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पेपर III · इकाई III · भाग क (व्यवहार)

कार्यस्थल पर इलेक्ट्रॉनिक और विनाशकारी संचार: साइबरस्लैकिंग, साइबरलूफ़िंग, मूनलाइटिंग, अफ़वाह और भ्रामक सूचना

कार्यालय में ई-मेल और संदेश-माध्यमों का उपयोग तथा दुरुपयोग; सिलेबस में नामित साइबरस्लैकिंग, साइबरलूफ़िंग और मूनलाइटिंग; अफ़वाह, गपशप, भ्रामक सूचना और साइबर-उत्पीड़न; कार्य-उदाहरण, केस और उपाय।

  • इलेक्ट्रॉनिक संचार
  • साइबरलूफ़िंग
  • साइबरस्लैकिंग
  • मूनलाइटिंग
  • अफ़वाह और भ्रामक सूचना
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (Behavior): "Communication at workplace: models and networks; effectiveness; barriers and distortions; electronic and destructive communication (cyberslacking, cyberloafing, moonlighting etc.)." इस पृष्ठ पर 'electronic and destructive communication' है। कोष्ठक में तीन शब्द सिलेबस के अपने हैं; अफ़वाह, गपशप, भ्रामक सूचना और साइबर-उत्पीड़न 'etc.' के भीतर समझने की दृष्टि से जोड़े गए हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013, 2016, 2018, 2021, 2023 और 2024 के उपलब्ध छह पेपरों में इस उप-विषय पर कोई प्रश्न नहीं पूछा गया। पर सिलेबस में तीन शब्द सीधे नामित हैं (साइबरस्लैकिंग, साइबरलूफ़िंग, मूनलाइटिंग), इसलिए इनकी परिभाषा और भेद तैयार रखना ज़रूरी है; ऐसे नए शब्द पहली बार पूछे जाते हैं तो उत्तर परिभाषा और उदाहरण से ही बनता है।
  • इस पृष्ठ में दो हिस्से हैं: (क) प्रशासन में इलेक्ट्रॉनिक संचार का सही उपयोग, और (ख) विनाशकारी संचार, यानी वह संचार या आचरण जो संगठन, सहकर्मी या सूचना-व्यवस्था को नुकसान पहुँचाता है।
  • यह विषय नैतिकता और केस-स्टडी से भी जुड़ता है: कार्य-समय में निजी उपयोग, अफ़वाह पर कार्रवाई और भ्रामक सूचना की रोकथाम जैसे प्रश्नों में यहाँ के उपाय सीधे काम आते हैं।

प्रशासन में इलेक्ट्रॉनिक संचार: लाभ और जोखिम

इलेक्ट्रॉनिक संचार का अर्थ है ई-मेल, टेक्स्ट संदेश, मैसेजिंग ऐप, वीडियो-बैठक और साझा डिजिटल मंच से होने वाला कार्यालयी संचार। OpenStax की प्रबंधन पाठ्यपुस्तक लिखित संचार में ई-मेल, टेक्स्ट, पत्र, रिपोर्ट और नियम-पुस्तिकाएँ गिनाती है। वही पुस्तक कहती है कि प्रबंधक दक्षता और तत्कालता के कारण मौखिक संचार को पसंद करते हैं, फिर भी इलेक्ट्रॉनिक संचार की बढ़त निर्विवाद है। कुछ प्रबंधक नीति-परिवर्तन जैसे महत्त्वपूर्ण संदेश लिखित में भेजना पसंद करते हैं, क्योंकि वहाँ भाषा की सटीकता और अभिलेख दोनों ज़रूरी हैं।

लाभ स्पष्ट हैं: संदेश तुरंत और एक साथ अनेक लोगों तक पहुँचता है, उसका लिखित अभिलेख बनता है और दूर बैठे अधिकारियों के बीच समन्वय आसान होता है। एक ज़िला मुख्यालय से सभी उपखंडों को एक ही समय पर समान पाठ भेजा जा सकता है, जो मौखिक आदेशों की शृंखला में संभव नहीं। बाउअर और एर्डोगन की पुस्तक ई-मेल को कम सूचना-समृद्ध (less-rich) माध्यम कहती है और बताती है कि प्रेषक से अपरिचित होने पर ऐसे माध्यम में हास्य ग़लत समझा जा सकता है; व्यंग्य और विडंबना भी सूक्ष्म होने के कारण जोखिम भरे हैं। उसी पुस्तक का उदाहरण है कि एक अतिशयोक्ति-भरा मज़ाक, जिसे प्रेषक की आदत जानने वाला समझ लेता, अपरिचित प्रापक को आपत्तिजनक लग सकता है।

जोखिम भी उतने ही स्पष्ट हैं। पहला, सूचना-अधिभार: OpenStax के अनुसार ई-मेल, टेक्स्ट और वॉइसमेल की बाढ़ में ज़रूरी संदेश मात्रा के नीचे दब सकते हैं, और 'सबको उत्तर' (reply all) जैसी आदतें इसे बढ़ाती हैं। दूसरा, अर्थ का बिगड़ना: संक्षिप्त और जल्दबाज़ी में लिखे संदेश में संदर्भ छूट जाता है। तीसरा, ध्यान का बँटना: González और Mark (2004) ने विश्लेषकों, सॉफ़्टवेयर डेवलपरों और प्रबंधकों के कार्य-दिन का क्षेत्र-अवलोकन किया। उनके सार के अनुसार लोग औसतन लगभग तीन मिनट एक कार्य पर टिकते हैं और फिर दूसरे कार्य पर चले जाते हैं; एक 'कार्य-क्षेत्र' (working sphere) में भी औसतन लगभग 12 मिनट ही रहते हैं। बाउअर और एर्डोगन की पाठ्यपुस्तक इसी अध्ययन के हवाले से प्रबंधकों के बारे में यही बात कहती है कि ई-मेल, संदेश, फ़ोन या सहकर्मी बीच में आ जाते हैं। चौथा, दुरुपयोग: यही माध्यम कार्य-समय में निजी उपयोग, अफ़वाह फैलाने और उत्पीड़न का रास्ता भी बन जाते हैं। आगे के खंड इसी चौथे जोखिम पर हैं।

इलेक्ट्रॉनिक माध्यम: उपयोग और सावधानी (विश्लेषण)

माध्यमकब उपयुक्तमुख्य सावधानी
ई-मेल / आधिकारिक पत्रतथ्य, तिथि, निर्देश जिनका अभिलेख चाहिए'सबको प्रतिलिपि' से बचें; विषय-पंक्ति स्पष्ट रखें; स्वर के भ्रम से सावधान रहें
मैसेजिंग ऐप और समूहतुरंत की सूचना, समन्वयआदेश की जगह पुष्टि का माध्यम बनाएँ; अपुष्ट सामग्री आगे न भेजें; निजी और आधिकारिक संदेश अलग रखें
वीडियो-बैठकदूर बैठे दलों की जटिल चर्चापूर्व-एजेंडा दें; निर्णय बाद में लिखित रूप में भेजें
साझा मंच / डैशबोर्डएक ही जगह पर सूचना और संसाधनअधिभार न बने, इसके लिए सूचनाओं की प्राथमिकता तय करें
सोशल मीडिया (आधिकारिक खाता)नागरिकों तक सूचनातथ्य की जाँच, एक अधिकृत प्रवक्ता, समय पर खंडन

साइबरलूफ़िंग और साइबरस्लैकिंग

साइबरलूफ़िंग शब्द कार्यस्थल के इंटरनेट-उपयोग का शोध-शब्द है। Lim (2002) ने Journal of Organizational Behavior में छपे अपने लेख में इसे कर्मचारियों द्वारा कार्य-घंटों में कंपनी की इंटरनेट-सुविधा का निजी प्रयोजनों के लिए उपयोग कहा और उत्पादन-विचलन (production deviance) का एक रूप बताया। Frontiers (2025) के लेख की भूमिका इसी अर्थ को यों लिखती है: आधिकारिक कार्य-घंटों में कर्मचारियों द्वारा संस्था के इंटरनेट संसाधनों का गैर-कार्य गतिविधियों के लिए स्वैच्छिक उपयोग, और वही इस अवधारणा को सबसे पहले Lim (2002) से जोड़ती है। यहाँ तीन शब्द ध्यान देने योग्य हैं: स्वैच्छिक, कार्य-समय और निजी प्रयोजन। इनमें से एक भी न हो तो वह साइबरलूफ़िंग की परिभाषा में नहीं आता; जैसे, अधिकारी के निर्देश पर किसी वेबसाइट से सूचना खोजना कार्य है, साइबरलूफ़िंग नहीं।

साइबरस्लैकिंग का अर्थ व्यवहार में यही है। Metin-Orta और Demirtepe-Saygılı (2021) लिखते हैं कि विद्वानों ने 'cyberloafing' (Lim, 2002) और 'cyberslacking' (Garrett और Danziger, 2008) शब्द कार्यस्थल के उत्पादन-विचलन के रूप में चलाए। इसलिए परीक्षा में दोनों को पर्यायवाची की तरह समझाना सुरक्षित है: कार्य-समय में निजी इंटरनेट-उपयोग, जिससे काम की जगह समय निजी गतिविधि में जाता है। Garrett और Danziger (2008) का शीर्षक ही 'On Cyberslacking: Workplace Status and Personal Internet Use at Work' है। 1,024 लोगों के राष्ट्रीय टेलीफ़ोन-सर्वेक्षण पर आधारित उनके सार का एक रोचक निष्कर्ष है कि सामान्य धारणा के विपरीत ऊँचे कार्य-स्तर वाले कर्मचारी (पेशे का दर्जा, नौकरी की स्वायत्तता, आय, शिक्षा और लिंग के आधार पर मापे गए) कार्यस्थल पर निजी इंटरनेट-उपयोग अधिक बार करते हैं। इसलिए इसे केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की समस्या मान लेना ठीक नहीं; लेखकों की परिकल्पना यही थी कि ऊँचा पद निजी उपयोग के प्रोत्साहन (incentives) और अवसर, दोनों बढ़ाता है।

गतिविधियों के बारे में साहित्य में कई सूचियाँ मिलती हैं। Lim (2002) के अनुसार इसमें ग़ैर-कार्य वेबसाइटों पर घूमना (browsing) और निजी ई-मेल देखना-भेजना-पाना (emailing) शामिल है; बाद के शोध में ब्लॉगिंग, ऑनलाइन वीडियो देखना और सोशल नेटवर्किंग भी जोड़े गए (Metin-Orta और Demirtepe-Saygılı, 2021)। Blanchard और Henle (2008) ने गतिविधियों को हल्के (minor: निजी ई-मेल, समाचार या खेल की साइटें, ऑनलाइन ख़रीदारी, ऑनलाइन नीलामी) और गंभीर (serious: ऑनलाइन जुआ, वयस्क-वेबसाइटें, चैट-रूम में भागीदारी, संगीत का अवैध डाउनलोड) में बाँटा; यह वर्गीकरण Metin-Orta और Demirtepe-Saygılı के लेख में दिया गया है। सिलेबस की दृष्टि से यह भेद उपयोगी है: हल्का और गंभीर दुरुपयोग अलग-अलग प्रतिक्रिया माँगते हैं।

कारणों पर शोध एक ही उत्तर नहीं देता, पर दो सूत्र स्पष्ट हैं। पहला, Lim (2002) का केंद्रीय निष्कर्ष: 188 कामकाजी वयस्कों से प्रश्नावली और फ़ोकस-समूह के आँकड़ों में जिन लोगों ने अपने संगठन को वितरण, प्रक्रिया और व्यवहार, तीनों स्तर पर अन्यायपूर्ण माना, वे 'बही-खाते' (ledger) के तर्क का सहारा लेकर साइबरलूफ़िंग को उचित ठहराने की ओर झुके, यानी 'मेरे साथ अन्याय हुआ है, इसलिए यह समय मेरा हिसाब बराबर करता है'। Frontiers (2025) के लेख में भी यही भाव दोहराया गया है कि मिलने वाला पारिश्रमिक अपने काम की मात्रा के अनुपात में न लगने पर लोग इसी बही-खाते जैसे तर्क से साइबरलूफ़िंग को उचित ठहराते हैं। दूसरा, Blanchard और Henle (2008) के अध्ययन का शीर्षक ही बताता है कि उन्होंने सहकर्मियों के मानदंड (norms) और बाहरी नियंत्रण-स्थान (external locus of control) की भूमिका जाँची। इसलिए साइबरलूफ़िंग को केवल अनुशासनहीनता कहना अधूरा है; उसके पीछे अक्सर निष्पक्षता की धारणा, समूह के मानदंड और कार्य-स्थिति की भूमिका होती है।

प्रभाव पर दोनों पक्ष मिलते हैं। Elciyar और Simsek (2021) के सार के अनुसार कुछ के लिए ऐसी गतिविधियाँ समय की अकुशल खपत हैं और काम पूरा होने से रोकती हैं; दूसरों के लिए वे तनाव घटाने और कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं। इसलिए संतुलित उत्तर में हानि के साथ यह स्वीकार करना कि हर निजी उपयोग समान गंभीर नहीं, अंक बढ़ाता है।

साइबरलूफ़िंग: हल्का और गंभीर, कारण और उपाय

पहलूहल्का रूपगंभीर रूप
उदाहरण (Blanchard और Henle)निजी ई-मेल, समाचार या खेल की साइटें, ऑनलाइन ख़रीदारी, ऑनलाइन नीलामीऑनलाइन जुआ, वयस्क-वेबसाइटें, चैट-रूम, संगीत का अवैध डाउनलोड
शोध में जाँचे गए कारक (दोनों रूपों के लिए)अन्याय की धारणा (Lim, 2002); सहकर्मियों के मानदंड और नियंत्रण-स्थान (Blanchard और Henle, 2008)अन्याय की धारणा (Lim, 2002); सहकर्मियों के मानदंड और नियंत्रण-स्थान (Blanchard और Henle, 2008)
उचित प्रतिक्रिया (विश्लेषण)स्पष्ट उपयोग-नीति, कार्य की रूपरेखा, संवादऔपचारिक अनुशासनात्मक प्रक्रिया, अभिलेख, निष्पक्ष सुनवाई

उदाहरण-पंक्ति Metin-Orta और Demirtepe-Saygılı (2021) में दिए Blanchard और Henle (2008) के वर्गीकरण से; कारक-पंक्ति Lim (2002) और Blanchard-Henle के शीर्षक से; अंतिम पंक्ति विश्लेषण है।

मूनलाइटिंग

मूनलाइटिंग का सामान्य अर्थ है मुख्य नौकरी के साथ दूसरा काम करना। Merriam-Webster इसे नियमित नौकरी के अतिरिक्त दूसरी नौकरी रखना कहती है; Cambridge Dictionary इसमें यह जोड़ती है कि यह प्रायः मुख्य नियोक्ता को बताए बिना किया जाता है। यही 'बिना बताए' वाला पहलू मूनलाइटिंग को संगठनात्मक संचार की समस्या बनाता है: सूचना का छिपाव भरोसे पर चोट करता है। सिलेबस इसे 'electronic and destructive communication' के साथ रखता है; इसलिए उत्तर में इसे निष्ठा, पारदर्शिता, समय और हितों के टकराव के पक्ष से समझाना चाहिए।

भारत के आईटी क्षेत्र पर Bhatt और Jhala (2024) की समीक्षा के सार के अनुसार घर से काम और लचीली व्यवस्थाओं के बढ़ने से मूनलाइटिंग बढ़ी है, जिसमें लोग वित्तीय ज़रूरतों या अतिरिक्त आय के लिए दूसरी नौकरी लेते हैं; सार इसे कार्य-दक्षता और नियोक्ता की अनुपालन-नीतियों के लिए चिंता का विषय भी बताता है। Ara और Akbar (2016) ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और संघीय राजधानी के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के 533 शिक्षकों पर अध्ययन में मूनलाइटिंग के चार कारक जाँचे: अतिरिक्त आय, रुकी हुई पदोन्नति, कौशल की विविधता और नौकरी की स्वायत्तता। उनका निष्कर्ष कि मूनलाइटिंग का नौकरी-संतुष्टि पर उल्लेखनीय प्रभाव है, भारत पर अपने आप लागू नहीं माना जा सकता। फिर भी दोनों अध्ययनों से यह समझ बनती है कि मूनलाइटिंग हमेशा स्वार्थ का मामला नहीं; कई बार वह कम आय, रुकी तरक़्क़ी या कौशल-विस्तार की चाह का संकेत है।

संगठन की चिंताएँ तीन हैं: मुख्य कार्य की गुणवत्ता और समय, हितों का टकराव, और गोपनीय सूचना का जोखिम (विश्लेषण)। इन्हें परखने के लिए नीचे की तालिका एक कसौटी देती है।

मूनलाइटिंग को परखने के चार प्रश्न (विश्लेषण)

प्रश्नक्यों मायने रखता हैसंगठन की नीति में दिखने वाला रूप
समय: क्या दूसरा काम कार्य-घंटों या मुख्य काम की गुणवत्ता में दख़ल देता है?मुख्य काम की उत्पादकता पर सीधा असरSwiggy की नीति में दूसरा काम कार्यालय-समय के बाहर या सप्ताहांत में, और पूर्णकालिक नौकरी की उत्पादकता पर असर डाले बिना
हित-टकराव: क्या दूसरा काम किसी प्रतिस्पर्धी के लिए है?गोपनीय सूचना और निष्ठा का जोखिम सबसे अधिकWipro ने जिन 300 कर्मचारियों को निकाला, वे समाचार-रिपोर्टों के अनुसार सीधे प्रतिस्पर्धी के साथ भी काम कर रहे थे
पारदर्शिता: क्या नियोक्ता को बताया गया और अनुमति ली गई?छिपाव भरोसा तोड़ता है; खुली व्यवस्था में जोखिम पहले ही जाँचा जा सकता हैSwiggy की नीति में अधिक जोखिम वाले प्रोजेक्ट के लिए औपचारिक अनुमति; सरकारी सेवा में पूर्व-मंज़ूरी
क़ानूनी/अनुबंध की स्थिति: लागू अधिनियम, सेवा-नियम और नियुक्ति-पत्र की शर्तें क्या कहती हैं?भारत में सब पर समान एकल पूर्ण निषेध नहीं बताया जाता; स्थिति नियोजन के प्रकार पर निर्भरआगे के खंड में Standing Orders, Factories Act और सरकारी आचरण-नियम

तालिका का ढाँचा विश्लेषण है; Swiggy और Wipro की पंक्तियाँ आगे के केस में दिए समाचार-स्रोतों पर आधारित हैं।

मूनलाइटिंग पर भारत में क़ानूनी और नीतिगत स्थिति

Business Standard के अनुसार भारत में मूनलाइटिंग पूरी तरह निषिद्ध नहीं है, पर कई अधिनियम दोहरे नियोजन (dual employment) पर बात करते हैं। इसलिए 'मूनलाइटिंग अवैध है' जैसा सपाट वाक्य परीक्षा में जोखिम भरा है; सही उत्तर यह है कि स्थिति नियोजन के प्रकार, लागू अधिनियम और सेवा-शर्तों पर निर्भर करती है।

संसद में दिसंबर 2022 में श्रम और रोज़गार राज्य मंत्री रामेश्वर तेली के उत्तर के समाचार-विवरणों (Business Today, The News Minute) के अनुसार सरकार ने औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 का हवाला दिया: कर्मकार किसी भी समय उस औद्योगिक प्रतिष्ठान के हित के विरुद्ध काम नहीं करेगा जिसमें वह नियुक्त है, और अपनी नौकरी के अतिरिक्त ऐसा कोई नियोजन नहीं लेगा जो उसके नियोक्ता के हित पर प्रतिकूल असर डाले। Business Standard और IDfy के अनुसार यह भाषा अधिनियम के अंतर्गत बने औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) केंद्रीय नियम, 1946 के आदर्श स्थायी आदेशों में है (IDfy इसे अनुसूची I-B का "exclusive service" प्रावधान बताता है)। उसी उत्तर के अनुसार सरकार ने भारत में मूनलाइटिंग पर कोई विशेष अध्ययन नहीं कराया था। ध्यान रहे, यह अधिनियम केवल उन प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जो उसके दायरे में आते हैं; सटीक दायरा और शब्दावली के लिए देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ।

Business Standard और IDfy दोनों बताते हैं कि कारख़ाना अधिनियम, 1948 की धारा 60 कारख़ाने में वयस्क श्रमिक के दोहरे नियोजन को सीमित करती है: किसी वयस्क श्रमिक से उस दिन किसी कारख़ाने में काम नहीं कराया या करने दिया जाएगा जिस दिन वह पहले ही किसी दूसरे कारख़ाने में काम कर चुका हो, निर्धारित परिस्थितियों को छोड़कर। यही दोनों स्रोत यह भी बताते हैं कि जो प्रतिष्ठान कारख़ाना नहीं हैं, उन पर राज्यों के दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम लागू होते हैं, जो राज्य-दर-राज्य अलग हैं; उदाहरण के लिए दिल्ली का अधिनियम कई प्रतिष्ठानों में कुल कार्य-घंटों पर रोक लगाता है। Business Standard यह भी जोड़ता है कि नियोक्ता के अनुबंधों में प्रायः अनन्यता (exclusivity), गोपनीयता और प्रतिस्पर्धा-निषेध की शर्तें होती हैं, जो क़ानून के सीधे निषेध के बिना भी मूनलाइटिंग को सीमित कर देती हैं।

अफ़वाह और गपशप: विनाशकारी अनौपचारिक संचार

संचार-नेटवर्क वाले पृष्ठ में ग्रेपवाइन का स्वरूप बताया गया है। यहाँ उसका विनाशकारी पक्ष है। Mishra के लेख में शब्दकोश-परिभाषा उद्धृत है: ग्रेपवाइन 'सूचना, गपशप या अफ़वाह का व्यक्ति से व्यक्ति तक अनौपचारिक प्रसारण' है, और वह संगठन का अनौपचारिक और अनधिकृत सूचना-जाल है। उसी लेख में गपशप के कुछ कार्य भी गिनाए गए हैं: कर्मचारियों को सच जानने की स्वाभाविक इच्छा की पूर्ति, अपनेपन का भाव, और अप्रिय सच के पूर्व-संकेत की तरह चेतावनी-प्रणाली। इसलिए सभी गपशप को हानिकर कहना ठीक नहीं; हानि तब होती है जब वह ग़लत, अपमानजनक या अफ़वाह में बदल जाए।

अफ़वाह की तीव्रता का मूल सूत्र Allport और Postman के 1946-47 के लेख 'An Analysis of Rumor' में 'अफ़वाह का मूल नियम' (basic law of rumor) के रूप में है: R ∼ i × a, जहाँ R अफ़वाह की मात्रा, i विषय का संबंधित लोगों के लिए महत्त्व (importance), और a प्रमाणों की अस्पष्टता (ambiguity) है। लेखक इसे 'लगभग मात्रात्मक' संबंध कहते हैं और ज़ोर देते हैं कि संबंध जोड़ का नहीं, गुणन का है: महत्त्व या अस्पष्टता में से एक भी शून्य हो तो अफ़वाह नहीं बनती। उनका उदाहरण है कि किसी अमेरिकी नागरिक के लिए अफ़ग़ानिस्तान में ऊँट के भाव का विषय अस्पष्ट होते हुए भी महत्त्वहीन है, इसलिए उस पर अफ़वाह नहीं फैलती। Mishra का लेख इसी सूत्र को R = IA लिखकर उद्धृत करता है। इससे उपाय निकलता है: तबादले, पदोन्नति या पुनर्गठन जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर आधिकारिक सूचना जल्दी और स्पष्ट दें, ताकि अस्पष्टता घटे। यह सूत्र वैचारिक है, मापा हुआ गणित नहीं।

भ्रामक सूचना: misinformation, disinformation, malinformation

डिजिटल माध्यमों में अफ़वाह का आधुनिक रूप भ्रामक सूचना है। Wardle और Derakhshan की यूरोप परिषद (Council of Europe) की 2017 की रिपोर्ट 'Information Disorder' में तीन भेद दिए गए हैं, जो Harvard के Shorenstein केंद्र के पृष्ठ पर उपलब्ध हैं। Misinformation वह है जब ग़लत सूचना साझा की जाती है पर हानि का इरादा नहीं होता। Disinformation वह है जब ग़लत सूचना जानबूझकर हानि पहुँचाने के लिए साझा की जाती है। Malinformation वह है जब सच्ची सूचना हानि पहुँचाने के लिए साझा की जाती है, अक्सर निजी सूचना को सार्वजनिक करके।

इनमें भेद की कसौटी दो हैं: सूचना कितनी सच है (falseness) और उसमें हानि (harm) का इरादा है या नहीं। Wardle और Derakhshan इन्हीं दो आयामों से तीनों भेद समझाते हैं। कार्यालय का उदाहरण: किसी ने सद्भाव से मान लिया कि पुरानी अधिसूचना अब भी लागू है और समूह में भेज दी, यह misinformation है; किसी ने जान-बूझकर किसी अधिकारी के नाम से नक़ली आदेश चलाया, यह disinformation है; और किसी की निजी जानकारी हानि पहुँचाने के लिए फैलाई, यह malinformation है। ये उदाहरण समझाने के लिए गढ़े गए हैं।

लोक-सेवक के लिए सीधा आचरण-सूत्र है: साझा करने से पहले स्रोत जाँचें, अपुष्ट सूचना आगे न भेजें, और भूल से भेजी गई हो तो सुधार तुरंत भेजें। प्रशासन के लिए सूत्र है: आधिकारिक माध्यम पर समय पर खंडन और सही सूचना, ताकि अस्पष्टता का स्थान तथ्य ले।

साइबर-उत्पीड़न (cyberbullying)

साइबर-उत्पीड़न विनाशकारी संचार का सबसे सीधा रूप है। Public Safety Canada के सूचना-पत्र में Hinduja और Patchin (2015) की यह परिभाषा उद्धृत है: कंप्यूटर, मोबाइल फ़ोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से किया गया जानबूझकर (willful) और बार-बार का नुकसान। Hinduja और Patchin का अपना Cyberbullying Research Center भी इसे यही औपचारिक परिभाषा बताता है। इसमें तीन शब्द महत्त्वपूर्ण हैं: जानबूझकर (दुर्घटनावश नहीं), बार-बार (केवल एक घटना नहीं, एक पैटर्न) और हानि (लक्ष्य को हानि का अनुभव होना)।

Public Safety Canada के सूचना-पत्र के अनुसार परंपरागत उत्पीड़न की तरह यहाँ भी प्रायः शक्ति का असंतुलन होता है, पर ऑनलाइन माध्यम की अपनी विशेषताएँ हैं: गुमनामी, अधिक व्यापक प्रसार, निगरानी का अभाव और लक्ष्य तक अधिक पहुँच। उसी पत्र में रूप गिनाए गए हैं: नाम-बिगाड़ना और अपमान, किसी को ऑनलाइन बातचीत से जान-बूझकर बाहर रखना, अफ़वाह फैलाना, अपमानजनक भाषा से हमला (flaming), बार-बार आपत्तिजनक संदेश भेजना, धमकी-सहित पीछा करना (cyberstalking), निजी या शर्मनाक सामग्री फैलाना, और झूठी पहचान बनाकर धोखा देना।

Public Safety Canada का सूचना-पत्र मुख्यतः विद्यार्थियों और युवाओं के संदर्भ में लिखा गया है; इन्हें कार्यस्थल पर लागू करना विश्लेषण है। उस दृष्टि से निष्कर्ष यह है कि संगठन में आचरण-नीति, शिकायत की सुरक्षित और स्पष्ट प्रक्रिया, तथा साक्ष्य को सुरक्षित रखने की व्यवस्था होनी चाहिए। सिलेबस के शब्द मनोवैज्ञानिक और प्रबंधकीय हैं, इसलिए यहाँ ध्यान आचरण और संगठन की व्यवस्था पर है; क़ानूनी पक्ष का अध्ययन विधि के अपने पाठ्यक्रम में अलग से होता है।

विनाशकारी संचार के रूप: एक नज़र में

रूपमूल भावकसौटीउपाय
साइबरलूफ़िंग / साइबरस्लैकिंगकार्य-समय में निजी इंटरनेट-उपयोगस्वैच्छिक, कार्य-समय, निजी प्रयोजनउपयोग-नीति, कार्य की रूपरेखा, निष्पक्षता
मूनलाइटिंगमुख्य नौकरी के साथ दूसरा रोज़गारअक्सर नियोक्ता को बिना बताएपारदर्शिता, पूर्व-अनुमति, हितों के टकराव की जाँच
अफ़वाहअपुष्ट सूचना का अनौपचारिक प्रसारणमहत्त्व और अस्पष्टता जितनी अधिक, उतनी तेज़जल्दी, स्पष्ट आधिकारिक सूचना
Misinformationग़लत सूचना, हानि का इरादा नहींग़लत पर बिना इरादे केस्रोत-जाँच, सुधार
Disinformationग़लत सूचना, जानबूझकर हानिग़लत और इरादे सहितपहचान, खंडन, अनुशासनात्मक कार्रवाई
साइबर-उत्पीड़नइलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जानबूझकर, बार-बार हानिजानबूझकर, बार-बार, हानिआचरण-नीति, सुरक्षित शिकायत-प्रक्रिया

भेद की कसौटियाँ Lim (2002), Wardle-Derakhshan और Hinduja-Patchin की परिभाषाओं से; 'उपाय' स्तंभ विश्लेषण है।

संगठन इन समस्याओं से कैसे निपटे (विश्लेषण)

पहला उपाय नीति और स्पष्टता है। कार्यालय में इंटरनेट और संदेश-माध्यमों के उपयोग की लिखित नीति हो, जो साफ़ बताए कि क्या स्वीकार्य है, क्या नहीं और उल्लंघन पर प्रक्रिया क्या होगी। जब अपेक्षा अस्पष्ट होती है, तब हल्के और गंभीर उपयोग की रेखा धुँधली रहती है, और वही बहाना बनती है।

दूसरा उपाय निष्पक्षता और अर्थपूर्ण कार्य है। साइबरलूफ़िंग पर Lim (2002) का शोध बताता है कि अन्याय की धारणा तर्क-गढ़न का आधार बनती है। इसलिए कार्य का समान और तर्कसंगत बँटवारा, उचित मान्यता और अवसर, तथा कर्मचारियों से संवाद निगरानी से पहले आता है। केवल निगरानी और दंड से कारण नहीं मिटते। संतुलन के लिए निगरानी की सीमा भी बतानी चाहिए, ताकि निजता और विश्वास को ठेस न लगे।

तीसरा उपाय अफ़वाह-प्रबंधन है। आधिकारिक सूचना में देरी अफ़वाह को जगह देती है, इसलिए महत्त्वपूर्ण निर्णयों पर समय पर संचार करें; खंडन तथ्य और स्रोत के साथ हो, भावनात्मक न हो; और ग्रेपवाइन के सक्रिय सूत्रधारों से संवाद करें, क्योंकि वे सूचना के वाहक भी हैं। चौथा उपाय डिजिटल साक्षरता है: स्रोत की जाँच, भेजने से पहले रुकना, और ग़लती होने पर तुरंत सुधार। पाँचवाँ उपाय आचरण-नीति और शिकायत की सुरक्षित व्यवस्था है, ताकि उत्पीड़न का शिकार व्यक्ति बिना भय के बता सके और साक्ष्य सुरक्षित रहें।

इलेक्ट्रॉनिक और विनाशकारी संचार: विषय का नक्शा

विनाशकारी संचार

इलेक्ट्रॉनिक संचार

  • ई-मेल, संदेश, वीडियो
  • सूचना-समृद्धि
  • अधिभार

कार्य-समय का दुरुपयोग

  • साइबरलूफ़िंग
  • साइबरस्लैकिंग
  • मूनलाइटिंग

सूचना का दुरुपयोग

  • अफ़वाह और गपशप
  • misinformation
  • disinformation, malinformation

व्यक्ति के विरुद्ध

  • साइबर-उत्पीड़न
  • नक़ली पहचान
  • निजी सामग्री का प्रसार

मुख्य तथ्य

साइबरलूफ़िंग की परिभाषा
कर्मचारियों द्वारा कार्य-घंटों में कंपनी की इंटरनेट-सुविधा का निजी प्रयोजनों के लिए उपयोग; उत्पादन-विचलन का रूप (Lim, 2002)
साइबरस्लैकिंग
साहित्य में cyberloafing के साथ प्रयुक्त शब्द (Garrett और Danziger, 2008); कार्य-स्तर और निजी इंटरनेट-उपयोग पर 1,024 के सर्वेक्षण में ऊँचे स्तर वाले अधिक उपयोग करते पाए गए
हल्का और गंभीर साइबरलूफ़िंग
Blanchard और Henle (2008) का वर्गीकरण, Metin-Orta और Demirtepe-Saygılı (2021) में
मूनलाइटिंग
नियमित नौकरी के साथ दूसरी नौकरी, प्रायः मुख्य नियोक्ता को बताए बिना (Merriam-Webster; Cambridge Dictionary); Ara और Akbar (2016) के चार कारक: अतिरिक्त आय, रुकी पदोन्नति, कौशल-विविधता, स्वायत्तता
मूनलाइटिंग और श्रम-क़ानून
स्थायी आदेश अधिनियम, 1946 का हवाला दिसंबर 2022 में संसद के उत्तर में (समाचार-विवरण); कारख़ाना अधिनियम, 1948 धारा 60 कारख़ाने में दोहरे नियोजन पर रोक (Business Standard, IDfy)
अफ़वाह का मूल नियम
R ∼ i × a: मात्रा विषय के महत्त्व गुणा प्रमाणों की अस्पष्टता के साथ बदलती है (Allport और Postman, 1946-47); वैचारिक
तीन सूचना-विकार
Misinformation (ग़लत, हानि का इरादा नहीं), disinformation (ग़लत, जानबूझकर हानि), malinformation (वास्तविक सूचना, हानि के लिए) (Wardle और Derakhshan, 2017)
साइबर-उत्पीड़न की परिभाषा
कंप्यूटर, फ़ोन और अन्य उपकरणों से जानबूझकर और बार-बार का नुकसान (Hinduja और Patchin, 2015, Public Safety Canada में उद्धृत)

राजस्थान का पहलू

राजस्थान सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 (देखा गया 3 अक्टूबर 2026) में 'निजी व्यापार या नियोजन' पर नियम है: कोई सरकारी कर्मचारी सरकार की पूर्व अनुमति के बिना प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई व्यापार या व्यवसाय नहीं करेगा और न कोई अन्य नियोजन लेगा। मानद सामाजिक या धर्मार्थ कार्य और कभी-कभार का साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक कार्य, जिससे सरकारी कर्तव्य प्रभावित न हों, इसके अपवाद के रूप में बताए गए हैं। RAS में चयनित अधिकारी पर यही सेवा-शर्त लागू होगी, इसलिए सरकारी सेवा में 'दूसरे काम' का उत्तर पूर्व-अनुमति और पारदर्शिता पर टिकना चाहिए। नियम की क्रम-संख्या और सटीक पाठ के लिए आधिकारिक अद्यतन पाठ देखें।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • तीनों शब्दों को एक मान लेना: साइबरलूफ़िंग और साइबरस्लैकिंग कार्य-समय का निजी इंटरनेट-उपयोग हैं; मूनलाइटिंग दूसरा रोज़गार है।
  • हर निजी उपयोग को एक-सा गंभीर लिखना: हल्का और गंभीर भेद करें, और अलग प्रतिक्रिया बताएँ।
  • misinformation और disinformation का भेद केवल 'झूठ' कहकर छोड़ देना: कसौटी इरादा है, और malinformation में सूचना सच्ची होती है।
  • कारण ढूँढे बिना केवल दंड बताना: उत्तर में नीति, निष्पक्षता और संवाद के उपाय भी लिखें।
  • मूनलाइटिंग को हर हाल में अवैध लिखना: भारत में इस पर पूरा निषेध लगाने वाला एकल क़ानून नहीं बताया जाता; स्थिति नियोजन के प्रकार, लागू अधिनियम, सेवा-नियम और नियुक्ति-पत्र की शर्तों पर निर्भर है।
  • क़ानूनी धाराएँ या आँकड़े अनुमान से लिखना: जब तक पक्का न हो, केवल अवधारणा लिखें।