संचार के मॉडल: प्रक्रिया-मॉडल, शैनन-वीवर, SMCR, अन्तःक्रिया और लेन-देन मॉडल
संचार की प्रक्रिया के घटक, शैनन-वीवर का रैखिक मॉडल, वीवर के तीन स्तर, बर्लो का SMCR, श्राम का अन्तःक्रिया मॉडल और लेन-देन मॉडल; कार्यालय के उदाहरणों और अभ्यास प्रश्नों के साथ।
- संचार प्रक्रिया
- शैनन-वीवर
- वीवर के तीन स्तर
- SMCR
- फ़ीडबैक और शोर
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (Behavior): "Communication at workplace: models and networks; effectiveness; barriers and distortions; electronic and destructive communication (cyberslacking, cyberloafing, moonlighting etc.)." इस पृष्ठ पर केवल 'models' वाला हिस्सा है; नेटवर्क, प्रभावशीलता, बाधाएँ और इलेक्ट्रॉनिक संचार अलग पृष्ठों पर हैं। सिलेबस में कोई विशिष्ट मॉडल नामित नहीं है, इसलिए पाठ्यपुस्तकों में सबसे अधिक पढ़ाए जाने वाले मॉडल यहाँ लिए गए हैं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2013, 2016, 2018, 2021, 2023 और 2024 के उपलब्ध छह पेपरों में 'संचार के मॉडल' पर सीधा प्रश्न नहीं आया है। फिर भी सिलेबस की पंक्ति में 'models' पहला शब्द है, इसलिए 2 से 5 अंक के परिभाषा-प्रश्न की संभावना बनी रहती है।
- संचार के बाक़ी चारों उप-विषय (नेटवर्क, प्रभावशीलता, बाधाएँ, इलेक्ट्रॉनिक संचार) इसी प्रक्रिया की शब्दावली पर टिके हैं: एनकोडिंग, डिकोडिंग, माध्यम, फ़ीडबैक और शोर। इस पृष्ठ से वह शब्दावली एक बार पक्की हो जाती है।
- 2018 में 'अर्थपूर्ण बाधाएँ' (semantic barriers) पर 2 अंक का प्रश्न आया था। उसका उत्तर वीवर के 'अर्थ-संबंधी समस्या' (स्तर B) से सीधे जुड़ता है, जो यहाँ समझाया गया है।
संचार क्या है और संगठन में यह क्यों ज़रूरी है
सुबह ज़िला कलेक्टर कार्यालय में एक आदेश तैयार होता है कि अगले सप्ताह तक सभी पटवारी अपने हल्के की गिरदावरी रिपोर्ट जमा करें। आदेश लिखा गया, भेजा गया, पटवारी तक पहुँचा। पर क्या पटवारी ने वही समझा जो कलेक्टर ने चाहा था? इसी अंतर को समझने के लिए संचार के मॉडल बनाए गए हैं। मॉडल एक नक्शे की तरह है: वह दिखाता है कि संदेश कहाँ से चलता है, किन पड़ावों से गुज़रता है और कहाँ बिगड़ सकता है।
OB (Organizational Behavior) की पाठ्यपुस्तक में बाउअर और एर्डोगन संचार को इस रूप में रखते हैं: चिह्नों, संकेतों या व्यवहार की एक साझा प्रणाली के माध्यम से व्यक्तियों के बीच सूचना के आदान-प्रदान की प्रक्रिया (उनके स्रोत में यह शब्दकोश-परिभाषा के रूप में दी गई है)। वही पुस्तक बताती है कि संगठन में संचार तीन काम करता है: प्रयासों का समन्वय, सूचना का प्रसारण, और भावनाओं तथा अनुभूतियों की साझेदारी। परीक्षा में परिभाषा लिखते समय इन तीनों कार्यों में से एक-दो जोड़ देने से उत्तर 'केवल सूचना भेजना' से आगे चला जाता है।
वारेन वीवर ने 1949 में संचार को और भी व्यापक अर्थ में लिया: वे इसमें उन सभी प्रक्रियाओं को गिनते हैं जिनसे एक मस्तिष्क दूसरे को प्रभावित कर सकता है। इसमें लिखित और बोली हुई भाषा के साथ संगीत, चित्रकला, रंगमंच और मानव का सारा व्यवहार शामिल है। प्रशासन के लिए इसका अर्थ यह है कि कार्यालय में बैठने का ढंग, फ़ाइल पर टिप्पणी का लहजा और बैठक में चुप रहना भी संचार है।
मूल प्रक्रिया-मॉडल: प्रेषक से प्रापक तक और वापस
संगठन के संचार को समझाने वाला सबसे सरल ढाँचा प्रक्रिया-मॉडल है। बाउअर और एर्डोगन के अनुसार प्रेषक (sender) के मन में पहले एक विचार उठता है। वह उस विचार को शब्दों में बदलता है, जिसे एनकोडिंग (encoding) कहते हैं। यह कूट-संदेश बोले हुए शब्दों, लिखे हुए शब्दों या संकेतों के माध्यम (medium) से चलता है। प्रापक (receiver) उसे ग्रहण करता है और शब्दों को अर्थ देता है, जिसे डिकोडिंग (decoding) कहते हैं। जो अर्थ प्रापक देता है, वह प्रेषक के इच्छित अर्थ से अलग भी हो सकता है, और इसका कारण शोर (noise) होता है।
शोर का मतलब केवल ऊँची आवाज़ नहीं है। उसी पुस्तक के अनुसार शोर वह सब कुछ है जो संदेश में बाधा डालता या उसे बिगाड़ता है। वह बाहर की गड़बड़ी हो सकती है, जैसे कमरे की भीड़। वह प्रापक के भीतर भी हो सकता है, जैसे घबराहट के कारण ध्यान न दे पाना। वह प्रेषक के भीतर भी हो सकता है, जैसे सटीक संदेश बनाने की अनिच्छा या ऐसे शब्द चुनना जिनके दो अर्थ निकलें।
OpenStax की Principles of Management भी एनकोडिंग और डिकोडिंग पर यही कहती है और जोड़ती है कि दोनों प्रक्रियाएँ व्यक्ति के पिछले अनुभव और उस क्षण की मनःस्थिति से प्रभावित होती हैं। फ़ीडबैक के बारे में वह तीन प्रकार गिनाती है। सूचनात्मक फ़ीडबैक में प्रापक बिना मूल्यांकन के जानकारी लौटाता है, जैसे महीने के अंत में स्टॉक का आँकड़ा। सुधारात्मक फ़ीडबैक में प्रापक मूल संदेश को चुनौती देता है। सुदृढ़ीकरण वाला फ़ीडबैक यह बताता है कि संदेश और उसका आशय ठीक से मिल गया।
प्रक्रिया-मॉडल के घटक और कार्यालय का उदाहरण
| घटक | अर्थ | उदाहरण (कल्पित कलेक्ट्रेट) |
|---|---|---|
| प्रेषक (sender) | जो संदेश शुरू करता है | ज़िला कलेक्टर, जिन्हें गिरदावरी रिपोर्ट जल्दी चाहिए |
| एनकोडिंग | विचार को शब्दों या संकेतों में बदलना | 'सभी पटवारी इस सप्ताह रिपोर्ट जमा करें' लिखना |
| संदेश और माध्यम | जो भेजा गया और जिस रास्ते से | परिपत्र, ई-मेल या बैठक में बोलकर |
| प्रापक (receiver) | जिसे संदेश मिलता है | तहसीलदार और पटवारी |
| डिकोडिंग | प्रापक का अर्थ लगाना | पटवारी समझता है कि रिपोर्ट अगले सप्ताह के अंत तक देनी है |
| फ़ीडबैक | प्रापक की प्रतिक्रिया जो प्रेषक तक लौटती है | तहसीलदार का फ़ोन: 'क्या सप्ताह का मतलब सोमवार से शुक्रवार है?' |
| शोर (noise) | संदेश को बिगाड़ने वाली कोई भी बाधा | बैठक में कमज़ोर आवाज़, जल्दबाज़ी, 'सप्ताह' का अलग मतलब |
शैनन का गणितीय मॉडल और वीवर की व्याख्या
क्लॉड शैनन का लेख A Mathematical Theory of Communication Bell System Technical Journal के खंड 27 में जुलाई और अक्तूबर 1948 में छपा (पृष्ठ 379-423 और 623-656)। यह टेलीफ़ोन और तार जैसी प्रणालियों के लिए लिखा गया था। शैनन ने संचार की बुनियादी समस्या यह बताई: एक स्थान पर चुने गए संदेश को दूसरे स्थान पर ठीक-ठीक या लगभग ठीक वैसा ही पुनः उत्पन्न करना। उन्होंने साफ़ लिखा कि संदेश के अर्थ-संबंधी पहलू इस इंजीनियरिंग समस्या के लिए अप्रासंगिक हैं। इसी वाक्य के कारण बाद में प्रबंधन के विद्यार्थियों को यह मॉडल अधूरा लगा, क्योंकि कार्यालय में सबसे ज़्यादा झगड़ा अर्थ को लेकर ही होता है।
शैनन की प्रणाली पाँच भागों की है। सूचना-स्रोत (information source) संदेश बनाता है। प्रेषित्र (transmitter) संदेश को ऐसे संकेत में बदलता है जो चैनल पर चल सके, जैसे टेलीफ़ोन में ध्वनि को विद्युत धारा बनाना। चैनल (channel) संकेत को ले जाने वाला माध्यम है, जैसे तार या रेडियो आवृत्ति। प्राप्तकर्ता (receiver) प्रेषित्र की उलटी क्रिया करके संदेश को वापस बनाता है। गंतव्य (destination) वह व्यक्ति या वस्तु है जिसके लिए संदेश था। शैनन का पूरा विश्लेषण चैनल में शोर के प्रभाव को भी शामिल करता है।
1949 में वारेन वीवर ने शैनन के गणित की व्याख्या करते हुए एक लेख लिखा और उसी वर्ष दोनों के लेख एक साथ पुस्तक के रूप में आए। वीवर ने बताया कि संचार की समस्याएँ तीन स्तरों पर होती हैं। इन तीन स्तरों को समझ लेने से रैखिक (linear) मॉडल की सीमा भी समझ आ जाती है।
वीवर के तीन स्तर (1949)
| स्तर | समस्या का नाम | वीवर का प्रश्न | कार्यालय का उदाहरण |
|---|---|---|---|
| A | तकनीकी समस्या | संचार के चिह्न कितनी सटीकता से भेजे जा सकते हैं? | फ़ैक्स या ई-मेल में अंक या शब्द कट जाना |
| B | अर्थ-संबंधी (semantic) समस्या | भेजे गए चिह्न इच्छित अर्थ को कितनी सटीकता से पहुँचाते हैं? | 'अविलंब' का अर्थ प्रेषक के लिए आज, प्रापक के लिए इस सप्ताह |
| C | प्रभावशीलता की समस्या | प्राप्त अर्थ इच्छित ढंग से आचरण को कितनी सफलता से प्रभावित करता है? | आदेश समझ लिया गया, पर कार्रवाई नहीं हुई |
रैखिक मॉडल की सीमा और बाद के मॉडल
शैनन-वीवर मॉडल को रैखिक या एक-तरफ़ा मॉडल कहा जाता है, क्योंकि संदेश स्रोत से गंतव्य की ओर एक सीधी रेखा में चलता है। Whatcom Community College की मुक्त पाठ्यपुस्तक के अनुसार इस मॉडल में यह जाँचने की कोई व्यवस्था नहीं है कि संदेश समझा गया या नहीं, और संचार के संदर्भ (context) का भी इसमें कोई स्थान नहीं है। फिर भी यह मॉडल उपयोगी शब्द देता है: स्रोत, चैनल, शोर और गंतव्य। वही पुस्तक शोर के चार रूप गिनाती है: भौतिक (पृष्ठभूमि की आवाज़), शारीरिक (जैसे ऊँचा सुनना), अर्थ-संबंधी (शब्द-चयन की कठिनाई) और मनोवैज्ञानिक (पूर्वाग्रह और पूर्व-धारणाएँ)।
पाठ्यपुस्तक के अनुसार शैनन-वीवर के लगभग एक दशक बाद बर्लो ने इन विचारों को SMCR (Source, Message, Channel, Receiver) मॉडल में ढाला। इसे शैनन के मॉडल का अधिक मानवीय रूप माना गया और इसकी बनावट इतनी लचीली थी कि इसे बोले, लिखे और इलेक्ट्रॉनिक, तीनों तरह के संचार पर लगाया जा सकता है। SMCR में चार शब्द ही याद रखने हैं: स्रोत, संदेश, चैनल और प्रापक। कार्यालय में स्रोत के रूप में अधिकारी, संदेश के रूप में आदेश, चैनल के रूप में परिपत्र या बैठक और प्रापक के रूप में अधीनस्थ को रखा जा सकता है।
रैखिक मॉडल के बाद श्राम (Schramm) ने संचार को दो-तरफ़ा अन्तःक्रिया के रूप में दिखाया। उसी पाठ्यपुस्तक के अनुसार वे फ़ीडबैक को, शाब्दिक और अशाब्दिक दोनों रूपों में, मॉडल में जोड़ने वाले पहले व्यक्ति थे। उनके मॉडल में दो और बातें नई थीं: संचार का संदर्भ (वह विशेष परिवेश जो अर्थ को प्रभावित कर सकता है) और 'अनुभव-क्षेत्र' (fields of experience), यानी वह संदर्भ-ढाँचा और संस्कृति जो हर भागीदार अपने साथ लाता है। इसमें संचार टेनिस के मैच की तरह चलता है: एक सर्व करता है, दूसरा लौटाता है, और हर कोई अपनी बारी का इंतज़ार करता है।
वास्तविक बातचीत में ऐसा नहीं होता, क्योंकि सुनने वाला उसी समय चेहरे और मुद्रा से संदेश भेज रहा होता है। इसी कारण लेन-देन (transactional) मॉडल आया, जिसका श्रेय पाठ्यपुस्तक में बार्नलंड को दिया गया है। इसमें संदेश और फ़ीडबैक एक ही समय आदान-प्रदान होते हैं, और भागीदारों के अनुभव-क्षेत्र आपस में आंशिक रूप से मिलते हैं। पाठ्यपुस्तक इसे अब तक का सबसे पूर्ण मॉडल बताती है और कहती है कि संचार लोग एक-दूसरे 'के साथ' करते हैं, एक-दूसरे 'पर' नहीं।
मॉडलों की तुलना
| मॉडल | मूल विचार | फ़ीडबैक | सीमा या विशेषता |
|---|---|---|---|
| प्रक्रिया-मॉडल (बाउअर-एर्डोगन, OpenStax) | प्रेषक, एनकोडिंग, माध्यम, प्रापक, डिकोडिंग, शोर | फ़ीडबैक अंतिम चरण | संगठन के संचार को समझाने के लिए सरल और उपयोगी |
| शैनन-वीवर (1948-49) | स्रोत, प्रेषित्र, चैनल, प्राप्तकर्ता, गंतव्य और शोर | नहीं है | एक-तरफ़ा; अर्थ पर ध्यान नहीं, पर वीवर ने तीन स्तर जोड़े |
| SMCR (बर्लो) | स्रोत, संदेश, चैनल, प्रापक | मूल रूप में एक-तरफ़ा ढाँचा | लचीला; बोले, लिखे और इलेक्ट्रॉनिक संचार पर लागू |
| अन्तःक्रिया (श्राम) | दो-तरफ़ा; संदर्भ और अनुभव-क्षेत्र | शामिल | बारी-बारी का संवाद; एक साथ चलने वाले संकेत नहीं |
| लेन-देन (बार्नलंड) | एक साथ संदेश और फ़ीडबैक; अनुभव-क्षेत्र का मेल | एक साथ | सबसे पूर्ण; संचार 'के साथ' होता है |
संचार का प्रक्रिया-चक्र
प्रेषक
विचार
एनकोडिंग
शब्दों में बदलना
माध्यम
बोलकर, लिखकर, संकेत
डिकोडिंग
प्रापक का अर्थ
प्रापक
प्रतिक्रिया
फ़ीडबैक
प्रेषक तक वापसी
प्रशासन में मॉडलों का उपयोग
मॉडल केवल परीक्षा की परिभाषा नहीं हैं, वे निदान का औज़ार हैं। जब किसी कार्यालय में आदेश का पालन नहीं होता, तो मॉडल से पूछा जा सकता है कि बिगाड़ कहाँ हुआ। प्रेषक ने आदेश स्पष्ट लिखा या नहीं (एनकोडिंग)? क्या माध्यम सही था, यानी जटिल निर्देश केवल फ़ोन पर तो नहीं दिया गया (माध्यम)? क्या प्रापक के पास वह पृष्ठभूमि थी जिससे शब्द का वही अर्थ निकलता (डिकोडिंग और अनुभव-क्षेत्र)? क्या किसी ने लौटकर पूछा (फ़ीडबैक)? क्या आदेश का पालन हुआ (वीवर का स्तर C)?
बाउअर और एर्डोगन में एक उपयोगी सिद्धांत यह भी है कि लिखित और मौखिक संचार के अलग लाभ हैं। तथ्य और स्थायी रिकॉर्ड के लिए लिखित संचार बेहतर है, जबकि भावना और तुरंत फ़ीडबैक के लिए मौखिक। इसी पुस्तक में एक ठोस उदाहरण है: प्रबंधक प्रापक से कहलवाता है कि वह आदेश दोहराए, जिससे फ़ीडबैक मिल जाता है। यही तरीक़ा प्रशासन में कारगर है, जैसे बैठक के बाद कार्यवृत्त (minutes) भेजकर पूछना कि कोई बिंदु छूट तो नहीं गया।
मुख्य तथ्य
- शैनन का मूल लेख
- A Mathematical Theory of Communication, Bell System Technical Journal, खंड 27, जुलाई और अक्तूबर 1948, पृष्ठ 379-423 और 623-656
- शैनन की प्रणाली के पाँच भाग
- सूचना-स्रोत, प्रेषित्र, चैनल, प्राप्तकर्ता, गंतव्य; चैनल में शोर का प्रभाव विश्लेषण में शामिल
- वीवर का लेख और तीन स्तर
- Recent Contributions to the Mathematical Theory of Communication, 1949; तकनीकी, अर्थ-संबंधी और प्रभावशीलता की समस्या
- संचार के कार्य (बाउअर-एर्डोगन)
- समन्वय, सूचना का प्रसारण, भावनाओं की साझेदारी
- फ़ीडबैक के प्रकार (OpenStax)
- सूचनात्मक, सुधारात्मक, सुदृढ़ीकरण वाला
- रैखिक मॉडल की सीमा
- फ़ीडबैक और संदर्भ का प्रावधान नहीं (पाठ्यपुस्तक का मत)
- SMCR, श्राम और बार्नलंड
- SMCR शैनन-वीवर के लगभग एक दशक बाद; श्राम का अन्तःक्रिया मॉडल (फ़ीडबैक, संदर्भ, अनुभव-क्षेत्र); लेन-देन मॉडल बार्नलंड
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- शैनन-वीवर मॉडल में फ़ीडबैक लिख देना: मूल रैखिक मॉडल एक-तरफ़ा है; फ़ीडबैक श्राम के अन्तःक्रिया मॉडल से जुड़ता है।
- शोर को केवल बाहरी आवाज़ बताना: प्रेषक और प्रापक के भीतर का शोर (घबराहट, पूर्वाग्रह, अस्पष्ट शब्द) भी शोर है।
- एनकोडिंग और डिकोडिंग उलट देना: प्रेषक एनकोड करता है, प्रापक डिकोड करता है।
- वीवर के तीन स्तरों के नाम गड़बड़ करना: A तकनीकी, B अर्थ-संबंधी (semantic), C प्रभावशीलता।
- मॉडलों के वर्ष: शैनन 1948, वीवर 1949, श्राम 1954, बर्लो 1960, बार्नलंड 1970।
केस स्टडी (कल्पित): सड़क मरम्मत का आदेश
उदाहरण (काल्पनिक)अधूरा संदेश कहाँ टूटा
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; विभाग, पद और स्थान काल्पनिक हैं। एक ज़िला मुख्यालय पर कार्यकारी अभियंता मौखिक रूप से सहायक अभियंता से कहते हैं, 'बारिश से पहले ब्लॉक की सड़क ठीक करवा दो।' तीन सप्ताह बाद भी काम शुरू नहीं हुआ, क्योंकि सहायक अभियंता ने 'ब्लॉक की सड़क' का मतलब ब्लॉक मुख्यालय की मुख्य सड़क समझा, जबकि कार्यकारी अभियंता का आशय गाँव को जोड़ने वाली क्षतिग्रस्त सड़क था।
- एनकोडिंग
- आदेश में सड़क का नाम और अवधि नहीं थी; 'बारिश से पहले' का कोई कैलेंडर दिनांक नहीं था।
- माध्यम
- मौखिक निर्देश, बिना लिखित अनुवर्ती के।
- डिकोडिंग (वीवर का स्तर B)
- 'ब्लॉक की सड़क' का अर्थ दोनों के लिए अलग निकला: यह अर्थ-संबंधी समस्या है।
- फ़ीडबैक
- सहायक अभियंता ने अर्थ की पुष्टि के लिए नहीं पूछा; कार्यकारी अभियंता ने भी प्रगति नहीं पूछी।
- शोर
- अन्य काम का दबाव और जल्दी में बातचीत (मनोवैज्ञानिक शोर)।
सीख
संदेश में सड़क का नाम, स्थान और तिथि लिखित रूप में हो और प्रापक उसे अपने शब्दों में दोहराए, तो अधिकांश टूट पहले ही पकड़ में आ जाती है।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
संचार के प्रक्रिया-मॉडल के घटक बताइए।
आदर्श उत्तर
प्रेषक, एनकोडिंग, संदेश, माध्यम, प्रापक, डिकोडिंग, फ़ीडबैक और शोर; शोर कहीं भी बाधा डालता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
शैनन-वीवर मॉडल की दो सीमाएँ लिखिए।
आदर्श उत्तर
यह मॉडल एक-तरफ़ा है; इसमें फ़ीडबैक और संदर्भ के लिए कोई जगह नहीं है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
वीवर के संचार-समस्या के तीन स्तर संक्षेप में समझाइए।
आदर्श उत्तर
वीवर (1949) के अनुसार स्तर A तकनीकी समस्या है: चिह्न कितनी सटीकता से भेजे जाएँ। स्तर B अर्थ-संबंधी समस्या है: क्या भेजे गए चिह्न इच्छित अर्थ पहुँचाते हैं। स्तर C प्रभावशीलता की समस्या है: क्या प्राप्त अर्थ इच्छित आचरण पैदा करता है। प्रशासन में आदेश का पालन तीसरे स्तर पर दिखता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
रैखिक और अन्तःक्रिया मॉडल में अंतर बताइए।
आदर्श उत्तर
रैखिक मॉडल में संदेश स्रोत से गंतव्य तक एक ही दिशा में जाता है और फ़ीडबैक नहीं होता। श्राम के अन्तःक्रिया मॉडल में दोनों पक्ष प्रेषक और प्रापक बनते हैं, फ़ीडबैक जुड़ता है, तथा संदर्भ और अनुभव-क्षेत्र को स्थान मिलता है। दोनों में संचार बारी-बारी से चलता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
संचार के प्रक्रिया-मॉडल को कार्यालय के उदाहरण के साथ समझाइए। इसमें शोर और फ़ीडबैक की भूमिका बताइए।
आदर्श उत्तर
संचार प्रक्रिया में प्रेषक अपने विचार शब्दों में ढालता है (एनकोडिंग) और माध्यम से भेजता है। प्रापक अर्थ लगाता है (डिकोडिंग) और प्रतिक्रिया लौटाता है (फ़ीडबैक)। जैसे कलेक्टर परिपत्र से पटवारियों को रिपोर्ट जमा करने को कहें और तहसीलदार तिथि पर स्पष्टीकरण माँगे।
शोर संदेश को बिगाड़ता है: अस्पष्ट शब्द, जल्दबाज़ी या प्रापक की घबराहट। फ़ीडबैक सूचनात्मक, सुधारात्मक या सुदृढ़ीकरण वाला हो सकता है और ग़लतफ़हमी को शुरू में पकड़ लेता है। इसलिए महत्त्वपूर्ण आदेश लिखित हों, प्रापक उन्हें अपने शब्दों में दोहराए, और अनुवर्ती बैठक में प्रगति पूछी जाए।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "संचार के प्रक्रिया-मॉडल को उदाहरण सहित समझाइए।" पहली पंक्ति में संचार की परिभाषा और उसके तीन कार्य (समन्वय, सूचना, भावना) लिखें।
मुख्य भाग
- घटक: प्रेषक, एनकोडिंग, माध्यम, प्रापक, डिकोडिंग, फ़ीडबैक, शोर (एक-एक पंक्ति)
- एक कार्यालयी उदाहरण (आदेश, परिपत्र या बैठक)
- शोर और फ़ीडबैक की भूमिका
निष्कर्ष
निष्कर्ष: संचार तभी पूरा है जब प्रापक वही समझे जो प्रेषक ने चाहा, और इसकी जाँच फ़ीडबैक से होती है।
अतिरिक्त मूल्य
- शैनन-वीवर (1948-49) का नाम और वीवर के तीन स्तर जोड़ें
- रैखिक मॉडल की सीमा एक पंक्ति में लिखें
- आसान आरेख: प्रेषक से प्रापक तक तीर और नीचे शोर
त्वरित पुनरावृत्ति
- संचार के तीन कार्य: समन्वय, सूचना का प्रसारण, भावनाओं की साझेदारी (बाउअर-एर्डोगन)
- प्रक्रिया-मॉडल: प्रेषक, एनकोडिंग, माध्यम, प्रापक, डिकोडिंग, फ़ीडबैक; शोर कहीं भी
- फ़ीडबैक के तीन प्रकार: सूचनात्मक, सुधारात्मक, सुदृढ़ीकरण वाला (OpenStax)
- शैनन (1948): स्रोत, प्रेषित्र, चैनल, प्राप्तकर्ता, गंतव्य; शोर चैनल में
- वीवर (1949): A तकनीकी, B अर्थ-संबंधी, C प्रभावशीलता
- रैखिक मॉडल: एक-तरफ़ा; फ़ीडबैक और संदर्भ नहीं
- SMCR: स्रोत, संदेश, चैनल, प्रापक
- श्राम का मॉडल: दो-तरफ़ा, फ़ीडबैक, संदर्भ, अनुभव-क्षेत्र
- लेन-देन मॉडल: एक साथ संदेश और फ़ीडबैक; संचार 'के साथ' होता है
- शोर के चार रूप: भौतिक, शारीरिक, अर्थ-संबंधी, मनोवैज्ञानिक
याद रखने योग्य शब्द
- प्रक्रिया-मॉडल
- एनकोडिंग-डिकोडिंग
- शोर
- फ़ीडबैक
- शैनन-वीवर
- वीवर के तीन स्तर
- SMCR
- अनुभव-क्षेत्र