नेतृत्व की शैलियाँ (Leadership Styles): निरंकुश, लोकतांत्रिक, स्वतंत्र-छोड़ू और परिस्थिति के अनुसार चयन
लेविन की तीन शैलियाँ, पथ-लक्ष्य की चार, व्रूम-येटन की पाँच निर्णय-शैलियाँ और सरकारी स्थितियों में शैली-चयन।
- लेविन
- निरंकुश
- लोकतांत्रिक
- पथ-लक्ष्य
- व्रूम-येटन
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (Behavior): "Leadership profiles: theories, types and styles; challenges and effectiveness at workplace; leaders of tomorrow: opportunities and challenges." इस पृष्ठ पर 'styles' यानी नेता के काम करने और निर्णय लेने के तरीके हैं। सिद्धांतों का क्रम पिछले पृष्ठ में और प्रकार (करिश्माई आदि) अलग पृष्ठ में हैं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2013 से 2024 के पेपरों (2013 से 2024 के छह पेपरों) में नेतृत्व की शैली पर अलग से कोई प्रश्न नहीं मिलता। फिर भी सिलेबस में 'styles' शब्द स्पष्ट लिखा है, और पथ-लक्ष्य जैसे पूछे जा चुके प्रश्नों में शैलियाँ ही उत्तर हैं।
- शैलियों वाले प्रश्न 'तुलना करें' या 'किसी सरकारी परिस्थिति में कौन-सी शैली उपयुक्त' रूप में आ सकते हैं। इसलिए तीन आधार पक्के रखें: लेविन की तीन शैलियाँ, पथ-लक्ष्य की चार शैलियाँ और भागीदारी की पाँच निर्णय-शैलियाँ।
- हर शैली के साथ एक शर्त याद रखें कि वह कब कारगर है। 'कोई एक सर्वश्रेष्ठ शैली नहीं' वाला निष्कर्ष उत्तर को परिपक्व बनाता है।
शैली का अर्थ और उसे समझने का आसान तरीका
एक कल्पित दृश्य सोचिए। किसी ज़िले की समीक्षा बैठक में कलेक्टर तीन अलग तरह से बैठक चला सकता है। पहले तरीके में वह खुद सब तय करता है और आदेश सुनाकर उठ जाता है। दूसरे में वह हर विभाग से सुझाव माँगता है, चर्चा कराता है और फिर निर्णय लेता है, या सबकी सहमति से निर्णय होता है। तीसरे में वह कह देता है कि 'आप लोग आपस में तय कर लें', और बैठक में दखल नहीं देता। यही नेतृत्व की तीन शैलियाँ हैं। शैली (style) नेता के व्यवहार का वह स्थायी ढर्रा है जिससे वह निर्णय लेता, लोगों से संवाद करता और काम करवाता है।
प्रकार (type) और शैली में सूक्ष्म अंतर है। 'करिश्माई' या 'परिवर्तनकारी' प्रकार बताते हैं कि प्रभाव किस स्रोत से बनता है। शैली बताती है कि नेता रोज़ के काम में कैसे व्यवहार करता है, खासकर निर्णय में अनुयायियों को कितनी जगह देता है। पाठ्यपुस्तकों में दोनों शब्द एक-दूसरे में घुले मिलते हैं, इसलिए उत्तर में शब्द की परिभाषा पहली पंक्ति में दे देना ठीक रहता है।
निर्णय के आधार पर तीन शैलियाँ: निरंकुश, लोकतांत्रिक, स्वतंत्र-छोड़ू
UGC e-PG पाठशाला के अनुसार कर्ट लेविन और उनके साथियों ने नेतृत्व की तीन बुनियादी शैलियाँ बताईं: निरंकुश या अधिकारवादी (autocratic), लोकतांत्रिक (democratic) और स्वतंत्र-छोड़ू या हस्तक्षेप-रहित (laissez-faire)। इनका मूल अध्ययन 1939 में Journal of Social Psychology में छपा (लेविन, लिपिट और व्हाइट)। Bauer और Erdogan इन्हीं तीन को निर्णय लेने की शैलियों के रूप में लेते हैं: निर्णय नेता अकेले लेता है, या नेता और कर्मचारी मिलकर लेते हैं, या नेता निर्णय कर्मचारियों पर छोड़ देता है।
निरंकुश नेता कठोर नियमों से कार्य-वातावरण नियंत्रित करता है; अनुयायियों के पास निर्देश मानने के सिवा विवेक का अवसर बहुत कम रहता है। लोकतांत्रिक नेता सहयोगी और संवेदनशील होता है और अनुयायियों की सहमति से निर्णय लेना पसंद करता है। स्वतंत्र-छोड़ू नेता अपने अधिकार और ज़िम्मेदारी का लगभग उपयोग ही नहीं करता, जिससे भूमिकाओं को लेकर अस्पष्टता और टकराव की स्थिति बन सकती है।
शोध का सार यह है कि कोई एक शैली हर जगह सर्वश्रेष्ठ नहीं निकली। जब नेता सहभागी या लोकतांत्रिक शैली अपनाते हैं तो कर्मचारियों का संतोष बढ़ता है, पर निर्णय की गुणवत्ता या उत्पादकता पर असर अपेक्षाकृत कमज़ोर मिला। वैज्ञानिकों वाले अनुसंधान-संगठन में लोकतांत्रिक शैली सबसे अधिक पसंद की गई (बॉमगार्टल, 1957), जबकि Bauer और Erdogan के अनुसार बड़े समूहों में, जहाँ सदस्यों के आपसी संपर्क के अवसर कम थे, निरंकुश निर्णय अधिक पसंद किए गए। स्वतंत्र-छोड़ू शैली का रिकॉर्ड सबसे समस्याग्रस्त है: Judge और Piccolo (2004) की समीक्षा में इसका संबंध नेता के प्रति कर्मचारियों के कम संतोष और कम प्रभावशीलता से मिला।
लेविन की तीन शैलियाँ: तुलना
| बिंदु | निरंकुश | लोकतांत्रिक | स्वतंत्र-छोड़ू |
|---|---|---|---|
| निर्णय कौन लेता है | नेता अकेले | नेता और कर्मचारी साथ | कर्मचारी स्वयं, नेता न्यूनतम मार्गदर्शन |
| अनुयायियों की भूमिका | निर्देश मानना | विचार देना, निर्णय में भागीदारी | पूरी स्वायत्तता |
| संभावित लाभ | तेज़ निर्णय, संकट में स्पष्टता | संतोष, प्रतिबद्धता, बेहतर सुझाव | योग्य और स्वप्रेरित टीम को स्वतंत्रता |
| संभावित हानि | असंतोष, पहल की कमी | धीमा निर्णय | अस्पष्टता, टकराव, कम संतोष |
| कब उपयुक्त (विश्लेषण) | आपदा या आपातकाल, अनुभवहीन टीम | योग्य टीम, जटिल निर्णय जिसमें स्वीकृति चाहिए | अत्यंत योग्य विशेषज्ञ टीम, सीमाएँ साफ़ हों |
आधार: UGC e-PG पाठशाला और Bauer-Erdogan (Saylor अभिलेख)। अंतिम पंक्ति समझाने के लिए तैयार किया गया विश्लेषण है।
कार्य-केंद्रित और संबंध-केंद्रित शैलियाँ
ओहायो स्टेट और मिशिगन के अध्ययनों में व्यवहार के दो आयाम मिले थे: कार्य-उन्मुख (संरचना-प्रवर्तन या कार्य-केंद्रित) और संबंध-उन्मुख (सहृदयता या कर्मचारी-केंद्रित)। नेतृत्व ग्रिड में ब्लेक और माउटन इन्हीं दोनों को 1 से 9 के पैमाने पर रखते हैं और पाँच शैलियाँ गिनाते हैं (निष्क्रिय, अधिकार-अनुपालन, कंट्री क्लब, संगठन-आदमी, टीम प्रबंधन)। इन अध्ययनों का विस्तार नेतृत्व के सिद्धांतों वाले पृष्ठ में है। यहाँ इतना याद रखें कि संबंध-उन्मुख शैली से संतोष और कार्य-उन्मुख शैली से उत्पादकता कुछ अधिक जुड़ी मिली, और कार्य-उन्मुखता बहुत अधिक हो तो कर्मचारियों में थकान (बर्नआउट) का जोखिम बढ़ सकता है।
UGC e-PG पाठशाला का अन्य अध्याय भी शैलियों का एक वर्गीकरण देता है: परोपकारी या पितृसुलभ (benevolent), आलोचक या कार्य-केंद्रित (critical) और विकासमूलक (developmental)। परोपकारी नेता पिता-तुल्य होता है; वह रिश्तों को महत्त्व देता है, पर कभी-कभी इतना कि कार्य का नुकसान हो जाए। आलोचक नेता मानता है कि लोग स्वभाव से आलसी होते हैं और बिना कड़ी निगरानी के काम से बचते हैं, यानी वह मैकग्रेगर के थ्योरी X के अनुरूप सोचता है। विकासमूलक नेता लोगों की क्षमता में भरोसा रखता है (थ्योरी Y), उन्हें शिक्षित कर स्वतंत्र बनाता है और अपनी सफलता इसी में मानता है कि वह खुद अपरिहार्य न रहे। थ्योरी X और Y की विस्तृत चर्चा अभिप्रेरणा के पृष्ठ में है।
पथ-लक्ष्य की चार शैलियाँ और भागीदारी की पाँच निर्णय-शैलियाँ
पथ-लक्ष्य सिद्धांत में नेता की चार शैलियाँ हैं: निर्देशात्मक (भूमिका अस्पष्ट होने पर), सहयोगी (उबाऊ या तनावपूर्ण काम में), सहभागी (योग्य कर्मचारियों के साथ निर्णय में) और उपलब्धि-उन्मुख (उपलब्धि की चाह वाले योग्य कर्मचारियों के लिए)। हर्सी और ब्लैंचर्ड की चार शैलियाँ अनुयायी की तैयारी पर टिकी हैं: निर्देशन या 'बताना', प्रशिक्षण या 'समझाना', सहभागिता, और प्रत्यायोजन। विवरण पिछले पृष्ठ पर देखें।
व्रूम और येटन का आदर्शात्मक (normative) मॉडल एक निर्णय-वृक्ष की तरह काम करता है जो बताता है कि नेता को निर्णय में अनुयायियों को कितना शामिल करना चाहिए। Bauer और Erdogan के अनुसार नेता निर्णय के महत्त्व, कर्मचारियों की प्रतिबद्धता की आवश्यकता, अपनी विशेषज्ञता, अकेले निर्णय लेने पर स्वीकृति की संभावना, लक्ष्यों की समानता, समूह की विशेषज्ञता और टीम की क्षमता जैसे प्रश्नों के उत्तर देकर वृक्ष पर चलता है। इससे पाँच शैलियों में से एक सुझाई जाती है: निर्णय स्वयं लेना (decide), व्यक्तियों से परामर्श के बाद निर्णय (consult individually), समूह से परामर्श के बाद निर्णय (consult as a group), सुगमकर्ता बनकर निर्णय की सीमाएँ तय करना (facilitate) और निर्णय टीम पर छोड़ना (delegate)। UGC e-PG पाठशाला भी यही पाँच शैलियाँ देती है। शोध-परिणाम इस मॉडल की वैधता का समर्थन करते हैं: जो नेता सुझाई गई शैली अपनाते हैं, वे औसतन बेहतर निर्णय लेते हैं।
किस स्थिति में कौन-सी शैली (विश्लेषण)
| स्थिति | उपयुक्त शैली | आधार |
|---|---|---|
| आपदा या आपातकाल, भूमिकाएँ अस्पष्ट | निर्देशात्मक या निरंकुश | भूमिका की अस्पष्टता में स्पष्ट निर्देश (पथ-लक्ष्य) |
| नई भर्ती, अनुभव कम | निर्देशन, फिर प्रशिक्षण | अनुयायी की तैयारी कम (हर्सी-ब्लैंचर्ड) |
| अनुभवी विशेषज्ञ टीम, जटिल नीति-निर्णय | सहभागी या लोकतांत्रिक | योग्यता अधिक, स्वीकृति ज़रूरी |
| उबाऊ, दोहराव वाला, तनावपूर्ण काम | सहयोगी | काम की अप्रियता में समर्थन (पथ-लक्ष्य) |
| अत्यंत योग्य और स्वप्रेरित टीम | प्रत्यायोजन | योग्य और प्रतिबद्ध अनुयायी |
| उपलब्धि की चाह वाली योग्य टीम | उपलब्धि-उन्मुख | चुनौतीपूर्ण लक्ष्य से प्रेरणा |
तीनों सिद्धांतों की शर्तों से तैयार किया गया विश्लेषण; वास्तविक निर्णय में कई कारक एक साथ देखने पड़ते हैं।
अपनी शैली की पहचान: मान्यताएँ और स्थिति का निदान
शैली केवल चुनाव की बात नहीं, सोच की भी है। Bauer और Erdogan के अनुसार मैकग्रेगर (1960) का मत था कि प्रबंधक का व्यवहार इस पर टिका होता है कि वह कर्मचारियों के बारे में कौन-सी बुनियादी मान्यता रखता है। थ्योरी X वाला प्रबंधक मानता है कि कर्मचारी आलसी हैं, काम से बचेंगे और उन्हें नियंत्रण तथा दंड के सहारे चलाना पड़ेगा; इसलिए वह कठोर कार्य-वातावरण बनाता है और अधीनस्थों के हर काम की पूरी ज़िम्मेदारी अपने सिर लेता है। थ्योरी Y वाला प्रबंधक मानता है कि कर्मचारी आलसी नहीं हैं, काम का आनंद ले सकते हैं और संगठन के लक्ष्य के लिए प्रयास करेंगे; इसलिए वह स्वायत्तता देता है और सहयोगी भूमिका निभाता है। इस पुस्तक का सुझाव है कि शैली सुधारने का एक तरीका अपनी इन निहित मान्यताओं के प्रति सचेत होना और उनकी वैधता पर प्रश्न उठाना है।
UGC e-PG पाठशाला का अध्याय परिस्थिति-सिद्धांतों का सार इस प्रकार देता है: प्रभावी प्रबंधक पहले स्थिति का निदान करता है, फिर तय करता है कि कौन-सी शैली कारगर होगी, और अंत में यह देखता है कि क्या वह उस शैली को लागू कर सकता है। शैली पर असर डालने वाले तीन सामान्य कारक गिनाए गए हैं: अधीनस्थ संबंधी विचार (उनकी विशेषज्ञता, अनुभव, योग्यता और स्तर), पर्यवेक्षक संबंधी विचार (नेता का ऊपर के अधिकारियों पर प्रभाव और उनसे दृष्टिकोण की समानता) और कार्य संबंधी विचार (समय की तात्कालिकता, जोखिम, त्रुटि की सहनीय दर, तनाव, स्वायत्तता और अस्पष्टता)। अधिकतर परिस्थिति-सिद्धांतकार मानते हैं कि प्रभावी नेता कई शैलियों का दायरा विकसित करते हैं और उन्हें परिस्थिति के अनुसार बदलते हैं।
सरकारी संदर्भ में यह स्थिति-निदान रोज़मर्रा की बात है: नया पदस्थापित अधिकारी पहले अपने अधीनस्थों के अनुभव को पहचानता है, कार्य की तात्कालिकता देखता है, ऊपर के अधिकारियों से अपने संबंध समझता है और तब तय करता है कि किस काम में कितना निर्देश देना है और कितनी छूट। यह विश्लेषण है, पाठ्यपुस्तक का कथन नहीं।
शैली और संस्कृति: क्या शैली सार्वभौमिक है
Bauer और Erdogan बताते हैं कि नेतृत्व के अधिकांश सिद्धांत अमेरिकी संदर्भ में बने हैं और अनुसंधान का बड़ा हिस्सा पश्चिमी देशों में हुआ है। इसलिए अलग संस्कृतियों में शैलियों का असर अलग हो सकता है। 62 समाजों (societies) में 200 से अधिक शोधकर्ताओं के GLOBE प्रोजेक्ट ने अंतर के साथ समानताएँ भी पाईं। ईमानदारी, निर्णय-क्षमता, भरोसेमंद होना और निष्पक्षता को दुनिया भर में नेतृत्व-प्रभावशीलता से जोड़ा गया, जबकि चिड़चिड़ापन, अहंकार और अकेलापन अवांछित माने गए। दूरदर्शी और करिश्माई नेता सबसे प्रभावशाली पाए गए, उसके बाद टीम-उन्मुख और सहभागी नेता।
भारतीय प्रशासन के लिए इसका अर्थ यह है कि पाठ्यपुस्तक की किसी शैली को बिना सोचे लागू नहीं करना चाहिए। कार्यालय की संस्कृति, कर्मचारियों की अपेक्षा और कार्य की प्रकृति देखकर शैली चुननी चाहिए (विश्लेषण)।
भागीदारी का पैमाना: निरंकुश से प्रत्यायोजन तक
निर्णय स्वयं लें
decide
व्यक्तियों से परामर्श
consult individually
समूह से परामर्श
consult as a group
सुगमकर्ता
facilitate: सीमाएँ नेता तय करे
निर्णय टीम पर छोड़ें
delegate
मुख्य तथ्य
- लेविन की तीन शैलियाँ
- निरंकुश, लोकतांत्रिक, स्वतंत्र-छोड़ू; मूल अध्ययन 1939, Journal of Social Psychology 10(2)
- पथ-लक्ष्य की चार शैलियाँ
- निर्देशात्मक, सहयोगी, सहभागी, उपलब्धि-उन्मुख
- व्रूम-येटन की पाँच निर्णय-शैलियाँ
- decide, consult individually, consult as a group, facilitate, delegate
- UGC अध्याय की तीन शैलियाँ
- परोपकारी (पितृसुलभ), आलोचक या कार्य-केंद्रित, विकासमूलक
- स्वतंत्र-छोड़ू शैली का शोध-निष्कर्ष
- नेता के प्रति कम संतोष और कम प्रभावशीलता (Judge और Piccolo, 2004)
- GLOBE प्रोजेक्ट
- 62 समाज (societies); ईमानदारी, निर्णय-क्षमता, भरोसा, निष्पक्षता सार्वभौमिक रूप से वांछित
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- लोकतांत्रिक शैली को हर स्थिति के लिए श्रेष्ठ बता देना। शोध में सहभागिता का असर संतोष पर अधिक और उत्पादकता पर कमज़ोर मिला; आपातकाल में स्पष्ट निर्देश चाहिए।
- स्वतंत्र-छोड़ू शैली और प्रत्यायोजन को एक मान लेना। प्रत्यायोजन योग्य और प्रतिबद्ध अनुयायियों को सोच-समझकर काम सौंपना है; स्वतंत्र-छोड़ू में नेता मार्गदर्शन भी न्यूनतम रखता है।
- पथ-लक्ष्य की चार शैलियों में लेविन की तीन शैलियाँ मिला देना।
- शैली और प्रकार को घुला देना। प्रकार (जैसे करिश्माई) प्रभाव का स्रोत है; शैली निर्णय और व्यवहार का ढर्रा।
- तालिका या उदाहरण के बिना सिर्फ़ परिभाषाएँ लिखना। शैली वाले उत्तर में 'कब उपयुक्त' जोड़ने से अंक बढ़ते हैं।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): निर्णय-वृक्ष पर चलना
हल सहित उदाहरणगाँव में नए जल-स्रोत की जगह तय करना
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; गाँव और अधिकारी वास्तविक नहीं हैं।
- ब्लॉक का एक अभियंता तय कर रहा है कि नया हैंडपंप किस जगह लगे। निर्णय का महत्त्व उच्च है, क्योंकि जगह गलत हुई तो पानी का स्रोत बेकार रहेगा। गाँव वालों की स्वीकृति के बिना उसका उपयोग नहीं होगा।
- 1चरण 1: निर्णय का महत्त्व उच्च: गुणवत्ता की आवश्यकता है।
- 2चरण 2: प्रतिबद्धता की आवश्यकता उच्च: गाँव वालों की स्वीकृति के बिना काम व्यर्थ। प्रश्न आगे बढ़ता है।
- 3चरण 3: नेता की विशेषज्ञता और स्वीकृति की संभावना भूजल का तकनीकी ज्ञान अभियंता के पास है, पर अकेले चुनी जगह पर विवाद की संभावना है। यानी स्वीकृति की संभावना कम।
- 4चरण 4: समूह की विशेषज्ञता गाँव वालों को जल-उपलब्धता का स्थानीय अनुभव है, यानी समूह की विशेषज्ञता मध्यम से उच्च।
- 5चरण 5: निष्कर्ष (विश्लेषण) ऐसी स्थिति में 'समूह से परामर्श' या 'सुगमकर्ता' शैली उपयुक्त होगी: अभियंता तकनीकी सीमाएँ बताए, ग्राम सभा से जगह-विकल्पों पर चर्चा कराए और अंतिम निर्णय सहमति से ले।
निष्कर्ष: सारा निर्णय अकेले लेना (decide) या पूरी तरह गाँव पर छोड़ना (delegate), दोनों इस स्थिति में जोखिम भरे हैं। शैली का चुनाव निर्णय की प्रकृति पर निर्भर है। असली मॉडल के प्रश्न और रास्ते पाठ्यपुस्तक में दिए अनुसार हैं; यह उदाहरण केवल सोचने के ढंग को दिखाता है।
केस स्टडी (कल्पित): तीन शाखाएँ, एक अधिकारी
उदाहरण (काल्पनिक)एक ही अपर ज़िला कलक्टर की तीन शैलियाँ
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; अधिकारी और शाखाएँ वास्तविक नहीं हैं। अपर ज़िला कलक्टर के पास तीन शाखाएँ हैं। राजस्व शाखा में नए पटवारी और लिपिक हैं, जो प्रक्रिया ठीक से नहीं जानते। योजना शाखा में अनुभवी अधिकारियों की टीम है, जिन्हें अगले वर्ष की ज़िला योजना बनानी है। सांख्यिकी शाखा में कुशल विश्लेषक हैं जो अपना काम स्वयं सँभालते हैं।
- राजस्व शाखा
- निर्देशन और प्रशिक्षण: प्रक्रिया की चरणबद्ध जानकारी, समय-सारणी, काम का नियमित निरीक्षण। यहाँ ढील देना नुकसानदेह होगा।
- योजना शाखा
- सहभागी या लोकतांत्रिक: योजना की जटिलता और टीम की योग्यता को देखते हुए बैठक में सबके सुझाव लेना और सहमति से निर्णय करना।
- सांख्यिकी शाखा
- प्रत्यायोजन: लक्ष्य और सीमाएँ बताकर काम सौंपना, केवल नियमित समीक्षा।
- जोखिम
- यदि अधिकारी तीनों जगह निरंकुश या तीनों जगह स्वतंत्र-छोड़ू शैली अपनाए तो कहीं असंतोष, कहीं भ्रम बनेगा।
सीख
शैली नेता की ज़िद नहीं, परिस्थिति और अनुयायियों की तैयारी का उत्तर होनी चाहिए। इसीलिए शैली के लचीलेपन को नेतृत्व की परिपक्वता माना जाता है।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
लेविन की तीन नेतृत्व शैलियाँ लिखिए।
आदर्श उत्तर
लेविन के अनुसार नेतृत्व की तीन शैलियाँ हैं: निरंकुश (अधिकारवादी), लोकतांत्रिक (सहभागी) और स्वतंत्र-छोड़ू (हस्तक्षेप-रहित)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
लोकतांत्रिक और निरंकुश नेतृत्व की तुलना कीजिए।
आदर्श उत्तर
निरंकुश नेता निर्णय अकेले लेता है; इससे निर्णय तेज़ होता है पर पहल और संतोष घटते हैं। लोकतांत्रिक नेता कर्मचारियों से परामर्श करके निर्णय लेता है; इससे संतोष और प्रतिबद्धता बढ़ती है पर निर्णय में समय लगता है। आपातकाल में पहली और योग्य टीम के साथ दूसरी शैली अधिक उपयुक्त मानी जाती है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
किसी सरकारी कार्यालय में नेतृत्व की शैली का चुनाव किन बातों पर निर्भर करता है? उदाहरण सहित बताइए।
आदर्श उत्तर
कोई एक शैली हर जगह श्रेष्ठ नहीं है; चुनाव परिस्थिति पर निर्भर है। मुख्य कारक हैं: अनुयायियों की योग्यता और तैयारी, कार्य की प्रकृति, निर्णय का महत्त्व और स्वीकृति की आवश्यकता, तथा समय का दबाव। आपदा-राहत में भूमिकाएँ अस्पष्ट होती हैं, इसलिए निर्देशात्मक शैली उपयुक्त है। अनुभवी अधिकारियों वाली योजना-शाखा में सहभागी शैली से बेहतर निर्णय और स्वीकृति मिलती है। अत्यंत योग्य विश्लेषकों को लक्ष्य बताकर प्रत्यायोजन किया जा सकता है। स्वतंत्र-छोड़ू शैली भ्रम और टकराव बढ़ाती है, अतः उससे बचना चाहिए। लचीला नेता इसीलिए प्रभावी होता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
पथ-लक्ष्य सिद्धांत की चार शैलियों में से सहयोगी शैली कब कारगर होती है?
आदर्श उत्तर
उबाऊ या तनावपूर्ण काम में और कम आत्मविश्वास वाले कर्मचारी के साथ सहयोगी शैली कारगर रहती है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "नेतृत्व की प्रमुख शैलियों का वर्णन कीजिए और बताइए कि कौन-सी शैली सर्वश्रेष्ठ है।" पहली पंक्ति में शैली की परिभाषा लिखें: निर्णय और व्यवहार का ढर्रा। (5 अंक के प्रश्न में दो या तीन शैलियाँ लेकर यही ढाँचा 50 शब्दों में लिखें।)
मुख्य भाग
- लेविन की तीन शैलियाँ, हर एक की एक पंक्ति
- पथ-लक्ष्य की चार शैलियाँ या भागीदारी की पाँच निर्णय-शैलियाँ
- हर शैली का लाभ और कब उपयुक्त
- एक सरकारी उदाहरण (आपदा-राहत बनाम योजना-निर्माण)
निष्कर्ष
निष्कर्ष: कोई एक शैली सर्वश्रेष्ठ नहीं; परिस्थिति, कार्य और अनुयायियों की तैयारी के अनुसार लचीलापन ही प्रभावशीलता की कुंजी है।
अतिरिक्त मूल्य
- तुलना-तालिका बनाएँ
- स्वतंत्र-छोड़ू शैली के शोध-निष्कर्ष का एक वाक्य जोड़ें
- संस्कृति के प्रभाव (GLOBE) का एक वाक्य जोड़ें
त्वरित पुनरावृत्ति
- शैली: नेता के व्यवहार और निर्णय का ढर्रा; प्रकार प्रभाव का स्रोत बताते हैं
- लेविन (1939): निरंकुश, लोकतांत्रिक, स्वतंत्र-छोड़ू
- सहभागिता से संतोष बढ़ता है, उत्पादकता पर असर कमज़ोर; स्वतंत्र-छोड़ू: कम संतोष, कम प्रभावशीलता
- ओहायो/मिशिगन: कार्य-उन्मुख और संबंध-उन्मुख; ग्रिड 1 से 9, ब्लेक और माउटन
- UGC अध्याय: परोपकारी, आलोचक (थ्योरी X), विकासमूलक (थ्योरी Y)
- पथ-लक्ष्य: निर्देशात्मक, सहयोगी, सहभागी, उपलब्धि-उन्मुख
- हर्सी-ब्लैंचर्ड: अनुयायी की तैयारी के अनुसार चार शैलियाँ
- व्रूम-येटन: पाँच निर्णय-शैलियाँ (decide से delegate)
- GLOBE: ईमानदारी, निर्णय-क्षमता, भरोसा, निष्पक्षता सार्वभौमिक; शैली का असर संस्कृति से बदलता है
- निष्कर्ष-सूत्र: कोई एक सर्वश्रेष्ठ शैली नहीं; लचीलापन ज़रूरी
याद रखने योग्य शब्द
- नेतृत्व शैली
- निरंकुश
- लोकतांत्रिक
- स्वतंत्र-छोड़ू
- पथ-लक्ष्य
- व्रूम-येटन