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पेपर III · इकाई III · भाग क (व्यवहार)

कार्यस्थल पर बर्नआउट: WHO की परिभाषा, तीन आयाम, छह कार्य-क्षेत्र और संगठन की भूमिका

WHO/ICD-11 की परिभाषा, तीन आयाम, छह कार्य-क्षेत्र का मॉडल, जुड़ाव और तनाव से अंतर; कार्य-उदाहरण, केस स्टडी और उत्तर-ढाँचा।

  • बर्नआउट
  • WHO
  • तीन आयाम
  • छह क्षेत्र
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग क (व्यवहार): "Burnout, stress and coping at workplace: occupational stress; sources and coping styles; personality and stress; gender issues at workplace." इस पृष्ठ पर बर्नआउट है, यानी कार्यस्थल से जुड़ी लंबे समय की थकान और विरक्ति की अवधारणा। तनाव के स्रोत, सामना करने की शैलियाँ और व्यक्तित्व अलग पृष्ठों पर हैं। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है; किसी व्यक्ति की स्थिति पहचानने, जाँचने या उपचार के लिए नहीं है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013, 2016, 2018, 2021, 2023 और 2024 के पेपरों में बर्नआउट पर सीधा प्रश्न नहीं आया है; पर सिलेबस की इस पंक्ति में यह पहला नाम है, और इसी पंक्ति के तनाव वाले विषयों पर 2016 से 2024 के कई पेपरों में प्रश्न आए हैं। इसलिए 2 अंक की परिभाषा और 5 अंक की व्याख्या के लिए तैयार रहें।
  • सबसे उपयोगी चीज़ें: WHO की परिभाषा (ICD-11, 2019), तीन आयाम, छह कार्य-क्षेत्र वाला मॉडल और बर्नआउट बनाम तनाव का अंतर।
  • ध्यान रखें कि WHO इसे 'व्यावसायिक परिघटना' (occupational phenomenon) कहता है, चिकित्सा-स्थिति नहीं। यह अंतर उत्तर में लिख देने से उत्तर सटीक बनता है।

पहले सरल भाषा में

दीये में बाती और तेल दोनों चाहिए। अगर बाती हर रात जलती रहे और तेल कभी न भरा जाए, तो एक दिन लौ बुझने लगती है; दीया टूटा नहीं होता, पर उसमें जलने का सामान नहीं बचता। कार्यस्थल का बर्नआउट कुछ ऐसा ही है। कोई कर्मचारी वर्षों तक भारी कार्यभार, कम नियंत्रण, कम मान्यता और टकराते मूल्यों के बीच काम करता रहे, और उसे भरने का मौक़ा न मिले, तो ऊर्जा चुक जाती है, काम से मन हटने लगता है और अपना काम बेअसर लगने लगता है।

तीन बातें बर्नआउट को साधारण थकान से अलग करती हैं। यह लंबे समय तक चलने वाले कार्यस्थल के दबाव से बनता है; इसमें केवल थकान नहीं, काम से दूरी और अपनी कारगरता पर शंका भी जुड़ती है; और इसका संबंध ख़ास तौर पर काम की दुनिया से है।

परिभाषा: WHO और ICD-11

परिभाषा (उत्तर में लिखने योग्य): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार बर्नआउट (burn-out) एक संलक्षण (syndrome) है, जो उस लंबे कार्यस्थल-तनाव से उपजता है जिसका सफलतापूर्वक प्रबंधन नहीं हुआ। इसके तीन आयाम हैं: ऊर्जा के चुक जाने या थकावट की अनुभूति; काम से बढ़ती मानसिक दूरी, या काम के प्रति नकारात्मकता और निंदा-भाव (cynicism); और घटी हुई व्यावसायिक कारगरता (reduced professional efficacy)। WHO यह भी कहता है कि बर्नआउट शब्द केवल व्यावसायिक संदर्भ की परिघटनाओं के लिए है और जीवन के अन्य क्षेत्रों के अनुभवों के लिए नहीं लगाया जाना चाहिए।

WHO के 28 मई 2019 के वक्तव्य के अनुसार बर्नआउट को रोगों के अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण की 11वीं संशोधित सूची (ICD-11) में 'व्यावसायिक परिघटना' के रूप में शामिल किया गया है, और इसे चिकित्सा-स्थिति के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। इसे उस अध्याय में रखा गया है जिसका नाम 'स्वास्थ्य-स्थिति को प्रभावित करने वाले कारक या स्वास्थ्य-सेवाओं से संपर्क' है, और जिसमें ऐसे कारण आते हैं जिनके लिए लोग स्वास्थ्य-सेवाओं के पास जाते हैं पर जो रोग या स्वास्थ्य-स्थिति नहीं गिने जाते। वक्तव्य यह भी कहता है कि ICD-10 में बर्नआउट इसी श्रेणी में था, पर ICD-11 में परिभाषा अधिक विस्तृत है।

इसलिए एक सावधान वाक्य परीक्षा में काम आता है: बर्नआउट का अर्थ कार्यस्थल-संदर्भ का संलक्षण है, यह कोई निदान नहीं है, और किसी व्यक्ति में इसकी पहचान का मामला योग्य पेशेवर का है, परीक्षा के उत्तर का नहीं।

बर्नआउट के तीन आयाम

आयाम (WHO का शब्द)क्या दिखता है (Maslach और Leiter, 2016 की भाषा में)पुराना नाम
ऊर्जा का चुक जाना या थकावट (exhaustion)पस्ती, ऊर्जा की कमी, खोखलापन, कमज़ोरी और थकान का भावथकावट (वही)
काम से मानसिक दूरी, नकारात्मकता या निंदा-भाव (cynicism)काम और लोगों के प्रति नकारात्मक या अनुचित रवैया, चिड़चिड़ापन, आदर्शवाद का क्षरण, पीछे हटनावैयक्तिकता का लोप (depersonalization)
घटी हुई व्यावसायिक कारगरता (professional inefficacy)घटी उत्पादकता या क्षमता का भाव, मनोबल की कमी, सामना न कर पाने का एहसासकम निजी उपलब्धि (reduced personal accomplishment)

पहला स्तंभ WHO की ICD-11 परिभाषा से; शेष दो स्तंभ Maslach और Leiter (2016) से। मूल रूप में तीसरे आयाम का नाम 'कम निजी उपलब्धि' था और दूसरे का 'वैयक्तिकता का लोप'।

पाठ्यपुस्तक की परिभाषा बनाम WHO की परिभाषा

NCERT की कक्षा 12 की मनोविज्ञान की पुस्तक में बर्नआउट का ज़िक्र तनाव के स्वास्थ्य पर प्रभाव के प्रसंग में है। उसके अनुसार जब तनाव लंबे समय चलता है तो शारीरिक थकावट (दीर्घकालीन थकान, कमज़ोरी, कम ऊर्जा) और मानसिक थकावट (चिड़चिड़ापन, चिंता, असहायता और निराशा का भाव) दिखती है, और शारीरिक, भावनात्मक तथा मनोवैज्ञानिक थकावट की इस अवस्था को बर्नआउट कहा जाता है। यानी पाठ्यपुस्तक की परिभाषा थकावट पर केंद्रित और तनाव के बड़े संदर्भ में है।

WHO की परिभाषा अधिक सटीक है: यह साफ़ तौर पर कार्यस्थल-तनाव से जुड़ी है और तीन आयाम गिनाती है। परीक्षा में दोनों को जोड़ना सबसे अच्छा है: पहली पंक्ति में WHO की परिभाषा, और आगे NCERT की भाषा में थकावट का वर्णन।

दो परिभाषाओं की तुलना

NCERT (कक्षा 12, अध्याय 3)

केंद्रशारीरिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक थकावट की अवस्था

संदर्भदीर्घकालीन तनाव, सामान्य रूप में

स्थितितनाव के स्वास्थ्य-प्रभावों के प्रसंग में

उपयोगअवधारणा समझाने के लिए

WHO (ICD-11, 2019)

केंद्रकार्यस्थल-तनाव से उपजा संलक्षण, तीन आयाम

संदर्भकेवल व्यावसायिक संदर्भ

स्थितिव्यावसायिक परिघटना; चिकित्सा-स्थिति नहीं

उपयोगपरिभाषा और वर्गीकरण के लिए

शब्द की शुरुआत और मूल परिभाषा

बर्नआउट शब्द का चलन 1970 के दशक के मध्य में शुरू हुआ। Maslach और Jackson (1984) के अनुसार इसकी पहली चर्चाएँ Freudenberger (1974, 1975) और Maslach (1976) के प्रकाशनों में आईं, और 1977 में अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) के सम्मेलन में इस पर पहली संगोष्ठी हुई, जिसमें Freudenberger, Pines, Maslach और अन्य ने अपने विचार और शोध रखे। Freudenberger का लेख 'Staff Burn-Out' Journal of Social Issues के खंड 30, अंक 1 (1974) में पृष्ठ 159 से 165 पर छपा।

Maslach और Jackson ने अपने शोध से शुरुआती परिभाषा इस प्रकार बनाई: बर्नआउट भावनात्मक थकावट (emotional exhaustion), वैयक्तिकता का लोप (depersonalization) और घटी निजी उपलब्धि (reduced personal accomplishment) का संलक्षण है, जो किसी न किसी रूप में लोगों के साथ काम करने वालों में हो सकता है। भावनात्मक थकावट यानी लोगों के संपर्क से भावनात्मक रूप से अतिभारित और निचुड़ जाने का भाव; वैयक्तिकता का लोप यानी सेवा या देखभाल पाने वालों के प्रति संवेदनहीन और रूखा रवैया; घटी निजी उपलब्धि यानी लोगों के साथ काम में अपनी योग्यता और सफलता की भावना का घटना। उनके अनुसार यह परिभाषा किसी सैद्धांतिक मॉडल से नहीं, कई वर्षों के खोजपरक शोध से अनुभवजन्य रूप में निकली, और तीसरा आयाम बाक़ी दो से स्वतंत्र पाया गया। मास्लाक बर्नआउट इन्वेंटरी (MBI) के तीन उप-पैमाने (subscales) इन्हीं तीन आयामों के अनुरूप हैं और कारक-विश्लेषण (factor analysis) से निकाले गए।

अवधारणा कैसे बनी और मापी गई

बर्नआउट का अध्ययन मूलतः उन व्यवसायों में शुरू हुआ जहाँ लोगों की सेवा का काम तीव्र और भावनात्मक संपर्क माँगता है: मानव-सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य-सेवा। Maslach और Leiter (2016) के अनुसार ऐसे पेशों में 'निःस्वार्थ रहो, लंबे घंटे काम करो, सब कुछ झोंक दो' जैसे मानदंड चलते हैं, और संसाधन कटौती जैसे सामाजिक-राजनीतिक कारक काम की जगह को माँग-प्रधान और संसाधन-विहीन बना देते हैं। बाद में 'ग्राहक-सेवा' जैसे दूसरे पेशों में भी यह प्रासंगिक हो गया।

माप के क्षेत्र में पहला व्यापक मनोमितीय (psychometric) शोध पर आधारित उपकरण मास्लाक बर्नआउट इन्वेंटरी (MBI) है, जिसे तीनों आयामों को परखने के लिए बनाया गया और जिसे इस क्षेत्र का मानक उपकरण माना जाता है। इसके विकास से जुड़ा मूल लेख Maslach और Jackson (1981) का है, जो Journal of Organizational Behavior (खंड 2, अंक 2, पृष्ठ 99-113) में छपा। बाद में हर पेशे के लिए सामान्य सर्वेक्षण-रूप (MBI-GS) बना, जिसमें 'वैयक्तिकता का लोप' आयाम चौड़ा होकर 'निंदा-भाव' (cynicism) कहलाया और 'निजी उपलब्धि' आयाम 'व्यावसायिक कारगरता' कहलाया। कुछ अन्य उपकरण केवल थकावट आयाम को मापते हैं, और इसी से अवधारणा पर मतभेद भी जुड़ा है, यानी बर्नआउट को केवल थकावट मानें या तीन आयामों वाला।

Maslach, Schaufeli और Leiter (2001) का वार्षिक समीक्षा-लेख 'Job Burnout' इस क्षेत्र का मानक संदर्भ है। उसका सार है कि बर्नआउट कार्यस्थल के लंबे भावनात्मक और पारस्परिक तनावों की लंबी प्रतिक्रिया है, जिसे थकावट, निंदा-भाव और कारगरता की कमी के तीन आयामों से परिभाषित किया जाता है, और यह व्यक्ति के तनाव-अनुभव को संगठन के बड़े संदर्भ में रखता है।

कारण: छह कार्य-क्षेत्रों का मॉडल

Maslach और Leiter (2016) बर्नआउट के कारणों को समझाने के लिए 'एरियाज़ ऑफ़ वर्कलाइफ़' (Areas of Worklife) मॉडल बताते हैं। इसमें व्यक्ति और कार्य के बीच छह क्षेत्रों में असंगति (mismatch) देखी जाती है: कार्यभार (workload), नियंत्रण (control), पुरस्कार (reward), समुदाय (community), निष्पक्षता (fairness) और मूल्य (values)। असंगति जितनी बड़ी, बर्नआउट की संभावना उतनी अधिक; मेल जितना अधिक, जुड़ाव की संभावना उतनी अधिक।

कार्यभार: अत्यधिक काम लंबे समय तक रहे और आराम तथा संतुलन वापस पाने का मौक़ा न मिले, तो काम की माँग पूरी करने की क्षमता घिसती जाती है; टिकाऊ और प्रबंध-योग्य कार्यभार नए कौशल बनाने के मौक़े भी देता है। नियंत्रण: नियंत्रण की कमी और बर्नआउट के बीच स्पष्ट संबंध पाया गया है; जब कर्मचारी निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं और पेशेवर स्वायत्तता तथा ज़रूरी संसाधन उन्हें मिलते हैं तो जुड़ाव की संभावना बढ़ती है। पुरस्कार: मान्यता और इनाम (वित्तीय, संस्थागत या सामाजिक) की कमी काम और कर्मचारी दोनों का अवमूल्यन करती है और अप्रभावकारिता के भाव से जुड़ी है।

समुदाय: सहकर्मियों से रिश्ते में भरोसे और सहयोग की कमी या अनसुलझे टकराव से जोखिम बढ़ता है। निष्पक्षता: निर्णय कितने न्यायसंगत और समतामूलक माने जाते हैं; प्रक्रिया की गुणवत्ता और निर्णय-प्रक्रिया में अपने साथ हुए व्यवहार को लोग समुदाय में अपनी जगह का सूचक मानते हैं, और अनादर महसूस होने पर निंदा-भाव, क्रोध और शत्रुता पनपती है। मूल्य: वे आदर्श और प्रेरणाएँ जिनके कारण व्यक्ति इस काम की ओर आया था; जब व्यक्ति के और संगठन के मूल्यों में खाई हो, तो 'जो करना चाहता हूँ' और 'जो करना पड़ता है' के बीच समझौता बर्नआउट बढ़ाता है।

छह क्षेत्र: असंगति कहाँ और कैसे दिखती है

क्षेत्रजब मेल होजब असंगति हो
कार्यभारटिकाऊ, प्रबंध-योग्य काम; कौशल निखरने का मौक़ालगातार अत्यधिक काम; उबरने का समय नहीं
नियंत्रणनिर्णयों को प्रभावित करने की क्षमता, स्वायत्तता, संसाधननियंत्रण की कमी; संसाधनों तक पहुँच नहीं
पुरस्कारवित्तीय, संस्थागत और सामाजिक मान्यता तथा आंतरिक संतोषमान्यता का अभाव; अप्रभावकारिता का भाव
समुदायसहयोग, भरोसा, टकराव सुलझाने के रास्तेसमर्थन और भरोसे की कमी; अनसुलझे टकराव
निष्पक्षतानिर्णय न्यायसंगत और सम्मानजनक माने जाते हैंअनादर का एहसास; निंदा-भाव और क्रोध
मूल्यव्यक्ति और संगठन के मूल्य मिलते हैं'क्या चाहता हूँ' और 'क्या करना पड़ता है' में खाई

सामग्री Maslach और Leiter (2016) से, सरल भाषा में।

अन्य मॉडल और एक निर्णायक बात

Maslach और Leiter (2016) बर्नआउट के कई अन्य मॉडल भी गिनाते हैं। शुरुआती मॉडल तीन आयामों को क्रम में देखता था: पहले थकावट, फिर निंदा-भाव, फिर कारगरता की कमी। बाद में तनाव-सिद्धांतों पर आधारित असंतुलन-मॉडल आए: लेन-देन वाला मॉडल (job stressors, individual strain, defensive coping), 'कार्य-माँग और संसाधन' (JD-R) मॉडल और 'संसाधन-संरक्षण' (COR) मॉडल। उनके अनुसार JD-R और COR, दोनों के पक्ष में शोध-पुष्टि मिली है। मॉडल के नाम 2 अंक के प्रश्न में काम आ सकते हैं; 5 अंक में एरियाज़ ऑफ़ वर्कलाइफ़ पर्याप्त है।

निर्णायक बात यह है कि अधिकतर शोध-आँकड़े सह-संबंध (correlational) वाले हैं, इसलिए 'कारण' शब्द सावधानी से लिखें। उसी स्रोत के अनुसार हाल में लंबी अवधि वाले (longitudinal) अध्ययन बढ़े हैं, पर कारण-परिणाम की पक्की पुष्टि के लिए अधिक सटीक अध्ययन-डिज़ाइन चाहिए।

परिणाम और जुड़ाव (engagement)

Maslach और Leiter (2016) के अनुसार बर्नआउट अक्सर नकारात्मक प्रतिक्रियाओं और काम से पलायन से जुड़ा पाया जाता है: काम से असंतोष, संगठन के प्रति कम प्रतिबद्धता, अनुपस्थिति, नौकरी छोड़ने का इरादा और वास्तविक पलायन। जो लोग टिके रहते हैं, उनकी उत्पादकता और काम की गुणवत्ता घट सकती है। बर्नआउट वाले व्यक्ति सहकर्मियों पर भी असर डालते हैं, इसलिए बर्नआउट को 'संक्रामक' भी कहा गया है, यानी वह कार्यस्थल के आपसी व्यवहार से फैल सकता है।

बर्नआउट का सकारात्मक विलोम 'जुड़ाव' (engagement) माना जाता है, यानी काम में उत्साह और संतुष्टि। इसकी परिभाषा पर दो दृष्टिकोण हैं। एक में जुड़ाव बर्नआउट के उन्हीं तीन आयामों का सकारात्मक सिरा है: उच्च ऊर्जा और गहरी संलग्नता। दूसरे में जुड़ाव स्वतंत्र धारणा है, जो ऊर्जा (vigor), समर्पण (dedication) और तल्लीनता (absorption) से बनी है और बर्नआउट से नकारात्मक रूप से जुड़ी है पर उसका उलटा नहीं। इसी कारण सिलेबस का 'कार्य में फलना-फूलना' भाग बर्नआउट के साथ पढ़ना सार्थक है।

तनाव और बर्नआउट: क्या फ़र्क़ है

तनाव एक व्यापक प्रक्रिया है, जो किसी भी माँग के सामने उठ सकती है और कभी-कभी उपयोगी भी होती है (NCERT का 'यूस्ट्रेस')। बर्नआउट तनाव का वह रूप है जो लंबे समय तक चले, जिसका प्रबंध न हो पाए और जो कार्यस्थल से जुड़ा हो। WHO की भाषा में बर्नआउट 'लंबे कार्यस्थल-तनाव' का परिणाम है, और Maslach और Leiter की भाषा में 'कार्यस्थल के लंबे पारस्परिक तनावों की लंबी प्रतिक्रिया'।

इसलिए हर तनाव बर्नआउट नहीं है, और बर्नआउट केवल थकान नहीं है। उत्तर में यह अंतर लिख दें, और जोड़ें कि थकावट इसका एक आयाम भर है, बाक़ी दो आयाम (निंदा-भाव और कारगरता की कमी) उसे अलग पहचान देते हैं।

रोकथाम: संगठन के स्तर पर दिशा

WHO का 'कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य' तथ्य-पत्र मानसिक स्वास्थ्य को ख़तरे में डालने वाले मनो-सामाजिक जोखिमों की सूची देता है: कौशल का कम उपयोग या कौशल से कम योग्य होना, अत्यधिक कार्यभार या गति और कर्मचारियों की कमी, लंबे, असामाजिक या अलचीले घंटे, काम के डिज़ाइन या कार्यभार पर नियंत्रण का अभाव, असुरक्षित या ख़राब भौतिक परिस्थितियाँ, नकारात्मक व्यवहार को प्रश्रय देने वाली संस्कृति, सहकर्मियों से सीमित समर्थन या तानाशाही पर्यवेक्षण, हिंसा, उत्पीड़न या धौंस, भेदभाव और बहिष्करण, अस्पष्ट भूमिका, कम या अधिक पदोन्नति, नौकरी की असुरक्षा और अपर्याप्त वेतन या करियर-विकास में कम निवेश, और घर तथा काम की टकराती माँगें।

इन जोखिमों को घटाने के लिए WHO नियोक्ताओं को संगठनात्मक हस्तक्षेपों की सलाह देता है, जो काम की परिस्थितियों और वातावरण को सीधे लक्ष्य बनाते हैं, जैसे लचीली कार्य-व्यवस्था और हिंसा तथा उत्पीड़न से निपटने के ढाँचे। साथ ही प्रबंधकों का मानसिक स्वास्थ्य-प्रशिक्षण, कर्मचारियों की जागरूकता का प्रशिक्षण और व्यक्तियों के लिए तनाव-प्रबंधन के कौशल वाले हस्तक्षेपों की भी सिफ़ारिश है। Maslach और Leiter (2016) भी कहते हैं कि कार्यभार घटाने वाली पहलें थकावट को और समुदाय तथा मूल्य-मेल वाली पहलें निंदा-भाव को सीधे छूती हैं; उनके एक उदाहरण में कार्यस्थल पर शिष्टता बढ़ने के साथ निंदा-भाव घटा।

ये सुझाव नीति और संगठन के स्तर के हैं। इनसे यह समझ बनती है कि बर्नआउट केवल व्यक्ति की कमज़ोरी नहीं है, कार्य-वातावरण की डिज़ाइन भी इसमें भूमिका निभाती है। किसी व्यक्ति के लिए उपचार का मार्गदर्शन इस पृष्ठ का विषय नहीं है।

बर्नआउट कैसे बनता है और कहाँ रुकता है

  1. असंगति

    कार्यभार, नियंत्रण, पुरस्कार, समुदाय, निष्पक्षता, मूल्य में

  2. लंबा, अप्रबंधित कार्यस्थल-तनाव

    WHO की भाषा में: ऐसा तनाव जिसका सफल प्रबंधन नहीं हुआ

  3. तीन आयाम

    थकावट, निंदा-भाव, कारगरता की कमी

  4. परिणाम

    असंतोष, अनुपस्थिति, पलायन, गुणवत्ता में कमी

  5. संगठनात्मक उपाय

    कार्यभार, भागीदारी, मान्यता, मूल्य-मेल, प्रबंधक-प्रशिक्षण

प्रक्रिया का ढाँचा WHO (2019) और Maslach और Leiter (2016) की बातों का संश्लेषण है।

मानचित्र: बर्नआउट

बर्नआउट

परिभाषा (WHO, 2019)

  • कार्यस्थल का लंबा तनाव
  • प्रबंध नहीं हो पाया
  • ICD-11: व्यावसायिक परिघटना

तीन आयाम

  • थकावट
  • निंदा-भाव
  • कारगरता में कमी

छह क्षेत्र

  • कार्यभार
  • नियंत्रण
  • पुरस्कार
  • समुदाय
  • निष्पक्षता
  • मूल्य

जुड़ाव

  • सकारात्मक विलोम
  • ऊर्जा, समर्पण, तल्लीनता

मुख्य तथ्य

WHO का वक्तव्य
28 मई 2019: बर्नआउट ICD-11 में 'व्यावसायिक परिघटना', चिकित्सा-स्थिति नहीं
WHO की परिभाषा
लंबे कार्यस्थल-तनाव से उपजा संलक्षण, जिसका सफल प्रबंधन नहीं हुआ; तीन आयाम
तीन आयाम (ICD-11)
ऊर्जा का चुक जाना; काम से मानसिक दूरी या निंदा-भाव; घटी व्यावसायिक कारगरता
शब्द की शुरुआती चर्चाएँ
Freudenberger (1974, 1975) और Maslach (1976); पहली संगोष्ठी APA सम्मेलन, 1977
Freudenberger का लेख
'Staff Burn-Out', Journal of Social Issues 30(1):159-165, 1974
MBI का मूल लेख
Maslach और Jackson (1981), Journal of Organizational Behavior 2(2):99-113
मानक समीक्षा-लेख
Maslach, Schaufeli और Leiter (2001), Annual Review of Psychology 52:397-422
छह कार्य-क्षेत्र
कार्यभार, नियंत्रण, पुरस्कार, समुदाय, निष्पक्षता, मूल्य (Maslach और Leiter, 2016)
NCERT की समझ
शारीरिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक थकावट की अवस्था को बर्नआउट कहा गया है (पुनर्मुद्रण 2026-27)
WHO की दिशा
संगठनात्मक हस्तक्षेप, प्रबंधक-प्रशिक्षण, कर्मचारी-प्रशिक्षण, व्यक्तिगत हस्तक्षेप (तथ्य-पत्र, पृष्ठ-तिथि 15 सितंबर 2026)
अंतिम जाँच
3 अक्तूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • बर्नआउट को केवल 'बहुत थक जाना' लिख देना। WHO की परिभाषा में तीन आयाम हैं, और थकावट उनमें से एक है।
  • इसे रोग या चिकित्सा-स्थिति बता देना। WHO के अनुसार यह व्यावसायिक परिघटना है, चिकित्सा-स्थिति के रूप में वर्गीकृत नहीं।
  • इसे जीवन के हर क्षेत्र में लगा देना। WHO की परिभाषा केवल व्यावसायिक संदर्भ के लिए है।
  • कारण में केवल व्यक्ति की कमज़ोरी गिनाना। छह कार्य-क्षेत्रों और संगठन की भूमिका को छोड़ देना भी ग़लती है।
  • तनाव और बर्नआउट को एक मान लेना। तनाव व्यापक है; बर्नआउट लंबे, अप्रबंधित कार्यस्थल-तनाव का परिणाम है।