मुख्य सामग्री पर जाएं
पेपर III · इकाई III · भाग क (Behavior)

नेतृत्व की शैलियाँ (Leadership Styles): निरंकुश, लोकतांत्रिक, स्वतंत्र-छोड़ू और परिस्थिति के अनुसार चयन

लेविन की तीन शैलियाँ, पथ-लक्ष्य की चार, व्रूम-येटन की पाँच निर्णय-शैलियाँ और सरकारी स्थितियों में शैली-चयन।

  • लेविन
  • निरंकुश
  • लोकतांत्रिक
  • पथ-लक्ष्य
  • व्रूम-येटन
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (Behavior): "Leadership profiles: theories, types and styles; challenges and effectiveness at workplace; leaders of tomorrow: opportunities and challenges." इस पृष्ठ पर 'styles' यानी नेता के काम करने और निर्णय लेने के तरीके हैं। सिद्धांतों का क्रम पिछले पृष्ठ में और प्रकार (करिश्माई आदि) अलग पृष्ठ में हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013 से 2024 के पेपरों (2013 से 2024 के छह पेपरों) में नेतृत्व की शैली पर अलग से कोई प्रश्न नहीं मिलता। फिर भी सिलेबस में 'styles' शब्द स्पष्ट लिखा है, और पथ-लक्ष्य जैसे पूछे जा चुके प्रश्नों में शैलियाँ ही उत्तर हैं।
  • शैलियों वाले प्रश्न 'तुलना करें' या 'किसी सरकारी परिस्थिति में कौन-सी शैली उपयुक्त' रूप में आ सकते हैं। इसलिए तीन आधार पक्के रखें: लेविन की तीन शैलियाँ, पथ-लक्ष्य की चार शैलियाँ और भागीदारी की पाँच निर्णय-शैलियाँ।
  • हर शैली के साथ एक शर्त याद रखें कि वह कब कारगर है। 'कोई एक सर्वश्रेष्ठ शैली नहीं' वाला निष्कर्ष उत्तर को परिपक्व बनाता है।

शैली का अर्थ और उसे समझने का आसान तरीका

एक कल्पित दृश्य सोचिए। किसी ज़िले की समीक्षा बैठक में कलेक्टर तीन अलग तरह से बैठक चला सकता है। पहले तरीके में वह खुद सब तय करता है और आदेश सुनाकर उठ जाता है। दूसरे में वह हर विभाग से सुझाव माँगता है, चर्चा कराता है और फिर निर्णय लेता है, या सबकी सहमति से निर्णय होता है। तीसरे में वह कह देता है कि 'आप लोग आपस में तय कर लें', और बैठक में दखल नहीं देता। यही नेतृत्व की तीन शैलियाँ हैं। शैली (style) नेता के व्यवहार का वह स्थायी ढर्रा है जिससे वह निर्णय लेता, लोगों से संवाद करता और काम करवाता है।

प्रकार (type) और शैली में सूक्ष्म अंतर है। 'करिश्माई' या 'परिवर्तनकारी' प्रकार बताते हैं कि प्रभाव किस स्रोत से बनता है। शैली बताती है कि नेता रोज़ के काम में कैसे व्यवहार करता है, खासकर निर्णय में अनुयायियों को कितनी जगह देता है। पाठ्यपुस्तकों में दोनों शब्द एक-दूसरे में घुले मिलते हैं, इसलिए उत्तर में शब्द की परिभाषा पहली पंक्ति में दे देना ठीक रहता है।

निर्णय के आधार पर तीन शैलियाँ: निरंकुश, लोकतांत्रिक, स्वतंत्र-छोड़ू

UGC e-PG पाठशाला के अनुसार कर्ट लेविन और उनके साथियों ने नेतृत्व की तीन बुनियादी शैलियाँ बताईं: निरंकुश या अधिकारवादी (autocratic), लोकतांत्रिक (democratic) और स्वतंत्र-छोड़ू या हस्तक्षेप-रहित (laissez-faire)। इनका मूल अध्ययन 1939 में Journal of Social Psychology में छपा (लेविन, लिपिट और व्हाइट)। Bauer और Erdogan इन्हीं तीन को निर्णय लेने की शैलियों के रूप में लेते हैं: निर्णय नेता अकेले लेता है, या नेता और कर्मचारी मिलकर लेते हैं, या नेता निर्णय कर्मचारियों पर छोड़ देता है।

निरंकुश नेता कठोर नियमों से कार्य-वातावरण नियंत्रित करता है; अनुयायियों के पास निर्देश मानने के सिवा विवेक का अवसर बहुत कम रहता है। लोकतांत्रिक नेता सहयोगी और संवेदनशील होता है और अनुयायियों की सहमति से निर्णय लेना पसंद करता है। स्वतंत्र-छोड़ू नेता अपने अधिकार और ज़िम्मेदारी का लगभग उपयोग ही नहीं करता, जिससे भूमिकाओं को लेकर अस्पष्टता और टकराव की स्थिति बन सकती है।

शोध का सार यह है कि कोई एक शैली हर जगह सर्वश्रेष्ठ नहीं निकली। जब नेता सहभागी या लोकतांत्रिक शैली अपनाते हैं तो कर्मचारियों का संतोष बढ़ता है, पर निर्णय की गुणवत्ता या उत्पादकता पर असर अपेक्षाकृत कमज़ोर मिला। वैज्ञानिकों वाले अनुसंधान-संगठन में लोकतांत्रिक शैली सबसे अधिक पसंद की गई (बॉमगार्टल, 1957), जबकि Bauer और Erdogan के अनुसार बड़े समूहों में, जहाँ सदस्यों के आपसी संपर्क के अवसर कम थे, निरंकुश निर्णय अधिक पसंद किए गए। स्वतंत्र-छोड़ू शैली का रिकॉर्ड सबसे समस्याग्रस्त है: Judge और Piccolo (2004) की समीक्षा में इसका संबंध नेता के प्रति कर्मचारियों के कम संतोष और कम प्रभावशीलता से मिला।

लेविन की तीन शैलियाँ: तुलना

बिंदुनिरंकुशलोकतांत्रिकस्वतंत्र-छोड़ू
निर्णय कौन लेता हैनेता अकेलेनेता और कर्मचारी साथकर्मचारी स्वयं, नेता न्यूनतम मार्गदर्शन
अनुयायियों की भूमिकानिर्देश माननाविचार देना, निर्णय में भागीदारीपूरी स्वायत्तता
संभावित लाभतेज़ निर्णय, संकट में स्पष्टतासंतोष, प्रतिबद्धता, बेहतर सुझावयोग्य और स्वप्रेरित टीम को स्वतंत्रता
संभावित हानिअसंतोष, पहल की कमीधीमा निर्णयअस्पष्टता, टकराव, कम संतोष
कब उपयुक्त (विश्लेषण)आपदा या आपातकाल, अनुभवहीन टीमयोग्य टीम, जटिल निर्णय जिसमें स्वीकृति चाहिएअत्यंत योग्य विशेषज्ञ टीम, सीमाएँ साफ़ हों

आधार: UGC e-PG पाठशाला और Bauer-Erdogan (Saylor अभिलेख)। अंतिम पंक्ति समझाने के लिए तैयार किया गया विश्लेषण है।

कार्य-केंद्रित और संबंध-केंद्रित शैलियाँ

ओहायो स्टेट और मिशिगन के अध्ययनों में व्यवहार के दो आयाम मिले थे: कार्य-उन्मुख (संरचना-प्रवर्तन या कार्य-केंद्रित) और संबंध-उन्मुख (सहृदयता या कर्मचारी-केंद्रित)। नेतृत्व ग्रिड में ब्लेक और माउटन इन्हीं दोनों को 1 से 9 के पैमाने पर रखते हैं और पाँच शैलियाँ गिनाते हैं (निष्क्रिय, अधिकार-अनुपालन, कंट्री क्लब, संगठन-आदमी, टीम प्रबंधन)। इन अध्ययनों का विस्तार नेतृत्व के सिद्धांतों वाले पृष्ठ में है। यहाँ इतना याद रखें कि संबंध-उन्मुख शैली से संतोष और कार्य-उन्मुख शैली से उत्पादकता कुछ अधिक जुड़ी मिली, और कार्य-उन्मुखता बहुत अधिक हो तो कर्मचारियों में थकान (बर्नआउट) का जोखिम बढ़ सकता है।

UGC e-PG पाठशाला का अन्य अध्याय भी शैलियों का एक वर्गीकरण देता है: परोपकारी या पितृसुलभ (benevolent), आलोचक या कार्य-केंद्रित (critical) और विकासमूलक (developmental)। परोपकारी नेता पिता-तुल्य होता है; वह रिश्तों को महत्त्व देता है, पर कभी-कभी इतना कि कार्य का नुकसान हो जाए। आलोचक नेता मानता है कि लोग स्वभाव से आलसी होते हैं और बिना कड़ी निगरानी के काम से बचते हैं, यानी वह मैकग्रेगर के थ्योरी X के अनुरूप सोचता है। विकासमूलक नेता लोगों की क्षमता में भरोसा रखता है (थ्योरी Y), उन्हें शिक्षित कर स्वतंत्र बनाता है और अपनी सफलता इसी में मानता है कि वह खुद अपरिहार्य न रहे। थ्योरी X और Y की विस्तृत चर्चा अभिप्रेरणा के पृष्ठ में है।

पथ-लक्ष्य की चार शैलियाँ और भागीदारी की पाँच निर्णय-शैलियाँ

पथ-लक्ष्य सिद्धांत में नेता की चार शैलियाँ हैं: निर्देशात्मक (भूमिका अस्पष्ट होने पर), सहयोगी (उबाऊ या तनावपूर्ण काम में), सहभागी (योग्य कर्मचारियों के साथ निर्णय में) और उपलब्धि-उन्मुख (उपलब्धि की चाह वाले योग्य कर्मचारियों के लिए)। हर्सी और ब्लैंचर्ड की चार शैलियाँ अनुयायी की तैयारी पर टिकी हैं: निर्देशन या 'बताना', प्रशिक्षण या 'समझाना', सहभागिता, और प्रत्यायोजन। विवरण पिछले पृष्ठ पर देखें।

व्रूम और येटन का आदर्शात्मक (normative) मॉडल एक निर्णय-वृक्ष की तरह काम करता है जो बताता है कि नेता को निर्णय में अनुयायियों को कितना शामिल करना चाहिए। Bauer और Erdogan के अनुसार नेता निर्णय के महत्त्व, कर्मचारियों की प्रतिबद्धता की आवश्यकता, अपनी विशेषज्ञता, अकेले निर्णय लेने पर स्वीकृति की संभावना, लक्ष्यों की समानता, समूह की विशेषज्ञता और टीम की क्षमता जैसे प्रश्नों के उत्तर देकर वृक्ष पर चलता है। इससे पाँच शैलियों में से एक सुझाई जाती है: निर्णय स्वयं लेना (decide), व्यक्तियों से परामर्श के बाद निर्णय (consult individually), समूह से परामर्श के बाद निर्णय (consult as a group), सुगमकर्ता बनकर निर्णय की सीमाएँ तय करना (facilitate) और निर्णय टीम पर छोड़ना (delegate)। UGC e-PG पाठशाला भी यही पाँच शैलियाँ देती है। शोध-परिणाम इस मॉडल की वैधता का समर्थन करते हैं: जो नेता सुझाई गई शैली अपनाते हैं, वे औसतन बेहतर निर्णय लेते हैं।

किस स्थिति में कौन-सी शैली (विश्लेषण)

स्थितिउपयुक्त शैलीआधार
आपदा या आपातकाल, भूमिकाएँ अस्पष्टनिर्देशात्मक या निरंकुशभूमिका की अस्पष्टता में स्पष्ट निर्देश (पथ-लक्ष्य)
नई भर्ती, अनुभव कमनिर्देशन, फिर प्रशिक्षणअनुयायी की तैयारी कम (हर्सी-ब्लैंचर्ड)
अनुभवी विशेषज्ञ टीम, जटिल नीति-निर्णयसहभागी या लोकतांत्रिकयोग्यता अधिक, स्वीकृति ज़रूरी
उबाऊ, दोहराव वाला, तनावपूर्ण कामसहयोगीकाम की अप्रियता में समर्थन (पथ-लक्ष्य)
अत्यंत योग्य और स्वप्रेरित टीमप्रत्यायोजनयोग्य और प्रतिबद्ध अनुयायी
उपलब्धि की चाह वाली योग्य टीमउपलब्धि-उन्मुखचुनौतीपूर्ण लक्ष्य से प्रेरणा

तीनों सिद्धांतों की शर्तों से तैयार किया गया विश्लेषण; वास्तविक निर्णय में कई कारक एक साथ देखने पड़ते हैं।

अपनी शैली की पहचान: मान्यताएँ और स्थिति का निदान

शैली केवल चुनाव की बात नहीं, सोच की भी है। Bauer और Erdogan के अनुसार मैकग्रेगर (1960) का मत था कि प्रबंधक का व्यवहार इस पर टिका होता है कि वह कर्मचारियों के बारे में कौन-सी बुनियादी मान्यता रखता है। थ्योरी X वाला प्रबंधक मानता है कि कर्मचारी आलसी हैं, काम से बचेंगे और उन्हें नियंत्रण तथा दंड के सहारे चलाना पड़ेगा; इसलिए वह कठोर कार्य-वातावरण बनाता है और अधीनस्थों के हर काम की पूरी ज़िम्मेदारी अपने सिर लेता है। थ्योरी Y वाला प्रबंधक मानता है कि कर्मचारी आलसी नहीं हैं, काम का आनंद ले सकते हैं और संगठन के लक्ष्य के लिए प्रयास करेंगे; इसलिए वह स्वायत्तता देता है और सहयोगी भूमिका निभाता है। इस पुस्तक का सुझाव है कि शैली सुधारने का एक तरीका अपनी इन निहित मान्यताओं के प्रति सचेत होना और उनकी वैधता पर प्रश्न उठाना है।

UGC e-PG पाठशाला का अध्याय परिस्थिति-सिद्धांतों का सार इस प्रकार देता है: प्रभावी प्रबंधक पहले स्थिति का निदान करता है, फिर तय करता है कि कौन-सी शैली कारगर होगी, और अंत में यह देखता है कि क्या वह उस शैली को लागू कर सकता है। शैली पर असर डालने वाले तीन सामान्य कारक गिनाए गए हैं: अधीनस्थ संबंधी विचार (उनकी विशेषज्ञता, अनुभव, योग्यता और स्तर), पर्यवेक्षक संबंधी विचार (नेता का ऊपर के अधिकारियों पर प्रभाव और उनसे दृष्टिकोण की समानता) और कार्य संबंधी विचार (समय की तात्कालिकता, जोखिम, त्रुटि की सहनीय दर, तनाव, स्वायत्तता और अस्पष्टता)। अधिकतर परिस्थिति-सिद्धांतकार मानते हैं कि प्रभावी नेता कई शैलियों का दायरा विकसित करते हैं और उन्हें परिस्थिति के अनुसार बदलते हैं।

सरकारी संदर्भ में यह स्थिति-निदान रोज़मर्रा की बात है: नया पदस्थापित अधिकारी पहले अपने अधीनस्थों के अनुभव को पहचानता है, कार्य की तात्कालिकता देखता है, ऊपर के अधिकारियों से अपने संबंध समझता है और तब तय करता है कि किस काम में कितना निर्देश देना है और कितनी छूट। यह विश्लेषण है, पाठ्यपुस्तक का कथन नहीं।

शैली और संस्कृति: क्या शैली सार्वभौमिक है

Bauer और Erdogan बताते हैं कि नेतृत्व के अधिकांश सिद्धांत अमेरिकी संदर्भ में बने हैं और अनुसंधान का बड़ा हिस्सा पश्चिमी देशों में हुआ है। इसलिए अलग संस्कृतियों में शैलियों का असर अलग हो सकता है। 62 समाजों (societies) में 200 से अधिक शोधकर्ताओं के GLOBE प्रोजेक्ट ने अंतर के साथ समानताएँ भी पाईं। ईमानदारी, निर्णय-क्षमता, भरोसेमंद होना और निष्पक्षता को दुनिया भर में नेतृत्व-प्रभावशीलता से जोड़ा गया, जबकि चिड़चिड़ापन, अहंकार और अकेलापन अवांछित माने गए। दूरदर्शी और करिश्माई नेता सबसे प्रभावशाली पाए गए, उसके बाद टीम-उन्मुख और सहभागी नेता।

भारतीय प्रशासन के लिए इसका अर्थ यह है कि पाठ्यपुस्तक की किसी शैली को बिना सोचे लागू नहीं करना चाहिए। कार्यालय की संस्कृति, कर्मचारियों की अपेक्षा और कार्य की प्रकृति देखकर शैली चुननी चाहिए (विश्लेषण)।

भागीदारी का पैमाना: निरंकुश से प्रत्यायोजन तक

  1. निर्णय स्वयं लें

    decide

  2. व्यक्तियों से परामर्श

    consult individually

  3. समूह से परामर्श

    consult as a group

  4. सुगमकर्ता

    facilitate: सीमाएँ नेता तय करे

  5. निर्णय टीम पर छोड़ें

    delegate

पाँच निर्णय-शैलियाँ: Bauer और Erdogan (Saylor अभिलेख) और UGC e-PG पाठशाला। बाएँ से दाएँ भागीदारी बढ़ती है।

मुख्य तथ्य

लेविन की तीन शैलियाँ
निरंकुश, लोकतांत्रिक, स्वतंत्र-छोड़ू; मूल अध्ययन 1939, Journal of Social Psychology 10(2)
पथ-लक्ष्य की चार शैलियाँ
निर्देशात्मक, सहयोगी, सहभागी, उपलब्धि-उन्मुख
व्रूम-येटन की पाँच निर्णय-शैलियाँ
decide, consult individually, consult as a group, facilitate, delegate
UGC अध्याय की तीन शैलियाँ
परोपकारी (पितृसुलभ), आलोचक या कार्य-केंद्रित, विकासमूलक
स्वतंत्र-छोड़ू शैली का शोध-निष्कर्ष
नेता के प्रति कम संतोष और कम प्रभावशीलता (Judge और Piccolo, 2004)
GLOBE प्रोजेक्ट
62 समाज (societies); ईमानदारी, निर्णय-क्षमता, भरोसा, निष्पक्षता सार्वभौमिक रूप से वांछित
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • लोकतांत्रिक शैली को हर स्थिति के लिए श्रेष्ठ बता देना। शोध में सहभागिता का असर संतोष पर अधिक और उत्पादकता पर कमज़ोर मिला; आपातकाल में स्पष्ट निर्देश चाहिए।
  • स्वतंत्र-छोड़ू शैली और प्रत्यायोजन को एक मान लेना। प्रत्यायोजन योग्य और प्रतिबद्ध अनुयायियों को सोच-समझकर काम सौंपना है; स्वतंत्र-छोड़ू में नेता मार्गदर्शन भी न्यूनतम रखता है।
  • पथ-लक्ष्य की चार शैलियों में लेविन की तीन शैलियाँ मिला देना।
  • शैली और प्रकार को घुला देना। प्रकार (जैसे करिश्माई) प्रभाव का स्रोत है; शैली निर्णय और व्यवहार का ढर्रा।
  • तालिका या उदाहरण के बिना सिर्फ़ परिभाषाएँ लिखना। शैली वाले उत्तर में 'कब उपयुक्त' जोड़ने से अंक बढ़ते हैं।