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पेपर I · इकाई III · भाग ख

अभिप्रेरणा के सिद्धांत: मास्लो, ऐल्डरफ़र, हर्ज़बर्ग, मैक्लीलैंड, मैकग्रेगर (X-Y), व्रूम और एडम्स

मास्लो, ऐल्डरफ़र, हर्ज़बर्ग, मैक्लीलैंड, मैकग्रेगर के X-Y, व्रूम और एडम्स के सिद्धांत; चार पिछले प्रश्न हल सहित, तुलना-तालिकाएँ और सरकारी उदाहरण।

  • मास्लो
  • हर्ज़बर्ग
  • मैक्लीलैंड
  • X-Y सिद्धांत
  • अपेक्षा-समता
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग ख (प्रबंधन): "Organisational behaviour: nature and scope, perception, motivation (concepts and theories), group dynamics and team building, organisational climate and culture." इस पृष्ठ पर अभिप्रेरणा के सिद्धांत हैं; अर्थ, प्रक्रिया और प्रोत्साहन अलग पृष्ठ पर हैं।

एक संबंधित प्रश्न कहाँ है

2016 में पेपर III (व्यवहार खंड) में 2 अंक का प्रश्न 'आत्म-सिद्धि (Self-Actualization)' पर आया था। वह व्यवहार इकाई में था, इसलिए यहाँ हल नहीं किया गया; मास्लो के सिद्धांत में आत्म-सिद्धि सबसे ऊपर की आवश्यकता है, जो नीचे समझाई गई है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • उपलब्ध पेपरों में प्रबंधन खंड का सबसे अधिक पूछा गया विषय यही है: 2013 (X-Y सिद्धांत), 2018 (द्वि-कारक), 2021 (मास्लो) और 2023 (तीन आवश्यकताएँ), चारों बार 5 अंक।
  • चारों प्रश्न अलग सिद्धांतों पर आए हैं, इसलिए हर सिद्धांत के लिए परिभाषा, मुख्य बिंदु और एक सरकारी उदाहरण तैयार रखें।
  • सरकारी संगठनों के लिए कौन-सा सिद्धांत अधिक प्रासंगिक है, यह तुलनात्मक प्रश्न 2013 में आ चुका है; इसलिए हर सिद्धांत की सीमा भी जानें।

सिद्धांतों का ढाँचा

अभिप्रेरणा के सिद्धांतों को INFLIBNET और Bauer-Erdogan दोनों दो वर्गों में रखते हैं। विषय-वस्तु या आवश्यकता-आधारित सिद्धांत यह बताते हैं कि किन आवश्यकताओं से लोग प्रेरित होते हैं: मास्लो, ऐल्डरफ़र, हर्ज़बर्ग और मैक्लीलैंड। प्रक्रिया सिद्धांत यह समझाते हैं कि लोग प्रयास का निर्णय कैसे करते हैं: व्रूम का अपेक्षा सिद्धांत और एडम्स का समता सिद्धांत मुख्य हैं। मैकग्रेगर का X-Y सिद्धांत इन दोनों वर्गों में ठीक नहीं बैठता, क्योंकि वह प्रबंधक की मान्यताओं का सिद्धांत है, कर्मचारी की आवश्यकताओं का नहीं; पर वह मास्लो से जुड़ा है और परीक्षा में इसी खंड में पूछा गया है।

अभिप्रेरणा की अवधारणा (अर्थ, प्रक्रिया, आंतरिक-बाह्य प्रेरणा, प्रोत्साहन) अलग पृष्ठ पर है। वैज्ञानिक प्रबंधन और मानव-संबंध दृष्टिकोण के पुराने विचार सार्वजनिक प्रशासन के पृष्ठों पर हैं; यहाँ केवल प्रेरणा का पक्ष लिया गया है।

मास्लो का आवश्यकता-क्रम सिद्धांत

अब्राहम मास्लो का सिद्धांत 1943 में Psychological Review के खंड 50 में छपे लेख A theory of human motivation में आया। NCERT और OpenStax भी इसे मास्लो का सिद्धांत बताती हैं। मूल विचार यह है कि मनुष्य की आवश्यकताएँ क्रम में लगी हैं: जब तक निचली आवश्यकता अपूर्ण है, वही प्रेरित करती है; पूरी होने पर वह प्रेरक नहीं रहती और अगली आवश्यकता सक्रिय होती है। NCERT इसे चार मान्यताओं में रखती है: व्यवहार आवश्यकताओं पर आधारित है; आवश्यकताएँ क्रम में हैं; पूरी हुई आवश्यकता प्रेरित नहीं करती; और व्यक्ति ऊपर तभी जाता है जब नीचे की पूरी हो चुकी हो।

पाँच स्तर ये हैं: (1) शारीरिक आवश्यकताएँ: भोजन, पानी, आश्रय, नींद; संगठन में बुनियादी वेतन। (2) सुरक्षा आवश्यकताएँ: खतरे, पीड़ा और अनिश्चित भविष्य से सुरक्षा; संगठन में नौकरी की सुरक्षा, आय की स्थिरता, पेंशन-योजना। (3) सामाजिक या संबद्धता की आवश्यकताएँ: स्नेह, अपनापन, मित्रता; संगठन में सहकर्मियों से सौहार्दपूर्ण संबंध और टीम। (4) सम्मान की आवश्यकताएँ: आत्म-सम्मान, मान्यता, पद; संगठन में पद-नाम, प्रशंसा और ज़िम्मेदारी। (5) आत्म-सिद्धि (self-actualisation): अपनी क्षमता के अनुरूप बनने की चाह; संगठन में लक्ष्यों की उपलब्धि और चुनौतीपूर्ण काम। संगठनात्मक उदाहरण NCERT और INFLIBNET दोनों में हैं।

सीमाएँ भी याद रखें। Bauer और Erdogan के अनुसार सिद्धांत मूलतः नैदानिक अवलोकन पर बना था, कार्यस्थल के लिए नहीं; शोध इसके इस दावे को समर्थन नहीं देता कि पूरी हुई आवश्यकता बिल्कुल प्रेरित नहीं करती या एक समय में केवल एक ही आवश्यकता प्रबल होती है। OpenStax भी कहती है कि शोध कठोर पाँच-स्तरीय क्रम का समर्थन नहीं करता, यद्यपि कुछ प्रमाण हैं कि लोग निचली आवश्यकताएँ पहले पूरी करते हैं। INFLIBNET जोड़ती है कि आवश्यकताओं का क्रम अलग-अलग देशों और व्यक्तियों में अलग हो सकता है और प्रबंधक के पास हर कर्मचारी की आवश्यकता परखने का समय नहीं होता। फिर भी NCERT के अनुसार यह सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि यह प्रबंधक को बताता है कि कर्मचारी की आवश्यकता का स्तर पहचानकर प्रेरणा दी जानी चाहिए।

मास्लो की आवश्यकता-सीढ़ी और संगठन में उदाहरण

  1. शारीरिक

    बुनियादी वेतन

  2. सुरक्षा

    नौकरी की सुरक्षा, पेंशन

  3. सामाजिक

    सौहार्दपूर्ण सहकर्मी, टीम

  4. सम्मान

    पद-नाम, मान्यता

  5. आत्म-सिद्धि

    चुनौतीपूर्ण काम, लक्ष्य-उपलब्धि

क्रम नीचे से ऊपर; संगठनात्मक उदाहरण NCERT (कक्षा 12, अध्याय 7) और INFLIBNET से।

ऐल्डरफ़र का ERG सिद्धांत

क्लेटन ऐल्डरफ़र ने मास्लो को संशोधित करके पाँच की जगह तीन आवश्यकताएँ दीं: अस्तित्व (Existence), संबंध (Relatedness) और वृद्धि (Growth)। उनका लेख An empirical test of a new theory of human needs 1969 में Organizational Behavior and Human Performance के खंड 4 में है। अस्तित्व में मास्लो की शारीरिक और सुरक्षा आवश्यकताएँ, संबंध में सामाजिक आवश्यकताएँ और वृद्धि में सम्मान और आत्म-सिद्धि आती हैं (यह मेल Bauer-Erdogan का है; INFLIBNET सम्मान को भी संबंध में रखती है, इसलिए पुस्तकों में वर्गीकरण थोड़ा भिन्न है)।

ERG और मास्लो का मुख्य अंतर यह है कि ERG आवश्यकताओं को कठोर क्रम में नहीं रखता और मानता है कि एक साथ एक से अधिक आवश्यकताएँ सक्रिय हो सकती हैं। इसमें 'निराशा-प्रतिगमन' (frustration-regression) की धारणा भी है: यदि कोई ऊँची आवश्यकता पूरी न हो सके तो व्यक्ति निचली आवश्यकता की ओर लौट सकता है, जैसे वृद्धि के अवसर न मिलने पर कर्मचारी सहकर्मियों के साथ अधिक समय बिताने लगे (Bauer-Erdogan का उदाहरण) या पैसे की माँग बढ़ा दे (INFLIBNET का उदाहरण)। OpenStax इसे मास्लो से अधिक उपयोगी इसलिए मानती है कि यह दोनों दिशाओं में गति मानता है।

हर्ज़बर्ग का द्वि-कारक सिद्धांत (अभिप्रेरक-स्वच्छता सिद्धांत)

फ़्रेडरिक हर्ज़बर्ग ने कर्मचारियों से पूछा कि कब वे काम से संतुष्ट हुए और कब असंतुष्ट। INFLIBNET के अनुसार यह सर्वेक्षण 1950 के दशक के अंत और 1960 के दशक के शुरू में इंजीनियरों और लेखाकारों पर हुआ। निष्कर्ष यह निकला कि संतोष देने वाले कारक असंतोष देने वाले कारकों से अलग हैं। इस काम का आधार हर्ज़बर्ग, मॉस्नर और स्नाइडरमैन की 1959 की पुस्तक The Motivation to Work है (Bauer-Erdogan का संदर्भ)।

स्वच्छता कारक (hygiene factors) कार्य के संदर्भ से जुड़े हैं: कंपनी की नीतियाँ, पर्यवेक्षण, कार्य-दशाएँ, वेतन, सुरक्षा। ये न हों तो असंतोष होता है; पर्याप्त हों तो असंतोष मिटता है, पर संतोष या प्रेरणा नहीं आती। प्रेरक कारक (motivators) कार्य की विषय-वस्तु से जुड़े हैं: उपलब्धि, मान्यता, रुचिकर काम, बढ़ी हुई ज़िम्मेदारी, उन्नति और विकास के अवसर। ये संतोष और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं। इसीलिए INFLIBNET और OpenStax दोनों के अनुसार हर्ज़बर्ग संतोष और असंतोष को एक ही पैमाने के दो छोर नहीं, दो अलग आयाम मानते हैं।

आलोचना: Bauer-Erdogan और INFLIBNET दोनों कहती हैं कि पद्धति में पक्षपात संभव है, क्योंकि लोग सफलता का श्रेय स्वयं लेते हैं और असफलता का दोष परिस्थिति पर डालते हैं। वर्गीकरण भी इतना साफ़ नहीं है: वेतन को हर्ज़बर्ग स्वच्छता मानते हैं, पर वह मान्यता और उन्नति का संकेत भी देता है। INFLIBNET यह भी कहती है कि यह सिद्धांत मुख्यतः संतोष की व्याख्या करता है और अध्ययन केवल इंजीनियरों और लेखाकारों पर था। व्यावहारिक सीख यह है कि पहले स्वच्छता कारक ठीक करें और फिर प्रेरक कारक (कार्य-समृद्धि) जोड़ें (OpenStax का दो-चरणीय सुझाव)।

मास्लो, ऐल्डरफ़र और हर्ज़बर्ग की तुलना

ऐल्डरफ़र (ERG)

शारीरिक, सुरक्षाअस्तित्व

सामाजिकसंबंध

सम्मानवृद्धि (और संबंध का एक भाग)

आत्म-सिद्धिवृद्धि

हर्ज़बर्ग

शारीरिक, सुरक्षास्वच्छता कारक (वेतन, सुरक्षा, कार्य-दशाएँ)

सामाजिकस्वच्छता (सामाजिक अवसर और पर्यवेक्षण; OpenStax)

सम्मानप्रेरक (मान्यता, उपलब्धि)

आत्म-सिद्धिप्रेरक (उन्नति, विकास, चुनौतीपूर्ण काम)

मास्लो-ऐल्डरफ़र का मेल Bauer-Erdogan और INFLIBNET से; हर्ज़बर्ग का मेल OpenStax से (प्रेरक = वृद्धि, सम्मान और आत्म-सिद्धि की आवश्यकताएँ)। पंक्तियों का मेल मोटा है, पुस्तकों में थोड़ा अंतर मिलता है।

मैक्लीलैंड का तीन आवश्यकताओं का सिद्धांत

डेविड मैक्लीलैंड और उनके सहयोगियों ने तीन आवश्यकताओं पर काम किया: उपलब्धि की आवश्यकता (nAch), शक्ति की आवश्यकता (nPow) और संबंध की आवश्यकता (nAff)। INFLIBNET, Bauer-Erdogan और OpenStax तीनों यही तीन नाम देती हैं। Bauer-Erdogan इसे अर्जित-आवश्यकता (acquired needs) सिद्धांत और OpenStax सीखी हुई आवश्यकताओं का सिद्धांत कहती है; दोनों नाम एक ही विचार के हैं कि ये आवश्यकताएँ जीवन के अनुभव से, विशेषकर बचपन में, सीखी जाती हैं। हर व्यक्ति में तीनों होती हैं, पर कौन-सी प्रबल है, यह व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग है, और प्रबल आवश्यकता व्यवहार को चलाती है।

उपलब्धि की आवश्यकता वाले लोग उत्कृष्टता चाहते हैं और अपने कार्य का उत्तरदायित्व स्वयं लेते हैं। OpenStax उनकी तीन विशेषताएँ गिनाती है: व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी की भावना, मध्यम जोखिम वाली परिस्थितियाँ पसंद करना (न बहुत आसान, न असंभव), और प्रदर्शन की प्रतिपुष्टि की प्रबल चाह। शक्ति की आवश्यकता का अर्थ दूसरों के व्यवहार को प्रभावित करने और ढालने की चाह है। संबंध की आवश्यकता मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने की चाह है। Bauer-Erdogan बताती है कि मैक्लीलैंड ने प्रमुख आवश्यकता परखने के लिए एक अस्पष्ट चित्र पर कहानी लिखवाने की विधि (TAT) अपनाई।

प्रबंधकीय उपयोग: INFLIBNET के अनुसार उपलब्धि की आवश्यकता को प्रतिपुष्टि, चुनौतीपूर्ण (पर संभव) लक्ष्य और यथार्थवादी सोच के प्रशिक्षण से बढ़ाया जा सकता है। OpenStax का निष्कर्ष है कि सामाजिक शक्ति की ऊँची आवश्यकता वाले लोग सफल प्रबंधक होते हैं। Bauer-Erdogan चेताती है कि उपलब्धि की ऊँची आवश्यकता वाला व्यक्ति प्रबंधक बनने पर अधिकार सौंपने में कठिनाई महसूस कर सकता है। सरकारी संदर्भ में यह विश्लेषण है कि जिन पदों पर लक्ष्य और प्रतिपुष्टि स्पष्ट हैं (जैसे राजस्व-वसूली, टीकाकरण-लक्ष्य), वहाँ उपलब्धि की आवश्यकता वाले अधिकारी बेहतर बैठते हैं।

मैकग्रेगर का X और Y सिद्धांत

डगलस मैकग्रेगर MIT में प्रोफ़ेसर थे और उनकी 1960 की पुस्तक The Human Side of Enterprise ने प्रबंधन-विचार को गहराई से प्रभावित किया (MIT Sloan; Britannica भी यही पुस्तक और वर्ष देता है)। उन्होंने प्रबंधकों की दो विरोधी मान्यताओं को सिद्धांत X और सिद्धांत Y नाम दिया। OpenStax यह भी बताती है कि 1960 के दशक में हज़ारों प्रबंधकों तक मास्लो के विचार मैकग्रेगर के लेखन से पहुँचे; इसीलिए X-Y को मास्लो से जोड़कर पढ़ा जाता है।

सिद्धांत X मानता है कि कर्मचारी स्वभाव से काम से कतराते हैं, इसलिए उन्हें सख़्त नियंत्रण और पर्यवेक्षण में रखना चाहिए (MIT Sloan)। Britannica इसे कर्मचारियों को अज्ञानी, आलसी और अविश्वसनीय मानने वाला पारंपरिक दृष्टिकोण कहती है। सिद्धांत Y इसके उलट मानता है कि कर्मचारियों में आंतरिक प्रेरणा और क्षमता होती है, और उन्हें भरोसा तथा निर्णयों में भागीदारी दी जाए तो वे सार्थक योगदान देते हैं। Lumen Learning की पाठ्य-सामग्री के अनुसार X में माना जाता है कि अधिकांश लोग उत्तरदायित्व से बचते और निर्देशित होना पसंद करते हैं, जबकि Y में कि अनुकूल परिस्थितियों में लोग स्व-निर्देशित और रचनात्मक होते हैं। वही स्रोत यह भी बताता है कि Y का अर्थ 'नरम' प्रबंधन नहीं है।

मैकग्रेगर का तर्क मास्लो से जुड़ता है: यदि प्रबंधन केवल निचली आवश्यकताओं (वेतन, सुरक्षा) से प्रेरित करे, तो वे आवश्यकताएँ पूरी होते ही प्रेरणा समाप्त हो जाती है। Y में ऊँची आवश्यकताओं (सम्मान, आत्म-सिद्धि) को प्रेरणा का स्रोत बनाया जाता है (Lumen Learning)। यही स्रोत कहता है कि X की मान्यताएँ स्वयं-सिद्ध भविष्यवाणी बन सकती हैं: कड़ा नियंत्रण देखकर कर्मचारी वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं। यह वही स्वतः-पूर्ति भविष्यवाणी है जो धारणा वाले पृष्ठ पर समझाई गई है।

सिद्धांत X बनाम सिद्धांत Y

सिद्धांत X

कर्मचारी के बारे में मान्यताकाम से बचते हैं; अनिच्छुक

प्रेरणा का स्रोतवेतन, सुरक्षा और भय

नियंत्रणबाहरी, सख़्त पर्यवेक्षण

निर्णय में भूमिकाऊपर से निर्देश

प्रबंधन-शैलीआदेश और दंड

सरकारी संगठन में उपयोग (विश्लेषण)नियम-पालन, लेखा, विधि-प्रवर्तन जैसे क्षेत्र

सिद्धांत Y

कर्मचारी के बारे में मान्यताअनुकूल स्थिति में काम स्वाभाविक; सक्षम

प्रेरणा का स्रोतसम्मान, उपलब्धि, आत्म-सिद्धि

नियंत्रणआत्म-नियंत्रण और स्व-निर्देशन

निर्णय में भूमिकाभागीदारी और अधिकार-प्रत्यायोजन

प्रबंधन-शैलीविश्वास और सशक्तीकरण

सरकारी संगठन में उपयोग (विश्लेषण)नीति, सेवा-वितरण, फ़ील्ड-स्तर नवाचार

पहली चार पंक्तियाँ MIT Sloan, Britannica और Lumen Learning की सामग्री से; अंतिम पंक्ति विश्लेषण है।

व्रूम का अपेक्षा सिद्धांत और एडम्स का समता सिद्धांत

प्रक्रिया सिद्धांतों में अपेक्षा सिद्धांत (विक्टर व्रूम) कहता है कि प्रयास करने का निर्णय एक तर्कसंगत गणना है। Bauer-Erdogan के अनुसार व्रूम की पुस्तक Work and Motivation 1964 की है। व्यक्ति तीन प्रश्न पूछता है: क्या प्रयास से प्रदर्शन मिलेगा (अपेक्षा, expectancy), क्या प्रदर्शन से पुरस्कार मिलेगा (साधनता, instrumentality), और क्या वह पुरस्कार मुझे मूल्यवान लगता है (मान, valence)। INFLIBNET इसे गुणनफल बताती है: प्रेरणा = मान × अपेक्षा × साधनता। अतः इनमें से कोई भी शून्य हो तो प्रेरणा शून्य हो जाती है। INFLIBNET के अनुसार अपेक्षा और साधनता 0 से 1 के बीच की संभावनाएँ हैं और मान ऋणात्मक भी हो सकता है; यह विवरण एक ही स्रोत में है।

OpenStax इस सिद्धांत के व्यावहारिक पक्ष गिनाती है: चयन, प्रशिक्षण और सफलता के अनुभवों से प्रयास-प्रदर्शन की अपेक्षा मज़बूत करना; ऐसी नीतियाँ जो अच्छे व्यवहार को अच्छे परिणाम से जोड़ें; और यह जानना कि कर्मचारी कौन-से परिणाम को मूल्यवान मानते हैं। वह यह भी कहती है कि अपेक्षा सिद्धांत प्रदर्शन के सटीक मापन पर ज़ोर देता है, क्योंकि ऊँचे प्रदर्शन वालों को पहचाने बिना उन्हें प्रेरित नहीं किया जा सकता।

समता सिद्धांत (जे. स्टेसी एडम्स) कहता है कि लोग निष्पक्ष व्यवहार चाहते हैं। एडम्स का लेख Towards an understanding of inequity 1963 में Journal of Abnormal and Social Psychology के खंड 67 में है। व्यक्ति अपने निवेश (योग्यता, अनुभव, मेहनत) और परिणाम (वेतन, मान्यता) का अनुपात किसी तुलनीय व्यक्ति (referent) के अनुपात से मिलाता है। बराबर हों तो समता है; वरना असमता का तनाव पैदा होता है। Bauer-Erdogan और INFLIBNET के अनुसार असमता दूर करने के लिए व्यक्ति अपने निवेश (प्रयास) को बदल सकता है, अधिक परिणाम माँग सकता है, अपने या दूसरे के निवेश-परिणाम को अलग ढंग से समझ सकता है, या तुलना का आधार बदल सकता है। सरकारी संदर्भ में एक ही पद पर बराबर काम करने वालों के भत्ते या स्थानांतरण-अवसर में अंतर दिखे तो यही असमता की धारणा उभरती है (यह विश्लेषण है)।

प्रमुख सिद्धांतों का सार

सिद्धांतप्रतिपादकमूल विचारसंगठन के लिए सीख
आवश्यकता-क्रममास्लो (1943)पाँच आवश्यकताएँ क्रम मेंकर्मचारी की मौजूदा आवश्यकता पहचानें
ERGऐल्डरफ़र (1969)तीन आवश्यकताएँ; निराशा-प्रतिगमनएक से अधिक आवश्यकताएँ साथ संभालें
द्वि-कारकहर्ज़बर्ग (1959 की पुस्तक)स्वच्छता और प्रेरक कारक अलगवेतन-दशाएँ ठीक करें, फिर कार्य-समृद्धि
तीन आवश्यकताएँमैक्लीलैंडउपलब्धि, शक्ति, संबंधआवश्यकता के अनुसार पद और लक्ष्य
X-Yमैकग्रेगर (1960)प्रबंधक की दो मान्यताएँभरोसा और भागीदारी बढ़ाएँ
अपेक्षाव्रूम (1964)प्रयास, प्रदर्शन, पुरस्कार का संबंधप्रदर्शन को पुरस्कार से स्पष्ट जोड़ें
समताएडम्स (1963)निवेश-परिणाम अनुपात की तुलनानिष्पक्ष और पारदर्शी पुरस्कार

वर्ष संबंधित सिद्धांतों के मूल प्रकाशनों के हैं। मैक्लीलैंड का वर्ष यहाँ जानबूझकर नहीं दिया गया है।

मानचित्र: अभिप्रेरणा के सिद्धांत

प्रेरणा के सिद्धांत

विषय-वस्तु (आवश्यकता)

  • मास्लो (1943)
  • ऐल्डरफ़र ERG (1969)
  • हर्ज़बर्ग (1959)
  • मैक्लीलैंड

प्रक्रिया

  • व्रूम: अपेक्षा
  • एडम्स: समता (1963)
  • लक्ष्य-निर्धारण
  • प्रबलन

प्रबंधक की मान्यता

  • मैकग्रेगर: X
  • मैकग्रेगर: Y (1960)

मुख्य तथ्य

मास्लो का मूल लेख
1943, Psychological Review, खंड 50
मास्लो की पाँच आवश्यकताएँ
शारीरिक, सुरक्षा, सामाजिक (संबद्धता), सम्मान, आत्म-सिद्धि
ऐल्डरफ़र का लेख
1969, Organizational Behavior and Human Performance, खंड 4
ERG की तीन आवश्यकताएँ
अस्तित्व, संबंध, वृद्धि; निराशा-प्रतिगमन की धारणा
हर्ज़बर्ग की आधार-पुस्तक
The Motivation to Work, 1959 (हर्ज़बर्ग, मॉस्नर, स्नाइडरमैन); Bauer-Erdogan का संदर्भ
मैक्लीलैंड की तीन आवश्यकताएँ
उपलब्धि (nAch), शक्ति (nPow), संबंध (nAff)
मैकग्रेगर की पुस्तक
The Human Side of Enterprise, 1960
व्रूम की पुस्तक
Work and Motivation, 1964 (Bauer-Erdogan का संदर्भ)
एडम्स का लेख
1963, Journal of Abnormal and Social Psychology, खंड 67
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

उत्तर लिखते समय आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • मास्लो में पूरी हुई आवश्यकता को भी प्रेरक बताना: मास्लो के अनुसार केवल अपूर्ण आवश्यकता प्रेरित करती है।
  • हर्ज़बर्ग में वेतन को प्रेरक लिख देना: हर्ज़बर्ग इसे स्वच्छता कारक मानते हैं; इसकी कमी असंतोष देती है, पर बढ़ाने से संतोष की गारंटी नहीं।
  • X-Y को कर्मचारियों के दो प्रकार लिखना: मैकग्रेगर के अनुसार ये प्रबंधकों की दो मान्यताएँ हैं, कर्मचारियों के वर्ग नहीं।
  • सरकारी संगठन में X या Y में से केवल एक को सही बताकर उत्तर बंद कर देना: तर्क के साथ दोनों का परिस्थिति-अनुसार मिश्रण लिखना सुरक्षित है।
  • मैक्लीलैंड और मास्लो को जोड़ देना: मैक्लीलैंड की आवश्यकताएँ क्रम में नहीं, एक साथ मौजूद होती हैं और केवल प्रबलता में अंतर रहता है।
  • सिद्धांतों के साल अनुमान से लिखना: ऊपर की तालिका में जो वर्ष दिए हैं, केवल वही लिखें।