रतिक्रियाओं का ढर्रा; सेली ने इसे अविशिष्ट प्रतिक्रिया कहा
- स्रोत (NCERT)
- जीवन-घटनाएँ, दैनिक झंझट, आघातकारी घटनाएँ; प्रकार: शारीरिक-पर्यावरणीय, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक
- GAS: मूल लेख
- Selye (1936), Nature 138:32; Selye (1946), J Clin Endocrinol 6(2):117-230
- GAS: विस्तृत प्रस्तुति
- Selye (1946), Journal of Clinical Endocrinology 6(2):117-230
- SRRS: मूल लेख
- Holmes और Rahe (1967), J Psychosom Res 11(2):213-218
- भारतीय जीवन-घटना पैमाना
- इक्यावन जीवन-परिवर्तन; सिंह, कौर और कौर (NCERT बॉक्स 3.1)
- सीखी हुई असहायता: मूल प्रयोग
- Seligman और Maier (1967), J Exp Psychol 74(1):1-9
- सीखी हुई असहायता: साथ का लेख
- Overmier और Seligman (1967), J Comp Physiol Psychol 63(1):28-33
- सीखी हुई असहायता: 2016 का पुनर्मूल्यांकन
- निष्क्रियता स्वाभाविक प्रारंभिक प्रतिक्रिया; नियंत्रण की पहचान सीखी जाती है (Maier और Seligman, 2016)
- नौकरी के तनाव की छह श्रेणियाँ
- NIOSH प्रकाशन 99-101 (1999)
- मनो-सामाजिक जोखिमों की सूची
- WHO तथ्य-पत्र, पृष्ठ-तिथि 15 सितंबर 2026
- अंतिम जाँच
- 2 अक्तूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- तनाव को केवल बाहरी दबाव बता देना। NCERT के अनुसार तनाव में मूल्यांकन और संसाधनों की भूमिका भी है।
- GAS के चरणों का क्रम उलट देना या 'थकावट' को बर्नआउट का पर्याय लिख देना। GAS शारीरिक प्रतिक्रिया का प्रतिरूप है; बर्नआउट का अर्थ अलग पृष्ठ पर है।
- Holmes और Rahe के मूल पैमाने के अंक याद से लिख देना। अंक उतने ही लिखें जितने पक्के हों; रचयिता, वर्ष, विचार और सीमा लिखना पर्याप्त है।
- भारतीय पैमाने (सिंह, कौर और कौर) और Holmes-Rahe पैमाने को एक मान लेना।
- सीखी हुई असहायता को कमज़ोरी या आलस्य कह देना। वह बार-बार की अनियंत्रणीय स्थितियों के बाद की निष्क्रियता है।
- प्रशासनिक तनाव के उत्तर में केवल कार्यभार लिखना। भूमिका-द्वंद्व, नियंत्रण, करियर और परिवेश भी जोड़ें।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): तनाव-अंक का भारित योग
हल सहित उदाहरणएक अभ्यर्थी का एक वर्ष का जीवन-घटना अंक
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; व्यक्ति काल्पनिक है। केवल NCERT की ऊपर दी तालिका के नमूना-मान लिए गए हैं। यह कोई निदान या वास्तविक मूल्यांकन नहीं है।
- कल्पित अभ्यर्थी ने पिछले एक वर्ष में तीन घटनाएँ अनुभव कीं: मुख्य परीक्षा में बैठना, परिवार के एक सदस्य की बीमारी, और खान-पान की आदतों में बदलाव।
- 1चरण 1: हर घटना का मान लिखें परीक्षाओं में बैठना = 43; परिवार के सदस्य की बीमारी = 52; खान-पान की आदतों में बदलाव = 27।
- 2चरण 2: योग निकालें 43 + 52 + 27 = 122। NCERT के अनुसार तनाव-अंक अनुभव की गई घटनाओं के मानों का भारित योग है।
- 3चरण 3: अर्थ पढ़ें 122 उस पैमाने के भीतर एक अंक है। इससे कोई रोग पहचाना नहीं जा सकता, क्योंकि NCERT के अनुसार घटनाओं और बीमारी का सहसंबंध कम है।
निष्कर्ष: कल्पित अभ्यर्थी का पैमाने पर अंक 122 रहा। परीक्षा में यह दिखाना काफ़ी है कि अंक भारित योग से बनता है और उसकी अपनी सीमाएँ हैं।
केस स्टडी (कल्पित): चुनाव और बाढ़-राहत की दोहरी ड्यूटी
उदाहरण (काल्पनिक)एक उपखंड अधिकारी के तनाव की परतें
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; पद, स्थान और घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं। एक कल्पित उपखंड में बाढ़ के राहत-कार्य के बीच ही उपचुनाव की तैयारी शुरू हो गई। उपखंड अधिकारी के पास दोनों का प्रभार था, कर्मचारी कम थे और कई सहायक एक साथ छुट्टी पर।
- स्रोत की पहचान
- कार्यभार और समय का दबाव (NIOSH: कार्य का ढाँचा), भूमिकाओं का टकराव (राहत और चुनाव), आपदा-स्थल का भौतिक परिवेश, और परिवार से दूरी।
- GAS से जोड़ना
- पहले सप्ताह में सतर्कता अधिक रही (चेतावनी), फिर वह टिके रहने की कोशिश में बदली (प्रतिरोध)। कई हफ़्तों तक राहत और चुनाव साथ चले तो थकावट वाले चरण की आशंका रहती है।
- नियंत्रण का सवाल
- अगर निर्णयों पर बार-बार ऊपर की मंज़ूरी चाहिए और सुझाव अनसुने रहें तो पहल घटने की दिशा में यह सीखी हुई असहायता से जुड़ता है।
- संगठन के स्तर पर उपाय
- चुनाव-कार्य के लिए अलग नोडल अधिकारी, अतिरिक्त कर्मचारी, पाली-व्यवस्था और स्पष्ट प्राथमिकता-सूची।
सीख
तनाव का आकलन कारणों की श्रेणी से शुरू होता है; समाधान में संगठन की भूमिका उतनी ही है जितनी व्यक्ति की। किसी व्यक्ति में असामान्य लक्षण दिखें तो योग्य पेशेवर से परामर्श की सलाह दी जाए।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2024RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
Learned helplessness
आदर्श उत्तर
सीखी हुई असहायता: बार-बार अनियंत्रणीय प्रतिकूल स्थितियों के बाद बचने का प्रयास छोड़ देना (Seligman और Maier)।
2024RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
Social Readjustment Rating Scale
आदर्श उत्तर
Holmes और Rahe (1967) का पैमाना, जो जीवन-घटनाओं को पुनः-समायोजन के अनुसार अंक देता है।
2021RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
तनाव के स्त्रोत बताइए।
आदर्श उत्तर
तनाव के स्रोत: जीवन-घटनाएँ, दैनिक झंझट, आघातकारी घटनाएँ; साथ ही शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारक।
2018RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
सामान्य अनुकूलन सलक्षण क्या है? (प्रश्नपत्र में 'सलक्षण' छपा है; अंग्रेज़ी: What is General Adaptation syndrome?)
आदर्श उत्तर
सेली का तीन-चरणीय प्रतिरूप: लंबे तनाव में शरीर चेतावनी, प्रतिरोध और थकावट से गुज़रता है।
2016RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
सामान्य अनुकूलन संलक्षण की व्याख्या कीजिए।
आदर्श उत्तर
सेली के अनुसार शरीर की तनाव-प्रतिक्रिया तीन चरणों में चलती है: चेतावनी, प्रतिरोध और थकावट।
2018RAS मुख्य परीक्षापेपर II5 अंक
आपके अनुसार प्रशासनिक अधिकारी के मानसिक तनाव के क्या मुख्य कारण होते हैं? समझाइये।
आदर्श उत्तर
प्रशासनिक अधिकारी के तनाव के मुख्य कारण हैं: कार्यभार और समय का दबाव, भूमिका-द्वंद्व (नियम बनाम जन-अपेक्षा), निर्णयों में नियंत्रण की कमी, स्थानांतरण और पदोन्नति की अनिश्चितता, आपदा और भीड़ वाला कार्य-परिवेश, तथा पूर्णता की अपेक्षा। समाधान संगठन और व्यक्ति, दोनों स्तर पर चाहिए।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
तनावकारक (stressor) किसे कहते हैं?
आदर्श उत्तर
तनावकारक वे घटनाएँ या परिस्थितियाँ हैं जो तनाव-प्रतिक्रिया जगाती हैं, जैसे शोर, भीड़ या तनावपूर्ण संबंध।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
अच्छे तनाव (eustress) का अर्थ लिखिए।
आदर्श उत्तर
अच्छा तनाव वह है जो उत्साह देकर शिखर-प्रदर्शन में सहायक होता है; हानिकारक रूप विपत्ति-तनाव कहलाता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
लेज़ारस के प्राथमिक और द्वितीयक मूल्यांकन में अंतर बताइए।
आदर्श उत्तर
प्राथमिक मूल्यांकन में घटना को सकारात्मक, तटस्थ या नकारात्मक आँका जाता है, और नकारात्मक घटना में हानि, ख़तरा या चुनौती देखी जाती है। द्वितीयक मूल्यांकन में अपने संसाधनों, जैसे स्वास्थ्य, कौशल और सामाजिक सहारे, का आकलन होता है कि वे घटना से निपटने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
NIOSH के अनुसार नौकरी में तनाव के कोई चार कारण लिखिए।
आदर्श उत्तर
NIOSH के अनुसार भारी कार्यभार, लंबे घंटे और नियंत्रण की कमी जैसे कार्य-ढाँचे के कारक तनाव देते हैं। निर्णयों में भागीदारी का अभाव, टकराती या अस्पष्ट भूमिकाएँ, नौकरी की असुरक्षा और उन्नति के अवसर की कमी तथा शोर या भीड़ जैसी परिस्थितियाँ भी तनाव के कारण हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
सामान्य अनुकूलन संलक्षण के चरण और उसकी आलोचना समझाइए।
आदर्श उत्तर
सेली के सामान्य अनुकूलन संलक्षण में तीन चरण हैं। चेतावनी में तनावकारक से तंत्र सक्रिय होता है, हार्मोन निकलते हैं और जीव लड़ने या भागने को तैयार होता है। प्रतिरोध में लंबे तनाव के बीच शरीर संसाधनों का सावधानी से उपयोग करते हुए सामना करने की कोशिश करता है। थकावट में संसाधन चुक जाते हैं और तनाव-जनित रोगों की संभावना बढ़ती है। आलोचना यह है कि प्रतिरूप में मनोवैज्ञानिक कारकों की भूमिका बहुत सीमित है, जबकि घटना का मूल्यांकन, व्यक्तित्व और धारणा प्रतिक्रिया को प्रभावित करते हैं, और अलग तनावकारक कुछ भिन्न ढर्रे बना सकते हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
जीवन-घटना पैमानों के आधार पर तनाव के आकलन की अवधारणा और सीमाएँ लिखिए।
आदर्श उत्तर
Holmes और Rahe (1967) ने जीवन-घटनाओं को पुनः-समायोजन के अनुसार संख्यात्मक भार देने वाला पैमाना बनाया। भारत के लिए सिंह, कौर और कौर की प्रश्नावली में इक्यावन जीवन-परिवर्तन हैं, और व्यक्ति का अंक पिछले एक वर्ष की घटनाओं के भारित योग से बनता है। सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों तरह की घटनाएँ गिनी जाती हैं। सीमा यह है कि घटनाओं और किसी बीमारी के बीच सहसंबंध कम पाया गया है, कारण-परिणाम की दिशा अस्पष्ट है, और घटना का असर आयु, आवृत्ति, अवधि और सामाजिक सहारे से बदलता है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "व्यावसायिक तनाव के स्रोत और उसके प्रभाव समझाइए।" पहली पंक्ति में NCERT या NIOSH की परिभाषा लिखें। (5 अंक में वर्गीकरण और एक उदाहरण; 2 अंक में परिभाषा और दो-तीन स्रोत।)
मुख्य भाग
- स्रोत: जीवन-घटनाएँ, दैनिक झंझट, आघातकारी घटनाएँ; और नौकरी में कार्यभार, भूमिका, नियंत्रण, करियर, परिवेश
- प्रतिक्रिया: GAS के तीन चरण
- आकलन: जीवन-घटना पैमाना और उसकी सीमाएँ; सीखी हुई असहायता का उल्लेख
निष्कर्ष
निष्कर्ष: तनाव व्यक्ति और कार्य-परिस्थिति की अंतःक्रिया है, इसलिए समाधान में संगठन और व्यक्ति, दोनों की भूमिका है।
अतिरिक्त मूल्य
- एक प्रशासनिक उदाहरण (चुनाव और आपदा की दोहरी ड्यूटी)
- GAS की एक आलोचना
- NIOSH का 'चुनौती बनाम तनाव' अंतर
त्वरित पुनरावृत्ति
- तनाव: माँग के प्रति प्रतिक्रिया, जो संतुलन बिगाड़े और सामना करने की क्षमता से अधिक हो (NCERT; सेली: अविशिष्ट प्रतिक्रिया)
- eustress बनाम distress; stressor बनाम strain
- लेज़ारस: प्राथमिक (हानि, ख़तरा, चुनौती) और द्वितीयक (संसाधन) मूल्यांकन
- स्रोत (NCERT): जीवन-घटनाएँ, दैनिक झंझट, आघातकारी घटनाएँ; प्रकार: शारीरिक-पर्यावरणीय, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक
- मनोवैज्ञानिक स्रोत: कुंठा, द्वंद्व, आंतरिक और सामाजिक दबाव
- NIOSH की छह श्रेणियाँ: कार्य का ढाँचा, प्रबंधन-शैली, पारस्परिक संबंध, भूमिकाएँ, करियर, परिवेश
- GAS (सेली, 1936 और 1946): चेतावनी, प्रतिरोध, थकावट; आलोचना: मनोवैज्ञानिक कारकों की सीमित भूमिका
- SRRS: Holmes और Rahe (1967); भारतीय पैमाना: सिंह, कौर और कौर, इक्यावन घटनाएँ
- जीवन-घटना और रोग का सहसंबंध कम; असर व्यक्ति के अनुसार बदलता है
- सीखी हुई असहायता: Seligman और Maier (1967); 2016 में निष्क्रियता को स्वाभाविक और नियंत्रण को सीखा हुआ बताया गया
- प्रशासनिक तनाव: कार्यभार, भूमिका-द्वंद्व, नियंत्रण, स्थानांतरण, परिवेश, पूर्णता की अपेक्षा
याद रखने योग्य शब्द
- तनावकारक
- GAS
- जीवन-घटना पैमाना
- सीखी हुई असहायता
- NIOSH