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पेपर III · इकाई III · भाग क (व्यवहार)

व्यक्तित्व और तनाव: तनाव-प्रतिरोधी (हार्डी) व्यक्तित्व, Type A और Type B

Kobasa की हार्डीनेस, Friedman-Rosenman के Type A और B, मूल शोध के ब्योरे, सीमाएँ और कार्य-उदाहरण; दोनों पिछले प्रश्न हल सहित।

  • हार्डीनेस
  • तीन C
  • Type A
  • Type B
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (व्यवहार): "Burnout, stress and coping at workplace: occupational stress; sources and coping styles; personality and stress; gender issues at workplace." इस पृष्ठ पर व्यक्तित्व और तनाव का संबंध है: तनाव-प्रतिरोधी (hardy) व्यक्तित्व और Type A तथा Type B व्यक्तित्व। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है; इसमें दिए व्यवहार-प्रतिरूप किसी व्यक्ति को वर्गीकृत करने, पहचानने या स्वास्थ्य-सलाह देने के लिए नहीं हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • दो प्रश्न आए हैं: 2024 में तनाव-प्रतिरोधी व्यक्तित्व (2 अंक) और 2023 में Type A तथा Type B व्यक्तित्व, Friedman और Rosenman (5 अंक)। दोनों NCERT के सीधे विषय हैं।
  • 2 अंक में Kobasa की 'तीन C' (प्रतिबद्धता, नियंत्रण, चुनौती) और 5 अंक में Type A के लक्षण, Type B का अर्थ और एक आलोचना पर्याप्त हैं।
  • अंक पाने वाली सावधानी: व्यक्तित्व-प्रकार (typology) सरल वर्गीकरण हैं; NCERT ख़ुद कहती है कि लोग इन खाँचों में सुथरे ढंग से नहीं बैठते। इस वाक्य को उत्तर में जोड़ें।

पहले सरल भाषा में

एक ही बाढ़-राहत शिविर में दो अधिकारी बराबर दबाव में हैं। एक हर घंटे घड़ी देखता है, हर देरी पर चिढ़ता है, हर काम तुरंत चाहता है और रुकना उसे अपराध लगता है। दूसरा भी थका है, पर यह मानता है कि स्थिति मेरे प्रयास से सँभलेगी, काम में उसका मन लगा है और इसे सीखने का मौक़ा समझता है। व्यक्तित्व का तनाव से रिश्ता यही है: दबाव एक-सा हो, तब भी असर हर व्यक्ति के सोचने और बरताव के ढंग पर निर्भर करता है।

इसीलिए मनोवैज्ञानिकों ने ऐसे व्यक्तित्व-लक्षण खोजे जो तनाव को और बढ़ाते हैं, जैसे जल्दबाज़ी और समय की कमी का भाव (Type A), और ऐसे लक्षण जो तनाव के बीच भी सँभाले रखते हैं, जैसे प्रतिबद्धता, नियंत्रण और चुनौती का भाव (हार्डीनेस)।

तनाव-प्रतिरोधी व्यक्तित्व (Stress-resistant personality, hardiness)

परिभाषा (2 अंक के लिए): NCERT के अनुसार Kobasa के हाल के अध्ययनों में पाया गया कि ऊँचे तनाव के बावजूद कम बीमार पड़ने वाले लोगों में तीन विशेषताएँ साझा थीं, जिन्हें हार्डीनेस (hardiness) के व्यक्तित्व-लक्षण कहा गया। यही तनाव-प्रतिरोधी व्यक्तित्व है। इसे 'तीन C' के रूप में याद रखें: प्रतिबद्धता (commitment), नियंत्रण (control) और चुनौती (challenge)।

NCERT की व्याख्या के अनुसार हार्डीनेस स्वयं के बारे में, संसार के बारे में और दोनों के आपसी संबंध के बारे में विश्वासों का समूह है। यह जो आप कर रहे हैं उसके प्रति व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के भाव, अपने जीवन पर नियंत्रण के भाव और चुनौती के भाव के रूप में दिखता है। तनाव-प्रतिरोधी व्यक्तित्व वाले लोगों में नियंत्रण यानी जीवन में उद्देश्य और दिशा का भाव रहता है; कार्य, परिवार, शौक़ और सामाजिक जीवन के प्रति प्रतिबद्धता रहती है; और चुनौती का भाव रहता है यानी जीवन के बदलाव को ख़तरा नहीं बल्कि सामान्य और सकारात्मक मानने की दृष्टि।

NCERT यह भी जोड़ती है कि ये विशेषताएँ सब में नहीं होतीं, और बहुत-से लोगों को तार्किक चिंतन और दृढ़ता जैसे जीवन-कौशल दोबारा सीखने पड़ते हैं ताकि वे रोज़मर्रा की माँगों का बेहतर सामना कर सकें। यानी हार्डीनेस को स्थायी जन्मजात गुण मानने की बजाय सीखे जा सकने वाले दृष्टिकोण की तरह समझना NCERT के अनुरूप है।

हार्डीनेस की तीन C

तत्वअर्थ (NCERT)कार्यस्थल का उदाहरण (विश्लेषण)
प्रतिबद्धता (commitment)कार्य, परिवार, शौक़ और सामाजिक जीवन के प्रति जुड़ाव का भावअधिकारी का अपने क्षेत्र की समस्याओं और टीम के प्रति जुड़ाव, बोझ के दिनों में भी
नियंत्रण (control)जीवन में उद्देश्य और दिशा का भाव; अपने जीवन पर नियंत्रण का भाव'मैं हालात पर असर डाल सकता हूँ' का भाव; योजना बनाकर आगे बढ़ना
चुनौती (challenge)जीवन के बदलाव को सामान्य और सकारात्मक मानना, ख़तरा नहींनई डिजिटल प्रणाली को सीखने का अवसर मानना

NCERT कक्षा 12, अध्याय 3 के अनुसार; अंतिम स्तंभ विश्लेषण है।

Kobasa का मूल अध्ययन और उसकी बनावट

मूल शोध-लेख Kobasa (1979), 'Stressful life events, personality, and health: an inquiry into hardiness', Journal of Personality and Social Psychology 37(1):1-11 है। इसमें व्यक्तित्व को ऐसे कारक के रूप में देखा गया जो तनावपूर्ण जीवन-घटनाओं का बीमारी पर प्रभाव बदल सकता है। मध्य और उच्च स्तर के कार्यकारियों (executives) के दो समूह लिए गए, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में Holmes और Rahe की 'Schedule of Recent Life Events' के अनुसार तुलनीय रूप से उच्च तनावपूर्ण घटनाएँ झेली थीं। एक समूह (86 लोग) बिना बीमार पड़े ऊँचा तनाव झेल गया, जबकि दूसरे समूह (75 लोग) ने इन घटनाओं के बाद बीमार पड़ने की बात कही।

निष्कर्ष के अनुसार उच्च-तनाव और कम-बीमारी वाले कार्यकारी, उच्च-तनाव और अधिक-बीमारी वाले कार्यकारियों की तुलना में अधिक हार्डी निकले: उनमें स्वयं के प्रति अधिक प्रतिबद्धता, परिवेश के प्रति जोश का दृष्टिकोण, अर्थपूर्णता का भाव और आंतरिक नियंत्रण-स्थान (internal locus of control) था। इस निष्कर्ष की पुष्टि के लिए अध्ययन के आधे प्रतिभागियों पर विश्लेषण चलाया गया और बाक़ी पर उसकी जाँच की गई। Kobasa, Maddi और Kahn (1982) का 'Hardiness and health: a prospective study' (Journal of Personality and Social Psychology 42(1):168-177) इसी विषय पर आगे का अध्ययन है।

NCERT का नियंत्रण वाला अर्थ (उद्देश्य और दिशा का भाव) और मूल लेख का आंतरिक नियंत्रण-स्थान एक ही बात के दो पहलू हैं, पर परीक्षा में NCERT की शब्दावली, यानी प्रतिबद्धता, नियंत्रण और चुनौती, ही सुरक्षित है।

कार्यस्थल पर इसका उपयोग और संगठन की भूमिका

प्रशासनिक संगठनों के लिए हार्डीनेस की समझ का उपयोग व्यक्ति को परखने में नहीं, परिस्थितियाँ बनाने में है। प्रतिबद्धता तब पनपती है जब कर्मचारी को अपने काम का अर्थ दिखे, जैसे राशन-वितरण या पंचायत-योजना में उसकी भूमिका का सीधा परिणाम। नियंत्रण का भाव तब बनता है जब निर्णयों में भागीदारी हो और भूमिका स्पष्ट हो; NIOSH भी निर्णय-भागीदारी की कमी और अस्पष्ट भूमिकाओं को नौकरी के तनाव का कारण गिनता है। चुनौती का भाव तब आता है जब नए कार्य के साथ प्रशिक्षण और सहयोग मिले, ताकि बदलाव ख़तरा न लगे। ये तीनों बातें विश्लेषण हैं और तीन C की सामान्य व्याख्या पर आधारित हैं।

व्यक्तित्व और कार्यस्थल के तनाव को जोड़ने का दूसरा तरीक़ा सामना की शैलियाँ हैं। जो व्यक्ति चुनौती का भाव रखता है, वह प्रायः समस्या-केंद्रित सामना की ओर जाता है, यानी सूचना जुटाना और योजना बनाना। यह संबंध NCERT का सीधा कथन नहीं, बल्कि दोनों विषयों को जोड़कर पढ़ने का विश्लेषण है, इसलिए उत्तर में इसे 'संभावित संबंध' कहकर लिखें। सामना की शैलियों का विस्तार अलग पृष्ठ पर है।

व्यक्तित्व के सवाल में एक और सतर्कता ज़रूरी है। हार्डीनेस और Type A, दोनों ही औसत प्रवृत्तियाँ बताते हैं, किसी विशिष्ट अधिकारी का भाग्य नहीं। एक ही व्यक्ति अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग ढंग से बरतता है, और NCERT की चेतावनी याद रखनी चाहिए कि प्रकार-आधारित वर्गीकरण सरल होते हैं।

Type A और Type B व्यक्तित्व (Friedman और Rosenman)

सरल भाषा में: सड़क-जाम में फँसा एक व्यक्ति बार-बार हॉर्न बजाता है, घड़ी देखता है और लाइन में खड़े-खड़े भी फ़ोन पर काम निपटाता है; दूसरा किताब खोलकर इंतज़ार कर लेता है। पहली तस्वीर Type A जैसी है, दूसरी Type B जैसी।

परिभाषा (5 अंक के लिए): NCERT के अनुसार Friedman और Rosenman ने मनोसामाजिक जोखिम-कारकों की खोज करते हुए व्यक्तियों को Type A और Type B में बाँटा। Type A वाले लोगों में ऊँची अभिप्रेरणा, धैर्य की कमी, समय की कमी का भाव, बहुत जल्दी में होने की प्रवृत्ति और हमेशा काम के बोझ तले होने का भाव दिखता है; उन्हें धीमा पड़ना और विश्राम करना कठिन लगता है। NCERT के अनुसार Type A वाले लोग उच्च रक्तचाप और हृदय-धमनी रोग (CHD) जैसी समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील पाए गए हैं, और CHD का जोखिम कभी-कभी उच्च रक्तचाप, ऊँचे कोलेस्ट्रॉल या धूम्रपान के जोखिम से भी अधिक बताया गया है। Type B इसके विपरीत है और NCERT के शब्दों में इसे Type A लक्षणों का अभाव समझा जा सकता है।

मूल शोध की रेखा: Friedman और Rosenman (1959) का लेख 'Association of specific overt behavior pattern with blood and cardiovascular findings; blood cholesterol level, blood clotting time, incidence of arcus senilis, and clinical coronary artery disease' JAMA 169(12):1286-1296 में छपा। उसके बाद पश्चिमी सहयोगी समूह अध्ययन (Western Collaborative Group Study) की रिपोर्ट Rosenman और सहयोगियों (1975) ने JAMA 233(8):872-877 में दी। उस रिपोर्ट के सार के अनुसार 39 से 59 वर्ष के नियोजित पुरुषों में औसतन साढ़े आठ वर्ष के अनुवर्तन में 257 लोगों को नैदानिक CHD हुई, और Type A व्यवहार-प्रतिरूप का CHD की घटनाओं से सशक्त संबंध मिला, जिसे किसी एक जोखिम-कारक या उनके किसी मेल से नहीं समझाया जा सका।

यह शब्द-चयन महत्त्वपूर्ण है: ये संघ (association) हैं, निदान नहीं। किसी व्यक्ति को 'Type A' कहकर उसके स्वास्थ्य के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। परीक्षा में इसे व्यवहार-प्रतिरूप और जोखिम-संबंध की भाषा में लिखें।

Type A बनाम Type B

Type A

मूल विचारमनोसामाजिक जोखिम-कारक की खोज में पहचाना गया व्यवहार-प्रतिरूप

लक्षण (NCERT)ऊँची अभिप्रेरणा, धैर्य की कमी, समय की कमी का भाव, जल्दबाज़ी, हमेशा काम के बोझ का भाव; धीमा पड़ना कठिन

तनाव से संबंधNCERT के अनुसार उच्च रक्तचाप और CHD के प्रति अधिक संवेदनशील पाए गए

मुख्य शोध-स्रोतFriedman और Rosenman (1959); WCGS रिपोर्ट, Rosenman और अन्य (1975)

सावधानीप्रकार-आधारित वर्गीकरण सरल है; कोई व्यक्ति सुथरे ढंग से इनमें नहीं बैठता (NCERT)

Type B

मूल विचारType A लक्षणों का अभाव (NCERT)

लक्षण (NCERT)जल्दबाज़ी और समय के दबाव वाले लक्षणों का अभाव

तनाव से संबंधइन जोखिमों के प्रति कम संवेदनशीलता (NCERT का विलोम-कथन)

मुख्य शोध-स्रोतType A के सापेक्ष समझा गया

सावधानीवही

NCERT कक्षा 12, अध्याय 2 के अनुसार; शोध-स्रोत Friedman और Rosenman (1959) और Rosenman आदि (1975)।

सीमाएँ और आधुनिक शोध की दिशा

NCERT की सावधानी: व्यक्तित्व-प्रकार प्रायः आकर्षक होते हैं पर बहुत सरल हैं। मानव-व्यवहार जटिल और बदलता रहता है, इसलिए किसी को एक प्रकार में रखना कठिन है। इसी कारण Type A और Type B को पूर्ण वर्ग नहीं, बल्कि व्यवहार के दो छोर समझना बेहतर है।

आगे के शोध में क्रोध और शत्रुता (hostility) पर अलग से ध्यान गया है। Chida और Steptoe (2009) ने 'The association of anger and hostility with future coronary heart disease: a meta-analytic review of prospective evidence' (Journal of the American College of Cardiology 53(11):936-946) में पूर्व-संभावित अध्ययनों को जोड़कर पाया कि क्रोध और शत्रुता प्रारंभ में स्वस्थ आबादी में CHD की घटनाओं के बढ़े जोखिम से जुड़े थे (संयुक्त हैज़र्ड अनुपात 1.19), और पहले से CHD वाले समूहों में बदतर पूर्वानुमान से (1.24)। समीक्षकों ने प्रकाशन-पूर्वाग्रह के संकेत भी दर्ज किए, और स्वस्थ आबादी में असर पुरुषों में अधिक था।

इस आख़िरी तथ्य को परीक्षा के लिए इतना सरल बनाएँ: बाद के बड़े समीक्षा-अध्ययन ने Type A के पूरे ढाँचे की बजाय क्रोध और शत्रुता के पक्ष को अलग से जाँचा और उसे जोखिम से जुड़ा पाया, पर यह निष्कर्ष भी संघ का है, कारण-परिणाम का प्रमाण नहीं। यहाँ स्वास्थ्य-सलाह देना उद्देश्य नहीं है।

तनाव-प्रतिरोधी (हार्डी) और Type A: प्रशासनिक तुलना

हार्डी व्यक्तित्व

मूल दृष्टिकोणतनाव को चुनौती और नियंत्रण-योग्य मानना

तनाव के बीच कामप्रतिबद्धता के साथ टिके रहना

टीम पर असर (विश्लेषण)भरोसा और स्थिरता बनाने की संभावना

संबंधित शोधKobasa (1979); Kobasa, Maddi और Kahn (1982)

क्या सीखा जा सकता है (NCERT)जीवन-कौशल दोबारा सीखकर बेहतर सामना संभव

Type A व्यवहार-प्रतिरूप

मूल दृष्टिकोणसमय को शत्रु और हर देरी को बाधा मानना

तनाव के बीच कामजल्दबाज़ी और अधीरता; रुकना कठिन

टीम पर असर (विश्लेषण)अधीर नेतृत्व से टीम पर दबाव की संभावना

संबंधित शोधFriedman और Rosenman (1959); Rosenman आदि (1975)

क्या सीखा जा सकता है (NCERT)NCERT इस पर अलग से कथन नहीं देती

अंतिम पंक्तियाँ और टीम-संबंधी पंक्ति विश्लेषण हैं।

व्यक्तित्व और तनाव: दो पहलू

व्यक्तित्व और तनाव

तनाव-प्रतिरोधी (हार्डीनेस)

  • Kobasa (1979)
  • प्रतिबद्धता
  • नियंत्रण
  • चुनौती

Type A

  • Friedman और Rosenman
  • जल्दबाज़ी, समय की कमी
  • NCERT: उच्च रक्तचाप और CHD के प्रति संवेदनशील

Type B

  • Type A लक्षणों का अभाव

सावधानी

  • प्रकार-आधारित वर्गीकरण सरल
  • संघ है, निदान नहीं

हार्डीनेस के अध्ययन का तर्क

  1. समान उच्च तनाव

    दोनों समूहों में तनावपूर्ण घटनाएँ तुलनीय

  2. अलग परिणाम

    एक समूह स्वस्थ रहा, दूसरे में बीमारी की बात कही गई

  3. व्यक्तित्व की तुलना

    प्रतिबद्धता, जोश, अर्थपूर्णता, आंतरिक नियंत्रण-स्थान

  4. निष्कर्ष

    हार्डीनेस तनाव के असर को बदलने वाला कारक

Kobasa (1979) के सार के आधार पर।

मुख्य तथ्य

हार्डीनेस (NCERT)
तनाव-प्रतिरोधी व्यक्तित्व; तीन C: प्रतिबद्धता, नियंत्रण, चुनौती (कक्षा 12, अध्याय 3)
Kobasa (1979)
JPSP 37(1):1-11; 86 बनाम 75 कार्यकारी; हार्डीनेस की तुलना
Kobasa, Maddi और Kahn (1982)
Hardiness and health: a prospective study, JPSP 42(1):168-177
Type A और Type B (NCERT)
Friedman और Rosenman; Type A: जल्दबाज़ी, धैर्य की कमी; Type B: Type A का अभाव (कक्षा 12, अध्याय 2)
Friedman और Rosenman (1959)
JAMA 169(12):1286-1296
WCGS रिपोर्ट (1975)
JAMA 233(8):872-877; 257 CHD-घटनाएँ, औसत अनुवर्तन साढ़े आठ वर्ष, 39-59 वर्ष के नियोजित पुरुष
क्रोध और शत्रुता का मेटा-विश्लेषण
Chida और Steptoe (2009), JACC 53(11):936-946; संयुक्त हैज़र्ड अनुपात 1.19 और 1.24
अंतिम जाँच
2 अक्तूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • तनाव-प्रतिरोधी व्यक्तित्व को 'तनाव न होने वाला' व्यक्ति लिख देना। NCERT के अनुसार वे ऊँचे तनाव में भी कम बीमार पड़ने वाले लोग हैं।
  • तीन C में 'नियंत्रण' की जगह 'आत्मविश्वास' या 'चुनौती' की जगह 'संघर्ष' लिख देना। शब्द वही रखें: प्रतिबद्धता, नियंत्रण, चुनौती।
  • Type B को 'आलसी' या 'अकर्मण्य' कह देना। NCERT के अनुसार वह Type A लक्षणों का अभाव है।
  • Type A को रोग की तरह लिखना। यह व्यवहार-प्रतिरूप है, जिसका संबंध जोखिम से देखा गया; निदान नहीं।
  • Friedman और Rosenman को हार्डीनेस से जोड़ देना। हार्डीनेस Kobasa की अवधारणा है।