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पेपर III · इकाई III · भाग क (व्यवहार)

संचार नेटवर्क: औपचारिक दिशाएँ, चेन-व्हील-Y-सर्कल प्रयोग और ग्रेपवाइन के चार प्रकार

औपचारिक संचार की दिशाएँ, छोटे समूहों के चेन-व्हील-Y-सर्कल नेटवर्क पर बैवलस-लेविट प्रयोग, और अनौपचारिक ग्रेपवाइन के चार प्रकार; कल्पित प्रशासनिक केस और अभ्यास प्रश्न।

  • औपचारिक संचार
  • ऊर्ध्व और अधो
  • चेन-व्हील-सर्कल
  • ग्रेपवाइन
  • डेविस के चार प्रकार
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (Behavior): "Communication at workplace: models and networks; effectiveness; barriers and distortions; electronic and destructive communication (cyberslacking, cyberloafing, moonlighting etc.)." इस पृष्ठ पर 'networks' है। सिलेबस में नेटवर्क के प्रकार नामित नहीं हैं, इसलिए औपचारिक दिशाएँ, छोटे समूह के पैटर्न और ग्रेपवाइन, तीनों पाठ्यपुस्तक-स्तर पर लिए गए हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013, 2016, 2018, 2021, 2023 और 2024 के उपलब्ध छह पेपरों में 'संचार नेटवर्क' पर सीधा प्रश्न नहीं आया है। यह सिलेबस में नया या कम पूछा गया हिस्सा है, इसलिए 2 अंक की परिभाषा या 5 अंक की तुलना के रूप में आ सकता है।
  • यही पृष्ठ लोक प्रशासन के 'पदानुक्रम', 'अधिकार का प्रत्यायोजन' और 'नियंत्रण का विस्तार' से सीधा जुड़ता है, क्योंकि फ़ाइल कौन किसे भेजे, यह संचार का ही नेटवर्क है।
  • 5 अंक के उत्तर में चेन-व्हील-सर्कल की तुलना की तालिका और ग्रेपवाइन के चार प्रकार, दोनों अलग से याद रखने योग्य हैं; यहाँ दोनों तालिकाएँ दी गई हैं।

संचार नेटवर्क का अर्थ

किसी कार्यालय की दीवार पर संगठन-चार्ट टँगा रहता है: ऊपर ज़िला कलेक्टर, नीचे उप-खंड अधिकारी, तहसीलदार, पटवारी। यह चार्ट केवल पदों का ढाँचा नहीं है, यह तय करता है कि फ़ाइल और आदेश किस रास्ते चलेंगे। संचार नेटवर्क का अर्थ है संगठन के लोगों के बीच संदेश के चलने के रास्तों का पैटर्न: कौन किससे बात करता है, किस दिशा में और किसकी अनुमति से। Borgatti के नेटवर्क-विश्लेषण पर लिखे नोट में कहा गया है कि संगठन-चार्ट को ही एक नेटवर्क की तरह देखा जा सकता है, जहाँ 'किसे रिपोर्ट करता है' का संबंध अधिकांश संदेशों को उसी रास्ते पर चलाता है।

उसी नोट के अनुसार निर्देश आम तौर पर ऊपर से नीचे जाते हैं और स्थिति की जानकारी नीचे से ऊपर। निर्देश का उलटी या तिरछी दिशा में चलना असामान्य है और समस्या पैदा कर सकता है। पर अलिखित संचार भी हर संगठन में चलता है। इसलिए नेटवर्क दो प्रकार के माने जाते हैं: औपचारिक (formal), जो संगठन के नियमों और परिपाटियों से तय होते हैं, और अनौपचारिक (informal), जो लोगों के आपसी संबंधों से बनते हैं।

संगठनात्मक संचार पर एक मुक्त पाठ्यपुस्तक औपचारिक संचार को संगठन द्वारा बनाए गए नियमों और मानदंडों से बँधा संचार कहती है। संचार-नियम स्पष्ट लिखे रहते हैं, जैसे कार्यालय की प्रक्रिया-पुस्तिका। संचार-मानदंड वे चलन हैं जो लिखे नहीं होते और अवलोकन से सीखे जाते हैं। उसी पुस्तक का एक उदाहरण: अस्पताल का जोखिम-प्रबंधन प्रमुख लिखित नियम के अनुसार मासिक रिपोर्ट देता था, पर घटना होते ही सीईओ को ई-मेल भी भेज देता था। उसकी जगह आए अधीनस्थ ने केवल नियम का पालन किया, तो सीईओ नाराज़ हुए, क्योंकि उन्होंने वह चलन तोड़ा जो अब नियम जैसा हो गया था।

औपचारिक संचार की दिशाएँ

बाउअर और एर्डोगन के अनुसार सूचना क्षैतिज (प्रेषक से प्रापक), ऊर्ध्वाधर (ऊपर से नीचे या नीचे से ऊपर) और तिरछी (विभिन्न स्तरों और विभागों के बीच) दिशा में चल सकती है। उनका उदाहरण है कि ग्राहक-सेवा कर्मचारी से विनिर्माण विभाग के प्रबंधक को संदेश, या वित्त प्रमुख से सभी विभाग-प्रमुखों को संदेश तिरछी दिशा के हैं। मिहाली चिक्सेंटमिहाल्यी के हवाले से वे यह भी बताते हैं कि बड़े संगठनों में पदानुक्रम और विभागों के पार सूचना का तनुकरण (dilution) साझा लक्ष्य पर ध्यान को कमज़ोर कर सकता है। OpenStax भी कहती है कि जब संदेश अनेक स्तरों से गुज़रता है, तो विरूपण (distortion) की संभावना बढ़ती है।

अधो (downward) संचार वह है जो पदानुक्रम के शीर्ष से नीचे तक जाता है। संगठनात्मक संचार की पाठ्यपुस्तक में रैंडी हिरोकावा के हवाले से इसके दो प्रकार बताए गए हैं: एक, संगठन की वर्तमान या भावी स्थिति, नई नीतियों, हाल के प्रशासनिक निर्णयों और कार्य-प्रक्रिया में बदलाव की सूचना; दो, कार्य-संबंधी सूचना जो अधीनस्थ को काम कुशलता से करने की तकनीकी जानकारी देती है। राजस्थान सरकार के किसी विभाग में परिपत्र, कार्यालय-आदेश और ज्ञापन इसी श्रेणी में आएँगे। बाउअर और एर्डोगन यह भी जोड़ते हैं कि संदेश की प्रापक पर पड़ने वाली गंभीरता प्रेषक की स्थिति पर निर्भर करती है: वरिष्ठ का ज्ञापन अधीनस्थ ध्यान से पढ़ता है, पर उलटी दिशा का वही संदेश वरिष्ठ की प्राथमिकताओं से छनकर कम ध्यान पाता है।

ऊर्ध्व (upward) संचार नीचे से ऊपर चलता है। पाठ्यपुस्तक में हिरोकावा के अनुसार इसके चार कार्य हैं: पहला, प्रबंधन यह परख पाता है कि पहले भेजा गया अधो-संचार कितना सफल रहा; दूसरा, निचले स्तर के लोगों को नीतियों और प्रक्रियाओं में आवाज़ मिलती है, और निर्णय में भागीदारी से निर्णय की स्वीकार्यता बढ़ती है; तीसरा, कर्मचारी कार्य-वातावरण सुधारने के सुझाव दे सकते हैं; चौथा, प्रबंधन नई नीति पर कर्मचारियों की प्रतिक्रिया परख सकता है। काट्ज़ और कान (1966) की सबसे अधिक उद्धृत सूची ऊर्ध्व संचार को चार प्रकारों में बाँटती है: अधीनस्थ के बारे में सूचना, सहकर्मियों और उनकी समस्याओं के बारे में, संगठन की नीतियों और प्रक्रियाओं के बारे में, और काम के बारे में।

क्षैतिज (horizontal या lateral) संचार समान स्तर के लोगों के बीच चलता है। उसी पाठ्यपुस्तक के अनुसार फ़ेयोल ने कहा था कि संचार स्पष्ट ऊर्ध्वाधर रास्तों से जाए: यदि एक पर्यवेक्षक के अधीनस्थ को दूसरे पर्यवेक्षक के अधीनस्थ से बात करनी हो, तो संदेश ऊपर जाकर फिर नीचे आए। पर संकट में उन्होंने एक अस्थायी पुल की व्यवस्था मानी: पर्यवेक्षक अनुमति दे, तो दोनों अधीनस्थ सीधे बात कर सकते हैं। इसे फ़ेयोल का सेतु (Fayol's bridge) कहा जाता है। प्रशासन में इसका सीधा अर्थ है कि बाढ़ या आपदा में दो विभाग-स्तरीय अधिकारी वरिष्ठ की अनुमति से सीधे समन्वय कर सकते हैं, जबकि सामान्य दिनों में फ़ाइल सीढ़ी-दर-सीढ़ी चलती है।

औपचारिक संचार की दिशाओं की तुलना

दिशाक्या चलता हैप्रशासनिक उदाहरण (कल्पित)आम समस्या
अधो (नीचे की ओर)निर्देश, नीतियाँ, कार्य की जानकारीकलेक्टर का परिपत्र तहसीलदारों कोस्तर-दर-स्तर बात बदल जाना
ऊर्ध्व (ऊपर की ओर)रिपोर्ट, सुझाव, समस्या, फ़ीडबैकपटवारी की गिरदावरी रिपोर्ट, कर्मचारी का सुझावबुरी ख़बर का छन जाना (फ़िल्टरिंग)
क्षैतिज (समान स्तर)समन्वय, सूचना का आदान-प्रदानदो विभागों के एसडीओ की संयुक्त बैठकसीढ़ी के नियम के कारण देरी
तिरछी (विभिन्न स्तर और विभाग)विशेष समन्वय या जानकारीकोषागार अधिकारी का किसी दूसरे विभाग के सचिव को स्पष्टीकरणस्पष्ट प्रोटोकॉल का अभाव

छोटे समूहों के नेटवर्क: बैवलस-लेविट प्रयोग

समूह में संचार के पैटर्न का वैज्ञानिक अध्ययन अलेक्स बैवलस (Bavelas) ने किया, जिनका लेख Communication Patterns in Task-Oriented Groups 1950 में Journal of the Acoustical Society of America के खंड 22 में छपा। उनके छात्र हैरोल्ड लेविट (Leavitt) ने इस पर 1951 में Journal of Abnormal and Social Psychology के खंड 46 में Some Effects of Certain Communication Patterns on Group Performance लिखा। Borgatti का सारांश बताता है कि MIT में बैवलस और लेविट ने 1940 और 1950 के दशकों में नियंत्रित प्रयोग किए।

प्रयोग में पाँच लोगों को एक पहेली हल करनी थी। हर व्यक्ति को एक अलग सूचना का टुकड़ा मिलता था और पहेली तभी हल होती जब सब टुकड़े जुड़ें। हर खिलाड़ी का अलग कक्ष था और दीवार की खिड़कियों से लिखित संदेश भेजे जाते थे। खिड़कियों की संख्या घटा-बढ़ाकर संचार को चार पैटर्न में सीमित किया गया: तारा या पहिया (wheel), Y, शृंखला या रेखा (chain) और वृत्त (circle)। खिलाड़ियों को पैटर्न का पता नहीं था और वही खिलाड़ी वही स्थिति में 15 बार खेले। प्रत्येक खेल में हर खिलाड़ी को पाँच प्रतीक मिलते थे, जो छह में से चुने गए थे, और सबको यह खोजना था कि सबमें कौन-सा प्रतीक साझा है।

Borgatti के सारांश के अनुसार परिणाम इस प्रकार रहे। समय में पहिया और Y, शृंखला तथा वृत्त की तुलना में काफ़ी तेज़ थे। संदेश कम से कम पहिया और Y ने भेजे, फिर शृंखला ने, और वृत्त ने सबसे अधिक। त्रुटियाँ पहिया, Y और शृंखला में सबसे कम थीं, जबकि वृत्त में सबसे अधिक, हालाँकि वृत्त में सुधार भी सबसे अधिक हुए। संतुष्टि वृत्त के सदस्यों में सबसे अधिक थी, फिर शृंखला, Y और अंत में पहिया। नेतृत्व के बारे में दो बातें दिखीं: समूह में नेता होने की धारणा और नेता कौन है, इस पर सहमति, दोनों वृत्त से शृंखला, Y और पहिया की ओर बढ़ीं (पहिया में सहमति 100 प्रतिशत थी)।

चार पैटर्न की तुलना (Borgatti के सारांश के अनुसार)

पैटर्नसंरचनागतिसंदेशों की संख्यात्रुटियाँसदस्य-संतुष्टिनेता की पहचान
पहिया (wheel/star)एक केंद्र, चार किनारेतेज़सबसे कमकमसबसे कमसबसे स्पष्ट
Yकेंद्रीकृत, Y के आकार कीतेज़सबसे कम (पहिया के साथ)कमकमस्पष्ट
शृंखला (chain)सीधी रेखाधीमीपहिया-Y से अधिककममध्यमकम स्पष्ट
वृत्त (circle)सब बराबर, कोई केंद्र नहींधीमीसबसे अधिकसबसे अधिक (सुधार भी अधिक)सबसे अधिकसबसे कम स्पष्ट

केंद्रीकृत बनाम विकेंद्रित: निष्कर्ष और सीमा

Borgatti का सारांश यह भी दर्ज करता है कि बाद के शोध में केंद्रीकरण हमेशा श्रेष्ठ नहीं निकला। उनकी तालिका के अनुसार सरल कार्य में सबसे कम संदेश, सबसे कम समय और सबसे कम त्रुटि, तीनों में केंद्रीकृत पैटर्न बेहतर रहे, पर संतुष्टि विकेंद्रित पैटर्न में अधिक रही। जटिल कार्य में कम से कम संदेश के लिए केंद्रीकृत पैटर्न बेहतर था, लेकिन कम समय और कम त्रुटि के लिए विकेंद्रित पैटर्न बेहतर रहे। कारण यह बताया गया कि जटिल समस्या एक व्यक्ति के लिए बहुत बड़ी हो सकती है, और बड़े तंत्र में केंद्रीय व्यक्ति संदेशों के बोझ से दब सकता है।

प्रशासन में इसका अर्थ यह है कि नियमित और सरल काम, जैसे प्रमाण-पत्र जारी करना, केंद्रीकृत पैटर्न में सुगमता से चलते हैं। पर आपदा-प्रबंधन जैसे जटिल काम में सब सूचनाओं को एक ही अधिकारी से गुज़ारने पर वह बोझिल हो सकता है। इसलिए ऐसे कार्य में कई समन्वयक और सीधा क्षैतिज संवाद उपयोगी रहते हैं। यह निष्कर्ष विश्लेषण है, किसी एक अध्ययन का सीधा कथन नहीं।

सीमा यह भी है कि ये प्रयोग प्रयोगशाला में पाँच लोगों और एक पहेली के साथ हुए थे। वास्तविक संगठन में कार्य अनेक होते हैं और लोग एक-दूसरे को पहले से जानते हैं, इसलिए परिणामों को सीधे कार्यालय पर थोपना ठीक नहीं है।

अनौपचारिक नेटवर्क: ग्रेपवाइन

हर संगठन में औपचारिक पत्राचार के साथ एक और धारा चलती है, जिसे ग्रेपवाइन कहा जाता है। Mishra (1990) के लेख के अनुसार इसे परिभाषित करने वाला शब्दकोश-वाक्य है: व्यक्ति से व्यक्ति तक सूचना, गपशप या अफ़वाह का अनौपचारिक संचरण। उसी लेख में 'ग्रेपवाइन' शब्द को अमेरिकी गृहयुद्ध के समय की उन तार-लाइनों से जोड़ा गया है जो पेड़ से पेड़ तक अंगूर की बेल की तरह खिंची थीं और जिन पर आने वाले संदेश अक्सर भ्रामक या अशुद्ध होते थे। उसी लेख के अनुसार औपचारिक संचार प्रलेखित होता है (ज्ञापन, रिपोर्ट, बैठकें, आधिकारिक सूचनाएँ) और इसलिए उसमें बदलाव की गुंजाइश कम रहती है, जबकि ग्रेपवाइन की सूचना प्रलेखित नहीं होती और आगे बढ़ते हुए बदल सकती है।

ग्रेपवाइन ऊपर, नीचे और तिरछी, हर दिशा में चलता है। Mishra के अनुसार वह भोजनावकाश, गलियारे और चाय की मशीन के पास सबसे सक्रिय रहता है। बाउअर और एर्डोगन इसे हर संगठन के जीवन का अपरिहार्य भाग मानते हैं। उनके अनुसार कर्मचारी साथियों की बात पर भरोसा करते हैं और अनौपचारिक संरचना की वजह से यह स्रोत कई बार आधिकारिक संदेश से अधिक विश्वसनीय लगता है, भले सूचना ग़लत हो। इसकी हानि यह है कि इसमें कोई निश्चित प्रेषक नहीं होता और अफ़वाह फैलाने वाला उसका उपयोग स्वार्थ के लिए कर सकता है। प्रबंधक इसकी ताक़त कम कर सकते हैं यदि बड़ी ख़बर पर आधिकारिक संदेश जल्दी और सटीक रूप से भेजें।

ग्रेपवाइन के चार प्रकार (कीथ डेविस)

कीथ डेविस के अनुसार ग्रेपवाइन में सूचना चार तरह की शृंखलाओं में चलती है। संगठनात्मक संचार की पाठ्यपुस्तक इसके स्रोत के रूप में डेविस (1969) का लेख देती है, और Mishra का लेख भी डेविस के हवाले से यही चार संरचनाएँ गिनाता है।

डेविस के चार ग्रेपवाइन-पैटर्न

पैटर्नकैसे चलता हैविशेषताउदाहरण (कल्पित)
एकल-सूत्र (single strand)क ने ख को बताया, ख ने ग को, ग ने घ कोशृंखला जितनी लंबी, विरूपण उतना अधिक; सबसे अधिक अशुद्धियाँ इसी में (Mishra)तबादले की सूची की ख़बर एक लिपिक से अगले तक चलती है और अंत में बदल जाती है
गपशप (gossip)एक व्यक्ति जिससे भी मिलता है, सबको बता देता हैएक स्रोत, अनेक सीधे प्रापक; Mishra के अनुसार कुछ धीमाएक कर्मचारी कैंटीन में मिलने वाले हर व्यक्ति को बताता है
संभाव्यता (probability)क यादृच्छिक रूप से कुछ लोगों को बताता है, वे फिर यादृच्छिक रूप से आगेनिश्चित पैटर्न नहीं; कुछ तक पहुँचता है, कुछ तक नहींकोई संदेश अनजाने में ई-मेल से आगे-आगे फ़ॉरवर्ड होता है
गुच्छा (cluster)क कुछ चुने हुए लोगों को बताता है, वे अपने चुने हुए समूह कोMishra के अनुसार सबसे प्रचलित; चयन पर आधारित, कुछ लोग छूट जाते हैंएक विभाग के पाँच मित्र आपस में बात करते हैं, दूसरे छूट जाते हैं

ग्रेपवाइन में भूमिकाएँ और प्रबंधन

Mishra के लेख के अनुसार संगठन के केवल लगभग दस प्रतिशत लोग ग्रेपवाइन में बहुत सक्रिय रहते हैं और तीन भूमिकाएँ पहचानी गई हैं। संवाहक या मुख्य संचारक (bridger) सूचना लेते भी हैं और आगे देते भी हैं, और ग्रेपवाइन की सफलता मुख्यतः इन्हीं पर टिकी है। बैगर या अंतिम बिंदु (bagger, dead ender) सूचना सुनते हैं पर आगे नहीं बढ़ाते। बीनर या अलग-थलग लोग (beaner, isolate) सूचना से बाहर रहते हैं और उन्हें कुछ पता ही नहीं चलता।

Mishra का निष्कर्ष है कि प्रबंधकों को इस तथ्य को स्वीकार कर लेना चाहिए कि ग्रेपवाइन हमेशा रहेगा, और इसका लाभ यह है कि यह निचले स्तर के मुद्दे प्रबंधन तक पहुँचाता है। संगठनात्मक संचार की पाठ्यपुस्तक में Mishra (1990) के आठ कारण गिनाए गए हैं कि ग्रेपवाइन क्यों बनते हैं: जैसे यह लोगों को संगठन में हो रही बातों को समझने में मदद करता है, अपनेपन का भाव देता है, संकट की पूर्व-चेतावनी का काम करता है, और टीम-भावना बनाने तथा पहचान गढ़ने में सहायक है। पर सबसे बड़ी समस्या सूचना की अविश्वसनीयता है।

संचार नेटवर्क: एक नज़र में

संचार नेटवर्क

औपचारिक

  • अधो (नीचे)
  • ऊर्ध्व (ऊपर)
  • क्षैतिज
  • तिरछी

छोटे समूह (बैवलस-लेविट)

  • पहिया
  • Y
  • शृंखला
  • वृत्त

अनौपचारिक (डेविस)

  • एकल-सूत्र
  • गपशप
  • संभाव्यता
  • गुच्छा

मुख्य तथ्य

बैवलस का लेख
Communication Patterns in Task-Oriented Groups, J. Acoustical Society of America, खंड 22, 1950, पृष्ठ 725-730
लेविट का लेख
Some Effects of Certain Communication Patterns on Group Performance, J. Abnormal and Social Psychology, खंड 46, 1951, पृष्ठ 38-50
प्रयोग
5 व्यक्ति, एक पहेली, चार पैटर्न (पहिया, Y, शृंखला, वृत्त), वही समूह 15 बार
सरल कार्य में केंद्रीकृत पैटर्न
कम संदेश, कम समय, कम त्रुटि; सदस्य-संतुष्टि विकेंद्रित में अधिक (Borgatti का सारांश)
औपचारिक दिशाएँ
अधो, ऊर्ध्व, क्षैतिज; बाउअर-एर्डोगन तिरछी दिशा भी जोड़ते हैं
ग्रेपवाइन के चार प्रकार
एकल-सूत्र, गपशप, संभाव्यता, गुच्छा (कीथ डेविस)
ग्रेपवाइन में सक्रिय लोग
संगठन के लगभग 10 प्रतिशत (Mishra, 1990)

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • चेन, व्हील, सर्कल को ग्रेपवाइन का प्रकार बताना: ये छोटे समूहों के औपचारिक पैटर्न हैं (बैवलस-लेविट); ग्रेपवाइन के चार प्रकार अलग हैं (एकल-सूत्र, गपशप, संभाव्यता, गुच्छा)।
  • सर्कल को सबसे तेज़ बताना: प्रयोग में पहिया और Y तेज़ निकले, जबकि वृत्त सबसे धीमे में रहा और उसमें संतुष्टि सबसे अधिक थी।
  • ग्रेपवाइन को हर हाल में हानिकारक लिखना: पाठ्यपुस्तकें इसे अपरिहार्य, कभी-कभी उपयोगी और अविश्वसनीयता के कारण जोखिम भरा, तीनों रूपों में दिखाती हैं।
  • संकट में फ़ेयोल के सेतु को सामान्य चलन बताना: यह केवल संकट में, वरिष्ठ की अनुमति से, सीधे संवाद की व्यवस्था है।
  • किसी एक प्रयोग के परिणाम को हर कार्यालय पर लागू बता देना: उत्तर में 'इस प्रयोग के अनुसार' जैसा सतर्क वाक्य लिखें।