केस 9.7: माप-पुस्तिका की माँग
- काल्पनिक केस
- कठिनाई
- सरल
- पाठ्यक्रम बिंदु
- 3: पारदर्शिता और सूचना का अधिकार
- परखे जाने वाले मूल्य और कानून
- पारदर्शिता, जवाबदेही, कानून का पालन; सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005: धारा 4, धारा 7(1) (30 दिन), धारा 19 (अपील), धारा 20 (दंड); नोलन का सिद्धांत "खुलापन"
उदाहरण (काल्पनिक)माप-पुस्तिका की माँग
राजेंद्र जिला स्तर के एक कार्यालय में जन सूचना अधिकारी हैं। गाँव के एक युवक अरमान ने पिछले वर्ष बनी एक ग्रामीण सड़क की माप-पुस्तिका, बिल और भुगतान का ब्योरा माँगा है। गाँव में चर्चा है कि सड़क पहली बारिश में उखड़ गई। कनिष्ठ अभियंता राजेंद्र से कहता है, "ठेकेदार प्रभावशाली है। लिख दीजिए कि जाँच चल रही है और जानकारी नहीं दी जा सकती। या 'तीसरे पक्ष की जानकारी' कह दीजिए।" आवेदन को 27 दिन हो चुके हैं। राजेंद्र को पता है कि किसी जाँच का कोई आदेश कार्यालय में आया ही नहीं है। फ़ाइल में माप-पुस्तिका उपलब्ध है, पर कुछ प्रविष्टियाँ धुँधली और संदिग्ध लगती हैं। अरमान ने यह भी लिखा है कि उसे जानकारी समय पर चाहिए, क्योंकि अगली ग्राम सभा एक सप्ताह में है। राजेंद्र छह वर्ष से इस कार्यालय में हैं, पर पहले कभी ऐसा आवेदन नहीं आया।
- हितधारक
- आवेदक अरमान और गाँव के लोग (सड़क के उपयोगकर्ता), ठेकेदार, कनिष्ठ अभियंता, राजेंद्र, विभाग, सार्वजनिक धन का करदाता।
- मुद्दा
- पारदर्शिता और कानूनी कर्तव्य बनाम सहकर्मी और ठेकेदार का दबाव तथा विभाग की छवि का डर।
- विकल्प
- क. "जाँच चल रही है" लिखकर मना कर देना (झंझट से राहत; पर झूठा आधार, दंड और अपील का जोखिम, गाँव का अविश्वास)। ख. बिना पढ़े और बिना तीसरे पक्ष की प्रक्रिया के सारी फ़ाइल दे देना (खुलापन; पर कानून में जहाँ तीसरे पक्ष की प्रक्रिया है उसे छोड़ना और बिना जाँचे जल्दबाज़ी)। ग. अधिनियम के भीतर रहकर समय पर जवाब देना: जो सूचना खुली है वह देना, वैध अपवाद हो तो कारण लिखकर बताना और अपील का रास्ता लिखना, और संदिग्ध प्रविष्टियों के बारे में वरिष्ठ को अलग से लिखित सूचना देना (थोड़ा काम बढ़ता है; पर कानून और सच्चाई दोनों बचते हैं)।
- सर्वश्रेष्ठ
- ग। सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 7(1) में सामान्यतः 30 दिन की सीमा है। धारा 19 अपील देती है और धारा 20 में दंड का प्रावधान है। नोलन का "खुलापन" कहता है कि जानकारी रोकने का स्पष्ट और कानूनी कारण होना चाहिए।
सीख
कार्रवाई: अल्प: आज ही जवाब तैयार करना, धुँधली प्रविष्टियों की प्रति सुरक्षित रखना, कनिष्ठ अभियंता को लिखित निर्देश, वरिष्ठ को सूचना कि गुणवत्ता जाँच ज़रूरी लगती है। दीर्घ: धारा 4 के अनुसार सड़क कार्यों का विवरण स्वयं प्रकाशित करना, माप-पुस्तिका का डिजिटल रिकॉर्ड, ठेकेदार भुगतान से पहले सामाजिक अंकेक्षण।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
(10 अंक, 100 शब्द) राजेंद्र को क्या करना चाहिए? पाँच चरणों के कार्ड से हल कीजिए।
आदर्श उत्तर
हितधारक हैं आवेदक अरमान और गाँव, ठेकेदार, कनिष्ठ अभियंता, विभाग और मैं। मुद्दा पारदर्शिता के कानूनी कर्तव्य बनाम सहकर्मी और ठेकेदार के दबाव का है। रास्ते तीन हैं: झूठा आधार लिखकर मना करना, बिना प्रक्रिया सब दे देना, या अधिनियम के भीतर समय पर जवाब देना। पहला दंड और अपील बुलाता है। मैं तीसरा चुनूँगा, क्योंकि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 7(1) समय पर उत्तर माँगती है और जाँच का कोई आदेश है ही नहीं। आज ही खुली सूचना दूँगा, अपील का रास्ता बताऊँगा और संदिग्ध प्रविष्टियों की सूचना वरिष्ठ को लिखूँगा। दीर्घकाल में धारा 4 के अनुसार स्वयं प्रकाशन करूँगा।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
(5 अंक, 50 शब्द) सूचना देने से इनकार के लिए कौन-से कारण वैध हो सकते हैं और कौन-से नहीं? केस के आधार पर बताइए।
आदर्श उत्तर
इनकार तभी वैध जब अधिनियम में कोई वास्तविक अपवाद लागू हो और कारण लिखित हो (जैसे धारा 8 उप-धारा 1 खंड (ज): जाँच में बाधा, पर तभी जब जाँच सचमुच चल रही हो; तीसरे पक्ष की जानकारी पर धारा 11 की प्रक्रिया); "जाँच चल रही है" जैसा बिना आधार का बहाना, या केवल सहकर्मी की नाराज़गी का डर वैध नहीं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
(5 अंक, 50 शब्द) कार्यालय में पारदर्शिता बढ़ाने के दीर्घकालिक उपाय सुझाइए।
आदर्श उत्तर
धारा 4 के अनुसार स्वयं प्रकाशन, डिजिटल रिकॉर्ड, समय-सीमा की निगरानी, सामाजिक अंकेक्षण।