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पेपर III · इकाई III · भाग क (व्यवहार)

तनाव से सामना: समस्या-केंद्रित और संवेग-केंद्रित शैलियाँ, तनाव-प्रबंधन और रक्षा-तंत्र

लेज़ारस-फ़ॉक्मैन के सामना-प्रकार, Endler-Parker की तीन युक्तियाँ, तनाव-प्रबंधन की तकनीकें, जीवन-कौशल, सामाजिक सहारा और प्रतिगमन-उदात्तीकरण; तीनों पिछले प्रश्न हल सहित।

  • सामना
  • समस्या-केंद्रित
  • संवेग-केंद्रित
  • तनाव-प्रबंधन
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (व्यवहार): "Burnout, stress and coping at workplace: occupational stress; sources and coping styles; personality and stress; gender issues at workplace." इस पृष्ठ पर तनाव से निपटने की शैलियाँ हैं: समस्या-केंद्रित और संवेग-केंद्रित सामना, Endler और Parker की तीन युक्तियाँ, तनाव-प्रबंधन की तकनीकें, जीवन-कौशल, सामाजिक सहारा और प्रतिगमन तथा उदात्तीकरण जैसे रक्षा-तंत्र। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है; यह किसी व्यक्ति के लिए उपचार या चिकित्सकीय सलाह नहीं है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • तीन प्रश्न आए हैं: 2021 में तनाव प्रबंधन की युक्तियाँ (5 अंक), 2023 में संवेग-केंद्रित बनाम समस्या-केंद्रित सामना (5 अंक) और 2024 में प्रतिगमन बनाम उदात्तीकरण (2 अंक)। यानी 2021, 2023 और 2024 के तीन पेपरों में लगातार प्रश्न।
  • 5 अंक के उत्तर में दो चीज़ें अंक दिलाती हैं: लेज़ारस और फ़ॉक्मैन का दो-भाग वर्गीकरण और हर भाग का एक प्रशासनिक उदाहरण। तनाव-प्रबंधन वाले प्रश्न में NCERT की तकनीकों की सूची और जीवन-कौशल जोड़ें।
  • 2024 का प्रश्न रक्षा-तंत्र (defence mechanisms) से है। उसे इसी पृष्ठ में रखा गया है क्योंकि वह तनाव और चिंता से निपटने के मन के तरीक़ों से जुड़ा है।

पहले सरल भाषा में

नाव में पानी भरने लगे तो दो तरह से बचा जा सकता है। एक, रिसाव ढूँढकर बंद करें और बाल्टी से पानी निकालें; यह समस्या पर सीधा काम है। दूसरा, घबराहट सँभालें, गहरी साँस लें, साथियों से हिम्मत लें; यह भावना पर काम है। समझदार नाविक दोनों करता है, पर जब रिसाव बंद हो सकता हो तो पहले उसे बंद करता है।

तहसीलदार के सामने जब किसी जटिल भूमि-विवाद की तारीख़ पर भीड़ जमा हो जाए, तब अभिलेख जुटाना, पक्षों की सूची बनाना और सुनवाई का क्रम तय करना समस्या-केंद्रित काम है। अपनी घबराहट को शांत रखना, वरिष्ठ से बात करके तसल्ली लेना और बीच में थोड़ा रुककर साँस लेना भावना-केंद्रित काम है। दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं, पूरक हैं।

सामना (coping) क्या है

NCERT के अनुसार हाल के वर्षों में यह धारणा बनी है कि मनोवैज्ञानिक कल्याण, सामाजिक कार्य-कुशलता और स्वास्थ्य को तनाव का अनुभव उतना प्रभावित नहीं करता जितना यह कि व्यक्ति उसका सामना कैसे करता है। सामना तनावपूर्ण परिस्थितियों के प्रति एक गतिशील, परिस्थिति-विशेष प्रतिक्रिया है, ठोस प्रतिक्रियाओं का समूह जो समस्या सुलझाने और तनाव घटाने के लिए की जाती हैं।

परिभाषा (उत्तर में लिखने योग्य): लेज़ारस और फ़ॉक्मैन (Lazarus और Folkman) ने सामना को व्यक्ति का गुण नहीं बल्कि गतिशील प्रक्रिया माना है। NCERT के शब्दों में सामना उन निरंतर बदलते संज्ञानात्मक और व्यवहारगत प्रयासों को कहते हैं जो तनावपूर्ण लेन-देन से बनी आंतरिक या बाहरी माँगों पर क़ाबू पाने, उन्हें कम करने या सहन करने के लिए किए जाते हैं। इसके द्वारा व्यक्ति समस्या को सँभाल या बदल सकता है और उस पर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया को भी नियमित करता है।

इस दो-भाग की समझ का मूल लेज़ारस और फ़ॉक्मैन की पुस्तक 'Stress, Appraisal, and Coping' (1984) है; उससे पहले फ़ॉक्मैन और लेज़ारस (1980) ने 'An analysis of coping in a middle-aged community sample' में सामना का अध्ययन प्रकाशित किया था (Journal of Health and Social Behavior 21(3):219-239)।

समस्या-केंद्रित बनाम संवेग-केंद्रित सामना

समस्या-केंद्रित (problem-focused)

लक्ष्यसमस्या पर सीधा प्रहार: सूचना जुटाना, घटना को बदलना, विश्वास और प्रतिबद्धताओं को बदलना

प्रभाव (NCERT)व्यक्ति की जागरूकता, ज्ञान और व्यवहारगत-संज्ञानात्मक विकल्पों का दायरा बढ़ता है; घटना का ख़तरा-मान कम हो सकता है

NCERT का उदाहरण"मैंने कार्य-योजना बनाई और उसका पालन किया"

प्रशासनिक उदाहरण (विश्लेषण)लंबित मामलों की सूची बनाकर प्राथमिकता तय करना; कर्मचारी बढ़ाने का प्रस्ताव भेजना

कब अधिक उपयोगी (विश्लेषण)जब स्थिति में कुछ बदला जा सकता हो

संवेग-केंद्रित (emotion-focused)

लक्ष्यभावनात्मक अव्यवस्था की मात्रा सीमित करना; घटना बदलने का प्रयास न्यूनतम

प्रभाव (NCERT)मनोवैज्ञानिक परिवर्तन के ज़रिए भावनात्मक झटके को घटाना

NCERT का उदाहरण"मैंने कुछ ऐसा किया जिससे मन का बोझ निकल जाए"

प्रशासनिक उदाहरण (विश्लेषण)कठिन जन-सुनवाई के बाद वरिष्ठ या सहकर्मी से बात कर मन हल्का करना

कब अधिक उपयोगी (विश्लेषण)जब स्थिति बदली नहीं जा सकती, जैसे किसी आपदा के बाद की क्षति

NCERT कक्षा 12, अध्याय 3 के अनुसार; अंतिम दो पंक्तियाँ विश्लेषण हैं।

दोनों साथ क्यों ज़रूरी हैं

NCERT का स्पष्ट कथन है कि तनावपूर्ण परिस्थितियों में समस्या-केंद्रित और संवेग-केंद्रित, दोनों तरह का सामना आवश्यक है, पर शोध बताते हैं कि लोग सामान्यतः पहले वाले का उपयोग अधिक करते हैं। इसलिए उत्तर में दोनों की तुलना के साथ यह निष्कर्ष लिखना ठीक रहता है कि अधिकतर वास्तविक स्थितियों में दोनों का संतुलित मेल काम आता है।

NCERT यह भी रेखांकित करती है कि सामना को बहुत हद तक व्यक्ति की गहरी जमी मान्यताएँ प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए ट्रैफ़िक जाम में ग़ुस्सा इसलिए आता है कि व्यक्ति मानता है कि ट्रैफ़िक को तेज़ चलना 'चाहिए'। इसलिए तनाव सँभालने के लिए अपने सोचने के ढंग का पुनर्मूल्यांकन और सामना की नई युक्तियाँ सीखना ज़रूरी हो जाता है।

तनाव के सामना करने के तरीक़े व्यक्तियों में स्थायी रूप से अलग-अलग भी दिखते हैं। NCERT के अनुसार लोग तनावपूर्ण परिस्थितियों को सँभालने की अपनी शैली में सुसंगत व्यक्तिगत अंतर दिखाते हैं, जिनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह की गतिविधियाँ आती हैं। इन्हीं शैलियों का सबसे चर्चित वर्गीकरण Endler और Parker का है।

Endler और Parker की तीन युक्तियाँ

युक्तिक्या करना होता है (NCERT)NCERT का उदाहरण
कार्य-उन्मुख (task-oriented)तनावपूर्ण स्थिति और वैकल्पिक कार्य-विकल्पों तथा उनके संभावित परिणामों के बारे में सूचना जुटाना; प्राथमिकताएँ तय करना और स्थिति से सीधे निपटने के लिए कार्य करना"अपना समय बेहतर बाँटूँगा" या "सोचूँगा कि पहले ऐसी समस्या कैसे सुलझाई थी"
संवेग-उन्मुख (emotion-oriented)आशा बनाए रखना और भावनाओं को नियंत्रित करना; क्रोध और कुंठा निकालना, या यह मान लेना कि कुछ भी नहीं बदला जा सकता"ख़ुद से कहूँगा कि यह मेरे साथ नहीं हो रहा" या "चिंता करूँगा कि अब क्या करूँ"
परिहार-उन्मुख (avoidance-oriented)स्थिति की गंभीरता को नकारना या कम आँकना; तनावपूर्ण विचारों को जान-बूझकर दबाना और ख़ुद को सुरक्षात्मक विचारों से बदलनाटीवी देखना, किसी मित्र को फ़ोन करना, या लोगों के बीच रहने की कोशिश करना

NCERT कक्षा 12, अध्याय 3 के अनुसार (Endler और Parker की तीन युक्तियाँ)।

तनाव-प्रबंधन की युक्तियाँ (2021 का प्रश्न)

NCERT तनाव-प्रबंधन की कई तकनीकें गिनाती है। ये उसके वर्णन हैं और शैक्षिक जानकारी के लिए हैं; किसी व्यक्ति में जारी या गंभीर कष्ट होने पर योग्य पेशेवर की सलाह लेनी चाहिए। उत्तर में हर तकनीक का नाम और एक पंक्ति का सार देना पर्याप्त रहता है।

शिथिलीकरण (relaxation) एक सक्रिय कौशल है जिसमें प्रायः शरीर के निचले हिस्से से शुरू कर चेहरे की पेशियों तक क्रमशः शिथिलता लाई जाती है और गहरी साँस का उपयोग किया जाता है। ध्यान-प्रक्रियाओं (meditation) में योग-पद्धति के अंतर्गत ध्यान को पुनः केंद्रित करने की सीखी हुई तकनीकों का क्रम होता है। जैव-प्रतिपुष्टि (biofeedback) में शरीर की शारीरिक गतिविधि, जैसे हृदय-गति, का फ़ीडबैक देकर तनाव के शारीरिक पक्ष को निगरानी में रखा जाता है; इसके तीन चरण हैं: किसी शारीरिक प्रतिक्रिया की जागरूकता, शांत स्थिति में उसे नियंत्रित करना सीखना, और फिर दैनिक जीवन में वही नियंत्रण लाना।

सृजनात्मक कल्पना (creative visualisation) में कल्पना और बिंबों का उपयोग होता है; इससे पहले यथार्थवादी लक्ष्य तय करना चाहिए। संज्ञानात्मक-व्यवहारगत तकनीकों में Meichenbaum की तनाव-प्रतिरक्षण (stress inoculation) विधि है, जिसका सार नकारात्मक और अतार्किक विचारों को सकारात्मक और तार्किक विचारों से बदलना है; इसके तीन चरण हैं: आकलन, तनाव-न्यूनीकरण तकनीकों का सीखना, और उपयोग तथा अनुवर्तन। व्यायाम शारीरिक उत्तेजना के लिए सक्रिय निकास देता है; NCERT के अनुसार तैरना, चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना आदि तनाव घटाने में सहायक हैं और इन्हें सप्ताह में कम से कम चार बार, एक बार में तीस मिनट, गर्म होने, व्यायाम और ठंडा होने के चरणों के साथ करने का उल्लेख है।

तनाव-प्रबंधन की युक्तियाँ: एक नज़र में

युक्तिसार (NCERT)परीक्षा में एक पंक्ति
शिथिलीकरणक्रमिक पेशी-शिथिलता के साथ गहरी साँससक्रिय कौशल
ध्यान (meditation)योगिक पद्धति; ध्यान को पुनः केंद्रित करने की सीखी हुई तकनीकेंध्यान की पुनःकेंद्रित प्रक्रिया
जैव-प्रतिपुष्टिशारीरिक गतिविधि का फ़ीडबैक; तीन चरणशरीर की निगरानी और नियंत्रण का प्रशिक्षण
सृजनात्मक कल्पनाबिंब और कल्पना; पहले यथार्थवादी लक्ष्यकल्पना की शक्ति का रचनात्मक उपयोग
संज्ञानात्मक-व्यवहारगत (Meichenbaum)अतार्किक विचारों को तार्किक से बदलना; आकलन, तनाव-न्यूनीकरण, उपयोगतनाव-प्रतिरक्षण प्रशिक्षण
व्यायामशारीरिक उत्तेजना को सक्रिय निकास; नियमित, चरणबद्धशरीर के ज़रिए तनाव का निकास

NCERT कक्षा 12, अध्याय 3 के अनुसार।

जीवन-कौशल और सामाजिक सहारा

NCERT जीवन-कौशल (life skills) को अनुकूली और सकारात्मक व्यवहार की ऐसी योग्यताएँ बताती है जिनसे व्यक्ति रोज़मर्रा की माँगों और चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटता है। इन्हें सीखा और सुधारा जा सकता है। NCERT में इनमें दृढ़ता (assertiveness), समय-प्रबंधन, तार्किक चिंतन, संबंध-सुधार, स्व-देखभाल और पूर्णतावाद या टालमटोल जैसी अनुपयोगी आदतों पर क़ाबू पाना शामिल हैं। दृढ़ता का अर्थ अपनी भावनाओं, ज़रूरतों और विचारों को स्पष्ट और आत्मविश्वास से कहना है, जिसमें किसी अनुरोध को 'ना' कहना भी आता है। समय-प्रबंधन का केंद्रीय सिद्धांत है कि समय उन चीज़ों पर लगे जिन्हें व्यक्ति महत्त्व देता है या जो लक्ष्य तक ले जाती हैं, और काम सौंपना सीखना दबाव घटाता है।

NCERT के अनुसार सामाजिक सहारा (social support) उन लोगों की उपस्थिति और उपलब्धता है जिन पर भरोसा किया जा सके और जो जताएँ कि वे उसकी परवाह करते हैं। सहारे के तीन रूप बताए गए हैं: मूर्त सहायता (धन, वस्तु, सेवा), सूचनात्मक सहायता (जैसे परीक्षा देने वाले को पहले यह परीक्षा दे चुके मित्र से जानकारी मिलना) और भावनात्मक सहायता (यह आश्वासन कि व्यक्ति प्रिय और मूल्यवान है)। NCERT के अनुसार प्रत्यक्ष (perceived) सहारे की गुणवत्ता कल्याण से जुड़ी है, जबकि सामाजिक नेटवर्क की मात्रा नहीं, क्योंकि बड़े नेटवर्क को बनाए रखने में समय और श्रम लगता है।

संगठन का स्तर भी मायने रखता है। NIOSH के अनुसार सहयोगी मित्रों और सहकर्मियों का नेटवर्क, कार्य और निजी जीवन का संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण कार्य-परिस्थितियों के तनाव का असर घटाने वाले कारक हैं। WHO का तथ्य-पत्र भी संगठनात्मक हस्तक्षेपों, प्रबंधकों के प्रशिक्षण और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की बात करता है। यहाँ से सीधी बात यह है कि सामना केवल व्यक्ति का दायित्व नहीं है, संगठन की भूमिका भी है।

रक्षा-तंत्र: प्रतिगमन बनाम उदात्तीकरण (2024 का प्रश्न)

2024 का प्रश्न 'Regression vs sublimation' है। ये फ्रायड की मनोविश्लेषणात्मक परंपरा के रक्षा-तंत्र (defence mechanisms) हैं। NCERT (कक्षा 12, अध्याय 2) के अनुसार रक्षा-तंत्र अहं (ego) का वह तरीक़ा है जिससे वह चिंता से उपजी असुविधाजनक भावनाओं से निपटता है, और इनका उपयोग करने वाले लोग प्रायः इसके प्रति अनजान रहते हैं। यानी ये अचेतन ढंग से चलते हैं, जबकि समस्या-केंद्रित सामना सचेत प्रयास है। यह अंतर विश्लेषण के रूप में उत्तर में उपयोगी है।

प्रतिगमन (regression): NCERT के अनुसार यह तब होता है जब किसी अवस्था पर समस्याओं का समाधान पर्याप्त न हो; तब व्यक्ति विकास की किसी कम परिपक्व अवस्था के विशिष्ट व्यवहार दिखाता है, यानी पीछे की अवस्था में लौटता है। उदाहरण (विश्लेषण): बहुत दबाव में कोई वयस्क बच्चों जैसा हठ या रोना-धोना दिखाए।

उदात्तीकरण (sublimation): रक्षा-तंत्र रेटिंग (DMRS) की रूपरेखा में, जिसे Di Giuseppe और Perry (2021) ने प्रस्तुत किया, उदात्तीकरण वह है जिसमें व्यक्ति भावनात्मक द्वंद्वों या आंतरिक-बाहरी तनावकारकों से निपटने के लिए संभावित रूप से अनुपयुक्त भावनाओं या आवेगों को रोकने की बजाय उन्हें समाज-स्वीकृत व्यवहार में बदल देता है। उनके अनुसार इसमें मूल आवेग को कुछ अभिव्यक्ति मिलती है और परिणामी कार्य या उत्पाद को सामाजिक स्वीकृति या पुरस्कार भी मिल सकता है। उदाहरण में शत्रुतापूर्ण-प्रतियोगी आवेग को प्रतिस्पर्धी खेल या कार्य में बदलना बताया गया है। इस रूपरेखा में उदात्तीकरण को उच्च-अनुकूली (high-adaptive) स्तर की सुरक्षा में रखा गया है।

दोनों का सार-अंतर: प्रतिगमन में व्यक्ति पीछे लौटता है; उदात्तीकरण में आवेग आगे के रचनात्मक, सामाजिक रूप से मान्य रास्ते पर मोड़ दिया जाता है। प्रशासनिक उदाहरण (विश्लेषण): किसी कठिन सुनवाई के बाद क्रोध को शांत करके नीति-टिप्पणी लिखना उदात्तीकरण का उदाहरण हो सकता है।

प्रतिगमन और उदात्तीकरण की तुलना

प्रतिगमन (regression)

अर्थकम परिपक्व विकास-अवस्था के व्यवहार पर लौटना (NCERT)

दिशापीछे की ओर

परिणामसमस्या का समाधान नहीं; व्यवहार अपरिपक्व दिखता है

उदाहरण (विश्लेषण)दबाव में वयस्क का बचकाना हठ

स्तर (DMRS)इस रूपरेखा में स्तर यहाँ नहीं बताया गया

उदात्तीकरण (sublimation)

अर्थआवेग या भावना को समाज-मान्य, रचनात्मक व्यवहार में बदलना (DMRS रूपरेखा)

दिशारूपांतरण; आगे की ओर

परिणामआवेग को अभिव्यक्ति के साथ सामाजिक स्वीकृति या पुरस्कार संभव

उदाहरण (विश्लेषण)क्रोध या प्रतिस्पर्धा को खेल या मेहनत भरे काम में लगाना

स्तर (DMRS)उच्च-अनुकूली

NCERT कक्षा 12 अध्याय 2 और Di Giuseppe तथा Perry (2021) के आधार पर; उदाहरण विश्लेषण हैं।

सामना की शैलियाँ: एक नज़र

सामना

लेज़ारस और फ़ॉक्मैन

  • समस्या-केंद्रित: सूचना, योजना, बदलाव
  • संवेग-केंद्रित: भावना का नियमन
  • दोनों आवश्यक; समस्या-केंद्रित अधिक प्रचलित

Endler और Parker

  • कार्य-उन्मुख
  • संवेग-उन्मुख
  • परिहार-उन्मुख

तनाव-प्रबंधन (NCERT)

  • शिथिलीकरण
  • ध्यान
  • जैव-प्रतिपुष्टि
  • कल्पना
  • तनाव-प्रतिरक्षण
  • व्यायाम

सहारा और जीवन-कौशल

  • मूर्त, सूचनात्मक, भावनात्मक सहारा
  • दृढ़ता, समय-प्रबंधन, तार्किक चिंतन

तनाव से सामना तक: प्रवाह

  1. तनावकारक

    घटना या माँग

  2. मूल्यांकन

    प्राथमिक और द्वितीयक (लेज़ारस)

  3. सामना

    समस्या-केंद्रित और संवेग-केंद्रित प्रयास

  4. संसाधन

    सामाजिक सहारा, जीवन-कौशल, संगठन का सहयोग

  5. परिणाम

    तनाव का कम होना या बने रहना

NCERT की समझ के आधार पर बनाया गया सार-प्रवाह।

मुख्य तथ्य

सामना की NCERT परिभाषा
तनावपूर्ण लेन-देन से बनी माँगों पर क़ाबू पाने, घटाने या सहने के निरंतर बदलते संज्ञानात्मक-व्यवहारगत प्रयास (कक्षा 12, अध्याय 3)
दो प्रकार
समस्या-केंद्रित और संवेग-केंद्रित; शोध के अनुसार लोग पहले का उपयोग अधिक करते हैं (NCERT)
तीन युक्तियाँ
Endler और Parker: कार्य-उन्मुख, संवेग-उन्मुख, परिहार-उन्मुख (NCERT)
लेज़ारस और फ़ॉक्मैन: मूल पुस्तक
Stress, Appraisal, and Coping (1984, Springer)
फ़ॉक्मैन और लेज़ारस, 1980
An analysis of coping in a middle-aged community sample, J Health Soc Behav 21(3):219-239
तनाव-प्रतिरक्षण
Meichenbaum की विधि; तीन चरण: आकलन, तनाव-न्यूनीकरण तकनीकें, उपयोग और अनुवर्तन (NCERT)
प्रतिगमन (NCERT)
कम परिपक्व अवस्था के व्यवहार पर लौटना (कक्षा 12, अध्याय 2)
उदात्तीकरण (DMRS)
आवेग को समाज-स्वीकृत व्यवहार में बदलना; उच्च-अनुकूली स्तर (Di Giuseppe और Perry, 2021)
संगठन और सामना
सहयोगी नेटवर्क और कार्य-परिवार संतुलन तनाव का असर घटाने वाले कारक (NIOSH 99-101)
WHO की दिशा
संगठनात्मक हस्तक्षेप, प्रबंधक-प्रशिक्षण, कर्मचारी-प्रशिक्षण (तथ्य-पत्र, पृष्ठ-तिथि 15 सितंबर 2026)
अंतिम जाँच
2 अक्तूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • समस्या-केंद्रित और संवेग-केंद्रित को 'अच्छा' और 'बुरा' सामना कह देना। NCERT के अनुसार दोनों आवश्यक हैं।
  • परिहार को समस्या-केंद्रित समझ लेना। परिहार में स्थिति को नकारा या दबाया जाता है, उसका सामना नहीं होता।
  • तनाव-प्रबंधन की तकनीकों को किसी के लिए इलाज की सलाह की तरह लिखना। उत्तर में केवल तकनीकों का वर्णन रखें।
  • प्रतिगमन और उदात्तीकरण को एक ही बता देना। एक पीछे की ओर वापसी है, दूसरा रचनात्मक रूपांतरण।
  • रक्षा-तंत्र को सचेत सामना की तरह लिखना। NCERT के अनुसार रक्षा-तंत्र का उपयोग करने वाले अक्सर इससे अनजान होते हैं।